अध्याय 188
श्लोक 1
मैं तोहिं अब जान्यो संसार ।बाँधि न सकहिं मोहिं हरिके बल, प्रगट कपट-आगार
maiṃ tohiṃ aba jānyo saṃsāra | bā~dhi na sakahiṃ mohiṃ harike bala, pragaṭa kapaṭa-āgāra
अध्याय 188
मैं तोहिं अब जान्यो संसार ।बाँधि न सकहिं मोहिं हरिके बल, प्रगट कपट-आगार
maiṃ tohiṃ aba jānyo saṃsāra | bā~dhi na sakahiṃ mohiṃ harike bala, pragaṭa kapaṭa-āgāra
अध्याय 188
देखत ही कमनीय, कछू नाहिंन पुनि किये बिचार ।ज्यों कदलीतरु-मध्य निहारत, कबहुँ न निकसत सार
dekhata hī kamanīya, kachū nāhiṃna puni kiye bicāra | jyoṃ kadalītaru-madhya nihārata, kabahu~ na nikasata sāra
अध्याय 188
तेरे लिये जनम अनेक मैं फिरत न पायों पार ।महामोह-मृगजल-सरिता महँ बोर्यो हौं बारहिं बार
tere liye janama aneka maiṃ phirata na pāyoṃ pāra | mahāmoha-mṛgajala-saritā maha~ boryo hauṃ bārahiṃ bāra
अध्याय 188
सुनु खल! छल-बल कोटि किये बस होहिं न भगत उदार ।सहित सहाय तहाँ बसि अब, जेहि हृदय न नंदकुमार
sunu khala! chala-bala koṭi kiye basa hohiṃ na bhagata udāra | sahita sahāya tahā~ basi aba, jehi hṛdaya na naṃdakumāra
अध्याय 188
तासों करहु चातुरी जो नहिं जानै मरम तुम्हार ।सो परि डरै मरै रजु-अहि तें, बूझै नहिं ब्यवहार
tāsoṃ karahu cāturī jo nahiṃ jānai marama tumhāra | so pari ḍarai marai raju-ahi teṃ, būjhai nahiṃ byavahāra
अध्याय 188
निज हित सुनु सठ! हठ न करहि, जो चहहि कुसल परिवार ।तुलसिदास प्रभुके दासनि तजि भजहि जहाँ मद मार
nija hita sunu saṭha! haṭha na karahi, jo cahahi kusala parivāra | tulasidāsa prabhuke dāsani taji bhajahi jahā~ mada māra
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.