Garuda Purana
201
अध्याय 201 / 317

Book 1 - Adhyaya 202

28 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ28 श्लोक

अध्याय 201

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे गजाश्वायुर्वेदनिरूपणं नामैकाधिकद्विशततमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २०२ हरिरुवाच ।एकं पुनर्नवामूलमपामार्गस्य वा शिव ।सरसं योनिनिः क्षिप्तं वराङ्गस्य व्यथां हरेत् ।प्रसूतिवेदनाञ्चैव तरुणीनां व्यथां हरेत्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe gajāśvāyurvedanirūpaṇaṃ nāmaikādhikadviśatatamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 202 hariruvāca / ekaṃ punarnavāmūlamapāmārgasya vā śiva / sarasaṃ yoniniḥ kṣiptaṃ varāṅgasya vyathāṃ haret / prasūtivedanāñcaiva taruṇīnāṃ vyathāṃ haret

हिन्दी अर्थ

सदाकर्षतु विष्णुश्च किल्बिषं मम विग्रहात् । हंसो मत्स्यस्तथा कूर्मः पातु मां सर्वतो दिशम्॥ त्रिविक्रमस्तु मे देवः सर्वपापानि कृन्ततु । तथा नारायणो देवो बुद्धिं पालयतां मम॥ शेषो मे निर्मलं ज्ञानं करोत्वज्ञाननाशनम् । वडवामुखो नाशयतां कल्मषं यत्कृतं मया॥

English

Those horses whose limbs are not short, whose ears are short and whose hue is of a mixture of many colours lightly shaded live long and are not afflicted.

अध्याय 201

श्लोक 2

भूमि कूष्माण्डमूलं वै शालिचूर्णमथापि वा ।सप्ताहं दुग्धपीतं स्यात्स्त्रीणां बहुपयस्करम्

bhūmi kūṣmāṇḍamūlaṃ vai śālicūrṇamathāpi vā / saptāhaṃ dugdhapītaṃ syātstrīṇāṃ bahupayaskaram

हिन्दी अर्थ

शत्रून् हलेन मे हन्याद्रामो यादवनन्दनः । प्रलम्बकेशिचाणूरपूतनाकंसनाशनः । कृष्णस्य यो बालभावः स मै कामान् प्रयच्छतु ॥ अन्धकारतमोघोरं पुरुषं कृष्णपिङ्गलम् । पश्यामि भयसंत्रस्तः पाशहस्तमिवान्तकम्॥ ततोऽहं पुण्डरीकाक्षमच्युतं शरणं गतः। धन्योऽहं निर्भयो नित्यं यस्य मे भगवान् हरिः॥

English

Zirqpber ofBcinsle.

अध्याय 201

श्लोक 3

रुद्रेन्द्रवारुणीमुलं लेपात्स्त्रीस्तनवेदना ।नश्येत घृतपक्वा च कार्यावश्यन्तु पोलिका

rudrendravāruṇīmulaṃ lepātstrīstanavedanā / naśyeta ghṛtapakvā ca kāryāvaśyantu polikā

हिन्दी अर्थ

ध्यात्वा नारायणं देवं सर्वोपद्रवनाशनम् । वैष्णवं कवचं बद्ध्वा विचरामि महीतले॥ अप्रधृष्योऽस्मि भूतानां सर्वदेवमयो ह्यहम् । स्मरणाद्देवदेवस्य

English

AIQum lativum.

अध्याय 201

श्लोक 4

भक्षिता सा महेशान योनिशूलं विनाशयेत् ।प्रलेपिता कारवेल्लमूलेनैव विनिर्गता

bhakṣitā sā maheśāna yoniśūlaṃ vināśayet / pralepitā kāravellamūlenaiva vinirgatā

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णु विनष्ट करते रहें । हंसावतार, मत्स्यावतार तथा कूर्मावतार धारण करनेवाले विष्णु सभी दिशाओंमें मेरी रक्षा करें। भगवान् त्रिविक्रमदेव मेरे समस्त पापोंको काट डालें । भगवान् नारायणदेव

English

A horse regularly fed on $apka Salt grains and milk will never come to a state of being condemned. A go!den coloured horse or one of the complexion of ripe Jambu fruit is never to be condemned.

