Atharva Veda
18
अध्याय 18 / 20

Kanda 18

काण्ड 18

283 श्लोकभाग 1/6 · श्लोक 1.1–1.61

पूर्ण अध्याय पाठ61 श्लोक

अध्याय 18

श्लोक 1.1

पितृमेधः।१-६१ अथर्वा।यमः।, मन्त्रोक्ताः, ४० रुद्रः, ४१-४३ सरस्वती, ४४-४६, ५१-५२ पितरः।त्रिष्टुप्, ८, १५ आर्षी पङ्क्तिः, १४, ४९-५० भुरिक्, १८-२०, २१-२३ जगती, ३७-३८ परोष्णिक्, ५६-५७, ६१ अनुष्टुप्, ५९ पुरोबृहती।ओ चि॒त् सखा॑यं स॒ख्या व॑वृत्यां ति॒रः पु॒रु चि॑दर्ण॒वं ज॑ग॒न्वान्।पि॒तुर्नपा॑त॒मा द॑धीत वे॒धा अधि॒ क्षमि॑ प्रत॒रं दीध्या॑नः

pitṛmedhaḥ| 1-61 atharvā| yamaḥ|, mantroktāḥ, 40 rudraḥ, 41-43 sarasvatī, 44-46, 51-52 pitaraḥ| triṣṭup, 8, 15 ārṣī paṅktiḥ, 14, 49-50 bhurik, 18-20, 21-23 jagatī, 37-38 paroṣṇik, 56-57, 61 anuṣṭup, 59 purobṛhatī| o cit sakhāyaṃ sakhyā vavṛtyāṃ tiraḥ puru cidarṇavaṃ jaganvān| piturnapātamā dadhīta vedhā adhi kṣami prataraṃ dīdhyānaḥ

हिन्दी अर्थ

करा पालन कर स्नातक बन कर भ्राया है। इसलिये वहं विवाह भ्रादि के विधि- विधानं को जानता है 1 यमी है युवति, परन्तु विधाहं के विधिविघानों से अनभि है! बहु यमके साथ विवाह चाहती है 1 इसलिये यम के प्रति विवाह का प्रस्ताव रख रही है । विवाह की सप्तपदी की विधि म “सखे यमी कहती है यमसे कि सिमाव की त्रिधिते ए भ्रपना विवाहित जसे कि उपन्यासो, कथा-कहानिर्यो, भौर नाटकं मँ पात्रं कल्पित कर लिये जति है । वेदो मे एसे संवाद प्ररोचनाथं यत्र-तत्र मिलते है, यथा-उरवंशी गौर पुरवा का संवाद ( ऋऽ.१०।९१५ ) ;: विद्वामित्र भौर नदियों का संवाद (ऋ० ३।३8); सरमा भ्रौर पणियों का संवाद ऋ १०।१०८)। एसे संवादो को निरक्तकार ने “भाख्यान" तथा “्राल्यायिकाए “ कहा.है । भं है- तंर कर, सफलतापूवंक ब्रह्मचर्याधम समाप्त करं “"ैःसंतरंणे" ।

English

An accompaniment to funeral ceremonies and sacrificial offerings to ancestral spirits Fain would I win my friend to kindly friendship. So may the

अध्याय 18

श्लोक 1.2

न ते॒ सखा॑ स॒ख्यं व॑ष्ट्ये॒तत् सल॑क्ष्मा॒ यद् विषु॑रूपा॒ भवा॑ति ।म॒हस्पु॒त्रासो॒ असु॑रस्य वी॒रा दि॒वो ध॒र्तार॑ उर्वि॒या परि॑ ख्यन्

na te sakhā sakhyaṃ vaṣṭyetat salakṣmā yad viṣurūpā bhavāti | mahasputrāso asurasya vīrā divo dhartāra urviyā pari khyan

हिन्दी अर्थ

रूक रहकर सबं के कमो को मानो देख रहे है (देखो--मन्बरंस्या २) (रान्नीभिः) राध्यो के साय रहनेवाले दिन, मौर (भरहभिः) दिनोंके छ भरधर्वेवेद-माष्यः का० १८. सु १ का भ्र्थात् रात प्रीरदिन का. पितादहै, उसकी धांख ( मुहुः) बार-बार

English

They stand not still, they never close their eyelids, those senti- nels of Gods who wander round us.

अध्याय 18

श्लोक 1.3

उ॒शन्ति॑ घा॒ ते अ॒मृता॑स ए॒तदेक॑स्य चित् त्य॒जसं॒ मर्त्य॑स्य ।नि ते॒ मनो॒ मन॑सि धाय्य॒स्मे जन्युः॒ पति॑स्त॒न्व॑१मा वि॑विश्याः

uśanti ghā te amṛtāsa etadekasya cit tyajasaṃ martyasya | ni te mano manasi dhāyyasme janyuḥ patistanva1mā viviśyāḥ

हिन्दी अर्थ

समपित कर देता है । (यथा) जसे (वरुणः) वरणं करनेवाला श्रेष्ठ परमे- रवर (विदवम ) जगत् के रहस्य को ( वेद ) जानता है, वसे ( सः ) वह के रहस्यं को जान लेता है। ( सः ) वहु भक्तिरसवर्षी ( यज्ञियः ) पूजा यज्ञिय-विचारों भौर यश्ञियकमो को ( यजति ) 'यज्ञमावना से करता रहता है 1 भदिति = वाक् (निषं० १।११) ; तथा गौ (निषं० २।११)१ यवः महन्नाम (निघं० ३1३) 1 यज्ञियः यज देवपुजासंगंतिकरणदानेष् । ऋतून् = जलवतृशीतलस्वभावा (योषणा) पत्नी, भपने पति को परामशों काः कथन करती है । (नदस्य) वेदों का भ्न्तनदि करनेवाले परमेश्वर का वैदिक प्रन्तर्नादि होने पर वह परमे्वर (नः) हमारी (मनः) मननशक्तिः की (परि

English

229 waters.

अध्याय 18

श्लोक 1.4

न यत् पु॒रा च॑कृ॒मा कद्ध॑ नू॒नमृ॒तं वद॑न्तो॒ अनृ॑तं रपेम ।ग॒न्ध॒र्वो अ॒प्स्वप्या॑ च॒ योषा॒ सा नौ॒ नाभिः॑ पर॒मं जा॒मि तन्नौ॑

na yat purā cakṛmā kaddha nūnamṛtaṃ vadanto anṛtaṃ rapema | gandharvo apsvapyā ca yoṣā sā nau nābhiḥ paramaṃ jāmi tannau

हिन्दी अर्थ

(ऋतेन ) सृष्टि के नियमानुसार, (सत्यवाचा) परमेदवरीय सत्येच्छा (होता) उन्ह शक्तियां प्रदान करता है । । नानाषूपों मे "प्रकट होऊ" तब जगत् का सर्जन होता है । “प्रकट होऊ यह इच्छा मानसिक शब्द है, मानसिक वाणी है, जो कि सत्यस्वरूपा है, १।९।५) । मनुष्यो. में भी किसी कायं के आरम्भ में पहिले इच्छा पैदा होती है । तदनन्तर इच्छा को कार्यान्वित करने के लिये तदृपयोगी साधनों

English

As Priest he calls aloud, as Warrior shows his skill, as Asura tries his strength, and with the hymn is stirred.

अध्याय 18

श्लोक 1.5

गर्भे॒ नु नौ॑ जनि॒ता दम्प॑ती कर्दे॒वस्त्वष्टा॑ सवि॒ता वि॒श्वरू॑पः ।नकि॑रस्य॒ प्र मि॑नन्ति व्र॒तानि॒ वेद॑ नाव॒स्य पृ॑थि॒वी उ॒त द्यौः

garbhe nu nau janitā dampatī kardevastvaṣṭā savitā viśvarūpaḥ | nakirasya pra minanti vratāni veda nāvasya pṛthivī uta dyauḥ

हिन्दी अर्थ

४१. सर॑खतीं देवयन्तो हवन्ते सर॑खतीमष्वरे तायमाने । यिनी वेदवा णियों का (हवन्ते) उच्चारण वा जप करते हैँ । (अध्वरे) मरहिसाः वेदवाणी का उच्चारण करते है । (सुकृतः) सुकरो के.करनेवाले -(सरुस्व- करनेवाले कै. लिये, (वार॑म्) उसे मरभिलषित फल (दात्) देती है ।

English

All the Gods come to this thy heavenly Yajus which from the motley Pair milked oil and water Hath the King seized us? How have we offended against his holy Ordinance? Who knoweth?

अध्याय 18

श्लोक 1.6

को अ॒द्य यु॑ङ्क्ते धु॒रि गा ऋ॒तस्य॒ शिमी॑वतो भा॒मिनो॑ दुर्हृणा॒यून्।आ॒सन्नि॑षून् हृ॒त्स्वसो॑ मयो॒भून् य ए॑षां भृ॒त्यामृ॒णध॒त् स जी॑वात्

ko adya yuṅkte dhuri gā ṛtasya śimīvato bhāmino durhṛṇāyūn| āsanniṣūn hṛtsvaso mayobhūn ya eṣāṃ bhṛtyāmṛṇadhat sa jīvāt

हिन्दी अर्थ

(हवेषु) देवासुर संग्रामो मे, (कदचन) कोई भी भ्रासुरो कमं या प्नाभुरो माव (न सहते) नहीं पराभूत कर पाता । भराष्यात्मिक उन्नति के लिये नानाविघ रसीले पदार्थो का सेवन करना सवर का बर्णंन भी भरभिप्रेत है । (प्रवतः) दूर-दूर के (महीः) महालोकलोकान्तरों मँ (परेयिवांसम ) पहुचे हुए, ( बहुभ्यः ) नाना उपासको को ( पन्थाम्, भनु पस्पशानम. )" निरन्तर मागं दशति हुए, (वैवस्वतम्) सूर्याधिपति (जनानाम ) उपासक- जनों को ( संगमनम्. ) निज संगति में लानेवाले, ( यमम् ) जगन्नियन्ता (राजानम. ) जगत् कै महाराज परमेहवर की, (हविषा) भ्रात्मसमर्पण की

English

sickness. Sarasvati, who comest with the Fathers, joying in hymns, O

अध्याय 18

श्लोक 1.7

को अ॒स्य वे॑द प्रथ॒मस्याह्नः॒ क ईं॑ ददर्श॒ क इ॒ह प्र वो॑चत्।बृ॒हन्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य॒ धाम॒ कदु॑ ब्रव आहनो॒ वीच्या॒ नॄन्

ko asya veda prathamasyāhnaḥ ka īṃ dadarśa ka iha pra vocat| bṛhanmitrasya varuṇasya dhāma kadu brava āhano vīcyā nṝn

