Nitya Karma Kriya
2
अध्याय 2 / 5

Agnihotra

अग्निहोत्र

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् ।होतारं रत्नधातामम्

agnimīḷe purohitaṃ yajñasya devamṛtvijam | hotāraṃ ratnadhātāmam

हिन्दी अर्थ

मैं अग्नि की स्तुति करता हूँ, जो यज्ञ का पुरोहित, देवताओं का मंत्री, आह्वानकर्ता और धन का दाता है।

English

I praise Agni, the priest, the divine minister of sacrifice, the invoker, the bestower of treasures.

अध्याय 2

श्लोक 2

स्वाहा ।ॐ अग्नये स्वाहा ।इदमग्नये इदं न मम

svāhā | oṁ agnaye svāhā | idamagnaye idam na mama

हिन्दी अर्थ

स्वाहा! ॐ अग्नि को नमन, स्वाहा। यह अग्नि के लिए है, यह मेरे लिए नहीं।

English

Svaha! Om, offering to Agni, Svaha. This is for Agni, this is not for me.

अध्याय 2

श्लोक 3

प्रातर्दध्याद्विधिवत् शुद्धौषधिभिर्हुतम् ।सायंकाले तथा कर्म सम्यगाग्निहोत्रकम्

prātardadhyādvidhivad śuddhauṣadhibhirhutam | sāyaṃkāle tathā karma samyagāgnihotrakam

हिन्दी अर्थ

प्रातःकाल में शुद्ध द्रव्यों से यथाविधि अग्निहोत्र करें। सायंकाल में भी इसी प्रकार कर्म करें।

English

In the morning, perform Agnihotra properly with pure substances as offerings. In the evening, perform the ritual similarly.

स्रोत: data/scriptures/nityakarmakriya.ts · प्राप्त 3/6/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।