Harivamsha Purana
91
अध्याय 91 / 318

Parva 2, Adhyāya 36

40 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ40 श्लोक

अध्याय 91

श्लोक 1

वृष्णिवंश्यानां जरासन्धस्य सैनिकेभिः सह युद्धं, बलरामस्य जरासन्धेन सह गदायुद्धं, पराजितस्य जरासन्धस्य पलायनं ततो युद्धानि वृष्णीनां बभूवुः सुमहान्त्यथ ।मागधस्य महामात्रैर्नृपैश्चैवानुयायिभिः

vṛṣṇivaṃśyānāṃ jarāsandhasya sainikebhiḥ saha yuddhaṃ, balarāmasya jarāsandhena saha gadāyuddhaṃ, parājitasya jarāsandhasya palāyanaṃ tato yuddhāni vṛṣṇīnāṃ babhūvuḥ sumahāntyatha | māgadhasya mahāmātrairnṛpaiścaivānuyāyibhiḥ

हिन्दी अर्थ

बैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! तदनन्तर जरासंधके महावतों और अनुगामी नरेशोंके साथ वृष्णिवंशियोंके कई बड़े-बड़े युद्ध हुए

अध्याय 91

श्लोक 2

रुक्मिणा वासुदेवस्य भीष्मकेणाहुकस्य च ।क्रथेन वसुदेवस्य कैशिकस्य तु बभ्रुणा

rukmiṇā vāsudevasya bhīṣmakeṇāhukasya ca | krathena vasudevasya kaiśikasya tu babhruṇā

श्लोक 2–4 का हिन्दी अर्थ

भरतत्रेष्ठ ! रुक्मीके साथ वासुदेव श्रीकृष्णका, भीष्मकके साथ आहुक (उग्रसेन)-का, क्रथके साथ वसुदेवका, बभ्चु (अक्रूर) -के साथ कैशिकका, गदके साथ चेदिराज शिशुपालका, शंकुके साथ दन्तवक्‍्त्रका तथा अन्य सैनिकोंके साथ वृष्णिकुलके महामना वीर नरेशोंका, सारांश यह कि उभय पक्षके सैनिकोंका प्रतिद्वन्धी सैनिकोंके साथ दारुण द्वन्द्र युद्ध होने लगा, जो सत्ताईस दिनोंतक चलता रहा

अध्याय 91

श्लोक 3

गदेन चेदिराजस्य दन्तवक्त्रस्य शङ्कुना ।तथान्यैर्वृष्णिवीराणां नृपाणां च महात्मनाम्

gadena cedirājasya dantavaktrasya śaṅkunā | tathānyairvṛṣṇivīrāṇāṃ nṛpāṇāṃ ca mahātmanām

अर्थ श्लोक 2 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 4

युद्धमासीद्धि सैन्यानां सैनिकैर्भरतर्षभ ।अहानि पञ्च चैकं च षट् सप्ताष्टौ च दारुणम्

yuddhamāsīddhi sainyānāṃ sainikairbharatarṣabha | ahāni pañca caikaṃ ca ṣaṭ saptāṣṭau ca dāruṇam

अर्थ श्लोक 2 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 5

गजैर्गजा हयैरश्वाः पदाताश्च पदातिभिः ।रथै रथा विमिश्राश्च योधा युयुधिरे नृप

gajairgajā hayairaśvāḥ padātāśca padātibhiḥ | rathai rathā vimiśrāśca yodhā yuyudhire nṛpa

हिन्दी अर्थ

नरेधर! हाथियोंसे हाथी, घोड़ोंसे घोड़े, पैदलोंसे पैदल और रथोंसे रथ मिश्रित हो गये और इस प्रकार घोल-मेल कर सभी योद्धा विपक्षियोंके साथ युद्ध करने लगे

