Ravana Samhita
6
अध्याय 6 / 19

Ravana's Ayurveda — The Physician-King's Medical Teaching

रावण-चिकित्सा

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 1

वातपित्तकफाः दोषाः देहे तिष्ठन्ति सर्वदा ।तेषां साम्यं च स्वास्थ्यं स्यात् वैषम्यं रोग उच्यते

vātapittakaPhāḥ doṣāḥ dehe tiṣṭhanti sarvadā | teṣāṃ sāmyaṃ ca svāsthyaṃ syāt vaiṣamyaṃ roga ucyate

हिन्दी अर्थ

वात, पित्त और कफ — तीन दोष — सदा शरीर में रहते हैं। इनकी साम्यावस्था स्वास्थ्य है; विषमता रोग कहलाती है।

English

Vata, Pitta, and Kapha — the three doshas — always dwell in the body. Their balance is health; their imbalance is called disease.

अध्याय 6

श्लोक 5

शरीरे त्रिदोषस्थितिः साम्यं वैषम्यं व्याधिरिति प्रोक्तः ।साम्ये स्वास्थ्यं वैषम्ये रोगः कायचिकित्सा

śarīre tridoṣasthitiḥ sāmyaṃ vaiṣamyaṃ vyādhiriḥ proktaḥ | sāmye svāsthyaṃ vaiṣamye rogaḥ kāyacikitsā

हिन्दी अर्थ

शरीर में त्रिदोष की स्थिति साम्य है। इस साम्य का वैषम्य व्याधि कहलाता है। साम्य में स्वास्थ्य है, वैषम्य में रोग — यही कायचिकित्सा है।

English

In the body, the three doshas maintain equilibrium. The loss of this equilibrium is called disease. Equilibrium is health; imbalance is disease — this is the treatment of the body.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।