Atharva Veda
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अध्याय 5 / 20

Kanda 5

काण्ड 5

376 श्लोकभाग 1/6 · श्लोक 1.1–6.14

पूर्ण अध्याय पाठ62 श्लोक

अध्याय 5

श्लोक 1.1

अमृतासुः।१-९ बृहद्दिवोऽथर्वा।वरुणः।त्रिष्टुप्, ५ पराबहती त्रिष्टुप्, ७ विराट्, ९त् त्र्यवसाना षट्-पदा अत्यष्टिः।ऋध॑ङ्मन्त्रो॒ योनिं॒ य आ॑ब॒भूवामता॑सु॒र्वर्ध॑मानः सु॒जन्मा॑ ।अद॑ब्धासु॒र्भ्राज॑मा॒नोऽहे॑व त्रि॒तो ध॒र्ता दा॑धार॒ त्रीणि॑

amṛtāsuḥ| 1-9 bṛhaddivo'tharvā| varuṇaḥ| triṣṭup, 5 parābahatī triṣṭup, 7 virāṭ, 9t tryavasānā ṣaṭ-padā atyaṣṭiḥ| ṛdhaṅmantro yoniṃ ya ābabhūvāmatāsurvardhamānaḥ sujanmā | adabdhāsurbhrājamāno'heva trito dhartā dādhāra trīṇi

हिन्दी अर्थ

अद॑न्धासुर्थराजमानीऽहैव चितो पर्ता दाधार त्रीणि ॥१॥ (योनिम्) प्रकृतिरूपी योनि मे (भावभूव) प्रकट दूजा (अमृतासुः) अमृत- अहिसित अर्थात् अमर प्रज्ञावाला है, (अहा =-अहानि, इव) दिनों के सदुश ञ्रायो धर्मणि प्रथमः ससाद ततौ वर्पूषि कृष पुरूणि । धास्यर्योनि प्रथम आ विवेदा यो वाचमनुंदिधं चिकेतं ॥२॥

English

A glorification of Trita and Varuna He who with special plans and deathless spirit, waxing, well- born, hath come unto his birth place,

अध्याय 5

श्लोक 1.2

आ यो धर्मा॑णि प्रथ॒मः स॒साद॒ ततो॒ वपूं॑षि कृणुषे पु॒रूणि॑ ।धा॒स्युर्योनिं॑ प्रथ॒म आ वि॑वे॒शा यो वाच॒मनु॑दितां चि॒केत॑

ā yo dharmāṇi prathamaḥ sasāda tato vapūṃṣi kṛṇuṣe purūṇi | dhāsyuryoniṃ prathama ā viveśā yo vācamanuditāṃ ciketa

हिन्दी अर्थ

र! तू (पुरूणि) बहुत (वपूषि) प्राणशरीरो को (कृणुषे) षेदा । ध सबका धारण करनेवाला प्रथमः) प्राथमिक परमेश्वरं (योनिम) प्रकृतिरूपी योनि मे (आविवेश) प्रविष्ट है, (यः) जं ् व वाणी को (चिकेत) सम्यक्तया जानता है । १६४ अथरवेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु° १। सक्त £ जो जानता है, अर्थात् उसके मन मं क्या विचारहै, उसेनकहेतो भी वहं

English

As he who shines upholds the days, thus Trita, of pure life, bears the Three as their supporter. He who, the first, approached the holy statutes makes, after, many beauteous forms and

अध्याय 5

श्लोक 1.3

यस्ते॒ शोका॑य त॒न्वंऽ रि॒रेच॒ क्षर॒द्धिर॑ण्यं॒ शुच॒योऽनु॒ स्वाः ।अत्रा॑ दधेते अ॒मता॑नि॒ नामा॒स्मे वस्त्रा॑णि॒ विश॒ एर॑यन्ताम्

yaste śokāya tanvaṃ' rireca kṣaraddhiraṇyaṃ śucayo'nu svāḥ | atrā dadhete amatāni nāmāsme vastrāṇi viśa erayantām

हिन्दी अर्थ

नाम=-नामानि।), अमृतः नामों को (दधेते) धारण करते ह, उन नामोंका प्रच्छदन-दहै प्राणकोवलसे, शरीर से बाहर फंकना । सके द्वारा शरीर की शुद्धि हो जाती है, ओर चित्तवृत्तियों का निरोध तथा पवित्रता होकर, काल के परमेडवर कौ ओर (प्रगुः) प्रगति करते ह, उस परमेश्वर की ओर जोक्रि (शुषरय कविः) सुख का उपदेष्टा है, तब (रिहाणे) दुग्ध देनेव संसार-रथ कौ धुरा का वहन करनेवाले (पतिम्) सर्वरक्षक पति कं (एरयेथाम्) तुम भी प्रेरित करती हो, या प्रेरित कसो ।

English

figures. Eager to drink, his birth-place first he entered who understands the word when yet unspoken.

अध्याय 5

श्लोक 1.4

प्र यदे॒ते प्र॑त॒रं पू॒र्व्यं गुः सदः॑सद आ॒तिष्ठ॑न्तो अजु॒र्यम्।क॒विः शु॒षस्य॑ मा॒तरा॑ रिहा॒णे जा॒म्यै धुर्यं॒ पति॒मेर॑येथाम्

pra yadete prataraṃ pūrvyaṃ guḥ sadaḥsada ātiṣṭhanto ajuryam| kaviḥ śuṣasya mātarā rihāṇe jāmyai dhuryaṃ patimerayethām

हिन्दी अर्थ

अमृतनाम ---अमृत परमेरवर के नाम मरम के “अ, उ, म्" द्वारा नििष्टना ३. प्र्छदन है आध्यात्मिकं विरेचन । । दो मातां हैँ यौः ओर पृथिवी । ये खाने-पीने के लिए स्वादु अन्न आओरवपेयदेरहीहँ) इनदोकी रचनाओं को देखकर रचयिता परमेरवर

English

He who—the fluid gold, with radiant kinsmen—to fervent glow delivered up thy body, On him both set names, that shall live for ever: to him the regions shall send robes to clothe

अध्याय 5

श्लोक 1.5

तदू॒ षु ते॑ म॒हत् पृ॑थुज्म॒न् नमः॑ क॒विः काव्ये॑न कृणोमि ।यत् स॒म्यञ्चा॑वभि॒यन्ता॑व॒भि क्षामत्रा॑ म॒ही रोध॑चक्रे वावृ॒धेते॑

tadū ṣu te mahat pṛthujman namaḥ kaviḥ kāvyena kṛṇomi | yat samyañcāvabhiyantāvabhi kṣāmatrā mahī rodhacakre vāvṛdhete

हिन्दी अर्थ

(पथज्मन्) है विस्तृत पथिवीवाले परमेश्वर ! (ते) तैरे लिए, कविः) मेँ कवि, (काव्येन) वेदकान्य हारा (सु) युष्ट्पूवंक (ऊउ) धचक्रे) किनारोंके दो चक्र, (अत्र) इस सृष्टि, ( ॥ सम्मुख गति करते हुए, (वावृते) निज ह सूर्य, दूसरे किनारे पर है पृथिवी का उपग्रह्, चच्छमा। ये दोकिनारेर सौरमण्डल के, न किं ब्रह्माण्ड के ।

English

him, As these have gone to their primeval station, each gaining an imperishable dwelling,

अध्याय 5

श्लोक 1.6

स॒प्त म॒र्यादाः॑ क॒वय॑स्ततक्षु॒स्तासा॒मिदेका॑म॒भ्यंऽहु॒रो गा॑त्।आ॒योर्ह॑ स्क॒म्भ उप॑मस्य नी॒डे प॒थां वि॑स॒र्गे ध॒रुणे॑षु तस्थौ

sapta maryādāḥ kavayastatakṣustāsāmidekāmabhyaṃ'huro gāt| āyorha skambha upamasya nīḍe pathāṃ visarge dharuṇeṣu tasthau

हिन्दी अर्थ

क उसका उल्लंघन करता हुभा (गात्) जो जाता है, (अंहु रः) वह पापीहोजाताहै। वह पापी उस परमेश्वर को प्राप्त नहीं होता जो उपमा रूप आदित्य के (नीडे) समीपस्थ ह, (धरूणेष् ) ओर धारक पदार्थो में परमेश्वर । आयवः मनुष्यनाम (निषं० २।३) । उपमस्य --यथा आदित्यः धारी, (कृण्वन् ) सत्कर्मो को करता हुआ (एमि) मै आता हूं संसार म.

English

May kissing mothers of the bards’ beloved bring the pole-draw- ing husband to the sister. By holy wisdom I a sage, Far-Strider! offer to thee this lofty adoration.

