Atharva Veda
6
अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 1/8 · श्लोक 1.1–21.3

पूर्ण अध्याय पाठ64 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 1.1

अमृतप्रदाता १-३ अथर्वा।सविता।उष्णिक्, १ त्रिपदा पिपिलिकमध्या साम्नी जगती, २-३ पिपीलिकमध्या पुरउष्णिक्।दो॒षो गा॑य बृ॒हद् गा॑य द्यु॒मद् धे॑हि ।आथ॑र्वण स्तु॒हि दे॒वं स॑वि॒तार॑म्

amṛtapradātā 1-3 atharvā| savitā| uṣṇik, 1 tripadā pipilikamadhyā sāmnī jagatī, 2-3 pipīlikamadhyā purauṣṇik| doṣo gāya bṛhad gāya dyumad dhehi | ātharvaṇa stuhi devaṃ savitāram

हिन्दी अर्थ

का० ६। अनु० १। सूु०२ अथवेवेद-भाष्य रै इससे प्रतीत होता है कि मन्त्र मे “सोम द्वारा सोम॒ ओषधि भौर उसका रस ही नही, अपितु प्रकरणानुसार सोम के अन्याथं भी हते ईहै। पृथिवी भोगी = पाथिव भोगों में भासक्त पुरुष । वाली, (मृधः) तथा संग्रामकारौ हमरो दुर्भावनां का (विजहि) विक्ष- युवा जेतेशानः स पुरुष्टुतः ॥३॥ (पुरुष्टूतः) बहुत स्तुत हुभा (जता) विजय प्राप्त करता है । वह (युवा) सदा युवा है, (ईशानः) ओर अधीश्वर है ।

English

In praise of Savitar Sing, Atharvana, at eve, sing loudly, bring a splendid present: hymn God Savitar with praises. Yea, praise him whose home is in the river, Son of Truth, the youthful, gracious friend whose

अध्याय 6

श्लोक 1.2

तमु॑ ष्टुहि॒ यो अ॒न्तः सिन्धौ॑ सू॒नुः ।स॒त्यस्य॒ युवा॑न॒मद्रो॑घवाचं सु॒शेव॑म्

tamu ṣṭuhi yo antaḥ sindhau sūnuḥ | satyasya yuvānamadroghavācaṃ suśevam

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर को “युवा ओर जेता” कहा है । ४ अथववेद-भाष्यं का० ६। अनु° १।सु०३ (अदितिः) पृथिवी ओौर. (मरुतः) मानसून वा्रुएं (पान्तु) रक्षा कर) रक्षा करे, (विष्णुः) किरणों से व्याप्त सूये (उत) तथा (यौः) चुलोक (नः) हमारी (पातु) रक्षा करे। अतः उसी से इन आदिद्वारा रक्षा की प्राथना की गई दहै ।

English

word is guileless. Savitar our God shall send us many everlasting treasures, that both paths may well be travelled.

अध्याय 6

श्लोक 1.3

स घा॑ नो दे॒वः स॑वि॒ता सा॑विषद॒मृता॑नि॒ भूरि॑ ।उ॒भे सु॑ष्टुती सु॒गात॑वे

sa ghā no devaḥ savitā sāviṣadamṛtāni bhūri | ubhe suṣṭutī sugātave

हिन्दी अर्थ

करती है 1 मरुतः हँ मानसून वायुएं । यथा “ उदीरयत मरुतः समुद्रात्” (अथव ४।१५५), “हे मरुतो ¦ तुम समुद्र से ऊपर की ओर गति करो” । तथा (अथर्वे० ५।२७।४,५) । अपांनपात् = यह है मेघ . मे चमकती तथा काठ ६ ।-अनु० १। सु० ३ अथवेवेद-भाष्य ५ पातुं नो देवी सुभगा सर॑स्वती पात्वभ्निः शिवा गे अस्य पायवः ।।२॥ ओौर पृथिवी (नः) हमारे (पाताम्) रक्षा करे, (ग्रावा). सोप्न. ओषधि के पीसने की शिलां (नः) हमारी (अंहसः) हत्या से (पाचु) रक्षा करे, मौर

English

In praise of Indra For Indra, ministering priests! run ye and press the Soma juice, That he may hear his praiser’s word, and this my call.

