Harivamsha Purana
241
अध्याय 241 / 318

Parva 3, Adhyāya 58

101 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ101 श्लोक

अध्याय 241

श्लोक 1

रणाजेः एकचक्रस्य सार्द्धं, मृगव्याधस्य बलासुरेण, अजैकपादस्य राहोः, सुधूम्राक्षस्य केशीदैत्येन सार्द्धं युद्धस्य वर्णनं तत्रैव तु महायुद्धे रणाजिर्देवसत्तमः ।युध्यते सह दैत्येन एकचक्रेण धीमता

raṇājeḥ ekacakrasya sārddhaṃ, mṛgavyādhasya balāsureṇa, ajaikapādasya rāhoḥ, sudhūmrākṣasya keśīdaityena sārddhaṃ yuddhasya varṇanaṃ tatraiva tu mahāyuddhe raṇājirdevasattamaḥ | yudhyate saha daityena ekacakreṇa dhīmatā

हिन्दी अर्थ

वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! उसी महायुद्धमें रैवशिरोमणि रणाजि नामक साध्यदेवता बुद्धिमान्‌ दैत्य एकचक्रके साथ युद्ध कर रहे थे

अध्याय 241

श्लोक 2

प्रच्छाद्य रथपन्थानमुत्क्रोशंश्च महाबलः ।एकचक्रस्य सैन्यं तच्छरवर्षैरवाकिरत्

pracchādya rathapanthānamutkrośaṃśca mahābalaḥ | ekacakrasya sainyaṃ taccharavarṣairavākirat

हिन्दी अर्थ

महाबली णाजिने रथके मार्गको आच्छादित करके जोर-जोरसे र्जना करते हुए एकचक्रकी सेनापर बाणोंकी झड़ी लगा री

अध्याय 241

श्लोक 3

महासुरा महावीर्या महापट्टिशयोधिनः ।शूलानि च भुशुण्डीश्च क्षिपन्ति स्म महारणे

mahāsurā mahāvīryā mahāpaṭṭiśayodhinaḥ | śūlāni ca bhuśuṇḍīśca kṣipanti sma mahāraṇe

हिन्दी अर्थ

महापराक्रमी और महान्‌ पट्टिशद्वारा युद्ध करनेवाले महान्‌ असुर उस महासमरमें शूलों और मुशुण्डियोंका प्रहार करते थे

अध्याय 241

श्लोक 4

तच्छूलवर्षं सुमहद्गदाशक्तिसमाकुलम् ।अविशद् दितिजैर्मुक्तं दुर्निवार्यं चराचरैः

tacchūlavarṣaṃ sumahadgadāśaktisamākulam | aviśad ditijairmuktaṃ durnivāryaṃ carācaraiḥ

हिन्दी अर्थ

दैत्योंद्वारा की गयी दा और शक्तियोंसहित शूलोंकी वह बड़ी भारी वर्षा रैवसेनामें व्याप्त हो गयी; समस्त चराचर प्राणियोंके लिये सका निवारण करना कठिन था

अध्याय 241

श्लोक 5

अन्योन्यमभिवर्तन्ते देवासुरगणा युधि ।महाद्रिशिखराकारा वीर्यवन्तो महाबलाः

anyonyamabhivartante devāsuragaṇā yudhi | mahādriśikharākārā vīryavanto mahābalāḥ

हिन्दी अर्थ

उस युद्धस्थलमें रवता और असुरगण एक-दूसरेके सामने खड़े थे; इनके आकार विशाल पर्वतोंके समान थे और वे सभी पहाबलवान्‌ तथा पराक्रमी थे

अध्याय 241

श्लोक 6

तुरङ्गमाणां तु शतं युक्तं तस्य महारथे ।महासुरवरस्येव हिरण्यकशिपोर्युधि

turaṅgamāṇāṃ tu śataṃ yuktaṃ tasya mahārathe | mahāsuravarasyeva hiraṇyakaśiporyudhi

हिन्दी अर्थ

महान्‌ असुरशिरोमणि [कचक्र युद्धमें हिरण्यकशिपुके समान था। उसके विशाल रथमें सौ घोड़े जुते हुए थे

अध्याय 241

श्लोक 7

तेषां चरणपातेन चक्रनेमिस्वनेन च ।तथा बाणनिपातैश्च हता वै शतशः सुराः

teṣāṃ caraṇapātena cakranemisvanena ca | tathā bāṇanipātaiśca hatā vai śataśaḥ surāḥ

हिन्दी अर्थ

उन घोड़ोंकी ापोंके आघातसे, रथके पहियोंकी घरघराहटसे तथा [कचक्रके बाणोंकी मारसे सैकड़ों देवता नष्ट हो ये

अध्याय 241

श्लोक 8

ततः स लघुभिश्चित्रैः शरैः सन्नतपर्वभिः ।सायुधानच्छिनत्क्रुद्धः शतशोऽथ सहस्रशः

tataḥ sa laghubhiścitraiḥ śaraiḥ sannataparvabhiḥ | sāyudhānacchinatkruddhaḥ śataśo'tha sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

रणाजिने कुपित होकर झुकी हुई गाँठवाले ीघ्रगामी विचित्र बाणोंद्वारा आयुधोंसहित सैकड़ों और जारों दैत्योंको छिन्न-भिन्न कर डाला

अध्याय 241

श्लोक 9

वध्यमानाः शरैस्तीक्ष्णै रथद्विरदवाजिनः ।गमिताः प्रक्षयं केचित् त्रिदशैर्दानवा रणे

vadhyamānāḥ śaraistīkṣṇai rathadviradavājinaḥ | gamitāḥ prakṣayaṃ kecit tridaśairdānavā raṇe

हिन्दी अर्थ

देवताओंने भपने तीखे बाणोंकी मारसे रथ, हाथी और घोड़ोंसहित केतने ही दानवोंका समराज्णमें संहार कर डाला

अध्याय 241

श्लोक 10

ततः प्रमीयमाणास्तानुपप्रेक्ष्य दितेः सुताः ।त्यक्त्वा प्राणान् न्यवर्तन्त प्रगृहीतवरायुधाः

tataḥ pramīyamāṇāstānupaprekṣya diteḥ sutāḥ | tyaktvā prāṇān nyavartanta pragṛhītavarāyudhāḥ

हिन्दी अर्थ

न दानवोंका इस प्रकार विनाश होता देख वे दैत्य हाथोंमें ष्ठ आयुध लिये प्राणोंका मोह छोड़कर वहाँ लौट ड़े

अध्याय 241

श्लोक 11

ते दिशो विदिशश्चैव प्रतियुद्धप्रहारिणः ।अभ्यघ्नन् निशितैः शस्त्रैर्देवान्दितिसुता रणे

te diśo vidiśaścaiva pratiyuddhaprahāriṇaḥ | abhyaghnan niśitaiḥ śastrairdevānditisutā raṇe

हिन्दी अर्थ

युद्धमें शत्रुका सामना और शत्रुसेनापर प्रहार ररनेवाले उन दैत्योंने रणभूमिमें अपने तीखे शस्त्रोंद्वारा म्पूर्ण दिशाओं और विदिशाओंमें खड़े हुए देवताओंको हरी चोट पहुँचायी

अध्याय 241

श्लोक 12

रणाजिर्ज्वलितं घोरं परमं तिग्मतेजसम् ।मुमोचास्त्रं महाबाहुर्मथनं नाम संयुगे

raṇājirjvalitaṃ ghoraṃ paramaṃ tigmatejasam | mumocāstraṃ mahābāhurmathanaṃ nāma saṃyuge

हिन्दी अर्थ

यह देख महाबाहु रणाजिने चण्ड तेजवाले अत्यन्त घोर मथन नामक प्रज्वलित सस्त्रका उस युद्धस्थलमें प्रयोग किया

अध्याय 241

श्लोक 13

ततः शस्त्राणि शूलानि निशितानि सहस्रशः ।अस्त्रवीर्येण महता दितिजः सम्प्रचिच्छिदे

tataḥ śastrāṇi śūlāni niśitāni sahasraśaḥ | astravīryeṇa mahatā ditijaḥ sampracicchide

