अध्याय 1
श्लोक 1
अथातो भक्तिजिज्ञासा
athāto bhaktijijñāsā
हिन्दी अर्थ
अब अतः भक्ति की जिज्ञासा।
English
Now, therefore, the inquiry into bhakti.
अध्याय 1
अथातो भक्तिजिज्ञासा
athāto bhaktijijñāsā
हिन्दी अर्थ
अब अतः भक्ति की जिज्ञासा।
English
Now, therefore, the inquiry into bhakti.
अध्याय 1
सा परानुरक्तिरीश्वरे
sā parānuraktirīśvare
हिन्दी अर्थ
वह (भक्ति) ईश्वर में परानुरक्ति (परम आसक्ति) है।
English
That (bhakti) is supreme attachment (para-anurakti) to Ishvara.
अध्याय 1
तत्संस्थस्यामृतत्वोपदेशात्
tatsaṃsthasyāmṛtatvopadeśāt
अध्याय 1
ज्ञानमिति चेन्न द्विषतोऽपि ज्ञानस्य तदसंस्थितेः
jñānamiti cenna dviṣato'pi jñānasya tadasaṃsthiteḥ
अध्याय 1
तयोपक्षयाच्च
tayopakṣayācca
अध्याय 1
द्वेषप्रतिपक्षभावाद्रसशब्दाच्च रागः
dveṣapratipakṣabhāvādrasaśabdācca rāgaḥ
अध्याय 1
न क्रिया कृत्यनपेक्षणाज्ज्ञानवत्
na kriyā kṛtyanapekṣaṇājjñānavat
अध्याय 1
अत एव फलानन्त्यम्
ata eva phalānantyam
अध्याय 1
तद्वतः प्रपत्तिशब्दाच्च न ज्ञानमितरप्रपत्तिवत्
tadvataḥ prapattiśabdācca na jñānamitaraprapattivat
अध्याय 1
सा मुख्येतरापेक्षितत्वात्
sā mukhyetarāpekṣitatvāt
अध्याय 1
प्रकरणाच्च
prakaraṇācca
अध्याय 1
दर्शनफलमिति चेन्न तेन व्यवधानात्
darśanaphalamiti cenna tena vyavadhānāt
अध्याय 1
दृष्टत्वाच्च
dṛṣṭatvācca
अध्याय 1
अत एव तदभावाद्वल्लवीनाम्
ata eva tadabhāvādvallavīnām
अध्याय 1
भक्त्या जानातीति चेन्नाभिज्ञप्त्या साहाय्यात्
bhaktyā jānātīti cennābhijñaptyā sāhāyyāt
अध्याय 1
प्रागुक्तं च
prāguktaṃ ca
अध्याय 1
एतेन विकल्पोऽपि प्रत्युक्तः
etena vikalpo'pi pratyuktaḥ
अध्याय 1
देवभक्तिरितरस्मिन् साहचर्यात्
devabhaktiritarasmin sāhacaryāt
अध्याय 1
योगस्तूभयार्थमपेक्षणात् प्रयाजवत्
yogastūbhayārthamapekṣaṇāt prayājavat
अध्याय 1
गौण्या तु समाधिसिद्धिः
gauṇyā tu samādhisiddhiḥ
अध्याय 1
हेया रागत्वादिति चेन्नोत्तमास्पदत्वात् सङ्गवत्
heyā rāgatvāditi cennottamāspadatvāt saṅgavat
अध्याय 1
तदेव कर्मिज्ञानियोगिभ्य आधिक्यशब्दात्
tadeva karmijñāniyogibhya ādhikyaśabdāt
अध्याय 1
प्रश्ननिरूपणाभ्यामाधिक्यसिद्धेः
praśnanirūpaṇābhyāmādhikyasiddheḥ
अध्याय 1
नैव श्रद्धा तु साधारण्यात्
naiva śraddhā tu sādhāraṇyāt
अध्याय 1
तस्यां तत्त्वे चानवस्थानात्
tasyāṃ tattve cānavasthānāt
अध्याय 1
ब्रह्मकाण्डं तु भक्तौ तस्यानुज्ञानाय सामान्यात्
brahmakāṇḍaṃ tu bhaktau tasyānujñānāya sāmānyāt
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स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit sutra text only, read from the Gita Press Gorakhpur edition and proofread against the page images. The Hindi gloss is not reproduced. · प्राप्त 18/10/2026
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