अध्याय 23
श्लोक 1
सब सोच-बिमोचन चित्रकूट ।कलिहरन, करन कल्यान बूट
saba soca-bimocana citrakūṭa | kaliharana, karana kalyāna būṭa
अध्याय 23
सब सोच-बिमोचन चित्रकूट ।कलिहरन, करन कल्यान बूट
saba soca-bimocana citrakūṭa | kaliharana, karana kalyāna būṭa
अध्याय 23
सुचि अवनि सुहावनि आलबाल ।कानन बिचित्र, वारी बिसाल
suci avani suhāvani ālabāla | kānana bicitra, vārī bisāla
अध्याय 23
मंदाकिनि-मालिनि सदा सींच ।बर बारि, बिषम नर-नारि नीच
maṃdākini-mālini sadā sīṃca | bara bāri, biṣama nara-nāri nīca
अध्याय 23
साखा सुसृंग, भूरुह-सुपात ।निरझर मधुबर, मृदु मलय बात
sākhā susṛṃga, bhūruha-supāta | nirajhara madhubara, mṛdu malaya bāta
अध्याय 23
सुक, पिक, मधुकर, मुनिबर बिहारु ।साधन प्रसून फल चारि चारु
suka, pika, madhukara, munibara bihāru | sādhana prasūna phala cāri cāru
अध्याय 23
भव-घोरघाम-हर सुखद छाँह ।थप्यो थिर प्रभाव जानकी-नाह
bhava-ghoraghāma-hara sukhada chā~ha | thapyo thira prabhāva jānakī-nāha
अध्याय 23
साधक-सुपथिक बड़े भाग पाइ ।पावत अनेक अभिमत अघाइ
sādhaka-supathika baḍa़e bhāga pāi | pāvata aneka abhimata aghāi
अध्याय 23
रस एक, रहित-गुन-करम-काल ।सिय राम लखन पालक कृपाल
rasa eka, rahita-guna-karama-kāla | siya rāma lakhana pālaka kṛpāla
अध्याय 23
तुलसी जो राम पद चहिय प्रेम ।सेइय गिरि करि निरुपाधि नेम
tulasī jo rāma pada cahiya prema | seiya giri kari nirupādhi nema
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.