अध्याय 5

श्लोक 1.7

उ॒तामृता॑सु॒र्व्रत॑ एमि कृ॒न्वन्नसु॑रा॒त्मा त॒न्व॑१स्तत् सु॒मद्गुः॑ ।उ॒त वा॑ श॒क्रो रत्नं॒ दधा॑त्यू॒र्जया॑ वा॒ यत् सच॑ते हवि॒र्दाः

utāmṛtāsurvrata emi kṛnvannasurātmā tanva1stat sumadguḥ | uta vā śakro ratnaṃ dadhātyūrjayā vā yat sacate havirdāḥ

हिन्दी अर्थ

मे (सुमद गुः) उत्तमता तथा हषेपूव॑क गत्ति करता हं । (उत वा) तथा तब जो हविः है, उसके साथ, (हविर्दाः) हविः का देनेबाला परमेदवर, (सचते) । मेरे साथ सम्बद्ध होता है। सत्कर्म करता है, ओौर सत्कमं करता हआ संसारमें पुनः-पुनः अता है । ॥ वह तनु में गति प्रदान करता है। एसे व्यविति को परमेदवर सद्गुण प्रदान , (पितरम्) परमेश्व र-पिता कौ (ईडे) स्तुति ओर उसका आह्वान करता

English

This worship both the mighty eddying rivers, coming together to this station, heighten. Seven are the pathways which the wise have fashioned: to one of these may come the

अध्याय 5

श्लोक 1.8

उ॒त पु॒त्रः पि॒तरं॑ क्ष॒त्रमी॑डे ज्ये॒ष्ठं म॒र्याद॑मह्वयन्त्स्व॒स्तये॑ ।दर्श॒न् नु ता व॑रुण॒ यास्ते॑ वि॒ष्ठा आ॒वर्व्र॑ततः कृणवो॒ वपूं॑षि

uta putraḥ pitaraṃ kṣatramīḍe jyeṣṭhaṃ maryādamahvayantsvastaye | darśan nu tā varuṇa yāste viṣṭhā āvarvratataḥ kṛṇavo vapūṃṣi

हिन्दी अर्थ

के लिए (वरुण) है वरणीय ! परमेश्वर ! (याः) जो (ते) तेरी (विष्ठाः) देखता हं, (आवत्रेततः) मावृत्ति-करम से (वपुषि) प्राणियों के शरीरो को । प्राणि-सृष्टि । त्रितः (मन्त १) ही वरुण है । गरधरमप्र॑न पय॑सा पृणक््र्धेनं शुष्म वधंसे अमुर ।

English

troubled mortal. On sure ground where the ways are parted standeth Life’s Pillar in the dwelling of the

अध्याय 5

श्लोक 1.9

अ॒र्धम॒र्धेन॒ पय॑सा पृणक्ष्य॒र्धेन॑ शुष्म वर्धसे अमुर ।अविं॑ वृधाम श॒ग्मियं॒ सखा॑यं॒ वरु॑णं पु॒त्रमदि॑त्या इषि॒रम्।क॒वि॒श॒स्तान्य॑स्मै॒ वपूं॑ष्यवोचाम॒ रोद॑सी सत्य॒वाचा॑

ardhamardhena payasā pṛṇakṣyardhena śuṣma vardhase amura | aviṃ vṛdhāma śagmiyaṃ sakhāyaṃ varuṇaṃ putramadityā iṣiram| kaviśastānyasmai vapūṃṣyavocāma rodasī satyavācā

हिन्दी अर्थ

साथ सम्पुक्त है, सम्पकं करता है 1 (शुष्म) है बलरूप 1, (अमुर) है र । कवि द्वारा प्रोक्त (वपूंषि) इसके रूपों का (मवोचाम हमने कथन किया है, (रोदसी) पृथिवी मौर चुलोक भी (सत्यवाचा = सत्यवाचौ ) सत्यस्वरूप दारा परमेडवर का भान होता है, अतः वह् प्रकृति का पत्र न र क बूष 3 स प्रकृति ओर जीवात्माकेमेल से जीवात्मा के १ होते हैः वसे प्रकृति ओर परमेश्वर के मेल से परमेश्वर के वपूंषि होतेर्हैः

English

Highest. Working, I go my way with deathless spirit: life, spirit, bodies have gone gladly thither.

अध्याय 5

श्लोक 2.1

भुवनेषु ज्येष्ठः।१-९ बृहद्दिवोऽथर्वा।वरुणः।त्रिष्टुप्, ९ भुरिक् परातिजागता त्रिष्टुप्।तदिदा॑स॒ भुव॑नेषु॒ ज्येष्ठं॒ यतो॑ यज्ञ उ॒ग्र स्त्वे॒षनृ॑म्णः ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो नि रि॑णाति॒ शत्रू॒ननु॒ यदे॑नं॒ मद॑न्ति॒ विश्व॒ ऊमाः॑

bhuvaneṣu jyeṣṭhaḥ| 1-9 bṛhaddivo'tharvā| varuṇaḥ| triṣṭup, 9 bhurik parātijāgatā triṣṭup| tadidāsa bhuvaneṣu jyeṣṭhaṃ yato yajña ugra stveṣanṛmṇaḥ | sadyo jajñāno ni riṇāti śatrūnanu yadenaṃ madanti viśva ūmāḥ

हिन्दी अर्थ

इत् आस) वह ही ब्रह्म था (भुवनेषु) सब भुव ् १६८ काण्ड ५। अनु° १। सूक्त २ करताहै, (यत्) जबकि (विर्वे ऊमाः) सब रक्षकगण (एनम् अनु) इस , ॑ : कर्मनाम, ऋतुः प्रज्ञानाम (निष क. २ ष

English

Aye, Sakra also gives his gift of treasure as when the sacrificer meets with power. Yea, the son asks dominion of his father: this they declared the noblest path to welfare.

अध्याय 5

श्लोक 2.2

वा॒वृ॒धा॒नः शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ शत्रु॑र्दा॒साय॑ भि॒यसं॑ दधाति ।अव्य॑नच्च व्य॒नच्च॒ सस्नि॒ सं ते॑ नवन्त॒ प्रभृ॑ता॒ मदे॑षु

vāvṛdhānaḥ śavasā bhūryojāḥ śatrurdāsāya bhiyasaṃ dadhāti | avyanacca vyanacca sasni saṃ te navanta prabhṛtā madeṣu

हिन्दी अर्थ

पूव पैदा हो जानि पर तीन-तीन । आदश गृहस्थी के लिए एक पु आदित्य कौ निरन्तर (मदन्ति) स्तुति करते हैं । वाला अथात् महा-ओजस्वी, (शत्रुः) शातन करनेवाला आदित्य, (दासाय) उपक्षीण होनेवाले मेव के लिए (भियसम्) भय (दधाति) धारण करता है । वे (संनवन्त) मिलकर (हे जआदित्यरूप) तेरी स्तुति करते है ।

English

Varuna, let them see thy revelations: display the wondrous shapes of times to follow. Halt with the milk, its other half, thou minglest and with that half, strong! unbeguiled!

अध्याय 5

श्लोक 2.3

त्वे क्रतु॒मपि॑ पृञ्चन्ति॒ भूरि॒ द्विर्यदे॒ते त्रिर्भव॒न्त्यूमाः॑ ।स्वा॒दोः स्वा॒दीयः॑ स्वा॒दुना॑ सृजा॒ सम॒दः सु मधु॒ मधु॑ना॒भि यो॑धीः

tve kratumapi pṛñcanti bhūri dviryadete trirbhavantyūmāḥ | svādoḥ svādīyaḥ svādunā sṛjā samadaḥ su madhu madhunābhi yodhīḥ

हिन्दी अर्थ

का नकि जड़ आदित्य का। यथा “योऽसावादित्ये पुरुषः सोऽसावहम् । तीन-तीन हो जाति, (ऊमाः) जर प्राणिमात्र के रक्षक हो जाते ह । ह स्वादु के साथ, (सम् सृज) संसग कर । (अदः) उस (सुमधू) उत्तम मधु को (मधुना) मघु के साथ (अभि योधीः) साक्षात् मिश्रित कर । माना, जोकि उत्तराधिकारी हो सके । ऊमा-अ त (० लिए पञ्चमहायज्ञ का विधान है पञ्च महायज्ञो से गृ

English

increasest. Let us exalt the gracious friend, the mighty, Varuna son of-Aditi, strength-giver.

अध्याय 5

श्लोक 2.4

यदि॑ चि॒न्नु त्वा॒ धना॒ जय॑न्तं॒ रणे॑रणे अनु॒मद॑न्ति॒ विप्राः॑ ।ओजी॑यः शुष्मिन्त्स्थि॒रमा त॑नुष्व॒ मा त्वा॑ दभन् दु॒रेवा॑सः क॒शोकाः॑

yadi cinnu tvā dhanā jayantaṃ raṇeraṇe anumadanti viprāḥ | ojīyaḥ śuṣmintsthiramā tanuṣva mā tvā dabhan durevāsaḥ kaśokāḥ

हिन्दी अर्थ

कीसेवा करते है,परन्तु मोक्च का सुख इसने भौ अधिक स्वादु है । मोक्षसुख के साथ-साथ सांसारिक सुख का संसगे अर्थात् मेल कर का सि रूप मोक्षसुख के साथ अ तथा मधरूप सांसारिक सुख का मिश्रण मू न व गृहस्थी के लिएु उपदेश है । अभियोधी ; = अभि र व है । अमियोधीः --अभि यो + धीः (हेधिः ) । विसर्गान्तदीधः

English

We have told him the marvels sung by poets. The utterance of Heaven and Earth is truthful. A glorification of Indra

अध्याय 5

श्लोक 2.5

त्वया॑ व॒यं शा॑शद्महे॒ रणे॑षु प्र॒पश्य॑न्तो यु॒धेन्या॑नि॒ भूरि॑ ।चो॒दया॑मि त॒ आयु॑धा॒ वचो॑भिः॒ सं ते॑ शिशामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वयां॑सि

tvayā vayaṃ śāśadmahe raṇeṣu prapaśyanto yudhenyāni bhūri | codayāmi ta āyudhā vacobhiḥ saṃ te śiśāmi brahmaṇā vayāṃsi

हिन्दी अर्थ

मे, (धना जयन्तम्) मासुरी सम्पत्ति को जीतते 4 (9 ) ५ ४ रावी लोग (अनुमदन्ति) अनुभोदन करते है, तो (शुष्मिन् ॥ क शनी धनुष् को (स्थिरम्) स्थिर सूप मे (५ व ताने रख, ताकि (दुरेवासः) दुभेतिवाले, (कशोकाः) दुरति के निव त्वा) तुजे (मा दभन्) हिसित न कर। ॥ = ४ ८१२ ओौर सांसारिक मार्गं इन दोनों पर चलते हुए ५ ३ (षर २।७। २५) कशोकाः =-कश (गति, दुगंति) ओकस घर । अन्यत्र पाठ है "यातुधाना दुरेवाः" । “रणे-रणे” मे द्विरुक्ति है । ध मे

English

In all the worlds That was the best and highest whence sprang the Mighty One of splendid valour.

