ऐतरेयोपनिषद्

Adhyāya 1 · Khaṇḍa 2 — The Devas Seek a Home in the Human Formश्लोक 2/540%

Aitareya Upanishad 2.2

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

ताभ्यो गामानयत् ।ता अब्रुवन्न वै नोऽयमलमिति ।ताभ्योऽश्वमानयत् ।ता अब्रुवन्न वै नोऽयमलमिति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

उसने उनके लिये गाय लाया। वे बोले — "यह हमारे लिये अलम् (पर्याप्त) नहीं।" फिर घोड़ा लाया। वे बोले — "यह भी पर्याप्त नहीं।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

He brought them a cow. They said: 'This is not enough for us.' He brought them a horse. They said: 'This is not enough for us.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

दो पशु-रूप प्रस्तावित किए जाते हैं और अस्वीकार कर दिए जाते हैं। गाय और घोड़ा — श्रेष्ठ प्राणी — सभी देवों को आश्रय नहीं दे सकते। कुछ अधिक की आवश्यकता है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
जब आत्मा ने देवताओं के आश्रय के लिए गाय और घोड़े का रूप प्रस्तुत किया, तो उन्होंने उसे यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि "यह हमारे लिए पर्याप्त नहीं है।" यह प्रसंग जीवन के एक अत्यंत गहरे सत्य को उजागर करता है: जब चुना हुआ माध्यम बार-बार अपर्याप्त सिद्ध हो, तो अपनी क्षमता को दोष देने के बजाय यह समझना चाहिए कि आप जिस शक्ति को धारण किए हैं, वह उस माध्यम से कहीं अधिक विशाल है। आधुनिक समाज में मनुष्य अक्सर अपनी असीम चेतना और आध्यात्मिक प्यास को केवल पशु-सुलभ सुखों — धन संग्रह, शारीरिक विलासिता, आहार और प्रतिष्ठा की संकीर्ण सीमाओं — में समाने का प्रयास करता है। जब भौतिक संपदा और विलासिता के शिखर पर पहुँचकर भी मन में अतृप्ति और घुटन बनी रहे, तो समझ लें कि आपकी आत्मा किसी साधारण सांसारिक ढाँचे से संतुष्ट नहीं हो सकती; उसे एक उच्चतर, मानवीय और दिव्य धरातल चाहिए।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **तुच्छ लक्ष्यों का परित्याग (Outgrowing Lesser Vessels):** जब भौतिक सफलता और उपभोग के बाद भी भीतर गहरा असंतोष बना रहे, तो समझें कि आपकी चेतना केवल जैविक सुरक्षा से संतुष्ट नहीं हो सकती; उसे आत्म-ज्ञान और व्यापक उद्देश्य चाहिए। - **संकीर्ण भूमिकाओं से मुक्ति (Role Transcendence):** स्वयं को केवल एक 'कर्मचारी' या 'उपभोक्ता' जैसी सीमित सामाजिक पहचान में न समेटें; अपनी समग्र मानवीय और आध्यात्मिक क्षमता को स्वीकार करें। - **उचित माध्यम का चयन (Elevating Medium of Expression):** अपनी रचनात्मक और बौद्धिक ऊर्जा को ऐसे कार्यों में लगाएँ जो आपकी आत्मा की विशालता और गरिमा के अनुरूप हों।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या आप अपनी अनंत आध्यात्मिक और बौद्धिक क्षमता को केवल सांसारिक उपभोग और प्रतिष्ठा के संकीर्ण बक्से में बंद करने का व्यर्थ प्रयास कर रहे हैं?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

कार्यात्मक-आवश्यकताओं का विश्लेषण: सरल संरचनाएँ अधिक जटिल कार्यों को संजो नहीं सकतीं। उपनिषद् इस सिद्धान्त को पहचानती है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
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Translation
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Last updated
2026-10-23
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