अध्याय 201

श्लोक 5

योनिः प्रवेशमायाति नात्र कार्या विचारणा ।नीलीपटोलमूलानि साज्यानि तिलवारिणा

yoniḥ praveśamāyāti nātra kāryā vicāraṇā / nīlīpaṭolamūlāni sājyāni tilavāriṇā

हिन्दी अर्थ

मेरी बुद्धिका विकास करें । शेषनारायण मेरे ज्ञानको निर्मल बनायें तथा अज्ञानका विनाश करें। मैंने जो कुछ भी पाप किया है, उस समस्त पापको भगवान् वडवामुख हयग्रीव विनष्ट करें ।

English

A horse slightly injured should be given Guggulu and fed on milk pudding. It will be immediately relieved and be normal.

अध्याय 201

श्लोक 6

पिष्टान्येषां प्रलेपो वै ज्वालागर्दभरागनत् ।पाठामूलं रुद्र पीतं पिष्टं तण्डुलवारिणा

piṣṭānyeṣāṃ pralepo vai jvālāgardabharāganat / pāṭhāmūlaṃ rudra pītaṃ piṣṭaṃ taṇḍulavāriṇā

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णु मेरे दोनों पैरोंको और सिरको सुख प्रदान करें । भगवान् दत्तात्रेय मुझे पुत्र और बन्धु-बान्धव तथा पशुओंसे सम्पन्न रखें। भगवान् जामदग्न्य--परशुराम अपने परशुसे मेरे सभी

English

In Kaphaja diseases mudga or Kulattha can be given. If the horse is atfected with deafness and deranged kapha it should be fed with pungent and bitter articles of diet. If the ailment is of Trido origin Guggulu is to be administered along with its mouthfuls (of grass, etc).

अध्याय 201

श्लोक 7

पापरोगहरं स्याच्च कुष्ठपानं तथैव च ।वास्योदकञ्च समधु पीतमन्तर्गतस्य वै

pāparogaharaṃ syācca kuṣṭhapānaṃ tathaiva ca / vāsyodakañca samadhu pītamantargatasya vai

हिन्दी अर्थ

शत्रुओंका विनाश करें। राक्षसोंके निहन्ता दशरथसुत आजानुभुज भगवान् श्रीराम मेरी नित्य रक्षा करें । यादवनन्दन बलराम अपने हलसे मेरे शत्रुओंका विनाश करें। प्रलम्ब, केशी, चाणूर, पूतना तथा

English

In the mornings during Autumn and summer horses should be given five Palas of well powdered Guducl with butter.

अध्याय 201

श्लोक 8

पापरोगस्य सन्तापनिवृक्तिं कुरुते शिव ।घृततुल्या रुद्र लाक्षा पीता क्षीरेण वै सह

pāparogasya santāpanivṛktiṃ kurute śiva / ghṛtatulyā rudra lākṣā pītā kṣīreṇa vai saha

हिन्दी अर्थ

कंसका संहार करनेवाला जो बालभाव भगवान् कृष्णका है, वही मेरे समस्त मनोरथोंको पूर्ण करे। हे देव! मैं अन्धकारके समान तमोगुणसे सम्पन्न, हाथमें पाश धारण करनेवाले यमराजके

English

This quells ailment, nourishes, increases strength and splendour. It can be given alone or in combination with some Alkali.

अध्याय 201

श्लोक 9

प्रदरं हरते रोगं नात्र कार्या विचारणा ।द्विजयष्टी त्रिकटुकं चूर्णं पीतं हरेच्छिव

pradaraṃ harate rogaṃ nātra kāryā vicāraṇā / dvijayaṣṭī trikaṭukaṃ cūrṇaṃ pītaṃ harecchiva

हिन्दी अर्थ

सदृश काले-पीले वर्णवाले भयंकर पुरुषको देख रहा हूँ, उसके भयसे मैं संत्रस्त हो गया हूँ। हे पुण्डरीकाक्ष भगवान् अच्युत! मैं आपकी शरणमें

English

Along with the administration of Gudud, four palas (in the case of the middling) and three palas (in the case of lowest type of horse) oftavart and Aivagandha also must be given.

