अध्याय 133
श्लोक 1
तोसों हौं फिरि फिरि हित, प्रिय पुनीत सत्य बचन कहत ।सुनि मन, गुनि, समुझि, क्यों न सुगम सुमग गहत
tosoṃ hauṃ phiri phiri hita, priya punīta satya bacana kahata | suni mana, guni, samujhi, kyoṃ na sugama sumaga gahata
अध्याय 133
तोसों हौं फिरि फिरि हित, प्रिय पुनीत सत्य बचन कहत ।सुनि मन, गुनि, समुझि, क्यों न सुगम सुमग गहत
tosoṃ hauṃ phiri phiri hita, priya punīta satya bacana kahata | suni mana, guni, samujhi, kyoṃ na sugama sumaga gahata
अध्याय 133
छोटो बड़ो, खोटो खरो, जग जो जहँ रहत ।अपनो अपनेको भलो कहहु, को न चहत
choṭo baḍa़o, khoṭo kharo, jaga jo jaha~ rahata | apano apaneko bhalo kahahu, ko na cahata
अध्याय 133
बिधि लगि लघु कीट अवधि सुख सुखी, दुख दहत ।पसु लौं पसुपाल ईस बाँधत छोरत नहत
bidhi lagi laghu kīṭa avadhi sukha sukhī, dukha dahata | pasu lauṃ pasupāla īsa bā~dhata chorata nahata
अध्याय 133
बिषय मुद निहार भार सिर काँधे ज्यों बहत ।यौंही जिय जानि, मानि सठ! तू साँसति सहत
biṣaya muda nihāra bhāra sira kā~dhe jyoṃ bahata | yauṃhī jiya jāni, māni saṭha! tū sā~sati sahata
अध्याय 133
पायो केहि घृत बिचारु, हरिन-बारि महत ।तुलसी तकु ताहि सरन, जाते सब लहत
pāyo kehi ghṛta bicāru, harina-bāri mahata | tulasī taku tāhi sarana, jāte saba lahata
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
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पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.