Vinaya Patrika
151
अध्याय 151 / 279

पद १५१

9 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ9 श्लोक

अध्याय 151

श्लोक 1

जौ पै चेराई रामकी करतो न लजातो ।तौ तू दाम कुदाम ज्यों कर-कर न बिकातो

jau pai cerāī rāmakī karato na lajāto | tau tū dāma kudāma jyoṃ kara-kara na bikāto

अध्याय 151

श्लोक 2

जपत जीह रघुनाथको नाम नहिं अलसातो ।बाजीगरके सूम ज्यों खल खेह न खातो

japata jīha raghunāthako nāma nahiṃ alasāto | bājīgarake sūma jyoṃ khala kheha na khāto

अध्याय 151

श्लोक 3

जौ तू मन! मेरे कहे राम-नाम कमातो ।सीतापति सनमुख सुखी सब ठाँव समातो

jau tū mana! mere kahe rāma-nāma kamāto | sītāpati sanamukha sukhī saba ṭhā~va samāto

अध्याय 151

श्लोक 4

राम सोहाते तोहिं जौ तू सर्बहिं सोहातो ।काल करम कुल कारनी कोऊ न कोहातो

rāma sohāte tohiṃ jau tū sarbahiṃ sohāto | kāla karama kula kāranī koū na kohāto

अध्याय 151

श्लोक 5

राम-नाम अनुरागही जिय जो रतिआतो ।स्वारथ-परमारथ-पथी तोहिं सब पतिआतो

rāma-nāma anurāgahī jiya jo ratiāto | svāratha-paramāratha-pathī tohiṃ saba patiāto

अध्याय 151

श्लोक 6

सेइ साधु सुनि समुझि कै पर-पीर पिरातो ।जनम कोटिको काँदलो हृद-हृदय थिरातो

sei sādhu suni samujhi kai para-pīra pirāto | janama koṭiko kā~dalo hṛda-hṛdaya thirāto

अध्याय 151

श्लोक 7

भव-मग अगम अनंत है, बिनु श्रमहि सिरातो ।महिमा उलटे नामकी मुनि कियो किरातो

bhava-maga agama anaṃta hai, binu śramahi sirāto | mahimā ulaṭe nāmakī muni kiyo kirāto

अध्याय 151

श्लोक 8

अमर-अगम तनु पाइ सो जड़ जाय न जातो ।होतो मंगल-मूल तू, अनुकूल बिधातो

amara-agama tanu pāi so jaḍa़ jāya na jāto | hoto maṃgala-mūla tū, anukūla bidhāto

अध्याय 151

श्लोक 9

जो मन, प्रीति-प्रतीतिसों राम-नामहिं रातो ।तुलसी रामप्रसादसों तिहुँताप न तातो

jo mana, prīti-pratītisoṃ rāma-nāmahiṃ rāto | tulasī rāmaprasādasoṃ tihu~tāpa na tāto

स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.