अध्याय 244
श्लोक 1
याहि तें मैं हरि ग्यान गँवायो ।परिहरि हृदय-कमल रघुनाथहि, बाहर फिरत बिकल भयो धायो
yāhi teṃ maiṃ hari gyāna ga~vāyo | parihari hṛdaya-kamala raghunāthahi, bāhara phirata bikala bhayo dhāyo
अध्याय 244
याहि तें मैं हरि ग्यान गँवायो ।परिहरि हृदय-कमल रघुनाथहि, बाहर फिरत बिकल भयो धायो
yāhi teṃ maiṃ hari gyāna ga~vāyo | parihari hṛdaya-kamala raghunāthahi, bāhara phirata bikala bhayo dhāyo
अध्याय 244
ज्यों कुरंग निज अंग रुचिर मद अति मतिहीन मरम नहिं पायो ।खोजत गिरि, तरु, लता, भूमि, बिल परम सुगंध कहाँ तें आयो
jyoṃ kuraṃga nija aṃga rucira mada ati matihīna marama nahiṃ pāyo | khojata giri, taru, latā, bhūmi, bila parama sugaṃdha kahā~ teṃ āyo
अध्याय 244
ज्यों सर बिमल बारि परिपूरन, ऊपर कछु सिवार तन छायो ।जारत हियो ताहि तजि हौं सठ, चाहत यहि बिधि तृषा बुझायो
jyoṃ sara bimala bāri paripūrana, ūpara kachu sivāra tana chāyo | jārata hiyo tāhi taji hauṃ saṭha, cāhata yahi bidhi tṛṣā bujhāyo
अध्याय 244
ब्यापत त्रिबिध ताप तनु दारुन, तापर दुसह दरिद्र सतायो ।अपनेहि धाम नाम-सुरतरु तजि बिषय-बबूर-बाग मन लायो
byāpata tribidha tāpa tanu dāruna, tāpara dusaha daridra satāyo | apanehi dhāma nāma-surataru taji biṣaya-babūra-bāga mana lāyo
अध्याय 244
तुम-सम ग्यान-निधान, मोहि सम मूढ़ न आन पुराननि गायो ।तुलसिदास प्रभु! यह बिचारि जिय कीजै नाथ उचित मन भायो
tuma-sama gyāna-nidhāna, mohi sama mūḍha़ na āna purānani gāyo | tulasidāsa prabhu! yaha bicāri jiya kījai nātha ucita mana bhāyo
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.