अध्याय 6

श्लोक 2.1

आत्मगोपनम्।१-३ अथर्वा।सोमः, वनस्पतिः।परोष्णिक्।इन्द्रा॑य॒ सोम॑मृत्विजः सु॒नोता च॑ धावत ।स्तो॒तुर्यो वचः॑ शृ॒णव॒द्धवं॑ च मे

ātmagopanam| 1-3 atharvā| somaḥ, vanaspatiḥ| paroṣṇik| indrāya somamṛtvijaḥ sunotā ca dhāvata | stoturyo vacaḥ śṛṇavaddhavaṃ ca me

हिन्दी अर्थ

(सोमः) सोम ओषधि (पातु) हत्या से रक्ता करे) (सुभगा) उत्तम, भृगो य्ञियाग्नि के (ये) जो (शिवाः) कल्याणकारो (पायवः) रक्षक गुण हँ वै हमारी रक्षा करे । माहूत सोम ओषधि ओर सोमरस तया शब्दमयी वेदवाणो की शिक्षा । माहुतियो द्वारा उत्थित धूम पृथिवी मौर पृथिवी के वागुमण्डल में फल प्रकाश ओर ताप दसम सहायक होता है । रोगनिवारण भौर स्वास्थ्य प्रदानं मे सोम ओषधि, तथा सोमरस के अद्भूत गुण वेदों मे वणित हए षड्विध भगो का वर्णन है, अतः वेदवाणी को सुभगा कहा है ।

English

Thou into whom the drops find way as sap pours life into a tree, Drive off in thine abundant might our demon foes. For Indra, thunder-armed, who drinks the Soma press the Soma out:

अध्याय 6

श्लोक 2.2

आ यं वि॒शन्तीन्द॑वो॒ वयो॒ न वृ॒क्षमन्ध॑सः ।विर॑प्शि॒न् विमृधो॑ जहि रक्ष॒स्विनीः॑

ā yaṃ viśantīndavo vayo na vṛkṣamandhasaḥ | virapśin vimṛdho jahi rakṣasvinīḥ

हिन्दी अर्थ

(अभिधा ती) कुटिलता अर्थात् विकृति मे (पानात्) मेघीय वियुत (सवंतातये) सब सुखां के विस्तार के लिये (वधय) हमारो वृद्धि कर । ६ अयववेद-भाष्य का० ६। अनु० १।सु०४ पद ६९) । अपांनपात् =जलं का अपत्य है मेध, ओरं मेष का मपत्य है है भौमो विद्युत्", इस द्वारा प्राण को विषति का इलाज होता है। अपा.

English

He, youthful, conqueror, and Lord is praised by all. A prayer to various deities for protection and prosperity Guard us the Maruts! Guard us well, O Indra, Piishan, Aditi.

अध्याय 6

श्लोक 2.3

सु॒नोता॑ सोम॒पाव्ने॑ सोम॒मिन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ ।युवा॒ जेतेशा॑नः॒ स पु॑रुष्टु॒तः

sunotā somapāvne somamindrāya vajriṇe | yuvā jeteśānaḥ sa puruṣṭutaḥ

हिन्दी अर्थ

द्वारा बह स्वस्य रहता ओौरशरीरका पोषण करताहै। यहु है ऋ 1 थक है । निरक्त में कहा है कि “सवतत सर्वासु कमंततिषु ॥ (११।२३।२४; पद २३ अदितिः) इस प्रकार “ताता =तातौ, तनु, विस्तारे" सार्थक हो स्तुति-वचन समूह को (पातु) रक्षा करे ओर (्रातुर्भिः) परस्पर रातू रूप मे वतंमान (पुवः) पुरो वालो (अदितिः) अदीना अर्थात् भक्षया का० ६ । अनु° १। सू० ४ अथर्वेवेद-भाष्य ७ त्राण करने वाले (सहः) तथा शतुपराभवकारी बल कौ रक्षा करे ।

