अध्याय 15
श्लोक 1
दुसह दोष-दुख दलनि, करु देवि दाया ।बिश्व-मूलाऽसि, जन-सानुकूलाऽसि, कर शूलधारिणि महामूल-माया
dusaha doṣa-dukha dalani, karu devi dāyā | biśva-mūlā'si, jana-sānukūlā'si, kara śūladhāriṇi mahāmūla-māyā
अध्याय 15
दुसह दोष-दुख दलनि, करु देवि दाया ।बिश्व-मूलाऽसि, जन-सानुकूलाऽसि, कर शूलधारिणि महामूल-माया
dusaha doṣa-dukha dalani, karu devi dāyā | biśva-mūlā'si, jana-sānukūlā'si, kara śūladhāriṇi mahāmūla-māyā
अध्याय 15
तडित गर्भांग सर्वांग सुन्दर लसत, दिव्य पट भव्य भूषण बिराजैं ।बालमृग-मंजुखंजन-बिलोचनि, चन्द्रबदनि लखि कोटि रतिमार लाजैं
taḍita garbhāṃga sarvāṃga sundara lasata, divya paṭa bhavya bhūṣaṇa birājaiṃ | bālamṛga-maṃjukhaṃjana-bilocani, candrabadani lakhi koṭi ratimāra lājaiṃ
अध्याय 15
रूप-सुख-शील-सीमाऽसि, भीमाऽसि, रामाऽसि, वामाऽसि बर बुद्धिबानी ।छमुख-हेरम्ब-अंबासि, जगदंबिके, शंभु-जायासि जय जय भवानी
rūpa-sukha-śīla-sīmā'si, bhīmā'si, rāmā'si, vāmā'si bara buddhibānī | chamukha-heramba-aṃbāsi, jagadaṃbike, śaṃbhu-jāyāsi jaya jaya bhavānī
अध्याय 15
चंड-भुजदंड-खंडनि, बिहंडनि महिष, मुंड-मद-भंग कर अंग तोरे ।शुंभ निःशुंभ कुम्भीश रण-केशरिणि, क्रोध-वारीश अरि-बृन्द बोरे
caṃḍa-bhujadaṃḍa-khaṃḍani, bihaṃḍani mahiṣa, muṃḍa-mada-bhaṃga kara aṃga tore | śuṃbha niḥśuṃbha kumbhīśa raṇa-keśariṇi, krodha-vārīśa ari-bṛnda bore
अध्याय 15
निगम-आगम-अगम गुर्बि ! तव गुन-कथन, उर्बिधर करत जेहि सहसजीहा ।देहि मा, मोहि पन प्रेम यह नेम निज, राम घनश्याम तुलसी पपीहा
nigama-āgama-agama gurbi ! tava guna-kathana, urbidhara karata jehi sahasajīhā | dehi mā, mohi pana prema yaha nema nija, rāma ghanaśyāma tulasī papīhā
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.