Atharva Veda
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अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

331 श्लोकभाग 1/6 · श्लोक 1.1–8.7

पूर्ण अध्याय पाठ59 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 1.1

१-७ वेनः।बृहस्पतिः, आदित्यः।त्रिष्टुप् २, ५ पुरोऽनुष्टुप्।ब्रह्मविद्या।ब्रह्म॑ जज्ञा॒नं प्र॑थ॒मं पु॒रस्ता॒द् वि सी॑म॒तः सु॒रुचो॑ वे॒न आवः ।स बु॒ध्न्याऽउप॒माअ॑स्य वि॒ष्ठाः स॒तश्च॒ योनि॒मस॑तश्च॒ वि व॑

1-7 venaḥ| bṛhaspatiḥ, ādityaḥ| triṣṭup 2, 5 puro'nuṣṭup| brahmavidyā| brahma jajñānaṃ prathamaṃ purastād vi sīmataḥ suruco vena āvaḥ | sa budhnyā'upamāasya viṣṭhāḥ sataśca yonimasataśca vi va

हिन्दी अर्थ

मे (सीमतः) जगत् कौ सीमा मे, (सुरुचः) उत्तम-रोचमान नक्षत्र-ताराओं उपमारूप दहै, (विष्ठाः) ओर इसके विशेष स्थिति के स्थान (सतः च) को (वि वः) ब्रह्मने विवृत कर दिया, खोल दिया । उपनिषदों मे अकामयत द्वारा कहा है (उपनिषद्!) । कामनासे पूवं

English

Cosmogonical and mystico-theological doctrine Eastward at first the prayer was generated: Vena disclosed bright flashes from the summit,

अध्याय 4

श्लोक 1.2

इ॒यं पित्र्या॒ राष्ट्र्ये॒त्वग्रे॑ प्रथ॒माय॑ ज॒नुषे॑ भुवने॒ष्ठाः ।तस्मा॑ ए॒तं सु॒रुचं॑ ह्वा॒रम॑ह्यं घ॒र्मं श्री॑णन्तु प्रथ॒माय॑ धा॒स्यवे॑

iyaṃ pitryā rāṣṭryetvagre prathamāya januṣe bhuvaneṣṭhāḥ | tasmā etaṃ surucaṃ hvāramahyaṃ gharmaṃ śrīṇantu prathamāya dhāsyave

हिन्दी अर्थ

है । उस समय वहं कान्तिमान् होता है, वेनति कान्तिक्मग (निधं २।६) । अथवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° १। सूक्त १ मवा बुध्नः मूलम् (उणा० ३।५; दयानन्द) । जगत् का मूलदहै प्रकृति , जिससे कि जगत् पैदा हुआ है । प्रकृति उपादानकारण रूपमे मूलः है । उपमाः प्रकाशमान रूपमे ' सुरुचः'' प्रजापति की उपमारूप ह । यथा ३१।१८) । योनि विव: =सन्तानोत्पत्ति के समय, माता की योनि विवृत हो जाती हे, अतः योनिरूप प्रकृति के सम्बन्धे भी “विव; का प्रयोग हुजाहै ।

English

Disclosed his deepest, nearest revelations, womb of the non- existent and existent. Let this Queen come in front, her Father’s daughter, found in the worlds for earliest

अध्याय 4

श्लोक 1.3

प्र यो ज॒ज्ञे वि॒द्वान॑स्य॒ बन्धु॒र्विश्वा॑ दे॒वानां॒ जनि॑मा विवक्ति ।ब्रह्म॒ ब्रह्म॑ण॒ उज्ज॑भार॒ मध्या॑न्नी॒चैरु॒च्चै स्व॒धा अ॒भि प्र त॑स्थौ

pra yo jajñe vidvānasya bandhurviśvā devānāṃ janimā vivakti | brahma brahmaṇa ujjabhāra madhyānnīcairuccai svadhā abhi pra tasthau

हिन्दी अर्थ

है । जसे ब्रह्म का वणेन वेदों मे पिताओौरमाताके रूपमे होता है, वैसे मन्त (२) मेँ प्रजापति का वर्णनभी पिताओौरमाताके रूप मे हु है । दोहा गया ताजा दूध दीप्तिमान तो होताहीदहै, वह शुक्लरूप भी होता पराके, पचन्तु, तपन्तु (सायण) । । अथवं९ ४।३०।१-८ भे मातृरूप मेँ प्रजापति का

English

generation. For him they set this radiant vault in motion. Let them prepare warm milk for him who first

अध्याय 4

श्लोक 1.4

स हि दि॒वः स पृ॑थि॒व्या ऋ॑त॒स्था म॒ही क्षेमं॒ रोद॑सी अस्कभायत्।म॒हान् म॒ही अस्क॑भाय॒द् वि जा॒तो द्यां सद्म॒ पार्थि॑वं च॒ रज॑

sa hi divaḥ sa pṛthivyā ṛtasthā mahī kṣemaṃ rodasī askabhāyat| mahān mahī askabhāyad vi jāto dyāṃ sadma pārthivaṃ ca raja

हिन्दी अर्थ

देवों के (विश्वा = विश्वानि ) सत्र, (जनिमा = जनिमानि) जन्मो, 1 का, (विववित) विवेकपूणं कथन करता है! १ १५ व १. मे (स्वधा) इसके निजस्वरूप मे धारित हई प्रकृति (सः) वह प्रजापति परमेश्वर, (हि) निस्चय न (दिवः नोक के, (सः) वह, (पृथिव्याः) पृथिवी के, (ऋतस्था) क ५ है, ओर (मही रोदसी) महती चौ: ओर महती पृथिवी को, ( मु सु ८4 प्रजापति- परमेश्वर ने (मही) महान्, (चां सद्म) युलोकरू्प आः को, (च) ओर (पार्थिवम् रजः) ¢ पाथिव रञ्जक लोक को (वि अस्क-

English

would drink. He who was born as his all-knowing kinsman declareth all the deities’ generations.

अध्याय 4

श्लोक 1.5

स बु॒ध्न्यादा॑ष्ट्र ज॒नुषो॒ऽभ्यग्रं बृह॒स्पति॑र्दे॒वता॒ तस्य॑ स॒म्राट्।अह॒र्यच्छुक्रं ज्योति॑षो॒ जनि॒ष्टाथ॑ द्यु॒मन्तो॒ वि व॑सन्तु॒ विप्रा॑

sa budhnyādāṣṭra januṣo'bhyagraṃ bṛhaspatirdevatā tasya samrāṭ| aharyacchukraṃ jyotiṣo janiṣṭātha dyumanto vi vasantu viprā

हिन्दी अर्थ

सत्यं चाभीद्धात् तपसोऽध्यजायत'' (ऋ० १०।१६०।१, । ऋत हँ ४ भूत श पृथिवी से आरम्भ करके (अग्रम्, अभि) ऊपर के लोक न 4 ति परिचरणकर्मा (निघं० ३।५) । विप्रः मेधाविनाम (निघं० ३।१५) । मन्त्रम प्रातःकाल की उपासनाका वर्णेन हआ है । ही है, अतः उसे जगत् का सम्राट् कटाह ।

English

He from the midst of prayer his prayer hath taken. On high, below, spread forth his godlike nature.

अध्याय 4

श्लोक 1.6

नू॒नं तद॑स्य का॒व्यो॑ हि॑नोति म॒हो दे॒वस्य॑ पू॒र्व्यस्य॒ धाम॑ ।ए॒ष ज॑ज्ञे ब॒हुभि॑ सा॒कमि॒त्था पूर्वे॒ अर्धे॒ विषि॑ते स॒सन्नु

nūnaṃ tadasya kāvyo hinoti maho devasya pūrvyasya dhāma | eṣa jajñe bahubhi sākamitthā pūrve ardhe viṣite sasannu

हिन्दी अर्थ

बढ़कर निदेश करता है । (एषः) यह संसार (वहभिः साकम्) बहुत लोकों के साथ (जज्ञे) पदा हृञा है, (इत्था) यह सत्य है, जोकि (विषिते) बन्धन- रहित (पूवं अधं) आक्राण के पूरवे-के-समद्ध भागमे, या पूवधिभागमें (ससन्) सोया हुआ है । नु वितकं । वेदः (२) काव्यः संसारः । वेद काव्य संसारके स्वरूप का कथन करतारहैः ओर संसार काव्य वैदिक कथनो को परिपुष्ट करता है । हिनोति हि बाहुलकात्, दयानन्द) । इत्था सत्यनाम (निधं० ३।१०) । विषिते = वि (निघं० ३।२२) । द्यलोक की स्थिति पूववत् है जबसे यह पैदा हभ,

English

For he, true to the law of Earth and Heaven, established both the mighty worlds securely. Mighty when born, he propped apart the mighty, the sky, our earthly home, and air’s mid region.

अध्याय 4

श्लोक 1.7

योऽथ॑र्वाणं पि॒तरं॑ दे॒वब॑न्धुं॒ बृह॒स्पतिं॒ नम॒साव॑ च॒ गछा॑त्।त्वं विश्वे॑षां जनि॒ता यथास॑ क॒विर्दे॒वो न दभा॑यत् स्व॒धावा॑न्

yo'tharvāṇaṃ pitaraṃ devabandhuṃ bṛhaspatiṃ namasāva ca gachāt| tvaṃ viśveṣāṃ janitā yathāsa kavirdevo na dabhāyat svadhāvān

हिन्दी अर्थ

योऽय्॑वाणे पितरं देवबन्धुं बस्पतिं नमसाव॑च गच्छत् (यः) जो उपासक, (अथर्वाणम्), अचल कूटस्थ, (पितरम्) सबके प्राप्त होता भौर, अवगत करता, अधति् जाने, ओर कटे कि “ (त्वम् ) तू (विदवेषाम्) सबका (जनिता) उत्पादक, (कविः ) वेद ओर संसारका जेसेकितुहै, वह (न दभायत्) तू किसी की हिसा नहीं करता ।

English

He from the depth hath been reborn for ever, Brihaspati the world’s sole Lord and Ruler. From light was born the Day with all its lustre: through this let sages live endowed with

अध्याय 4

श्लोक 2.1

आत्मविद्या।१-८ वेनः।आत्मा।त्रिष्टुप्, ६ पुरोऽनुष्टुप्, ७ उपरिष्टाज्यो।तिः।य आ॑त्म॒दा ब॑ल॒दा यस्य॒ विश्व॑ उ॒पास॑ते प्र॒शिषं॒ यस्य॑ दे॒वाः ।यो॒३स्येशे॑ द्वि॒पदो॒ यश्चतु॑ष्पदः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

ātmavidyā| 1-8 venaḥ| ātmā| triṣṭup, 6 puro'nuṣṭup, 7 upariṣṭājyo| tiḥ| ya ātmadā baladā yasya viśva upāsate praśiṣaṃ yasya devāḥ | yo3syeśe dvipado yaścatuṣpadaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

न दभायत्-प्रजापति-परमेश्वर किसी की हिसा नहीं करता, अपितु वह् कौण्ड ४। अनु०° १। सूक्त २ अथवंवेदभाष्य ५ सबको उन्नतिपथानुगामी करता रहता, तथा मोक्ष-सुख प्रदान करता है। (१-८) । वेनः । आत्मा देवता । व्रिष्टुम्?

