अध्याय 35
श्लोक 1
कटु कहिये गाढ़े परे, सुनि समुझि सुसाईं ।करहिं अनभलेउ को भलो, आपनी भलाई
kaṭu kahiye gāḍha़e pare, suni samujhi susāīṃ | karahiṃ anabhaleu ko bhalo, āpanī bhalāī
अध्याय 35
कटु कहिये गाढ़े परे, सुनि समुझि सुसाईं ।करहिं अनभलेउ को भलो, आपनी भलाई
kaṭu kahiye gāḍha़e pare, suni samujhi susāīṃ | karahiṃ anabhaleu ko bhalo, āpanī bhalāī
अध्याय 35
समरथ सुभ जो पाइये, बीर पीर पराई ।ताहि तकैं सब ज्यों नदी बारिधि न बुलाई
samaratha subha jo pāiye, bīra pīra parāī | tāhi takaiṃ saba jyoṃ nadī bāridhi na bulāī
अध्याय 35
अपने अपनेको भलो, चहैं लोग लुगाई ।भावै जो जेहि तेहि भजै, सुभ असुभ सगाई
apane apaneko bhalo, cahaiṃ loga lugāī | bhāvai jo jehi tehi bhajai, subha asubha sagāī
अध्याय 35
बाँह बोलि दै थापिये, जो निज बरिआई ।बिन सेवा सों पालिये, सेवककी नाई
bā~ha boli dai thāpiye, jo nija bariāī | bina sevā soṃ pāliye, sevakakī nāī
अध्याय 35
चूक-चपलता मेरियै, तू बड़ो बड़ाई ।होत आदरे ढीठ है, अति नीच निलाई
cūka-capalatā meriyai, tū baḍa़o baḍa़āī | hota ādare ḍhīṭha hai, ati nīca nilāī
अध्याय 35
बंदिछोर बिरुदावली, निगमागम गाई ।नीको तुलसीदासको, तेरियै निकाई
baṃdichora birudāvalī, nigamāgama gāī | nīko tulasīdāsako, teriyai nikāī
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.