हिन्दी अर्थ

(भरा गत) भ्राए है । (अधा) मोजनानन्तर (नः) हमारे जीवनो मेँ (चम) सुखकशषान्ति (श्ररपः) भौर पापरदहित सत्याचरण (दधात) स्थापित कीजिये, तथा दुःखो को हम से (योः) पृथक् कीजिये । शं योः = “श्षमनं च रोगाणां मा क्ंिष्ट पितरः केन॑चिन्नो यद् वु आग॑ः पुरुषता कराम ॥५२॥ हे पितरो ! (जानु) चुटने ( भ्राच्य ) टेककर, भ्र्थात चौकड़ी लगा कर, रौर (दक्षिणतः) यजमान कै दाहिनी भ्रोर (निषद्य) बंठ कर, विद्वे) भाप सब (नः) हमारे समर्पित (हविः) भोज्यान्नो के गुण दोष का (अभि उपदेका दीजिये । (पितरः) है पितरो ! सेवादुश्रृषा मे (केनचित ) किसी कीजिये । (यद् ) जिस अपराध को, ( वः) भ्राप के भ्रति, (पुरुषता) मानुष- सुलम प्रज्ञान के कारण (कराम) हमने कर दिया हो

English

I have attained the gracious-minded Fathers, I have gained son and progeny from Vishnu. They who enjoy pressed juices with oblation, seated on sacred grass, come oftenest hither. Now be this homage offered to the Fathers, to those who passed of old and those who

अध्याय 18

श्लोक 1.8

य॒मस्य॑ मा य॒म्यं॑ काम॒ आग॑न्त्समा॒ने योनौ॑ सह॒शेय्या॑य ।जा॒येव॒ पत्ये॑ त॒न्वं रिरिच्यां॒ वि चि॑द् वृहेव॒ रथ्ये॑व च॒क्रा

yamasya mā yamyaṃ kāma āgantsamāne yonau sahaśeyyāya | jāyeva patye tanvaṃ riricyāṃ vi cid vṛheva rathyeva cakrā

हिन्दी अर्थ

चौकड़ी लगाकर बंठना, भोज्यान्न को स्वीकार करना, उषदेश्षादि का कथन-ये जीवित पितरों मेँ ही सम्भव रहै मृतो में नही । हिसिष्ट- सेवा मेँ कमी के कारण भावी निमत्छरणों पर न भ्राना, भौर इस से यजमान का दुभ्वी होना-यह ही हिसा है, मानसिक हिसा है। गृणन्तु =गृशब्दे, ५६. त्वष्टा दुद्र वहतुं णोति तेनेदं विश्वं शषनं समैति । यमस्य माता प॑यहयमौनाः म॒हो जाया वि्॑स्वतो नाञ्च ।॥५६॥ (त्वष्टा) उषा के रूप का निर्माण करनेवाला पनुदित सूयं, (दुत) उषारूपी दुहिता के लिये (वहुतुम. ) विवाह (कृणोति) रचाता है,(तेन ) इस इकट्ठा होता है । (मस्य ) दिन भ्रौर रात के जोड़े का ( माता निर्माण करनेवाली उषा (पयु छमाना) जब चली जा रही होती है, तब ( महः ) तेजस्वी चमकते (विवस्वतः) सयं की (जाया) जायारात्री (ननाश) विनष्ट हो जाती है, भदुष्ट हो जाती है।

English

followed, Those who have rested in the earthly region and those who dwell among the happy races.

अध्याय 18

श्लोक 1.9

न ति॑ष्ठन्ति॒ न नि मि॑षन्त्ये॒ते दे॒वानां॒ स्पश॑ इ॒ह ये चर॑न्ति ।अ॒न्येन॒ मदा॑हनो याहि॒ तूयं॒ तेन॒ वि वृ॑ह॒ रथ्ये॑व च॒क्रा

na tiṣṭhanti na ni miṣantyete devānāṃ spaśa iha ye caranti | anyena madāhano yāhi tūyaṃ tena vi vṛha rathyeva cakrā

हिन्दी अर्थ

३.० अथर्ववेद-माष्य का०.१८).सू० १ उषाके रूपमे पूर्वी श्राकाश मे चमकने लगती हः। यह मानो उषा का पूर्वी आकादा से विवाह है'इस समय प्राणी जगत् जाग उठा होता है. मौर भ्रप्राणी जगत् भीः चमकने लगता है, मानो वह उषा के विवाह में सम्मिलित हुभ्रा है कि पितृयज्ञ इस काल में होना चाहिए, रात्रीकाल मे नहीं । उभा राजानौ खघया मद॑न्तो यमं पश्यासि वर्ण च देवम् ।॥५४॥

English

Mātali prospers there with Kavyas, Yama with Angiras’ sons, Brihaspati with singers. Exalters of the Gods, by Gods exalted, aid us those Fathers in our invocations?

अध्याय 18

श्लोक 1.10

रात्री॑भिरस्मा॒ अह॑भिर्दशस्ये॒त् सूर्य॑स्य॒ चक्षु॒र्मुहु॒रुन्मि॑मीयात्।दि॒वा पृ॑थि॒व्या मि॑थु॒ना सब॑न्धू य॒मीर्य॒मस्य॑ विवृहा॒दजा॑मि

rātrībhirasmā ahabhirdaśasyet sūryasya cakṣurmuhurunmimīyāt| divā pṛthivyā mithunā sabandhū yamīryamasya vivṛhādajāmi

हिन्दी अर्थ

तथा "पू" (पूरणे) । नपातम नपात् कां भयं है'““पोतो 1 यमी "नप" मौरपितुः” शब्दों का प्रयोगः कृरःयम को“पितृ-ऋण"ते भुक्त होने की भोर पेरित करती है । यह तंमी घम्भव है" अब किं यम विवाह करके पुत्रके निसित्त गर्भाधान करे । यमी साथ ही यह भी - कहती ह किं विना पच के. बुढुपे तथा ब्रिमारी में जीवनः अन्धकारमम हो जाता है 1 श्रतः भविष्य का (ते) तेरा (सखा) समान-श्यातिवाला, तेरे (एतत्) इस (सलग का० १८.1 सु०१ प्रथ्ववेद-माध्य . ९ लक्षणो है +(विषृरूपा ) विवाह के लिये वधू विमिन्न विषम लक्षर्णोवाली

English

Sage, come through the air’s wide ocean, Remembering the earth and days to follow, obtain a son the issue of his father.

अध्याय 18

श्लोक 1.11

आ घा॒ ता ग॑च्छा॒नुत्त॑रा यु॒गानि॒ यत्र॑ जा॒मयः॑ कृ॒णव॒न्नजा॑मि ।उप॑ बर्बृहि वृष॒भाय॑ बा॒हुम॒न्यमि॑च्छस्व सुभगे॒ पतिं॒ मत्

ā ghā tā gacchānuttarā yugāni yatra jāmayaḥ kṛṇavannajāmi | upa barbṛhi vṛṣabhāya bāhumanyamicchasva subhage patiṃ mat

हिन्दी अर्थ

के (वीराः पूश्राः) वीर पुत्र, (दिवः घर्तारः) जो किं दुलोक का भी धारण कर रहे है, वे (उविया) पृथिवी का मी (परि ख्यन्) पूणंतया निरीक्षण कर यम कहा है यमी के-रजवीयं की दुष्टि से हम दोनों समान ख्यातिवाले हैचूकि हम दोनों एक ही माता-पिता की जोडिया संन्तारने है । इसलिये रज- वीयं के गुणो की दृष्टि से समान" तु विवाह का प्रस्तावं करती हई, समान रही है । समान रज॑-वीर्यबरालो का परस्पर विवाह ५€५46/2/-50/6/209/ मं भी सजातीय, परन्तु विलक्षण गृर्णोवाली शाखा की कलमे लगाई जाती है, तभी इनः पर टूल तथा फल उत्कृष्ट गु्णोवाले होते है 1 वैदिक धमं की दृष्टि ते भी, विवाह मेँ माता की सात पीदां, तथा पिताके गोचर परित्याज्य कटे गये है। देख! हम कहीं छिपकर भी परस्पर विवाह नहीं कर

English

Thy friend loves not the friendship which considers her who is near in kindred as a stranger. Sons of the mighty Asura, the heroes, supporters of the heaven, see far around them.

अध्याय 18

श्लोक 1.12

किं भ्राता॑स॒द् यद॑ना॒थं भवा॑ति॒ किमु॒ स्वसा॒ यन्निरृ॑तिर्नि॒गच्छा॑त्।काम॑मूता ब॒ह्वे॒३तद् र॑पामि त॒न्वा॒ऽमे त॒न्वं॑१ सं पि॑पृग्धि

kiṃ bhrātāsad yadanāthaṃ bhavāti kimu svasā yannirṛtirnigacchāt| kāmamūtā bahve3tad rapāmi tanvā'me tanvaṃ1 saṃ pipṛgdhi

हिन्दी अर्थ

जो कि धयुलोक क भरनगिनत तारागण का धारण कर रहे है, वे ही पृथिवी कामी पूणंतया निरीक्षणकररहैर्है। वे नियम वीर ह, हम उर परास्त तीं कर सक्ते । वे षुदुद़ भौर कठोर है । उविया == उर्वी + डियान् । (निर० ३।२।८) । पूरसि: वीराः==इन सुदृढ नियमों को "त्र का 4 जो कि सब को “पुनीत कैरते, भ्रौर सब का “वाण्” करते है ।. नियौ हजारसे भाखोवलि कैः जो कि भूमि तथा भूमि से परे तक को भी देख रहे. (ते) बे (भमृताखः) अमर सुदुढ् नियम (ज) निष्चय से (एतत्) चह

English

Yea, this the Immortals seek of thee with longing, a scion of the only man existing. Then let thy soul and mine be knit together. Embrace thy con- sort as her loving husband.

अध्याय 18

श्लोक 1.13

न ते॑ ना॒थं य॒म्यत्रा॒हम॑स्मि॒ न ते॑ त॒नूं त॒न्वा॒३ सं प॑पृच्याम्।अ॒न्येन॒ मत् प्र॒मुदः॑ कल्पयस्व॒ न ते॒ भ्राता॑ सुभगे वष्ट्ये॒तत्

na te nāthaṃ yamyatrāhamasmi na te tanūṃ tanvā3 saṃ papṛcyām| anyena mat pramudaḥ kalpayasva na te bhrātā subhage vaṣṭyetat

हिन्दी अर्थ

ह परशर्ववेद-माप्य का० १८।यु० १ (मनसि) मन के भरनुकूल (नि धायि ) हो जाय, तु ( जन्युः पतिः केवल मरणधर्मा प्राणी में निहित किये गए है । इसलिये मेरी इच्छा के भनुकूल तू तरि्रोग द्वारा सन्तानोत्पावकता का सूचक है 1

English

Shall we do now what we ne’er did aforetime? we who spoke righteously now talk impurely? Gandharva in the floods, the Dame of Waters—such is our bond, such our most lofty kinship.