अध्याय 5

श्लोक 2.6

नि तद् द॑धि॒षेऽव॑रे॒ परे॑ च॒ यस्मि॒न्नावि॒थाव॑सा दुरो॒णे।आ स्था॑पयत मा॒तरं॑ जिग॒त्नुमत॑ इन्वत॒ कर्व॑राणि॒ भूरि॑

ni tad dadhiṣe'vare pare ca yasminnāvithāvasā duroṇe| ā sthāpayata mātaraṃ jigatnumata invata karvarāṇi bhūri

हिन्दी अर्थ

दूनकी पराजय के लिए नाना प्रकार के युद्ध करने होतेर्हैः ओर नान १७० अथर्ववेद माध्यं काण्ड ५।अनु° १। सूक्त २ ¦ उपन्यास को न पढ़ना, कामोहीपक दुश्यों को न देखना, न कामोदीपक रागौँको सुनना आदि। इसी प्रकार अन्य आसूरी भावम भी इनपरे देवासूर-संग्रामों मे (शाशद्महे) आसुरभावोंका ध ५ ॥

English

As soon as born he overcomes his foemen, when those rejoice in him who bring him succour. Grown mighty in his strength, with ample vigour, he as a foe strikes fear into the Dāsa,

अध्याय 5

श्लोक 2.7

स्तु॒ष्व व॑र्ष्मन् पुरु॒वर्त्मा॑नं॒ समृभ्वा॑णमि॒नत॑ममा॒प्तमा॒प्त्याना॑म्।आ द॑र्शति॒ शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ प्र स॑क्षति प्रति॒मानं॑ पृथि॒व्याः

stuṣva varṣman puruvartmānaṃ samṛbhvāṇaminatamamāptamāptyānām| ā darśati śavasā bhūryojāḥ pra sakṣati pratimānaṃ pṛthivyāḥ

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरे (वयांसि) आध्यात्मिक बाणो को (सं १०।२७।२२) “वयः विरिति शकुनिनाम वेतेमतिकर्मणः। अथा आ स्थापयत मातरं जिगस्तुमतं इन्वत कर्वराणि भूरिं ॥६॥ ॥ हे परमेश्वर ! (अवरे, परे च) अवरलोक तथा पर के (यस्मिन् दुरोणे) जिस घरमे (अवसा) उस-उसकी रक्षाकी न (आविथ) तू प्रविष्ट हुमा-हजा है, उस घरमें रहकर तू (तत्) उसे (नि दधिषे) नितरां धारण करता है । है मनुष्यो 1 (जिगलनुम्) सर्वगत या 8 उस पारमेश्वरी (मातरम्) माताको (आ स्थापयत) तुम

English

Eager to win the breathing and the breathless: All sang thy praise at banquet and oblation. All concentrate on thee their mental vigour what time these, twice or thrice, are thine

अध्याय 5

श्लोक 2.8

इ॒मा ब्रह्म॑ बृ॒हद्दि॑वः कृणव॒दिन्द्रा॑य शू॒षम॑ग्रि॒यः स्व॒र्षाः ।म॒हो गो॒त्रस्य॑ क्षयति स्व॒राजा॒ तुर॑श्चि॒द् विश्व॑मर्णव॒त् तप॑स्वान्

imā brahma bṛhaddivaḥ kṛṇavadindrāya śūṣamagriyaḥ svarṣāḥ | maho gotrasya kṣayati svarājā turaścid viśvamarṇavat tapasvān

हिन्दी अर्थ

वयांसि == वाण । यथा "ततो वयः प्रपतान् पुरुषादः'” (ऋ ¦ दशंति) सब आसुर भावोंको विदी्णं कर देताहै मौर (पथिव्याः) भासमान ओर आदित्यररमियों कौ तरह प्रकाशमान षरभेरवर । आप्तम् = जौर इनमे से प्रत्येक अपने-अपने मागं पर गति कररहारहै, ओर परस्पर टकराते

English

assistants, Blend what is sweeter than the sweet with sweetness win quickly with our meath that meath

अध्याय 5

श्लोक 2.9

ए॒वा म॒हान् बृ॒हद्दि॑वो॒ अथ॒र्वावो॑च॒त् स्वां त॒न्व॑१मिन्द्र॑मे॒व।स्वसा॑रौ मात॒रिभ्व॑री अरि॒प्रे हि॒न्वन्ति॑ चैने॒ शव॑सा व॒र्ध॑य॑न्ति च

evā mahān bṛhaddivo atharvāvocat svāṃ tanva1mindrameva| svasārau mātaribhvarī aripre hinvanti caine śavasā vardhayanti ca

हिन्दी अर्थ

नामपदोको ऋषिके रूपमे अनुक्रमणिका आदिमे कहारैः ये सब काल्पनिक, १७२ शथवंवेदभाष्य काण्ड ५।अनु० १। सूक्त र रदिमयों के पालक सूयं मे (क्षयति) निवास करताहै, ओर (तपस्वान्) विश्व मेँ (अणंवत्) ग्याप्त हो जाता है।

English

in battle. If verily in every war the sages joy and exult in thee who win- nest treasures,

अध्याय 5

श्लोक 3.1

विजयाय प्रार्थना।१-११ बृहद्दिवोऽथर्वा।१-२ अग्निः, ३-४ देवाः, ५ द्रविणोदाः, ६ देवीः, ७ सोमः, ८,११ इन्द्रः, ९ धाता, विधाता, सविता, आदित्याः. रुद्राः, अश्विनौ, १० आदित्याः, रुद्राः।त्रिष्टुप्, २ भुरिक्, १० विराड्-जगती।ममा॑ग्ने॒ वर्चो॑ विह॒वेष्व॑स्तु व॒यं त्वेन्धा॑नास्त॒न्वंऽपुषेम ।मह्यं॑ नमन्तां प्र॒दिश॒श्चत॑स्रस्त्वयाध्य॑क्षेण॒ पृत॑ना जयेम

vijayāya prārthanā| 1-11 bṛhaddivo'tharvā| 1-2 agniḥ, 3-4 devāḥ, 5 draviṇodāḥ, 6 devīḥ, 7 somaḥ, 8,11 indraḥ, 9 dhātā, vidhātā, savitā, ādityāḥ. rudrāḥ, aśvinau, 10 ādityāḥ, rudrāḥ| triṣṭup, 2 bhurik, 10 virāḍ-jagatī| mamāgne varco vihaveṣvastu vayaṃ tvendhānāstanvaṃ'puṣema | mahyaṃ namantāṃ pradiśaścatasrastvayādhyakṣeṇa pṛtanā jayema

हिन्दी अर्थ

अथववेद का नाम ब्रह्मवेद भी है। के सिन्न-भिन्न गुणों ओर कर्मो का निदेश कर, एक परमेश्वर का ही कथन ६ देवीः; ७ सोमः; ८,११ इन्द्रः; € सविता, धाता, विधाता, विस्तत 'साभ्राज्य-शरीर' को (पुषेम) परिपृष्ट कर । (चतसः विशः)

English

With mightier power, strong God, extend thy firmness: let not malevolent Kaokas harm thee. Proudly we put our trust in thee in battles, when we behold great wealth the prize of combat.

अध्याय 5

श्लोक 3.2

अग्ने॑ म॒न्युं प्र॑तिनु॒दन् परे॑षां॒ त्वं नो॑ गो॒पाः परि॑ पाहि वि॒श्वतः॑ ।अपा॑ञ्चो यन्तु नि॒वता॑ दुर॒स्यवो॒ऽमैषां॑ चि॒त्तं प्र॒बुधां॒ वि ने॑शत्

agne manyuṃ pratinudan pareṣāṃ tvaṃ no gopāḥ pari pāhi viśvataḥ | apāñco yantu nivatā durasyavo'maiṣāṃ cittaṃ prabudhāṃ vi neśat

हिन्दी अर्थ

(नः) हमें (विरवतः) सब ओर से (परि पाहि) सुरक्षित कर । (दुरस्यवः) प्रबोध को (विनेशत्) न प्राप्त हों । जैसे नदी का जल नीचे की ओर वह् जाता है, वैसे शत्रू भी अधो- मागेगामी हो जाए, एेसे वापस धकेल दिये जाएं विः उनके चित्तो मे पूनः आक्रमण केरने का प्रबोध न रहे। लिए (वातः) वागु (पवताम्) अनुकूल रूप मेँ प्रवाहित हो (अस्मै कामाय)

English

Praise in the height Him who hath many pathways, courageous, strongest, Aptya of the Aptyas

अध्याय 5

श्लोक 3.3

मम॑ दे॒वा वि॑ह॒वे स॑न्तु॒ सर्व॒ इन्द्र॑वन्तो म॒रुतो॒ विष्णु॑र॒ग्निः ।ममा॒न्तरि॑क्षमु॒रुलो॑कमस्तु॒ मह्यं॒ वातः॑ पवतां॒ कामा॑या॒स्मै

mama devā vihave santu sarva indravanto maruto viṣṇuragniḥ | mamāntarikṣamurulokamastu mahyaṃ vātaḥ pavatāṃ kāmāyāsmai

हिन्दी अर्थ

से, अन्तरिक्ष पर भी स्वामित्व चाहता है । एनो मानि गाँ कतमच्चनाहं विश्वै देवा अमि रक्षन्तु मेह ।(४५॥ १. सम्भवतः विष्णु है "'घ्रुवादिक् का अधिपति तथा पृथिवी की भोषधियों का रक्षन्तु) सब प्रकारसे सुरक्षित करं।

English

Through strength he shows himself of ample power: pattern of Prithivī, he fights and conquers.

अध्याय 5

श्लोक 3.4

मह्यं॑ यजन्तां॒ मम॒ यानी॒ष्टाकू॑तिः स॒त्या मन॑सो मे अस्तु ।एनो॒ मा नि गां॑ कत॒मच्च॒नाहं विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु मे॒ह

mahyaṃ yajantāṃ mama yānīṣṭākūtiḥ satyā manaso me astu | eno mā ni gāṃ katamaccanāhaṃ viśve devā abhi rakṣantu meha

हिन्दी अर्थ

सोम-राजा की उक्ति है (मन्त्र ७) । एनः= एतेः, (निरुक्त ११।३।२४) पाप; जोकि फलभोग कराने के लिए अवश्य पापी को प्राप्त । ¦ होता है। अभिप्राय यह् कि युद्धकमं में मृञ्षसे एता कोई गाप न हो जाए मथि देवा द्रविणमा यजन्तां मय्याशीरस्तु मयि देवहूतिः। हैवा होतारः सनिषन न एतदरिष्टाः स्याम तन्वा सुवीराः ॥।५॥ (देवाः) साम्राज्य के दिव्य अधिकारी, (मयि) मुञ्च सोम-राजाके ' साम्राज्य का आशीर्वाद हो, (मयि) मृञ्चमें (देवहूतिः ५ इन देवां को आहूत । करने का अधिकार हो। (होतारः) साम्राज्य-यज्ञ में भहृतियां देनेवाले

English

Brihaddiva, the foremost of light-winners, hath made these holy prayers, this strength for Indra.