English

splendour. The sage and poet verily advanceth the statute of that mighty

अध्याय 4

श्लोक 2.2

यः प्रा॑ण॒तो नि॑मिष॒तो म॑हित्वैको॒ राजा॒ जग॑तो ब॒भूव॑ ।यस्य॑ छा॒यामृतं॒ यस्य॑ मृ॒त्युः कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yaḥ prāṇato nimiṣato mahitvaiko rājā jagato babhūva | yasya chāyāmṛtaṃ yasya mṛtyuḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

:) जो (आत्मदाः) शरीरो मे आत्मा का प्रदान करता दहै जन्म ४ । र ) तथा बल प्रदान करता है, (विश्वे) सब (यस्य) जिसके (प्रशिषम्) उत्तम शासन कौ (५ करते है, (यस्य देवाः) देव जिसके अधीन है । (यः) जो (अस्य द्विपदः) इस दो-पाये मनुष्य- पक्षी जादि का (ईशे) अधीश्वर है, (यः) जो (चतुष्पदः) चौपाये गौ जादि निघं ° ३।५), परिचरणम् = सेवा । 1 (समीप) -।-आसना, (बैठना), अर्थात् ध्यान में उसके समीप वैठना 1 (कस्मै ) उपासक, रचना को देखकर देव क सत्ता को दरसलिए वह स्वयम् से प्रद्न करता कि वह देव कौन-सादहै, ओर कसा यः प्राणतो निमिषतो म॑शित्वेको राजा जग॑तो बभूवं । यस्य॑ छायामृतं यस्य॑ मृत्युः कस्मै देवाय हविषां विधेम ॥२॥

English

God primeval. He was born here with many more beside him: they slumbered when the foremost side was

अध्याय 4

श्लोक 2.3

यं क्रन्द॑सी॒ अव॑तश्चस्कभा॒ने भि॒यसा॑ने॒ रोद॑सी॒ अह्व॑येथाम्।यस्या॒सौ पन्था॒ रज॑सो वि॒मानः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yaṃ krandasī avataścaskabhāne bhiyasāne rodasī ahvayethām| yasyāsau panthā rajaso vimānaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

यः) जो (प्राणतः) इवासोच्छवास करते हुए, (निमिषतः) करते ॥ ( 0 :) जङ्कम जगत् का (महित्वा) निज महिमा द्वारा (एकः ) एक (राजा) राजा (वभूव) हुआ है । (यस्य) जिसका (छाया) आश्य ( करम देवाय हविषा विधेम), अथं पूरवेवत्, व (१) । यस्यासौ पन्था रज॑सो विमानः कस्मै देवाय हविषां विधेम ॥३॥ ६ अथर्ववेदमष्यं काण्ड ४1 अनु १) सूक्त २

English

opened. The man who seeks the friend of Gods, Atharvan the father, and Brihaspati, with worship,

अध्याय 4

श्लोक 2.4

यस्य॒ द्यौरु॒र्वी पृ॑थि॒वी च॑ म॒ही यस्या॒द उ॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।यस्या॒सौ सूरो॒ वित॑तो महि॒त्वा कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yasya dyaururvī pṛthivī ca mahī yasyāda urva1ntarikṣam| yasyāsau sūro vitato mahitvā kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

सबका धारण करनेवाली, (भियसाने) तथा भय करती हई (रोदसी) आह्वान करती है; (यस्य) जिसका (असौ पन्थाः) वह॒ मार्गै, (रजसः विमानः) रञ्जक लोकसमूह् का निर्माण करना, (कस्म देवाय हविषा साने=भी भये-।असानच् (उणा० २।८७) । भय इसलिए कि हम निराधार आकाश मेंगिरन जाएं । रोदसी == रोधसी, द्यावापृथिवी (निघं° ३।३०) । रोधः नदी का किनारा।येदोहोते हैँ जिनके मध्यमे नदी प्रवाह होता है । यौः ओर पृथिवी संसाररूपी नदी के दो किनारे है, जिनमें कि “अदमन्वती संसाररूपी तदी प्रवाहित हौ रही है (यजुः० ३५।१०) । यस्थासो सूरो वित॑तो महित्वा कस्मै देवाय हविषां विपरेम ॥५॥

English

Crying to him, Be thou all things’ creator! the wise God, self- dependent, never injures. A Charm against tigers, wolves, thieves and other noxious creatures

अध्याय 4

श्लोक 2.5

यस्य॒ विश्वे॑ हि॒मव॑न्तो महि॒त्वा स॑मु॒द्रे यस्य॑ र॒सामिदा॒हुः ।इ॒माश्च॑ प्र॒दिशो॒ यस्य॒ बा॒हू कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yasya viśve himavanto mahitvā samudre yasya rasāmidāhuḥ | imāśca pradiśo yasya bāhū kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

पृथिवी) महती पृथिवी, (यस्य) जिसका है (अदः) वहु (उरु अन्तरिक्षम्) (विततः) विस्तीणं हमा है, (कस्म देवाय हविषा विधेम) अथं पूर्ववत्, (यस्य महित्वा) जिसको महिमा से (विश्वे) सब (हिमवन्तः) नदियों को (समृद्रे) समुद्रे प्रविष्ट (जाहुः) कहते हैँ । (च) मौर (इमाः प्रदिशः) ये विस्तृत दिशाएं (यस्य) जिसकी (बाहु) दो बाहुं ह, (कस्म देवाय हविषा विधेम) अथं पूववत् (मन्त्र १) ।

English

Three have gone hence and passed away, the man, the tiger, and the wolf. Down, verily, the rivers flow, down-goeth the celestial Tree,. down let our foemen bend and

अध्याय 4

श्लोक 2.6

आपो॒ अग्रे॒ विश्व॑माव॒न् गर्भं॒ दधा॑ना अ॒मृता॑ ऋत॒ज्ञाः ।यासु॑ दे॒वीष्वधि॑ दे॒व आ॑सी॒त् कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

āpo agre viśvamāvan garbhaṃ dadhānā amṛtā ṛtajñāḥ | yāsu devīṣvadhi deva āsīt kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

“रसा नदी भवति रसतेः शब्दकर्मणः (निरुक्त ११।३।१५) । रसाम् = रसवतीं पृथिवीम् । किसी समय समग्र पुथिवी समृद्रमे, जलमें ; ४। अनु० १। सूर्वत २ अथर्ववेद भाष्य ७ जोकि समुद्र के भीतर, जल म प्रविष्ट थी । रसातल शब्दम रसा है रसवती प॒थिवी । बाहु प्रदिशां चार है, इसलिए बाह भी चारवचाहि्एं। दो बाहुओं के चार अवयव ह । प्रत्येक कोहनी के, ऊपर ओर नीचे के, दो-दो मवयव अथवा महित्वा महित्वम्, आहुः वेदविदः ।

English

bow. On distant pathway go the wolf, on pathway most remote the thief!

अध्याय 4

श्लोक 2.7

हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भः सम॑वर्त॒ताग्रे॑ भू॒तस्य॑ जा॒तः पति॒रेक॑ आसीत्।स दा॑धार पृथि॒वीमु॒त द्यां कस्मै दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

hiraṇyagarbhaḥ samavartatāgre bhūtasya jātaḥ patireka āsīt| sa dādhāra pṛthivīmuta dyāṃ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

यासं देवीष्वधि देव आसीत् कस्मै देवायं हविषां विधम ॥६॥ हए, (गर्भम् दधानाः) जोकि परमेरवर के कामनारूपी गभेको धारण किये हुए ये, (अमृताः) जोकि मृत्यु से रक्षा करनेवाले ये, मौर (ऋतज्ञाः) मानो नियमव्यवस्था को जानते ये । (यासु देवीषु) जिन दिव्य जापः जल मे (अधि) अधिष्ठातुरूप (देवः) परमेश्वर (आसीत्) था, (कस्मे देवाय आपः शब्द स्त्रीलिङ्धी है, अतः इनमें गभधारण का कथन हना स दधार पृथिवीमुत यां कस्मै देवाय हविषां विधेम ॥७॥।

English

On a far road speed forth the rope with teeth, and the malicious man! We crush and rend to pieces both thine eyes, O Tiger, and thy jaws and all the twenty claws

अध्याय 4

श्लोक 2.8

आपो॑ व॒त्सं ज॒नय॑न्ती॒र्गर्भ॒मग्रे॒ समै॑रयन्।तस्यो॒त जाय॑मान॒स्योल्ब॑ आसीद्धिर॒ण्ययः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

āpo vatsaṃ janayantīrgarbhamagre samairayan| tasyota jāyamānasyolba āsīddhiraṇyayaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

