अध्याय 97
श्लोक 1
जौ पै हरि जनके औगुन गहते ।तौ सुरपति कुरुराज बालिसों, कत हठि बैर बिसहते
jau pai hari janake auguna gahate | tau surapati kururāja bālisoṃ, kata haṭhi baira bisahate
अध्याय 97
जौ पै हरि जनके औगुन गहते ।तौ सुरपति कुरुराज बालिसों, कत हठि बैर बिसहते
jau pai hari janake auguna gahate | tau surapati kururāja bālisoṃ, kata haṭhi baira bisahate
अध्याय 97
जौ जप जाग जोग ब्रत बरजित, केवल प्रेम न चहते ।तौ कत सुर मुनिबर बिहाय ब्रज, गोप-गेह बसि रहते
jau japa jāga joga brata barajita, kevala prema na cahate | tau kata sura munibara bihāya braja, gopa-geha basi rahate
अध्याय 97
जौ जहँ-तहँ प्रन राखि भगतको, भजन-प्रभाउ न कहते ।तौ कलि कठिन करम-मारग जड़ हम केहि भाँति निबहते
jau jaha~-taha~ prana rākhi bhagatako, bhajana-prabhāu na kahate | tau kali kaṭhina karama-māraga jaḍa़ hama kehi bhā~ti nibahate
अध्याय 97
जौ सुतहित लिये नाम अजामिलके अघ अमित न दहते ।तौ जमघट साँसति-हर हमसे बृषभ खोजि खोजि नहते
jau sutahita liye nāma ajāmilake agha amita na dahate | tau jamaghaṭa sā~sati-hara hamase bṛṣabha khoji khoji nahate
अध्याय 97
जो जगबिदित पतितपावन, अति बाँकुर बिरद न बहते ।तौ बहुकलप कुटिल तुलसीसे, सपनेहुँ सुगति न लहते
jo jagabidita patitapāvana, ati bā~kura birada na bahate | tau bahukalapa kuṭila tulasīse, sapanehu~ sugati na lahate
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
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आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.