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर ससे निकले हुए सहस्रों तीखे शूल आदि शस्त्रिंको [कचक्र दैत्यने अपने महान्‌ अस्त्रबलसे काट डाला

अध्याय 241

श्लोक 14

छित्त्वा शूलेन तान् सर्वानेकचक्रो महासुरः ।अभ्यविध्वत तं साध्यं दशभिर्निशितैः शरैः

chittvā śūlena tān sarvānekacakro mahāsuraḥ | abhyavidhvata taṃ sādhyaṃ daśabhirniśitaiḥ śaraiḥ

हिन्दी अर्थ

उस महानू असुर एकचक्रने शूलसे उन सब अस्त्रोंको छिन्न-भिन्न करके साध्यदेवता रणाजिको दस पैने बाणोंसे अच्छी तरह घायल किया

अध्याय 241

श्लोक 15

अस्त्रवेगं निहत्यैवं सोऽस्त्रैस्तस्यानुसैनिकान् ।ज्वलितैरपरैः शीघ्रैस्तानविध्यत् सहस्रशः

astravegaṃ nihatyaivaṃ so'straistasyānusainikān | jvalitairaparaiḥ śīghraistānavidhyat sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

उस दैत्यने अपने अस्त्रोंसे साध्यदेवताके अस्त्रवेगका इस प्रकार निवारण करके उनके पीछे चलनेवाले सहस्रों पैनिकोंको दूसरे शीघ्रगामी प्रज्वलित अस्त्रोंद्वारा बींध डाला

अध्याय 241

श्लोक 16

तेषां छिन्नानि गात्राणि विसृजन्ति स्म शोणितम् ।प्रावृषीवास्त्रवृष्टीनि शृङ्गाणि धरणीभृताम्

teṣāṃ chinnāni gātrāṇi visṛjanti sma śoṇitam | prāvṛṣīvāstravṛṣṭīni śṛṅgāṇi dharaṇībhṛtām

हिन्दी अर्थ

उन सैनिकोंके छिदे हुए अद्ध वर्षाकालमें जलकी वृष्टि करनेवाले पर्वतोंके शिखरोंकी भाँति रक्त बहा रहे थे

अध्याय 241

श्लोक 17

इन्द्राशनिसमस्पशैर्निपतद्भिरजिह्मगैः ।दितिजैर्बध्यमानास्ते वित्रेसुः सुरसत्तमाः

indrāśanisamaspaśairnipatadbhirajihmagaiḥ | ditijairbadhyamānāste vitresuḥ surasattamāḥ

हिन्दी अर्थ

जिनका स्पर्श इन्द्रके वज़की भाँति दु:सह था, उन सीधे जानेवाले बाणों के प्रहारसे दैत्योंद्वारा पीड़ित किये गये वे श्रेष्ठ देवता अत्यन्त भयभीत हो ये

अध्याय 241

श्लोक 18

एकचक्रो रथे तिष्ठन्नपश्यद् गजयूथपान् ।वराभरणनिर्ह्रादान् समुद्रस्वननिःस्वनान्

ekacakro rathe tiṣṭhannapaśyad gajayūthapān | varābharaṇanirhrādān samudrasvananiḥsvanān

श्लोक 18–20 का हिन्दी अर्थ

एकचक्रने रथमें बैठे हुए ही देखा कि देवताओंके गजयूथपति चले आ रहे हैं, उनके श्रेष्ठ आभूषणोंकी झंकार सुनायी पड़ती है । उनके चिग्घाड़नेका शब्द समुद्रकी गर्जनाको लज्जित करता है। वे मतवाले और बलाभिमानी गजराज अच्छी तरह सजाये गये हैं; उनके ऊपर महावत बैठे हैं। वे उत्तम कुलमें उत्पन्न तथा ब्ल-पराक्रमसे सम्पन्न हैं और प्रतिद्वन्द्दी हाथियोंको मार डालनेकी शक्ति रखते हैं । गजशिक्षामें पूर्णत: शिक्षित हैं तथा युद्धमें ऐरावतके समान पराक्रमी हैं । तब उसने गजासुरके समान देवसेनाके उन हाथियोंको मार डाला

अध्याय 241

श्लोक 19

मत्तान् सुविहितान् दृप्तान् महामात्रैरधिष्ठितान् ।कुलीनान् वीर्यसम्पन्नान् प्रतिद्विरदघातिनः

mattān suvihitān dṛptān mahāmātrairadhiṣṭhitān | kulīnān vīryasampannān pratidviradaghātinaḥ

अर्थ श्लोक 18 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 20

शिक्षितान् गजशिक्षायामैरावतसमान् युधि ।न्यहनत् सुरसैन्यस्य गजान् गज इवासुरः

śikṣitān gajaśikṣāyāmairāvatasamān yudhi | nyahanat surasainyasya gajān gaja ivāsuraḥ

अर्थ श्लोक 18 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 21

विक्षरन्तो महानागान् भीमवेगांस्त्रिधा मदम् ।मेघस्तनितनिर्घोषान् महाद्रीनिव चोत्थितान्

vikṣaranto mahānāgān bhīmavegāṃstridhā madam | meghastanitanirghoṣān mahādrīniva cotthitān

हिन्दी अर्थ

वे सब विशालकाय हाथी कण्ठ, पूँडू और कुम्भस्थल—इन तीन स्थानोंसे मद बहा रहे थे; उनका वेग बड़ा भयंकर था। वे मेघकी गर्जनाके प्रमान चिग्घाड़ते थे और खड़े विशाल पर्वतोंके समान प्रतीत होते थे

अध्याय 241

श्लोक 22

सहस्रसम्मितान् दिव्याञ्जाम्बूनदपरिष्कृतान् ।सुवर्णजालैर्विततांस्तरुणादित्यवर्चसः

sahasrasammitān divyāñjāmbūnadapariṣkṛtān | suvarṇajālairvitatāṃstaruṇādityavarcasaḥ

हिन्दी अर्थ

उन दिव्य हाथियोंकी संख्या नगभग एक सहसत्र थी। वे सब-के-सब सुवर्णके भलंकारोंसे विभूषित थे। उनपर सोनेकी जालियोंसे युक्त भूलें पड़ी हुई थीं तथा वे प्रात:कालके सूर्यके समान रीसिमानू दिखायी देते थे

अध्याय 241

श्लोक 23

एकचक्रो गदापाणिर्बलवान् गदिनां वरः ।उत्सारयामास गजान् महाभ्राणीव मारुतः

ekacakro gadāpāṇirbalavān gadināṃ varaḥ | utsārayāmāsa gajān mahābhrāṇīva mārutaḥ

हिन्दी अर्थ

हाथमें गदा लिये दाधारियोंमें श्रेष्ठ बलवान्‌ एकचक्रने उन समस्त गजराजोंका उसी प्रकार संहार कर डाला, जैसे वायु महान्‌ मेघोंको छेन्न-भिन्न कर देती है

अध्याय 241

श्लोक 24

निहत्य गदया सर्वांस्तान् गजान् गजमर्दनः ।भूयोऽश्वसङ्घान् स बली निरैक्षत महासुरः

nihatya gadayā sarvāṃstān gajān gajamardanaḥ | bhūyo'śvasaṅghān sa balī niraikṣata mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

गजोंका मर्दन करनेवाले उस महान्‌ बलवान्‌ असुरने अपनी गदाके द्वारा उन समस्त हाथियोंको मौतके घाट उतारकर पुन: अश्वसमूहों पर दृष्टिपात किया

अध्याय 241

श्लोक 25

शुकवर्णानृष्यवर्णान् मयूरसदृशांस्तथा ।पारावतसवर्णांश्च हंसवर्णांस्तथैव च

śukavarṇānṛṣyavarṇān mayūrasadṛśāṃstathā | pārāvatasavarṇāṃśca haṃsavarṇāṃstathaiva ca