English

Guard us, O Waters’ Child, and Rivers Seven. May Vishnu guard us, and the Sky. May Heaven and Earth take care of us for victory, may Pressing Stone and Soma save us from distress. Sarasvati, auspicious Goddess, guard us well: preserve us Agni and his kind protecting

अध्याय 6

श्लोक 3.1

आत्मगोपनम्।१-३ अथर्वा।१ इन्द्रपूषणौ, अदितिः, मरुतः, अपां नपात्, सिन्धवः, विष्णुः, द्यौः,२ द्यावापृथिवी, ग्रावा, सोमः, सरस्वती, अग्निः,३ अश्विनौ, उषासानक्ता, अपां नपात्, त्वष्टा।जगती, पथ्याबृहती।पा॒तं न॑ इन्द्रापूष॒णादि॑तिः॒ पान्तु॑ म॒रुतः॑ ।अपां॑ नपात् सिन्धवः स॒प्त पा॑तन॒ पातु॑ नो॒ विष्णु॑रु॒त द्यौः

ātmagopanam| 1-3 atharvā| 1 indrapūṣaṇau, aditiḥ, marutaḥ, apāṃ napāt, sindhavaḥ, viṣṇuḥ, dyauḥ,2 dyāvāpṛthivī, grāvā, somaḥ, sarasvatī, agniḥ,3 aśvinau, uṣāsānaktā, apāṃ napāt, tvaṣṭā| jagatī, pathyābṛhatī| pātaṃ na indrāpūṣaṇāditiḥ pāntu marutaḥ | apāṃ napāt sindhavaḥ sapta pātana pātu no viṣṇuruta dyauḥ

हिन्दी अर्थ

अदितिः अदोना देवमाता (निरुक्त ४।४।२३; अदिति पद ४६) । मिटा देना । पूत्रैः भ्रातृभिः = परमेश्वर माता के हम सब पुत्र है भतः (अंशः) अन्नादि का आंशिक विभागकर््ता “अधिकारी', (भगः) (मित्रः) परराष्ट्रं के साथ मैत्री बढ़ाने वाला “विदेशनीति का दूतः, (अयमा) मूख्य न्यायाधीश, (अदितिः) राजनीति को शिक्षा देने वाली वेदवाणी, (मरुतः) तथा सेनिक (पान्तु) ये सब हम प्रजाजनों कीरक्षा करे । (तस्य) उस शत्रुका (अभिहतः) कुटिल द्वेषः) हमारे साय “अंशा धिकारी” इसे विभक्ता भी कहा है यथा “विभक्तारछ हवामहे वसो-

English

powers. Preserve us both the Asvins, Gods and Lords of Light, and let the Dawns and Night bring us deliverance.

अध्याय 6

श्लोक 3.2

पा॒तां नो॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॒भिष्ट॑ये॒ पातु॒ ग्रावा॒ पातु॒ सोमो॑ नो॒ अंह॑सः ।पातु॑ नो दे॒वी सु॒भगा॒ सर॑स्वती॒ पात्व॒ग्निः शि॒वा ये अ॑स्य पा॒यवः॑

pātāṃ no dyāvāpṛthivī abhiṣṭaye pātu grāvā pātu somo no aṃhasaḥ | pātu no devī subhagā sarasvatī pātvagniḥ śivā ye asya pāyavaḥ

