अध्याय 187
श्लोक 1
ताहि तें आयो सरन सबेरें ।ग्यान बिराग भगति साधन कछु सपनेहुँ नाथ! न मेरें
tāhi teṃ āyo sarana sabereṃ | gyāna birāga bhagati sādhana kachu sapanehu~ nātha! na mereṃ
अध्याय 187
ताहि तें आयो सरन सबेरें ।ग्यान बिराग भगति साधन कछु सपनेहुँ नाथ! न मेरें
tāhi teṃ āyo sarana sabereṃ | gyāna birāga bhagati sādhana kachu sapanehu~ nātha! na mereṃ
अध्याय 187
लोभ-मोह-मद-काम-क्रोध रिपु फिरत रैनि-दिन घेरें ।तिनहिं मिले मन भयो कुपथ-रत, फिरै तिहारेहि फेरें
lobha-moha-mada-kāma-krodha ripu phirata raini-dina ghereṃ | tinahiṃ mile mana bhayo kupatha-rata, phirai tihārehi phereṃ
अध्याय 187
दोष-निलय यह बिषय सोक-प्रद कहत संत श्रुति टेरें ।जानत हूँ अनुराग तहाँ अति सो, हरि तुम्हरेहि प्रेरें?
doṣa-nilaya yaha biṣaya soka-prada kahata saṃta śruti ṭereṃ | jānata hū~ anurāga tahā~ ati so, hari tumharehi prereṃ?
अध्याय 187
बिष पियूष सम करहु अगिनि हिम, तारि सकहु बिनु बेरें ।तुम सम ईस कृपालु परम हित पुनि न पाइहौं हेरें
biṣa piyūṣa sama karahu agini hima, tāri sakahu binu bereṃ | tuma sama īsa kṛpālu parama hita puni na pāihauṃ hereṃ
अध्याय 187
यह जिय जानि रहौं सब तजि रघुबीर भरोसे तेरें ।तुलसिदास यह बिपति बागुरौ तुम्हहिं सों बनै निबेरें
yaha jiya jāni rahauṃ saba taji raghubīra bharose tereṃ | tulasidāsa yaha bipati bāgurau tumhahiṃ soṃ banai nibereṃ
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.