Atharva Veda
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अध्याय 5 / 20

Kanda 5

काण्ड 5

376 श्लोकभाग 3/6 · श्लोक 14.1–18.15

पूर्ण अध्याय पाठ68 श्लोक

अध्याय 5

श्लोक 14.1

कृत्यापरिहरणम्।१-१३ शुक्रः।वनस्पतिः, कृत्यापरिहरणम्।अनुष्टुप्, ३,५,१२ भुरिक्, ८ त्रिपदा विराट्, १० निचृद्बृहती, ११ त्रिपदा साम्नी त्रिष्टुप्, १३ स्वराट्।¬ सु॒प॒र्णस्त्वान्व॑विन्दत् सूक॒रस्त्वा॑खन्न॒सा।दिप्सौ॑षधे॒ त्वं दिप्स॑न्त॒मव॑ कृत्या॒कृतं॑ जहि

kṛtyāpariharaṇam| 1-13 śukraḥ| vanaspatiḥ, kṛtyāpariharaṇam| anuṣṭup, 3,5,12 bhurik, 8 tripadā virāṭ, 10 nicṛdbṛhatī, 11 tripadā sāmnī triṣṭup, 13 svarāṭ|¬ suparṇastvānvavindat sūkarastvākhannasā| dipsauṣadhe tvaṃ dipsantamava kṛtyākṛtaṃ jahi

हिन्दी अर्थ

(यातुधानान् ) यातना के निधिरूप पुरुषों का (अव जहि) हनन कर, (कृत्याकृतम्) सेन्यसंग्रह करनेवाले राजा का (अव जहि) हनन कर । (अधो) , पहुचाना चाहता है (जोषधे) हि ओषधि ! (तम्, उ) उसेही (त्म्)त्ू. (जहि) मार, उसकाहीतु हनन कर। मन्त्र मे ओषधिप्रयोग द्वारा दुःख- । दायक व्यक्तियोंके ही हनन का निदंश किया दहै, सेन्ययुद्ध में सेनिकोंके ॥ छाल से (परीशासम्) गोल छाल-खण्ड को (परिकृत्य) काटकर ओर उसे (देवाः) है विजय चाहनेवाले सेन्यनायको ! तुम (कृत्याकृते) मेनासंप्रह करनेवाले के लिए उसकी ग्रीवा में (प्रति मुञ्चत) पहनाओ ।

English

Attend in every place where men inhabit, with all thy powers, the hymn that tells my praises. Let hymns of praise ascend to thee, uplifted in every place of human habitation.

अध्याय 5

श्लोक 14.2

अव॑ जहि यातु॒धाना॒नव॑ कृत्या॒कृतं॑ जहि ।अथो॒ योअ॒स्मान् दिप्स॑ति॒ तमु॒ त्वं ज॑ह्योषधे

ava jahi yātudhānānava kṛtyākṛtaṃ jahi | atho yoasmān dipsati tamu tvaṃ jahyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

(पृतनाषाट् ) सेनाञओं का पराभव करनेवाले (अग्ने) है अग्रणी प्रधान- कर्ता शत्रु राजाके लिए, (प्रतिहरणेन) वापस हटाने की विधि द्वारा, (पुनः) फिर (हरामसि) हम सेनाध्यक्ष वापस कर हैतेरहै। पराभव करे । तदनन्तर अवशिष्ट सेनाका वधन कर, उसे मानपूवेक, णतननू- .

English

An Apri or propitiatory hymn 59

अध्याय 5

श्लोक 14.3

रिश्य॑स्येव परीशा॒सं प॑रि॒कृत्य॒ परि॑ त्व॒चः ।कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ देवा नि॒ष्कमि॑व॒ प्रति॑ मुञ्चत

riśyasyeva parīśāsaṃ parikṛtya pari tvacaḥ | kṛtyāṃ kṛtyākṛte devā niṣkamiva prati muñcata

हिन्दी अर्थ

अथरव॑वेदमाष्य काण्ड ५) अनु० ३1 सूक्तं १४ कृत॑स्यधनि विध्य तं यश्चकार तमिज्नहि । हमारी सेना ! (तम्, विध्य) उसेतू बीध (यः) जिसने किं सेना को (चकार) निमित या संगृहीत किया है, (तम्, इत्) उसका ही (जहि) तू हनन कर। (अचक्रुषे वधाय) जिसने विरोधौ सेना का निर्माण नहीं किया उसके वध मप्तर में दो सेनाओं का वणेन हमा है । एक है कृतव्यधनी । यह् तो

English

Thou in the house of man this day enkindled worshippest Gods as God, O Jātavedas. Observant, bright as Mitra, bring them hither. Thou art a sapient and foreknowing envoy.

अध्याय 5

श्लोक 14.4

पुनः॑ कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ हस्त॒गृह्य॒ परा॑ णय ।स॒म॒क्षम॑स्मा॒ आ धे॑हि॒ यथा॑ कृत्या॒कृतं॒ हन॑त्

punaḥ kṛtyāṃ kṛtyākṛte hastagṛhya parā ṇaya | samakṣamasmā ā dhehi yathā kṛtyākṛtaṃ hanat

हिन्दी अर्थ

ने शत्रूसेना का निर्माण कियादहै उस अकेले के हनन क लिषएही आज्ञा हई है, शत्रसैनिकों के हनन के लिए नहीं । यह् वेदिक युद्ध-नोति को उदारता मौर सहानुम्ति का प्रदर्शन हुआ है । पुत्र हैव पितरं गच्छ स्वज ईवाभिष्ठितो दश । तोड़ दिया जाताहै वैसे शत्रु केषेरेको ( अवक्रामी) आक्रमणद्वारा तोडती ओर (पुनः) फिर अर्थात् वापस तू जा ।

English

Tanùnapāt, fair-tongued! with sweet meath balming the baths and ways of Order, make them pleasant.

अध्याय 5

श्लोक 14.5

कृ॒त्याः स॑न्तु कृत्या॒कृते॑ श॒पथः॑ शपथीय॒ते।सु॒खो रथ॑ इव वर्ततां कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑

kṛtyāḥ santu kṛtyākṛte śapathaḥ śapathīyate| sukho ratha iva vartatāṃ kṛtyā kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके साथ सुलह-सफाई के लिए, उसका मान करते हुए उसके प्रति निः संकोच होकर तू जा जँसेकि पत्र निःसंकोच होकर पिता कीञोर जाता है । यह निज सेनाके प्रति अदेश हं । (२) यदि उसने तुङ्ञे पादाक्रान्त किया है तो विषेले स्पिके सदृश उसेतू काट। (३) यदि उसने साम्राज्य के किसी प्रान्त पर सैनिक बन्ध लगादियाहै, घेराडाल दिवाहै, तो उस सेना पर आक्रमण करके घेरे.को तौड डाल व्णेवाली मृगी के सदृश, अथवा (वारणी) हथिनी के सदृश. (कव्या) सम्राद् मृगी चाह किसी भी वर्णवाली हो, वह शान्त स्वभाववाली होती है, बदला नहीं ले सकती; हथिनी बदला ने सक्रती है । शत्रु राजा यदि

English

Bear to the Gods our sacrifice, exalting with holy thoughts our hymns of praise and worship. Invoked, deserving prayer and adoration, O Agni, come accor dant with the Vasus.

अध्याय 5

श्लोक 14.6

यदि॒ स्त्री यदि॑ वा॒ पुमा॑न् कृ॒त्यां च॒कार॑ पा॒प्मने॑ ।तामु॒ तस्मै॑ नयाम॒स्यश्व॑मिवाश्वाभि॒धान्या॑

yadi strī yadi vā pumān kṛtyāṃ cakāra pāpmane | tāmu tasmai nayāmasyaśvamivāśvābhidhānyā

हिन्दी अर्थ

यातो प्रेमभावनापूवंक् सन्धिवार्ता करनेके लिए अथवा बदला लेने के लिए प्रत्याक्रमण भावना से निज छावनी से उत्यान कर शमु कीञर जाए-यह भावना मन्व मे है । युद्धनीतिके ६ गुण है, सन्धि, विग्रह, यान, उत्थानम् छ, ०३।१९ (आष्ट) रत्या करती छेदे (तुदादिः, रुधादिः), छेदनपटु सेना, यथा कृतन्यधनि" (मन्त्र ६) । (इष्वाः) बाण के सदुष (क्जीयः) अधिक सीधी, (द्यावापृथिवी) उस राजा की बोर पक्षीवत् उड़कर (पततु) पतन करे । (सा) वह सेना

English

Thou art, O youthful Lord, the Gods’ Invoker, so, best of sacri- ficers, bring them quickly. By rule the Sacred Grass is scattered eastward, a robe to clothe this earth when dawns are

अध्याय 5

श्लोक 14.7

यदि॒ वासि॑ दे॒वकृ॑ता॒ यदि॑ वा॒ पुरु॑षैः कृ॒ता।तां त्वा॒ पुन॑र्णयाम॒सीन्द्रे॑ण स॒युजा॑ व॒यम्

yadi vāsi devakṛtā yadi vā puruṣaiḥ kṛtā| tāṃ tvā punarṇayāmasīndreṇa sayujā vayam