हिन्दी अर्थ

।. अयर्वेवेद-भाष्य का० ६॥ अनु १। सूु० ५ (अश्विना) पुण्यकर्म वाले दो राजा (नः ) हमारी (सम् ४ ) किये ( नः उरुष्य) हमारी रक्षा कर । (दयौः, पितः) है द्युलोक त के सदृश सदा चतिसम्पन्न सव के पिता परमेश्वर ! (या दुच्छुना जो दुःखः दायिसुख को ओर हमारे प्रवृत्ति है उसे (यावय) हम से पृथक् कर । अरिविना पण्यकरतौ राजानौ (निरुक्त २।११; अश्नी पद १), सम्भवतः सम्राट् ओर वण राजा (यजु° ८।३७ । ये दोनों भरना को वेदों में एकराट् तथा जनराट् भी कहा है '(अथव० ३।४।१; २ ध

English

The Waters’ Child protect our house from every harm. Do thou, God Tvashtar, make us strong for health and wealth. A hymn to various deities for protection

अध्याय 6

श्लोक 4.1

१-३ अथर्वा।१ त्वष्टा, पर्जन्यः, ब्रह्मणस्पतिः, अदितिः, २ अंशः, भगः, वरुणः, मित्रः, अर्यमा, अदितिः, मरुतः,३ अश्विनौ, द्यौष्पिता।पथ्याबृहती, २ संस्तारपङ्क्तिः, ३ त्रिपदा विराड्गायत्री।त्वष्टा॑ मे॒ दैव्यं॒ वचः॑ प॒र्जन्यो॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ ।पु॒त्रैर्भ्रातृ॑भि॒रदि॑ति॒र्नु पा॑तु नो दु॒ष्टरं॒ त्राय॑माणं॒ सहः॑

1-3 atharvā| 1 tvaṣṭā, parjanyaḥ, brahmaṇaspatiḥ, aditiḥ, 2 aṃśaḥ, bhagaḥ, varuṇaḥ, mitraḥ, aryamā, aditiḥ, marutaḥ,3 aśvinau, dyauṣpitā| pathyābṛhatī, 2 saṃstārapaṅktiḥ, 3 tripadā virāḍgāyatrī| tvaṣṭā me daivyaṃ vacaḥ parjanyo brahmaṇaspatiḥ | putrairbhrātṛbhiraditirnu pātu no duṣṭaraṃ trāyamāṇaṃ sahaḥ

हिन्दी अर्थ

बुद्धि “दुच्छुना प्रवृत्ति” को विरोधिनी है । कै०६। अनु० १। सु० ५ अथवेवेद-भाष्य ३ व उन्नति के मागं परले चल । (एनम्) इमे (वचसा) तेज के साथ ( सम् । भज) संयुक्त कर, (च) भौर (प्रजया) इन्द्रम भतरं कपि सजातानांमसद् व॒शी ।

English

May Tvashtar, Brāhmanaspati, Parjanya hear my holy prayer. May Aditi with all her sons, the brothers, guard us, invincible, protecting power. May Ansa, Bhaga, Varuna, and Mitra, Aryaman, Aditi, and

अध्याय 6

श्लोक 4.2

अंशो॒ भगो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मादि॑तिः॒ पान्तु॑ म॒रुतः॑ ।अप॒ तस्य॒ द्वेषो॑ गमेदभि॒ह्रुतो॑ यावय॒च्छत्रु॒मन्ति॑तम्

aṃśo bhago varuṇo mitro aryamāditiḥ pāntu marutaḥ | apa tasya dveṣo gamedabhihruto yāvayacchatrumantitam

हिन्दी अर्थ

ताकि समान षर मे उत्पन्न हुओं को (वशी) वश मँ करने वाला (सत्) यह हो जाय । ..(सयस्पोषेण) धन की सम्पुष्टि के साथ (संसुज) इस का संसग कर । (शातते) जीने के लिये इसे (जरसे) जरावस्था तक (नय) प्राप्त करा, पहुंचा । रखने के लिये बड़ भाई की “जाधथिक समृद्धि” चाहिए ताकि वहू परिवार के सव व्यक्तियों का पालन-पोषण कर सके । इसलिये “धन की पुष्टि” के साथ उसका संसं भो मावश्यक है । - १० अथर्ववेद-भाष्य का० ६। अनु° १। सू ६ का०६। जनु° १। सु° ७ अथववेद-भाष्य ११ (यस्य) जिस के (गृहे) घर में (हविः कृण्मः) हविर्न हम करते है ¦ भपमानित पुरूष (नः) हम (सुशंसिनः) उत्तम कीति वालों अर्थात् सुमा-