(जातः) ओर अधिक प्रकट हृजा परमेश्वर (भूतस्य) भूत भौतिकं जगत् का (एकः पतिः) वह् एकं पति (आसीत्) था । (सः) उसने (प्रथिवीम्) पृथिवी को, (उत) तथा (याम्) दयौः को (दाधार) धारित तथा पोषित किया, (कस्म देवाय हविषा विधेम) अथ पूववत्, (मन्म १ ) तथा (तस्य जायमानस्य) उसके पैदा होते हुए (उल्वः) परदीप्यमान गरभ- धिरा रहता है, जिसे जरायु या जेर कहते दँ । यही भावना सूयं के सम्बन्ध परेनेत पथा एक॑; परमेणोत तस्करः । पृथा) जन्य मार्गे (वृकः एलु) भेडिया गमन करे, (उत)

English

we break. We break and rend the tiger first of creatures that are armed. with teeth;

अध्याय 4

श्लोक 3.1

शत्रुनाशनम् १-७ अथर्वा ।रुद्रः, व्याघ्रः ।अनुष्टुप्, १ पथ्यापङ्क्तिः, ३ गायत्री, ७ ककुम्मतीगर्भोपरिष्टाद् बृहती ।उदि॒तस्त्रयो॑ अक्रमन् व्या॒घ्रः पुरु॑षो॒ वृकः॑ ।हिरु॒ग्घि यन्ति॒ सिन्ध॑वो॒ हिरु॑ग् दे॒वो वन॒स्पति॒र्हिरु॑ङ्नमन्तु॒ शत्र॑वः

śatrunāśanam 1-7 atharvā | rudraḥ, vyāghraḥ | anuṣṭup, 1 pathyāpaṅktiḥ, 3 gāyatrī, 7 kakummatīgarbhopariṣṭād bṛhatī | uditastrayo akraman vyāghraḥ puruṣo vṛkaḥ | hirugghi yanti sindhavo hirug devo vanaspatirhiruṅnamantu śatravaḥ

हिन्दी अर्थ

(परेण!) अन्य मागे से (अघायुः ) हत्यारा शत्रु (अर्षतु) गमन करे । अन्यमागे = हमारे जानेके माम से भिन्न मागं से। अघायुः पलायित हो गये है, (व्याघ्रः) बाध अर्थात् बघेला, (पुरुषः) चोर, (वृकः) + ¬ य्न ०५५। 8 ् मेदिये को नष्ट ए न । देनेवाले को, (अथो ) तदनन्तर (वृकम्) भेद्य क

English

The robber then, and then the snake, the sorcerer, and then the wolf. The thief who cometh near to-day departeth bruised and crush- ed to bits.

अध्याय 4

श्लोक 3.2

परे॑णैतु प॒था वृकः॑ पर॒मेणो॒त तस्क॑रः ।परे॑ण द॒त्वती॒ रज्जुः॒ परे॑णाघा॒युर॑र्षतु

pareṇaitu pathā vṛkaḥ parameṇota taskaraḥ | pareṇa datvatī rajjuḥ pareṇāghāyurarṣatu

हिन्दी अर्थ

नि जपकाल बे मु नं ही अन्तरित होती है, बाह्यरप मे प्रकट ¦ ग यातनाओं का निधिभूत, पर-राष्ट का राजा । का माग है नागरिक अर्थात् बस्तौ का मार्ग । ध (अद्य) आज (यः स्तेनः) जो चोर (आयति) आताहै (सः) वहू (संपिष्टः) सम्यक्--पिसा हआ (अपायति) वापस जाता है। (पथाम्) (हन्तु) मार दे, शकितिविहीन कर दे ।

English

By nearest way let him be gone. Let Indra slay him with his bolt. Let the beast’s teeth be broken off, shivered and shattered be his ribs!

अध्याय 4

श्लोक 3.3

अ॒क्ष्यौऽच ते॒ मुखं॑ च ते व्याघ्र जम्भयामसि ।आत् सर्वा॑न् विंश॒तिं न॒खान्

akṣyau'ca te mukhaṃ ca te vyāghra jambhayāmasi | āt sarvān viṃśatiṃ nakhān

हिन्दी अर्थ

यदिकिसी दिन चोर, चोरी के लिए, किसी घरमे घस आये. तो धर केलोग उसे खूब मारं, कि वह पिसासदश होकर वापस जाय । चाहिए, ओर उसे आज्ञा देनी चाहिए कि वह् राजमार्गो सेन चलकर अलग दूट-फूट मागं द्वारा जया-जाया करे, ताकि प्रजाजनों को ज्ञापित हो (मृगस्य) शिकार का अन्वेषण करनेवाले जङ्गल दन्ता दात, (शीर्ष्णा अपि) सिर के अवयव भी (पृष्टयः उ) ओर ध (मूर्णाः) तोड दी जां । है पान्थ, पथिक् ! (गोधा) गोह (ते) तेरे लिए

English

Slack be thy bowstring: downward go the wild beast that pursues the hare! Open not what thou hast compressed, close not what thou hast not compressed.

अध्याय 4

श्लोक 3.4

व्या॒घ्रं द॒त्वतां॑ व॒यं प्र॑थ॒मं ज॑म्भयामसि ।आदु॑ ष्टे॒नमथो॒ अहिं॑ यातु॒धान॒मथो॒ वृक॑म्

vyāghraṃ datvatāṃ vayaṃ prathamaṃ jambhayāmasi | ādu ṣṭenamatho ahiṃ yātudhānamatho vṛkam

हिन्दी अर्थ

(शशयुः) सोया हेजा (मृगः) शिकारी जङ्गती-पश् (नीचा) हमारे नीचे (यत्) यदि (संयमः) गिरप्तार किया है, (न वियमः) तो उसे गिरपतारी से विमुक्त न करना चाहिए, (यत्) यदि (वियमः) गिरप्तार नहीं किया (न संयमः) तो उसे गिरफ्तार न करना चाहिए । (इन्द्रजाः जिस तुक्चको (मृतध्रजे मृत तेजवाले (वरुणाय) वरूण के लिए (गन्धर्वः) वेदवाणी-घारण करनेवाले क ने 1 (ओषधिम्) ओषधि को (वयम् खनामसि) हम खोदते ध । न

English

Indra’s and Soma’s child, thou art Atharvan’s tiger-crushing charm. A charm to restore virile power

अध्याय 4

श्लोक 3.5

यो अ॒द्य स्ते॒न आय॑ति॒ स संपि॑ष्टो॒ अपा॑यति ।प॒थाम॑पध्वं॒सेनै॒त्विन्द्रो॒ वज्रे॑ण हन्तु॒ तम्

yo adya stena āyati sa saṃpiṣṭo apāyati | pathāmapadhvaṃsenaitvindro vajreṇa hantu tam

हिन्दी अर्थ

करतादहै, ओर वधू द्वारा वरण किया जाता, वह् है व 4 ५ ५ उदुषा उदु सूय उदिदं मामके वच॑; । (उषाः) षा (उद् उ एजतु) उत्तम-प्रदीप्त हुई है सूयः) सूये उत्तमःप्रदीप्त हुआ है, (मामकम् वचः) मेरा कथन व है । (वाजिना शुष्मेण) वाजीकरण विधि द्वारा प्राप्त बल ॥ ५ 4 १ अथरव॑वेदभाष्य काण्ड ४। अनु० १ शुक्त ४

English

We dig thee from the earth, the Plant which strengthens and exalts the nerves,

अध्याय 4

श्लोक 3.6

मू॒र्णा मृ॒गस्य॒ दन्ता॒ अपि॑शीर्णा उ पृ॒ष्टयः॑ ।नि॒म्रुक्ते॑ गो॒धा भ॑वतु नी॒चाय॑च्छश॒युर्मृ॒गः

mūrṇā mṛgasya dantā apiśīrṇā u pṛṣṭayaḥ | nimrukte godhā bhavatu nīcāyacchaśayurmṛgaḥ

हिन्दी अर्थ

1 रा र होकर चमक उठा है । प्रजापति भी प्राप्त रा उत्तम वालाहो गयादहै। श ४ (व पति “श्रजापत्ति” बना है । तदनन्तर त न्त्र १/ हो गया है । अतः उसे ओषधि : उहीप्त है, दीप्तिमान् मुखवाला किया है । 1. (यथा स्म) जिस प्रकार कि (ते) तेरा वि रोहूत स भङ्गं (जानति) प्राणवान् होताहै (व = त

English

The Plant which the Gandharva dug for Varuna whose power was lost. Let Ushas and let Sūrya rise, let this the speech I utter rise.

अध्याय 4

श्लोक 3.7

यत् सं॒यमो॒ न वि य॑मो॒ वि य॑मो॒ यन्न सं॒यमः॑ ।इ॒न्द्र॒जाः सो॑म॒जा आ॑थर्व॒णम॑सि व्याघ्र॒जम्भ॑नम्

yat saṃyamo na vi yamo vi yamo yanna saṃyamaḥ | indrajāḥ somajā ātharvaṇamasi vyāghrajambhanam

हिन्दी अर्थ

(ततः) तदनन्तर (इयम् ओषधिः) यह ओषधि (ते ) तेरी इन्द्रिय ४: ( ५ अधिक बल-सम्पन्न (कृणोतु) करे । च (तनूवशिन्) तनू को वश में करनेवाले (इन्द्र (8 ५ करः जो वृष्ण्यं कि (भोषधीनाम्) ओषधियों के (उत् न (क है, (पुंसाम्) जौर अभिवधंक ओषधयो का

English

Let the strong male Prajāpati arise with manly energy. Sicut tui surgentis (membrum virile) tanquam inflammatum palpitat, hoc illud tui ardentius

अध्याय 4

श्लोक 4.1

वाजीकरण १-८ अथर्वा ।वनस्पतिः, १-२ सूर्यः, प्रजापतिः, ४ इन्द्रः, ५ आपः, सोमः, ६ अग्निः, सरस्वती, ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टप्, ४ पुरउष्णिक्, ६-७ भुरिक्।यां त्वा॑ गन्ध॒र्वो अख॑न॒द् वरु॑णाय मृ॒तभ्र॑जे ।तां त्वा॑ व॒यं ख॑नाम॒स्योष॑धिं शेप॒हर्ष॑णीम्

vājīkaraṇa 1-8 atharvā | vanaspatiḥ, 1-2 sūryaḥ, prajāpatiḥ, 4 indraḥ, 5 āpaḥ, somaḥ, 6 agniḥ, sarasvatī, brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭap, 4 purauṣṇik, 6-7 bhurik| yāṃ tvā gandharvo akhanad varuṇāya mṛtabhraje | tāṃ tvā vayaṃ khanāmasyoṣadhiṃ śepaharṣaṇīm