अध्याय 91

श्लोक 6

जरासन्धस्य नृपते रामेणासीत् समागमः ।महेन्द्रस्येव वृत्रेण दारुणो रोमहर्षणः

jarāsandhasya nṛpate rāmeṇāsīt samāgamaḥ | mahendrasyeva vṛtreṇa dāruṇo romaharṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा जरासंधका बलरामजीके साथ उसी प्रकार दारुण एवं रोमाज्जकारी संघर्ष हुआ, जैसा वृत्रासुरके साथ देवराज इन्द्रका हुआ था

अध्याय 91

श्लोक 7

अवेक्ष्य रुक्मिणीं कृष्णो रुक्मिणं न व्यपोथयत् ।ज्वलनार्कांशुसङ्काशानाशीविषविषोपमान्

avekṣya rukmiṇīṃ kṛṣṇo rukmiṇaṃ na vyapothayat | jvalanārkāṃśusaṅkāśānāśīviṣaviṣopamān

श्लोक 7–11 का हिन्दी अर्थ

रुक्मिणीके साथ भविष्यमें होनेवाले सम्बन्धको दृष्टिमें रखकर श्रीकृष्णने रुक्मीको नहीं मारा, उसकी ओरसे आनेवाले अग्नि और सूर्यकी किरणोंके समान तेजस्वी तथा विषधर सर्पोंक समान विषैले बाणोंका उन्होंने अपनी शिक्षाके बलसे निवारण कर दिया। राजन्‌ ! इस प्रकार दोनों सेनाओंके सैनिकसमूहोंका महान्‌ विनाश हुआ। वहाँ रक्त और माँसकी कीच जम गयी। योद्धाओंके उस महान्‌ संहारमें चारों ओरसे बहुत-से कबन्ध उठने लगे, जिनकी गणना नहीं की जा सकती थी। रथारूढ़ वीर बलरामने विषधर सर्पोंके समान भयंकर बाणोंद्वारा जरासंधको आच्छादित करते हुए उसपर आक्रमण किया तथा मगधराज भी अपने शीघ्रगामी रथद्वारा बड़े वेगसे उनका सामना करनेके लिये पहुँचा

अध्याय 91

श्लोक 8

वारयामास कृष्णो वै शरांस्तस्य तु शिक्षया ।इत्येषां सुमहानासीद् बलौघानां परिक्षयः

vārayāmāsa kṛṣṇo vai śarāṃstasya tu śikṣayā | ityeṣāṃ sumahānāsīd balaughānāṃ parikṣayaḥ

अर्थ श्लोक 7 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 9

उभयोः सेनयो राजन् मांसशोणितकर्दमः ।कबन्धानि समुत्तस्थुः सुबहूनि समन्ततः

ubhayoḥ senayo rājan māṃsaśoṇitakardamaḥ | kabandhāni samuttasthuḥ subahūni samantataḥ

अर्थ श्लोक 7 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 10

तस्मिन् विमर्दे योधानां सङ्ख्यावृत्तिकराणि च ।रथी रामो जरासन्धं शरैराशीविषोपमैः

tasmin vimarde yodhānāṃ saṅkhyāvṛttikarāṇi ca | rathī rāmo jarāsandhaṃ śarairāśīviṣopamaiḥ

अर्थ श्लोक 7 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 11

आवृण्वन्नभ्ययाद् वीरस्तं च राजा स मागधः ।अभ्यवर्तत वेगेन स्यन्दनेनाशुगामिना

āvṛṇvannabhyayād vīrastaṃ ca rājā sa māgadhaḥ | abhyavartata vegena syandanenāśugāminā

अर्थ श्लोक 7 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 12

अन्योन्यं विविधैरस्त्रैविद्ध्वा विद्ध्वा विनेदतुः ।तौ क्षीणशस्त्रौ विरथौ हताश्वौ हतसारथी

anyonyaṃ vividhairastraividdhvā viddhvā vinedatuḥ | tau kṣīṇaśastrau virathau hatāśvau hatasārathī

