Harivamsha Purana
311
अध्याय 311 / 318

Parva 3, Adhyāya 128

13 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ13 श्लोक

अध्याय 311

श्लोक 1

श्रीकृष्णेन हंसस्य वधं अथ भीतो महारौद्रमस्त्रं दृष्ट्वा नृपोत्तम ।हंसो राजा महाराज निश्चेष्ट इव सम्बभौ

śrīkṛṣṇena haṃsasya vadhaṃ atha bhīto mahāraudramastraṃ dṛṣṭvā nṛpottama | haṃso rājā mahārāja niśceṣṭa iva sambabhau

हिन्दी अर्थ

वैशम्पायनजी कहते हैं—नृपश्रेष्ठ ! महाराज! स महाभयंकर अस्त्रको देखकर राजा हंस भयके मारे श्रेष्ट-सा प्रतीत होने लगा

अध्याय 311

श्लोक 2

उत्प्लुत्य स रथात्तस्माद् यमुनामभ्यधावत ।यत्र कृष्णो हृषीकेशः कालियाहिं ममर्द ह

utplutya sa rathāttasmād yamunāmabhyadhāvata | yatra kṛṣṇo hṛṣīkeśaḥ kāliyāhiṃ mamarda ha

हिन्दी अर्थ

वह उस रथसे छलकर यमुनाजीकी ओर भागा, जहाँ पूर्वकालमें षीकेश भगवान्‌ श्रीकृष्णने कालियनागका मर्दन कया था

अध्याय 311

श्लोक 3

महाह्रदं महारौद्रं यावत्पातालसंस्थितम् ।तावद्दीर्घं महानीलं कालाञ्जननिभं हि यत्

mahāhradaṃ mahāraudraṃ yāvatpātālasaṃsthitam | tāvaddīrghaṃ mahānīlaṃ kālāñjananibhaṃ hi yat

हिन्दी अर्थ

वह महान्‌ हृद बड़ा भयंकर और तालपर्यन्त गहरा था। उसका विस्तार भी उतना ही ॥ा। वह काली अज्जनराशि (अथवा कोयले) -के मान महानील (या काला) प्रतीत होता था

अध्याय 311

श्लोक 4

तस्मिन् ह्रदे महाघोरे पपाताथ स हंसकः ।हंसे पतति तस्मिंस्तु महान् रावो बभूव ह

tasmin hrade mahāghore papātātha sa haṃsakaḥ | haṃse patati tasmiṃstu mahān rāvo babhūva ha

श्लोक 4–7 का हिन्दी अर्थ

सी महाघोर कालियहदमें हंस कूद पड़ा। उसके ददनेपर वहाँ बड़ा भारी धमाकेका-सा शब्द हुआ, मानो इन्द्रके द्वारा समुद्रमें गिराये जाते हुए पर्वतोंका कोलाहल प्रकट हुआ हो। तब जगदीश्र देवाधिदेव श्रीकृष्ण भी सम्पूर्ण जगत्‌को विस्मयमें डालते हुए-से रथसे उछलकर उस कुण्डमें हंसके ऊपर कूद पड़े। उस समय महाबाहु केशवने उसपर दोनों पैरोंसे प्रहार किया। नृपश्रेष्ठ जनमेजय! श्रीकृष्णके चरणोंका प्रहार पाकर राजा हंस मर गया-एऐसा कुछ लोग कहते हैं

अध्याय 311

श्लोक 5

गिरीणां पात्यमानानां समुद्र इव वज्रिणा ।रथादुत्प्लुत्य कृष्णोऽपि तस्योपरि पपात ह

girīṇāṃ pātyamānānāṃ samudra iva vajriṇā | rathādutplutya kṛṣṇo'pi tasyopari papāta ha

अर्थ श्लोक 4 के साथ

अध्याय 311

श्लोक 6

देवदेवो जगन्नाथो जगद् विस्मापयन्निव ।प्राहरन् तं महाबाहुः पादाभ्यामथ केशवः

devadevo jagannātho jagad vismāpayanniva | prāharan taṃ mahābāhuḥ pādābhyāmatha keśavaḥ

