अध्याय 165
श्लोक 1
रघुबर रावरि यहै बड़ाई ।निदरि गनी आदर गरीबपर, करत कृपा अधिकाई
raghubara rāvari yahai baḍa़āī | nidari ganī ādara garībapara, karata kṛpā adhikāī
अध्याय 165
रघुबर रावरि यहै बड़ाई ।निदरि गनी आदर गरीबपर, करत कृपा अधिकाई
raghubara rāvari yahai baḍa़āī | nidari ganī ādara garībapara, karata kṛpā adhikāī
अध्याय 165
थके देव साधन करि सब, सपनेहु नहिं देत दिखाई ।केवट कुटिल भालु कपि कौनप, कियो सकल सँग भाई
thake deva sādhana kari saba, sapanehu nahiṃ deta dikhāī | kevaṭa kuṭila bhālu kapi kaunapa, kiyo sakala sa~ga bhāī
अध्याय 165
मिलि मुनिबृंद फिरत दंडक बन, सो चरचौ न चलाई ।बारहिं बार गीध सबरीकी बरनत प्रीति सुहाई
mili munibṛṃda phirata daṃḍaka bana, so caracau na calāī | bārahiṃ bāra gīdha sabarīkī baranata prīti suhāī
अध्याय 165
स्वान कहे तें कियो पुर बाहिर, जती गयंद चढ़ाई ।तिय-निंदक मतिमंद प्रजा रज निज नय नगर बसाई
svāna kahe teṃ kiyo pura bāhira, jatī gayaṃda caḍha़āī | tiya-niṃdaka matimaṃda prajā raja nija naya nagara basāī
अध्याय 165
यहि दरबार दीनको आदर, रीति सदा चलि आई ।दीनदयालु दीन तुलसीकी काहु न सुरति कराई
yahi darabāra dīnako ādara, rīti sadā cali āī | dīnadayālu dīna tulasīkī kāhu na surati karāī
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.