श्लोक 12–14 का हिन्दी अर्थ

वे दोनों नाना प्रकारके अस्त्रोंद्वारा एक-दूसरेको घायल करके जोर-जोरसे गरजते थे। दोनोंके अस्त्र-शस्त्र क्षीण हो गये, दोनों ही रथहीन हो गये तथा दोनोंके ही घोड़े और सारथि मारे गये। ड३ उस दशामें वे दोनों पराक्रमी योद्धा गदा हाथमें लेकर 'एक-दूसरेपर टूट पड़े। हाथमें गदा उठाये वे दोनों महामनस्वी वीर पृथ्वीको कम्पित करते हुए वहाँ एक-एक शिखरवाले दो पर्वतोंके समान दिखायी देते थे। उन दोनों महाबाहु वीरोंको युद्धके लिये उद्यत देख दूसरे योद्धाओंके युद्ध बंद हो गये। उन दोनोंकी गदायुद्धमें ख्याति थी । वे दोनों बड़े रोषमें भरकर एक-दूसरेपर धावा करते थे

अध्याय 91

श्लोक 13

गदे गृहीत्वा विक्रान्तावन्योन्यमभिधावताम् ।कम्पयन्तौ भुवं वीरौ तावुद्यतगदावुभौ

gade gṛhītvā vikrāntāvanyonyamabhidhāvatām | kampayantau bhuvaṃ vīrau tāvudyatagadāvubhau

अर्थ श्लोक 12 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 14

ददृशाते महात्मानौ गिरी सशिखराविव ।व्युपारमन्त युद्धानि पश्यता तौ महाभुजौ ।संरब्धावभिधावन्तौ गदायुद्धेषु विश्रुतौ

dadṛśāte mahātmānau girī saśikharāviva | vyupāramanta yuddhāni paśyatā tau mahābhujau | saṃrabdhāvabhidhāvantau gadāyuddheṣu viśrutau

अर्थ श्लोक 12 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 15

उभौ तौ परमाचार्यौ लोके ख्यातौ महाबलौ ।मत्ताविव गजौ युद्धे तावन्योन्यमयुध्यताम्

ubhau tau paramācāryau loke khyātau mahābalau | mattāviva gajau yuddhe tāvanyonyamayudhyatām

हिन्दी अर्थ

वे दोनों महाबली वीर संसारमें गदायुद्धके उत्तम आचार्यके रूपमें विख्यात थे तथा जैसे दो मतवाले हाथी लड़ते हैं, उसी प्रकार रणभूमिमें वे एक-दूसरेके साथ जूझ रहे थे

अध्याय 91

श्लोक 16

ततो देवाः सगन्धर्वाः सिद्धाश्च समहर्षयः ।समन्ततश्चाप्सरसः समाजग्मुः सहस्रशः

tato devāḥ sagandharvāḥ siddhāśca samaharṣayaḥ | samantataścāpsarasaḥ samājagmuḥ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय गन्धवॉसहित देवता, सिद्ध, महर्षि तथा सहस्रों अप्सराएँ सब ओरसे उस युद्धको देखनेके लिये आ पहुँचीं

अध्याय 91

श्लोक 17

तद् देवयक्षगन्धर्वमहर्षिभिरलङ्कृतम् ।शुशुभेऽभ्यधिकं राजन् दिवं ज्योतिर्गणैरिव

tad devayakṣagandharvamaharṣibhiralaṅkṛtam | śuśubhe'bhyadhikaṃ rājan divaṃ jyotirgaṇairiva

श्लोक 17–18 का हिन्दी अर्थ

राजन्‌ ! देवताओं, यक्षों, गन्धर्वों और महर्षियोंसे अलंकृत हुआ आकाशका वह भाग नक्षत्रसमूहोंसे विभूषित हुआ-सा अधिक शोभा पाने लगा। महाबली जरासंध बायेंसे पैंतरा देकर बलरामजीकी ओर दौड़ा और बलरामजीने दाहिनेसे उसपर आक्रमण किया

English

Mahadeva said:—"O ye beautiful Apsaras, for satisfying me do you enter here without any anxiety and please the Yādavas as their playing maids. Show them all the accomplishments that you possess in various musical instruments, dancing, singing and other mysterious arts. They are all like my limbs. If you please them therefore you will meet with your well-being." Having accepted that command of Hari's with lowering heads those Apsaras joined the Yādavas as their playful maids (39–44).

