अध्याय 123
श्लोक 1
अस कछु समुझि परत रघुराया! बिनु तव कृपा दयालु! दास-हित! मोह न छूटै माया
asa kachu samujhi parata raghurāyā! binu tava kṛpā dayālu! dāsa-hita! moha na chūṭai māyā
अध्याय 123
अस कछु समुझि परत रघुराया! बिनु तव कृपा दयालु! दास-हित! मोह न छूटै माया
asa kachu samujhi parata raghurāyā! binu tava kṛpā dayālu! dāsa-hita! moha na chūṭai māyā
अध्याय 123
बाक्य-ग्यान अत्यंत निपुन भव-पार न पावै कोई ।निसि गृहमध्य दीपकी बातन्ह, तम निबृत्त नहिं होई
bākya-gyāna atyaṃta nipuna bhava-pāra na pāvai koī | nisi gṛhamadhya dīpakī bātanha, tama nibṛtta nahiṃ hoī
अध्याय 123
जैसे कोइ इक दीन दुखित अति असन-हीन दुख पावै ।चित्र कलपतरु कामधेनु गृह लिखे न बिपति नसावै
jaise koi ika dīna dukhita ati asana-hīna dukha pāvai | citra kalapataru kāmadhenu gṛha likhe na bipati nasāvai
अध्याय 123
षटरस बहुप्रकार भोजन कोउ, दिन अरु रैनि बखानै ।बिनु बोले संतोष-जनित सुख खाइ सोइ पै जानै
ṣaṭarasa bahuprakāra bhojana kou, dina aru raini bakhānai | binu bole saṃtoṣa-janita sukha khāi soi pai jānai
अध्याय 123
जबलगि नहिं निज हृदि प्रकास, अरु बिषय-आस मनमाहीं ।तुलसिदास तबलगि जग-जोनि भ्रमत सपनेहुँ सुख नाहीं
jabalagi nahiṃ nija hṛdi prakāsa, aru biṣaya-āsa manamāhīṃ | tulasidāsa tabalagi jaga-joni bhramata sapanehu~ sukha nāhīṃ
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.