अध्याय 134
श्लोक 1
ताते हौं बार बार देव! द्वार परि पुकार करत ।आरति, नति, दीनता कहें प्रभु संकट हरत
tāte hauṃ bāra bāra deva! dvāra pari pukāra karata | ārati, nati, dīnatā kaheṃ prabhu saṃkaṭa harata
अध्याय 134
ताते हौं बार बार देव! द्वार परि पुकार करत ।आरति, नति, दीनता कहें प्रभु संकट हरत
tāte hauṃ bāra bāra deva! dvāra pari pukāra karata | ārati, nati, dīnatā kaheṃ prabhu saṃkaṭa harata
अध्याय 134
लोकपाल सोक-बिकल रावन-डर डरत ।का सुनि सकुचे कृपालु नर-सरीर धरत
lokapāla soka-bikala rāvana-ḍara ḍarata | kā suni sakuce kṛpālu nara-sarīra dharata
अध्याय 134
कौसिक, मुनि-तीय, जनक सोच-अनल जरत ।साधन केहि सीतल भये, सो न समुझि परत
kausika, muni-tīya, janaka soca-anala jarata | sādhana kehi sītala bhaye, so na samujhi parata
अध्याय 134
केवट, खग, सबरि सहज चरनकमल न रत ।सनमुख तोहिं होत नाथ! कुतरु सुफरु फरत
kevaṭa, khaga, sabari sahaja caranakamala na rata | sanamukha tohiṃ hota nātha! kutaru supharu pharata
अध्याय 134
बंधु-बैर कपि-बिभीषन गुरु गलानि गरत ।सेवा केहि रीझि राम, किये सरिस भरत
baṃdhu-baira kapi-bibhīṣana guru galāni garata | sevā kehi rījhi rāma, kiye sarisa bharata
अध्याय 134
सेवक भयो पवनपूत साहिब अनुहरत ।ताको लिये नाम राम सबको सुढर ढरत
sevaka bhayo pavanapūta sāhiba anuharata | tāko liye nāma rāma sabako suḍhara ḍharata
अध्याय 134
जाने बिनु राम-रीति पचि पचि जग मरत ।परिहरि छल सरन गये तुलसिहु-से तरत
jāne binu rāma-rīti paci paci jaga marata | parihari chala sarana gaye tulasihu-se tarata
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.