हिन्दी अर्थ

पकड़ ले (मृगम्, इव) जैसेकि मृग को पकड लिया जरति है । सेना के उडने का अभिप्राय सम्भवतः विमानो द्वारा उड़कर जाना हो । वैदिक नौविमान विद्या के सम्बन्ध में देखिए "कऋषेदादिभाष्यभूमिका' सवो रथं इवं वतेतां कर्मा कुत्याकुतं पुनं; ॥१२॥ अग्निकी तरह (प्रतिकूलम्) प्रतिकूल होकर जलती हई (एतु) शु कीओर माए, या (उदकम् इव) जल की तरह ( अनु्ूलम्) अनुकूल होकर शान्ति प्रदान करती हुई आए । सेना (युखः रथः दव) सुखदायक रथ ,

English

breaking. Widely it spreads around and far extended, fair for the Gods and bringing peace and freedom,

अध्याय 5

श्लोक 14.8

अग्ने॑ पृतनाषा॒ट् पृत॑नाः सहस्व ।पुनः॑ कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ प्रति॒हर॑णेन हरामसि

agne pṛtanāṣāṭ pṛtanāḥ sahasva | punaḥ kṛtyāṃ kṛtyākṛte pratiharaṇena harāmasi

हिन्दी अर्थ

करे, (पुनः) शत्रुराजा जब अनुकूल हो जाए तत्पश्चात् । करेतो सम्राट् की सेना जलाती हुई उसके पास पचे । यदि शनुराजा हृदं उसके पास पहुंचे, जेसेकरि सुखदायक रथ सुख प्रदान करता है उसी प्रकार उसकी प्रजा को सुख प्रदान करती हुई पहुंचे । एका च मे दशं च मेऽपवक्तार ओप ऋतजात ऋतायरि मधुं मे मधुला करः ॥१॥

English

Let the expansive Doors be widely opened, like wives who deck their beauty for their husbands.

अध्याय 5

श्लोक 14.9

कृत॑व्यधनि॒ विध्य॒ तं यश्च॒कार॒ तमिज्ज॑हि ।न त्वामच॑क्रुषे व॒यं व॒धाय॒ सं शि॑शीमहि

kṛtavyadhani vidhya taṃ yaścakāra tamijjahi | na tvāmacakruṣe vayaṃ vadhāya saṃ śiśīmahi

हिन्दी अर्थ

(मे) मेरी (एका च) एक इन्द्रिय-वृत्ति, (मे) भेरी (दश च) दस (ऋतजाते) है सत्यमय जीवन से प्रकट हर्द, (ऋतावरि) सत्यमयी (ओषधे) ओषधि ! (मधुला) मधुरस्वरूपा तू (मे) मेरे जीवन को (मधु) मधुमय अर्थात् मीठा (करः) करदे, यातूने कर दियाहै। ऋतावरी यथा ऋतम्भरा प्रज्ञा में ऋत-सत्य। को दशविध कहा है । दस आयतन हैँ : स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर, कारण का वणन निस्त प्रकार से किया है, “चित्तनदी नाम उभयतो वाहिनी, वहति कल्याणाय, वहति पापाग्र च'' । “अपवक्तारः वबरृत्तियां " पापमयी ह, ओर '"ऋत-

English

Lofty, celestial, all-impelling Portals, admit the Gods and give them easy entrance! Pouring sweet dews let holy Night and Morning, each close to each, be seated at their

अध्याय 5

श्लोक 14.10

पु॒त्र इ॑व पि॒तरं॑ गच्छ स्व॒ज इ॑वा॒भिष्ठि॑तो दश ।ब॒न्धमि॑वावक्रा॒मी ग॑च्छ॒ कृत्ये॑ कृत्या॒कृतं॒ पुनः॑

putra iva pitaraṃ gaccha svaja ivābhiṣṭhito daśa | bandhamivāvakrāmī gaccha kṛtye kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

रूपमे, युद्धच्छक राजा की ग्रीवां प्रहनानेका कथन हभ है, उसे यह सु्लानेके लिए कि अभी तक तो तुम सुवणमुद्रा के वैण्डल को ग्रीव में पहनते रहे हो, युद्ध करने पर ओर हार जानने पर, तुम्हारी ग्रीवा पर चमड़ेका । पैण्डल होगा । यह क्रिया भी यृद्धकी तैयारीन करनेमेंप्रेरिकारूपही है) गृह्य) तू निज हाथ में लेकर (पराणय) परकीय राजा की भोर ले-जा। मौर (अस्मै) इस राजा के लिए, इसके (समक्षम्) खों के सामने (आ सेना के संग्रह करनेवाले राजा को, उसके (हनत्) हनन कौ सूचना दे दे ।

English

But give me now the gift thou hast not given. Thou art my friend for ever firm and faithful. One origin, Varuna! one bond unites us I know the nature of that common kinship.

अध्याय 5

श्लोक 14.11

उदे॒णीव॑ वार॒ण्यऽभि॒स्कन्दं॑ मृ॒गीव॑ ।कृ॒त्या क॒र्तार॑मृच्छतु

udeṇīva vāraṇya'bhiskandaṃ mṛgīva | kṛtyā kartāramṛcchatu

हिन्दी अर्थ

का कथन हुआ है, परन्तु इस छालखण्ड को शत्रु राजा तक पहुंचाया कंसे जाए ? छालखण्ड दूत द्वारा ही पहुंचाया जा सकता है । वैदिक राजनीति के अनुसार दूत अवध्य है, अतः निरापद् है। छालखण्ड राजा का हनन नहीं करेगा, अपितु यह् उसके भावी हनन का सूचकमात्र ही है (कृत्याः) हिखसेनाएँ (कृत्याकृते ) हिखसेनाओं के संग्रहुकर्ताके लिए (सन्तु) हों उसेही विनष्ट करे जेसेकि (शपथः) शपथ (शपथीयते) पथ लेनेवाले के लिए ही हानिकारक होताहै। (कृत्या) शत्रु कौ हिखसेना (सुखः रथः इव) सुखपू्वकं चलनेवाले स्थ के सदुश, सुखपूर्वेक, (कृत्याकृतम्) हिखसेनाओं के संग्रह करनेवाले राजा के प्रति (पूनः) यदि स्त्री यदिवा पुमान कृत्यां चकारं पाप्मने (पुमान्) पुरुष राजा ने, (पाप्मने पापकर्मके लिए परराज्यके राजा

English

I give thee now the gift that I retracted. I am thy friend for ever firm and faithful. God, giving life unto the god who lauds me, Sage strengthener of the sage who sings my

अध्याय 5

श्लोक 14.12

इष्वा॒ ऋजी॑यः पततु॒ द्यावा॑पृथिवी॒ तं प्रति॑ ।सा तं मृ॒गमि॑व गृह्णतु कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑

iṣvā ṛjīyaḥ patatu dyāvāpṛthivī taṃ prati | sā taṃ mṛgamiva gṛhṇatu kṛtyā kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

की हत्या के लिए, (कृत्याम् चकार) हिधसेना का संग्रह कियादहै, तो (ताम् उ) उस सेना को (तस्मै) उसी राणी या राजाकेनिएही (नयामसि) हम ले-जाते है, पहंचा देते है, (इव ) जेसेकि (अद्वम्) अव को राजाने यद्यपि निज सेनाको परराज्यके राजा की हूत्याके लिए भेजादहै, , तो भी शक्तिशाली वैदिक राजा, उस सेना का विनाश नहीं करता, अपितु उसे बांधकर उसके राजा के प्रति सूपुदं करदेतादहै। यष्टि वासि देवकृता यदि वा पुरुषैः कृता । (यदि वा असि) यदिहैत् (देवकृता) राज्यके देव अर्थात् विजिगीषु सेनापति द्वारा संगृहीता, (यदि वा) अथवा (पृरुषेः) राज्य की प्रजाओं

English

praises. Thou, self-dependent Varuna! hast begotten the kinsman of the

अध्याय 5

श्लोक 14.13

अ॒ग्निरि॑वैतु प्रति॒कूल॑मनु॒कूल॑मिवोद॒कम्।सु॒खो रथ॑ इव वर्ततां कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑

agnirivaitu pratikūlamanukūlamivodakam| sukho ratha iva vartatāṃ kṛtyā kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

हम सेनाधिकारी फिर वापस कर देते है, (सयुजा इन्द्रेण) सहयोगी सम्राट् भेजी, परन्तु उदार सम्राट् ने उस सेनाका विनाशन कर, उसेनिजञज्ञा या परामश द्वारा वापस कर बिया। संगृहीता' है शत्रु हारा संग्रह् की हुई पूनैः कृत्यां करंत्याकृतै भतिहर॑णेन हरामसि ॥८॥

English

Gods, our sire Atharvan. On him bestow most highly-lauded riches. Thou art our friend, high over all, our kinsman.

अध्याय 5

श्लोक 15.1

रोगोपशमनम्।१-११ विश्वामित्रः।मधुला वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ४ पुरस्ताद्बृबती, ५,७,९ भुरिक्।एका॑ च मे॒ दश॑ च मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

rogopaśamanam| 1-11 viśvāmitraḥ| madhulā vanaspatiḥ| anuṣṭup, 4 purastādbṛbatī, 5,7,9 bhurik| ekā ca me daśa ca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

२३४ अषर्व॑वेदभाष्य काण्ड ५। मनु° ३ सूक्त १५ ऋतजात ऋतावरि मधुं मे मधुला करः ॥५॥ इत्यादि ।' मधुला करः --देखं अथवं ० (१।३४। १-५/ । ओषधि के दो अभिप्रायह। (१) सत्यमयी वुत्ति, यह अपकथनों का विनाश करती है । अपक्तथन असत्य होते ह, सदा-सत्ताक नही होते ।

English

station,— Lofty, celestial Dames with gold to deck them, assuming all their fair and radiant beauty.