अध्याय 201

श्लोक 10

तिलक्वाथेन संयुक्तं रक्तगुल्मं स्त्रिया हर ।कुसुमस्य निबद्धञ्च तरुणीनां महेश्वर

tilakvāthena saṃyuktaṃ raktagulmaṃ striyā hara / kusumasya nibaddhañca taruṇīnāṃ maheśvara

हिन्दी अर्थ

आया हूँ। आपके इस आश्रयसे मैं धन्य हो उठा हूँ। आपकी शरण ग्रहण करनेसे अब मुझे कोई भय नहीं

English

When suddenly the horses assume uniformity in colour and features or die together it must be immediately con* sidered as an epidemic.

अध्याय 201

श्लोक 11

रक्तोत्पलस्य वै कन्दं-शर्करातिलसंयुतम् ।पीतं सशर्करं स्त्रीणां धारयेद्गर्भपातनम्

raktotpalasya vai kandaṃ-śarkarātilasaṃyutam / pītaṃ saśarkaraṃ strīṇāṃ dhārayedgarbhapātanam

हिन्दी अर्थ

रह गया है, अतः मैं नित्य निर्भय हो गया हूँ। समस्त सांसारिक उपद्रवोंको विनष्ट करनेवाले भगवान् नारायणदेवका ध्यान करके वैष्णव कवचसे आबद्ध मैं पृथ्वीतलपर विचरण करता हूँ। इसीके

English

Sacrificing Horses, giving oblations or feeding of Brahmins may cause their suppression. Or Harltakikalpa can be resorted to.

अध्याय 201

श्लोक 12

रक्तस्त्रावस्य नाशः स्याच्छीतोदकनिषेवणात् ।पीतन्तु काञ्जिक रुद्र क्वथितं शरपुङ्खया

raktastrāvasya nāśaḥ syācchītodakaniṣevaṇāt / pītantu kāñjika rudra kvathitaṃ śarapuṅkhayā

हिन्दी अर्थ

प्रभावसे मैं सभी प्राणियोंके लिये अजेय हो गया हूँ। इतना ही नहीं, सर्वदेवमय भी हो गया हूँ। अपरिमित तेजसे सम्पन्न देवाधिदेव भगवान् विष्णुका स्मरण करनेसे मेरा समस्त मनोरथ नित्य सिद्ध होता रहे ।

English

shall now explain Gajiyurveda (treatment etc. of elephanu). The medical decoctions etc. mentioned before arc efficacious in elephants too. The dosage is four times of that of a horse. All ailments can thus be cured.

अध्याय 201

श्लोक 13

हिङ्गुस्त्रैन्धवसंयुक्तं शीघ्रं स्त्रीणां प्रसूतिकृत् ।मातुलुङ्गस्य वै मूलं कटिबद्धं प्रसूतिकृत्

hiṅgustraindhavasaṃyuktaṃ śīghraṃ strīṇāṃ prasūtikṛt / mātuluṅgasya vai mūlaṃ kaṭibaddhaṃ prasūtikṛt

हिन्दी अर्थ

भगवान् वासुदेवके चक्रमें जो अरे लगे हैं, वे यथाशीघ्र मेरे समस्त पापोंका विनाश करें और

English

In an epidemic among elephants the alleviation i»by means of a pacifying rite (Santi Karma)' by the worship of gods and brahmins and the gift of a Kapila (pale*brown or tawny) cow.

अध्याय 201

श्लोक 14

अपामार्गस्य वै मूले गर्भवत्यास्तु नामतः ।उत्पाट्यमाने सकले पुत्त्रः स्यादान्यथा सुता

apāmārgasya vai mūle garbhavatyāstu nāmataḥ / utpāṭyamāne sakale puttraḥ syādānyathā sutā

हिन्दी अर्थ

मेरी हिंसा करनेवाले शत्रुओंका संहार करें। राक्षस एवं पिशाचोंसे तथा गहन वन, प्रान्त,

English

The physician must observe fast and tic a consecrat¬ ed garland round the tusks of ibc elephant along with Vac4 and Siddirthaka drugs equally consecrated.