English

Maruts guard us. May we be freed from that oppressor’s hatred. May he keep off that foeman who is near us. May both the Asvins further our devotion. With ceaseless care deliver us, Wide-Ranger! O

अध्याय 6

श्लोक 4.3

धि॒ये सम॑श्विना॒ प्राव॑तं न उरु॒ष्या ण॑ उरुज्म॒न्नप्र॑युछन्।द्यौ॒३ष्पित॑र्या॒वय॑ दु॒च्छुना॒ या

dhiye samaśvinā prāvataṃ na uruṣyā ṇa urujmannaprayuchan| dyau3ṣpitaryāvaya ducchunā yā

हिन्दी अर्थ

मापः स प्रजापतिः” (यजु° ३२१) । “गृहस्थी व्यक्ति” को राजनैतिक ध्यक (यजु° १७।४०) ओर वैदिक विदान् का कथन भी मन््रमे हुमा है, ताकि इन दोनो का सहयोग यज्ञकर्ता को मिल सके । मन्त्र॒२मे पारि. को, (भुन्वते) भक्तिरस वाले, (यजमानाय) देवपुजा, सङ्गति करने वाले तथा दानी (मे) मेरे लिये (रन्धयासि) तू वशमें कर दे। = यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु (भ्वादिः) ।

English

Father Heaven, keep from us all misfortunes. A prayer to Agni and Indra for the well being of a princely patron Agni, adored with sacred oil, lift up this man to high estate.

अध्याय 6

श्लोक 5.1

वर्चः प्राप्तिः १-३ अथर्वा।१ अग्निः, २ इन्द्रः, ३ अग्निः, सोमः, ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्, २ भुरिक्।उदे॑नमुत्त॒रं न॒याग्ने॑ घृ॒तेना॑हुत ।समे॑नं॒ वर्च॑सा सृज प्र॒जया॑ च ब॒हुं कृ॑धि

varcaḥ prāptiḥ 1-3 atharvā| 1 agniḥ, 2 indraḥ, 3 agniḥ, somaḥ, brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup, 2 bhurik| udenamuttaraṃ nayāgne ghṛtenāhuta | samenaṃ varcasā sṛja prajayā ca bahuṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

योनः सोम सृशंसिनों दु.शंसं आदिहैशति; (सोम) है सेनाध्यक्ष ! (यः) जो (दुःशंसः) बुरी कीति वाला अर्थात् । नितों को (आदिदेशति) आदेश देता है; (अस्य) इस के (मूख) मुख पर दारा सम्यक् रूप से पिसा हआ (अपायति) संसार से विगत हौ जाय । सोम = यजु° (१७४०) । शंसु स्तुतौ (भ्वादिः) स्तुति = कीति । । भपायति--अप (अलग होकर) +-अय (गतौ, भ्वादिः) ।

English

Endow him with full store of strength and make him rich in progeny. 72 Advance him, Indra! Let him be ruler of all akin to him.

अध्याय 6

श्लोक 5.2

इन्द्रे॒मं प्र॑त॒रं कृ॑धि सजा॒ताना॑मसद् व॒शी।रा॒यस्पोषे॑ण॒ सं सृ॑ज जी॒वात॑वे ज॒रसे॑ नय

indremaṃ prataraṃ kṛdhi sajātānāmasad vaśī| rāyaspoṣeṇa saṃ sṛja jīvātave jarase naya

हिन्दी अर्थ

(सोम) है सेनाध्यक्ष ! (यः) जो (सनाभिः) समान नाभिवाला अर्थात् पराया, (नः) हमारा (अभिदासति) क्षय करता हैया हमे दास बनाता ्, (तस्य) उसके (बलम्) बल को तथा सैनिक बल को (अप तिर) नष्ट कर, (दव) जसे (मही यौः) विस्तृत चुलोक (वधत्मना ) निज बाधक या । धातक स्वरूप द्वारा अन्धकार को नष्ट करता है । भी । “लोक” सूरय, नक्षत्रों तथा तारां दवारा सदा जगमग्राता है, ओर

English

Grant him sufficiency of wealth: guide him to life and length of days. Prosper this man, O Agni, in whose house we offer sacrifice. May Soma bless him, and the God here present, Brāhmanaspati.