अध्याय 5

श्लोक 3.5

मयि॑ दे॒वा द्रवि॑ण॒मा य॑जन्तां॒ मय्या॒शीर॑स्तु॒ मयि॑ दे॒वहू॑तिः ।दै॒वाः होता॑रः सनिषन्न ए॒तदरि॑ष्टाः स्याम त॒न्वाऽसु॒वीराः॑

mayi devā draviṇamā yajantāṃ mayyāśīrastu mayi devahūtiḥ | daivāḥ hotāraḥ saniṣanna etadariṣṭāḥ syāma tanvā'suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

(देवाः) देवसमह ने (नः) हमे, (एतत्) यह धन (सनिषन्) प्रदान किया है, (सुवीराः) ताकि हम उत्तम वीर (तन्वा) शरीर से (अरिष्टाः) हिसा- युद्ध के लिए धन की आवद्यकता होती है, इसलिए धन की याचना हुई है, ओर अन्य अधिकारोकौप्राप्तिका कथनमभी सोम-राजाने किया है । सनिषन् = षणु दाने (तनादिः), लेट् लकार, सिप्, अट् काआगम। देवीः षडवीररु न॑ः कृणोत विश्वे देवास इह मादयध्वम् । हे (देवीः) दिव्य (षट् ) छह (उर्वीः) विस्तृत दिशा ! (नः) हमारे लिए (उर) विस्तृत प्रदेश (कृणोत) करो, भौर (वि्वेदेवाः) है साम्राज्य

English

Free Lord, he rules the mighty fold of cattle, winning, aglow, even all the billowy waters. Thus hath Brihaddiva, the great Atharvan, spoken to Indra as himself in person.

अध्याय 5

श्लोक 3.6

दैवीः॑ षडुर्वीरु॒रु नः॑ कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह मा॑दयध्वम्।मा नो॑ विददभि॒भा मो अश॑स्ति॒र्मा नो विदद् वृजि॒ना द्वेष्या॒ या

daivīḥ ṣaḍurvīruru naḥ kṛṇota viśve devāsa iha mādayadhvam| mā no vidadabhibhā mo aśastirmā no vidad vṛjinā dveṣyā yā

हिन्दी अर्थ

आनन्दित रहो । (नः) हमें (अभिभाः) पराभव (मा विदत्) न प्राप्त हो, ओर न (विदत्) प्राप्त हौ (वृजिना) वजंनीया पापिन शत्रुसेना (या) जोकि (द्रष्य ) द्वेष करनेवाले शत्रु की है । सेना आक्रमण द्वारा न हमारा पराभव कर सकती है, न हमे पराभव-जन्य मयवेबेदभाष्य काण्ड ५। अनु० १। सूतक

English

Two sisters free from stain, the Mātarivans, with power impel him onward and exalt him. A prayer to Agni, Indra, and other deities for victory and prosperity

अध्याय 5

श्लोक 3.7

ति॒स्रो दे॑वी॒र्महि॑ नः॒ शर्म॑ यछत प्र॒जायै॑ नस्त॒न्वे॒३यच्च॑ पु॒ष्टम्।मा हा॑स्महि प्र॒जया॒ मा त॒नूभि॒र्मा र॑धाम द्विष॒ते सो॑म राजन्

tisro devīrmahi naḥ śarma yachata prajāyai nastanve3yacca puṣṭam| mā hāsmahi prajayā mā tanūbhirmā radhāma dviṣate soma rājan

हिन्दी अर्थ

निन्दा प्राप्त होती ओौर न णभरगेना हमारे राष्ट में निज पदापेणके ए साहस ही कर सकती है । ॥ (तिक्तः देवीः) है तीन देवियो ! (नः) हमे (महि शमं) महासुख करो। (मा) न (हास्महि) हम वजित हो जाएं (प्रजया) प्रजा द्वारा, (मा) (तनूभिः) निज तनुजं द्वारा, (सोमराजन्) है सोम-राजन् ! (मा) ओर क्षु अन्ननाम (निषं० २।७) । रीरिषः मानसिक हिसा अर्थात् दुःख +

English

Let strength be mine while I invoke thee, Agni! enkindling thee may we support our bodies. May the four regions bend and bow before me: with thee for guardian may we win the

अध्याय 5

श्लोक 3.8

उ॒रु॒व्यचा॑ नो महि॒षः शर्म॑ यछत्व॒स्मिन् हवे॑ पुरुहू॒तः पु॑रु॒क्षु।स नः॑ प्र॒जायै॑ हर्यश्व मृ॒डेन्द्र॒ मा नो॑ रीरिषो॒ मा परा॑ दाः

uruvyacā no mahiṣaḥ śarma yachatvasmin have puruhūtaḥ purukṣu| sa naḥ prajāyai haryaśva mṛḍendra mā no rīriṣo mā parā dāḥ

हिन्दी अर्थ

(द्विषते रधाम) हम शत्र के वशमेंहों। शमं सुखनाम (निघं ० ३।९) । तीन देवी हैँ इडा, सरस्वती, भारती । प्रतीत होता है कि सोम-राजाके शासनकालमें, सम्राट राज्य करनेसे अन्तरिक्षस्था मेघीयावाक् । भारती भरतः भरण-पीषण करनेवाले आदित्य कौ प्रभा। ये तीन देवी दहै दिग्यशक्तियां हँ जोकि महासुख देती

English

combat. Baffling the range of our opponents, Agni! guard us as our protector round about us.

अध्याय 5

श्लोक 3.9

धा॒ता वि॑धा॒ता भुव॑नस्य॒ यस्पति॑र्दे॒वः स॑वि॒ताभि॑मातिषा॒हः ।आ॒दि॒त्या रु॒द्रा अ॒श्विनो॒भा दे॒वाः पा॑न्तु यज॑मानं निरृ॒थात्

dhātā vidhātā bhuvanasya yaspatirdevaḥ savitābhimātiṣāhaḥ | ādityā rudrā aśvinobhā devāḥ pāntu yajamānaṃ nirṛthāt

हिन्दी अर्थ

हो जाएं । रधाम--रध्यतिवंशगमने (निरुवत १०।४।३६) । साम्राज्य में महासुख' कौ प्राप्ति हो जाने पर सोम-राजा' का शासन समाप्त हो गया । हमारे इस आह्वान पर, (पुरुहूतः) वहुसंख्यक प्रजाजनो द्वारा आहत हुमा वह तू (नः प्रजाये) हम प्रजाओं के लिए (मृड) सुख उत्पन्न कर, (नः) ह (मा) न (रीरिषः) दुःखी कर, अर्थात् (नः) हमारा (मा) न (परादाः) शत्रुओं के प्रति प्रदान कर, अथवा हमारा परित्याग न कर।

English

Down the steep slope go they who hate us, backward, and let their thought who watch at home be ruined.

अध्याय 5

श्लोक 3.10

ये नः॑ स॒पत्ना॒ अप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामह एनान्।आ॒दि॒त्या रु॒द्रा उ॑परि॒स्पृशो॑ न उ॒ग्रं चे॒त्तार॑मधिरा॒जम॑क्रत

ye naḥ sapatnā apa te bhavantvindrāgnibhyāmava bādhāmaha enān| ādityā rudrā uparispṛśo na ugraṃ cettāramadhirājamakrata

हिन्दी अर्थ

(पृतनाः) शवर सेनाओं ५४ ५ हम सैनिक-वगे जीते । भन्त् , स त में सैन्य शासन का वर्णन है । यद्यपि 8 म शासन अर्थात नागरिक शासन के अधिकारो पूववत् स्थिर रहते है, तो भी युद्ध- । (अरोचत्) कहा । (स्वसारौ) स्वयं सरण करनेवाली, (मातरिभ्वरी) अन्तरिक्षमाता मं सत्तावाली, (अरिप्रे) पापों से रहित (एने) ये “यौः-- पृथिवी," बृहहिवः तथा बृहद् -दिव परमेश्वर ये तीनों (हिन्वन्ति) (वधयन्ति) इसे बढ़ाते रहते हँ ।

English

I with my words impel thy weapons onward, and sharpen with my prayer thy vital vigour. Thou in that house, the highest or the lowest, which thy protec- tion guards, bestowest riches.