अध्याय 91

श्लोक 18

अभिदुद्राव रामं तु जरासन्धो महाबलः ।सव्यं मण्डलमाश्रित्य बलदेवस्तु दक्षिणम्

abhidudrāva rāmaṃ tu jarāsandho mahābalaḥ | savyaṃ maṇḍalamāśritya baladevastu dakṣiṇam

अर्थ श्लोक 17 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 19

प्रहरन्तौ ततोऽन्योन्यं गदायुद्धविशारदौ ।दन्ताभ्यामिव मातङ्गौ नादयन्तौ दिशो दश

praharantau tato'nyonyaṃ gadāyuddhaviśāradau | dantābhyāmiva mātaṅgau nādayantau diśo daśa

श्लोक 19–20 का हिन्दी अर्थ

गदायुद्धमें कुशल वे दोनों वीर दसों दिशाओंको निनादित करते हुए एक-दूसरेपर उसी प्रकार प्रहार करने लगे, जैसे दो मतवाले हाथी परस्पर दाँतोंसे आघात करते हों । बलरामजी जब गदाका आघात करते, तब वज़पातके समान भयानक शब्द सुनायी पड़ता था तथा रणभूमिमें जरासंधके गदाघातसे ऐसी आवाज होती थी, मानो कोई पर्वत फट पड़ा हो

अध्याय 91

श्लोक 20

गदानिपातो रामस्य शुश्रुवेऽशनिनिःस्वनः ।जरासन्धस्य च रणे पर्वतस्येव दीर्यतः

gadānipāto rāmasya śuśruve'śaniniḥsvanaḥ | jarāsandhasya ca raṇe parvatasyeva dīryataḥ

अर्थ श्लोक 19 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 21

न स्म कम्पयते रामं जरासन्धकरच्युता ।गदा गदाभृतां श्रेष्ठं विन्ध्यं गिरिमिवानिलः

na sma kampayate rāmaṃ jarāsandhakaracyutā | gadā gadābhṛtāṃ śreṣṭhaṃ vindhyaṃ girimivānilaḥ

श्लोक 21–22 का हिन्दी अर्थ

जैसे प्रचण्ड वायु विन्ध्यपर्वतको नहीं हिला सकती, उसी प्रकार जरासंधके हाथसे छूटी हुई गदा गदाधारियों में श्रेष्ठ बलरामजीको कम्पित नहीं कर पाती थी। बलरामजीकी गदाके वेगको मगधराज जरासंध अपने बलकी अधिकताके कारण महान्‌ धैर्यके साथ सह लेता था तथा अपनी शिक्षाके द्वारा उनके प्रहारको व्यर्थ कर देता था

अध्याय 91

श्लोक 22

रामस्य तु गदावेगं वीर्यात् स मगधेश्वरः ।सेहे धैर्येण महता शिक्षया च व्यपोहयत्

rāmasya tu gadāvegaṃ vīryāt sa magadheśvaraḥ | sehe dhairyeṇa mahatā śikṣayā ca vyapohayat

अर्थ श्लोक 21 के साथ

English

Mahadeva said:—"O ye beautiful Apsaras, for satisfying me do you enter here without any anxiety and please the Yādavas as their playing maids. Show them all the accomplishments that you possess in various musical instruments, dancing, singing and other mysterious arts. They are all like my limbs. If you please them therefore you will meet with your well-being." Having accepted that command of Hari's with lowering heads those Apsaras joined the Yādavas as their playful maids (39–44).

