अध्याय 184
श्लोक 1
राम-नामके जपे जाइ जियकी जरनि ।कलिकाल अपर उपाय ते अपाय भये, जैसे तम नासिबेको चित्रके तरनि
rāma-nāmake jape jāi jiyakī jarani | kalikāla apara upāya te apāya bhaye, jaise tama nāsibeko citrake tarani
अध्याय 184
राम-नामके जपे जाइ जियकी जरनि ।कलिकाल अपर उपाय ते अपाय भये, जैसे तम नासिबेको चित्रके तरनि
rāma-nāmake jape jāi jiyakī jarani | kalikāla apara upāya te apāya bhaye, jaise tama nāsibeko citrake tarani
अध्याय 184
करम-कलाप परिताप पाप-साने सब, ज्यों सुफूल फूले तरु फोकट फरनि ।दंभ, लोभ, लालच, उपासना बिनासि नीके, सुगति साधन भई उदर भरनि
karama-kalāpa paritāpa pāpa-sāne saba, jyoṃ suphūla phūle taru phokaṭa pharani | daṃbha, lobha, lālaca, upāsanā bināsi nīke, sugati sādhana bhaī udara bharani
अध्याय 184
जोग न समाधि निरुपाधि न बिराग-ग्यान, बचन बिशेष बेष, कहूँ न करनि ।कपट कुपथ कोटि, कहनि-रहनि खोटि, सकल सराहैं निज निज आचरनि
joga na samādhi nirupādhi na birāga-gyāna, bacana biśeṣa beṣa, kahū~ na karani | kapaṭa kupatha koṭi, kahani-rahani khoṭi, sakala sarāhaiṃ nija nija ācarani
अध्याय 184
मरत महेस उपदेस हैं कहा करत, सुरसरि-तीर कासी धरम-धरनि ।राम-नामको प्रताप हर कहैं, जपैं आप, जुग जुग जानैं जग, बेदहूँ बरनि
marata mahesa upadesa haiṃ kahā karata, surasari-tīra kāsī dharama-dharani | rāma-nāmako pratāpa hara kahaiṃ, japaiṃ āpa, juga juga jānaiṃ jaga, bedahū~ barani
अध्याय 184
मति राम-नाम ही सों, रति राम-नाम ही सों, गति राम-नाम ही की बिपति-हरनि ।राम-नामसों प्रतीति प्रीति राखे कबहुँक, तुलसी ढरैंगे राम आपनी ढरनि
mati rāma-nāma hī soṃ, rati rāma-nāma hī soṃ, gati rāma-nāma hī kī bipati-harani | rāma-nāmasoṃ pratīti prīti rākhe kabahu~ka, tulasī ḍharaiṃge rāma āpanī ḍharani
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.