अध्याय 151
श्लोक 1
जौ पै चेराई रामकी करतो न लजातो ।तौ तू दाम कुदाम ज्यों कर-कर न बिकातो
jau pai cerāī rāmakī karato na lajāto | tau tū dāma kudāma jyoṃ kara-kara na bikāto
अध्याय 151
जौ पै चेराई रामकी करतो न लजातो ।तौ तू दाम कुदाम ज्यों कर-कर न बिकातो
jau pai cerāī rāmakī karato na lajāto | tau tū dāma kudāma jyoṃ kara-kara na bikāto
अध्याय 151
जपत जीह रघुनाथको नाम नहिं अलसातो ।बाजीगरके सूम ज्यों खल खेह न खातो
japata jīha raghunāthako nāma nahiṃ alasāto | bājīgarake sūma jyoṃ khala kheha na khāto
अध्याय 151
जौ तू मन! मेरे कहे राम-नाम कमातो ।सीतापति सनमुख सुखी सब ठाँव समातो
jau tū mana! mere kahe rāma-nāma kamāto | sītāpati sanamukha sukhī saba ṭhā~va samāto
अध्याय 151
राम सोहाते तोहिं जौ तू सर्बहिं सोहातो ।काल करम कुल कारनी कोऊ न कोहातो
rāma sohāte tohiṃ jau tū sarbahiṃ sohāto | kāla karama kula kāranī koū na kohāto
अध्याय 151
राम-नाम अनुरागही जिय जो रतिआतो ।स्वारथ-परमारथ-पथी तोहिं सब पतिआतो
rāma-nāma anurāgahī jiya jo ratiāto | svāratha-paramāratha-pathī tohiṃ saba patiāto
अध्याय 151
सेइ साधु सुनि समुझि कै पर-पीर पिरातो ।जनम कोटिको काँदलो हृद-हृदय थिरातो
sei sādhu suni samujhi kai para-pīra pirāto | janama koṭiko kā~dalo hṛda-hṛdaya thirāto
अध्याय 151
भव-मग अगम अनंत है, बिनु श्रमहि सिरातो ।महिमा उलटे नामकी मुनि कियो किरातो
bhava-maga agama anaṃta hai, binu śramahi sirāto | mahimā ulaṭe nāmakī muni kiyo kirāto
अध्याय 151
अमर-अगम तनु पाइ सो जड़ जाय न जातो ।होतो मंगल-मूल तू, अनुकूल बिधातो
amara-agama tanu pāi so jaḍa़ jāya na jāto | hoto maṃgala-mūla tū, anukūla bidhāto
अध्याय 151
जो मन, प्रीति-प्रतीतिसों राम-नामहिं रातो ।तुलसी रामप्रसादसों तिहुँताप न तातो
jo mana, prīti-pratītisoṃ rāma-nāmahiṃ rāto | tulasī rāmaprasādasoṃ tihu~tāpa na tāto
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.