अध्याय 166
श्लोक 1
ऐसे राम दीन-हितकारी ।अतिकोमल करुनानिधान बिनु कारन पर-उपकारी
aise rāma dīna-hitakārī | atikomala karunānidhāna binu kārana para-upakārī
अध्याय 166
ऐसे राम दीन-हितकारी ।अतिकोमल करुनानिधान बिनु कारन पर-उपकारी
aise rāma dīna-hitakārī | atikomala karunānidhāna binu kārana para-upakārī
अध्याय 166
साधन-हीन दीन निज अघ-बस, सिला भई मुनि-नारी ।गृहतें गवनि परसि पद पावन घोर सापतें तारी
sādhana-hīna dīna nija agha-basa, silā bhaī muni-nārī | gṛhateṃ gavani parasi pada pāvana ghora sāpateṃ tārī
अध्याय 166
हिंसारत निषाद तामस बपु, पसु-समान बनचारी ।भेंट्यो हृदय लगाइ प्रेमबस, नहिं कुल जाति बिचारी
hiṃsārata niṣāda tāmasa bapu, pasu-samāna banacārī | bheṃṭyo hṛdaya lagāi premabasa, nahiṃ kula jāti bicārī
अध्याय 166
जद्यपि द्रोह कियो सुरपति-सुत, कहि न जाय अति भारी ।सकल लोक अवलोकि सोकहत, सरन गये भय टारी
jadyapi droha kiyo surapati-suta, kahi na jāya ati bhārī | sakala loka avaloki sokahata, sarana gaye bhaya ṭārī
अध्याय 166
बिहँग जोनि आमिष अहारपर, गीध कौन ब्रतधारी ।जनक-समान क्रिया ताकी निज कर सब भाँति सँवारी
biha~ga joni āmiṣa ahārapara, gīdha kauna bratadhārī | janaka-samāna kriyā tākī nija kara saba bhā~ti sa~vārī
अध्याय 166
अधम जाति सबरी जोषित जड़, लोक-बेद तें न्यारी ।जानि प्रीति, दै दरस कृपानिधि, सोउ रघुनाथ उधारी
adhama jāti sabarī joṣita jaḍa़, loka-beda teṃ nyārī | jāni prīti, dai darasa kṛpānidhi, sou raghunātha udhārī
अध्याय 166
कपि सुग्रीव बंधु-भय-ब्याकुल, आयो सरन पुकारी ।सहि न सके दारुन दुख जनके, हत्यो बालि, सहि गारी
kapi sugrīva baṃdhu-bhaya-byākula, āyo sarana pukārī | sahi na sake dāruna dukha janake, hatyo bāli, sahi gārī
अध्याय 166
रिपुको अनुज बिभीषन निसिचर, कौन भजन अधिकारी ।सरन गये आगे ह्वै लीन्हों भेंट्यो भुजा पसारी
ripuko anuja bibhīṣana nisicara, kauna bhajana adhikārī | sarana gaye āge hvai līnhoṃ bheṃṭyo bhujā pasārī
अध्याय 166
असुभ होइ जिन्हके सुमिरे ते बानर रीछ बिकारी ।बेद-बिदित पावन किये ते सब, महिमा नाथ! तुम्हारी
asubha hoi jinhake sumire te bānara rīcha bikārī | beda-bidita pāvana kiye te saba, mahimā nātha! tumhārī
अध्याय 166
कहँ लगि कहौं दीन अगनित जिन्हकी तुम बिपति निवारी ।कलिमल-ग्रसित दासतुलसीपर, काहे कृपा बिसारी?
kaha~ lagi kahauṃ dīna aganita jinhakī tuma bipati nivārī | kalimala-grasita dāsatulasīpara, kāhe kṛpā bisārī?
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.