अध्याय 185
श्लोक 1
लाज न लागत दास कहावत ।सो आचरन बिसारि सोच तजि, जो हरि तुम कहँ भावत
lāja na lāgata dāsa kahāvata | so ācarana bisāri soca taji, jo hari tuma kaha~ bhāvata
अध्याय 185
लाज न लागत दास कहावत ।सो आचरन बिसारि सोच तजि, जो हरि तुम कहँ भावत
lāja na lāgata dāsa kahāvata | so ācarana bisāri soca taji, jo hari tuma kaha~ bhāvata
अध्याय 185
सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत ।मो-सम मंद महाखल पाँवर, कौन जतन तेहि पावत
sakala saṃga taji bhajata jāhi muni, japa tapa jāga banāvata | mo-sama maṃda mahākhala pā~vara, kauna jatana tehi pāvata
अध्याय 185
हरि निरमल, मलग्रसित हृदय, असमंजस मोहि जनावत ।जेहि सर काक कंक बक सूकर, क्यों मराल तहँ आवत
hari niramala, malagrasita hṛdaya, asamaṃjasa mohi janāvata | jehi sara kāka kaṃka baka sūkara, kyoṃ marāla taha~ āvata
अध्याय 185
जाकी सरन जाइ कोबिद दारुन त्रयताप बुझावत ।तहँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत
jākī sarana jāi kobida dāruna trayatāpa bujhāvata | taha~ gaye mada moha lobha ati, saragahu~ miṭata na sāvata
अध्याय 185
भव-सरिता कहँ नाउ संत, यह कहि औरनि समुझावत ।हौं तिनसों हरि! परम बैर करि, तुम सों भलो मनावत
bhava-saritā kaha~ nāu saṃta, yaha kahi aurani samujhāvata | hauṃ tinasoṃ hari! parama baira kari, tuma soṃ bhalo manāvata
अध्याय 185
नाहिन और ठौर मो कहँ, तातें हठि नातो लावत ।राखु सरन उदार-चूड़ामनि! तुलसिदास गुन गावत
nāhina aura ṭhaura mo kaha~, tāteṃ haṭhi nāto lāvata | rākhu sarana udāra-cūḍa़āmani! tulasidāsa guna gāvata
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
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आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.