हिन्दी अर्थ

मनुष्य या पुरूष में जब जीवात्मा की निजशकित प्रादृ्भं है, तव तन् आत्मा के वशमेंहो जातीहै, 7 ८ रहती, ओर न वृष्ण्यवीयं से वंचित होती है । ऋषभ मोषधिर्या विशेषरूप १६ मे ऋषभ-ओषधियां पदा करती है, उन बीजों द्वाराहे स्त्री । र प्राप्त कर, सुखपूवक पृत्र-प्रसव करनेवाली (भव) हो तथा ब ह दुग्ध का प्रदान करनेवाली हो। पुंसाम् पुस अभिवर्धने (चुरादिः)। वनस्पतियों का (रसः) रस है। (उत) तथा (सोमस्य) सोम-ओषधि का रस है, (भ्राता असि) है वृष्ण्यं ! तू शरीर का भरण-पोषण करता है ओर (आशम्) "“आ' अर्थात् गुदा के सब ओर फंले हृएु खनी मस्सो की तरह

English

haec herba faciat. Sursum (estote) herbarum vires, taurorum vigor. Tu, Indra, corporis potens, virorum

अध्याय 4

श्लोक 4.2

उदु॒षा उदु॒ सूर्य॒ उदि॒दं मा॑म॒कं वचः॑ ।उदे॑जतु प्र॒जाप॑ति॒र्वृषा॒ शुष्मे॑ण वा॒जिना॑

uduṣā udu sūrya udidaṃ māmakaṃ vacaḥ | udejatu prajāpatirvṛṣā śuṣmeṇa vājinā

हिन्दी अर्थ

अयमन अध संवितरय् हैवि सरस्वति। इसके (पसः) लिङं को (धनुः इव ) धनुष की तरह् (आ तानय) पूणेतया करभस्वशं हव रोहितमनवग्लायता सद् ॥७॥ (धन्वनि अधि) धनुष, अधिरोपित (ज्याम् इव) डोरी के सदृश (ते पसः) तेरी प्रजनन -इन्द्रिय को (अहम्) भँ (भा तनोमि) पूणंतया तान देती हुं । (अशंः) मृग (इव) जैसे (रोहितम् = रोहित् +-अम् द्वितीया विभक्ति का एकवचन प्रजाविरोहण करनेवाली मुगी कौ ओर प्रग बढाता

English

masculum robur in hoc homine depone. Ros aquarum primigenitus atque arborum, Somae etiam frater es, vatum sacrorum masculus

अध्याय 4

श्लोक 4.3

यथा॑ स्म ते वि॒रोह॑तो॒ऽभित॑प्तमि॒वान॑ति ।तत॑स्ते॒ शुष्म॑वत्तरमि॒यं कृ॑णो॒त्वोष॑धिः

yathā sma te virohato'bhitaptamivānati | tataste śuṣmavattaramiyaṃ kṛṇotvoṣadhiḥ

हिन्दी अर्थ

साथ (क्रमस्व) पत्नीकीओर पग वढ्ा। अभिप्राय यह् कि अरव आदिमे जसे निज जाति कौ अरिवनी आदि मे गर्भाधान करसकने का बल विद्यमान है, उसी प्रकार है तनूवशिन् ! शरीर प्रदान द्वारा, निज तन् को निजवश मे रखकर गभधन करने का बलदे। समग्र सूक्तमें गृहस्थ को सफल बना सकने की विधियो का कथन हुआ है । वर्णन में अश्लीलता का लेशमाच्र भी प्रतीत नहीं होता ।

English

vigor es. Hodie, Agnis! hodie Savitar! hodie dea Sarasvatis! hodie

अध्याय 4

श्लोक 4.4

उच्छुष्मौष॑धीनां॒ सार॑ ऋष॒भाणा॑म्।सं पुं॒सामि॑न्द्र॒ वृष्ण्य॑म॒स्मिन्धे॑हि तनूवशिन्

ucchuṣmauṣadhīnāṃ sāra ṛṣabhāṇām| saṃ puṃsāmindra vṛṣṇyamasmindhehi tanūvaśin

हिन्दी अर्थ

(सहस्रणुद्धः) हजार रर्मियोवाला, (वृषभः ) वर्षा करनेवाला है, (तेन) उस (सहस्येनः) 'पौषमास-सम्बन्धी' सूयं दारा (वयम्) हम १. सहस्य: = पौषमासः (उणा ० ४।१६०; दयानन्द ) । सहस्यमास अतिशीतमास होता (जनान्) गृहजनों को (नि) नितरां (आ स्वापयामसि) गृह मे सवत्र सुला देते हैँ । सहस्येन = सहस्यमासोपलक्षितेन सूर्येण ।

English

Brahmanaspatis! hujus fascinum velut arcum extende. Velut nervum in arcu ego tuum fascinum extendo. Aggredere

अध्याय 4

श्लोक 4.5

अ॒पां रसः॑ प्रथम॒जोऽथो॒ वन॒स्पती॑नाम्।उ॒त सोम॑स्य॒ भ्राता॑स्यु॒तार्शम॑सि॒ वृष्ण्य॑म्

apāṃ rasaḥ prathamajo'tho vanaspatīnām| uta somasya bhrātāsyutārśamasi vṛṣṇyam

हिन्दी अर्थ

उदित होता हुआ दृष्टिगोचर होताहै। तथा “समुद्र अन्तरिक्षनामः' (निघं० १।३), भूमिवासियों को सूयं अन्तरिक्ष से उदित होता हुआ दृष्टि गोचर होता है । सूर्यं के अस्तहो जाने पर स्वापन का कथन हमार । (वातः) वायु (भूमिम्) भूमि पर (न) नहीं (अति) उग्रता से (वाति) बह रहीरहै, (न) न (कङ्चन) कोई भी (अति पश्यति) दूर तकं (चरन्) ताकि परमेश्वर मे विचरता रहे । मन्त्र में प्रभात-काल का वणेन हुआ है, जबकि भूमि पर वायु मन्द-मन्द वहती है । भूमि पर अभी अन्धकार है, इसलिए कोईभी प्राणी अभी दूर तक देख नहीं सकता । यह् सविता का कालहै जवकिद्यौःमेतो प्रकाश होतादहै, ओर भूमि पर अभी अन्धकार होताहै। यथा “तस्य सोयी हई, (वह्यशीवरीः) पंगूडे मे सोयी हर्द (याः नारीः) जौ नारियां

English

(mulierem) semper indefessus velut cervus damam. Quae sunt equi vires, muli, capri, arietis, atque tauri, illas, cor- poris potens! in hoc homine

अध्याय 4

श्लोक 4.6

अ॒द्याग्ने॑ अ॒द्य स॑वितर॒द्य दे॑वि सरस्वति ।अ॑द्यास्य ब्र॑ह्मणस्पते॒ धनु॑रि॒वा ता॑नया॒ पसः॑

adyāgne adya savitaradya devi sarasvati | adyāsya brahmaṇaspate dhanurivā tānayā pasaḥ

हिन्दी अर्थ

गन्धवाली है, (ताः सर्वाः) उन सबको (स्वापयामसि) प्रभातवेला तकं हम सुलाये रखते हँ । पण्यगन्धयः कै लिए अपवाद है (मन्त्र ६) । , अतिशवंरे = अतिक्रान्ते शवर, अतिक्रान्ते तमसि, काले तक । शवरः = तमः "'दशपाद्युणादिवृत्तिः (८।४७) । इस काल को ““आब्युषम् ध्यानाभ्यासी रात्रिक १२ बजे से उदीयमान सूयं ओर उषाकाल तक ध्यानाभ्यास करताहै। इस कालको निरुक्त मे “अश्विनोः कालः" कहा है । यह अहोरात्र काल है जिसमे रात्री ओौर दिन कासंगम होता है । रात्रि के १२ बजेसे अहोरात्र का काल प्रारम्भ हो जातादहै। अहोरात्रदो अरिवनौ ह (निरुक्त १२।१।१) । नये दिन का प्रारम्भ रात्रीके १२ बजे से (यः) जो (आस्ते) बैठा है, (यः) जो (चरति) चलता है, (यः च) मौर जो (तिष्ठन्) खडा हभ (विपश्यति) विविध पदार्थो को देखता है (तेषाम् ) उनकी (अक्षीणि) आंखों कौ (सं दध्मः ) हम अभ्यासी निमीलित करते है, (यथा) जैसेकि (इदम् हर्म्यम् ) यह घर निमीलित होता है (तथा)

English

depone. A lover’s sleep-charm

अध्याय 4

श्लोक 4.7

आहं त॑नोमि ते॒ पसो॒ अधि॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नि ।क्रम॒स्वर्श॑ इव रो॒हित॒मन॑वग्लायता॒ सदा॑

āhaṃ tanomi te paso adhi jyāmiva dhanvani | kramasvarśa iva rohitamanavaglāyatā sadā

हिन्दी अर्थ

सहवासी इन सब जनों की खों को, अभ्यास के लिए रात्रिकाल में निमी- लित कर देते है, जोकिं उनके सम्पकंमे होते । यह् अभ्यासियों के (स्वप्तु) सोई रहै (माता) माता, (स्वप्तु पिता) सोया रहे पिता, सोये रहं, (अयम्) यह् (अभितः) सब ओर (जनः) जौ जनवग है, वह् भी जो अभ्यासमार्गी नदीं हैँ उन सोये रहने देना चाहिए, परन्तु जो

English

The Bull who hath a thousand horns, who rises up from out the sea, By him the strong and mighty one we lull the folk to rest and. sleep.