हिन्दी अर्थ

कुछ घोड़ों के रंग तोतोंके समान रे थे; कुछ मृगके समान धूसर वर्णवाले थे। कितने ही गरोड़ोंके रंग मोरोंके समान थे; कितने ही कबूतरों और सोंके समान वर्णसे विभूषित थे

अध्याय 241

श्लोक 26

मल्लिकाक्षान् विरूपाक्षान् क्रौञ्चवर्णान् मनोजवान् ।अश्वसैन्यं महाबाहुस्तदप्रतिमपौरुषः ।निषूदयामास बली गदया भीमविक्रमः

mallikākṣān virūpākṣān krauñcavarṇān manojavān | aśvasainyaṃ mahābāhustadapratimapauruṣaḥ | niṣūdayāmāsa balī gadayā bhīmavikramaḥ

हिन्दी अर्थ

+ ११६१ किन्हींकी आँखें मल्लिकाके समान थीं और किन्हींकी विरूप। कुछ घोड़ोंके वर्ण क्रौज्ञ पक्षीके समान थे। वे सभी मनके समान वेगशाली थे। अनुपम पुरुषार्थ और भयंकर पराक्रमसे युक्त बलवान्‌ महाबाहु एकचक्रने पूर्वोक्त अश्वोंकी सेनाको अपनी गदाके आघातसे नष्ट कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 27

रणाजिर्व्यस्य समरे सर्वान् दृष्ट्वा सुरद्विषः ।अजिन्त्यविक्रमः श्रीमान् स युद्धाद् विरराम ह

raṇājirvyasya samare sarvān dṛṣṭvā suradviṣaḥ | ajintyavikramaḥ śrīmān sa yuddhād virarāma ha

हिन्दी अर्थ

अचिन्त्यपराक्रमी श्रीमानू रणाजि उस समरसें समस्त देवद्रोहियोंको उपस्थित देख उन सबको त्यागकर युद्धसे विरत हो गये

अध्याय 241

श्लोक 28

गदायुद्धेषु कुशलो रथेन रथयूथपः ।नष्टसैन्यो महाबाहुः प्रस्थितः शक्रसन्निधौ

gadāyuddheṣu kuśalo rathena rathayūthapaḥ | naṣṭasainyo mahābāhuḥ prasthitaḥ śakrasannidhau

हिन्दी अर्थ

गदायुद्धमें कुशल तथा रथ- पूथपति महाबाहु रणाजि, जिनकी सेना प्राय: नष्ट हो गयी थी, रथके द्वारा इन्द्रके समीप चले गये

अध्याय 241

श्लोक 29

त्रिंशच्छतसहस्राणि रथानां विनिहत्य सः ।रणेऽतिष्ठत दैत्येन्द्रो विधूम इव पावकः

triṃśacchatasahasrāṇi rathānāṃ vinihatya saḥ | raṇe'tiṣṭhata daityendro vidhūma iva pāvakaḥ

हिन्दी अर्थ

दैत्यराज एकचक्र वहाँ तीस लाख रथियोंका संहार करके णभूमिमें धूमरहित अग्निके समान स्थित हो गया

अध्याय 241

श्लोक 30

तस्मिन्तेव तु सङ्ग्रामे बलो दृप्तो महासुरः ।मृगव्याधं महात्मानं योधयत्यजितं रणे

tasminteva tu saṅgrāme balo dṛpto mahāsuraḥ | mṛgavyādhaṃ mahātmānaṃ yodhayatyajitaṃ raṇe

हिन्दी अर्थ

उसी युद्धमें महानू असुर बल, जिसे अपने बलपर घमंड था, अपराजित महात्मा मृगव्याध (रुद्र)-के साथ युद्ध करने लगा

अध्याय 241

श्लोक 31

मृगव्याधस्य रुद्रस्य महापारिषदास्तथा ।समुत्पेतुर्बलं दृष्ट्वा हुताग्निसमतेजसः

mṛgavyādhasya rudrasya mahāpāriṣadāstathā | samutpeturbalaṃ dṛṣṭvā hutāgnisamatejasaḥ

हिन्दी अर्थ

मृगव्याध नामक रुद्रदेवके महान्‌ गर्षद घीकी आहुति पाकर प्रज्वलित हुए अग्रिके समान गजस्वी थे। वे बलको देखते ही वहाँ उछलते-कूदते हुए आ पहुँचे

अध्याय 241

श्लोक 32

गजैर्मत्तै रथैर्दिव्यैर्वाजिभिश्च महाजवैः ।अस्त्रैश्च निशितैर्बाणैः शरैश्चानलसन्निभैः

gajairmattai rathairdivyairvājibhiśca mahājavaiḥ | astraiśca niśitairbāṇaiḥ śaraiścānalasannibhaiḥ

हिन्दी अर्थ

कुछ पार्षद मतवाले हाथियोंसे, कुछ देव्य रथोंसे और कुछ महान्‌ वेगशाली घोड़ोंसे आये | ते सब-के-सब अग्िके समान तेजस्वी, तीखे अस्त्र एवं त्राणोंसे सम्पन्न थे

अध्याय 241

श्लोक 33

ददृशुस्ते ततो वीरा दीप्यमानं महासुरम् ।रश्मिवन्तमिवोद्यन्तं सुतेजोरश्मिमालिनम्

dadṛśuste tato vīrā dīpyamānaṃ mahāsuram | raśmivantamivodyantaṃ sutejoraśmimālinam

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात्‌ उन वीरोंने उस महान्‌ भसुरको उगते हुए सूर्यके समान तेजोमयी किरण- पालाओंसे अलंकृत एवं देदीप्यमान देखा

अध्याय 241

श्लोक 34

सङ्ग्रामस्थं महावेगं महासत्त्वं महाबलम् ।महामतिं महोत्साहं महाकायं महारथम्

saṅgrāmasthaṃ mahāvegaṃ mahāsattvaṃ mahābalam | mahāmatiṃ mahotsāhaṃ mahākāyaṃ mahāratham

श्लोक 34–35 का हिन्दी अर्थ

युद्धस्थलमें बड़े हुए उस महान्‌ वेग, महान्‌ सत्त्व, महान्‌ बल, पहती बुद्धि, महान्‌ उत्साह और विशाल कायासे सम्पन्न हहारथी महायोद्धाको सम्पूर्ण दिशाओंमें अवस्थित देख ने रुद्रपार्षद घोर अस्त्र-शस्त्र लिये चारों ओरसे उसपर ूट पड़े

अध्याय 241

श्लोक 35

समीक्ष्य तं महायोधं दिक्षु सर्वास्ववस्थितम् ।ततः प्रहरणैर्घोरैरभिपेतुः समन्ततः

samīkṣya taṃ mahāyodhaṃ dikṣu sarvāsvavasthitam | tataḥ praharaṇairghorairabhipetuḥ samantataḥ

अर्थ श्लोक 34 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 36

तस्य सर्वायसास्तीक्ष्णाः शराः पीतमुखाः शिताः ।शिरस्यद्रिप्रतीकाशे मृगव्याधेन पातिताः

tasya sarvāyasāstīkṣṇāḥ śarāḥ pītamukhāḥ śitāḥ | śirasyadripratīkāśe mṛgavyādhena pātitāḥ

हिन्दी अर्थ

मृगव्याधने उसके पर्वतसदूश सस्तकपर पूर्णत: लोहेके बने हुए तीखे और तेज धारवाले बाण बरसाये। जिनके मुख ( धार)-पर पानी ्ढ़ाया गया था

अध्याय 241

श्लोक 37

तैश्च सप्तभिराविष्टः शरैः शिरसि चार्पितैः ।उत्पपात तदा व्योम्नि दिशो दश विनादयन्

taiśca saptabhirāviṣṭaḥ śaraiḥ śirasi cārpitaiḥ | utpapāta tadā vyomni diśo daśa vinādayan

हिन्दी अर्थ

मृगव्याधके वे सात बाण उसके सरमें धँस गये। उन बाणोंसे आविष्ट होकर महान्‌ असुर लल अपने चीत्कारसे दसों दिशाओंको निनादित करता डुआ आकाशमें उड़ गया

