अध्याय 13
श्लोक 1
सेवहु सिव-चरन-सरोज-रेनु ।कल्यान-अखिल-प्रद कामधेनु
sevahu siva-carana-saroja-renu | kalyāna-akhila-prada kāmadhenu
अध्याय 13
सेवहु सिव-चरन-सरोज-रेनु ।कल्यान-अखिल-प्रद कामधेनु
sevahu siva-carana-saroja-renu | kalyāna-akhila-prada kāmadhenu
अध्याय 13
कर्पूर-गौर, करुना-उदार ।संसार-सार, भुजगेंद्र-हार
karpūra-gaura, karunā-udāra | saṃsāra-sāra, bhujageṃdra-hāra
अध्याय 13
सुख-जन्मभूमि, महिमा अपार ।निर्गुन, गुननायक, निराकार
sukha-janmabhūmi, mahimā apāra | nirguna, gunanāyaka, nirākāra
अध्याय 13
त्रयनयन, मयन-मर्दन महेस ।अहँकार-निहार-उदित दिनेस
trayanayana, mayana-mardana mahesa | aha~kāra-nihāra-udita dinesa
अध्याय 13
बर बाल निसाकर मौलि भ्राज ।त्रैलोक-सोकहर प्रमथराज
bara bāla nisākara mauli bhrāja | trailoka-sokahara pramatharāja
अध्याय 13
जिन्ह कहँ बिधि सुगति न लिखी भाल ।तिन्ह की गति कासीपति कृपाल
jinha kaha~ bidhi sugati na likhī bhāla | tinha kī gati kāsīpati kṛpāla
अध्याय 13
उपकारी कोउ अपर हर-समान ।सुर-असुर जरत कृत गरल पान
upakārī kou apara hara-samāna | sura-asura jarata kṛta garala pāna
अध्याय 13
बहु कलप उपायन करि अनेक ।बिनु संभु-कृपा नहिं भव-बिबेक
bahu kalapa upāyana kari aneka | binu saṃbhu-kṛpā nahiṃ bhava-bibeka
अध्याय 13
बिग्यान-भवन, गिरिसुता-रमन ।कह तुलसिदास मम त्रास-समन
bigyāna-bhavana, girisutā-ramana | kaha tulasidāsa mama trāsa-samana
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.