अर्थ श्लोक 4 के साथ

अध्याय 311

श्लोक 7

पादक्षेपं नृपस्तस्माल्लब्ध्वा हंसो नृपोत्तम ।ममार च नृपश्रेष्ठ केचिदेवं वदन्ति हि

pādakṣepaṃ nṛpastasmāllabdhvā haṃso nṛpottama | mamāra ca nṛpaśreṣṭha kecidevaṃ vadanti hi

अर्थ श्लोक 4 के साथ

अध्याय 311

श्लोक 8

अन्ये पातालमायातो भक्षितः पन्नगैरिति ।अद्यापि नैव राजेन्द्र दृष्ट इत्यनुशुश्रुम

anye pātālamāyāto bhakṣitaḥ pannagairiti | adyāpi naiva rājendra dṛṣṭa ityanuśuśruma

हिन्दी अर्थ

राजेन्द्र! दूसरोंका कहना है कि वह पातालमें धँस गया और वहाँ सर्प उसे खा गये। वह अबतक वहाँसे लौटा नहीं देखा गया—ऐसा उसके विषयमें हमने सुना है

अध्याय 311

श्लोक 9

यथापूर्वं जगन्नाथो रथं समुपजग्मिवान् ।हते तस्मिन् महाराज धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः

yathāpūrvaṃ jagannātho rathaṃ samupajagmivān | hate tasmin mahārāja dharmaputro yudhiṣṭhiraḥ

श्लोक 9–10 का हिन्दी अर्थ

तदनन्तर जगदी श्वर श्रीकृष्ण पूर्ववत्‌ रथपर आ गये। महाराज ! हंसके मारे जानेपर ही तुम्हारे पूर्वपितामह धर्मपुत्र राजा युधिष्टिरने राजसूय यज्ञ किया था। यदि हंस जीवित होता तो कौन उस यज्ञके सामने मस्तक झुकाता

अध्याय 311

श्लोक 10

अकरोत् राजसूयं च तव पूर्वपितामहः ।यदि जीवेदसौ हंसः को नमस्यति तं क्रतुम्

akarot rājasūyaṃ ca tava pūrvapitāmahaḥ | yadi jīvedasau haṃsaḥ ko namasyati taṃ kratum

अर्थ श्लोक 9 के साथ

अध्याय 311

श्लोक 11

स च सर्वास्त्रविन्नित्यं रुद्राल्लब्धवरः प्रभो ।क्षणादेव महाराज वार्तेयं गामगाहत

sa ca sarvāstravinnityaṃ rudrāllabdhavaraḥ prabho | kṣaṇādeva mahārāja vārteyaṃ gāmagāhata

श्लोक 11–12 का हिन्दी अर्थ

प्रभो! वह भगवान्‌ रुद्रसे वर पाकर सदाके लिये सम्पूर्ण अस्त्रोंका ज्ञाता हो गया था। महाराज! क्षणभरमें यह समाचार भूमण्डलमें फैल गया। 'शन्नुओंका मान-मर्दन करनेवाले श्रीकृष्णने हंसको मार डाला, हंसको मार डाला '—यह गन्धर्वराजगण देवलोकमें दिन-रात गान करने लगे

अध्याय 311

श्लोक 12

हतो हंसो हतो हंसः कृष्णेन रिपुमर्दिना ।जगुर्गन्धर्वपतयो देवलोके दिवानिशम्

hato haṃso hato haṃsaḥ kṛṣṇena ripumardinā | jagurgandharvapatayo devaloke divāniśam

अर्थ श्लोक 11 के साथ

अध्याय 311

श्लोक 13

कृष्णेन लोकनाथेन विष्णुना प्रभविष्णुना ।यमुनाया ह्रदे घोरे हंसो निहत इत्यपि

kṛṣṇena lokanāthena viṣṇunā prabhaviṣṇunā | yamunāyā hrade ghore haṃso nihata ityapi

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण जगत्‌के स्वामी प्रभावशाली विष्णुस्वरूप भगवान्‌ श्रीकृष्णने यमुनाके भयंकर हृदमें हंसको मार डाला।' इस प्रकार उनके यशका सर्वत्र गान होने लगा

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit shlokas of the Harivamsa (Harivamsha, Vishnu and Bhavishya parvas) from sanskritdocuments.org. One chapter per adhyaya; verse numbers as printed in the source (restarting in each adhyaya). Appendix sections are not included. · प्राप्त 19/10/2026

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6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
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