अध्याय 241

श्लोक 38

ततस्तं त्रिदशो वीरः सरथः सज्जकार्मुकः ।अनुवव्राज संहृष्टः खे तदा स महाबलः

tatastaṃ tridaśo vīraḥ sarathaḥ sajjakārmukaḥ | anuvavrāja saṃhṛṣṭaḥ khe tadā sa mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

तब उन देववीर हहाबली मृगव्याधने रथ और धनुषसहित बड़े हर्षके पथ आकाशमें उस समय उस दानवका पीछा किया

अध्याय 241

श्लोक 39

असुरं छादयामास तं व्योम्नि शरवृष्टिभिः ।वृष्टिमानिव जीमूतो निदाघान्ते धराधरम्

asuraṃ chādayāmāsa taṃ vyomni śaravṛṣṭibhiḥ | vṛṣṭimāniva jīmūto nidāghānte dharādharam

हिन्दी अर्थ

से वर्षाकालमें पानी बरसानेके लिये उद्यत हुआ मेघ वतको अपनी जलधाराओंसे ढक देता है, उसी प्रकार [गव्याधने आकाशमें अपने बाणोंकी वर्षासे उस असुरको माच्छादित कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 40

अर्द्यमानस्ततस्तेन मृगव्याधेन दानवः ।चकार निनदं घोरमम्बरे जलदो यथा

ardyamānastatastena mṛgavyādhena dānavaḥ | cakāra ninadaṃ ghoramambare jalado yathā

हिन्दी अर्थ

मृगव्याधसे पीड़ित किये जानेपर उस दानवने आकाशमें ही मेघकी भाँति घोर गर्जना की

अध्याय 241

श्लोक 41

स दूरं सहसोत्पत्य मृगव्याधरथं प्रति ।निपपात महावेगः पक्षवातैर्गिरिर्यथा

sa dūraṃ sahasotpatya mṛgavyādharathaṃ prati | nipapāta mahāvegaḥ pakṣavātairgiriryathā

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर वह महान्‌ वेगशाली दानव सहसा दूरतक उछलकर मृगव्याधके रथपर पँखोंकी हवासे युक्त पर्वतकी भाँति कूद पड़ा

अध्याय 241

श्लोक 42

बभञ्ज च ततो दैत्यो भग्नेषाकूबरं रथम् ।मृगव्याधः परित्यज्य स्थितो भूमौ महाबलः

babhañja ca tato daityo bhagneṣākūbaraṃ ratham | mṛgavyādhaḥ parityajya sthito bhūmau mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसा करके उस दैत्यने उस रथके ईषादण्ड और कूबरको तोड़ दिया तथा उस रथको भी चौपट कर दिया। महाबली मृगव्याध वह रथ त्यागकर पृथ्वीपर खड़े हो गये ॥ '

अध्याय 241

श्लोक 43

विरथं प्रेक्ष्य रुद्रं तु तस्य पारिषदाः शुभाः ।उत्थिता घोररक्ताक्षा व्योम्नि मुद्गरपाणयः

virathaṃ prekṣya rudraṃ tu tasya pāriṣadāḥ śubhāḥ | utthitā ghoraraktākṣā vyomni mudgarapāṇayaḥ

हिन्दी अर्थ

रुद्रको रथहीन हुआ देख उनके शुभ पार्षद आकाशमें मुद्रर लिये खड़े हो गये। उनकी भयंकर आँखें क्रोधसे लाल हो रही थीं

अध्याय 241

श्लोक 44

स तैः सहसोत्थाय वेष्टितो विमलेऽम्परे ।भीमेर्भ्रूकः परशुभिर्यथा

sa taiḥ sahasotthāya veṣṭito vimale'mpare | bhīmerbhrūkaḥ paraśubhiryathā

हिन्दी अर्थ

उन सबने सहसा ऊपर उठकर निर्मल आकाशमें बलासुरको घेर लिया और जैसे फरसोंसे वृक्ष काटा जाता है, उसी प्रकार भयंकर मुद्रोंसे उसे पीड़ित करना आरम्भ किया

अध्याय 241

श्लोक 45

तेषां वेगवतां वेगं निहत्य स महारथः ।निपपात पुनर्भूमौ सुपर्णसमविक्रमः

teṣāṃ vegavatāṃ vegaṃ nihatya sa mahārathaḥ | nipapāta punarbhūmau suparṇasamavikramaḥ

हिन्दी अर्थ

परंतु वह महारथी बल गरुड़के समान पराक्रमी था। वह उन वेगवानोंका वेग नष्ट करके पुन: पृथ्वीपर कूद पड़ा

अध्याय 241

श्लोक 46

स शालवृक्षमुत्पाट्य महाशासं महाबलः ।सर्वान् पारिषदान्संणये सूदयामास दानवः

sa śālavṛkṣamutpāṭya mahāśāsaṃ mahābalaḥ | sarvān pāriṣadānsaṃṇaye sūdayāmāsa dānavaḥ

हिन्दी अर्थ

वहाँ विशाल शाखावाले एक शाल-वृक्षको उखाड़कर उस महाबली दानवने युद्धस्थलमें उन समस्त पार्षदोंपर उसका प्रहार किया

अध्याय 241

श्लोक 47

स तैर्विक्षतदेहस्तु रुधिरौघपरिप्लुतः ।शुशुभे दानवश्रेष्ठो बालसूर्य इवोदितः

sa tairvikṣatadehastu rudhiraughapariplutaḥ | śuśubhe dānavaśreṣṭho bālasūrya ivoditaḥ

हिन्दी अर्थ

उन पार्षदोंने बलके शरीरको क्षत-विक्षत कर दिया था, अत: खूनसे लथपथ हुआ दानवशिरोमणि बल उगे हुए बालसूर्यके समान शोभा पाने लगा

अध्याय 241

श्लोक 48

अथोत्पाट्य गिरेः शृङ्गं समृगव्यालपादपम् ।जघान तान् पारिषदान् समरे दानवेश्वरः

athotpāṭya gireḥ śṛṅgaṃ samṛgavyālapādapam | jaghāna tān pāriṣadān samare dānaveśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर मृगों, सर्पों और वृक्षोंसहित एक पर्वतशिखरको उखाड़कर दानवराज बलने समराड्णमें उन पार्षदोंपर आघात किया

अध्याय 241

श्लोक 49

ततस्तेपु च भग्नेषु महापारिवदेतु वै ।बलं तदवशेषं तु नाशयामास वीर्यवान्

tatastepu ca bhagneṣu mahāpārivadetu vai | balaṃ tadavaśeṣaṃ tu nāśayāmāsa vīryavān

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात्‌ उन महान्‌ पार्षदोंके व्यूह टूट जानेपर उस पराक्रमी असुरने शेष सेनाका नाश कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 50

अल्पैरश्वादगणैर्नागान् योधान्योधे रथान्रथैः ।दानवः स्त्वयामास युगान्तेऽन्तकवत्प्रजाः

alpairaśvādagaṇairnāgān yodhānyodhe rathānrathaiḥ | dānavaḥ stvayāmāsa yugānte'ntakavatprajāḥ

हिन्दी अर्थ

जैसे प्रलयकालमें संवर्तक यम सारी प्रजाका संहार कर डालते हैं, उसी प्रकार उस दानवने घोड़ोंसे घोड़ों को, हाथियों से हाथियों को, पैदल योद्धाओंसे पैदल योद्धाओंको तथा रथोंसे रथॉंको नष्ट कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 51

हतैरश्वैश्च नागैश्च भग्नाक्षैश्च महारथैः ।त्रिदशैश्चाभवद् भूमी रुद्धमार्गा समन्ततः

hatairaśvaiśca nāgaiśca bhagnākṣaiśca mahārathaiḥ | tridaśaiścābhavad bhūmī ruddhamārgā samantataḥ

हिन्दी अर्थ

वहाँ मारे गये घोड़ों, हाथियों, टूटे धुरेवाले विशाल रथों और देवताओंसे वहाँकी भूमिका मार्ग सब ओरसे अवरुद्ध हो गया था