अध्याय 18

श्लोक 1.14

न वा उ॑ ते त॒नूं त॒न्वा॒३ सं प॑पृच्यां पा॒पमा॑हु॒र्यः स्वसा॑रं नि॒गच्छा॑त्।असं॑यदे॒तन्मन॑सो हृ॒दो मे॒ भ्राता॒ स्वसुः॒ शय॑ने॒ यच्छ॑यीय

na vā u te tanūṃ tanvā3 saṃ papṛcyāṃ pāpamāhuryaḥ svasāraṃ nigacchāt| asaṃyadetanmanaso hṛdo me bhrātā svasuḥ śayane yacchayīya

हिन्दी अर्थ

यम कहता है यमी से क्रि-( यत् ) जो. काम (परः) एया कालः कौ उन्हीं रज-वीयं के जलो से फेवा हुधा हू, (भप्यां च). भौर उत्दीं -रूज-वीयं के जलँ मेतु स्श्रीरूप मे पदा हुई है । (नी) हमःदोनो का भाई द्धि कासा ताश्चिः) वह ही दुद बन्धून है । (नौ) हम दोनों का -( ततरु.) वह ही. ( परमं ©) करति "+ दसकं दवारा यम कहत है कि ब्रह्मचर्वीधभः क मैने वेदवाणी "योषा-की - उत्पत्ति ह है। वे जल है र्तरूप । पुरंष के रषत मे वीरय कणो

English

Even in the womb God Tvashtar, vivifier, shaping all forms, Creator, made us consorts.

अध्याय 18

श्लोक 1.15

ब॒तो ब॑तासि यम॒ नैव ते॒ मनो॒ हृद॑यं चाविदामा।अ॒न्या किल॒ त्वां क॒क्ष्येऽव यु॒क्तं परि॑ ष्वजातै॒ लिबु॑जेव वृ॒क्षम्

bato batāsi yama naiva te mano hṛdayaṃ cāvidāmā| anyā kila tvāṃ kakṣye'va yuktaṃ pari ṣvajātai libujeva vṛkṣam

हिन्दी अर्थ

का० १८।.सु० १ भ्रयर्ववेद-भाष्य 1 (1796 0न§ शषभाः८०७ या अशाा7श०८०४) का निवास होता हैः आौर स्त्री के.रक्तं मेँ धि1816 09119 या ०५० का निवाष होता है। इन दोनों के मेल से सन्तानोत्पत्ति होती है । ०४8. को. :६09-०9115 -मी .कहते ह । (बूश्न) कै .सदृश.नील्लै-वणं के हँ + भौर-जो करीरे कपर. की.भोर, नीचे की प्नोर,-तथः. पांदवो. की शरोर स॒द्रा गति करते; रहते । योषा काम्यैः बीयंकण रौर रजः कण का मिश्वण स्वरी. होता है, इसलिये स्त्री को योषा क्रहत्र.हैः।.+. मौतीति योषा उणा ०.३।६२) बाहृलकात् 1

English

Ne’er are his holy statutes violated: that we are his the heaven and earth acknowledge. Who yokes to-day unto the pole of Order the strong and passio- nate steers of checkless

अध्याय 18

श्लोक 1.16

अ॒न्यमू॒ षु य॑म्य॒न्य उ॒ त्वां परि॑ ष्वजातै लिबु॑जेव वृ॒क्षम्।तस्य॑ वा॒ त्वं मन॑ इ॒च्छा स वा॒ तवाधा॑ कृणुष्व स॒विदं॒ सुभ॑द्राम्

anyamū ṣu yamyanya u tvāṃ pari ṣvajātai libujeva vṛkṣam| tasya vā tvaṃ mana icchā sa vā tavādhā kṛṇuṣva savidaṃ subhadrām

हिन्दी अर्थ

(सविता) सवेश रक तथां (विदवरूपः). विव को रूप देनेवाले परमेश्वर ने, (नुः) निदचरये से, (गमं) मातुगभैः मे. ही (नौ) हम दोनों को -(दम्पती परमेदवरः के (व्रतानि) किये कमो को (नकिः) नहीं कोई . ( प्र मिनन्ति-) साल सुकते ह । (नौ) हम दोनों के (भस्य) इसःदाम्पत्यसाच.को ( पथित्री उत धौ; पृथिवीलीकं भीः भ्रौ चुलोक भी (त्रेद जानता है ॥ ही. मालुगभं में सहवासः किया है ।- दस्तु यमी कहतीःहै यम. को कि हमारे जन्मदाता परभेदवर ते .ही ह्मे. दम्पती. रूप में कर दिया - है । पृथिवी द्योः करविताहप में पृथिवी भौर धौः-को .-त्ेतन माना है । अथवा इन का भयं है भवाव भरजामा जेनयावहे ।(भथवं ° १४।२।७१).) इस मन्त्र मे “वर” भपने आप को द्यौः, तथा "वधू" को पृथिवी कहता ।

English

spirit, With shaft-armed mouths, heart-piercing, joy-bestowing? Long shall he live who duly pays

अध्याय 18

श्लोक 1.17

त्रीणि॒ च्छन्दां॑सि क॒वयो॒ वि ये॑तिरे पुरु॒रूपं॑ दर्श॒तं वि॒श्वच॑क्षणम्।आपो॑ वाता॒ ओष॑धय॒स्तान्येक॑स्मि॒न् भुव॑न॒ आर्पि॑तानि

trīṇi cchandāṃsi kavayo vi yetire pururūpaṃ darśataṃ viśvacakṣaṇam| āpo vātā oṣadhayastānyekasmin bhuvana ārpitāni

हिन्दी अर्थ

६. को अच प॑ धुरि गा ऋतस्य शिमीवतो भामिने) दुईणायून् । यम कहता है यमी को कि (कः) कौन है (भ्य) इस समय जो कि (ऋतस्य) सत्य.की गाड़ी की घुरि) घुराम (नाः) अपनी -वाणियो को स्पष्ट, ( दुं णायून्) जिनके कथन में लज्जा तथा संकोच न करना चाहिए, एसी "(भासम् इषून्) जो कि मुख से निकली हृदं बाण के समान होती है, ह्यु असः ) जो हदयं मँ जा लगती है, मयोभून् ) परन्तु परिणाम भे कल्याणकारिणी होती ह । यः ) जो कोई ( एषाम् ) इन सत्यवाणि्यो का प्रथम दिन को (कः वेद) कौन जानता है ? (म्) इस प्रथम दिन को (कः ददं ) किस ने कंभ देयौ है ? (इह) इस जीवन मे ( कः किस ने इस

English

them service. Who knows that earliest day whereof thou speakest, Who hath beheld it? Who can here

अध्याय 18

श्लोक 1.18

वृषा॒ वृष्णे॑ दुदुहे॒ दोह॑सा दि॒वः पयां॑सि य॒ह्वो अदि॑ते॒रदा॑भ्यः ।विश्वं॒ स वे॑द॒ वरु॑णो॒ यथा॑ धि॒या स य॒ज्ञियो॑ यजति य॒ज्ञियां॑ ऋ॒तून्

vṛṣā vṛṣṇe duduhe dohasā divaḥ payāṃsi yahvo aditeradābhyaḥ | viśvaṃ sa veda varuṇo yathā dhiyā sa yajñiyo yajati yajñiyāṃ ṛtūn

हिन्दी अर्थ

भौरि साय ऋँ तेव को पने से. वेरेवाले का- ( बृहत् घाम-) बढ़ तेज है, कव् उ ब्रवः) यह तु कंते करहूता है ? (भराहनः) है हदय पर चोट पहुचाने बालि यम ! रं तो (दन. ). रुषो को (वीष्या ) घोेबाज (रवे) कहती दं । बारे भँ. बही-बडी बातें करता है । देख,.जगत् क -प्रयम दिने तक को तो कोई जानता नहीं, तो घमं के तत्त्वं को कौन जान सक्ताहि ? तु परमेहैवर क्रो सब का मित्र कहता ह, परन्तु वरणरूप मं उसने सब को भपते फन्दीं मे यों जकड़ रखा है ? (मन्त्रसंख्या २.९) । 1 - का० १८।सू० १ प्रथर्ववेद-माष्य. । सोया करर, दसलिये १४ भु (य्यम्) यमी को (' यमस्य कामः ) यम-

English

declare it? Great is the law of Varuna and Mitra. What, wanton, wilt thou say to men to tempt them?

अध्याय 18

श्लोक 1.19

रप॑द् गन्ध॒र्वीरप्या॑ च॒ योष॑णा न॒दस्य॑ ना॒दे परि॑ पातु नो॒ मनः॑ ।इ॒ष्टस्य॒ मध्ये॒ अदि॑ति॒र्नि धा॑तु नो॒ भ्राता॑ नो ज्ये॒ष्ठः प्र॑थ॒मो वि वो॑चति

rapad gandharvīrapyā ca yoṣaṇā nadasya nāde pari pātu no manaḥ | iṣṭasya madhye aditirni dhātu no bhrātā no jyeṣṭhaḥ prathamo vi vocati

हिन्दी अर्थ

(आयो इव) नायी जैसे (पत्थे) पति क लिये, वैसे मँ तेरे लिये (तन्वम्) अपने शरीर को (रिरिच्याम्) सुपुदं करं दू, भ्रनाच्छादित..कर. दुः- यहः मेरी-प्रभिलाषा है ताकि (रथ्या चक्का. इव ) रथकेदो चक्रोंके सदुश हम दोनों (चिद्) भी (वि वृहेव) गृहस्थ -पय म उम करे । यम कहा है यंभी वे कि! देवानां एते स्पन्चः ) देवों के ये. गुप्तचरः (यं). जोकि (इट) इस संसार मँ (चरन्ति) विचर रहे है, वे" (न तिष्ठन्ति). सथ को देखते रहते ह । (भ्राहनः) है हृदय पर 'चोट करभेवाली ! ( मत् ); मुमः-से (अन्येन ) भिन्न शुरष क .साय "तुः (हुम् ) शीघ्र (यादि) चली जा । (तेन ) - उसके -साथ . ( विवृह ) . तु उदयम, कर, गृहस्थ मागं प्र चल्; भराहनःन्मन्त ७ केः भनुसार"वभी ने “वीच्या दन् पदों दाय युखुषो पर चोट लगाई है । देवानां स्यदः देवों के स्था हैँ -प्राङृतिक भौर सदा: चार क सुदृढ कृठोर नियम, जो मानो . विधाम नहीं पाते, भौर सदा जाग-

English

Yami am possessed by love of Yama, that I may rest on the same couch beside him. I as a wife would yield me to my husband. Like car-wheels let us speed to meet each other.