अध्याय 91

श्लोक 23

एवं तौ तत्र सङ्ग्रामे विचरन्तौ महाबलौ ।मण्डलानि विचित्राणि विचेरतुररिन्दमौ

evaṃ tau tatra saṅgrāme vicarantau mahābalau | maṇḍalāni vicitrāṇi viceraturarindamau

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार शत्रुओंका दमन करनेवाले वे दोनों महाबली योद्धा उस संग्राममें विचित्र पैंतरे दिखाते हुए विचर रहे थे

अध्याय 91

श्लोक 24

व्यायच्छन्तौ चिरं कालं परिश्रान्तौ च तस्थतुः ।समाश्वस्य मुहूर्तं तु पुनरन्योन्यमाहताम्

vyāyacchantau ciraṃ kālaṃ pariśrāntau ca tasthatuḥ | samāśvasya muhūrtaṃ tu punaranyonyamāhatām

हिन्दी अर्थ

देरतक परिश्रम करके थक जानेपर दोनों खड़े हो जाते थे; फिर दो घड़ीतक सुस्ताकर एक-दूसरेपर प्रहार करने लगते थे

अध्याय 91

श्लोक 25

एवं तौ योधमुख्यौ तु समं युयुधतुश्चिरम् ।न च तौ युद्धवैमुख्यमुभावेव प्रजग्मतुः

evaṃ tau yodhamukhyau tu samaṃ yuyudhatuściram | na ca tau yuddhavaimukhyamubhāveva prajagmatuḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार वे दोनों प्रमुख योद्धा समानभावसे देरतक लड़ते रहे। बे दोनों ही युद्धसे विमुख नहीं हुए

अध्याय 91

श्लोक 26

अथापश्यद् गदायुद्धे विशेषं तस्य वीर्यवान् ।रामः क्रुद्धो गदां त्यक्त्वा जग्राह मुसलोत्तमम्

athāpaśyad gadāyuddhe viśeṣaṃ tasya vīryavān | rāmaḥ kruddho gadāṃ tyaktvā jagrāha musalottamam

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर पराक्रमी बलरामजीने जब गदा-युद्धमें जरासंधकी विशेषता देखी, तब उन्होंने कुपित हो गदा त्यागकर उत्तम मूसल हाथमें लिया

English

Mahadeva said:—"O ye beautiful Apsaras, for satisfying me do you enter here without any anxiety and please the Yādavas as their playing maids. Show them all the accomplishments that you possess in various musical instruments, dancing, singing and other mysterious arts. They are all like my limbs. If you please them therefore you will meet with your well-being." Having accepted that command of Hari's with lowering heads those Apsaras joined the Yādavas as their playful maids (39–44).

अध्याय 91

श्लोक 27

तमुद्यन्तं तदा दृष्ट्वा मुसलं घोरदर्शनम् ।अमोघं बलदेवेन क्रुद्धेन तु महारणे

tamudyantaṃ tadā dṛṣṭvā musalaṃ ghoradarśanam | amoghaṃ baladevena kruddhena tu mahāraṇe

श्लोक 27–28 का हिन्दी अर्थ

उस महासमरमें कुपित हुए बलदेवजीके द्वारा उस भयानक तथा अमोघ मूसलको उठाया जाता देख आकाशमें सब लोगोंके सामने स्पष्ट शब्दोंमें देववाणी सुनायी दी। उसने हल-मूसल उठाये हुए बलदेवजीसे कहा—

अध्याय 91

श्लोक 28

ततोऽन्तरिक्षे वागासीत् सुस्वरा लोकसाक्षिणी ।उवाच बलदेवं तं समुद्यतहलायुधम्

tato'ntarikṣe vāgāsīt susvarā lokasākṣiṇī | uvāca baladevaṃ taṃ samudyatahalāyudham

अर्थ श्लोक 27 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 29

न त्वया राम वध्योऽयमलं सेदेन मानद ।विदितोऽस्य मया मृत्युस्तस्मात्साधु व्युपारम ।अचिरेणैव कालेन प्राणांस्त्यक्ष्यति मागधः

na tvayā rāma vadhyo'yamalaṃ sedena mānada | vidito'sya mayā mṛtyustasmātsādhu vyupārama | acireṇaiva kālena prāṇāṃstyakṣyati māgadhaḥ

हिन्दी अर्थ

दूसरोंको मान देनेवाले बलरामजी ! जरासंधका वध आपके हाथसे होनेवाला नहीं है; अतः खेद करनेकी आवश्यकता नहीं है। इसकी मृत्युका हेतु मुझे विदित हो गया है; अत: आप इसे मारनेकी चेष्टासे निवृत्त हो जाइये। मगधराज जरासंध थोड़े ही समयमें अपने प्राणोंका परित्याग करेगा

