Shandilya Bhakti Sutras
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अध्याय 1 / 3

प्रथम अध्याय

26 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ26 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

अथातो भक्तिजिज्ञासा

athāto bhaktijijñāsā

हिन्दी अर्थ

अब अतः भक्ति की जिज्ञासा।

English

Now, therefore, the inquiry into bhakti.

अध्याय 1

श्लोक 2

सा परानुरक्तिरीश्वरे

sā parānuraktirīśvare

हिन्दी अर्थ

वह (भक्ति) ईश्वर में परानुरक्ति (परम आसक्ति) है।

English

That (bhakti) is supreme attachment (para-anurakti) to Ishvara.

अध्याय 1

श्लोक 3

तत्संस्थस्यामृतत्वोपदेशात्

tatsaṃsthasyāmṛtatvopadeśāt

अध्याय 1

श्लोक 4

ज्ञानमिति चेन्न द्विषतोऽपि ज्ञानस्य तदसंस्थितेः

jñānamiti cenna dviṣato'pi jñānasya tadasaṃsthiteḥ

अध्याय 1

श्लोक 5

तयोपक्षयाच्च

tayopakṣayācca

अध्याय 1

श्लोक 6

द्वेषप्रतिपक्षभावाद्रसशब्दाच्च रागः

dveṣapratipakṣabhāvādrasaśabdācca rāgaḥ

अध्याय 1

श्लोक 7

न क्रिया कृत्यनपेक्षणाज्ज्ञानवत्

na kriyā kṛtyanapekṣaṇājjñānavat

अध्याय 1

श्लोक 8

अत एव फलानन्त्यम्

ata eva phalānantyam

अध्याय 1

श्लोक 9

तद्वतः प्रपत्तिशब्दाच्च न ज्ञानमितरप्रपत्तिवत्

tadvataḥ prapattiśabdācca na jñānamitaraprapattivat

अध्याय 1

श्लोक 10

सा मुख्येतरापेक्षितत्वात्

sā mukhyetarāpekṣitatvāt

अध्याय 1

श्लोक 11

प्रकरणाच्च

prakaraṇācca

अध्याय 1

श्लोक 12

दर्शनफलमिति चेन्न तेन व्यवधानात्

darśanaphalamiti cenna tena vyavadhānāt

अध्याय 1

श्लोक 13

दृष्टत्वाच्च

dṛṣṭatvācca

अध्याय 1

श्लोक 14

अत एव तदभावाद्वल्लवीनाम्

ata eva tadabhāvādvallavīnām

अध्याय 1

श्लोक 15

भक्त्या जानातीति चेन्नाभिज्ञप्त्या साहाय्यात्

bhaktyā jānātīti cennābhijñaptyā sāhāyyāt

अध्याय 1

श्लोक 16

प्रागुक्तं च

prāguktaṃ ca

अध्याय 1

श्लोक 17

एतेन विकल्पोऽपि प्रत्युक्तः

etena vikalpo'pi pratyuktaḥ

अध्याय 1

श्लोक 18

देवभक्तिरितरस्मिन् साहचर्यात्

devabhaktiritarasmin sāhacaryāt

अध्याय 1

श्लोक 19

योगस्तूभयार्थमपेक्षणात् प्रयाजवत्

yogastūbhayārthamapekṣaṇāt prayājavat

अध्याय 1

श्लोक 20

गौण्या तु समाधिसिद्धिः

gauṇyā tu samādhisiddhiḥ

अध्याय 1

श्लोक 21

हेया रागत्वादिति चेन्नोत्तमास्पदत्वात् सङ्गवत्

heyā rāgatvāditi cennottamāspadatvāt saṅgavat

अध्याय 1

श्लोक 22

तदेव कर्मिज्ञानियोगिभ्य आधिक्यशब्दात्

tadeva karmijñāniyogibhya ādhikyaśabdāt

अध्याय 1

श्लोक 23

प्रश्ननिरूपणाभ्यामाधिक्यसिद्धेः

praśnanirūpaṇābhyāmādhikyasiddheḥ

अध्याय 1

श्लोक 24

नैव श्रद्धा तु साधारण्यात्

naiva śraddhā tu sādhāraṇyāt

अध्याय 1

श्लोक 25

तस्यां तत्त्वे चानवस्थानात्

tasyāṃ tattve cānavasthānāt

अध्याय 1

श्लोक 26

ब्रह्मकाण्डं तु भक्तौ तस्यानुज्ञानाय सामान्यात्

brahmakāṇḍaṃ tu bhaktau tasyānujñānāya sāmānyāt

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit sutra text only, read from the Gita Press Gorakhpur edition and proofread against the page images. The Hindi gloss is not reproduced. · प्राप्त 18/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

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