अध्याय 18

श्लोक 1.20

सो चि॒न्नु भ॒द्रा क्षु॒मती॒ उश॑स्वत्यु॒षा उ॑वास॒ मन॑वे॒ स्वऽर्वती ।यदी॑मु॒शन्त॑मुश॒तामनु॒ क्रतु॑म॒ग्निं होता॑रं वि॒दथा॑य॒ जीज॑नन्

so cinnu bhadrā kṣumatī uśasvatyuṣā uvāsa manave sva'rvatī | yadīmuśantamuśatāmanu kratumagniṃ hotāraṃ vidathāya jījanan

हिन्दी अर्थ

(उन्मिमीयात्) इन धटनाभों को देख रही है 1 शौर हैख, द्युलोक के साथ पुथिवी, भौर, (-पुथिव्या) पृथिवी के साथ चुल्लोक. ( मिथुना ) येमीदो मिथून है, पति-पत्नीरूप जोड़ है, . ( सबन्धू ) .भरौर एक ही परर्भदवर इन का समानः रप में बन्धु है, पिता है , प्रन्तु.( यमीः ) यभी हीः ( यमस्य )

English

Not me—go quickly, wanton, with another, and hasten like a chariot-wheel to meet him. May Sūrya’s eye with days and nights endow him, and ever may his light spread out before

अध्याय 18

श्लोक 1.21

अध॒ त्यं द्र॒प्सं वि॒भ्वं विचक्ष॒णं विराभ॑रदिषि॒रः श्ये॒नो अ॑ध्व॒रे।यदी॒ विशो॑ वृ॒णते॑ द॒स्ममार्या॑ अ॒ग्निं होता॑र॒मध॒ धीर॑जायत

adha tyaṃ drapsaṃ vibhvaṃ vicakṣaṇaṃ virābharadiṣiraḥ śyeno adhvare| yadī viśo vṛṇate dasmamāryā agniṃ hotāramadha dhīrajāyata

हिन्दी अर्थ

: (भ्रजामि) जौ कि स्त्रियों को नहीं करने चाद्ये । इसलिये है यमी! तु किसी '(वृषमायः) वीर्यवान. पुरुषः के लिये (बाहूम्). भपनी बाह को, पाणि- ग्रहण केलिये भ्रपने हाथ को, . (उपबवृ हि) पुरष के हाय के समीप ऊंचा , सत्ययुग या कृतयुग, चरता, द्वापर तथौ कलियुग--इन का रम बन्धा हृ है । सुष्टि-नियम के भ्रनुसार एक युगः के पदचात् अगला-अगला युग का यह सामान्य निधम है" भूमण्डल-की.जनताःके - सामुहिक प्रयत्न, इस -यम माई. होने के कारण भ्रसमथ है यमी से सन्तानोत्पत्ति करने मेँ । इसलिये वह॒ यमी को प्रेरित करतो है कि यमी यम से भन्य किसी वीय॑वान

English

him. In heaven and earth the kindred pair commingle. On Yami be the unbrotherly act of Yama.

अध्याय 18

श्लोक 1.22

सदा॑सि र॒ण्वो यव॑सेव॒ पुष्य॑ते॒ होत्रा॑भिरग्ने॒ मनु॑षः स्वध्व॒रः ।विप्र॑स्य वा॒ यच्छ॑शमा॒न उ॒क्थ्यो॒३ वाजं॑ सस॒वां उ॑प॒यासि॒ भूरि॑भिः

sadāsi raṇvo yavaseva puṣyate hotrābhiragne manuṣaḥ svadhvaraḥ | viprasya vā yacchaśamāna ukthyo3 vājaṃ sasavāṃ upayāsi bhūribhiḥ

हिन्दी अर्थ

भावना चयोतित होती है कि विवाहित पति भी यदि भ्रषने भ्रापको सन्तानो- करनेहारी स्त्री ! तू मूसे दूसरे पति की इच्छा कर, वर्योकि भरव मुकसे केवल तानविक अर्थात् शारीरिक सम्बन्ध चाहती है, जो किं नियोग की विधि का सूचक है! यमी ने मन्व (१) हारा पहिले तो विवाह का प्रस्ताव

English

Sure there will come succeeding times when brothers and sisters will do acts unmeet for kinsfolk.

अध्याय 18

श्लोक 1.23

उदी॑रय पि॒तरा॑ जा॒र आ भग॒मिय॑क्षति हर्य॒तो हृ॒त्त इ॑ष्यति ।विव॑क्ति॒ वह्निः॑ स्वप॒स्यते॑ म॒खस्त॑वि॒ष्यते॒ असु॑रो॒ वेप॑ते म॒ती

udīraya pitarā jāra ā bhagamiyakṣati haryato hṛtta iṣyati | vivakti vahniḥ svapasyate makhastaviṣyate asuro vepate matī

हिन्दी अर्थ

म निवास कै कारण, यम भ्रौर रपे भ दाम्पत्यमाव को मानकर उसे पति स्वीकार कर चुकी है। इसलिये एक प्रकार से यम,पतिरूप मे,यमी को नियोग कीभ्राज्ञा दे रहा है-यह् माना जा सक्ताहै। (भरनाथं भवाति) अनाथ होती है, भौर (किम् उ) क्या है (स्वसा) बहिन,

English

Not me, O fair one—seek another husband, and make thine arm a pillow for thy consort. Is he a brother when no help is left her? Is she a sister when

अध्याय 18

श्लोक 1.24

यस्ते॑ अग्ने सुम॒तिं मर्तो॒ अख्य॒त् सह॑सः सूनो॒ अति॒ स प्र शृ॑ण्वे ।इषं॒ दधा॑नो॒ वह॑मानो॒ अश्वै॒रा स द्यु॒मां अम॑वान् भूषति॒ द्यून्

yaste agne sumatiṃ marto akhyat sahasaḥ sūno ati sa pra śṛṇve | iṣaṃ dadhāno vahamāno aśvairā sa dyumāṃ amavān bhūṣati dyūn

हिन्दी अर्थ

होती है †हे साई 1! (काममूता) पुत्र की कामना से बन्धी हुई मै (एतत, बह) यह् बेहत (रपामि) स्पष्ट कथन कर रही हू । तू (तन्वा) निज तनू मृताम् बनघने। नि ऋ तिः माई अकेला रह जाय.भ्रौर कष्ट भोगे-- यह मी बहिन के होते ठीक नहीं । इस प्रकार यमो यम को यह सुफाती ह

English

Destruction cometh? Forced by my love these many words I utter. Come near, and hold me in thy close embraces,

अध्याय 18

श्लोक 1.25

श्रु॒धी नो॑ अग्ने॒ सद॑ने स॒धस्थे॑ यु॒क्ष्वा रथ॑म॒मृत॑स्य द्रवि॒त्नुम्।आ नो॑ वह॒ रोद॑सी दे॒वपु॑त्रे॒ माकि॑र्दे॒वाना॒मप॑ भूरि॒ह स्याः॑

śrudhī no agne sadane sadhasthe yukṣvā rathamamṛtasya dravitnum| ā no vaha rodasī devaputre mākirdevānāmapa bhūriha syāḥ

हिन्दी अर्थ

कष्ट भोगते. रहोगे + भनाथम् = मवाति का क्रियाविशेषण 1. तनूम्) तेरी तन् कै साथ (न सं पपृच्याम्) संपकं नहीं करूगा । (मत.) मूमः (सुभगे) है सौभाग्यवती ! (ते) तेरा (भ्राता) माई (एतत.) इस सम्पकं को, या विवाह को (न वष्टि) नहीं चाहता । (वै उ) निदचय ही (तन्वा) भरपनी तनू के साथर ( ते तनम् ) तेरी

English

I am no help for thee, no refuge, Yami, I will not clasp and press thee to my bosom. This is abhorrent to my mind and spirit—a brother on the couch beside a sister.

अध्याय 18

श्लोक 1.26

यद॑ग्न ए॒षा समि॑ति॒र्भवा॑ति दे॒वी दे॒वेषु॑ यज॒ता य॑जत्र ।रत्ना॑ च॒ यद् वि॒भजा॑सि स्वधावो भा॒गं नो॒ अत्र॒ वसु॑मन्तं वीतात्

yadagna eṣā samitirbhavāti devī deveṣu yajatā yajatra | ratnā ca yad vibhajāsi svadhāvo bhāgaṃ no atra vasumantaṃ vītāt

हिन्दी अर्थ

बहिन के साथ (नि गच्छात्) संगम करता है, उसे (पापम् ) पापी (भाहुः) कहते ह । (मे) मेरे (मनसः) मन के गौर (हृदः) हदय के (भरसंयत्) की (शयने) शय्या मेँ (शयीय) मै सोऊ 1 असंयत = संयमरदित (बत)हे दुबल! (बतः भसि) तु वस्तुतः दुबल है ।(यम)हे यम! (ते) तेरे (मनः) मन (च) प्रौर (हृदयम्) हदय को (न भ्रविदाम) पँ नहीं जान पाई । (किल ) निश्चय ही (मन्या) भौर कोई है तेरे मन भौर हृदय म, जो (त्वाम्) करती है, भौर (दव) जसे (लिबुजा) बेल ( वृक्षम् वृक्ष का भालिङ्खन करती है । बतः बलात् भरतीतः (निद० ६।५।२८) । । "8

English

I will not fold mine arms about thy body: they call it sin when one comes near a sister. Not me—prepare thy pleasure with another. Thy brother seeks not this from thee, O fair one.

अध्याय 18

श्लोक 1.27

अन्व॒ग्निरु॒षसा॒मग्र॑मख्य॒दन्वहा॑नि प्रथ॒मो जा॒तवे॑दाः ।अनु॒ सूर्य॑ उ॒षसो॒ अनु॑ र॒श्मीननु॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश

anvagniruṣasāmagramakhyadanvahāni prathamo jātavedāḥ | anu sūrya uṣaso anu raśmīnanu dyāvāpṛthivī ā viveśa

हिन्दी अर्थ

(यमि) है यभी ! .(उ) निद्चय से ( अन्यम् ) दुसरे पुरुष को तु, का० १८ ।सू०१ भथधर्वेवेद-माष्य ११ भ्रच्छी तरह भ्रालिद्कित करेगा, (दव ) जेते कि ( लिबुजा ) बेल या लता को (त्वं वा इच्छ) या तू चाहः(वा) या वह (तव) तेरे मन को चाहे । (अघा)

English

Alas; thou art indeed a weakling Yama. We find in thee no trace o f heart or spirit. As round a tree the woodbine clings, another will cling about thee girt as with a girdle.

अध्याय 18

श्लोक 1.28

प्रत्य॒ग्निरु॒षसा॒मग्र॑मख्य॒त् प्रत्यहा॑नि प्रथ॒मो जा॒तवे॑दाः ।प्रति॒ सूर्य॑स्य पुरु॒धा च॑ र॒श्मीन् प्रति॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ त॑तान

pratyagniruṣasāmagramakhyat pratyahāni prathamo jātavedāḥ | prati sūryasya purudhā ca raśmīn prati dyāvāpṛthivī ā tatāna

हिन्दी अर्थ

एेकमत्य उद के साथ (कृणुष्व) प्रकट कर । की (वि येतिरे) विशेषशुद्धि के लिये यतन करते है,(पुररूपम्) नाना रूप परि" वततंन करनेवाले शरीर की, (दतम्) विषयों को दशनिवाली इन्द्रियं की, ओषधियों की भी विदधिषशुद्धि के लिये यल करते है । (तानि) वे तत्त्व परमे- इवर ते (भुवने) इस भूमि मे (भ्रपितानि) अर्पित कियिदहै। अर्थाव् हस पृथिवी मँ ही मानुषं जीवन, प्रौर उस जीवन के लिये

English

Embrace another, Yami. Let some other, even as the woodbine rings a tree, enfold thee. Win thou his heart and let him win thy fancy; so make with him a bond of blest alliance.

