Chandogya Upanishad
109
अध्याय 109 / 154

Adhyāya 109

प्रपाठक खण्ड 109

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 109

श्लोक 6.12.1

॥ न्यग्रोधफलमत आहरेतीदं भगव इति भिन्द्धीति भिन्नं भगव इति किमत्र पश्यसीत्यण्व्य इवेमा धाना भगव इत्यासामङ्गैकां भिन्द्धीति भिन्ना भगव इति किमत्र पश्यसीति न किंचन भगव इति

|| nyagrodhaphalamata āharetīdaṃ bhagava iti bhinddhīti bhinnaṃ bhagava iti kimatra paśyasītyaṇvya ivemā dhānā bhagava ityāsāmaṅgaikāṃ bhinddhīti bhinnā bhagava iti kimatra paśyasīti na kiṃcana bhagava iti

हिन्दी अर्थ

अधीदधीप्व भगवो मगवमि- है भगवन्‌ शृ ह ति ह किलोपससाद्‌ । कराये एसा कहते इए न द। अधीहि ब्रह्मनिष्ठ योगीश्वर सनक्कुमारके ति हैवं निधिं वाकोवाक्यमेकायनं देवविद्यां बह्मवि्यां याद्‌ है, इनके सिवा इतिहास-पुराणरूप पाँचवाँ वेद, वेदोका वेद ( व्याकरण ), श्राद्धकल्प, गणित, उत्पातान, निधिरशाख, तकंशाख, नीति, देवविद्या, ब्रह्मविद्या, भूतविया, क्षत्रविद्या, नक्षत्रविधा, सपेविद्या

English

'Fetch me from thence a fruit of the Nyagrodha tree.' 'Here is one, Sir.' Break it.' 'It is broken, Sir.' 'What do you see there?' 'These seeds, almost infinitesimal.' 'Break one of them.' 'It is broken, Sir.' 'What do you see there?' 'Not anything, Sir.'

अध्याय 109

श्लोक 6.12.2

तँ होवाच यं वै सोम्यैतमणिमानं न निभालयस एतस्य वै सोम्यैषोऽणिम्न एवं महान्यग्रोधस्तिष्ठति श्रद्धत्स्व सोम्येति

tam̐ hovāca yaṃ vai somyaitamaṇimānaṃ na nibhālayasa etasya vai somyaiṣo'ṇimna evaṃ mahānyagrodhastiṣṭhati śraddhatsva somyeti

हिन्दी अर्थ

ऋग्वेदं मगवोऽष्येमि स्मरामि है भगवन्‌ मे छग्ेदका अध्ययन कर चुका है अर्थात्‌ मुस ऋगवेद यद्वेस्थेति विज्ञानस्य पष्टत्वात्‌ । स्मरण है यहाँ अध्ययनवाचक पात होनेके कारण इतिहाद्मपुराण- पाचों वे्दोका वेद्‌ अर्थात्‌ व्याक- रण--क्योंकि व्याकरणके द्वार

English

The father said: 'My son, that subtile essence which you do not perceive there, of that very essence this great Nyagrodha tree exists.

अध्याय 109

श्लोक 6.12.3

स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदद्ँ सर्वं तत्सत्यँ स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतो इति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच

sa ya eṣo'ṇimaitadātmyamidadm̐ sarvaṃ tatsatyam̐ sa ātmā tattvamasi śvetaketo iti bhūya eva mā bhagavānvijñāpayatviti tathā somyeti hovāca

हिन्दी अर्थ

हे भगवन्‌ वह मँ केवङ मन्त्वे्ता ही ह, आत्वेत्ता नहीं है । ने जाप-जैसोपि घना है कि आातमवेत्ता शोकको पार कर लेता है, जर हे भगवन्‌ ! मेँ शोफ करता हँ; पेसे सु्लको है भगवन्‌ शोकसे पार कर्माणि" इति हि वक्ष्यति; नन्वात्मापिं मन्त्रैः प्रकारयत विकारत्वात्‌ । न च विकार आ- द्धिसे सवेदा संत रहता ह उसे सुक्षको दे मगवन्‌ आसनान्‌ रूपी नौकाके द्वारा शोकागरके

English

'Believe it, my son. That which is the subtile essence, in it all that exists has its self. It is the True. It is the Self, and thou, O Svetaketu, art it.' 'Please, Sir, inform me still more,' said the son. 'Be it so, my child,' the father replied. Next: VI, 13 Sacred Texts | Hinduism

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।