अध्याय 5

श्लोक 15.2

द्वे च॑ मे विंश॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

dve ca me viṃśatiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

सब मिलकर वृत्तियां हँ । शेष पूववत् । ॥ २३९ अथर्वैवेदभांष्य काण्ड ५। मनु० ३1 सूक्तं १५ ऋतजात ऋतावरि मधुं मे मधुला करः ॥९॥ अनुवाकः ५ (नव च) € इन्धियों को नवविध € प्रकार की व॒त्तिर्या, तथा १० वृत्तियां हैँ । शेष पूर्ववत् ।

English

Hotar more skilled in sacrifice, bring hither with speed to-day God Tvashar, thou who knowest,

अध्याय 5

श्लोक 15.3

ति॒स्रश्च॑ मे त्रिं॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

tisraśca me triṃśacca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(१-११) विश्वामित्रः एकवृषदेवता । द्विपदा; (दश च) १० इ्दियों की दशविध १० प्रकार की वृत्तियाँ ऋतजात कतावरि मधरु मे मधुला करः ॥१९१॥ (योग १।५) भेदसे ये पाच वृत्तिर्या १० हो जाती हँ । मन्त्र करमानुसार

English

Even him who formed these two, the Earth and Heaven, the Parents, with their forms, and every creature.

अध्याय 5

श्लोक 15.4

चत॑स्रश्च मे चत्वारिं॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

catasraśca me catvāriṃśacca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

१० । परन्तु १०० ओर १० काजोडन कर, मन्त्र ्१्ेमें १०० को १० कि “न च सहेणापि पुरूपायुषैरलमि याः वृत्तीः करिचत् परिगणयितुम्, वत्तियों को कोई गिन नहीं सकता, वृत्तियां असंख्यात हैँ, (योगदशेन सूत्र ५ (यदि एकवृषः असि) यदि तेरी एक इन्द्रिय प निजविषय को गि है, तो (सृज) “ऋतप्रजात ्रतावरी वृत्ति का सर्जन कर

English

Bring thou to our oblations which thou balmest the companies of Gods in ordered season. Agni, Vanaspati, the Immolator sweeten our offered gifts with meath and butter!

अध्याय 5

श्लोक 15.5

प॒ञ्च च॑ मे पञ्चा॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

pañca ca me pañcāśacca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(श २६।११५ मे पूर्वसूक्त १५का, सूक्त १६ के साथ विति- योग किया हे, अतः इन दोनों में एकवाक्यता होनी चाहिए । तदनुसार दही कहा है जोकि इन्द्रिय के विषय को उदक-वर्पाके रूपमेँ सुचित करताटं। (यदि द्विवुषः असि) यदि तेरी २ इन्द्रियां तुञक्चपर निजविषयीं की वर्ष करती ह, तो (सृज) पुव॑बत् वर्षा करती रहै, तो (घज) पूववत् । ि

English

Agni as soon as he was born made ready the sacrifice and was the Gods’ preceder. May the Gods eat our offering consecrated according to this true

अध्याय 5

श्लोक 15.6

षट् च॑ मे ष॒ष्टिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

ṣaṭ ca me ṣaṣṭiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(यदि चतुवृषः असि) यदितेरी ४ इन्द्रियां तुज्ञ पर निज विषयों को वर्षा करती है, तो (सृज) षतु । . (यदि पञ्चवृषः असि) यदि तेरी ५ इन्धि तुज्ञपर निजविषयों को वर्षा करती है, तो (सृज) पूवेवत् । (यदि षड् वृषः असि) यदितेरी ६ इन्र्या तुज्ञपर निजविषयों की वर्षा करती ह, तो (सृज) पूववत् ।

English

Priest’s voice and guidance. A charm against snakes

अध्याय 5

श्लोक 15.7

स॒प्त च॑ मे सप्त॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

sapta ca me saptatiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

बीदहरास्तपं उग्र॑ म॑योभूरपों देवीः प्र॑थम॒जा ऋतस्य ॥१॥ ने (सलिलः) समुद्र ने, (मातरिदवा) वायु ने, (वीड्हराः) बलवानों का ं हरण अर्थात् विनाश करनेवाले (मयोभूः) आध्यात्मिक सुख पैदा करनेवाले । यति (निरुक्त ५।३।१८) । वीडवबलनाम (निघं० २।६) । परमेश्वर की संवाद कथानक के रूपम है, जिसे कि परमेश्वर ओौर परमेश्वर द्वारा ।

English

Varuna, Sage of heaven, hath given me the gift: with spells of mighty power I draw thy poison out.

अध्याय 5

श्लोक 15.8

अ॒ष्ट च॑ मेऽशी॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

aṣṭa ca me'śītiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

यचैकादु शसि सोऽपोदकासि ॥६६॥ न 5 1 त को पष्ट किया । वीड्हराः = (यदि) यदि (एकादशः) शष्वे मनवाला तू है, (सः) वहतू वीड+टरस् जाया को (पुनः) फिर (प्रायच्छत्) वापस कर दिया । इसके (अन्विता) „ (हस्तगृह्य) पाणिग्रहणपूवेक, (आनिनाय) अपने गृह मेंइसे ले आया। १

English

Dug up, not dug, adherent, I have seized it fast: low hath thy venom sunk like water in the sands.

अध्याय 5

श्लोक 15.9

नव॑ च मे नव॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

nava ca me navatiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(यदि सप्तवृषः असि) यदि तेरी ७ इन्द्रियां तुक्षपर निजविषयों की वर्षा करती ह, तो (सृज) पूवंवत् । (यदि अष्टवृषः असि) यदितेरी र इन्द्रियां तुक्षपर निजविषयोंकी वर्षा करती है, तो (सुज) पूववत् । वर्षाकरतीर्है, तो (सुज) पूववत् ।

English

All the non-fluid portion of thy venom, I receive in these. I take thy middlemost, thy highest, lowest juice: may it be spent and lest by reason of thy

अध्याय 5

श्लोक 15.10

दश॑ च मे श॒तं च मे॑ ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

daśa ca me śataṃ ca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

रतजात ृतावरि मधुपे मधुला करः ॥५॥ ऋतंजात ऋतावरि मधुं पर मधुला करः ॥६॥ यजुकेदमें हआ टै, यथा 'भेषजमसि भेषजम्' (३।५६) । "परमेव र-भेषज' निज कृपा से सव॑रोगों की महौपध दहै । इसी प्रकार की वाद्या आगेके १० ¦ या ११ मन्व्ोंमेंभी जाननी चाहिए ।

English

Come the first two celestial sweet-voiced Hotars, arranging sacrifice for man to worship, As singers who inspire us in assemblies, showing the eastern light with their direction!

अध्याय 5

श्लोक 15.11

श॒तं च॑ मे स॒हस्रं॑ चापव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

śataṃ ca me sahasraṃ cāpavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

चदृतजात ऋतावरि मधुं मे मधुला करः ॥३॥ अत॑जात ऋतावरि मधरुंमे मुखा करः ।७॥ ऋतजात ऋतावरि मधं मे मधुला करः ॥८॥ है, अतः मे जायतन भी द्ाधिध हो जाते ह, ज॑सेनि एक ही स्वच्छ शीशा, भिन्न

English

Let Bhārati come quickly to our worship and Ilā showing like a human being. So let Sarasvati and both her fellows, deft Goddesses, on this fair grass be seated.

अध्याय 5

श्लोक 16.1

वृषरोगशमनम्।१-११ विश्वामित्रः।एकवृषः।एकावसानं द्वैपदम्, १, ४, ५, ७-१० साम्नी उष्णिक्, २, ३ ,६, आसुरी अनुष्टुप्, ११ आसुरी गायत्री।यद्ये॑कवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

vṛṣarogaśamanam| 1-11 viśvāmitraḥ| ekavṛṣaḥ| ekāvasānaṃ dvaipadam, 1, 4, 5, 7-10 sāmnī uṣṇik, 2, 3 ,6, āsurī anuṣṭup, 11 āsurī gāyatrī| yadyekavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

(यदि दशवृषः असि) यदि तैर १० इन्द्रियां वुञ्चपर निजविषयों की वर्षा करती रहँ, तो (सृज) पूर्ववत् । परेत है, सेवन का सर्वथा निषेध नहीं किया । सर्वथा निषेधसेतो जीवन की एकत्रित रहते ह । यदि मनसंयमितनदहो तो मनोनिष्ठ सभी संस्कार जीवन को अति क्तेशमय कर देते हैँ, फिर इनसे छने का कोई उपाय नहीं रहता । इस अभिप्राय को दशनिके लिए १९१वेंमन्वमे सृज'का कथन नहीं हुभा । ं “एकादशं मनो ज्ञेयमिन्दरियमुभयात्मकम्"' (मनु) ।

English

fear. Strong is my cry like thunder with the rainy cloud: with power- ful incantation let thy

अध्याय 5

श्लोक 16.2

यदि॑ द्विवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi dvivṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

नहीं हज । इससे ज्ञात होता है कि पूर्वकाल क पति सोमः" आदि काल्पनिकं है २. सूक्त श७े कापि है “मयोभु, ओर देवता है “ब्रह्मजाया । अनुक्रमणी-कार वेदों के समकालिक सम्भव नरीह सकते । वस्तुतः सूक्त १७बे का न

English

Live not, O Snake, but die the death: back go thy venom on thyself. Listen to me, Black Snakes and hateful creatures, Lurker-in Grass, Karait, and Brown, and Spotty,

अध्याय 5

श्लोक 16.3

यदि॑ त्रिवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi trivṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

व्यवस्था होनी चाहिए । इससे वर्णसंकर दोष मिट सकता दहै ओर राष्ट ओरवेदको जाननेवाली । दूत-प्रेषण हारा विवाहं भे अन्यथा प्रक्रियान होनी चाहिए, -यह् खयाल रखना क्षधिय राजा का कतंव्यहै। यामादृस्तारेकैपा विकेशीति दुच्छुना ्रामंमवप्य॑मानाय् । (याम्) जिस ब्रह्मजाया को (आहुः) कहते हँ कि (एषा) यह (तारका) राष्टरको तरानैवाली नौका है, वह जव (विकेशी इति) दुःखी होकर बिखर केशोवाली दहो जाती दहै, तब द्से (ग्रामम्) ग्राम पर (अव-

English

Approach not near the house my friend inhabits: give warning, and rest quiet with your poison.