अध्याय 4

श्लोक 4.8

अश्व॑स्याश्वत॒रस्या॒जस्य॒ पेत्व॑स्य च ।अथ॑ ऋष॒भस्य॒ ये वाजा॒स्तान॒स्मिन्धे॑हि तनूवशिन्

aśvasyāśvatarasyājasya petvasya ca | atha ṛṣabhasya ye vājāstānasmindhehi tanūvaśin

हिन्दी अर्थ

द्वारा कथित स्त्री इनमे से अपवादरूपाहै, जोकि अभ्यास चाहनैवाली धम- परायणा है! सायणाचार्य ने “अस्यै ' पद को अस्याः मे परि्वत्तित कर "अस्याः स्त्रियः ये ज्ञातयः” अथै किया है । सूर्यं के उदय होने तक, (आाव्युषम् ) ओर उषा कं विगत हो जाने तकं (अहम्) मै जागता रहं (अक्षितः ) णक्तिसेनक्षीण हु, (इव ) जेसेकि (अरिष्टः) साधन द्वारा सुलाकर, राति के मध्यकालसे लेकर प्रातःकाल तक घ्याना- भ्यास मे रत रहने का अभिलाषी ह । स्वापन का साधन है "हिप्नोटिज्मः, तथा 'दस्तस्पशं विधि" (अथव ० ४।१३।५-७) 1 मन्व म ' इवा" है गृहरक्षक काण्ड चतुथं का प्रथमानुवाक समाप्त ॥

English

Over the surface of the earth there breathes no wind, there looks. no eye. Lull all the women, lull the dogs to sleep, with Indra as thy friend!

अध्याय 4

श्लोक 5.1

स्वापनम्।१-७ ब्रह्म।स्वापनं, वृषभः।अनुष्टुप्,२ भुरिक्, ७ पुरस्ताज्ज्योतिस्त्रिष्टुप्।स॒हस्र॑शृङ्गो वृष॒भो यः स॑मु॒द्रादु॒दाच॑रत्।तेना॑ सह॒स्येऽना व॒यं नि जना॑न्त्स्वापयामसि

svāpanam| 1-7 brahma| svāpanaṃ, vṛṣabhaḥ| anuṣṭup,2 bhurik, 7 purastājjyotistriṣṭup| sahasraśṛṅgo vṛṣabho yaḥ samudrādudācarat| tenā sahasye'nā vayaṃ ni janāntsvāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

स सोयं प्रथमः पपौ स च॑कारारसं विषम् ॥१॥ प्रख्यात ने (सोमम् पपौ) सोमरस पिया, (सः) उसने (विषम्) विष को (अरसम्) रस-रहित अर्थात् नीरस (चकार) कर दिया ।' प्रतीत होता है कि सोमौषधके पानद्वारा विष का विषपन दूर हो चार वेदों मे वणित ६ प्रकार के विज्ञान, ये दस शिरोभूत विज्ञान हैँ । इनमें

English

The woman sleeping in the court, lying without, or stretched on beds, The matrons with their odorous sweets—these, one and all, we lull to sleep.

अध्याय 4

श्लोक 5.2

न भूमिं॒ वातो॒ अति॑ वाति॒ नाति॑ पश्यति॒ कश्च॒न।स्त्रिय॑श्च॒ सर्वाः॑ स्वा॒पय॒ शुन॒श्चेन्द्र॑सखा॒ चर॑न्

na bhūmiṃ vāto ati vāti nāti paśyati kaścana| striyaśca sarvāḥ svāpaya śunaścendrasakhā caran

हिन्दी अर्थ

का विज्ञान । कल्प है, यथा,--' तोता कल्पेषु संमिता" (अथवं ० २०।१२८। वेदोंकेही अङ्घभूतदहैँ। श्रौतकल्पमें याज्ञिक कमं कथित होतेह, जिनकी कथन हुआ है । निघण्टु ओर निरूक्तका विषय एकहीहै। निचण्टुहै प्रथम पान किया यथा ““यस्तं न वेद किमृचा करिष्यति" (ऋ ० १।१६४।३६) । सोमपान के कारण उसने सांसारिक विषयविष को अरस कर दिया, नीरस कर दिया, सांसारिकं जीवनोपायभरूत अभ्नादि का तथा गृहस्थ सम्बन्धौ भोगकाभोग करते हए भी इसके विषेलेपन से वह वचा रहा । इसका भोग त्याग तथा निरीहपन

English

Each moving thing have I secured, have held and held the eye and breath. Each limb and member have I seized in the deep darkness of the night.

अध्याय 4

श्लोक 5.3

प्रो॒ष्ठे॒श॒यास्त॑ल्पेश॒या नारी॒र्या व॑ह्य॒शीव॑रीः ।स्त्रियो॒ याः पुण्य॑गन्धय॒स्ताः सर्वाः॑ स्वापयामसि

proṣṭheśayāstalpeśayā nārīryā vahyaśīvarīḥ | striyo yāḥ puṇyagandhayastāḥ sarvāḥ svāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

कि “निगमा दमे भवन्ति", अर्थात् ये हैँ केवल “वेदिक पद", इनका संग्रह ४।७।१) मेँ 'वाः' है निषण्टुपद, ओौर "“वारयाते” है उसका निवंचन अर्थात् निरुकिति, नै रुक्त । “वाः” की निरुक्ति है, “वारयाते'”, निवारण करना । हितम्'' (अथवं० ३।१३।३) मे वा" पहै निघण्टु ओर, अवीवरत' है (द्यावापृथिवी) चुलोक ओर पृथिवीलोक (वरिम्णा ) विस्तारमें (यावती) जितने परिमाणवाले हैः (सप्तसिन्धवः) सात स्यन्दनशौल नदियां,

English

The man who sits, the man who walks, whoever stands and clearly sees Of these we closely shut the eyes, even as we closely shut this house.

अध्याय 4

श्लोक 5.4

एज॑देजदजग्रभं॒ चक्षुः॑ प्रा॒णम॑जग्रभम्।अङ्गा॑न्यजग्रभं॒ सर्वा॑ रात्री॑णामतिशर्व॒रे

ejadejadajagrabhaṃ cakṣuḥ prāṇamajagrabham| aṅgānyajagrabhaṃ sarvā rātrīṇāmatiśarvare

हिन्दी अर्थ

(इतः) इन स्थानों से (विषस्य दुषणीम् ) विष को दूषित कर देनेवाली (ताम्) उस (वाचम्) वेदवाणी को ( निरवादिषम्) निर्चित रूपमे मैने कहं दिया है। कहता है कि पृथिवी के जलभूयिष्ठ प्रदेश के किसी भी निवासीको,या य॒लोकस्थ किसी लोकलोकान्तर के निवासी को यदि सप ने काट लिया है, तौ विषके प्रतीकार के लिए, वेदों मे वणित प्रयोगौ ओौर विधियो का प्रवचन मैने तुमे कह दिया है । सुक्तका देवता यतः तक्षक सपं टे, अतः सूक्त मे मुख्यरूप मेँ सपेविषों का कथन टोक ही प्रतीत होता है । सातसमुद्रोका २० अथरववेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु°० २। सूक्त ६ इसके लिए विष (पितुः) अन्नरूप (अभवः) हो गया ।

English

Sleep mother, let the father sleep, sleep dog, and master of the home. Let all her kinsmen sleep, sleep all the people who are round about.

अध्याय 4

श्लोक 5.5

य आस्ते॒ यश्चर॑ति॒ यश्च॒ तिष्ठ॑न्वि॒पश्य॑ति ।तेषां॒ सं द॑ध्मो॒ अक्षी॑णि॒ यथे॒दं ह॒र्म्यं तथा॑

ya āste yaścarati yaśca tiṣṭhanvipaśyati | teṣāṃ saṃ dadhmo akṣīṇi yathedaṃ harmyaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

गरुड पक्षी पर विष का परीक्षण किया गया है । उसे विष खिलाया गया, परन्तु विषके कारणन तो वह् मदोन्मत्त हुभा, न विमूढ हुमा, अपितु विष उसके लिए, अन्नसद्श बल का प्रदाता हौ गया । वर्तमान मे भी भौषधों होता है । होम्योपेथी में कई प्रकार के सपविषों तथा अन्य विषों का प्रयोग, उचित शवित मेँ किया जाता है । पितुः, अन्ननाम (निषं० २।७) । अरूरुपः = धनुष-डोरी हारा वक्र हुए (धन्वनः अधि) धनूुषसे (ते) वैरे शरीर मे कै प्रलेप से, (उत) तथा (पणेधेः) पुंखधारी बाण-दण्ड से (विषम् ) विषको

English

With soporific charm, O Sleep, lull thou to slumber all the folk. Let the rest sleep till break of day, I will remain awake till dawn, like Indra free from scath

अध्याय 4

श्लोक 5.6

स्वप्तु॑ मा॒ता स्वप्तु॑ पि॒ता स्वप्तु॒ श्वा स्वप्तु॑ वि॒श्पतिः॑ ।स्वप॑न्त्वस्यै ज्ञा॒तयः॒ स्वप्त्व॒यम॒भितो॒ जनः॑

svaptu mātā svaptu pitā svaptu śvā svaptu viśpatiḥ | svapantvasyai jñātayaḥ svaptvayamabhito janaḥ

हिन्दी अर्थ

पाप चे भसन (विषम् ) विष को (निर् अवोचम्, अहम्) निकाल देना मैने की॑ण्ड ॐ । अनू० २। सूक्त ६ अथर्वेवेदभाष्यं २१ (इषौ) है बाण ! (ते) तेरा (शल्यः) वाण मे लगा लोहमय मूखाग्र (अरसारसम्) नीरस से भी अधिक नीरस हौ जाय सायण।

English

and harm. A charm to make a poisoned arrow harmless

अध्याय 4

श्लोक 5.7

स्वप्न॑ स्वप्नाभि॒कर॑णेन॒ सर्वं॒ नि स्वापया॒ जन॑म्।ओ॒त्सू॒र्यम॒न्यान्त्स्वा॒पया॑व्यु॒षं जा॑गृताद॒हमिन्द्र॑ इ॒वारि॑ष्टो॒ अक्षि॑तः

svapna svapnābhikaraṇena sarvaṃ ni svāpayā janam| otsūryamanyāntsvāpayāvyuṣaṃ jāgṛtādahamindra ivāriṣṭo akṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा “जरस है नीरस शल्य !, “अरसम्” तेरा विष नीरस हौ (ये) जिन्होने (जपीषन्) इसे पीसा है, (ये) जिन्होने (अदिहन्) सम्पूक्त बाण को फका है, चलायाहै, (ये) जिन्होने (अवासृजन्) विष का सर्जन किया है, (ते सर्वे) वे सव (वध्रयः कृताः) शक्तिरहित कर दिये रहै, (विषभिरिः) विषप्वैत (वधिः) विषौत्पादन में निःशक्त (कृतः) कर दिया विषगिरिः =विष का समूह; अथवा गिरि को विषेले सर्पौ से रहित कर दिया है, उन सबको मार दियाहै।

English

The Brāhman first was brought to life ten-headed and with faces ten. First drinker of the Soma, he made poison ineffectual.