अध्याय 6

श्लोक 5.3

यस्य॑ कृ॒ण्मो ह॒विर्गृ॒हे तम॑ग्ने वर्धया॒ त्वम्।तस्मै॒ सोमो॒ अधि॑ ब्रवद॒यं च॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑

yasya kṛṇmo havirgṛhe tamagne vardhayā tvam| tasmai somo adhi bravadayaṃ ca brahmaṇaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

(सोम) है सेनाध्यक्न ! (येन यथा) जिस मागं से (अदितिः) माता है, (तेन अवसा) उस पारस्परिक रक्षा करने वाले मां दारा मदिति=पृथिवो, वाक्, गौः (निषं० १।१; १।११; २।११) । वेद की रथात् वेदमाता (अथवं° १९।७१।१) । गौः तो माता प्रसिद्ध ही है)! इस भकार अदिति द्वारा इन तीनोंका भो प्रहूण हो सके इसलिये अदिति का अथं “अदीना देवमाता” (निस्त ४५४।१३) न होकर संकुचिताथं ही, :

English

A prayer to Brāhmanaspati for protection from wicked men The godless man whoever plots against us, Brāhmanaspati, Thou shalt give up as prey to me the worshipper who pour the juice.

अध्याय 6

श्लोक 6.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।१ ब्रह्मणस्पतिः, २-३ सोमः।अनुष्टुप्।यो॒३स्मा॑न् ब्र॑ह्मणस्प॒तेऽदे॑वो अभि॒मन्य॑ते ।सर्वं॒ तं र॑न्धयासि मे॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते॑

śatrunāśanam| 1-3 atharvā| 1 brahmaṇaspatiḥ, 2-3 somaḥ| anuṣṭup| yo3smān brahmaṇaspate'devo abhimanyate | sarvaṃ taṃ randhayāsi me yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

"मानुषी माता” अथं भी मन्व मे “अदिति"का क्रियाजा सकता है। “मानुषो माता” स्तेह की सूचिका है, अपनी सब सन्तानो के प्रति । इस ॥ प्रजाजनों की गोर आ, हमारे शासक रूपमे आ । जिस सेनिक वल द्वारा त् (गसुरान्) असुरो को (नः) हमारे (रन्ध- यासि) वशम कर देता है, (तेन = तम्) उस बल को (नः) हमारे प्रति (मधिवोचत्त) अधिकार पूर्वक कहु । के कारण उसे अधिकार प्राप्त है कि वहु वेदोपदेश दे सके 1 येनं देवा असुराणामोजांस्यदंगीध्वम् ।

English

If, Soma, any spiteful man hath aimed at us whose thoughts are kind, Smite with thy bolt upon his face: he, crushed to pieces, vani- sheth. Soma, whoever troubleth us, be he a stranger or akin,

अध्याय 6

श्लोक 6.2

यो नः॑ सोम सुशं॒सिनो॑ दुः॒शंस॑ आ॒दिदे॑शति ।वज्रे॑णास्य॒ मुखे॑ जहि॒ स संपि॑ष्टो॒ अपा॑यति

yo naḥ soma suśaṃsino duḥśaṃsa ādideśati | vajreṇāsya mukhe jahi sa saṃpiṣṭo apāyati