अध्याय 5

श्लोक 16.4

यदि॑ चतुर्वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi caturvṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

गतिवाले, शीश्रगतिवाने (उतकरुषौ मान्) उल्का के सदृश जलते हुए पत्थर के रूप मे ब्रह्मजाया (प्रापादि) प्रपतन करती है। धर्मात्मा ओर विदुषी को गरणकर्मानुसार योग्य पतिकेन मिलन पर वहं दुःखी होकर विकेशी हो जाती है, केशों को संवारतो नहीं । कंशसंवारण तो पति के रञ्जनार्थं होता है। उस कारण (बृहस्पतिः) बृहती वेदवाणी का पति यह् ब्रह्मचारी (अनु) वंदिक हु वेः प्रकरणमें ब्रह्मचारी ओर जायाकै व्णंनके

English

Even as the cord that strings the bow, I slacken, as it were, the cars. 60

अध्याय 5

श्लोक 16.5

यदि॑ पञ्चवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi pañcavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

ह ब्राह्मण ओर ब्रह्मजाया के विव दो अभिप्राय सम्भवर्है--(१) जाया” समानार्थक है । (२) ओर जाया" का विवाह् आदशरूग मं उपास्थत किया हे। नीताम्) जिसे सोमने प्राप्त किया था। (न) जैसेकि (देवाः) दिव्यगुणी होता, तब तक वह गुरुरूप होकर, गुरुओ का एक अंगरूप होकर, सहायक जो (वीराः) वोर (भिथः) परस्पर कै युद्धो मे (तृद्यन्ते) दिसित होतेह,

English

Of the All-conquering serpent’s wrath, of the fierce rage of Black, and Brown, Taimāta, and Apodaka.

अध्याय 5

श्लोक 16.6

यदि॑ षड्-वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi ṣaḍ-vṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

(हिनस्ति) हिसित करती दहै । , ( ऋषयः) सात ऋयियों ने (ये) जोकि (तपसा) तपस्वरथा के साथ (निषेदुः) अन्रहाल ओर अवेद (यत्) जो (दश बतः ) दस धम अथात् ॥ ४ ; की (जाया) होनेवाली जाया (भीमा) भयावहदहै, वह (परमे व्योमन्) (पतिः) विवाहित पति हतां) ५ र ५

English

And Āligi and Viligi, their father and the mother too,— What will ye do? Your venomed sap, we know, is utterly powerless.

अध्याय 5

श्लोक 16.7

यदि॑ सप्तवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi saptavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

सप्तषिमण्डल, जिसमे कि तापओौर प्रकाश के सहित मानो किसातक्रषि वसिष्ठ । इस मण्डल को “कक्नाः' तथा "(752 7401" भी कहते हैँ । कविता मे इन्दं चेतन माना है, तभी अवदन्त" का प्रयोग हुआ । जां, जब तक कि उप्तका विवाह नहीं होता । ऋषि कोटि की नहीं होतीं, परन्तु जव व्यक्ति ५. ५ ७ ता 1 ॐ ख्ख ही ह (नि ४ १. सूयं का वणेन इसलिए हुजा रै कि विवाह मसू्यप्रक्षण की भी विधिदहै, जोकि ॥।

English

Daughter of Urugūlā, she-fiend whom the black, skinned mother bare— All female serpents poison who crept swiftly near is impotent.

अध्याय 5

श्लोक 16.8

यद्य॑ष्टवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadyaṣṭavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

सर्य क रहते ही सम्पन्नो सकती द 1 विवाह के टसकाल में गुणकर्मानुसार विवाह के सिद्धान्त कीपुष्टिभी करादी गईहै ्रबरवन् एति हासा। समाधिमें स्थितहोजातेर्है, तवं इनको ये सात शक्तियाँ ऋषियोंकीकोटि कीहोजातीदहैँ। तवयेसातजो ज्ञान देते हैँ वह सत्यहोता है, यथाथ होता

English

Dwelling beside the mountain’s slope, the quick-eared porcupine exclaimed: Of all these she-snakes homed in earth the poison is most powerless.

अध्याय 5

श्लोक 16.9

यदि॑ नववृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi navavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

है, ओौर ये वस्तुतः सत्य का “अवदन्त” कथन करने लगते हैँ । , र अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० ४ । सूक्त १७ परनूवन् = सूयं जड है, वह बोल नहीं सकता, यह कथन कथानक् मनुष्यजाति । पञ्च -पचि विस्तारवचने (चृरादिः)। मथवा पञ्चमानवाः

English

Tābuva or not Tābuva, thou verily art not Tābuva: poison is killed by Tābuva. Tastuva or not Tastuva, thou verily art not Tastuva: poison is killed by Tastuva.

अध्याय 5

श्लोक 16.10

यदि॑ दशवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi daśavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

शेशवावस्था में कन्या सौम्यस्वभाववाली होती है, अतः उसका पति या अधिपति सोम कहाहै पति--पा रक्षणे तदनन्तर उसमें सदाचार ओर अनाचार की विवेक-भावना जागरित होती है जिसेकि भ संगी की कामना प्रकट होती है । अन्त में वैवाहिक अग्नि, मानो होता बनकर, पाणिग्रहण कौ विधिपू्वेक उसे विवाहित कर पतिगृह मे त-आती है! मन्तरमें इस भक्रम को अवस्थाओं को पुरुषरूप में वणित किया है । इन अवस्थाओं के अधिके वणेनके लिए देखं (अथवे० १४।२। १-४), । है । संवादमे जो निर्णय हआ उसका कथन मन्त्र से सूक्तकी की 2 ॥ । होता = ह दाने, हस्तप्रदान करना, विवाहाथं अवलम्ब प्रदान

English

strength be stayed. I, with the men to aid, have seized that juice of his; as light from out the gloom, let Sūrya rise

अध्याय 5

श्लोक 16.11

यद्ये॑काद॒शोऽसि॒ सोऽपो॑दको ऽसि

yadyekādaśo'si so'podako 'si

हिन्दी अर्थ

की (आधिः) मन-की-चिन्ता (ग्राह्या) निगृहीत केरनी चाहिए, व करनी चाहिए, यह ब्राह्मण कौ जाया है" (इति) यह (इत् च) ही (अवोचत्) मयोभूः ने कहा, निर्णय दिया । (एषा) यह ब्रह्मजाया (दुताय राष्ट (गुपितम्) सूरक्षित होता है। ८ म भू 12 ५ में । ६ वाने ष नि है, यह ही “मयोभू" ने निर्णय मे कहा कि इसी प्रकार गुण-कमनुसार ता

English

on high I with this eye destroy thine eye, and with this poison conquer thine.

अध्याय 5

श्लोक 17.1

ब्रह्मजाया।१-१८ मयोभूः।ब्रह्मजाया।अनुष्टुप्, १-६ त्रिष्टुप्।तेऽवदन् प्रथ॒मा ब्र॑ह्मकिल्बि॒षेऽकू॑पारः सलि॒लो मा॑त॒रिश्वा॑ ।वी॒डुह॑रा॒स्तप॑ उ॒ग्रं म॑यो॒भूरापो॑ दे॒वीः प्र॑थम॒जा ऋ॒तस्य॑

brahmajāyā| 1-18 mayobhūḥ| brahmajāyā| anuṣṭup, 1-6 triṣṭup| te'vadan prathamā brahmakilbiṣe'kūpāraḥ salilo mātariśvā | vīḍuharāstapa ugraṃ mayobhūrāpo devīḥ prathamajā ṛtasya

हिन्दी अर्थ

पुनव देवा अददुः पुन॑मनप्या अददुः राजानः सत्यं गन्नाना ब्र्॑यजायां पुन॑दंदुः ॥१०॥ ( जाया को (वै) निडचय से (पुनः) फिर (अददुः) वापस देदिया, कर दिया, (मनुष्याः) सर्वसाधारण मनुष्यों ने (पुनः) फिर (अददुः) वापस दे दिया, कर दिया । (सत्यं गृह्णानाः) सत्यग्राही (राजानः) राजाभों ने (पनः) फिर (ददुः) वापस दे दिया, कर दिया।

English

A charm against witchcraft An eagle found thee: with his snout a wild boar dug thee from the earth.

