अध्याय 175
श्लोक 1
जो पै रहनि रामसों नाहीं ।तौ नर खर कूकर सूकर सम बृथा जियत जग माहीं
jo pai rahani rāmasoṃ nāhīṃ | tau nara khara kūkara sūkara sama bṛthā jiyata jaga māhīṃ
अध्याय 175
जो पै रहनि रामसों नाहीं ।तौ नर खर कूकर सूकर सम बृथा जियत जग माहीं
jo pai rahani rāmasoṃ nāhīṃ | tau nara khara kūkara sūkara sama bṛthā jiyata jaga māhīṃ
अध्याय 175
काम, क्रोध, मद, लोभ, नींद, भय, भूख, प्यास सबहीके ।मनुज देह सुर-साधु सराहत, सो सनेह सिय-पीके
kāma, krodha, mada, lobha, nīṃda, bhaya, bhūkha, pyāsa sabahīke | manuja deha sura-sādhu sarāhata, so saneha siya-pīke
अध्याय 175
सूर, सुजान, सुपूत सुलच्छन गनियत गुन गरुआई ।बिनु हरिभजन इँदारुनके फल तजत नहीं करुआई
sūra, sujāna, supūta sulacchana ganiyata guna garuāī | binu haribhajana i~dārunake phala tajata nahīṃ karuāī
अध्याय 175
कीरति, कुल, करतूति, भूति भलि, सील सरूप सलोने ।तुलसी प्रभु-अनुराग-रहित जस सालन साग अलोने
kīrati, kula, karatūti, bhūti bhali, sīla sarūpa salone | tulasī prabhu-anurāga-rahita jasa sālana sāga alone
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.