अध्याय 5

श्लोक 3.11

अ॒र्वाञ्च॒मिन्द्र॑म॒मुतो॑ हवामहे॒ यो गो॒जिद् ध॑न॒जिद॑श्व॒जिद् यः ।इ॒मं नो॑ य॒ज्ञं वि॑ह॒वे शृ॑णोत्व॒स्माक॑मभूर्हर्यश्व मे॒दी

arvāñcamindramamuto havāmahe yo gojid dhanajidaśvajid yaḥ | imaṃ no yajñaṃ vihave śṛṇotvasmākamabhūrharyaśva medī

हिन्दी अर्थ

(निरुक्त ७।७।२६) । अरिप्रे =दुलोक ओर पुथिवीलोक पाप-रहित है । इनमें पाप कौ सत्ता मनुष्य-कृत द । शवः बलनाम (निषं० २।९) १. यद्ध के लिए विशेष आह्वानो पर । व च रारीरवत जानकर इस प्रकार उसका परिषोषण करं भथंदरष्टा हए द । ये विकल्प केवल अनुसंघाना्थं दिये ह । १७४ अथवेवेदभाष्य काण्ड ५। भनु° १। सूक्त ३

English

Establish ye the ever-wandering mother, and bring full many deeds to their completion. 54

अध्याय 5

श्लोक 4.1

कुष्ठतक्मनाशनम्।१-१० भृग्वङ्गिराः।कुष्ठो, यक्ष्मनाशनम्।अनुष्टप्, ५ भुरिक्, ६ गायत्री, १० उष्णिग्गर्भा निचृत्।यो गि॒रिष्वजा॑यथा वी॒रुधां॒ बल॑वत्तमः ।कुष्ठेहि॑ तक्मनाशन त॒क्मानं॑ ना॒शय॑न्नि॒तः

kuṣṭhatakmanāśanam| 1-10 bhṛgvaṅgirāḥ| kuṣṭho, yakṣmanāśanam| anuṣṭap, 5 bhurik, 6 gāyatrī, 10 uṣṇiggarbhā nicṛt| yo giriṣvajāyathā vīrudhāṃ balavattamaḥ | kuṣṭhehi takmanāśana takmānaṃ nāśayannitaḥ

हिन्दी अर्थ

विरक्त दहो गया दहै, भौर प्रजाजन पूनः साम्राज्य के लिए उसका आलाने (धाता) धारण-पोषण करनेवाले अन्न का अधिष्ठाता, (विधाता) विधिविधान का अधिष्ठाता, (यः) भौर जो (भुवनस्य) समग्र पृथिवीका का (देवः) दिव्यगुणी अधिष्ठाता, (अभिमातिषाहः), अभिमानी राजाओं का पराभव करनेवाला, या उनके अभिमानो का दलन करनेवाला, अरिवनौ) अश्वो के दो अधिष्ठाता, (देवाः) ये सब देव (यजमानम्)

English

May all the Gods be on my side in battle, the Maruts led by Indra, Vishnu, Agni.

अध्याय 5

श्लोक 4.2

सु॒प॒र्ण॒सुव॑ने गि॒रौ जा॒तं हि॒मव॑त॒स्परि॑ ।धनै॑र॒भि श्रु॒त्वा य॑न्ति वि॒दुर्हि त॑क्म॒नाश॑नम्

suparṇasuvane girau jātaṃ himavataspari | dhanairabhi śrutvā yanti vidurhi takmanāśanam

हिन्दी अर्थ

(एनान् अव बाधामहे) इनके प्रति हम बाधां उपस्थित करते ह । (आदित्या १७८ अथर्ववेदमाष्य काण्ड ५। मनु० १। सूत्रत ४ (भक्रत्) कर दिया है । “अधिराज (अथवं० ६।९८।१-३) शत्रओों की (गोजित्) गौभों को जीता है, (धननित्) धनो को जीता है, (यः) जिसने (अरवजित् ) अश्वो को जीता है । (विहवे) इस विविध आह्वान

English

For me let them present all mine oblations, and let my mind’s intention be accomplished. May I be guiltless of the least transgression: may all the Gods come hither and protect me.

अध्याय 5

श्लोक 4.3

अ॒श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य चक्ष॑णं दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

aśvattho devasadanastṛtīyasyāmito divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

(वीरुधाम्) विरोहन करनेवाली या रोगों का विशेष निरोध करने- पवतो मे (अजायथाः) पैदा हा है, (तक्मनाशन) है कष्टप्रदज्वरकानाश का (नाशयन्) नाश करता हुभा तू (आ इहि) आ । १. भिकषेषरूप मे रोगो को रोकनेवाला, यवा मन्त्र (७,९,१०)।

English

May the Gods grant me riches, may the blessing and invocation of the Gods assist me. This boon shall the celestial Hotars win us: may we, unwound- ed, have brave heroes round

अध्याय 5

श्लोक 4.4

हि॒र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ पुष्पं॑ दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

hiraṇyayī nauracaraddhiraṇyabandhanā divi| tatrāmṛtasya puṣpaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

(भ्वादिः) । कुष्ठ कूठ या कूट । अथवा गिरिषु =मेधों के काल में (हिमवतः परि) हिमवान्! का परित्यागः कर या उससे परे, (सुपणंसुवने गिरौ) उत्तमपक्षोवाले कमलो के उत्पादक पवेत मेँ (जातम्) तक्म-ञ्वर का नाश करनेवाला है, (विदुः) यह वे जानते है । की रदिमियां (आष्टे) तथा सुपर्णाः सुपतना आदित्यरश्मयः" (निरत

English

us. Ye six divine Expanses, give us freedom. Here, all ye Gods, acquit yourselves like heroes.

अध्याय 5

श्लोक 4.5

हि॒र॒ण्ययाः॒ पन्था॑न आस॒न्नरि॑त्राणि हिर॒ण्यया॑ ।नावो॑ हिर॒ण्ययी॑रास॒न् याभिः॒ कुष्ठं॑ नि॒राव॑हन्

hiraṇyayāḥ panthāna āsannaritrāṇi hiraṇyayā | nāvo hiraṇyayīrāsan yābhiḥ kuṣṭhaṃ nirāvahan

हिन्दी अर्थ

अश्वत्थो देवसदं नस्तृतीय॑स्यामितो दिवि । (इतः) यहाँ से (तृतीयस्याम्) तीसरे (दिवि) द्युलोकं में, (देवसदनः) दिव् । चक्षणम् = कुष्ठौषध को देखना मानो दीं जीवन को देखना है । १. हिमवान् काः अभिप्राय हिमालयं पवेत नही, अपितु कोई भी पवत है जोकि हिमषान्

English

Let not calamity or curse o’ertake us, nor deeds of wickedness that merit hatred. Do ye three Goddesses give ample shelter and all success to us ourselves and children.

अध्याय 5

श्लोक 4.6

इ॒मं मे॑ कुष्ठ॒ पूरु॑षं॒ तमा व॑ह॒ तं निष्कु॑रु ।तमु॑ मे अग॒दं कृ॑धि

imaṃ me kuṣṭha pūruṣaṃ tamā vaha taṃ niṣkuru | tamu me agadaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

पद संश्चावाचक् नहीं (पजुः० २५।१२) । २. पश्त्याग कर या परे = दसीलिए कहा है कि “उदडः जातो हिमवतः'' (मन्त्र ष); पदा होना सूचित हौता है । हिमवतः परि हिमवन्तं परिवज्यं । १८० भयवेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु° १। सूक्त

English

Let us not lose our children or our bodies: let us not benefit the foe, King Soma! Foodful and much-invoked, at this our calling may the far- reaching Bull grant us wide

अध्याय 5

श्लोक 4.7

दे॒वेभ्यो॒ अधि॑ जा॒तोऽसि॒ सोम॑स्यासि॒ सखा॑ हि॒तः ।स प्रा॒णाय॑ व्या॒नाय॒ च॑क्षुषे मे अ॒स्मै मृ॑ड

devebhyo adhi jāto'si somasyāsi sakhā hitaḥ | sa prāṇāya vyānāya cakṣuṣe me asmai mṛḍa

हिन्दी अर्थ

अवन्वत वनु याचने (तनादिः) । यलोक मे भश्वत्थ के उदयकाल में कुष्टं (हिरण्ययी) हिरण्यमयी (नौः) नौका (अचरत्) चली है । (तत्र) उस काल युलोकस्थ नौका चमकते सितारोंका समूहं सूपदहै, अतः इसे हिरण्ययी कहा है । यथा “हिरण्यगभंः समवतेताग्रे” (यजुः० १३।४) में दयलोकस्थ नौका युलोक के महाकाशरूपी समुद्र मे चली है । यद्यपि युलोक मे नियत स्थान में नौका स्थितहैतो भी पृथिवी यतः निज धुरी पर परिचम से पुवंकी ओरवेगसे भ्रमण करतीहै, अतः हमें समग्र द्युलोकं पूवेसे ¦ पटिचम की ओर चलता दुष्टिगोचर होता दहै । “बन्धना दवारा रस्सी

English

shelter. Lord of bay coursers, Indra, bless our children: harm us not, give us not as prey to others.

अध्याय 5

श्लोक 4.8

उद॑ङ् जा॒तो हि॒मव॑तः॒ स प्रा॒च्यां नी॑यसे॒ जन॑म्।तत्र॑ कुष्ठ॑स्य॒ नामा॑न्युत्त॒मानि॒ वि भे॑जिरे

udaṅ jāto himavataḥ sa prācyāṃ nīyase janam| tatra kuṣṭhasya nāmānyuttamāni vi bhejire

हिन्दी अर्थ

अभिप्रेत रै। नौका को किनारे परर बधिनाभीहोतादहै, इस अभिप्राय को अपने सापेक्ष नियत स्थानोंमें बंधे रहते हैँ। जब पूवेदिशामेंनौकाका उदय हो, तब उस कालम, कुष्ठके खिले पुष्पको भी कुष्ठ कहादहै। ॥ सम्भवतः कुष्ठ ओर उसके पुष्पमे, दोनों मे, रोगों के निवारण कौ शक्ति , अधिक ओौर अल्परूप मे समान हो । अतः पुष्प" को कुष्ठ कहा है । नौका के (पन्थानः) चलने के मागे (हिरण्ययाः) हिरण्यमय मँ पुष्प का कालन नौकाकाकाल कहा, ओर कष्ठ-फल्ष का काल अषवत्य का । काल, अतः भौका का उदयकाल पुवंभावी दहै, ओर अश्वत्थ का उदयकाल

English

Lord of the world, Creator and Disposer, may the God Savitar who quells assailants, May the Ādityas, Rudras, both the Asvins, Gods, guard the sacrificer from destruction.

अध्याय 5

श्लोक 4.9

उ॒त्त॒मो नाम॑ कुष्ठस्युत्त॒मो नाम॑ ते पि॒ता।यक्ष्मं॑ च॒ सर्वं॑ ना॒शय॑ त॒क्मानं॑ चार॒सं कृ॑धि

uttamo nāma kuṣṭhasyuttamo nāma te pitā| yakṣmaṃ ca sarvaṃ nāśaya takmānaṃ cārasaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

नौका का चित्र दक्षि गोलाद्धं के ऊपर नं° ११०सेनं० श४८०केमध्यमे दर्शाया है ओर नौका कौ पीठ पर अणव यानमण्डल छपा है । । ००5 (हिरण्यया == हिरण्यानि) हिरण्य के सदुश चमकीलेये) (नावः) । नौकां (हिरण्ययीः) हिरण्य के सदृ चमकीली (आसन्) थीं, (याभिः) नावः मे बहुवचन नौकास्थ ताराभों के बहुत्व के कारण हआ है ।

English

Let those who are our foemen stay afar from us: with Indra and with Agni we will drive them off.