अध्याय 201

श्लोक 15

अपामार्गस्य वै मूले नारीणां शिरसि स्थिते ।गर्भशूलं विनश्येत नात्र कार्या विचारणा

apāmārgasya vai mūle nārīṇāṃ śirasi sthite / garbhaśūlaṃ vinaśyeta nātra kāryā vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

पार करनेकी स्थिति, आपत्काल, प्राणोंका संकट- काल, अग्निभय, चौरभय, ग्रहबाधा, विद्युत्- उत्पीडन, सर्पविषका उद्वेग, रोग, विघ्न, संकट आनेपर तथा भयविह्ल होनेपर इसका जप तो

English

The worship of Sun, Siva, Durga, Sri and Vin>n protects the elephant. Oblations must be given to Bhutas. The elephant must be bathed with four pilchcrfuls of water.

अध्याय 201

श्लोक 16

कर्पूर-मदनफल-मधुकैः पूरितः शिव ।योनिः सुभा स्याद्वृद्धाया युवत्याः किं पुनर्हर

karpūra-madanaphala-madhukaiḥ pūritaḥ śiva / yoniḥ subhā syādvṛddhāyā yuvatyāḥ kiṃ punarhara

हिन्दी अर्थ

करना ही चाहिए, किंतु नित्य इसका जप करना विशेष लाभप्रद है । यह भगवान् विष्णुका मन्त्ररूपी कवच परम श्रेष्ठ तथा सभी पापोंका विनाशक है।

English

The diet of the elephant must be consecrated with mantras. The elephant must be smeared with holy ashes. The pure auspicious propitiation of the Bhutas will protect the elephant.

अध्याय 201

श्लोक 17

यस्य बालस्य तिलकः कृतो गौरोचनाख्यया ।शर्करा-कुष्ठपानञ्च दत्तं स स्याच्च निर्भयः ।विष-भूत-ग्रहादिभ्यो व्याधिभ्यो बालकः शिव

yasya bālasya tilakaḥ kṛto gaurocanākhyayā / śarkarā-kuṣṭhapānañca dattaṃ sa syācca nirbhayaḥ / viṣa-bhūta-grahādibhyo vyādhibhyo bālakaḥ śiva

हिन्दी अर्थ

सर्वकामप्रदा विद्या श्रीहरिने कहा--हे शिव! अब मैं 'सर्वकामप्रदा सफल हो जाती हैं । सर्वकामप्रदा विद्या इस प्रकार विद्या' का वर्णन करता हूँ, उसे सुनें। इसकी है--

English

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अध्याय 201

श्लोक 18

शङ्ख-नाभि-वचा-कुष्ठ-लोहानां धारणं सदा ।बालानामुपसर्गेभ्यो रुद्र रक्षाकरं भवेत्

śaṅkha-nābhi-vacā-kuṣṭha-lohānāṃ dhāraṇaṃ sadā / bālānāmupasargebhyo rudra rakṣākaraṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

उपासना मात्र सात रात करनेसे ही सभी कामनाएँ

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 19

पलाशचूर्णं समधु गव्याज्यामलकान्वितम् ।सविडङ्गं पीतमात्रं नरं कुर्यान्महामतिम्

palāśacūrṇaṃ samadhu gavyājyāmalakānvitam / saviḍaṅgaṃ pītamātraṃ naraṃ kuryānmahāmatim

हिन्दी अर्थ

हे भगवान् वासुदेव! आपका मैं ध्यान करता

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 20

मासैकेन महादेव जरा-मरणवर्जितः

māsaikena mahādeva jarā-maraṇavarjitaḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वकामप्रदां विद्यां सप्तरात्रेण तां शृणु। नमस्तुभ्यं भगवते वासुदेवाय धीमहि ॥ प्रद्युम्नायानिरुद्धाय नमः संकर्षणाय च । नमो विज्ञानमात्राय परमानन्दमूर्तये ॥

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 21

पलाशबीजं सघृतं तिल-मध्वन्वितं समम् ।सप्ताहं भक्षितं रुद्र जरां नयति संक्षयम्

palāśabījaṃ saghṛtaṃ tila-madhvanvitaṃ samam / saptāhaṃ bhakṣitaṃ rudra jarāṃ nayati saṃkṣayam

हिन्दी अर्थ

मृण्मयी वहसि क्षोणीं तस्मै ते ब्रह्मणे नमः । यन्न स्पृशन्ति न विदुः मनोबुद्धीन्द्रियासवः । अन्तर्बहिस्त्वं चरसि व्योमतुल्यं नमाम्यहम् ॥