English

Mahadeva said:—"O ye beautiful Apsaras, for satisfying me do you enter here without any anxiety and please the Yādavas as their playing maids. Show them all the accomplishments that you possess in various musical instruments, dancing, singing and other mysterious arts. They are all like my limbs. If you please them therefore you will meet with your well-being." Having accepted that command of Hari's with lowering heads those Apsaras joined the Yādavas as their playful maids (39–44).

अध्याय 91

श्लोक 30

जरासन्धस्तु तच्छ्रुत्वा विमनाः समपद्यत ।न प्रजह्रे ततस्तस्मै पुनरेव हलायुधः

jarāsandhastu tacchrutvā vimanāḥ samapadyata | na prajahre tatastasmai punareva halāyudhaḥ

हिन्दी अर्थ

यह सुनकर जरासंधका मन उदास हो गया और बलरामजीने फिर उसपर प्रहार नहीं किया

अध्याय 91

श्लोक 31

तौ व्युपारमतां युद्धे वृष्णयस्ते च पार्थिवाः ।असक्तमभवद् युद्धं तेषामेवं सुदारुणम्

tau vyupāramatāṃ yuddhe vṛṣṇayaste ca pārthivāḥ | asaktamabhavad yuddhaṃ teṣāmevaṃ sudāruṇam

श्लोक 31–35 का हिन्दी अर्थ

अब वे दोनों युद्धसे विरत हो गये; फिर तो वृष्णिवंशी योद्धा तथा दूसरे राजाओंने भी युद्ध बंद कर दिया। महाराज! इस प्रकार दीर्घकालतक एक-दूसरेपर प्रहार करते हुए उन योद्धाओंका जो अत्यन्त भयंकर युद्ध अविराम गतिसे चलता आ रहा था, वह शान्त हो गया। राजा जरासंध जब परास्त होकर युद्धसे हट गया और सूर्यदेव अस्त हो गये, तब रातके समय यादवोंने फिर उसका पीछा नहीं किया । भगवान्‌ श्रीकृष्णद्वारा सुरक्षित महाबली यादव अपने लक्ष्यमें सफल हो चुके थे, अत: वे अपनी सेना साथ लेकर बड़ी प्रसन्नताके साथ मथुरापुरीमें लौट आये। इसी तरह आकाश या दिव्य लोकसे जो आयुध आये थे, वे भी तत्काल अन्तर्धान हो गये। इधर राजा जरासंध भी उदास होकर अपनी पुरीको लौट गया। उसके साथ जो राजा लोग आये थे, वे भी अपने-अपने राष्ट्रोंको ही लौट गये

अध्याय 91

श्लोक 32

दीर्घकालं महाराज निघ्नतामितरेतरम् ।पराजिते त्वपक्रान्ते जरासन्धे महीपतौ

dīrghakālaṃ mahārāja nighnatāmitaretaram | parājite tvapakrānte jarāsandhe mahīpatau

अर्थ श्लोक 31 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 33

अस्तं याते दिनकरे नानुसस्रुस्तदा निशि ।समानीय स्वकं सैन्यं लब्धलक्ष्या महाबलाः

astaṃ yāte dinakare nānusasrustadā niśi | samānīya svakaṃ sainyaṃ labdhalakṣyā mahābalāḥ

अर्थ श्लोक 31 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 34

पुरीं प्रविविशुर्हृष्टाः केशवेनाभिपालिताः ।खाच्च्युतान्यायुधान्येवं तान्येवान्तर्दधुस्तदा

purīṃ praviviśurhṛṣṭāḥ keśavenābhipālitāḥ | khāccyutānyāyudhānyevaṃ tānyevāntardadhustadā