अध्याय 18

श्लोक 1.29

द्यावा॑ ह॒ क्षामा॑ प्रथ॒मे ऋ॒तेना॑भिश्रा॒वे भ॑वतः सत्य॒वाचा॑ ।दे॒वो यन्मर्ता॑न् य॒जथा॑य कृ॒ण्वन्त्सीद॒द्धोता॑ प्र॒त्यङ् स्वमसुं॒ यन्

dyāvā ha kṣāmā prathame ṛtenābhiśrāve bhavataḥ satyavācā | devo yanmartān yajathāya kṛṇvantsīdaddhotā pratyaṅ svamasuṃ yan

हिन्दी अर्थ

बालक कै शरीरके नाना रूप बदलते रहते है । इसलिये इस ररीरको प्रथम समूल्लास)। संसार को वा परमेदवर को देखने को योग्यता जीवात्मा मही है। छन्दासि चदि आआह्वादने ( उणा० ४।२२० ) । येतिरे यत अनश्वर बेदवाणीरूपी गौ से (दिवः पयांसि) दिष्य ज्ान-दुग्ध(दुदुहे ) दोहता १२ भथवं वेद-माष्य का० १८। सु०१

English

Three hymns the Sages have disposed in order, the many-formed, the fair, the all-beholding. These in one single world are placed and settled—the growing plants, the breezes, and the

अध्याय 18

श्लोक 1.30

दे॒वो दे॒वान् प॑रि॒भूरृ॒तेन॒ वहा॑ नो ह॒व्यं प्र॑थ॒मश्चि॑कि॒त्वान्।धू॒मके॑तुः स॒मिधा॒ भाऋ॑जीको म॒न्द्रो होता॒ नित्यो॑ वा॒चा यजी॑यान्

devo devān paribhūrṛtena vahā no havyaṃ prathamaścikitvān| dhūmaketuḥ samidhā bhāṛjīko mandro hotā nityo vācā yajīyān

हिन्दी अर्थ

भभीष्ट मां क्या है, इसके निणंय में ( भदितिः)- अनवर नित्या वेदवाणी (नः) हमें (नि धातु) यथार्थं मागं मेँ स्थापित करे । ठदनन्तर (भ्राता) सब हमे (वि वोचति विष्ेषतया जीवनमागं का उपदेश करता है । यदीमुषन्त॑मुजतामनु ऋतम होतारं विदथाय जीज॑नन् २०॥

English

The Bull hath yielded for the Bull the milk of heaven: inviolable is the Son of Aditi. According to his wisdom Varuna knoweth all: he halloweth, the holy, times for sacrifice.

अध्याय 18

श्लोक 1.31

अर्चा॑मि वां॒ वर्धा॒यापो॑ घृतस्नू॒ द्यावा॑भूमी शृणु॒तं रो॑दसी मे ।अहा॒ यद् दे॒वा असु॑नीति॒माय॒न् मध्वा॑ नो॒ अत्र॑ पि॒तरा॑ शिशीताम्

arcāmi vāṃ vardhāyāpo ghṛtasnū dyāvābhūmī śṛṇutaṃ rodasī me | ahā yad devā asunītimāyan madhvā no atra pitarā śiśītām

हिन्दी अर्थ

कारिणी, (उंस्वती ) सबं कों कल्याणं चाहनेवाली (सा). व॑ह भविति (१९) (नु) निदचय से, शौर (उ) भ्रवश्य, (मनवे) मनुष्यमात्र के लिये (उवास) भज्ञानान्धकार को दुर करती है । जसे कि (स्ववती) दयुलोक मे रहनेवाली करती है, (यद्) जब कि (उशताम्) परमेदवर को चाहनेवालों के (क्रतुम्). वाले उपासक,--( विदथाय ) साक्षात्कार के लिये, ( जीजनन् ) प्रकट कर

English

Gandharvi spake. May she, the Lady of the Flood amid the river’s roaring leave my heart untouched.

अध्याय 18

श्लोक 1.32

स्वावृ॑ग् दे॒वस्या॒मृतं॒ यदी॒ गोरतो॑ जा॒तासो॑ धारयन्त उ॒र्वी।विश्वे॑ दे॒वा अनु॒ तत् ते यजु॑र्गुर्दु॒हे यदेनी॑ दि॒व्यं घृ॒तं॑ वाः

svāvṛg devasyāmṛtaṃ yadī gorato jātāso dhārayanta urvī| viśve devā anu tat te yajurgurduhe yadenī divyaṃ ghṛtaṃ vāḥ

हिन्दी अर्थ

म्रदिति--अनदइवर नित्या वेदवाणी। भरभिप्राय यह है कि उपासक जब नहीं होता,तब तक वैदिक रहस्य उन्हे परकढ नहीं हो सकते ।“वेद "शब्द का यदी विक वृणत दसमायौ अरिं होतांरमघ शीरजायत॥।२१॥ होती है, (भष ) तदनन्तर (इषि रः) ईदवर को चाहनेवाला (येनः) ज्ञानी (विः)

English

May Aditi accomplish all that we desire, and may our eldest Brother tell us this as chief.

अध्याय 18

श्लोक 1.33

किं स्वि॑न्नो॒ राजा॑ जगृहे॒ कद॒स्याति॑ व्र॒तं च॑कृमा॒ को वि वे॑द ।मि॒त्रस्चि॒द्धि ष्मा॑ जुहुरा॒णो दे॒वांछ्लोको॒ न या॒तामपि॒ वाजो॒ अस्ति॑

kiṃ svinno rājā jagṛhe kadasyāti vrataṃ cakṛmā ko vi veda | mitrasciddhi ṣmā juhurāṇo devāṃchloko na yātāmapi vājo asti

हिन्दी अर्थ

वाला, उसे खा जानेवाला । “असौ वा भादित्यो दरष्सः".( श ०७।४।१।२०) दयेन आहमा भवति, यायतः ज्ञानकर्मणः(नि० १३ (१४), पा° २.८१). १४ प्रथर्ववेद-भाष्य का० १८। सु° १ की आहूतियों द्वारा ( स्वध्वरः ) भाप उसके भरहिसामय-उपासनायनज्ञ को सफल तथा सुफल कर देते है, इसलिये उसे श्राप ( सदा रण्वः भरसि ) सदा रमणीय लगते है, (इव ) जैसे कि (पुष्यते) शारोरिक-पुष्टि करनेवाले के लिये (यवसा) खाद्य-पदार्थं रमणीय लगते है । ( वा ) तथा ( उक्थ्यः )

English

Yea, even this blessed Morning, rich in store of food, splendid, with heavenly lustre, hath shone out for man,

अध्याय 18

श्लोक 1.34

दु॒र्मन्त्वत्रा॒मृत॑स्य॒ नाम॒ सल॑क्ष्मा॒ यद् विषु॑रूपा॒ भवा॑ति ।य॒मस्य॒ यो म॒नव॑ते सु॒मन्त्वग्ने॒ तमृ॑ष्व पा॒ह्यप्र॑युच्छन्

durmantvatrāmṛtasya nāma salakṣmā yad viṣurūpā bhavāti | yamasya yo manavate sumantvagne tamṛṣva pāhyaprayucchan

हिन्दी अर्थ

की (वाजम्) भेट को (ससवान्) स्वीकार कर लेते है, तब भ्राप (शशमानः) मानो प्लँतगतिमान् होकर, मेधावी उपासक को (भूरिभिः) नानाविध भरर हि परमेदवर ! (पितरा) जगत् मेँ माताम प्रौर पिताभ्रों को धर्मकायं म (उदीरय) समुन्नत कीजिये, (भ्रा) जैसे किं ( जारः स्तुत्ियां करने- करनेवाला (दयक्षति) भाप के यजन की इच्छा करता है, ( हृत्तः हृदय से (हष्यति ) इच्छा करता है । (वह्धिः)प्राप के सदुपदेो का वहन करनेवाला कारण (वेपते ) भयभीत होकर कामभ्पता रदृता है ।

English

Since they as was the wish of yearning Gods, brought forth that yearning Agni for the assembly as the Priest.

अध्याय 18

श्लोक 1.35

यस्मि॑न् दे॒वा वि॒दथे॑ मा॒दय॑न्ते वि॒वस्व॑तः सद॑ने धा॒रय॑न्ते ।सूर्ये॒ ज्योति॒रद॑धुर्मा॒स्य॑१क्तून् परि॑ द्योत॒निं च॑रतो॒ अज॑स्रा

yasmin devā vidathe mādayante vivasvataḥ sadane dhārayante | sūrye jyotiradadhurmāsya1ktūn pari dyotaniṃ carato ajasrā

हिन्दी अर्थ

(अग्ने) है ज्योतिम॑य ! (सहसः सुनो) है बल कै प्रेरक ! (यः) जो या-लोग' बहुत धदढापू्वंक उस के कथन को सुनते ह। ( इषम् ) भाप की इच्छा को ( दधानः ) धारण करता हुभ्रा, ( अच्वेः) भवो से जूते रथ दारा वह सत्कारपूवंक (वहमानः) ले जाया जाता है (चुमान्) गोभावाला, - आ नो ब रोदसी देवपुत्रे मादिव नाम॑ भूरिह स्या५।२५।। हमारे चरीर रथ को ( युङ्क्ष्व ) जोतिये, हसे.भ्राप ही चलाय । भरर इसे

English

And the fleet Falcon brought for sacrifice from afar this flowing. drop most excellent and passing wise,

अध्याय 18

श्लोक 1.36

यस्मि॑न् दे॒वा मन्म॑नि सं॒चर॑न्त्यपी॒च्ये॒३ न व॒यम॑स्य विद्म ।मि॒त्रो नो॒ अत्रादि॑ति॒रना॑गान्त्सवि॒ता दे॒वो वरु॑णाय वोचत्

yasmin devā manmani saṃcarantyapīcye3 na vayamasya vidma | mitro no atrāditiranāgāntsavitā devo varuṇāya vocat

हिन्दी अर्थ

(देवपुत्रे) भ्राप-देव के पु्रूप जो (रोदसी) भूलोक भ्रौर चुलोक है" उन्हे हमारे उद्देश्य मे, (नः) हमारे (आ वह) मरनुकूल बना दीजिये । (देवानाम्) हम दिग्य उपा्कों मे ्राप सदा विराजमान रहिये, (माकिः रप भरः) कमी हम से दूर न हलिये । (इह ) हम दिव्य उपासको के इन हृदयो मँ (स्याः) २६. यदं एषा समितिभेबाति देवी दवेषु यजता य॑त्र. । (भरगने) है ज्योति्य ! ( देवेषु) हम दिव्य उपासको मे गापका

English

Then when the Aryan tribes chose as invoking Priest Agni the wonder-worker, and the hymn rose up.

अध्याय 18

श्लोक 1.37

सखा॑य॒ आ शि॑षामहे॒ ब्रह्मेन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ ।स्तु॒ष ऊ॒ षु नृत॑माय धृ॒ष्णवे॑

sakhāya ā śiṣāmahe brahmendrāya vajriṇe | stuṣa ū ṣu nṛtamāya dhṛṣṇave

हिन्दी अर्थ

(यद्) जो (एषा) यह (देवी) दिव्य (समितिः) पारस्परिक मेल (भवाति) होता है, (यजत्र) है पारस्परिक मेल करनेवाले ! ( यजता ) उस पार १६ अथर्ववेद-माष्य का० १८॥ सुऽ ९१. स्परिक मेल को आप ही स्वयं करनेवाले है । (स्वधावः) है अपना घारण भ्राप हमे प्रदान करते हैः ( भत ) इस जीवनम (नः) हमारे उस

English

Still art thou kind to him who feeds thee as with grass, and. skilled in sacrifice offers thee holy gifts.

