अध्याय 16
श्लोक 1
श्राद्धकल्प-जनमेजय द्वारा पिता का श्राद्ध तथा पितृस्वरूपनिर्णयसम्बन्धी प्रश्न, शन्तनु का अपने श्राद्ध में स्वयं हाथ बढाकर भीष्म से पिण्ड माँगना कथं वै श्राद्धदेवत्वमादित्यस्य विवस्वतः ।श्रोतुमिच्छामि विप्राग्र्य श्राद्धस्य च परं विधिम्
śrāddhakalpa-janamejaya dvārā pitā kā śrāddha tathā pitṛsvarūpanirṇayasambandhī praśna, śantanu kā apane śrāddha meṃ svayaṃ hātha baḍhākara bhīṣma se piṇḍa mā~ganā kathaṃ vai śrāddhadevatvamādityasya vivasvataḥ | śrotumicchāmi viprāgrya śrāddhasya ca paraṃ vidhim
हिन्दी अर्थ
9ध्याय:———ाण द्ध तथा पितृस्वरूपनिर्णयसम्बन्धी प्रश्न, थ बढ़ाकर भीष्ससे पिण्ड माँगना जनमेजयने पूछा—द्विजश्रेष्ठ! अदितिनन्दन भगवान् सूर्यके पुत्र यम श्राद्धदेव क्यों कहलाते हैं ? और श्राद्धकी उत्तम विधि क्या है? इसे मैं सुनना चाहता हूँ