अध्याय 5

श्लोक 4.10

शी॒र्षा॒म॒यमु॑पह॒त्याम॒क्ष्योस्त॒न्वो॒३रपः॑ ।कुष्ठ॒स्तत् सर्वं॒ निष्क॑र॒द् दैवं॑ समह॒ वृष्ण्य॑म्

śīrṣāmayamupahatyāmakṣyostanvo3rapaḥ | kuṣṭhastat sarvaṃ niṣkarad daivaṃ samaha vṛṣṇyam

हिन्दी अर्थ

मक्षिताम्” (शां० श्रौ ° ।२८।३), अ्थत् धाता, “कर” देनेवाले भूमिपति का अधिष्ठाता, सम्भवतः द्वितीय अथं अभिप्रेतदहै, तभी उसेदेव कहादहै अभिमातिषाहः =सास्राज्य का प्रधान सेनापति, बृहती सेना का अधिपति (यज्ः० १७।४०) । अरिवना, उभा अश्वो के दो अधिष्ठाता, एक रथ- ये) जो (नः) हमारे (सपत्नाः) शत्रू हैँ (ते) वे (अप भवन्तु) दूर

English

Mine be the middle air’s extended region, and may the Wind blow favouring these my wishes.

अध्याय 5

श्लोक 5.1

लाक्षा १-९ अथर्वा।लाक्षा।अनुष्टुप्।रात्री॑ मा॒ता नभः॑ पि॒तार्य॒मा ते॑ पिताम॒हः ।सि॒ला॒ची नाम॒ वा अ॑सि॒ सा दे॒वाना॑मसि॒ स्वसा॑

lākṣā 1-9 atharvā| lākṣā| anuṣṭup| rātrī mātā nabhaḥ pitāryamā te pitāmahaḥ | silācī nāma vā asi sā devānāmasi svasā

हिन्दी अर्थ

¦ कारण में कायं का उपचार हुभा है । (कुष्ठ) है कूठ-गीषध ! (मे) मेरे (इमम्, पूरुषम्) इस पुरूष को, रोगरहित कर (तम्) उस (मे) मेरे पुरुष को (उ) निश्चय से (अगदम् कृधि) रोगरहित्त कर । आवह --अर्थात् रोगीको तू शवित प्रदान करः ताकि वह रोग-

English

The Ādityas and the Rudras, over us on high, have made me strong, a thinker, and a sovran lord.

अध्याय 5

श्लोक 5.2

यस्त्वा॒ पिब॑ति॒ जीव॑ति॒ त्राय॑से॒ पुरु॑षं॒ त्वम्।भ॒र्त्री हि शश्व॑ता॒मसि॒ जना॑नां च॒ न्यञ्च॑नी

yastvā pibati jīvati trāyase puruṣaṃ tvam| bhartrī hi śaśvatāmasi janānāṃ ca nyañcanī

हिन्दी अर्थ

देवेभ्यो श्रथ जातोसि सोम॑स्यासि सखां हित; । (देतेभ्यः अधि) दिव्यशक्तियों से (जातः असि) है कूठ-मौषध । तू पैदा हजा है, (सोमस्य) सोम-मौषध का (सखा असि) तु सखा है, (हितः) रोगीकातु दित करनेवाला है) (सः) वह तु (म) मेरे (जस्म ) इस रोगी चक्षु आदि इन्द्रियों के लिए (मृड) सुखदायक हौ । सखा = सोम-भौषधका तू सखा है, मित्र है । मित्र अपने मित्र का सहायक होता है। इस द्वारा सूचित कियादहै कि रोगनिवारण मे सोम-आीषध तेरा सहायक होगा, अर्थात् कूठ-मौषध के साथ-साथ सोम-भौषध काभीसेवन

English

Yea, we call Indra hitherward, the winner of wealth in battle and of kine and horses. May he mark this our worship when we call him, Lord of bay steeds, thou art our friend and

अध्याय 5

श्लोक 5.3

वृ॒क्षंवृ॑क्ष॒मा रो॑हसि वृष॒ण्यन्ती॑व क॒न्यला॑ ।जय॑न्ती प्रत्या॒तिष्ठ॑न्ती॒ स्पर॑णी॒ नाम॒ वा अ॑सि

vṛkṣaṃvṛkṣamā rohasi vṛṣaṇyantīva kanyalā | jayantī pratyātiṣṭhantī sparaṇī nāma vā asi

हिन्दी अर्थ

उद॑ङ् जातो हिमवतः स प्राच्यां नीयसे जन॑म् । १८२ अपर्ववेद भाष्य काण्ड ५। अनु० १। सूक्त ४ जनपद के प्रति (नीयसे) ले-जाया जाता है, या उस जनता या जनपद मेँ, धनिक (मन्व २) पसर में विभक्त कर लेते हँ अथवा विभेजिरे ,,

English

comrade. A charm against fever and other ailments

अध्याय 5

श्लोक 5.4

यद् द॒ण्डेन॒ यदिष्वा॒ यद् वारु॒र्हर॑सा कृ॒तम्।तस्य॒ त्वम॑सि॒ निष्कृ॑तिः॒ सेमं निष्कृ॑धि॒ पूरु॑षम्

yad daṇḍena yadiṣvā yad vārurharasā kṛtam| tasya tvamasi niṣkṛtiḥ semaṃ niṣkṛdhi pūruṣam

हिन्दी अर्थ

तना हुमा है, फला हुआ है । उत् तनु (विस्तारे +मा, अथवा "उत् + पृथिवी से तीसरे लोक दिव् में अरवत्य का स्वरूप विचारणीय है। को अर्व भी कहा है। यथा “एकोऽमश्वो वहति सप्तनामा” (ऋ० १।१९४।२) । तथा “एको अरवो वहति सप्तनामादित्यः'' (निरुक्त

English

Thou who wast born on mountains, thou most mighty of all plants that grow. Thou Banisher of Fever, come, Kushtha! make Fever pass away.

अध्याय 5

श्लोक 5.5

भ॒द्रात् प्ल॒क्षान्निस्ति॑ष्ठस्यश्व॒त्थात् ख॑दि॒राद्ध॒वात्।भ॒द्रान्न्य॒ग्रोधा॑त् प॒र्णात् सा न॒ एह्य॑रुन्धति

bhadrāt plakṣānnistiṣṭhasyaśvatthāt khadirāddhavāt| bhadrānnyagrodhāt parṇāt sā na ehyarundhati

हिन्दी अर्थ

है, स्थान का परिवतत॑न नहीं करता, स्थिररूप में एक स्थान मेँ स्थित रहता कहा है (तैत्ति° उपनिषद्, अनुवाक १०) । रेरिवा = रि गतौ (तुदादिः) --गततिदायक अर्थात् संचालक, मँ परमेर्वर । भावी कहा है, यतः यह पुष्प है, ओर जादित्य का उदयकाल पञ्चाद् भावी, यतः यह फलखूप है । यह उस ऋतुमे ही सम्भव दहै जबकि पूवेदिशामें परिस्थिति पृथिवी की सौर-परिक्रमा तथा निज धुरी पर परिध्रमणद्वारा होती हि। नौकाका दर्शन रात्रिकालमें होताहै, दिनके प्रकाश में वह्

English

Brought from the Snowy Mountain, born on the high hill where eagles breed, 55

अध्याय 5

श्लोक 5.6

हिर॑ण्यवर्णे॒ सुभ॑गे॒ सूर्य॑वर्णे॒ वपु॑ष्टमे ।रु॒तं ग॑छासि निष्कृते॒ निष्कृ॑ति॒र्नाम॒ वा अ॑सि

hiraṇyavarṇe subhage sūryavarṇe vapuṣṭame | rutaṃ gachāsi niṣkṛte niṣkṛtirnāma vā asi

हिन्दी अर्थ

सिलाची नाम वा असिसा देवानामसि स्वसा ॥२॥ (रात्री) राव्रीहै तेरी (माता) माता, (नभः) मेघ दहै (पिता) (अर्यमा) सूयं है (ते) तेरा (पितामहः) पिता का पिता । (वं) निदचय से १८४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। भनु० १ सक्त ५ (नाम) प्रसिद्ध (सिलाची) सिलाची (असि) तु है, (सा) वह त् (देवानाम्) देवों की (स्वसा) बहिन है। .

English

Men seek to buy thee when they hear: for Fever’s Banisher they know. In the third heaven above us stands the Asvattha tree, the seat of Gods.

अध्याय 5

श्लोक 5.7

हिर॑ण्यवर्णे॒ सुभ॑गे॒ शुष्मे॒ लोम॑शवक्षने ।अ॒पाम॑सि॒ स्वसा॒ लाक्षे॒ वातो॑ हा॒त्मा ब॑भूव ते

hiraṇyavarṇe subhage śuṣme lomaśavakṣane | apāmasi svasā lākṣe vāto hātmā babhūva te

हिन्दी अर्थ

होते ह नभस् से, मेघ से । यतः नभस् से अपः उदक भी पैदा हुए, ओर हो जाता है, भतः इस अन्धकारमय कालको रात्री कहाहै। यह काल हारा दर्शाया है । नभस् सेदो षैदा हुए उदक ओौर लाक्षा, अतःयेदो भाई वह केवल छन्दः पूति" के लिए है, अपाम् दवारा अभिप्रेत है “देवानाम्”

English

There the Gods sought the Kushtha Plant, embodiment of end- less life. There moved through heaven a golden ship, a ship with cordage wrought of Gold.