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 22

रुद्रामलकचूर्णं वै मधु-तैल घृतान्वितम् ।जग्ध्वा मासं युवा स्याच्च नरो वागीश्वरी भवेत्

rudrāmalakacūrṇaṃ vai madhu-taila ghṛtānvitam / jagdhvā māsaṃ yuvā syācca naro vāgīśvarī bhavet

हिन्दी अर्थ

ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महाभूतपतये सकलसत्त्वभाविव्रीडनिकरकमलरेणूत्पलनिभधर्माख्यविद्यया चरणारविन्दयुगल परमेष्ठिन्

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 23

शिवामलकचूर्णं वै मधुना उदकेन वा ।बलानि कुर्यान्नासायाः प्रत्यूषे भक्षितं शिव

śivāmalakacūrṇaṃ vai madhunā udakena vā / balāni kuryānnāsāyāḥ pratyūṣe bhakṣitaṃ śiva

हिन्दी अर्थ

नमस्ते। अवाप विद्याधरतां चित्रकेतुश्च विद्यया॥ (१९५। १-६)

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 24

कुष्ठचूर्णं साज्य-मधु प्रातर्जग्ध्वा भवेन्नरः ।साक्षात्सुरभिदेहो वै जीवेद्वर्षसहस्रकम्

kuṣṭhacūrṇaṃ sājya-madhu prātarjagdhvā bhavennaraḥ / sākṣātsurabhideho vai jīvedvarṣasahasrakam

हिन्दी अर्थ

हूँ, आपको नमस्कार है। है प्रद्युम्न! है अनिरुद्ध! हे संकर्षण! आपको नमस्कार है । है परमानन्दस्वरूप ! आप मात्र अनुभवजन्य हैं, आपको मेरा नमस्कार है। आप आत्माराम एवं शान्तमूर्ति हैं तथा द्वैत-दृष्टिसे

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 25

माषस्य विदलान्ये वितुषाणि महेश्वर ।घृतभावितशुष्काणि पयसा साधितानि वै

māṣasya vidalānye vituṣāṇi maheśvara / ghṛtabhāvitaśuṣkāṇi payasā sādhitāni vai

हिन्दी अर्थ

परे हैं, आपको मेरा नमस्कार है । यह समस्त चराचर जगत् आपका ही रूप है, आपको बारंबार प्रणाम है। है अनन्तमूर्ति भगवान् हृषीकेश ! आप महत्स्वरूपको नमस्कार है । प्रलयकालमें यह सारा जगत् जिस

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 26

समाध्वाज्यपयोभिश्च भक्षयित्वा च कामयेत् ।स्त्रीणां शतं महादेव तत्क्षणान्नात्र संशयः

samādhvājyapayobhiśca bhakṣayitvā ca kāmayet / strīṇāṃ śataṃ mahādeva tatkṣaṇānnātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

मूर्तिमें प्रविष्ट होकर स्थित रहता है और पुनः प्रलयकालके पश्चात् सृष्टिके प्रारम्भमें सबसे पहले उत्पन्न भी होता है तथा जो इस मृण्मयी पृथ्वीको धारण करता है, उस ब्रह्मदेवको मैं नमस्कार

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 27

रसश्चैरण्डतैलेन गन्धकेन शुभो भवेत् ।त्रिकालोदकसंघुष्टो बलकृद्भक्षणाद्भवेत्

rasaścairaṇḍatailena gandhakena śubho bhavet / trikālodakasaṃghuṣṭo balakṛdbhakṣaṇādbhavet

हिन्दी अर्थ

विष्णुधर्माख्यविद्या

English

Bute* monotperma.

अध्याय 201

श्लोक 28

दुग्धं वितुषमाषैश्च शिम्बाबीजैश्च साधितम् ।अपामार्गस्य तैलेन पीतं स्त्रीशतकामकृत्

dugdhaṃ vituṣamāṣaiśca śimbābījaiśca sādhitam / apāmārgasya tailena pītaṃ strīśatakāmakṛt

हिन्दी अर्थ

करता हूँ । जिस देवको स्पर्श करने और पहचाननेमें न मन-बुद्धि समर्थ हैं, न ज्ञानेन्द्रिय, कर्मेन्द्रिय और प्राण समर्थ हैं तथा आकाशके समान जो देव समस्त चराचर प्राणियोंके अंदर और बाहर विचरण

English

Bute* monotperma.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।