Mahanarayana Upanishad
68
अध्याय 68 / 79

Anuvāka 68

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 68

श्लोक 1

ॐ तद्ब्रह्म ।ॐ तद्वायुअः ।ॐ तदात्मा ।ॐ तत्सत्यम् ।ॐ तत्सर्वम् ।ॐ तत्पुरोर्नमः

oṃ tadbrahma | oṃ tadvāyuaḥ | oṃ tadātmā | oṃ tatsatyam | oṃ tatsarvam | oṃ tatpurornamaḥ

हिन्दी अर्थ

ॐ वह ब्रह्म है। ॐ वह वायु है। ॐ वह आत्मा है। ॐ वह सत्य है। ॐ वह सब कुछ है। ॐ वह पुर (सबसे आगे) है; नमस्कार।

English

Om, that is Brahman. Om, that is Vayu. Om, that is the Self. Om, that is truth. Om, that is all. Om, that is before; homage.

अध्याय 68

श्लोक 2

ॐ अन्तश्वरति भूतेषु गुहायां विश्वमूर्तिषु ।त्वं यज्ञस्त्वं वषट्कारस्त्वमिन्द्रस्त्वँ रुद्रस्त्वं विष्णुस्त्वं ब्रह्म त्वं प्रजापतिः ।त्वं तदाप आपो ज्योती रसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः सुवरोम्

oṃ antaśvarati bhūteṣu guhāyāṃ viśvamūrtiṣu | tvaṃ yajñastvaṃ vaṣaṭkārastvamindrastva~ rudrastvaṃ viṣṇustvaṃ brahma tvaṃ prajāpatiḥ | tvaṃ tadāpa āpo jyotī raso'mṛtaṃ brahma bhūrbhuvaḥ suvarom

हिन्दी अर्थ

ॐ तुम प्राणियों के भीतर, गुहा में, सब रूपों में विचरते हो। तुम यज्ञ हो, तुम वषट्कार हो; तुम इन्द्र, रुद्र, विष्णु, ब्रह्मा और प्रजापति हो। तुम वही हो — जल, ज्योति, रस, अमृत, ब्रह्म; भूर्भुवः सुवः। ॐ।

English

Om. You move within beings, in the cave, in all forms. You are sacrifice, you are the vashat call, you are Indra, you are Rudra, you are Vishnu, you are Brahman, you are Prajapati. You are that, the waters, light, essence, immortality, Brahman; Bhur Bhuvah Svah. Om.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.