श्रीरामचरितमानस

Sundar Kanda — Hanuman's Flightश्लोक 10/3033%

Shri Ramcharitmanas 5.10

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

जात पवनसुत देवन्ह देखा।जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा॥ सुरसा नाम अहिन्ह कै माता।पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

हनुमान जी को जाते देखकर देवताओं ने उनके बल और बुद्धि की विशेष परीक्षा लेने के लिए सर्पों की माता सुरसा को भेजा। सुरसा ने आकर उनका रास्ता रोका और कहा कि आज देवताओं ने तुम्हें मेरा आहार बनाकर भेजा है। यह प्रसंग दर्शाता है कि बड़े मिशन पर निकले साधक की राह में बुद्धि और धैर्य की कठिन परीक्षाएं अवश्य आती हैं।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
सफलता की राह में कई बार ऐसी अप्रत्याशित बाधाएं आती हैं जो हमारा अहंकार भड़काती हैं या हमें भयभीत करती हैं। सुरसा का प्रसंग सिखाता है कि हर बाधा से लड़ने के लिए बाहुबल की जरूरत नहीं होती; कई बार विनम्रता, चतुराई और समय की नजाकत को भांपकर युक्तिपूर्वक आगे निकल जाना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **परीक्षाओं की समझ (Welcoming Challenges)**: जीवन में आने वाली बाधाओं को अपनी योग्यता और विवेक को निखारने वाली परीक्षा के रूप में देखें। - **रणनीतिक लचीलापन (Tactical Agility)**: किसी भी टकराव में अंधे होकर लड़ने के बजाय यह देखें कि शांति और समझदारी से काम कैसे निकाला जा सकता है। - **विनम्रता से विजय (Overcoming by Humility)**: जहाँ अहंकार काम न आए, वहाँ सूक्ष्म और विनम्र बनकर परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाएं।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“जब मेरे सामने कोई बड़ी बाधा आती है, तो क्या मैं केवल क्रोध और जिद से टकराता हूँ, या हनुमान जी की भांति विवेक और युक्ति का सहारा लेता हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

संज्ञानात्मक अनुकूलनशीलता (कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी) पर शोध बताते हैं कि संकट या अप्रत्याशित अवरोध के सामने जो व्यक्ति केवल आक्रामक बल का प्रयोग नहीं करते, बल्कि परिस्थिति के अनुसार अपनी रणनीति (जैसे हनुमान जी का पहले रूप बढ़ाना और फिर अत्यंत सूक्ष्म हो जाना) बदलते हैं, वे ही सफल होते हैं।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Illustrated Edition (Book Code 0080). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Public Domain Awadhi text and Hindi translation
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Kashi Nagari Pracharini Sabha recension.

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