अध्याय 18

श्लोक 1.38

शव॑सा॒ ह्यसि॑ श्रु॒तो वृ॑त्र॒हत्ये॑न वृत्र॒हा।म॒घैर्म॒घोनो॒ अति॑ शूर दाशसि

śavasā hyasi śruto vṛtrahatyena vṛtrahā| maghairmaghono ati śūra dāśasi

हिन्दी अर्थ

स्वीकार कीजिये । समितिः सम् + इतिः । यजता = यञ् == संगति, परस्पर- २७. अन्वपनिरुषसामप्र॑मरूयदन्वहानि प्रथमो जातवेदाः । अनु खयै उषसो अतं ररमीननु चा्रािवौ आ विवेद ॥२७॥ उपाक को (उषसाम,) उषाकालोँ के ( भरग्रम. अनु ) प्रारम्म के परचात् ् भ्रतयक्ष हो जाता है । (सूयेः) सुयो का सूर्यं बह कमी (उषसः घ्रनु) उषा- काल क पदचात्, घौर कमी (रदमीन् भनु) रदिमयों की केवल चमक के

English

When thou having received the sage’s strengthening food with lauds, after long toil comest with many more.

अध्याय 18

श्लोक 1.39

स्ते॒गो न क्षामत्ये॑षि पृथि॒वीं म॒ही नो॒ वाता॑ इ॒ह वा॑न्तु॒ भूमौ॑ ।मि॒त्रो नो॒ अत्र॒ वरु॑णो यु॒जमा॑नो अ॒ग्निर्वने॒ न व्यसृ॑ष्ट॒ शोक॑म्

stego na kṣāmatyeṣi pṛthivīṃ mahī no vātā iha vāntu bhūmau | mitro no atra varuṇo yujamāno agnirvane na vyasṛṣṭa śokam

हिन्दी अर्थ

श्रमिप्राय यह कि परमेदवर की भक्ति मं सदा निरत रहना चाये, कुष्ठ पता नीं कि वह कब दर्शन देदे। हो जाता है, कभी (सूर्यस्य पुषा रदमीन् ) नाना दिला मे फंली सूयं कौ का० १८1 सू° १ भ्रथर्ववेद-माष्य १७ २९. धा ह क्षामा प्रथ॒मे चऋतेनामिश्वि भ॑वतः सत्यवाच। ।

English

Urge thou thy Parents, as a lover, to delight: the lovely One desires and craves it from his heart.

अध्याय 18

श्लोक 1.40

स्तु॒हि श्रु॒तं ग॑र्त॒सदं॒ जना॑नां॒ राजा॑नं भी॒ममु॑पह॒त्नुमु॒ग्रम्।मृ॒डा ज॑रि॒त्रे रु॑द्र॒ स्तवा॑नो अ॒न्यम॒स्मत् ते नि व॑पन्तु॒ सेन्य॑म्

stuhi śrutaṃ gartasadaṃ janānāṃ rājānaṃ bhīmamupahatnumugram| mṛḍā jaritre rudra stavāno anyamasmat te ni vapantu senyam

हिन्दी अर्थ

स्थित है, ्रौर उन्हे यज्ञिय कमो के करने का मागं ददता रहता है । हे परमेदवर । आप (देवः) देवाधिदेव है ॥ (ऋतेन) नादि नियमों के -परनुसार आप (देवान्) दिव्य-जनो कौ (परिभूः) रक्षाके लिये उन पर यथाथेवेत्ता है । (समिधा) समिधा द्वारा. ( धूमकेतुः ) यज्ञियाग्नि के सवृ

English

Far famed is he, the mortal man, O Agni thou Son of strength, who hath obtained thy favour. He, gathering power, borne onward by his horses, makes his, days lovely in his might and

अध्याय 18

श्लोक 1.41

सर॑स्वतीं देव॒यन्तो॑ हवन्ते॒ सर॑स्वतीमध्व॒रे ता॒यमा॑ने ।सर॑स्वतीं सु॒कृतो॑ हवन्ते॒ सर॑स्वती दा॒शुषे॒ वार्यं॑ दात्

sarasvatīṃ devayanto havante sarasvatīmadhvare tāyamāne | sarasvatīṃ sukṛto havante sarasvatī dāśuṣe vāryaṃ dāt

हिन्दी अर्थ

(यजीयाम्) हमारे यज्ञिय कमो को सफल कर देते ह । हे माता-पिता 1 (वाम्) भरापदोनोंकी ( अर्वामि ) पूजा करता दोनों मेरे लिथे घृत श्रादि पदार्थो को प्रवाहित करते है, (द्यावापृथिवी) राप दोनों चयुलोक भ्रौर पृथिवीलोक के सदश्च मेरे जन्मदाता ह, (रोदसी) कष्टों

English

splendour. Hear us, O Agni, in the great assembly: harness thy rapid car,. the car of Amrit.

अध्याय 18

श्लोक 1.42

सर॑स्वतीं पि॒तरो॑ हवन्ते दक्षि॒णा य॒ज्ञम॑भि॒नक्ष॑माणाः ।आ॒सद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयध्वमनमी॒वा इष॒ आ धे॑ह्य॒स्मे

sarasvatīṃ pitaro havante dakṣiṇā yajñamabhinakṣamāṇāḥ | āsadyāsmin barhiṣi mādayadhvamanamīvā iṣa ā dhehyasme

हिन्दी अर्थ

भनौर दुःखों के कारण प्रकट हुए मेरे रुदन को भ्राप दूर करते है । (शुणुतम्) आप मेरी प्राथंना को सुनिये फि ( देवाः ) भतियि देव तथा भ्राचायं देव तथा बल की नीति का (यन्) उपदेश दिया करे, उस-उस दिन (पितरा) हे मेरे माता-पिता ! (श्रश्र) हस घर मे, भाप (नः) हमे (मध्वा) उन के मधुर उपदेशों की (शिदीताम्) सदा शिक्षा देते रहँ । विश॑ देवा अनु .तत् ते यज॑ोदहे यदेनी दिव्य घृतं बाः ॥२२॥ (यद् ई) जब उपासक (देवस्य) परमेदवर, देव की (गोः ) वेदवाणी से

English

Bring Heaven and Earth, the Deities’ Parents, hither: stay with us here, nor from the Gods be absent. When, holy Agni, the divine assembly, the holy synod mid the

अध्याय 18

श्लोक 1.43

सर॑स्वति॒ या स॒रथं॑ य॒याथो॒क्थैः स्व॒धाभि॑र्देवि पि॒तृभि॒र्मद॑न्ती ।स॒ह॒स्रा॒र्घमि॒डो अत्र॑ भा॒गं रा॒यस्पोषं॒ यज॑मानाय धेहि

sarasvati yā sarathaṃ yayāthokthaiḥ svadhābhirdevi pitṛbhirmadantī | sahasrārghamiḍo atra bhāgaṃ rāyaspoṣaṃ yajamānāya dhehi

हिन्दी अर्थ

भ्रनद्वर प्रमु को पालेते है, तब ( अतः) इस वेदवाणी से ( जातासः ) ममपने सदुपदेशों द्वारा करते है । है परमेदवर ! तब वे (विष्व देवा) सब देव (ते) भ्रापके (यजुः) यज्ञकमें के (अनु गुः) भनुगामी बन जाते द । (यद्) का० १८ सू०.१ भ्रथर्वेवेद-माष्य १९ वेदवाणी, उनके लिये (दिव्यं घृतं वाः) दिव्य घी, भ्रौर दिग्य जल (दुहे) दोहूप मेँ प्रदान करती है।

English

Gods, is gathered, And when thou, godlike One, dealest forth treasures vouchsafe us too our portion of the

अध्याय 18

श्लोक 1.44

उदी॑रता॒मव॑र॒ उत् परा॑स॒ उन्म॑ध्य॒माः पि॒तरः॑ सो॒म्यासः॑ ।असुं॒ य ई॒युर॑वृ॒का ऋ॑त॒ज्ञास्ते नो॑ऽवन्तु पि॒तरो॒ हवे॑षु

udīratāmavara ut parāsa unmadhyamāḥ pitaraḥ somyāsaḥ | asuṃ ya īyuravṛkā ṛtajñāste no'vantu pitaro haveṣu

हिन्दी अर्थ

१।११) । यजुः परमेष्वर का यज्ञक्मं है परोपकाराथं सृष्टि का पालन । एनी = गौ । “दुहे"पद दवारा भी एनी का भ्रं गौ प्रतीत होता है । दिव्यं चुतं वाः वेदवाणी उपासक कै वीयं प्नौर रस-रक्तको दिव्य बना देतीहै, सात्विक .बना देती है । धृत =रेतः, वीर्यं । यथा -रेतः कुत्वाज्यं देवाः ६३, किः स्वजनो राजां जगृहे कदस्याति वतं चरमा को वि वेद् । (कि स्वित्) क्यों (राजा) जगत् के राजाने (नः ) हमें ( जगृहे ) उल्लंघन किया है? (कः विवेद) कौन विवेकपुवंक ईसे जानताहैः

English

riches. Agni hath looked upon the van of Mornings, and on the days. the earliest Jātavedas. After the Dawns, after their rays of brightness, Sūrya hath enter- ed into earth and heaven.

अध्याय 18

श्लोक 1.45

आहं पि॒तृन्त्सु॑वि॒दत्रां॑ अवित्सि॒ नपा॑तं च वि॒क्रम॑णं च॒ विष्णोः॑ ।ब॒र्हि॒षदो॒ ये स्व॒धया॑ सु॒तस्य॒ भज॑न्त पि॒त्वस्त इ॒हाग॑मिष्ठाः

āhaṃ pitṛntsuvidatrāṃ avitsi napātaṃ ca vikramaṇaṃ ca viṣṇoḥ | barhiṣado ye svadhayā sutasya bhajanta pitvasta ihāgamiṣṭhāḥ

हिन्दी अर्थ

भ्राह्द प्रदान करता है । वह (. याताम् ) धमंमागें पर चलनेवालों का कील के लिये बलरूप ह । जुहुराणः= चन्द्रमा (उणा० २।९२) । वाली .(मवाति) हो जाती है । (यः) जो मनुष्य (यमस्य ) अमर नियन्ता के “प्रो इम्” नाम का (मनवते) सलक्ष्म होकर मनन केरता है, उस कां मनन २० अयर्ववेद-माष्यं का० १८1 पु०.१

English

Agni hath looked against the van of Mornings, against the days- the earliest Jātavedas; In many a place against the beams of Sūrya, against the heavens and earth hath he extended.