अध्याय 241

श्लोक 52

एवं बलः स दैत्येन्द्रो मृगव्याधश्च वीर्यवान् ।युधि प्रवृद्धौ बलिनौ प्रभिन्नाविव वारणौ

evaṃ balaḥ sa daityendro mṛgavyādhaśca vīryavān | yudhi pravṛddhau balinau prabhinnāviva vāraṇau

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार दैत्यराज बल और पराक्रमी मृगव्याध दोनों बलवान्‌ वीर मदकी धारा बहानेवाले हाथियोंके समान युद्धमें बढ़े-चढ़े थे

अध्याय 241

श्लोक 53

तत्रैव युध्यते रुद्रो द्वितीयो राहुणा सह ।विश्रुतस्त्रिषु लोकेषु क्रोधात्मा ह्यज एकपात्

tatraiva yudhyate rudro dvitīyo rāhuṇā saha | viśrutastriṣu lokeṣu krodhātmā hyaja ekapāt

हिन्दी अर्थ

वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! वहीं तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध क्रोधात्मा अजैकपाद नामक द्वितीय रुद्र राहुके साथ युद्ध करते थे

अध्याय 241

श्लोक 54

तत् यथा सुमहद् युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् ।आसीत्प्रतिभयं रौद्रं वीराणां जयमिच्छताम्

tat yathā sumahad yuddhaṃ tumulaṃ lomaharṣaṇam | āsītpratibhayaṃ raudraṃ vīrāṇāṃ jayamicchatām

हिन्दी अर्थ

विजयकी इच्छा रखनेवाले वीरोंका वह महान्‌ युद्ध तुमुल, रोमाज्जकारी, भयानक तथा रौद्ररूप था

अध्याय 241

श्लोक 55

देवदानवदेहैस्तु दुस्तरा केशशाद्वला ।शरीरसङ्घातवहा प्रसृता लोहितापगा

devadānavadehaistu dustarā keśaśādvalā | śarīrasaṅghātavahā prasṛtā lohitāpagā

हिन्दी अर्थ

श्श्घ्डे देवताओं और दानवोंके शरीरोंसे वहाँ खूनकी एक स्तर नदी बह चली, जो विभिन्न शरीरसमूहोंको बहाये लिये जाती थी । मनुष्योंके केश उसमें घास और सेवार- छू समान जान पड़ते थे

अध्याय 241

श्लोक 56

आजघानाथ सङ्क्रुद्धो रुद्रो रौद्राकृतिः प्रभुः ।राहुं शतमुखं युद्धे शत्रुसैन्यनिवारणम्

ājaghānātha saṅkruddho rudro raudrākṛtiḥ prabhuḥ | rāhuṃ śatamukhaṃ yuddhe śatrusainyanivāraṇam

हिन्दी अर्थ

प्रभावशाली रुद्रदेवकी माकृति बड़ी ही रौद्र थी। उन्होंने कुपित होकर युद्धमें जुसेनाका निवारण करनेवाले शतमुख राहुपर गहरा आघात किया

अध्याय 241

श्लोक 57

तस्य काञ्चनचित्राङ्गं रथं साश्वं ससारथिम् ।जघान समरे श्रीमान् क्रुद्धो दैत्यस्य सायकैः

tasya kāñcanacitrāṅgaṃ rathaṃ sāśvaṃ sasārathim | jaghāna samare śrīmān kruddho daityasya sāyakaiḥ

हिन्दी अर्थ

क्रोधमें भरे हुए श्रीमान्‌ रुद्रदेवने [मरभूमिमें अपने सायकोंद्वारा उस दैत्यके सुवर्णमय त्रचित्र अद्भवाले रथको घोड़ों और सारथिसहित नष्ट 7र दिया

अध्याय 241

श्लोक 58

तस्य पारिषदस्त्वेकः शरशक्त्या महाबलः ।बिभेद समरे हृष्टो दानवं तं स्तनान्तरे

tasya pāriṣadastvekaḥ śaraśaktyā mahābalaḥ | bibheda samare hṛṣṭo dānavaṃ taṃ stanāntare

हिन्दी अर्थ

उनके हर्ष और उत्साहमें भरे हुए एक हाबली पार्षदने समरमें बाणोंकी शक्तिसे उस दानवकी तीमें घाव कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 59

स भिन्नगात्रो रुद्रेण तथा पारिषदैरपि ।रुद्रस्य रथमायान्तं स राहुर्दानवोत्तमः

sa bhinnagātro rudreṇa tathā pāriṣadairapi | rudrasya rathamāyāntaṃ sa rāhurdānavottamaḥ

श्लोक 59–60 का हिन्दी अर्थ

रुद्र तथा उनके पार्षदोंसे रीरके क्षत-विक्षत कर दिये जानेपर दानवशिरोमणि राहु हसा क्रोधसे मूर्च्छित हो गया। उसने रुद्रदेवके आते हुए थको शीघ्रतापूर्वक थप्पड़से मारकर चूर-चूर कर डाला। से सूर्य अपनी तीखी किरणोंसे मेरुपर्वतको संतप्त करते ; उसी प्रकार वह दानव घायल अड्डोंवाले रुद्रदेवको पने तीखे बाणोंसे पीड़ा देने लगा

अध्याय 241

श्लोक 60

प्रममाथ तलेनाशु सहसा क्रोधमूर्च्छितः ।भिन्नगात्रं शरैस्तीक्ष्णैर्मेरुं सूर्य इवांशुभिः

pramamātha talenāśu sahasā krodhamūrcchitaḥ | bhinnagātraṃ śaraistīkṣṇairmeruṃ sūrya ivāṃśubhiḥ

अर्थ श्लोक 59 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 61

हतैर्दानवमुख्यैस्तु रुद्रेणामिततेजसा ।रुद्रपारिषदान् सर्वान् निजघान महासुरः

hatairdānavamukhyaistu rudreṇāmitatejasā | rudrapāriṣadān sarvān nijaghāna mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

जब मिततेजस्वी रुद्रदेवके द्वारा मुख्य-मुख्य दानव मारे गये, ब॒महान्‌ असुर राहुने स्द्रदेवके समस्त पार्षदोंको भी रना आरम्भ किया

अध्याय 241

श्लोक 62

सृजन्तं शरवर्षाणि दानवं घोरदर्शनम् ।बिभेद समरे रुद्रो बाणैः सन्नतपर्वभिः

sṛjantaṃ śaravarṣāṇi dānavaṃ ghoradarśanam | bibheda samare rudro bāṇaiḥ sannataparvabhiḥ

हिन्दी अर्थ

बाणोंकी वर्षा करते हुए उस र दृष्टिवाले दानवको रुद्रदेवने युद्धस्थलमें झुकी हुई ठिवाले बाणोंद्वारा घायल कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 63

वर्तमाने महाघोरे सङ्ग्रामे लोमहर्षणे ।रुधिरौघा महावेगा महानद्यः प्रसुस्रवुः

vartamāne mahāghore saṅgrāme lomaharṣaṇe | rudhiraughā mahāvegā mahānadyaḥ prasusravuḥ

हिन्दी अर्थ

उस रोमाज्जकारी हाघोर संग्रामके होते समय वहाँ रक्तके प्रवाहसे युक्त हावेगशालिनी बड़ी-बड़ी नदियाँ बहने लगीं

अध्याय 241

श्लोक 64

दानवं समरे रुद्रो नीलाञ्जनचयोपमम् ।निर्बिभेद शरैस्तीक्ष्णैर्मेरुं सूर्य इवांशुभिः

dānavaṃ samare rudro nīlāñjanacayopamam | nirbibheda śaraistīkṣṇairmeruṃ sūrya ivāṃśubhiḥ

हिन्दी अर्थ

ददेवने समरभूमिमें काले कोयलेकी राशिके समान कान्तिवाले नव राहुको अपने तीखे बाणोंसे उसी प्रकार क्षत-विश्षत र दिया, जैसे सूर्य अपनी प्रखर किरणोंसे मेरुपर्वतको तप्त करते हैं

