Garuda Purana
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अध्याय 3 / 317

Book 1 - Adhyaya 3

मोक्षधर्म

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 3

श्लोक 1

जन्म दुर्लभमिदं विद्धि मानुष्यं प्राप्य कृत्स्नशः ।भजेद्धरिमनन्यात्मा मोक्षार्थी बुधसेवितम्

janma durlabhamidaṃ viddhi mānuṣyaṃ prāpya kṛtsnaśaḥ | bhajeddharimananyātmā mokṣārthī budhasevitam

हिन्दी अर्थ

इस मनुष्य-जन्म को दुर्लभ जानो। इसे पाकर, मोक्ष की कामना से, अनन्य मन से हरि की भक्ति करो।

English

Know this human birth to be rare. Having obtained humanity, the one seeking liberation should worship Hari with undivided mind — following the path that the wise serve.

अध्याय 3

श्लोक 2

अहमात्मा सर्वभूतस्थितः शुद्धः ।ज्ञानदृष्ट्या तु सर्वत्र दृश्यते परमेश्वरः

ahamātmā sarvabhūtasthitaḥ śuddhaḥ | jñānadṛṣṭyā tu sarvatra dṛśyate parameśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

मैं सभी प्राणियों में स्थित शुद्ध आत्मा हूँ। ज्ञान-दृष्टि से सर्वत्र परमेश्वर दिखाई देते हैं।

English

I am the pure Self dwelling in all beings. Through the eye of knowledge, the Supreme Lord is seen everywhere.

अध्याय 3

श्लोक 3

मृत्युः सर्वहरश्चैव नित्यमेको विष्णुः स्मृतः ।अव्ययात्मा परो ब्रह्म यद्यदेवो न चिन्तयते

mṛtyuḥ sarvaharaścaiva nityameko viṣṇuḥ smṛtaḥ | avyayātmā paro brahma yadyadevo na cintyate

हिन्दी अर्थ

मृत्यु सब का नाश करने वाली है, और विष्णु अकेल नित्य हैं — अव्यय आत्मा, परम ब्रह्म, जिसे किसी देव के रूप में नहीं सोचा जाता।

English

Death is the destroyer of all, and Vishnu alone is eternal — the imperishable Self, the supreme Brahman, who is not to be thought of as any deity.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।