Mahanarayana Upanishad
63
अध्याय 63 / 79

Anuvāka 63

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 63

श्लोक 1

तिलाञ्जुहोमि सरसान् सपिष्टान् गन्धार मम चित्ते रमन्तु स्वाहा

tilāñjuhomi sarasān sapiṣṭān gandhāra mama citte ramantu svāhā

हिन्दी अर्थ

मैं सरस और पिसे हुए तिलों की आहुति देता हूँ; हे गान्धार! वे मेरे चित्त में रमें, स्वाहा।

English

I offer sesame seeds, juicy and with ground meal; may they delight my mind, O Gandhara, svaha.

अध्याय 63

श्लोक 2

गावो हिरण्यं धनमन्नपानँ सर्वेषाँ श्रियै स्वाहा

gāvo hiraṇyaṃ dhanamannapāna~ sarveṣā~ śriyai svāhā

हिन्दी अर्थ

गौएँ, स्वर्ण, धन, अन्न और पेय — सबकी श्री के लिए, स्वाहा।

English

Cattle, gold, wealth, food and drink — for the glory of all, svaha.

अध्याय 63

श्लोक 3

श्रियं च लक्ष्मीं च पुष्टिं च कीर्तिं चानृण्यताम् ।ब्राह्मण्यं बहुपुत्रताम् ।श्रद्धामेधे प्रजाः संददातु स्वाहा

śriyaṃ ca lakṣmīṃ ca puṣṭiṃ ca kīrtiṃ cānṛṇyatām | brāhmaṇyaṃ bahuputratām | śraddhāmedhe prajāḥ saṃdadātu svāhā

हिन्दी अर्थ

श्री, लक्ष्मी, पुष्टि, कीर्ति, ऋण-मुक्ति, ब्राह्मण्य और बहुत पुत्र — श्रद्धा और मेधा प्रजा दें, स्वाहा।

English

Glory, Lakshmi, nourishment, fame, freedom from debt, Brahminhood, many sons — may Faith and Insight give us offspring, svaha.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.