अध्याय 241

श्लोक 65

हतैर्दानवमुख्यैश्च शक्तिशूलपरश्वधैः ।पतितैः पर्वताभैश्च दानवैः कामरूपिभिः

hatairdānavamukhyaiśca śaktiśūlaparaśvadhaiḥ | patitaiḥ parvatābhaiśca dānavaiḥ kāmarūpibhiḥ

श्लोक 65–66 का हिन्दी अर्थ

शक्ति, शूल और फरसोंकी मारसे ब इच्छानुसार रूप धारण करनेवाले पर्वताकार मुख्य- ख्य दानव मरकर धराशायी हो गये और वह महाघोर माज्जकारी संग्राम चालू ही रह गया, तब उसमें घायल 7 दैत्य फूले हुए पलास वृक्षके समान शोभा पाने गे

अध्याय 241

श्लोक 66

वर्तमाने महाघोरे सङ्ग्रामे लोमहर्षणे ।विरेजुस्ते तदा दैत्याः पुष्पिता इव किंशुकाः

vartamāne mahāghore saṅgrāme lomaharṣaṇe | virejuste tadā daityāḥ puṣpitā iva kiṃśukāḥ

अर्थ श्लोक 65 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 67

महाभेरीमृदङ्गानां पणवानां च निःस्वनः ।शङ्खवेणुस्वनोन्मिश्रः सम्बभूवाद्भुतोपमः

mahābherīmṛdaṅgānāṃ paṇavānāṃ ca niḥsvanaḥ | śaṅkhaveṇusvanonmiśraḥ sambabhūvādbhutopamaḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय महाभेरी, मृदज् तथा पणवोंका भीर नाद जब शड्डु और वेणुकी ध्वनिसे मिल गया, तर अद्भुत-सा ही प्रतीत होने लगा

अध्याय 241

श्लोक 68

हतानां स्वनतां तत्र दैत्यानां चापि निःस्वनः ।देवानां च तथा तत्र शुश्रुवे दारुणो महान्

hatānāṃ svanatāṃ tatra daityānāṃ cāpi niḥsvanaḥ | devānāṃ ca tathā tatra śuśruve dāruṇo mahān

हिन्दी अर्थ

वहाँ आहत कर आर्तनाद करते हुए दैत्यों तथा देवताओंका अत्यन्त रुण शब्द सुनायी दे रहा था

अध्याय 241

श्लोक 69

तुरङ्गमखुरोत्कीर्णं रथनेमिसमुत्थितम् ।रुरोध मार्गं योधानां चक्षूंषि च धरारजः

turaṅgamakhurotkīrṇaṃ rathanemisamutthitam | rurodha mārgaṃ yodhānāṃ cakṣūṃṣi ca dharārajaḥ

हिन्दी अर्थ

घोड़ोंके टापों तथा के पहियोंसे उठी हुई धरतीकी धूलने वहाँ जूझते हुए द्वाओंके मार्ग तथा नेत्रोंको अवरुद्ध कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 70

शस्त्रपुष्पोपहारा सा तत्रासीद् युद्धमेदिनी ।दुर्दर्शा दुर्विगाह्या च मांसशोणितकर्दमा

śastrapuṣpopahārā sā tatrāsīd yuddhamedinī | durdarśā durvigāhyā ca māṃsaśoṇitakardamā

हिन्दी अर्थ

वहाँ रणभूमिको अस्त्र-शस्त्ररूपी पुष्पोंका उपहार अर्पित हो रहा था। उसमें मांस और रक्तकी ऐसी कीच जम गयी थी कि उसकी ओर देखना कठिन हो गया था और उसमें प्रवेश करना या चलना-फिरना तो और भी कठिन था

अध्याय 241

श्लोक 71

भग्नैः खड्गैर्गदाभिश्च शक्तितोमरपट्टिशैः ।अपविद्धैश्च भग्नैश्च रथैः साङ्ग्रामिकैर्हतैः

bhagnaiḥ khaḍgairgadābhiśca śaktitomarapaṭṭiśaiḥ | apaviddhaiśca bhagnaiśca rathaiḥ sāṅgrāmikairhataiḥ

श्लोक 71–73 का हिन्दी अर्थ

टूटी हुई तलवारों, गदाओं, शक्ति, तोमर और पहट्टिशों, टूटे फूटे होनेके कारण फेंके गये रथों, नष्ट हुए युद्धसम्बन्धी उपकरणों, मारे गये मतवाले हाथियों तथा देवताओं और दानवों, खण्डित होकर पृथ्वीपर पड़े हुए पहियों, धुरों, जूओं और शस्त्रोंसे भरा हुआ वह भयंकर युद्धक्षेत्र मांसाहारी जन्तुओंसे व्याप्त हो रहा था। उस समराज्णमें चारों ओर कबन्ध (बिना सिरके धड़) उछल रहे थे

अध्याय 241

श्लोक 72

निहतैः कुञ्जरैर्मत्तैस्तथा त्रिदशदानवैः ।चक्राक्षयुगशस्त्रैश्च भग्नैरवनिपातितैः

nihataiḥ kuñjarairmattaistathā tridaśadānavaiḥ | cakrākṣayugaśastraiśca bhagnairavanipātitaiḥ

अर्थ श्लोक 71 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 73

बभूवायोधनं घोरं पिशिताशनसङ्कुलम् ।उत्पेतुश्च कबन्धानि दिक्षु सर्वासु संयुगे

babhūvāyodhanaṃ ghoraṃ piśitāśanasaṅkulam | utpetuśca kabandhāni dikṣu sarvāsu saṃyuge

अर्थ श्लोक 71 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 74

अन्योन्यबद्धवैराणां दैत्यानां जयगृद्धिनाम् ।सम्प्रहारस्तथा युद्धे वर्ततेऽतिभयङ्करः

anyonyabaddhavairāṇāṃ daityānāṃ jayagṛddhinām | samprahārastathā yuddhe vartate'tibhayaṅkaraḥ

हिन्दी अर्थ

विजयकी अभिलाषा रखनेवाले देवता और दैत्य परस्पर बैर बाँधकर लड़ते थे। उस युद्धमें एक-दूसरेके प्रति होनेवाला उनका प्रहार बड़ा भयंकर था॥ '

अध्याय 241

श्लोक 75

सैन्यानां सम्प्रयुद्धानां शूराणामनिवर्तिनाम् ।अजस्य चैकपादस्य राहोश्चैव महात्मनः

sainyānāṃ samprayuddhānāṃ śūrāṇāmanivartinām | ajasya caikapādasya rāhoścaiva mahātmanaḥ

श्लोक 75–76 का हिन्दी अर्थ

उस युद्धमें सम्मिलित हुए शूरवीर सैनिक पीछे हटनेवाले नहीं थे। महात्मा अजैकपाद तथा महामनस्वी राहुकी भी यही स्थिति थी । वे सब क्रोधमें भरकर जब वहाँ एक-दूसरेपर आक्रमण करते थे, उस समय उनका अत्यन्त घोर कोलाहल प्रलयकालमें प्राणियोंके भीषण आर्तनाद तथा समुद्रोंके महान्‌ गर्जनकी भाँति सुनायी पड़ता था

अध्याय 241

श्लोक 76

तेषां तु तत्र पततां क्रुद्धानाशतिनिःस्वनः ।उद्वर्त इव भूतानां समुद्राणां तु शुश्रुवे

teṣāṃ tu tatra patatāṃ kruddhānāśatiniḥsvanaḥ | udvarta iva bhūtānāṃ samudrāṇāṃ tu śuśruve

अर्थ श्लोक 75 के साथ

अध्याय 241

श्लोक 77

तत्रैकस्तु सुधूम्राक्षः श्रीमान् रुद्रो मुनीश्वरः ।बिभेद केशिनं शक्त्या गदापरिघशूलभृत्

tatraikastu sudhūmrākṣaḥ śrīmān rudro munīśvaraḥ | bibheda keśinaṃ śaktyā gadāparighaśūlabhṛt