अध्याय 5

श्लोक 17.2

सोमो॒ राजा॑ प्रथ॒मो ब्र॑ह्मजा॒यां पुनः॒ प्राय॑च्छ॒दहृ॑णीयमानः ।अ॒न्व॒र्ति॒ता वरु॑णो मि॒त्र आ॑सीद॒ग्निर्होता॑ हस्त॒गृह्या नि॑नाय

somo rājā prathamo brahmajāyāṃ punaḥ prāyacchadahṛṇīyamānaḥ | anvartitā varuṇo mitra āsīdagnirhotā hastagṛhyā nināya

हिन्दी अर्थ

हनन कर देता है, (आरब्धः) सव ओर लगी हुई (अग्निः इव) अग्निके ही (मन्यते) मानता है (सः) वह् (तंमातस्य) जल में घुले (विषस्य) विष का (पिबति) मानो पान कर्ता है। ॥ य प॑ने हन्ति मदं मन्य॑मानो देवपीयुधेनकामो न चित्तात् ।

English

As one who flies from bonds, go back, O Witchcraft, to the sorcerer. Even as the timid antelope or hind from her assailant flees,

अध्याय 5

श्लोक 17.3

हस्ते॑नै॒व ग्रा॒ह्यऽआ॒धिर॑स्या ब्रह्मजा॒येति॒ चेदवो॑चत्।न दू॒ताय॑ प्र॒हेया॑ तस्थ ए॒षा तथा॑ रा॒ष्ट्रं गु॑पि॒तं क्ष॒त्रिय॑स्य

hastenaiva grāhya'ādhirasyā brahmajāyeti cedavocat| na dūtāya praheyā tastha eṣā tathā rāṣṭraṃ gupitaṃ kṣatriyasya

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मण-देवों की हिसा करनेवाला तथा (धनकामः) धन को कामनावाला विचरते हुए (एनम्) इसके साथ (उभे नभसी) दोनं युलोक-पृथिवीलोक (द्विष्टः) द्वेष करते है, दोनों लोकों के निवासी द्वेष करते है । अपनाने से रोकता है, इसपर राष्टूपति, ब्राह्मण की हत्या करने पर उतारू नहीं, यह (प्रियतनोः) प्रिय तनु की (अग्निः इव ) अग्निके सदुश है। (हि)

English

So swiftly let the sorcery o’ertake and reach the sorcerer. Straighter than any arrow let it fly against him, Heaven and

अध्याय 5

श्लोक 17.4

यामा॒हुस्तार॑कै॒षा वि॑के॒शीति॑ दु॒च्छुनां॒ ग्राम॑मव॒पद्य॑मानाम्।सा ब्र॑ह्मजा॒या वि दु॑नोति रा॒ष्ट्रं यत्र॒ प्रापा॑दि श॒श उ॑ल्कु॒षीमा॑न्

yāmāhustārakaiṣā vikeśīti ducchunāṃ grāmamavapadyamānām| sā brahmajāyā vi dunoti rāṣṭraṃ yatra prāpādi śaśa ulkuṣīmān

हिन्दी अर्थ

अग्निः = शरीर का तापमान, या जाठराग्नि । शरीरके तापमान के अभावसेशरीरमृतहो जाताहै, जाठराग्नि के विकृतहौ जाने से क्षरीर (शतापाष्ठाम्) सौ कीलोवाली इषु को वह राजा (निगिरति) निगलता है, परन्तु (निः विदन्) उसे हैन्यावस्था में करके,

English

Earth. So let that witchcraft seize again the wizard like a beast of chase.

अध्याय 5

श्लोक 17.5

ब्र॒ह्म॒चा॒री च॑रति॒ वेवि॑ष॒द् विषः॒ स दे॒वानां॑ भव॒त्येक॒मङ्ग॑म्।तेन॑ जा॒या मन्व॑विन्द॒द् बृह॒स्पतिः॒ सोमे॑न नी॒तां जु॒ह्वं१ न दे॑वाः

brahmacārī carati veviṣad viṣaḥ sa devānāṃ bhavatyekamaṅgam| tena jāyā manvavindad bṛhaspatiḥ somena nītāṃ juhvaṃ1 na devāḥ

हिन्दी अर्थ

यह मानता है कि इसे (स्वादु) स्वादुरूप में (अद्मि) मँ खाता हुं । निः खिदम् =निःखिदन्; खिद हैन्ये; परिघातने (दिवादिः; तुदादिः। † ह, (वाक्) वाणोहो न (कुल्मलम्, नाडीकाः) बाणका मूलभाग र दत, वाण के अग्रभागे लगे ५ अथर्व० ११।१२।३ (ऋ० १९१०।७१।११), (निस्क्त १।३।८) धनु्सिः मेँ बहुवचन धनुषो के बहुत्व का सूचक है । दन्ताः. -अथवा मृगौ अस्या दन्ताः' (ऋ ° ६।७५।११ ) मे मृगब्णुङ्ख का बना दति।

English

Let it go contrary like flame, like water following its course. Let witchcraft, like a well-naved car, roll back upon the sorcerer.

अध्याय 5

श्लोक 17.6

दे॒वा वा ए॒तस्या॑मवदन्त॒ पूर्वे॑ सप्तऋ॒षय॒स्तप॑सा॒ ये नि॑षे॒दुः ।भी॒मा जा॒या ब्रा॑ह्म॒णस्याप॑नीता दु॒र्धां द॑धाति पर॒मेव्योऽमन्

devā vā etasyāmavadanta pūrve saptaṛṣayastapasā ye niṣeduḥ | bhīmā jāyā brāhmaṇasyāpanītā durdhāṃ dadhāti paramevyo'man

हिन्दी अर्थ

हाय) पीरे-पीचे जाकर, (उत) तथा (दूरात्) दूरसे (एनम्) इस राजा अन्नखाने से भी वच्चित कर दिये गये ओर पराभूत भी हए, राज्य सेभी वल्चित कर दिये गये । गौः वाङ्नाम (निषं० १।११)। वैतहव्याः = विगत काजभिप्रायहै सौ-सौ की संख्या में दस वार पराभूत हुए (मन्त्र १२) ।

English

A charm for general prosperity Plant! I have those who shall avert the threatened danger, ten and one.

अध्याय 5

श्लोक 17.7

ये गर्भा॑ अव॒पद्य॑न्ते॒ जग॒द् यच्चा॑पलु॒प्यते॑ ।वी॒रा ये तृ॒ह्यन्ते॑ मि॒थो ब्र॑ह्मजा॒या हि॑नस्ति॒ तान्

ye garbhā avapadyante jagad yaccāpalupyate | vīrā ye tṛhyante mitho brahmajāyā hinasti tān

हिन्दी अर्थ

मरे केसरधावम्धायाथर माजामपंचिरन ॥११॥ दिया है, (ये) जिन्होने कि (केसरप्राबरन्धायाः ) शिरोधायं परामणेवाणी कौ पराबन्धायाः=-के (सिरमे) ।सर (विचरने) वाले मुकुट को + प्राबन्धायाः (बाँधनेवाली परामशंवाणी को । चरमाजाम् चरम (अन्तिम) अजाम् (अज गतौ, भ्वादिः) क्रियाशक्ति को । अपेचिरन् == विकृत कर दिया है नष्ट हो जाता है, विकृत हौ जाता है

English

O sacred Plant, produced aright! make sweetness, sweet thy self, for me. Twenty and two, O Plant, have I who shall avert the threatened ill.

अध्याय 5

श्लोक 17.8

उत यत् पत॑यो॒ दश॑ स्त्रि॒याः पूर्वे॒ अब्रा॑ह्मणाः ।ब्र॒ह्माचेद्धस्त॒मग्र॑ही॒त् स ए॒व पति॑रेक॒धा

uta yat patayo daśa striyāḥ pūrve abrāhmaṇāḥ | brahmāceddhastamagrahīt sa eva patirekadhā

हिन्दी अर्थ

२५२ अयवेवेदभाष्यं कण्ठ ५। अनू० ४। सूर्क्त १८ असम्भवनीय (पराभवन्) पराजय को प्राप्त हुए । द्ष्टिमें मनुष्यकी आयु १०१ वर्षोकीदहै) एक वषे माताके उदर में, ओर

English

O sacred Plant, produced aright! make sweetness, sweet thyself, for me. A charm for the increase of cattle

अध्याय 5

श्लोक 17.9

ब्रा॒ह्म॒ण ए॒व पति॒र्न रा॑ज॒न्यो॒३ न वैश्यः॑ ।तत् सूर्यः॑ प्रब्रु॒वन्ने॑ति प॒ञ्चभ्यो॑ मान॒वेभ्यः॑

brāhmaṇa eva patirna rājanyo3 na vaiśyaḥ | tat sūryaḥ prabruvanneti pañcabhyo mānavebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

१०१ कहा" हो । अथवा "एक सौ' यथा "दशशता" (मन्त्र १०); इस अथं वाणीकेनमिलनेसे भूमि जनताओं के राजाओं को पराभूत करदेतीहै (देवपीयुः) ब्राह्मण देवों की हिसा करनेवाला राजा (गरगीणंः) ब्रह्मज ओौर वेदज्ञ की (हिनस्ति) हिसा करता है, (सः) वहु राजा (पितुयाणम्) साता-पिता आदि हारा प्रापणीय (लोकम्) गृहस्थलोक को (अपि) भी (न एति) नहीं प्राप्त करता ।

English

Bull! if thou art the single bull, beget. Thou hast no vital sap.

