अध्याय 146
श्लोक 1
हौं सब बिधि राम, रावरो चाहत भयो चेरो ।ठौर ठौर साहबी होत है, ख्याल काल कलि केरो
hauṃ saba bidhi rāma, rāvaro cāhata bhayo cero | ṭhaura ṭhaura sāhabī hota hai, khyāla kāla kali kero
अध्याय 146
हौं सब बिधि राम, रावरो चाहत भयो चेरो ।ठौर ठौर साहबी होत है, ख्याल काल कलि केरो
hauṃ saba bidhi rāma, rāvaro cāhata bhayo cero | ṭhaura ṭhaura sāhabī hota hai, khyāla kāla kali kero
अध्याय 146
काल-करम-इंद्रिय-बिषय गाहकगन घेरो ।हौं न कबूलत, बाँधि कै मोल करत करेरो
kāla-karama-iṃdriya-biṣaya gāhakagana ghero | hauṃ na kabūlata, bā~dhi kai mola karata karero
अध्याय 146
बंदि-छोर तेरो नाम है, बिरुदैत बड़ेरो ।मैं कह्यो, तब छल-प्रीति कै माँगे उर डेरो
baṃdi-chora tero nāma hai, birudaita baḍa़ero | maiṃ kahyo, taba chala-prīti kai mā~ge ura ḍero
अध्याय 146
नाम-ओट अब लगि बच्यो मलजुग जग जेरो ।अब गरीब जन पोषिये पाइबो न हेरो
nāma-oṭa aba lagi bacyo malajuga jaga jero | aba garība jana poṣiye pāibo na hero
अध्याय 146
जेहि कौतुक बक-खग स्वानको प्रभु न्याव निबेरो ।तेहि कौतुक कहिये कृपालु! 'तुलसी है मेरो'
jehi kautuka baka-khaga svānako prabhu nyāva nibero | tehi kautuka kahiye kṛpālu! 'tulasī hai mero'
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.