हिन्दी अर्थ

पोषक गौर धनलोनुप शत्रुजों के (गोजांसि) बलों को ( अवृणीध्वम्) तुम ने आवृत कर दिया है, घेर लिया है या निवारित कर दियाहै, (तेन) उस सैनिक बल द्वारा (नः) हम (शम) सुख (यच्छत) प्रदान करो । अथवेवेद-भा।ष्य का० ६। अनु० १।सू ७, । ०६ । अनु०° १। सु० ८ अयववेद-भाष्य १३ (देवाः) “दिवु क्रीडाविजिगीषा” आदि (दिवादिः), विजिगीषु सेनिक

English

Deprive him of the strength he hath: slay him thy-self like mighty Dyaus! Hymn 7 is missing A man’s love-charm

अध्याय 6

श्लोक 6.3

यो नः॑ सोमाभि॒दास॑ति॒ सना॑भि॒र्यश्च॒ निष्ट्यः॑ ।अप॒ तस्य॒ बलं॑ तिर म॒हीव॒ द्यौर्व॑ध॒त्मना॑

yo naḥ somābhidāsati sanābhiryaśca niṣṭyaḥ | apa tasya balaṃ tira mahīva dyaurvadhatmanā

हिन्दी अर्थ

। पवा परिष्वजस्व मां यथा मां कामिन्यसो यथा मन्नापंगा असः॥१। (कामिनी) कामना वाली (असः) तू हो, (यथा) ताकि (मत् अपगाः) मुञ्च से अलग हो जाने वाली (न असः) नहो। मन््रमे “ह जाये" द्वारा पत्नी को सम्बोधित किया है (सायण) 1 रुष्ट हृरद जाया को मनाने का वर्णेन हमा है 1 एवा निहन्मि ते मनो यथां मां कामिन्यसो यथा मन्नापंगा

English

Like as the creeper throws, her arms on every side around the tree, So hold thou me in thine embrace that thou mayst be in love with me, my darling, never to depart.

अध्याय 6

श्लोक 7.1

असुरक्षयणम्।१-३ अथर्वा।सोमः, अदितिः, ३ देवाः।गायत्री, १ निचृत्।येन॑ सो॒मादि॑तिः प॒था मि॒त्रा वा॒ यन्त्य॒द्रुहः॑ ।तेना॒ नोऽव॒सा ग॑हि

asurakṣayaṇam| 1-3 atharvā| somaḥ, aditiḥ, 3 devāḥ| gāyatrī, 1 nicṛt| yena somāditiḥ pathā mitrā vā yantyadruhaḥ | tenā no'vasā gahi

हिन्दी अर्थ

(मुम्याम्) पृथिवी पर (पक्षौ) दोना पंखो को (निहन्ति) रातिरदित कर देता ह है (एवा) इसीः प्रकार है पतनी (ते) तेरे (मनः) मन को (निहन्मि) मै गत्तिरहित कर देता हूं, (यथा) ताकि (माम्) मृक्षे (कामिनी). चाहने वाली (भसः) तु हो, (यथा) ताकि (मत्) मृक्षसे (अपगाः) अलग दहो गड पक्षी अधिक्र वेगवाला भौर शक्तिशाली होता है। पृथिवी पर प्रपात करने पर वहं निज पक्षों को गतिरहित करदेतादहै, इसी प्रकार कि कर चले जानेकोसोचभोन सके । यहु पति का, रुष्ट पत्नी के साथ सदृ-व्यवहार ओर प्रेम का परिणाम है । एवा पर्येमि ते मनो यथा मां कामिन्यसो यथा मन्नापंगा अस॑ः

English

As, when he mounts, the eagle strikes his pinions downward on the earth, So do I strike thy spirit down that thou mayst be in love with me, my darling, never to depart. As in his rapid course the Sun encompasses the heaven and: earth,