अध्याय 5

श्लोक 17.10

पुन॒र्वै दे॒वा अ॑ददुः॒ पुन॑र्मनु॒ष्या अददुः ।राजा॑नः स॒त्यं गृ॑ह्णा॒ना ब्र॑ह्मजा॒यां पुन॑र्ददुः

punarvai devā adaduḥ punarmanuṣyā adaduḥ | rājānaḥ satyaṃ gṛhṇānā brahmajāyāṃ punardaduḥ

हिन्दी अर्थ

किदेव आदिने फिर वापस्दे दिया, कर दिया तथा मन्त्र १० मेँ देवाः, ब्रह्मजाया का विवाह नाना देवों, नाना मनुष्यो, नाना राजां के साय हआ ओर उन्होने विचार करकी ब्रह्मजाया को पुनः-पुनः वापस कर दिया, अतः प्रतीत यह होता है कि गुणकम से योग्य पतिन मिलनेके कारण बार- जाया के गुणकर्मोसे रहित जानकर, विवाह-प्रस्ताव वापसकर दिये। मे वणेन कथानक रूपमे ह, वास्तविक नहीं । पुनरदायं ब्रह्मजायां कृत्वा देवेनिकिरिबिषम् ।

English

Harm thou, O Plant, the mischievous, and drive the sorcerer away. Beat thou the Yātudhānas back, drive thou away the sorcerer;

अध्याय 5

श्लोक 17.11

पु॒न॒र्दाय॑ ब्रह्मजा॒यां कृ॒त्वा दे॒वैर्नि॑किल्बि॒षम्।ऊर्जं॑ पृथि॒व्या भ॒क्त्वोरु॑गा॒यमुपा॑सते

punardāya brahmajāyāṃ kṛtvā devairnikilbiṣam| ūrjaṃ pṛthivyā bhaktvorugāyamupāsate

हिन्दी अर्थ

बलदायक भौर प्राणदायक अन्न का (भक्त्वा) यथोचित विभाग करके (उरुगायम्) बहुत दारा गाये गये परमेदवर की (उपासते) वे उपासना उसके गुर उसे फिर उसके सम्बन्धियो के प्रति वापस कर देते 4 । जिस

English

And chase afar, O Plant, the man who fain would do us injury. As ‘twere a strip cut round from skin of a white-footed an- telope,

अध्याय 5

श्लोक 17.12

नास्य॑ जा॒या श॑तवा॒ही क॑ल्या॒णी तल्प॒मा श॑ये ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya jāyā śatavāhī kalyāṇī talpamā śaye | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

का विभाजन, गुरुकुल के आचार्यं तथा भूमिपति मिलकरकर लेते है, ताकि गुरुकुल का भी पालन-पोषण हौ सके ओर भूमिपतियों मौर ग्रामनिवासियों काभी पालन-पोषण हो सके । इस प्रकार वे सब जीवनचर्या निभाते हए, (शतवाही) सैकड़ों सैनिकों की वाहिनी का वहन करनेवाली, (कल्याणी) ओर कल्याणकारिणी (अस्य) इस राजा की (जाया) पत्नी, इसकी (तल्पम्) शय्या पर (न आशये) नहीं आकर शयन करती :0 ब्रह्मजाया को प्रचार से रोकने के विरोधमे राजाकी जायाभी राजासे रुष्ट हो जाती है। ५ न विकरणः पुषुकषिरास्तस्मिन वेश्मनि जायते ।

English

Bind, like a golden chain, O God, his witchcraft on the sorcerer. Take thou his sorcery by the hand, and to the sorcerer lead it back.

अध्याय 5

श्लोक 17.13

न वि॑क॒र्णः पृ॒थुशि॑रा॒स्तस्मि॒न् वेश्म॑नि जायते ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

na vikarṇaḥ pṛthuśirāstasmin veśmani jāyate | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

राजाके उस घर मे (विकणेः) विशिष्ट † ; त्मिक प्रचार द्वारा प्रजाजनों के जीवनो से आध्यात्मिकता हौ सके, परन्तु राजा इसे नीं चाहता, अतः उसकी (निष्कम्रीवः) सुवणं-मूद्रा-निमित हार को ग्रीवामें धारण करने । वाला, (अस्य क्षत्ता) इस राजा के रथ का वाहन करनेवाला रथी, (सूना- ॥

English

Lay it before him, face to face, that it may kill the sorcerer. Back on the wizard fall his craft, upon the curser light his curse!

अध्याय 5

श्लोक 17.14

नास्य॑ क्ष॒त्ता नि॒ष्कग्री॑वः सू॒नाना॑मेत्यग्र॒तः ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya kṣattā niṣkagrīvaḥ sūnānāmetyagrataḥ | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

नाम्) सूनारूप युद्धभूमिं मेँ (अग्रतः) अगेकी री वेदिक दृष्टिमेयुद्धभूमियां सूनारूपर्है, ब्चडखाने ह, जिनमें कि मानुष वध क्रिये जाते है, मानुष जीवन उच्च उदेश्य के लिए है (शवेतः) सफेद (कृष्णकणंः) ओर काले कानोंवाला अं

English

Let witchcraft, like a well-naved car, roll back upon the sorcerer. Whoso, for other’s harm hath dealt-woman or man-in magic arts,

अध्याय 5

श्लोक 17.15

नास्य॑ श्वे॒तः कृ॑ष्ण॒कर्णो॑ धु॒रि यु॒क्तो म॑हीयते ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya śvetaḥ kṛṣṇakarṇo dhuri yukto mahīyate | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

व राजा के (धुरि) रथ की धुरी में (युक्तः) जृता हुजा 1 (न) न (अस्य) इस राजा के (क्षेत्रं) वेतमें ( ं कमलफ़ल जिसमें कि कमलडोडे लगे रहते हँ । विसम् कमल की जड, जिसे अग्निपरिपक्व कर खाया जाताहै, जिसे कि "भिस" याभे कहते हैँ ।

English

To him we lead the sorcery back, even as a courser with a rope. Now whether thou hast been prepared by Gods or been pre- pared by men,

अध्याय 5

श्लोक 17.16

नास्य॒ क्षेत्रे॑ पुष्क॒रिणी॒ नाण्डीकं॑ जायते॒ बिस॑म्।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya kṣetre puṣkariṇī nāṇḍīkaṃ jāyate bisam| yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

(ये) जो (अस्याः ) इस पृथिवी की (दोहम्) उपज को (उपासते) भोगते है, वे (अस्म) इस राजा के लिए (पृरिनम्) पृथिवी का (न विदुहुन्ति) प्राय यहु है कि कर्मकर-कृषक मादि पथिवी के भोगों को स्वयं भोगते रहते ह, जिस राष्ट मेंब्रह्म ओर वेद के प्रचार को रोकं दिया जाता है, पृथिवी- पति--राजाको वे उसका भाग नहीं देते । (अस्य) इस राजा की (कल्याणी) कल्याणक्रारिणी (धेनुः) दुधार गौ (न) दूध नहीं देती, (न) ओर न (अनड्वान् ) शकट का वहन करनेवाला बैल (धुरम्) शकट की धरी को (सहते) सहता है, (यत्र) जिस राष्ट्र में (ब्राह्मणः) ब्राह्मण, (विजानिः) विवाहित जाया से रहित हुमा, (पापया) पापिन के साथ (रात्रि वसति) रात्रिवास करता है । जिस राष्ट मेब्रह्म ओर वेद का प्रचार रोक दिया जातादहै, उस राष्ट में अधिक दुर्व्यवस्थाहौ जानेस, पशुओं को घास-चारा नहीं मिलता, अतः दूध देनेवाल गौं भी दूध नही देतीं ओर न शकट वहन करनेवाले बैल, कमजोरो के कारण, शकट कै वहन के भारं को सहन कर सकते है

English

We, with our Indra at our side to aid us, lead thee back again. Agni, victorious in fight, subdue the armies of our foes!

अध्याय 5

श्लोक 17.17

नास्मै॒ पृश्निं॒ वि दु॑हन्ति॒ येऽस्या॒ दोह॑मु॒पास॑ते ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsmai pṛśniṃ vi duhanti ye'syā dohamupāsate | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

नेता ते देवा अददुस्तुभ्यं रेपे अत्तवे । (नृपते) दे नरपति ! (ते देवाः) उन ब्राह्मण-देवो ने (तुभ्यम्) तुचे (अत्तवे) खाने के लिए (एताम्) इस परामशं वाणी को (न अददुः) के देव है । इनके दिये परामशे कौ अवहेलना ही गोभक्षण' है ।

English

Back on the sorcerer we cast his sorcery, and beat it home. Thou who hast piercing weapons, pierce him who hath wrought it; conquer him.

