अध्याय 82
श्लोक 1
मोहजनित मल लाग बिबिध बिधि कोटिहु जतन न जाई ।जनम जनम अभ्यास-निरत चित, अधिक अधिक लपटाई
mohajanita mala lāga bibidha bidhi koṭihu jatana na jāī | janama janama abhyāsa-nirata cita, adhika adhika lapaṭāī
अध्याय 82
मोहजनित मल लाग बिबिध बिधि कोटिहु जतन न जाई ।जनम जनम अभ्यास-निरत चित, अधिक अधिक लपटाई
mohajanita mala lāga bibidha bidhi koṭihu jatana na jāī | janama janama abhyāsa-nirata cita, adhika adhika lapaṭāī
अध्याय 82
नयन मलिन परनारि निरखि, मन मलिन बिषय सँग लागे ।हृदय मलिन बासना-मान-मद, जीव सहज सुख त्यागे
nayana malina paranāri nirakhi, mana malina biṣaya sa~ga lāge | hṛdaya malina bāsanā-māna-mada, jīva sahaja sukha tyāge
अध्याय 82
परनिंदा सुनि श्रवन मलिन भे, बचन दोष पर गाये ।सब प्रकार मलभार लाग निज नाथ-चरन बिसराये
paraniṃdā suni śravana malina bhe, bacana doṣa para gāye | saba prakāra malabhāra lāga nija nātha-carana bisarāye
अध्याय 82
तुलसिदास ब्रत-दान, ग्यान-तप, सुद्धिहेतु श्रुति गावै ।राम-चरन-अनुराग-नीर बिनु मल अति नास न पावै
tulasidāsa brata-dāna, gyāna-tapa, suddhihetu śruti gāvai | rāma-carana-anurāga-nīra binu mala ati nāsa na pāvai
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.