अध्याय 173
श्लोक 1
नाहिन आवत आन भरोसो ।यहि कलिकाल सकल साधनतरु है स्रम-फलनि फरो सो
nāhina āvata āna bharoso | yahi kalikāla sakala sādhanataru hai srama-phalani pharo so
अध्याय 173
नाहिन आवत आन भरोसो ।यहि कलिकाल सकल साधनतरु है स्रम-फलनि फरो सो
nāhina āvata āna bharoso | yahi kalikāla sakala sādhanataru hai srama-phalani pharo so
अध्याय 173
तप, तीरथ, उपबास, दान, मख जेहि जो रुचै करो सो ।पायेहि पै जानिबो करम-फल भरि-भरि बेद परोसो
tapa, tīratha, upabāsa, dāna, makha jehi jo rucai karo so | pāyehi pai jānibo karama-phala bhari-bhari beda paroso
अध्याय 173
आगम-बिधि जप-जाग करत नर सरत न काज खरो सो ।सुख सपनेहु न जोग-सिधि-साधन, रोग बियोग धरो सो
āgama-bidhi japa-jāga karata nara sarata na kāja kharo so | sukha sapanehu na joga-sidhi-sādhana, roga biyoga dharo so
अध्याय 173
काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह मिलि ग्यान बिराग हरो सो ।बिगरत मन संन्यास लेत जल नावत आम घरो सो
kāma, krodha, mada, lobha, moha mili gyāna birāga haro so | bigarata mana saṃnyāsa leta jala nāvata āma gharo so
अध्याय 173
बहु मत मुनि बहु पंथ पुरानन जहाँ-तहाँ झगरो सो ।गुरु कह्यो राम-भजन नीको मोहिं लगत राज-डगरो सो
bahu mata muni bahu paṃtha purānana jahā~-tahā~ jhagaro so | guru kahyo rāma-bhajana nīko mohiṃ lagata rāja-ḍagaro so
अध्याय 173
तुलसी बिनु परतीति प्रीति फिरि-फिरि पचि मरै मरो सो ।रामनाम-बोहित भव-सागर चाहै तरन तरो सो
tulasī binu paratīti prīti phiri-phiri paci marai maro so | rāmanāma-bohita bhava-sāgara cāhai tarana taro so
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.