अध्याय 5

श्लोक 17.18

नास्य॑ धे॒नुः क॑ल्या॒णी नान॒ड्वान्त्स॑हते॒ धुर॑म्।विजा॑नि॒र्यत्र॑ ब्रह्म॒णो रात्रिं॒ वस॑ति पा॒पया॑

nāsya dhenuḥ kalyāṇī nānaḍvāntsahate dhuram| vijāniryatra brahmaṇo rātriṃ vasati pāpayā

हिन्दी अर्थ

२४८ अथर्ववेदमाष्य करण्ड ५। अनु° ४ । सक्त १७५, । यदिखाते, तदनुसार शासन न करे, तो वह जाने कि (अद्य) आजतौ। (जीवानि) सम्भवतः मै जीवित रह सकं (मा श्वः) कल नहीं । । कर देना), परामशंवाणी को नष्ट कर देना, उसका उपयोग न करना । (एषा) यह् (गौः) परामशंवाणी, (चर्मणा आतिष्टिता) चमडं द्वारा घिरी हई, (अघविषा) हत्यारे विषवाली, (पृदाकू; इव) पृदाक्-सरपिणी के सदृश है, (सा गौः) वह परामर्णवाणी (तृष्टा) जब रक्त की प्यासी हो जातीषहै, (अनादा) तत्र अदन-योग्या अति विनष्ट करने योग्य नहीं होती, शासन मे उपेक्षणीया नहीं होती ।

English

We do not sharpen thee to slay the man who hath not practised it. Go as a son goes to his sire: bite as a trampled viper bites.

अध्याय 5

श्लोक 18.1

ब्रह्मरावी १-१५ मयोभूः।ब्रह्मगवी।अनुष्टुप्, ४ भुरिक् त्रिष्टुप्, ५,८-९,१३ त्रिष्टुप्।नैतां ते॑ दे॒वा अ॑ददु॒स्तुभ्यं॑ नृपते॒ अत्त॑वे ।मा ब्रा॑ह्म॒णस्य॑ राजन्य॒ गां जि॑घत्सो अना॒द्याम्

brahmarāvī 1-15 mayobhūḥ| brahmagavī| anuṣṭup, 4 bhurik triṣṭup, 5,8-9,13 triṣṭup| naitāṃ te devā adadustubhyaṃ nṛpate attave | mā brāhmaṇasya rājanya gāṃ jighatso anādyām

हिन्दी अर्थ

पितृयाणम् पितृयाणम् पद के साथ प्रायः पथ' शब्द का कथन होता कियाहुजाभीहो तो दण्डरूप में वह् गृहस्थ जीवन से वञ्चित कर दिया (वै) निङ्चय से (नः) हमारा (पदवायः) पथ-प्रदशेक है (अग्निः) यज्ञियाग्नि, ओर (सोमः) सोमयज्ञ है (दायादः) दाय का अदन करनेवाला उत्तराधिकारी पुत्र । (हन्ता) हमारे शत्र का टंनन करनेवाला ओर

English

The abduction and restoration of a Brāhman’s wife These first, the boundless Sea, and Mātarisvan, fierce glowing

अध्याय 5

श्लोक 18.2

अ॒क्षद्रु॑ग्धो राज॒न्यः पा॒प आ॑त्मपराजि॒तः ।स ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ गाम॑द्याद॒द्य जी॑वानि॒ माश्वः

akṣadrugdho rājanyaḥ pāpa ātmaparājitaḥ | sa brāhmaṇasya gāmadyādadya jīvāni māśvaḥ

हिन्दी अर्थ

हई, (सा) वहं (यावत्) जब तक (अभि विजद्धहै) इधर-उधर विलोडित हनन करती रहती है ओर राष्ट मे (वीरः) वीर-सन्तानया वीर योद्धातब तक (वृषा) सुखवर्षी (न जायते) नहीं उत्पन्न होता । (अस्याः) इस गवी गोः का (आशसनम्) काटना (क्ररम्) करर पिशितम्) मास (तुष्टम्) तृषाजनक है जबकि खाने के लिए (अस्यते) इसका आदान किया जाता है; (यद्) जो (अस्याः) इसका (क्षीरम्) दूध (पीयते) दिसते किया जाताहै, गौओं की हिसा करके

English

Through him Brihaspati obtained his consort, as the Gods gained the ladle brought by Soma. Thus spake of her those Gods of old, Seven Rishis, who sate them down to their austere

अध्याय 5

श्लोक 18.3

आवि॑ष्टिता॒घवि॑षा पृदा॒कूरि॑व॒ चर्म॑णा ।सा ब्रा॑ह्म॒णस्य॑ राजन्य तृ॒ष्टैषा गौर॑ना॒द्या

āviṣṭitāghaviṣā pṛdākūriva carmaṇā | sā brāhmaṇasya rājanya tṛṣṭaiṣā gauranādyā

हिन्दी अर्थ

२५६ अथवेवेदभाध्य काण्ड ५। अनु० ४। सुक्त १६ दूध में कमी कर दी जाती है, (तत्) वह त्रिविधकमं (वै) निश््चयसे संसदों मे (किल्बिषम्) पाप मानाहै।

English

devotion: Dire is a Brāhman’s wife led home by others: in the supremest heaven she plants confusion.

अध्याय 5

श्लोक 18.4

निर्वै क्ष॒त्रं नय॑ति॒ हन्ति॒ वर्चो॒ऽग्निरि॒वार॑ब्धो॒ वि दु॑नोति॒ सर्व॑म्।यो ब्रा॑ह्म॒णं मन्य॑ते॒ अन्न॑मे॒व स वि॒षस्य॑ पिबति तैमा॒तस्य॑

nirvai kṣatraṃ nayati hanti varco'gnirivārabdho vi dunoti sarvam| yo brāhmaṇaṃ manyate annameva sa viṣasya pibati taimātasya

हिन्दी अर्थ

हिसाकर्मा (निरुक्त ४।४।२५; तथा शब्द चयसे' (५८) ।' पितृषु = पिताओं मे, यथा “चारु वदानि पितरः संगतेषु" (अथवं ० ७।१३।१) इस प्रकार वेदोंमेगौका काटना, उसके मांसको खाना ओर गौभोंकी संख्या को कम कर उनके दध्मे क्षति पहूंचाना वेद-विरुद्ध दर्शाया है । (यः) जो (उग्रः राजा) उग्र राजा (मन्यमानः) अभिमानी होकर ५ पहुंचानेवाले राजा करे (राष्टरम्) राष्टरको (अव धूनुते) कपा वही परामशंवाणी कहेगा जोकि वेदवाणी के अनुकूल हो । अतः इन दोनों

English

When infants die, untimely born, when herds of cattle waste away, When heroes strike each other dead, the Brāhman’s wife destroyeth them.

अध्याय 5

श्लोक 18.5

य ए॑नं॒ हन्ति॑ मृ॒दुं मन्य॑मानो देवपी॒युर्धन॑कामो॒ न चि॒त्तात्।सं तस्येन्द्रो॒ हृद॑ये॒ऽग्निमि॑न्धे उ॒भे ए॑नं द्विष्टो॒ नभ॑सी॒ चर॑न्तम्

ya enaṃ hanti mṛduṃ manyamāno devapīyurdhanakāmo na cittāt| saṃ tasyendro hṛdaye'gnimindhe ubhe enaṃ dviṣṭo nabhasī carantam

हिन्दी अर्थ

मे तादात्म्य उचित दही है। वेदवाणी अष्टापदी है। यथा “वाचमष्टापदी- अर्थात् निरर्थक निपात भी कहे जोकि वेदे अनथक नहीं माने जा सकते । आठ पैरोंवाली, चार आंखोवाली, चार कानौंवाली, चार हनुभोवाली, दविमृंही तथा हिजिह्व नहीं हो सकती । एक व्यास्याकारने गौ को गर्भवती

English

Even if ten former husbands—none a Brāhman—had espoused a dame, And then a Brāhman took her hand, he is her husband, only he,

अध्याय 5

श्लोक 18.6

न ब्रा॑ह्म॒णो हिं॑सित॒व्यो॒३ऽग्निः प्रि॒यत॑नोरिव ।सोमो॒ ह्यऽस्य दाया॒द इन्द्रो॑ अस्याभिशस्ति॒पाः

na brāhmaṇo hiṃsitavyo3'gniḥ priyatanoriva | somo hya'sya dāyāda indro asyābhiśastipāḥ

हिन्दी अर्थ

है, यह् कथन सर्वथा असंगत प्रतीत हीता दे । वेदवाणी अष्टापदी है, इसकी व्याख्या हौ चुकी दहै । वह चतुरक्षी बह आती है, (इव) जैसेकि (भिन्नम्) विदौणे हुई (नावम्) नोकामें (हन्ति) हनन करती है, (द्च्छना) दुर्गति ।

English

Not Vaisya, not Rājanya, no, the Brāhman is indeed her lord: This Sūrya in his course proclaims to the Five Races of man- kind.

अध्याय 5

श्लोक 18.7

श॒तापा॑ष्ठां॒ नि गि॑रति॒ तां न श॑क्नोति निः॒खिद॑म्।अन्नं॒ यो ब्र॒ह्मणां॑ म॒ल्वः स्वा॒द्व॑१द्मीति॒ मन्य॑ते

śatāpāṣṭhāṃ ni girati tāṃ na śaknoti niḥkhidam| annaṃ yo brahmaṇāṃ malvaḥ svādva1dmīti manyate

हिन्दी अर्थ

२. चतुरहं नुः == अथवा "काम, क्रोध, लभ, मोह, --ये चार् वजंनीयंरहु, हन्तव्य वेद के चार सदपदेश ष्टु" रूप हुः = हन हिसायाम् (अदादिः), वे इन हनन करता है लोभकाओौर यथाथ ज्ञान हनने करताहै मोह का। २५८ अथर्ववेदमाष्य काण्ड ५।अनु° ४। सूक्त १६

English

So then the Gods restored her, so men gave the woman back again. Princes who kept their promises restored the Brāhman’s wedded wife.