अध्याय 18

श्लोक 1.46

इ॒दं पि॒तृभ्यो॒ नमो॑ अस्त्व॒द्य ये पूर्वा॑सो॒ ये अप॑रास ई॒युः ।ये पार्थि॑वे॒ रज॒स्या निष॑क्ता॒ ये वा॑ नू॒नं सु॑वृ॒जना॑सु दि॒क्षु

idaṃ pitṛbhyo namo astvadya ye pūrvāso ye aparāsa īyuḥ | ye pārthive rajasyā niṣaktā ye vā nūnaṃ suvṛjanāsu dikṣu

हिन्दी अर्थ

दोनो साथ-साथ रहनेवाले सखा है = सयुजा सखाया । परन्तु भज्ञानवक जव देहादि के पालनमें रत हो जाता है, या मानसिक संकल्प-चिकल्पों को निज ध्येय संम लेता है, तब यह् चितिशक्ति “विषृरूपा"" होजाती है । विषुरूपा में “ओ३ेम्” का मनन वास्तविक मनन नहीं होता । यह किया मनन भी वास्तव मेँ दुर्मनन ही रहता है । इसलिये "“सलक््म' होकर “शो हम् नाम का मनन करना ही सुमनन है । ऋष्व =-महन्नाम ( निधं ° ३१३ ) । भ्रयु- ३५. यरसिन् देवा विदथ मादयन्ते विबख॑तः स्ने धारथन्ते । (यस्मिन् विदथे) जिस विवेक-क्ञान के प्रकट हो जाने पर, ( देवाः )

English

Heaven and Earth, first by everlasting Order, speakers of truth, are near enough to hear us, When the God, urging men to worship, sitteth as Priest, assum- ing all his vital vigour. As God comprising Gods by Law eternal, bear, as the chief who knoweth, our oblation,

अध्याय 18

श्लोक 1.47

मात॑ली क॒व्यैर्य॒मो अङ्गि॑रोभि॒र्बृह॒स्पति॒र्ऋक्व॑भिर्वावृधा॒नः ।यांश्च॑ दे॒वा वा॑वृ॒धुर्ये च॑ दे॒वांस्ते नो॑ऽवन्तु पि॒तरो॒ हवे॑षु

mātalī kavyairyamo aṅgirobhirbṛhaspatirṛkvabhirvāvṛdhānaḥ | yāṃśca devā vāvṛdhurye ca devāṃste no'vantu pitaro haveṣu

हिन्दी अर्थ

(विवस्वतः सदने) भरज्ञानान्धकार को दुर करनेवाले परमेदवर कै आश्य में (ज्योतिः) दुति (भदधुः) स्थापित की है। भौर ( मासि चन्द्रमामें का० १८ । सू० १ भ्रथववेद-माष्य २१ है, (भस्य) इस बरमेदवर के विधिविधान को (वयम ) हम संसारी लोग

English

Smoke-bannered with the fuel, radiant, joyous, better to praise and worship, Priest for ever. I praise your work .that ye may make me prosper: hear, Heaven and Earth, twain worlds that

अध्याय 18

श्लोक 1.48

स्वा॒दुष्किला॒यं मधु॑मां उ॒तायं ती॒व्रः किला॒यं रस॑वां उ॒तायम्।उ॒तोन्व॑१स्य प॑पि॒वांस॒मिन्द्रं॒ न कश्च॒न स॑हत आह॒वेषु॑

svāduṣkilāyaṃ madhumāṃ utāyaṃ tīvraḥ kilāyaṃ rasavāṃ utāyam| utonva1sya papivāṃsamindraṃ na kaścana sahata āhaveṣu

हिन्दी अर्थ

देवः) पितृदेव इनमें से प्रत्येक (नः) हरमे, (अत्र) इस जोवन भे, (भनागान्) पापरहित ( वोचत् ) कटै, उद्घोषित करे । ताकि हम भी न्यायवच््रधारी. (नृतमाम) सब के तेता,( धृष्णवे पापों के परामवकर्ता हे परमे्वर ! भ्राप ( हि ) निद्वय से, ( शवसा ) बल कै कारण (श्रुतः भसि) विधृत है, भौर (वृत्रहत्येन) पापों के हनन के कारण ;(वुत्रहा) पाप-हन्ता नाम से विश्रुत हैँ । (बूर) हि दानशूर ! भाप ( मधे ) धनदान की त् (मघोनः) घनदाताभों से (भ्रति दाशसि) बढ़ चढ़कर महादानं हमारे लिये, (इह ) दस (मही भुमौ) महाशरुमि मे (वाताः) सुखकर वायुए'

English

drop with fatness! While days and Gods go to the world of spirits, have let the Parents with sweet mead refresh us.

अध्याय 18

श्लोक 1.49

प॒रे॒यि॒वांसं॑ प्र॒वतो॑ म॒हीरिति॑ ब॒हुभ्यः॒ पन्था॑मनुपस्पशा॒नम्।वै॒व॒स्वतं सं॒गम॑नं॒ जना॑नां य॒मं राजा॑नं ह॒विषा॑ सपर्यत

pareyivāṃsaṃ pravato mahīriti bahubhyaḥ panthāmanupaspaśānam| vaivasvataṃ saṃgamanaṃ janānāṃ yamaṃ rājānaṃ haviṣā saparyata

हिन्दी अर्थ

२२ भयरववेद-माष्य का०.१८। सू० १ हे उपासक ! (शतम्) विश्रुत, (जनानाम्) जनों की ( गतंसदम् ) के लिये. स्तवानः ) सन्मोगं का स्तवनं करते हुए भ्राप ( मृड ) उसे सुखी छिन्न-भिन्न करे । वपन्तु = वप (छेदने) । परमेरवर की सेनाए हँ “उस के उग्र सुदृढ नियम ।

English

When the Cow’s nectar wins the God completely, men here below are heaven’s and earth’s sustainers

अध्याय 18

श्लोक 1.50

य॒मो नो॑ गा॒तुं प्र॑थ॒मो वि॑वेद॒ नैषा गव्यू॑ति॒रप॑भर्त॒वा उ॑ ।यत्रा॑ नः॒ पूर्वे॑ पि॒तरः॒ परे॑ता ए॒ना ज॑ज्ञा॒नाः प॒थ्या॒३ अनु॒ स्वाः

yamo no gātuṃ prathamo viveda naiṣā gavyūtirapabhartavā u | yatrā naḥ pūrve pitaraḥ paretā enā jajñānāḥ pathyā3 anu svāḥ

हिन्दी अर्थ

( १।६।२०) । रथात् वेदवाणी के फल तीन है यकधक्रिया -क हान, त्था का०१८। सुऽ १ भरथरववेद-माध्य् २३ (श्रनमीवाः वाः) नीरोग (इषः) इच्छाभों का (आ धेहि) आधान कर, । नक्षति व्याप्तिकर्मा (निचं० २।१४८) ।

English

For even Mitra mid the Gods is angry. There are both song and wealth for those who come

अध्याय 18

श्लोक 1.51

बर्हि॑षदः पितर ऊ॒त्य॑१र्वागि॒मा वो॑ ह॒व्या च॑कृमा जु॒षध्व॑म्।त आ ग॒ताव॑सा॒ शंत॑मे॒नाधा॑ नः॒ शं योर॑र॒पो द॑धात

barhiṣadaḥ pitara ūtya1rvāgimā vo havyā cakṛmā juṣadhvam| ta ā gatāvasā śaṃtamenādhā naḥ śaṃ yorarapo dadhāta

हिन्दी अर्थ

६. सरखति या सरथं ययाथोक्यैः खधा्िर्देवि पिद्भिरमदन्ती । (देवि) है ज्ञानप्रदायिनी (सरस्वति) ज्ञानमयी वेदव।णी .! (पितुभिः) करती हई (या) नो तु, (उक्थैः) निज सुक्तों के साथ, गौर (स्वधामिः) विविध लौकिक भ्रौर परलौकिक अन्नो का ज्ञान देती हई, (सरथम. ) भौर इन ज्ञानो के साथ रमण करती हूरई (ययाथ) हमे प्राप्त हुई है, वह तु (भत्र) परिपोषण, (बेहि) स्थापितः कर,. प्रदान कर ।

English

not. 34’Tis hard to understand the Immortal’s nature, where she who is akin becomes a stranger. Guard ceaselessly, great Agni, him who ponders Yama’s name easy to be comprehended.

अध्याय 18

श्लोक 1.52

आच्या॒ जानु॑ दक्षिण॒तो नि॒षद्ये॒दं नो॑ ह॒विर॒भि गृ॑णन्तु॒ विश्वे॑ ।मा हिं॑सिष्ट पितरः॒ केन॑ चिन्नो॒ यद् व आगः॑ पुरु॒षता॒ करा॑म

ācyā jānu dakṣiṇato niṣadyedaṃ no havirabhi gṛṇantu viśve | mā hiṃsiṣṭa pitaraḥ kena cinno yad va āgaḥ puruṣatā karāma

हिन्दी अर्थ

. ययाथ = या प्रापणे । पितृभिः “जनको जननी चैव यश्च विष्यं परयच्छति । २४ भ्रथर्ववेद-माष्य काऽ १८1-सु° १ इलः = ईवटे स्तुतिकर्मणः (निर० ८।२।८) । असुं य दयुरवृका तहास नोऽवन्तु पितरो इषु ।४४॥

English

They in the synod where the Gods rejoice them, where they are seated in Vivasvan’s dwelling,

अध्याय 18

श्लोक 1.53

त्वष्टा॑ दुहि॒त्रे व॑ह॒तुं कृ॑णोति॒ तेने॒दं विश्वं॒ भुव॑नं॒ समे॑ति ।य॒मस्य॑ मा॒ता प॑र्यु॒ह्यमा॑ना म॒हो जा॒या विव॑स्वतो ननाश

tvaṣṭā duhitre vahatuṃ kṛṇoti tenedaṃ viśvaṃ bhuvanaṃ sameti | yamasya mātā paryuhyamānā maho jāyā vivasvato nanāśa

हिन्दी अर्थ

(भ्रवरे) कम भ्रायु के, (मध्यमाः) मध्यम भरायुके, ( परासः ) तथा इन से बड़ी भ्रायु के, (सोम्यासः) सोम्यस्वभाववले (पितरः) -पितर (उदीरताम.) हमें सदुपदेशो का कथन करं । (ये) जो पित्र ( भ्रसुम. ) विवेकी है, (ते पितरः) वे पितर (हवेषु) हमारे शद्धापूर्वंक भ्राह्वानों पर (नः गृह्यते" मनु के अनुसार पितृशाढ गृहस्थ का घर्म है । पचमहायज्ञो मे पितु- का पिता लगभग ५० वर्षोँका होकर ध्मनुसार वानप्रस्थी हो जातादहै। उस समय गृहस्थी का पितामह लग मग ७५ वषोँ का, तथा प्रपितामह १००

English

Have given the Moon his beams, the Sun his splendour: the two unweariedly maintain their brightness. The counsel which the Gods meet to consider, their secret plan, of that we have no

अध्याय 18

श्लोक 1.54

प्रेहि॒ प्रेहि॑ प॒थिभिः॑ पू॒र्याणै॒र्येना॑ ते॒ पूर्वे॑ पि॒तरः॒ परे॑ताः ।उ॒भा राजा॑नौ स्व॒धया॒ मद॑न्तौ य॒मं प॑श्यासि॒ वरु॑णं च दे॒वम्

prehi prehi pathibhiḥ pūryāṇairyenā te pūrve pitaraḥ paretāḥ | ubhā rājānau svadhayā madantau yamaṃ paśyāsi varuṇaṃ ca devam

हिन्दी अर्थ

वर्षोकी कही है । .इसीलिये मनुष्यको रातायु कठते है । ब्रह्मचारी २५ वषं के धारम्म म विवाह कर लगभग एक वषं के मीतर सन्तानवाला हो सम्भावित है । इन मे से गृहस्थी के पिता को“भ्रवर"पितामह को“मध्यम"?, तथा शश्रपितामह्' को “यर” . पितर कहा है । श्राद्ध भी केवल - दन तीन -पीदियों तक ही सीमित होता है । इसलिये मन्त्र ४४ मेँ जीवित पितरोंका ही वर्णन जानना चाहिए । जीवित पितर ही उपदेश दे सकते ह, भज्ञासम्पत्न, निज सदपदेशो द्वारा उन की रक्षा कर सकते हैउत् = तीनो कोटि के पितरों केसाष"“उत् + ईरीभ “का भन्वय होता है । इसीलिये “उत्”का प्रयोग तीन

English

knowledge. There let God Savitar, Aditi, and Mitra proclaim to Varuna that we are sinless.