हिन्दी अर्थ

वहाँ एक तेजस्वी रुद्र सुधूम्राक्ष नामसे प्रसिद्ध एवं मुनीश्वर थे। वे शक्तिके साथ ही गदा, परिघ और शूल धारण करते थे। उन्होंने शक्तिके द्वारा केशीको घायल कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 78

नानाप्रहरणा घोरा भीमाक्षा भीमविक्रमाः ।निष्पेतू रुद्रदयिता महापारिषदास्तथा

nānāpraharaṇā ghorā bhīmākṣā bhīmavikramāḥ | niṣpetū rudradayitā mahāpāriṣadāstathā

हिन्दी अर्थ

उस समय नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र धारण करनेवाले, भयानक नेत्रवाले, भयंकर पराक्रमी तथा रुद्रदेवके प्रिय घोर महापार्षद वहाँ आ पहुँचे

अध्याय 241

श्लोक 79

रथमास्थाय च श्रीमांस्तप्तकाञ्चनकुण्डलः ।दानवैः संवृतः केशी युध्यते युद्धदुर्जयैः

rathamāsthāya ca śrīmāṃstaptakāñcanakuṇḍalaḥ | dānavaiḥ saṃvṛtaḥ keśī yudhyate yuddhadurjayaiḥ

हिन्दी अर्थ

केशी नामक दैत्य तपाये हुए सुवर्णके कुण्डलॉंसे अलंकृत और उत्तम शोभासे सम्पन्न था। वह रणदुर्जय दानवोंसे घिरा हुआ रथपर आरूढ़ होकर युद्ध करता था

अध्याय 241

श्लोक 80

तस्य सङ्ग्रामशौण्डस्य सङ्ग्रामेषु युयुत्सतः ।निपेतुरुग्रवीर्यस्य ज्वाला हि प्रसृता मुखात्

tasya saṅgrāmaśauṇḍasya saṅgrāmeṣu yuyutsataḥ | nipeturugravīryasya jvālā hi prasṛtā mukhāt

हिन्दी अर्थ

वह संग्राममें कुशल और उग्र बल- पराक्रमसे सम्पन्न था। जिस समय वह युद्धमें प्रवृत्त होता था, उस समय उसके मुखसे ज्वालाएँ प्रकट होकर फैलने लगती थीं

अध्याय 241

श्लोक 81

स तु सिंहर्षभस्कन्धः शार्दूलसमविक्रमः ।महाजलदसङ्काशो मृदङ्गध्वनिनिःस्वनः

sa tu siṃharṣabhaskandhaḥ śārdūlasamavikramaḥ | mahājaladasaṅkāśo mṛdaṅgadhvaniniḥsvanaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके कंधे सिंह और बैलोंके समान थे। उसका पराक्रम भी सिंहके ही समान था। उसका सिंहनाद महामेघोंकी गम्भीर गर्जना और मृदड्ों की ध्वनिके समान होता था

अध्याय 241

श्लोक 82

तस्य निष्पतमानस्य दानवैः संवृतस्य च ।बभूव सुमहानादः क्षोभयंस्त्रिदिवं यथा

tasya niṣpatamānasya dānavaiḥ saṃvṛtasya ca | babhūva sumahānādaḥ kṣobhayaṃstridivaṃ yathā

हिन्दी अर्थ

दानवोंसे घिरा हुआ वह दैत्य जब युद्धभूमिमें कूदा था, उस समय जो उसका महान्‌ सिंहनाद हुआ, वह स्वर्गलोकको क्षोभमें डालनेवाला था

अध्याय 241

श्लोक 83

तेन शब्देन वित्रस्ता त्रिदशानां महाचमूः ।द्रुमशैलप्रहरणा योद्धुमेवाभ्यवर्तत

tena śabdena vitrastā tridaśānāṃ mahācamūḥ | drumaśailapraharaṇā yoddhumevābhyavartata

हिन्दी अर्थ

उसकी उस गर्जनासे देवताओंकी विशाल सेना संत्रस्त हो उठी तो भी वृक्षों तथा पर्वतखण्डोंका प्रहार करती हुई युद्ध करनेके लिये ही सामने आकर डट गयी

अध्याय 241

श्लोक 84

तेषां च देवदैत्यानां युयुत्सूनां परस्परम् ।सन्निपातः सुतुमुलो रौद्रो लोकभयावहः

teṣāṃ ca devadaityānāṃ yuyutsūnāṃ parasparam | sannipātaḥ sutumulo raudro lokabhayāvahaḥ

हिन्दी अर्थ

मो$ध्याय: + ११६७५ परस्पर जूझनेकी इच्छावाले देवताओं और दैत्योंका तरह घमासान युद्ध बड़ा ही रौद्र तथा जगत्‌को भय देने- त्राला था

अध्याय 241

श्लोक 85

तेषां युद्धं महाघोरं सञ्जज्ञे लोमहर्षणम् ।देवदानवसङ्घानां प्राणांस्त्यक्त्वा महाहवे

teṣāṃ yuddhaṃ mahāghoraṃ sañjajñe lomaharṣaṇam | devadānavasaṅghānāṃ prāṇāṃstyaktvā mahāhave

हिन्दी अर्थ

देवताओं और दानवोंके समुदायोंका वह पहाघोर युद्ध प्राणोंका मोह छोड़कर हो रहा था। उस महासमरमें उस युद्धका वह दृश्य बड़ा ही रोमाज्ञकारी था

अध्याय 241

श्लोक 86

सर्वे ह्यतिबलाः शूरा सर्वे पर्वतसन्निभाः ।सर्वे सर्वास्त्रविद्वांसः सर्वे सर्वायुधोद्यताः ।त्रिदशा दानवाश्चैव परस्परजिघांसवः

sarve hyatibalāḥ śūrā sarve parvatasannibhāḥ | sarve sarvāstravidvāṃsaḥ sarve sarvāyudhodyatāḥ | tridaśā dānavāścaiva parasparajighāṃsavaḥ

हिन्दी अर्थ

वे सभी शूरवीर, अत्यन्त बलशाली तथा र्वतके समान विशालकाय थे। सभी सम्पूर्ण अस्त्रोंके वेद्वान्‌ थे और सभी सब प्रकारके अस्त्रोंसे सम्पन्न हो पुद्धके लिये उद्यत हुए थे। वे देवता और दानव दोनों ही एक-दूसरेके वधकी इच्छा रखते थे

अध्याय 241

श्लोक 87

तेषां वै नदतां शब्दः संयुगे मेघनिःस्वनः ।शुश्रुवेऽतिमहाघोरश्चरस्थावरकम्पनः

teṣāṃ vai nadatāṃ śabdaḥ saṃyuge meghaniḥsvanaḥ | śuśruve'timahāghoraścarasthāvarakampanaḥ

हिन्दी अर्थ

युद्धस्थलमें र्जना करते हुए उन समस्त योद्धाओंका शब्द महान्‌ पेघोंकी गर्जनाके समान सुनायी पड़ता था। वह महाघोर गब्द॒स्थावर-जड़म सभी प्राणियोंको कम्पित कर दनेवाला था

अध्याय 241

श्लोक 88

रेणुश्चारुणसङ्काशो भीमः स समपद्यत ।उद्भूतो देवदैत्यौघैः संरुरोध दिशो दश

reṇuścāruṇasaṅkāśo bhīmaḥ sa samapadyata | udbhūto devadaityaughaiḥ saṃrurodha diśo daśa

हिन्दी अर्थ

देवताओं और दैत्योंके समूहोंद्वारा डड़ायी गयी लाल रंगकी धूल वहाँ सब ओर फैल गयी। ह बड़ी भयंकर जान पड़ती थी। उसने दसों दिशाओंको मवरुद्ध कर दिया

अध्याय 241

श्लोक 89

अन्योन्यं रजसा तेन कौशेयारुणपाण्डुना ।संवृता बहुरूपेण ददृशुर्न च किञ्चन

anyonyaṃ rajasā tena kauśeyāruṇapāṇḍunā | saṃvṛtā bahurūpeṇa dadṛśurna ca kiñcana