अध्याय 4

श्लोक 6.1

विषघ्नम्।१-८ गरत्मान्।तक्षकः, १ ब्राह्मणः, २ द्यावापृथिवी, सप्तसिन्धवः, ३ सुपर्णः, ४-८ विषम्।अनुष्टुप्।ब्रा॒ह्म॒णो ज॑ज्ञे प्रथ॒मो दश॑शीर्षो॒ दशा॑स्यः ।स सोमं॑ प्रथ॒मः प॑पौ॒ स चकारार॒सं वि॒षम्

viṣaghnam| 1-8 garatmān| takṣakaḥ, 1 brāhmaṇaḥ, 2 dyāvāpṛthivī, saptasindhavaḥ, 3 suparṇaḥ, 4-8 viṣam| anuṣṭup| brāhmaṇo jajñe prathamo daśaśīrṣo daśāsyaḥ | sa somaṃ prathamaḥ papau sa cakārārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

शक्त कर दिये है, (ओषधे) है विषेली ओषधि ! (त्वाम्) तू (वध्रिः असि) निःशक्त हो गई है । (सः) वह (परवेतः) वड़ा पवेत तथा (गिरिः) छोटा पर्वत (वधिः) विषोत्पादन में (वधिः ) निःशक्त कर दिया है, (यतः) जिससे अभिप्राय यह कि राजनियम द्वारा खनिज विषो का खोदना, तथा विषली जषधियों का विनाश कर दिया है, तथा पर्वत ओर गिरि के विषले सर्पौकाभी विनाश करदियादहै। इसप्रकार खोदनेवाले तथा पवंत ओर (वरणावत्याम् अधि) जलवाली नदी मे (इदम् वाः) यह् जल (वारयातं) निवारित करे (विषम्) विष को । (तत्र) उस जल मेँ ( अमृतस्य) न मरने का तत्वे (आसिक्तम्) सीचा हृजा है, (तेन) उस हारा (ते विषम्) तेरे विष को (वारये) मँ निवारित करता हँ जोकि सव रोगों को शान्त करती है । इस प्रकार जलो मे विष-निवारण की

English

Far as the heavens and earth are spread in compass, far as the Seven Rivers are extended,

अध्याय 4

श्लोक 6.2

याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी व॑रि॒म्णा यावत् स॒प्त सिन्ध॑वो वितष्ठि॒रे।वाचं॑ वि॒षस्य॒ दूष॑णीं॒ तामि॒तो निर॑वादिषम्

yāvatī dyāvāpṛthivī varimṇā yāvat sapta sindhavo vitaṣṭhire| vācaṃ viṣasya dūṣaṇīṃ tāmito niravādiṣam

हिन्दी अर्थ

अथेदम॑धराच्यं करम्भेण षि कल्पते ॥२॥ करम्भः द्वारा (वि कल्पते?) सामथ्यं से विहीन हुआ है । हमा है । करम्भ = प०० पाहत फो0 णप (आष्ट) । मन्यं संयुतं करम्भ (जक्षिवान्) जिसने खाया है (क्षुधा) भूख से; (सः ) वह (न रूरुपः) नहीं विमोहित हुभा, मूच्छित हृजा विष के प्रभावसे ( दुष्टनो) है तन् को दूषित

English

So far my spell, the antidote of poison, have I spoken hence, The strong-winged Bird Garutmān first of all, O Poison fed on thee: Thou didst not gripe or make him drunk: aye, thou becamest food for him.

अध्याय 4

श्लोक 6.3

सु॒प॒र्णस्त्वा॑ ग॒रुत्मा॒न्विष॑ प्रथ॒ममा॑वयत्।नामी॑मदो॒ नारू॑रुप उ॒तास्मा॑ अभवः पि॒तुः

suparṇastvā garutmānviṣa prathamamāvayat| nāmīmado nārūrupa utāsmā abhavaḥ pituḥ

हिन्दी अर्थ

विष है तो तन् को दूषित करनेवाला, परन्तु क्षुधा के कारण यदि विष, प्रभूतमात्रा मे भी, खा लिया है, तौ उक्त विधि दारा तय्यार किया (अष्टा० १।४।७६), तिरोहित--निवारित करनेवाला करम्भ । पीवा == तेरे मद को, मस्ती को (शरम्, इव) हिसाकारी बाण के सदृश (विपातया- मसि) हुम विगत कर देते है, दूर फक देते है, मौर (येषन्तम् ) हिसाकारी स्थापित कर देते हैँ शीतावस्था का होने के लिए ।

English

Whoever with five fingers hath discharged thee from the crooked bow, I from the shaft have charmed away the poison of the fastening band.

अध्याय 4

श्लोक 6.4

यस्त॒ आस्य॒त् पञ्चा॑ङ्गुरिर्व॒क्राच्चि॒दधि॒ धन्व॑नः ।अ॒प॒स्क॒म्भस्य॑ श॒ल्यान्निर॑वोचम॒हं वि॒षम्

yasta āsyat pañcāṅgurirvakrāccidadhi dhanvanaḥ | apaskambhasya śalyānniravocamahaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

हाथ को सुलसा देता है । चरुः =परिपक्व तण्डुल (श्रौतपदा्थं-निवंचन) । (परि ग्रामम्") प्रति ग्रामके सबभर पणेतया (4 गये गृहसमूह को (इव) जैसे (वचसा) राजाज्ञा द्वारा (स्थापयामसि हुम = करते है, स्थिर करते ह, (इव) इसी प्रकार (अभ्रिखाते) नियत स्थान में (तिष्ठ) स्थित हो जा, (न रूरपः) अनजाने खानेवाले

English

The poison have I charmed away from shaft, cement, and feather- ed end; Yea, from the barb, the neck, the horn, the poison have I charmed away. Feeble, O Arrow, is thy shaft, thy poison, too, hath lost its strength.

अध्याय 4

श्लोक 6.5

श॒ल्याद्वि॒षं निर॑वोचं प्राञ्ज॑नादु॒त प॒र्ण॒धेः ।अ॒पा॒ष्ठाच्छृङ्गा॒त्कुल्म॑ला॒न्निर॑वोचमहं वि॒ष॑म्

śalyādviṣaṃ niravocaṃ prāñjanāduta parṇadheḥ | apāṣṭhācchṛṅgātkulmalānniravocamahaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

शरीरमें न फैल । परिपक्व करम्भ के सेवनसेतु खानेवाले के उदर मेही विलीन हो जा । जल तथा करम्भये दोनों, इस ओषध के विघातक है, इसके प्रभाव को नष्टकरदेते ह ।) खरीदी दासी मालिक को नुकसान नहीं पटूंचाती, अपितु उसकी सेविका होती है, अतः तूने मूच्छित नहीं किया । पवस्व. पा (रक्षणे) वस्त॑ः (अनाप्ताः) जिनसे वढकर कोई आप्त नहीं, एसे (ये) जिन (प्रथमाः ) प्रथमकोटि के पुरुषों ने (यानि) जिन (कर्माणि) कर्मो को (चक्रिरे) किया है, (तत् एतत् ) उस क्मकलाप को (वः) तुम्हारे (पुरः) सामने (दधे) ओँ रखता ह, ताकि बुरे कर्मं (अत्र) इस जीवन मे (नः वीरान्) हमारे पुत्रों यावीरोंकी (मा दभन्) हिसानकरं। अभिप्राय यह कि तुम एसे कमं

English

Made of a worthless tree, thy bow, O feeble one, is impotent.

अध्याय 4

श्लोक 6.6

अ॒र॒सस्त॑ इषो श॒ल्योऽथो॑ ते अ॒र॒सं वि॒षम्।उ॒तार॒सस्य॑ वृ॒क्षस्य॒ धनु॑ष्टे अरसार॒सम्

arasasta iṣo śalyo'tho te arasaṃ viṣam| utārasasya vṛkṣasya dhanuṣṭe arasārasam

हिन्दी अर्थ

पेय-जल को (आ दधाति) सर्वत्र स्थापित करताहै। (सः) वहु राजा (मृत्युः) मृत्यु भौ अधीनस्थ हुई (चरति) विचरती है, (सः राजा) वह राजा १. दशभिः = सम्भवतः दुशालो द्वारा । पवस्त भौर अजिन के सहयोग के कारण "दश" भी बहुमूल्य वस्तु प्रतीत होती है । दकं दुशले। . (उत) तथा (अजिनैः) मृगछालों द्वारा (पयेक्रीणन्) उन्होने खरीदा है,

English

The men who brayed it, smeared it on, they who discharged it, sent it forth, All these are made emasculate, emasculate the poison-hill. Thy diggers are emasculate, emasculate, O, Plant art thou.

