Nitya Karma Kriya
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अध्याय 3 / 5

Daily Puja

नित्य पूजा

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 3

श्लोक 1

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा ।शत्रुभय विनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते

śubhaṃ karoti kalyāṇaṃ ārogyaṃ dhanasaṃpadā | śatrubhaya vināśāya dīpajyotirnamo'stu te

हिन्दी अर्थ

तुम कल्याण करते हो, सौभाग्य, स्वास्थ्य और संपदा लाते हो। शत्रुओं के भय का नाश करने वाली दीप ज्योति को मैं प्रणाम करता हूँ।

English

You do good, bring auspiciousness, health, and prosperity. For the destruction of fear of enemies, I bow to the light of the lamp.

अध्याय 3

श्लोक 2

गंधां धूपां दीपां नैवेद्यं च सर्वम् ।पूजयामि भक्त्या देवं इष्टदेवतां नमाम्यहम्

gaṃdhāṃ dhūpāṃ dīpāṃ naivedyaṃ ca sarvam | pūjayāmi bhaktyā devaṃ iṣṭadevatāṃ namāmyaham

हिन्दी अर्थ

सुगंध, धूप, दीप, नैवेद्य और सभी वस्तुओं से मैं भक्ति पूर्वक देवता की पूजा करता हूँ। मैं अपनी इष्ट देवता को प्रणाम करता हूँ।

English

With fragrance, incense, lamp, food offerings, and all things, I worship the deity with devotion. I bow to my chosen deity.

अध्याय 3

श्लोक 3

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च ।तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे

yāni kāni ca pāpāni janmāntarakṛtāni ca | tāni tāni praṇaśyanti pradakṣiṇapade pade

हिन्दी अर्थ

जन्म-जन्मांतर के जो भी पाप हैं, वे प्रदक्षिणा के प्रत्येक पद पर नष्ट हो जाते हैं।

English

Whatever sins committed in this birth and previous births, they are destroyed step by step during circumambulation.

स्रोत: data/scriptures/nityakarmakriya.ts · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।