अध्याय 5

श्लोक 5.8

सि॒ला॒ची नाम॑ कानी॒नोऽज॑बभ्रु पि॒ता तव॑ ।अश्वो॑ य॒मस्य॒ यः श्या॒वस्तस्य॑ हा॒स्नास्यु॑क्षि॒ता

silācī nāma kānīno'jababhru pitā tava | aśvo yamasya yaḥ śyāvastasya hāsnāsyukṣitā

हिन्दी अर्थ

अर्थात् नभस् (मेघ) का भी पिता । यस्त्वा पिव॑ति जीवति जाय॑से पुरषं त्वम् । (यः) नौ (त्वा पिवति) तुक्षे पीता! है (जीवति) जीवित होताहै, गती याचने च (स्वादिः), अथवा नितरां तेरीर्माग होती रहती है । शश्वत् वहूनाम (निघं० ३।१) ।

English

There the Gods won the Kushtha Plant, the blossom of eternal life. They sailed on pathways paved with gold, the oars they piled were wrought of gold:

अध्याय 5

श्लोक 5.9

अश्व॑स्या॒स्नः संप॑तिता॒ सा वृ॒क्षां अ॒भि सि॑ष्यदे ।स॒रा प॑त॒त्रिणी॑ भू॒त्वा सा न॒ एह्य॑रुन्धति

aśvasyāsnaḥ saṃpatitā sā vṛkṣāṃ abhi siṣyade | sarā patatriṇī bhūtvā sā na ehyarundhati

हिन्दी अर्थ

(क्वाय निष्पाके, म्वादिः) । फाण्टं को घावों मे पिलाने का विधान हुआ है । ¦ करती है, (इव) जैसे (वृषण्यन्ती ) पति को चाहती हृद (कन्यला) कमनीया घावों की प्रतिकूलता मे स्थित हुई, (स्परणी) सेवा करनेवाली (नाम वं असि) प्रसिद्धत् है। यत॒वा)याजो (हरसा) अग्निकी ज्वाला द्वारा (अरुः) घाव (कृतम्

English

All golden were the ships wherein they carried Kushtha down to earth. O Kushtha, bring thou hitherward this man of mine, restore his health,

अध्याय 5

श्लोक 6.1

ब्रह्मविद्या।१-१४ अथर्वा।सोमरुद्रौ।१ ब्रह्म, २ कर्माणि, ३-४ रुद्रगणाः, ५-८ सोमारुद्रौ, ९ हेतिः, १०-१४ सर्वात्मा रुद्रः।त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्, ३ जगती, ४ अनुष्टुबुष्णिक्-त्रिष्टुब्गर्भा पञ्चपदा जगती, ५-७ त्रिपदा विराण्नाम गायत्री, ८ एकावसाना द्विपदार्च्यनुष्टुप्, १० प्रस्तारपङ्क्तिः, ११-१३ पङ्क्तिः, १४ स्वराट्-पङ्क्तिः।ब्रह्म॑ जज्ञा॒नं प्र॑थ॒मं पु॒रस्ता॒द् वि सी॑म॒तः सु॒रुचो॑ वे॒न आ॑वः ।स बु॒ध्न्याऽ उप॒मा अ॑स्य वि॒ष्ठाः स॒तश्च॒ योनि॒मस॑तश्च॒ वि वः॑

brahmavidyā| 1-14 atharvā| somarudrau| 1 brahma, 2 karmāṇi, 3-4 rudragaṇāḥ, 5-8 somārudrau, 9 hetiḥ, 10-14 sarvātmā rudraḥ| triṣṭup, 2 anuṣṭup, 3 jagatī, 4 anuṣṭubuṣṇik-triṣṭubgarbhā pañcapadā jagatī, 5-7 tripadā virāṇnāma gāyatrī, 8 ekāvasānā dvipadārcyanuṣṭup, 10 prastārapaṅktiḥ, 11-13 paṅktiḥ, 14 svarāṭ-paṅktiḥ| brahma jajñānaṃ prathamaṃ purastād vi sīmataḥ suruco vena āvaḥ | sa budhnyā' upamā asya viṣṭhāḥ sataśca yonimasataśca vi vaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेवाली (असि) है, (सा) वहत् (इमम्, पूरुषम्) इस पुरुष को निष्कृधि) ठीक कर दे। व हरः ज्वलतो नाम (निषं० १।१७) । अरः = घाव । यही अभिप्राय “अरन्घति"' पद में है (मन्त्र ५) 1 त् (अरुन्धति) है घावों को ठीक करनेवाली लाक्षा ! (नः) हमे (एहि) ४ ), नकिं लता के सदुक्ष वृक्षं पर चट्ना । म है। यथा “मारोहेममबदमानमर्मेव त्वं स्थिर भव। अभि तिष्ठ

English

Yes, free him from disease for me. Thou art descended from thee Gods, Soma’s benignant friend art thou,

अध्याय 5

श्लोक 6.2

अना॑प्ता॒ ये वः॑ प्रथ॒मा यानि॒ कर्मा॑णि चक्रि॒रे।वी॒रान् नो॒ अत्र मा द॑भ॒न् तद् व॑ ए॒तत् पु॒रो द॑धे

anāptā ye vaḥ prathamā yāni karmāṇi cakrire| vīrān no atra mā dabhan tad va etat puro dadhe

हिन्दी अर्थ

सरतीति। सरा उदकषारा, वर्षा, मेषसे 1 है, उदकघारा वृक्षों मे पदहुचकर लाक्षारूप 1है। सूक्तमें अतिगृढ रन्दो मे लाक्नाकां (मन्त्र १०), ताकि यह पापवृत्रौं का दहन करे । वृत्र पापरूप ९ माष (३ ) मन्त्र मे त्रयोदश मासका कथन हभारहै, जिसका निर्माण परमेश्वर द्वारा होता है) ए (४) सोमारुद्रौ हैँ मनःसंयम ओर प्राणायाम (मनं ५)। ये पाप नष्ट करते मौर “अमृत"' प्रदान करतेदं। , " (५) (मन्व १०) मेँ पाप-वृत्र का “धुरुषविध रूपेण वर्णन हुमा है ५ परमेदवर मे प्रवेश का कथन हुजा है ।

English

Whoever drinketh thee hath life: thou savest and protectest man. As nursing mother of mankind, thou takest all upon thy lap.

अध्याय 5

श्लोक 6.3

स॒हस्र॑धार ए॒व ते सम॑स्वरन् दि॒वो नाके॒ मधु॑जिह्वा अस॒श्चतः॑ ।तस्य॒ स्पशो॒ न नि मि॑षन्ति॒ भूर्ण॑यः प॒देप॑दे पा॒शिनः॑ सन्ति॒ सेत॑वे

sahasradhāra eva te samasvaran divo nāke madhujihvā asaścataḥ | tasya spaśo na ni miṣanti bhūrṇayaḥ padepade pāśinaḥ santi setave

हिन्दी अर्थ

गायत्री; ठ एकावसाना दिपदाच्येनष्टप; 7 अर्थात् चुलोक मे (सुरुचः) उत्तमरूप मे रोचमान 4 ८ ९्शूल जगत् को, (च) ओौर (असतः) सृक्ष्मजगत् की ५५ ५ ध. प प्रकृति को (विवः ) विवृत किया, उत्पत्तिसमथं कर भण द्वारा कहाहै (एत० उप० खं ३) । ध अकिप्राय है निरीक्षण करना, आलोचित करना किरम सष्टिरचं र

English

Thou clingest close to every tree, as a fond damsel clasps her love. Thy name is called The Conqueror, She who Stands Fast, The

अध्याय 5

श्लोक 6.4

पर्यू॒ षु प्र ध॑न्वा॒ वाज॑सातये॒ परि॑ वृ॒त्राणि॑ स॒क्षणिः॑ ।द्वि॒षस्तदध्य॑र्ण॒वेने॑यसे सनिस्र॒सो नामा॑सि त्रयोद॒शो मास॒ इन्द्र॑स्य गृ॒हः

paryū ṣu pra dhanvā vājasātaye pari vṛtrāṇi sakṣaṇiḥ | dviṣastadadhyarṇaveneyase sanisraso nāmāsi trayodaśo māsa indrasya gṛhaḥ

हिन्दी अर्थ

५ प अकाशमाय हँ वैसे वेन-ब्रह्म भी प्रकाशमान है। यथा! त र (वः) तुम्हारे, (अनाप्ता; ) जिनसे बदृकर कोई आप्त नहीं, (ये प्रथमाः) जोकि प्रथमकोटि के पुरुष है, (यानि कर्माणि) वे जिन कर्मों को (चक्रिरे) करते रहे है, (तत्) उस कमंसमूह को (एतत्) इस प्रयोजन को लक्षय कर (वः) तुम्हारे (पुरः) सामने (दधे) मै रखता हूं, ताकि (भत्र) दष्क (मा) न (दभन्) हसित करं । ये अनाप्त हँ वेदाविर्भाव करनेवाले अग्नि, वायु, आदित्य,

English

Rescuer. Whatever wound the arrow, or the staff, or violence inflicts,

अध्याय 5

श्लोक 6.5

न्वे॒३तेना॑रात्सीरसौ॑ स्वाहा॑ ।ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒शेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः

nve3tenārātsīrasau svāhā | tigmāyudhau tigmahetī suśevau somārudrāviha su mṛḍataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

तस्य स्पशो न निमिषन्ति भूणैयः पदेप॑दे पाशिनं; सन्ति सेतवे ॥३॥ (सहस्रधारे) हजारों का धारण करनेवाले, (दिवः) योतमान ब्रह्म के (नाके) सांसारिक सुखदुःख रहित आनन्दस्वरूप मे (एव) ही रहनेवाले, निमिषन्ति) निमेष तक नहीं करते, ओर (पदे पदे) पग-पग पर, (पाणिनः) फन्दोवाले होकर (सेतवे, सन्ति) बाधने के लिए विद्यमान माने (निरुक्त ५।२।२) अथवा सचति गतिकर्मा(निघं० २।१४), अतः म + सचति" = विगतकर्मा, रागद्वेष से विगत, अनाप्त पुरुष । भूणेयः; “भुरण्यति, पुरुष सावधान करते हैँ कि दष्कर्मो के करनेवालों को बरधने कै लिए ब्रह्म