अध्याय 4

श्लोक 6.7

ये अपी॑ष॒न् ये अदि॑ह॒न् य आस्य॒न् ये अ॒वासृ॑जन्।सर्वे॒ ते वध्र॑यः कृ॒ता वध्रि॑र्विषगि॒रिः कृतः

ye apīṣan ye adihan ya āsyan ye avāsṛjan| sarve te vadhrayaḥ kṛtā vadhrirviṣagiriḥ kṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

म स्थापित करना अभिप्रेत है) मृत्युः राजाके राज्यम मानो राजा की अभिप्रेत है राज्याधिपति बनने के लिए । है राजन् ! (अभि) राजसिहासन कीओर (प्रेहि) गमन कर, (मा) न (अप वेनः) राजकान्ति अर्थात् शोभा से अपगत हो, विहीन हो, करी संख्या का वर्धन करनेवाले ! तथा मित्रराष्टरके राजां का वधेन करनेवाले है राजन् ! (आ तिष्ठ) राजसिहासन पर् आ वठ। (देवाः)

English

The rugged mountain that produced this poison is emasculate. A charm to make a poisonous plant innocuous

अध्याय 4

श्लोक 6.8

वध्र॑यस्ते खनि॒तारो॒ वध्रि॒स्त्वम॑स्योषधे ।वध्रिः॒ स पर्व॑तो गि॒रिर्यतो॑ जा॒तमि॒दं वि॒षम्

vadhrayaste khanitāro vadhristvamasyoṣadhe | vadhriḥ sa parvato giriryato jātamidaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

जासन-व्यवस्था-सम्बन्धी कथन करते रहं । सपत्न = एकपति के अधीन रहनेवाले, राज्यान्तगंत शत्रु; तथा पर- को पहनता हुआ राजा , (स्वरोचिः) निज स्वाभाविक दीप्तिवाला हुआ (चरति) राज्यम विचरताहै। (वृष्णः ) सुखवर्षा करनेवाले, (असुरस्य) रूपः) अर्थात् वह “जोकि विर्व को रूप देता है, ओर (अमृतानि) अमृत- राजाको सूचितकियादहैकि तु परमेव रीय सहासन पर स्थित हु ५ अतः प्रजा पर सदा सुख की वषा करते रहना, जीर रजञावान् हुजा, राज्य को समग्र रूपोंवाला करना, तथा अमृत होने के साधनां पर संदा जस्या करना राजा परमेद्वरीय सिंहासन पर स्थित हुआ हं । यथा-- ,

English

So may this water guard us on the bank of Varanāvati. Therein hath Amrit been infused: with that I ward thy poison off. Weak is the poison of the East, weak is the poison of the North,

अध्याय 4

श्लोक 7.1

विषनाषनम् १-७ गरुत्मान्।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ४ स्वरीट्।वारि॒दं वा॑रयातै वर॒णाव॑त्या॒मधि॑ ।तत्रा॒मृत॒स्यासि॑क्त॒ तेना॑ ते वारये वि॒षम्

viṣanāṣanam 1-7 garutmān| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 4 svarīṭ| vāridaṃ vārayātai varaṇāvatyāmadhi | tatrāmṛtasyāsikta tenā te vāraye viṣam

हिन्दी अर्थ

२९६ अथववेदमाध्यं काण्ड ४। अनुं° २। सूरवैतंय (अथवं० २।४।६) । अर्थात् उस परमेश्वर ने तेरा आह्वान किया है, साथ परमेर्वर तेरा सहायकहै, तू परमेश्वर के सदृश राज्य को सामथ्येवाला कर । कल्पयात् = कल्पयतेलंटि आडागमः। (दिव्याः आपः) दिग्यजल अभिषेक के लिए तुञ्चे चाहं ।

English

So too this poison of the South counts as a cake of curds and meal. When he hath made of thee a cake, broad, steaming, swelling up with fat,

अध्याय 4

श्लोक 7.2

अ॒र॒सं प्रा॒च्यंऽवि॒षम॑र॒सं यदु॑दी॒च्यऽम्।अथे॒दम॑धरा॒च्यं॑ कर॒म्भेण॒ वि क॑ल्पते

arasaṃ prācyaṃ'viṣamarasaṃ yadudīcya'm| athedamadharācyaṃ karambheṇa vi kalpate

हिन्दी अर्थ

पयस्वतीः पयः है सार । यथा “'पयस्वत् मामकं वचः” (अथर्व षिञ्चामि) म अभिषिक्त करता ह, तेरा राज्याभिषेक करता हं । यथासो मित्रवधनस्तथां ला सविता करत् ॥६॥ १. अथवा यह अभिप्रायदहै किराज्यका राजा तो परमेश्वरहै, जोकि राजसिहासनें पर बटा रै, उसने तुभ ेजेण्ट बनाकर राजासन पर अपने साय विठाया है, अतः परमेरवरीय इच्छानुसार राज्य का शासन करना ।

English

And even in hunger eaten thee, then gripe him not, thou hideous one! Intoxicater! like a shaft we make thy spirit fly away, Like a pot boiling on the fire, we with our word remove thee hence.

अध्याय 4

श्लोक 7.3

क॒र॒म्भं कृ॒त्वा ति॒र्यंऽपीबस्पा॒कमु॑दार॒थिम्।क्षु॒धा किल॑ त्वा दुष्टनो जक्षि॒वान्त्स न रू॑रुपः

karambhaṃ kṛtvā tiryaṃ'pībaspākamudārathim| kṣudhā kila tvā duṣṭano jakṣivāntsa na rūrupaḥ

हिन्दी अर्थ

सविता) सर्वो्पादक परमेश्वर (त्वा) तु्ने (करत् नहीं रहता । अन्ताराष्टरियि.अ तर । ध तब ओर आलिङ्गन करते हुए (इमाः) ये आपः न (सहम्) सिह्-तुच्य पराक्रमी राजा को (महते सौभगाय) महान् ९. तथा महाशोभा के लिए (हिन्वन्ति) प्रीणित या प्रेरित न । व प्रजाज अन्तः) जलों के भीतर (तस्थिवास वाते प्रजाजन, (अप्सु अन्तः) जलं के ्

English

We set around thee with the spell as ‘twere a gathered arma- ment. Stay quiet like a rooted tree. Dug up with mattocks, gripe not thou.

अध्याय 4

श्लोक 7.4

वि ते॒ मदं॑ मदावति श॒रमि॑व पातयामसि ।प्र त्वा॑ च॒रुमि॑व॒ येष॑न्तं॒ वच॑सा स्थापयामसि

vi te madaṃ madāvati śaramiva pātayāmasi | pra tvā carumiva yeṣantaṃ vacasā sthāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

आञ्जन 1 (जीवम्) जीवित मनुष्यकं २८ अंथर्वेवेदमाष्यं कौण्डे ४। अनु ० २। सूक्तं € जीवनके लिएतु (कम्) सुखदायक (परिधिः) परिधि दहै, चारों मर स्थित घेरारूपरहै, प्राकारदहै। विषयों को भोर जाने से रोक्ता है । अञ्जन रहै, सुरमा । आंख मे लगाया

English

For coverings men have bartered thee, for skins of deer and woven cloths. Thou art a thing of sale, O Plant. Dug up with mattocks, gripe not thou! None have attained to those of old, those who wrought holy acts for you.

अध्याय 4

श्लोक 7.5

परि॒ ग्राम॑मि॒वाचि॑तं॒ वच॑सा स्थापयामसि ।तिष्ठा॑ वृ॒क्ष इ॑व॒ स्थाम्न्यभ्रि॑खाते॒ न रू॑रुपः

pari grāmamivācitaṃ vacasā sthāpayāmasi | tiṣṭhā vṛkṣa iva sthāmnyabhrikhāte na rūrupaḥ

हिन्दी अर्थ

परिपाणं पुरुषाणां परिपाणं गवामसि । (पुरुषाणाम्) पुरुषों का (परिपाणम्) परिरक्ष, परिपालकः, (गवाम्) गौओं का (परिपाणम्) परिरक्षक, परिपालक (असि)त्ूहै। पालन के लिए (तस्थिषे) तू स्थित हुआ है। जौर ब्रह्म दोनों का वणेन है । दोनों ही परिरक्षकर् परिपालक हैँ । सुरमा

English

Let them not harm our heroes here. Therefore I set before you this. A benediction at the consecration of a King

अध्याय 4

श्लोक 7.6

प॒वस्तै॑स्त्वा॒ पर्य॑क्रीणन् दू॒र्शेभि॑र॒जिनै॑रु॒त।प्र॒क्रीर॑सि॒ त्वमो॑ष॒धेऽभ्रि॑खाते॒ न रू॑रुपः

pavastaistvā paryakrīṇan dūrśebhirajinairuta| prakrīrasi tvamoṣadhe'bhrikhāte na rūrupaḥ

हिन्दी अर्थ

विधान हुमा है। मन्त्र ३ में आञ्जन को “जीवभोजनम्' कहा है । जीव- तो पुरुषो, गौओं, अश्वो आदि प्राणियों के परिरक्षण के लिषए ही जगत् में रहा टै जोकि प्राणधारीहै गौर नजौ प्राणधारी नहीं--जडहै। (उतत) तथा (परिपाणम्) परिरक्षक, परिपालक (असि) तू है, (यातु- जम्भनम्) यातनाओं का विनाशक (आञ्जन) हि आञ्जन ! (उत) तथा

English

The Being lays the sap of life in beings: he hath become the sovran Lord of creatures. Death comes to this man’s royal consecration: let him as King own and allow this kingdom. Come forward, turn not back in scorn, strong guardian, slayer of the foes.

अध्याय 4

श्लोक 7.7

अना॑प्ता॒ ये वः॑ प्रथ॒मा यानि॒ कर्मा॑णि चक्रि॒रे॑।वी॒रान्नो॒ अत्र॒ मा द॑भ॒न् तद् व॑ ए॒तत्पु॒रो द॑धे

anāptā ye vaḥ prathamā yāni karmāṇi cakrire| vīrānno atra mā dabhan tad va etatpuro dadhe

हिन्दी अर्थ

जानता है, (अथो) तथा (जीवभोजनम्) जीवित प्राणियों का तू भोजनैः (अथो) तथा (हरितभेषजम्) शरीर के हरेपन रोग की, तथा विषयों हारा हरे गये, विषयोन्मूख हुए आत्मा कौ ओषध ह । अर्थात अभिन्यविति करनेवाला ब्रह्म। यातवः=यातनाः (सायण) । भसम का प्रयोग अभिप्रेत है। शरीर का हुरापन पित्तके विकरेतहोजानेसे होताहै। इसके निवारण के लिए भो अञ्जनभस्मका प्रयोग करना का प्रयोग हुभा है, ओर अमृतस्य द्वारा मोक्ष का कथन किया ह । अमुत

English

Approach, O gladdener of thy friends. The Gods have blessed and strengthened thee. All waited on him as he came to meet them. He self-resplendent moves endued with glory.

