Shandilya Bhakti Sutras
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अध्याय 3 / 3

तृतीय अध्याय

16 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ16 श्लोक

अध्याय 3

श्लोक 85

भजनीयेनाद्वितीयमिदं कृत्स्नस्य तत्स्वरूपत्वात्

bhajanīyenādvitīyamidaṃ kṛtsnasya tatsvarūpatvāt

अध्याय 3

श्लोक 86

तच्छक्तिर्माया जडसामान्यात्

tacchaktirmāyā jaḍasāmānyāt

अध्याय 3

श्लोक 87

व्यापकत्वाद्व्याप्यानाम्

vyāpakatvādvyāpyānām

अध्याय 3

श्लोक 88

न प्राणिबुद्धिभ्योऽसम्भवात्

na prāṇibuddhibhyo'sambhavāt

अध्याय 3

श्लोक 89

निर्मायोच्चावचं श्रुतीश्च निर्मिमीते पितृवत्

nirmāyoccāvacaṃ śrutīśca nirmimīte pitṛvat

अध्याय 3

श्लोक 90

मिश्रोपदेशान्नेति चेन्न स्वल्पत्वात्

miśropadeśānneti cenna svalpatvāt

अध्याय 3

श्लोक 91

फलमस्माद्बादरायणो दृष्टत्वात्

phalamasmādbādarāyaṇo dṛṣṭatvāt

अध्याय 3

श्लोक 92

व्युत्क्रमादप्ययस्तथा दृष्टम्

vyutkramādapyayastathā dṛṣṭam

अध्याय 3

श्लोक 93

तदैक्यं नानात्वैकत्वमुपाधियोगहानादादित्यवत्

tadaikyaṃ nānātvaikatvamupādhiyogahānādādityavat

अध्याय 3

श्लोक 94

पृथगिति चेन्न परेणासम्बन्धात् प्रकाशानाम्

pṛthagiti cenna pareṇāsambandhāt prakāśānām

अध्याय 3

श्लोक 95

न विकारिणस्तु करणविकारात्

na vikāriṇastu karaṇavikārāt

अध्याय 3

श्लोक 96

अनन्यभक्त्या तद्बुद्धिर्बुद्धिलयादत्यन्तम्

ananyabhaktyā tadbuddhirbuddhilayādatyantam

अध्याय 3

श्लोक 97

आयुश्चिरमितरेषां तु हानिरनास्पदत्वात्

āyuściramitareṣāṃ tu hāniranāspadatvāt

अध्याय 3

श्लोक 98

संसृतिरेषामभक्तिः स्यान्नाज्ञानात् कारणासिद्धेः

saṃsṛtireṣāmabhaktiḥ syānnājñānāt kāraṇāsiddheḥ

अध्याय 3

श्लोक 99

त्रीण्येषां नेत्राणि शब्दलिङ्गाक्षभेदाद्रुद्रवत्

trīṇyeṣāṃ netrāṇi śabdaliṅgākṣabhedādrudravat

अध्याय 3

श्लोक 100

आविस्तिरोभावा विकाराः स्युः क्रियाफलसंयोगात्

āvistirobhāvā vikārāḥ syuḥ kriyāphalasaṃyogāt

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit sutra text only, read from the Gita Press Gorakhpur edition and proofread against the page images. The Hindi gloss is not reproduced. · प्राप्त 18/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Verified with Swapneshvara Bhashya recension.