English

Thereof thou art the remedy: as such restore this man to health. Thou springest from blest Plaxa, or Asvattha, Dhava, Khadira,

अध्याय 5

श्लोक 6.6

अवै॒तेना॑रात्सीरसौ॒ स्वाहा॑ ।ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒शेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः

avaitenārātsīrasau svāhā | tigmāyudhau tigmahetī suśevau somārudrāviha su mṛḍataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

दिषस्तदध्य॑र्णवेनैयसे सनिखसो नामासि त् गति कर (वाजसातये) बल की प्राप्ति के लिए, अथवा वृत्रो के साथ संग्रामके लिएु। तू (परि) सब ओर विद्यमान (वृत्राणि) वृद्धिपर आवरण डालनेवाले आसुर भावों तथा आसुरं कर्मो का (सक्षणिः) विनाश १६९२ अथवंवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० २। सूक्त द । होता है । (सनिखसः) अधःपात करनेवाला (नाम असि) प्रसिद्धत् है। ।

English

Parna, or blest Nyagrodha, so come thou to use, Arundhatī! Gold-coloured, bringing happy fate, most lovely, brilliant as the

अध्याय 5

श्लोक 6.7

अपै॒तेना॑रात्सीरसौ॒ स्वाहा॑ ।ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒शेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः

apaitenārātsīrasau svāhā | tigmāyudhau tigmahetī suśevau somārudrāviha su mṛḍataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

है, वृत्रो के नाश के लिए मन्त्र ४ । अथवा सोमन्=वीयं (अथवं० १४।१।१-५); रुद्रत=प्राण । इन दोनों का संयम । शेव इति सुखनाम । 1 । तिमयुषो तिममैती था जिसका कथन भी नहीं करना चाहिए एसे पापसे (अस्मान्) हमें १. सोम-मौर-सुद्र (इह) इस जीवन में (नः) हमे (सुमृडतम्) उत्तम प्रकारसे , यथा “कथापि खलु पापानामलमश्रेयसे यतः ।'“ १

English

Sun, Mayst thou, O Healing! come unto the fracture: Healing is thy name.

अध्याय 5

श्लोक 6.8

मु॒मु॒क्तम॒स्मान् दु॑रि॒ताद॑व॒द्याज्जु॒षेथां य॒ज्ञम॒मृत॑म॒स्मासु॑ धत्तम्

mumuktamasmān duritādavadyājjuṣethāṃ yajñamamṛtamasmāsu dhattam

हिन्दी अर्थ

(मेन्याः) पाप-वृत्रसम्बन्धी घातक वच का ( मेनिः) घातक वज (असि) है। के संयम द्वारा जीवन में सुख प्राप्त होता है, तभीहइनदो को “सुशेवौ कहा है । शेवम् सुखनाम (निषं° ३।६) । ये दोनों तिग्मायुधौ तथा तिग्महेती १६४ अधवरवेदभाष्य काण्ड ५। अनु° २। सूक्त ६ (ते) वे पाप-वृध्र (अमेनयः) घातक वजँ से रहित (सन्तु) हो जा, (ये)

English

Gold-coloured, bringing happy fate, odorous, hairy-bodied one, The sister of the Waters art thou, Lākshā! and thy soul is Wind.

अध्याय 5

श्लोक 6.9

चक्षु॑षो हेते॒ मन॑सो हेते॒ ब्रह्म॑णो हेते॒ तप॑सश्च हेते ।मे॒न्या मे॒निर॑स्यमे॒नय॒स्ते स॑न्तु॒ ये॒३स्माँ अ॑भ्यघा॒यन्ति॑

cakṣuṣo hete manaso hete brahmaṇo hete tapasaśca hete | menyā menirasyamenayaste santu ye3smā~ abhyaghāyanti

हिन्दी अर्थ

हेतिरूप कहा है, ओर घातक वरूप भी । व्रिना ब्राह्मी सहायता के पाप- मननशक्ति ओर तपोमय जीवनके विघातक है । पाप-वृत्र जीवननिष्ठ , अस्त्र ओर मेनिरूप होकर विनष्ट करती है । । मेनिः वजनाम (निघं० २।२०) । यह मेनि-व, घातक है “मीन् वृत्रो का सूचकः है, यथा 'पापवुत्र है काम, क्रोध, लोभ, मोह'' मादि ।

English

Silāchi is thy name: thy sire, O goat-brown! is a damsel’s son. Thou hast been sprinkled by the mouth of Yama’s tawny- coloured horse.

अध्याय 5

श्लोक 6.10

यो॒३ऽस्मांश्चक्षु॑षा॒ मन॑सा॒ चित्त्याकू॑त्या च॒ यो अ॑घा॒युर॑भि॒दासा॑त्।त्वं तान॑ग्ने मे॒न्यामे॒नीन् कृ॑णु॒ स्वाहा॑

yo3'smāṃścakṣuṣā manasā cittyākūtyā ca yo aghāyurabhidāsāt| tvaṃ tānagne menyāmenīn kṛṇu svāhā

हिन्दी अर्थ

अरूषि धयति पिबतीति (धेट् पाने, म्वादिः) । लाक्षाःके लिए देखौ (अथर्वं० रुतं गच्छासि निष्कृते निष्करतिर्नाम वा असि ॥६॥ (हिरण्यवर्णे) है सुवणं के वर्णवाली ! प ण्यव , (सुभगे) है सुन्दर रूपैशव्य॑- ( + है सूर्यं के सदुश वणंवाली ! (वपुष्टमे) है अत्यन्त ५ 8 (निष्कृते) है कण्ट दूर करनेवाली लाक्षा (रुतम्) रुलाने- ( ) रुलानेवाले घाव को दुर करनेवाली (असि) तुहै। । "लाक्षा लाल वण॑वाली होती है, जैसाकि सूर्यं उदय भौर अ मे द होता है । रुतम् = रु शब्दे (अदादिः), अभिप्रेत ॥-काष

English

Befriend my breath and vital air be gracious unto this mine eye. Sprung, northward, from the Snowy Hill thou art conveyed to eastern men.

अध्याय 5

श्लोक 6.11

इन्द्र॑स्य गृ॒होऽसि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्र वि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya gṛho'si | taṃ tvā pra padye taṃ tvā pra viśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

(हिरण्यवर्णे है सुवणं के सदृश वणेवाली ! (सुभगे; सुन्दर रूपैरवयं वाली ! (शुष्मे) है बलशालिनी ! (लोमशवक्षणे / ह न वाली (लाक्षे) लाख ! त्रु (अपाम्) उदकं की (स्वसा) बहिन (असि) है (ह) निचय से (वातः) वायु (ते) तेरी (भात्मा) आत्मा (वभूव) हुई है । षः शुष्मम् बलनाम (निघं० २।६) । लाक्षा बलशालिनी है वाली । लोम होते है प्राणियौंके शरीर पर, इसलिए लोमश का अथं भेड शारीरिक रक्तनाडियों को भी नदिर्यां कहा है । इसीलिए हदय को “सिन्धू” मौर रवत को “आपः'' कहा है (मथवं ० १०।२।११), देखो अथवंतेदभाष्य । धाव शरीर ओर शारीरिक नस-नाडियोंमे होते हः जिसकी ओषधि है व, (मन्त ४) । इसलिए लाक्षा है “लोमशवक्षणा” । “अपां स्वसा वृक्षों का अङ्कुरित होना, बढना ओर फूलना-फलना वायुमण्डल पर् निभेर

English

There they deal out among themselves Kushtha’s most noble qualities. Most excellent, indeed, art thou, Kushtha! most noble is thy sire.

अध्याय 5

श्लोक 6.12

इन्द्र॑स्य॒ शर्मा॑सि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्र वि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya śarmāsi |taṃ tvā pra padye taṃ tvā pra viśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

सिलाची नाम॑ कानीनोऽज॑वभ्रु पिता तवं । से उत्पन्न, (अजबभ्रु) गतिमान् मौर भधरण-पोषण करनेवाला मेघ हे लाक्षा ! (तव पिता) तेरा पिता है यतः पितामह है अमा, आदित्य निश्चय से है लाक्षा ! (उक्षिता) सींची गई (असि) तूरहै। कर्द शाखाग्रन्थों मे सिलाची' के स्थान में घृताचीः पाठहै।, "एकोऽमरवो वहति सप्तनामा" (ऋ ० १।१६४।२ ), तथा “एको अश्वो वहति

English

Make all Consumption pass away and render Fever powerless. Malady that affects the head, eye-weakness, bodily defect—

अध्याय 5

श्लोक 6.13

इन्द्र॑स्य॒ वर्मा॑सि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्रवि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya varmāsi |taṃ tvā pra padye taṃ tvā praviśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

मादित्य गतिशील है, पूर्वं से पस्विम की ओर गति करता प्रतीत होतादहै। उसका मुख है मेध । मुख से मूखरस अर्थात् मूखजल पैदा होता दहै, इसी प्रकार मेघ से वर्षाजल प्राप्त होता है, इसलिए मेघ को मुख कहा है । यह मेघ सूयं -सम्बन्धी है, सूर्यं का मानो जवयवसरूप है, मुखरूप है ! इस मुखरस धारा को प्राप्त कर उत्पन्न होती है। १८८ अथरवैवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० १। सूक्त ५

English

All this let Kushtha heal and cure: aye, godlike is the vigorous power. A charm to mend a broken bone

अध्याय 5

श्लोक 6.14

इन्द्र॑स्य॒ वरू॑थमसि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्रवि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya varūthamasi | taṃ tvā pra padye taṃ tvā praviśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

उड़करतु आ्ईदहै, (सा) वहत् स्यन्दित हुई है, प्रवाहित हुई है ( (पतत्रिणी भूत्वा) पक्षिणी होकर (वृक्षाम् अभि सिष्यदे) वृक्षौ की ओर (सा) वह् (अरुन्धति) है घावों कोपी प्रवाहित हई । उदकषारा को लाक्षा कहा हौ जाती है, कायं मे कारणोपचार हुमा

English

Aryaman is thy grandsire, Night thy mother, and the Cloud thy sire. Thy name is called Silāchi. Thou, thyself, art sister of the Gods.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।