अर्थ श्लोक 31 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 35

जरासन्धोऽपि नृपतिर्बिमनाः स्वपुरीं ययौ ।राजानश्चानुगा येऽस्य स्वराष्ट्राण्येव ते ययुः

jarāsandho'pi nṛpatirbimanāḥ svapurīṃ yayau | rājānaścānugā ye'sya svarāṣṭrāṇyeva te yayuḥ

अर्थ श्लोक 31 के साथ

अध्याय 91

श्लोक 36

जरासन्धं तु ते जित्वा मेनिरे नैव निर्जितम् ।वृष्णयः कुरुशार्दूल राजा ह्यतिबलः स वै

jarāsandhaṃ tu te jitvā menire naiva nirjitam | vṛṣṇayaḥ kuruśārdūla rājā hyatibalaḥ sa vai

हिन्दी अर्थ

कुरुश्रेष्ठ ! वृष्णिवंशी वीर जरासंधको जीतकर भी उसे हारा हुआ नहीं मानते थे; क्योंकि उस राजाके पास बहुत बड़ी सेना थी तथा वह स्वयं भी अत्यन्त बलशाली था

अध्याय 91

श्लोक 37

दश चाष्टौ च सङ्ग्रामाञ्जरासन्धस्य यादवाः ।ददुर्न चैनं समरे हन्तुं शेकुर्महाबलाः

daśa cāṣṭau ca saṅgrāmāñjarāsandhasya yādavāḥ | dadurna cainaṃ samare hantuṃ śekurmahābalāḥ

हिन्दी अर्थ

महाबली यादवोंने जरासंधको अठारह बार युद्धका अवसर प्रदान किया; किंतु वे किसी भी समरमें उसे मार न सके

अध्याय 91

श्लोक 38

अक्षौहिण्यश्च तस्यासन् विंशतिश्च महामते ।जरासन्धस्य नृपतेस्तदर्थं याः समागताः

akṣauhiṇyaśca tasyāsan viṃśatiśca mahāmate | jarāsandhasya nṛpatestadarthaṃ yāḥ samāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

महामते! राजा जरासंधके पास बीस अक्षौहिणी सेनाएँ थीं, जो उसके लिये लड़नेको आयी थीं

अध्याय 91

श्लोक 39

अल्पत्वादभिभूतास्तु वृष्णयो भरतर्षभ ।बार्हद्रथेन राजेन्द्र राजभिः सहितेन वै

alpatvādabhibhūtāstu vṛṣṇayo bharatarṣabha | bārhadrathena rājendra rājabhiḥ sahitena vai

हिन्दी अर्थ

भरतश्रेष्ठ ! राजेन्द्र ! वृष्णिवंशी वीर संख्यामें बहुत कम थे, इसलिये वे राजाओंसहित जरासंधसे अभिभूत हो जाते थे

English

Mahadeva said:—"O ye beautiful Apsaras, for satisfying me do you enter here without any anxiety and please the Yādavas as their playing maids. Show them all the accomplishments that you possess in various musical instruments, dancing, singing and other mysterious arts. They are all like my limbs. If you please them therefore you will meet with your well-being." Having accepted that command of Hari's with lowering heads those Apsaras joined the Yādavas as their playful maids (39–44).

अध्याय 91

श्लोक 40

जित्वा तु मागधं सङ्ख्ये जरासन्धं महीपतिम् ।विहरन्ति स्म सुखिनो बृष्णिसिंहा महारथाः

jitvā tu māgadhaṃ saṅkhye jarāsandhaṃ mahīpatim | viharanti sma sukhino bṛṣṇisiṃhā mahārathāḥ

हिन्दी अर्थ

मगधके राजा पृथ्वीपति जरासंधको इस प्रकार युद्धमें जीतकर वृष्णिवंशके सिंह-जैसे पराक्रमी महारथी सुखपूर्वक वहाँ विहार करने लगे

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit shlokas of the Harivamsa (Harivamsha, Vishnu and Bhavishya parvas) from sanskritdocuments.org. One chapter per adhyaya; verse numbers as printed in the source (restarting in each adhyaya). Appendix sections are not included. · प्राप्त 19/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

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पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with BORI Critical Edition of Mahabharata Khilaparvan.