अध्याय 5

श्लोक 18.8

जिह्वा॒ ज्या भव॑ति॒ कुल्म॑लं॒ वाङ्ना॑डी॒का दन्ता॒स्तप॑सा॒भिदि॑ग्धाः ।ते भि॑र्ब्रह्मा वि॑ध्यति देवपी॒यून् हृ॑द्ब॒लैर्धनु॑र्भिर्दे॒वजू॑तैः

jihvā jyā bhavati kulmalaṃ vāṅnāḍīkā dantāstapasābhidigdhāḥ | te bhirbrahmā vidhyati devapīyūn hṛdbalairdhanurbhirdevajūtaiḥ

हिन्दी अर्थ

तं वृक्षा अप॑ सेधन्ति छायां नो मोप॑गा इति । (नारद) है जापः" के सदृश शान्तिदायक परमेश्वर ¦ (यः) जो सेधन्ति) परे हटा देते ह (इति) यह् कहकर कि (नः छायाम् ) हमारी छाया के (उप) समीप (मागाः) त् गमननकेर। ==मन स्तम्भे (चुरादिः) । स्तम्भः = रोक देना, का्यंकारी न होने देना । वणन कविता की भाषामें है, वृक्ष बोल नहीं सकते ।

English

Having restored the Brāhman’s wife, and freed them, with Gods’ aid, from sin, They shared the fulness of the earth and worn themselves ex- tended sway.

अध्याय 5

श्लोक 18.9

ती॒क्ष्णेष॑वो ब्राह्म॒णा हे॑ति॒मन्तो॒ यामस्य॑न्ति शर॒व्यां॒३ न सा मृषा॑ ।अ॒नु॒हाय॒ तप॑सा म॒न्युना॑ चो॒त दू॒रादव॑ भिन्दन्त्येनम्

tīkṣṇeṣavo brāhmaṇā hetimanto yāmasyanti śaravyāṃ3 na sā mṛṣā | anuhāya tapasā manyunā cota dūrādava bhindantyenam

हिन्दी अर्थ

(राजा, वरुणः, अब्रवीत्) राजा वरुण बौला कि (एतत्) यह परामशंवाणीरूपी गौ को (जग्ध्वा) खाकर विनष्ट कर, उपेक्षित कर (राष्ट) राष्ट मे (कश्चन) कोर््भी राजा (न जागार) नहीं जागा, वनीय (पराभवन्) पराजय को प्राप्त हुई ।

English

No lovely wife who brings her dower in hundreds rests upon his bed, Within whose kingdom is detained, through want of sense, a

अध्याय 5

श्लोक 18.10

ये स॒हस्र॒मरा॑ज॒न्नासन् दशश॒ता उ॒त।ते ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ गां ज॒ग्ध्वा वै॑तह॒व्याः परा॑भवन्

ye sahasramarājannāsan daśaśatā uta| te brāhmaṇasya gāṃ jagdhvā vaitahavyāḥ parābhavan

हिन्दी अर्थ

प्रकार (तत्) उसे (वेधसः) मेधावी पुरुष (विदुः) जानते है। १. वस्तुतः एकतम् = एक सौ, यथा दशकताः = दससौ (सन्त १०) । इस प्रकार दोनों पदों के अर्थो मे अनुरूपता हौ जाती है । वेधाः मेधाविनाम (निषं° ३।१ ५) 1 निरीहं ओर परोपकारी (नृपते) है नरो के पति ! (दषुः दव) बाण की तरह (दिग्धा) विष

English

Fire, the Strong, the Bliss-bestower, And heavenly Floods, first-born by holy Order, exclaimed against the outrage on a Brāhman.

अध्याय 5

श्लोक 18.11

गौरे॒व तान् ह॒न्यमा॑ना वैतह॒व्याँ अवा॑तिरत्।ये केस॑रप्राबन्धायाश्चर॒माजा॒मपे॑चिरन्

gaureva tān hanyamānā vaitahavyā~ avātirat| ye kesaraprābandhāyāścaramājāmapeciran

हिन्दी अर्थ

सम्पृक्तः; तथा (गोपते) है पृथिवी के पतिया गौओं के पति ! राजन् वहं परामश वाणी, (घोरा) र है, (तया) उस द्वारा (पीयतः ) हिसक क ( विध्यति) वह ब्राह्मण बींधता ह ।

English

King Soma first of all, without reluctance, made restitution of the Brāhman’s consort. Mitra and Varuna were the inviters: Agni as Hotar took her hand and led her.

अध्याय 5

श्लोक 18.12

एक॑शतं॒ ता ज॒नता॒ या भूमि॒र्व्यऽधूनुत ।प्र॒जां हिं॑सि॒त्वा ब्राह्म॑णीमसंभ॒व्यं परा॑भवन्

ekaśataṃ tā janatā yā bhūmirvya'dhūnuta | prajāṃ hiṃsitvā brāhmaṇīmasaṃbhavyaṃ parābhavan

हिन्दी अर्थ

को गोपति कहा है, गौओं का रक्षक, न कि भक्षक, अततः सूक्त मेग । परामश उत, इव) मानो न केवल इतनी वृद्धि हं । अपितु (दिवम्) यलोक का हव्याः) खाच अन्न सेभी विगत होकर, (पराभवन्) पराभूत हो गये, 4 9 4 व भृगु है भृञ्यमान, अर्थात् परिपक्व हुञा, 4 ध मं शविः का अभिप्रायहैज्ञानाचिः, ज्ञान-

English

The man, her pledge, must by the hand be taken when he hath cried, She is a Brāhman’s consort.

अध्याय 5

श्लोक 18.13

दे॒व॒पी॒युश्च॑रति॒ मर्त्ये॑षु गरगी॒र्णो भ॑व॒त्यस्थि॑भूयान्।यो ब्रा॑ह्म॒णं दे॒वब॑न्धुं हि॒नस्ति॒ न स पि॑तृ॒याण॒मप्ये॑ति लो॒कम्

devapīyuścarati martyeṣu garagīrṇo bhavatyasthibhūyān| yo brāhmaṇaṃ devabandhuṃ hinasti na sa pitṛyāṇamapyeti lokam

हिन्दी अर्थ

ठव गये । यह कथन काल्पनिक नहीं, अपितु यथाथ है। वैज्ञानिक दारा युलौक तक पहुंच शये । वतेमान में भौ (वैज्ञानिक! कोह तकं सशरीर पहुंच चुके हँ भौर ग्रहों तथा ग्रहों के ऊपर आकाशगङ्गा तक परिचय कलायन्त्रों हारा प्राप्त कर रहे हँ । + व ५. जो (जनाः) प्रजा के जन या अधिकारीजन (बृहत्सामानम्)

English

She stayed not for a herald to conduct her: thus is the kingdom of a ruler guarded. She whom they call the star with loosened tresses, descending as. misfortune on the village,

अध्याय 5

श्लोक 18.14

अ॒ग्निर्वै नः॑ पदवा॒यः सोमो॑ दाया॒द उ॑च्यते ।ह॒न्ताभिश॒स्तेन्द्र॒स्तथा॒ तद् वे॒धसो॑ विदुः

agnirvai naḥ padavāyaḥ somo dāyāda ucyate | hantābhiśastendrastathā tad vedhaso viduḥ

हिन्दी अर्थ

कर देनेवाले-राजा को तथा (तोकानि) उसके अपत्योंको ब्राहमण है । तोकानिन्=अपस्यानि “तोकम् अपत्यनाम' (निघं० २।२ ) ४ = स्वभाववाला ओौर प्रजाजन तथा अधिकारीजनों को क्रोधी स्वभाववाल है, जोकि प्रजाजन ओर अधिकारियों के स्वाथ के अनुकूल नही, अतः वे

English

The Brāhman’s consort, she disturbs the kingdom where hath appeared the hare with fiery flashing.

अध्याय 5

श्लोक 18.15

इषु॑रिव दि॒ग्धा नृ॑पते पृदा॒कूरि॑व गोपते ।सा ब्रा॑ह्म॒णस्येषु॑र्घो॒रा तया॑ विध्यति॒ पीय॑तः

iṣuriva digdhā nṛpate pṛdākūriva gopate | sā brāhmaṇasyeṣurghorā tayā vidhyati pīyataḥ

हिन्दी अर्थ

(अस्मिन्) इसपर (शल्कम्) "कर (ईषिरे) लगाना चाहते है, (ते) वे खादन्तः) परस्पर के केशो को नोचते हुए (आसते) रहते है । करना है तथा जिनका दायाद (१८।१४ ) सोमयज्ञ है, जिनका धन प्रजा के उपकार के लिए है, उनपर "कर लगाना-ये दोनों अपराधरूप रह । प्रजा इसे सहन न कर अधिकारियों कै विरोध में विप्लव पर उतारू होकर, पारस्परिक युद्ध में रुधिर प्रवाहित करती ओर क्लेण भोगती रहती है ।

English

Active in duty serves the Brahmachāri: he is a member of the Gods’ own body.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।