अध्याय 18

श्लोक 1.55

अपे॑त॒ वीऽत॒ वि च॑ सर्प॒तातो॑ऽस्मा ए॒तं पि॒तरो॑ लो॒कम॑क्रन्।अहो॑भिर॒द्भिर॒क्तुभि॒र्व्यऽक्तं य॒मो द॑दात्यव॒सान॑मस्मै

apeta vī'ta vi ca sarpatāto'smā etaṃ pitaro lokamakran| ahobhiradbhiraktubhirvya'ktaṃ yamo dadātyavasānamasmai

हिन्दी अर्थ

का० १८ । सूु° १ प्रथर्वेवेद-माष्य २४ रौर उन के सदुपदेो द्वाराः मैने ( विष्णोः ) सवंव्यापक परभेदवर की उन नियम-व्यवस्थं भ्न को (न पातम ) जिन से कि मनुष्य का पतन नहीं होता, जान लियाहै। (ये) जो. पितर कि ( बहिषदः ) कुशासनों पर बठ कर, . , का (भजन्त) सेवन करते है, (ते) वे पितर ( इहं इसमेरे घर्मे (गा गभिष्ठाः) भा पधारे दहै)

English

Companions, let us learn a prayer to Indra whom the thunder arms, To glorify your bold and most heroic Friend. For thou by slaying Vritra art the Vritra-slayer, famed for might.

अध्याय 18

श्लोक 1.56

उ॒शन्त॑स्त्वेधीमह्यु॒शन्तः॒ समि॑धीमहि ।उ॒शन्नु॑श॒त आ व॑ह पि॒तॄन् ह॒विषे॒ अत्त॑वे

uśantastvedhīmahyuśantaḥ samidhīmahi | uśannuśata ā vaha pitṝn haviṣe attave

हिन्दी अर्थ

नपातम का भरथं कषयो ने “पोता” कियाहै। क्याविष्णुकाभी कोई पोता" है ? स्वधा स्वधा ( धारणा )। पितुः =भ्रन्न ( निषं० (भद्य) .आज पितृयज्ञ में ( पितृभ्यः पितरों के लिये ( इदम् ) यह (नमः) नमस्कार तथा भन्न ्रस्तु) हो, (ये) जो पितर कि ( पूर्वासः ) पूर्वकाल के, भर्यात् बड़ी धायु के पितामह तथा प्रपितामह है, (ये) जो कि (ईयुः) मेरे षरश्राएरहै। पितर (ये) जो कि (धाथिवे रजसि) पृथिवी लोक मे (निषत्ताः) स्थित है, (वा) भौर ( ये ) जो ( नूनम् ) निरचय घे २६ । प्रथवेवेद-माष्य का०-१८1 सुण्

English

Thou, Hero, in rich gifts surpassest wealthy chiefs. O’er the broad land thou goest like a Stega: here on vast earth let breezes blow upon us,

अध्याय 18

श्लोक 1.57

द्यु॒मन्त॑स्त्वेधीमहि द्यु॒मन्तः॒ समि॑धीमहि ।द्यु॒मान् द्यु॑म॒त आ व॑ह पि॒तॄन् ह॒विषे॒ अत्त॑वे

dyumantastvedhīmahi dyumantaḥ samidhīmahi | dyumān dyumata ā vaha pitṝn haviṣe attave

हिन्दी अर्थ

(सुवजनासु) चोर उचक्कों तथा पापकमोँ से वजत (दिक्षु ) दिग्-दिगन्तरों यांश्च॑ देवा वावृधुर्ये च॑ देवांसे नोऽवन्तु पितरो देवेषु ।॥४७॥ (कव्यैः) वेदकाव्य के कवि परमेश्वर कै उपासको समेत -( मातली मातुहप परमेदवर में लीन होनेवाला योगेचवर; (शक्किरोभिः) प्राणायामा- ऋचाभों का स्वाध्याय करनेवाले दिष्यो समेत (वृहस्पतिः) बृहती वेदवाणी वृद्धि करता है, उन-उन विषयों की दुष्ट से उन्हं बढ़ता है; तथा ( देवाः ) देवकोटि के प्रजाजन (यान्) जिन इन उपयु क्त साधको को बढ़ाते; (च) भौर (ये) जो ये साधक (देवान्) प्रजाजनों मे देवकोटि के लोगों की वुद्धि निज सदुपदेशो द्वारा करते है (ते) वे एसे ( पितरः) पितर (हवेषु) हमारे

English

Here hath our dear Friend Varuna, united, like Agni in the wood, shot forth his splendour. Sing praise to him the chariot-borne, the famous, Sovran of men, the dread and strong destroyer.

अध्याय 18

श्लोक 1.58

अङ्गि॑रसो नः पि॒तरो॒ नव॑ग्वा॒ अथ॑र्वाणो॒ भृग॑वः सो॒म्यासः॑ ।तेषां॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिया॑ना॒मपि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

aṅgiraso naḥ pitaro navagvā atharvāṇo bhṛgavaḥ somyāsaḥ | teṣāṃ vayaṃ sumatau yajñiyānāmapi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

होनेवाला योगेदवर प्रकट होता है । २. यन्मा्व॑ढी रथक्रीतमद्धते वेद॒ भेषजम् । (मातली) मातली ने (यत्) जिस (अमृतम, ) भ्रमर ब्रह्म को ( रथ- का० १८। सुः प्रयर्ववेद-माष्य २७

English

O Rudra, praised be gracious to the singer; let thy darts spare us and smite down another. The pious call Sarasvati, they worship Sarasvati while sacrifice proceedeth.

अध्याय 18

श्लोक 1.59

अङ्गि॑रोभिर्य॒ज्ञियै॒रा ग॑ही॒ह यम॑ वैरू॒पैरि॒ह मा॑दयस्व ।विव॑स्वन्तं हुवे॒ यः पि॒ता ते॒ऽस्मिन् ब॒र्हिष्या नि॒षद्य॑

aṅgirobhiryajñiyairā gahīha yama vairūpairiha mādayasva | vivasvantaṃ huve yaḥ pitā te'smin barhiṣyā niṣadya

हिन्दी अर्थ

्रविष्ट कर दिया । (भरापः) तदनन्तर कमो ने (तद् ) वह (भेषजम. ) भेषज (दत्त) भरन्यों को भी. प्रदान किया! योगी ही प्रतीत होता है । योगाभ्यासी जब गपनो रारीरिक चेष्टां रौर मानसिक संकल्प-विकल्पों को परमेदवर कै प्रति भेँटरूपमें चढ़ा देता है, तब वह परमेदवर के भेषजरूप को जान पाता है । इस भेषज दारा उस के दवारा उस भेषज का ज्ञान भ्रन्योंकोमी देता है। आापः; भवः =उदकम. (स्वादुः) स्वादवाला (कल) निश्चय से (म्रयम.) यह रस, (उत) भौर (मधुमान्) मघुवाला या मधुर (अयम ) यह रस, (किल) निष्चय से (तीव्रः) ओषचधियों का तीखा (श्रयम्) यह रस, (उत) भौर (रसवान्) नाना रसो से मिधित (श्रयम्) यह रसदहै। ( उतडउनु) भौर निश्चय

English

The virtuous call Sarasvati to hear them. Sarasvati send bliss to him who giveth! Sarasvati is called on by the Fathers who come right forward to our solemn worship. Seated upon this sacred grass rejoice you. Give thou us strengthening food that brings no

अध्याय 18

श्लोक 1.60

इ॒मं य॑म प्रस्त॒रमा हि रोहाङ्गि॑रोभिः पि॒तृभिः॑ संविदा॒नः ।आ त्वा॒ मन्त्राः॑ कविश॒स्ता व॑हन्त्वे॒ना रा॑जन् ह॒विषो॑ मादयस्व

imaṃ yama prastaramā hi rohāṅgirobhiḥ pitṛbhiḥ saṃvidānaḥ | ā tvā mantrāḥ kaviśastā vahantvenā rājan haviṣo mādayasva

हिन्दी अर्थ

५०. यमो नो गातुं प्रथमो विवेद नैषा गब्यूतिरपंमतैवा ३ । मां, वेदों द्वारा (विवेद) विवेकपूर्वक दर्शाया है । (एषा) यह (गन्यूतिः) लिये, त्याग कै लिये (न) नहीं है । (यत्र) जिस मागं मँ (नः) हमारे (पूवं) पर्वं के (पितरः) पिता पितामह तथा प्रपितामह (परेताः) चले है, अर्थात् पर, (भनु ) उनके पचात , निरन्तर चलते ररह ।

English

Goddess, and oblations, Give plenteous wealth to this the sacrificer, a portion, worth a thousand, of refreshment. May they ascend, the lowest, highest, midmost, the Fathers, who deserve a share of Soma.

अध्याय 18

श्लोक 1.61

इ॒त ए॒त उदारु॑हन् दि॒वस्पृ॒ष्ठान्वारु॑हन्।प्र भू॒र्जयो॒ यथा॑ प॒था द्यामङ्गि॑रसो य॒युः

ita eta udāruhan divaspṛṣṭhānvāruhan| pra bhūrjayo yathā pathā dyāmaṅgiraso yayuḥ

हिन्दी अर्थ

(बहिषदः) उत्तम कुशासनं पर बैठनेवाले (पितरः) है पितरो ! भ्राप (उती) हमारी रक्षा के निमित्त (अर्वाक्) हमारे समीप.पधारे है, ( वः ) आपके लिये (इमा) इन (हन्या ) मोजन के योग्य पदा्थोँ को (चकम ) हमने का० १८1 सु° १ भरथर्ववेद-माष्य २९ तैयार किया है, (जुषध्वम. ) प्रीतिपूवंक उन का सेवन कीजिये । (ते) वे

English

May they who have attained to life, the Fathers, righteous and gentle, aid us when we call them.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।