Vinaya Patrika
150
अध्याय 150 / 279

पद १५०

6 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ6 श्लोक

अध्याय 150

श्लोक 1

रामभद्र! मोहिं आपनो सोच है अरु नाहीं ।जीव सकल संतापके भाजन जग माहीं

rāmabhadra! mohiṃ āpano soca hai aru nāhīṃ | jīva sakala saṃtāpake bhājana jaga māhīṃ

अध्याय 150

श्लोक 2

नातो बड़े समर्थ सों इक ओर किधौं हौं ।तोको मोसे अति घने मोको एकै तूँ

nāto baḍa़e samartha soṃ ika ora kidhauṃ hauṃ | toko mose ati ghane moko ekai tū~

अध्याय 150

श्लोक 3

बड़ी गलानि हिय हानि है सरबग्य गुसाईं ।कूर कुसेवक कहत हौं सेवककी नाईं

baḍa़ī galāni hiya hāni hai sarabagya gusāīṃ | kūra kusevaka kahata hauṃ sevakakī nāīṃ

अध्याय 150

श्लोक 4

भलो पोच रामको कहैं मोहि सब नरनारी ।बिगरे सेवक स्वान ज्यों साहिब-सिर गारी

bhalo poca rāmako kahaiṃ mohi saba naranārī | bigare sevaka svāna jyoṃ sāhiba-sira gārī

अध्याय 150

श्लोक 5

असमंजस मनको मिटै सो उपाय न सूझै ।दीनबंधु! कीजै सोइ बनि परै जो बूझै

asamaṃjasa manako miṭai so upāya na sūjhai | dīnabaṃdhu! kījai soi bani parai jo būjhai

अध्याय 150

श्लोक 6

बिरुदावली बिलोकिये तिन्हमें कोउ हौं हौं ।तुलसी प्रभुको परिहर्‌यो सरनागत सो हौं

birudāvalī bilokiye tinhameṃ kou hauṃ hauṃ | tulasī prabhuko parihar‌yo saranāgata so hauṃ

स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.