अध्याय 65
श्लोक 1
राम राम रटु, राम राम रटु, राम राम जपु जीहा ।रामनाम-नवनेह-मेहको, मन ! हठि होहि पपीहा
rāma rāma raṭu, rāma rāma raṭu, rāma rāma japu jīhā | rāmanāma-navaneha-mehako, mana ! haṭhi hohi papīhā
अध्याय 65
राम राम रटु, राम राम रटु, राम राम जपु जीहा ।रामनाम-नवनेह-मेहको, मन ! हठि होहि पपीहा
rāma rāma raṭu, rāma rāma raṭu, rāma rāma japu jīhā | rāmanāma-navaneha-mehako, mana ! haṭhi hohi papīhā
अध्याय 65
सब साधन-फल कूप-सरित-सर, सागर-सलिल-निरासा ।रामनाम-रति-स्वाति-सुधा-सुभ-सीकर प्रेमपियासा
saba sādhana-phala kūpa-sarita-sara, sāgara-salila-nirāsā | rāmanāma-rati-svāti-sudhā-subha-sīkara premapiyāsā
अध्याय 65
गरजि, तरजि, पाषान बरषि पबि, प्रीति परखि जिय जानै ।अधिक अधिक अनुराग उमँग उर, पर परमिति पहिचानै
garaji, taraji, pāṣāna baraṣi pabi, prīti parakhi jiya jānai | adhika adhika anurāga uma~ga ura, para paramiti pahicānai
अध्याय 65
रामनाम गति, रामनाम मति, राम-नाम-अनुरागी ।ह्वै गये, हैं, जे होहिंगे, तेइ त्रिभुवन गनियत बड़भागी
rāmanāma gati, rāmanāma mati, rāma-nāma-anurāgī | hvai gaye, haiṃ, je hohiṃge, tei tribhuvana ganiyata baḍa़bhāgī
अध्याय 65
एक अंग मग अगमु गवन कर, बिलमु न छिन छिन छाहैं ।तुलसी हित अपनो अपनी दिसि, निरुपधि नेम निबाहैं
eka aṃga maga agamu gavana kara, bilamu na china china chāhaiṃ | tulasī hita apano apanī disi, nirupadhi nema nibāhaiṃ
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.