हिन्दी अर्थ

लाल, पीली और सफेद हुरंगी धूलसे परस्पर आच्छादित हुए सैनिक कोई भी स्तु नहीं देख पाते थे

अध्याय 241

श्लोक 90

न ध्वजो न पताकाश्च न वर्म तुरगोऽपि वा ।आयुधं स्यन्दनो वापि दृश्यते नैव सारथिः

na dhvajo na patākāśca na varma turago'pi vā | āyudhaṃ syandano vāpi dṛśyate naiva sārathiḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय न ध्वजा देखायी देती थी न पताका, न कवच सूझता था न ड़ा। अस्त्र-शस्त्र, रथ अथवा सारथि कोई भी दृष्टिगोचर हीं होता था

अध्याय 241

श्लोक 91

स शब्दस्तुमुलस्तेषामन्योन्यमभिधावताम् ।श्रूयते तुमुलः शब्दो न रूपाणि चकाशिरे

sa śabdastumulasteṣāmanyonyamabhidhāvatām | śrūyate tumulaḥ śabdo na rūpāṇi cakāśire

हिन्दी अर्थ

एक-दूसरेके सम्मुख धावा करनेवाले न योद्धाओंका भयंकर शब्द सब ओर गूँजने लगा। नका वह तुमुलनाद तो सुनायी देता था, किंतु धूलके रण किसीके रूप नहीं सूझते थे

अध्याय 241

श्लोक 92

दानवास्तत्र सङ्क्रुद्धा दानवानेव जघ्निरे ।त्रिदशास्त्रिदशाश्चैव निजघ्नुस्तुमुले तदा

dānavāstatra saṅkruddhā dānavāneva jaghnire | tridaśāstridaśāścaiva nijaghnustumule tadā

हिन्दी अर्थ

वहाँ उस मुल युद्धमें क्रोधमें भरे हुए दानव दानवोंपर ही प्रहार रर बैठे तथा देवता देवताओंको ही मारने लगे

अध्याय 241

श्लोक 93

ते परांश्च विनिघ्नन्तः स्वांश्च युद्धे महासुरान् ।रुधिरार्द्रा तथा चक्रुर्मेदिनीमसुराः सुराः

te parāṃśca vinighnantaḥ svāṃśca yuddhe mahāsurān | rudhirārdrā tathā cakrurmedinīmasurāḥ surāḥ

हिन्दी अर्थ

देवता और असुर उस युद्धमें शत्रुपक्षके तथा अपने क्षके भी बड़े-बड़े देवताओं और असुरोंका संहार करने गे। उन दोनों पक्षोंके योद्धाओंने पृथ्वीको रक्तसे गीली 7र दिया

अध्याय 241

श्लोक 94

ततस्तु रुधिरौघेण संसिक्तमुदितं रजः ।शरीरशतसङ्कीर्णं बभूव धरणीतलम्

tatastu rudhiraugheṇa saṃsiktamuditaṃ rajaḥ | śarīraśatasaṅkīrṇaṃ babhūva dharaṇītalam

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर वह उड़ती हुई धूल रक्तके वाहसे भी भीगकर बैठ गयी, वहाँका धरातल सैकड़ों एशोंसे व्याप्त हो रहा था

अध्याय 241

श्लोक 95

शूलशक्तिगदाखड्गपरिघप्रासतोमरैः ।त्रिदशा दानवाश्चैव जघ्नुरन्योन्यमाहवे

śūlaśaktigadākhaḍgaparighaprāsatomaraiḥ | tridaśā dānavāścaiva jaghnuranyonyamāhave

हिन्दी अर्थ

देवता और दानव द्धमें परस्पर शूल, शक्ति, गदा, खड्ग, परिघ, प्रास और तोमरोंद्वारा प्रहार करते थे

अध्याय 241

श्लोक 96

बाहुभिः परिघाकारैर्निघ्नतः परिघैस्तथा ।रुद्रपारिषदान् सर्वान् सूदयन्ति स्म दानवाः

bāhubhiḥ parighākārairnighnataḥ parighaistathā | rudrapāriṣadān sarvān sūdayanti sma dānavāḥ

हिन्दी अर्थ

परिघतुल्य भुजाओं था परिघोंसे प्रहार करनेवाले समस्त रुद्रगणोंपर दानव ही अस्त्र-शस्त्रोंद्वारा आघात करते थे

अध्याय 241

श्लोक 97

रुद्रपारिषदाश्चैव महाद्रुममहाश्मभिः ।व्यदारयन्नतिक्रम्य शस्त्रैश्चादित्यसन्निभैः

rudrapāriṣadāścaiva mahādrumamahāśmabhiḥ | vyadārayannatikramya śastraiścādityasannibhaiḥ

हिन्दी अर्थ

रुद्रके र्षद भी बड़े-बड़े वृक्षों, विशाल प्रस्तरखण्डों तथा र्यतुल्य तेजस्वी शस्त्रोंद्वारा आगे बढ़कर दानवोंको दीर्ण करने लगे

अध्याय 241

श्लोक 98

एतस्मिन्नन्तरे क्रुद्धः केशी दानवसत्तमः ।सङ्ग्रामामर्षघोरः सन् स्वान्यनीकानि हर्षयन् ।तेषां परमसङ्क्रुद्धो वज्रमस्त्रमुदीरयत्

etasminnantare kruddhaḥ keśī dānavasattamaḥ | saṅgrāmāmarṣaghoraḥ san svānyanīkāni harṣayan | teṣāṃ paramasaṅkruddho vajramastramudīrayat

हिन्दी अर्थ

इसी बीचमें कुपित हुआ दानवशिरोमणि केशी पंग्राममें अमर्षके कारण घोर रूप धारण करके अपने पैनिकोंका हर्ष बढ़ाने लगा। उसने अत्यन्त क्द्ध होकर उन रुद्रपार्षदोंपर वज़ास्त्रका प्रयोग किया

अध्याय 241

श्लोक 99

वज्रेणास्त्रेण दिव्येन शस्त्रेण च महात्मना ।महापारिषदाः सर्वे निहता युधि दुर्जयाः

vajreṇāstreṇa divyena śastreṇa ca mahātmanā | mahāpāriṣadāḥ sarve nihatā yudhi durjayāḥ

हिन्दी अर्थ

उस पहामनस्वी दैत्यने दिव्य आयुध वज़ास्त्रके द्वारा समस्त महापार्षदोंको जो युद्धमें दुर्जय थे, मार गिराया

अध्याय 241

श्लोक 100

वज्रास्त्रपीडिता भ्रान्ता रुद्रपारिषदा युधि ।विप्रकीर्णद्रुमाः पेतुः शैला वज्रहता इव

vajrāstrapīḍitā bhrāntā rudrapāriṣadā yudhi | viprakīrṇadrumāḥ petuḥ śailā vajrahatā iva

हिन्दी अर्थ

उस युद्धस्थलमें वज़ास्त्रसे पीड़ित हुए रुद्रपार्षद चक्कर क्राटने लगे और जिनके वृक्ष बिखरकर गिर पड़े थे, त्ज़के मारे हुए उन पर्वतोंके समान धराशायी हो ये

अध्याय 241

श्लोक 101

एवं सुतुमुलं युद्धमभवल्लोमहर्षणम् ।केशिनः सह रुद्रेण तदद्भुतमिवाभवत्

evaṃ sutumulaṃ yuddhamabhavallomaharṣaṇam | keśinaḥ saha rudreṇa tadadbhutamivābhavat

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार केशीका रुद्रके साथ जो अत्यन्त भयंकर एवं रोमाज्जकारी युद्ध हुआ, वह अद्भुत-सा प्रतीत होता था

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit shlokas of the Harivamsa (Harivamsha, Vishnu and Bhavishya parvas) from sanskritdocuments.org. One chapter per adhyaya; verse numbers as printed in the source (restarting in each adhyaya). Appendix sections are not included. · प्राप्त 19/10/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with BORI Critical Edition of Mahabharata Khilaparvan.