अध्याय 4

श्लोक 8.1

राज्याभिषेकः।१-७ अथर्वाङ्गिराः।चन्द्रमाः, आपः, राज्याभिषेकः; १ राजा, २ देवाः, ३ विश्वरूपः, ४-५ आपः।अनुष्टुप्; १, ७ भुरिक् त्रिष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ५ विराट् प्रस्तारपङ्क्तिः।भू॒तो भू॒तेषु॒ पय॒ आ द॑धाति॒ स भू॒ताना॒मधि॑पतिर्बभूव ।तस्य॑ मृ॒त्युश्च॑रति राज॒सूयं॒ स राजा॑ रा॒ज्यमनु॑ मन्यतामि॒दम्

rājyābhiṣekaḥ| 1-7 atharvāṅgirāḥ| candramāḥ, āpaḥ, rājyābhiṣekaḥ; 1 rājā, 2 devāḥ, 3 viśvarūpaḥ, 4-5 āpaḥ| anuṣṭup; 1, 7 bhurik triṣṭup, 3 triṣṭup, 5 virāṭ prastārapaṅktiḥ| bhūto bhūteṣu paya ā dadhāti sa bhūtānāmadhipatirbabhūva | tasya mṛtyuścarati rājasūyaṃ sa rājā rājyamanu manyatāmidam

हिन्दी अर्थ

जोड मे (प्र सपंसि) तू फलजातादहै, तो (ततः) उस पुरुषके शरीरसे कि (मध्यमशीः) मध्यलोक म शयन करनेवाली वायु (उग्रः) रोगौन्मूलन मे उग्ररूप हई यक्ष्म को उन्मूलित कर देती ह । मे तथा रोम-रोम मे अभिव्यक्तहो जातादहै, तब वह निज कृपा से उपासक वह् शुद्ध होती है, अतः यक्ष्म को निवारित कर देती है।

English

That is the royal hero’s lofty nature: he, manifold, hath gained immortal powers. Stride forth to heaven’s broad regions, thou, a tiger on a tiger’s skin. Let all the people long for thee. Let heavenly floods be rich in milk.

अध्याय 4

श्लोक 8.2

अ॒भि प्रेहि॒ माप॑ वेन उ॒ग्रश्चे॒त्ता स॑पत्न॒हा।आ ति॑ष्ठ मित्रवर्धन॒ तुभ्यं॑ दे॒वा अधि॑ ब्रुवन्

abhi prehi māpa vena ugraścettā sapatnahā| ā tiṣṭha mitravardhana tubhyaṃ devā adhi bruvan

हिन्दी अर्थ

३० अथवैवेदभाष्य काण्ड ४। अनु ° २) सूक्त € फे यक्ष्म आदि रोगोंको भी शान्त कर देता है । "व्याधि" जादि उपासनामें कृपा से हट जाते है, (योग० समाधिपाद, सूत्र २७.३०) 1, (यः) जो उपासक (त्वा) तुञ्ने (विभक्ति) निज जीवन में धारित तथा सम्पोषित करता है, (एनम्) इसको (न शपथः) न शपथ, (न कृत्या) न हिसा

English

Heaven’s waters joyous in their milk, the waters of middle air, and those that earth containeth I with the gathered power and might of all these waters sprinkle thee,

अध्याय 4

श्लोक 8.3

आ॒तिष्ठ॑न्तं॒ परि॒ विश्वे॑ अभूषं॒छ्रियं॒ वसा॑नश्चरति॒ स्वरो॑चिः ।म॒हत् तद् वृष्णो॒ असु॑रस्य॒ नामा वि॒श्वरू॑पो अ॒मृता॑नि तस्थौ

ātiṣṭhantaṃ pari viśve abhūṣaṃchriyaṃ vasānaścarati svarociḥ | mahat tad vṛṣṇo asurasya nāmā viśvarūpo amṛtāni tasthau

हिन्दी अर्थ

अश्नुते) नहीं व्याप्त करते । । को “पुरुषविशेष ईव रः”' कहा है, (योग° समाधिपादः, सूत्र २४) । यजुवद शपथः =-यह परकृत शाप नहीं है । णपथ स्वयं ली जातीहै, भौर शाप अन्य =॥ है, (निरुक्त ७।१।३), यथा “अथापि णपयाभिशापौ'' । कृत्या कृती छेदने (तुदादिः), दूसरे की हिसा कौ भावना) ब्रह्मोपास्तक यह समन्ता हैकिजो दुःख-कष्ट मिलते वे जपने कर्मके अनुसार न्यायपूर्वक ओर व्यवित के सुधार के लिए, उसे सचेत कराने के लिए ही मिलते है, अतः वह दुःख-कष्ट मिलने पर भी शोक नहीं करता । यथा "तत्र को मोहः कः शोकः

English

The heavenly waters rich in milk have sprinkled thee with power and might. To be the gladdener of thy friends. May Savitar so fashion thee. These, compassing the tiger, rouse the lion to great joy and bliss.

अध्याय 4

श्लोक 8.4

व्या॒घ्रो अधि॒ वैया॑घ्रे॒ वि क्र॑मस्व॒ दिशो॑ म॒हीः ।विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छ॒न्त्वापो॑ दिव्याः पय॑स्वतीः

vyāghro adhi vaiyāghre vi kramasva diśo mahīḥ | viśastvā sarvā vāñchantvāpo divyāḥ payasvatīḥ

हिन्दी अर्थ

मे, जो अञ्जनभस्म का सेवन करता है उसका मानसिक परिवतेन हौ जाने से, वह मानसिक रोगों से मुक्त हो जाता है। मानसिक रोग रहै, शपथ लेना, हिस भावना, तथा अतिशौक आदि तथा मानसिक गति में विघ्नं ह, उसे वरुण-राजा जानता है, तीसरा हुभा । इससे प्रतीत होता है कि यह् पुरुषः (इदम्) इसे कि तू, हमारी रक्षा करता है “नः पाहि ' (मन्त्र) इदम् = यह पद सवेनामपद है। सर्वनामपदं पूरव परामर्श होते

English

As strong floods purify the standing ocean, so men adorn the leopard in the waters A charm addressed to a precious ointment for safety and wealth

अध्याय 4

श्लोक 8.5

या आपो॑ दि॒व्याः पय॑सा॒ मद॑न्त्य॒न्तरि॑क्ष उ॒त वा॑ पृथि॒व्याम्।तासां॑ त्वा॒ सर्वा॑साम॒पाम॒भि॑ षि॑ञ्चामि॒ वर्च॑सा

yā āpo divyāḥ payasā madantyantarikṣa uta vā pṛthivyām| tāsāṃ tvā sarvāsāmapāmabhi ṣiñcāmi varcasā

हिन्दी अर्थ

भर दूध के लिए गौ प्रदान करता है, जिसका दुग्ध उपासक के लिए अन्न- रूप होता है। साथ ही उपासक बरह्मपूरष से उसके 'आत्मस्वरूप' की प्राप्ति की याचना भी करता है। तीन (दासाः) दासवत् वशवर्ती ह सायण, या उपक्षयनीय है, (तक्मा) २३२ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° २। सूक्त € (त्रिककुद् नाम) तीन ककदोवाला पर्वन (तै) है ब्रहा-पूरुष ! तेरा (पिता)

English

Approach! thou art the mountain’s eye, the living thing that saveth us; A gift bestowed by all the Gods, yea, the defence that guardeth life. Thou art the safeguard of the men, thou art the safeguard of the kine,

अध्याय 4

श्लोक 8.6

अ॒भि त्वा॒ वर्च॑सासिच॒न्नापो॑ दि॒व्याः पय॑स्वतीः ।यथासो॑ मित्र॒वर्ध॑न॒स्तथा॑ त्वा सवि॒ता क॑रत्

abhi tvā varcasāsicannāpo divyāḥ payasvatīḥ | yathāso mitravardhanastathā tvā savitā karat

हिन्दी अर्थ

त्रिककुद्" -येदो पद विचारणीय दह । पवेत पद अनेकाथेक है । निघण्टु १।१० में पवेत, मेववाची है, परन्तु इस आजञ्जन-प्रकरण में पवेत का अथं ततीयः पादः द्वारा । इन तीन पादोंको “अकारः, उकारः, मकारः'' कहा है (माण्डूक्य उप० खण्ड ८) । सुदेवो असि वरुण यस्थ ते सप्तसिन्धवः । अनु क्षरन्ति काक्दं सुरम्यं सुषिरामिव ।। हे वरुण ! (सुदेवः) उत्तमदेव (असि) तुह, (यस्यतै) जिसतेरे

English

Thou standest ready to protect the horses that are fleet of foot. Thou, also, Salve! art a defence that rends and crushes sorcerers.

अध्याय 4

श्लोक 8.7

ए॒ना व्या॒घ्रं प॑रिषस्वजा॒नाः सिं॒हं हि॑न्वन्ति मह॒ते सौभ॑गाय ।स॒मु॒द्रं न सु॒भुव॑स्तस्थि॒वांसं॑ मर्मृ॒ज्यन्ते॑ द्वी॒पिन॑म॒प्स्व॑१न्तः

enā vyāghraṃ pariṣasvajānāḥ siṃhaṃ hinvanti mahate saubhagāya | samudraṃ na subhuvastasthivāṃsaṃ marmṛjyante dvīpinamapsva1ntaḥ

हिन्दी अर्थ

कोकुवा है जिह्वा जोकि इस तालु मे धारित होती है । काकुदम् ==“ कोकुवा + धा" । इस निष्पत्ति मे वणंविकार, व्ण॑नाश आदि नाना परिवत्तंन करने होते है, जोकि विलष्ट कल्पना है । काकुदम् में उच्च प्रदेश उभरा हृ होता दहै जिसेकिं ककुद् कहते हैँ । तालु भी अभिप्रेत है, कण्ठ ओर दो ओष्ठ, एक नीचे का ओष्ठ ओर दूसरा ऊपरका ्अ,उ,म्"द्राराहोताहै।ये दही “त्रिककृत्'' ह

English

Thou knowest, too, of Amrit, thou art the delight of all who live, a jaundice-curing balm art 38 thou.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।