अध्याय 6

श्लोक 7.2

येन॑ सोम साह॒न्त्यासु॑रान् र॒न्धया॑सि नः ।तेना॑ नो॒ अधि॑ वोचत

yena soma sāhantyāsurān randhayāsi naḥ | tenā no adhi vocata

हिन्दी अर्थ

(यया) जसे (सूरयः) सूयं (सदः) शीघ्र (इमे, चावापृथिवी) इन दुलोक जोर पृथिवी का (परि एति) परिक्रमण कर लेता है, (एवा) इसी प्रकार (ते) तेरे (मनः) मन का (पर्येमि) यै परिक्रमण करता हूं । “यथा” परिक्रमण करना =मन के चारो ओर घेरा डालना, पति केषेरे में रहना, इस घेरे से वादहिर पत्नी कोन जानेदेना। यहुभो पत्नी के साथ भ, मन्त्र २ के सदुश, सूयं की भी शीघ्र गति को दर्शाया है, जो कि लगभग १२ षण्टों मे महाकाश को पार कर जाता है । (मे) मेरे (तन्वम्) शरीर को,(पादौ) पैरो को, है पत्नी (वाञ्छ) को चाहती हृद के, (ते) अर्थात् तेरी (अक्ष्यौ) दोनो आंखें, (केशाः) ओर केश (माम् कामेन) मेरे प्रति कामना के कारण (शुष्यन्तु) सुख जांय ।

English

So do I compass round thy mind that thou mayst be in love with. me, my darling, never to depart. A man’s love-charm

अध्याय 6

श्लोक 7.3

येन॑ देवा॒ असु॑राणा॒मोजां॒स्यवृ॑णीध्वम्।तेना॑ नः॒ शर्म॑ यच्छत

yena devā asurāṇāmojāṃsyavṛṇīdhvam| tenā naḥ śarma yacchata

हिन्दी अर्थ

पति कहता है रुष्ट हुई पत्नौ के प्रति, कि विवाह से पूवं तूने मुज्ञ पसन्द कर लिया धा भौरमेरे शरीर ओर शरीर के प्रत्येक अङ्गं को तूने . ६ । अनु° १। सु० € अभववेद-भाष्य पक्षं लिया था । अब भी तदनुसार तुमेरे शरीर गौर शरीर के प्रत्येक अङ्ग की षाह, मेरे किसी अङ्गं को विकृत हुमा जानकर, मुञ्च से रुष्ट होकर ह भिरक्त न हो । तेरी विरक्ति के कारण, तुके त्याग कर, भै कहीं चला शी तेरी आख तथा केश सुख जीय । पति के वियोग मेंदुःख के कारण भतिशय रोती हुई को आंखे सुख जाय, ओर तेल न लगाने से केश सुख भंय । जिनके परिणामभरुत मेरा पुनरागमन हो गौर हम पुनः सुखपूरवेक की अगले दो मन्त्रों में स्पष्ट किया है, यथा-

English

Desire my body, love my feet, love thou mine eyes, and love my legs. Let both thine eyes and hair, fond girl! be dried and parched. through love of me. I make thee hang upon mine arm, I make thee lie upon my heart.

अध्याय 6

श्लोक 8.1

कामात्मा १-३ जमदग्निः।कामात्मा, २ सुपर्णः, ३ द्यावापृथिवी, सूर्यः।पथ्यापङ्क्तिः।यथा॑ वृ॒क्षं लिबु॑जा सम॒न्तं प॑रिषस्व॒जे।ए॒वा परि॑ ष्वजस्व॒ मां यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑

kāmātmā 1-3 jamadagniḥ| kāmātmā, 2 suparṇaḥ, 3 dyāvāpṛthivī, sūryaḥ| pathyāpaṅktiḥ| yathā vṛkṣaṃ libujā samantaṃ pariṣasvaje| evā pari ṣvajasva māṃ yathā māṃ kāminyaso yathā mannāpagā asaḥ

हिन्दी अर्थ

(मम) मेरो (दोषणिधिषम्) गजा में आश्रय पाई (त्वा) तुक्च को, . , जिस प्रकार कि (मम) मेरी (क्रतौ) प्रज्ञा गौर कमम (असः) तुहोज (ह. भोर (मम) मेरे (चित्तम् उप) चित्त के समीप (अयसि) तु जाजा। ह यह कितु मेरे विचार ओौर कमं के अनुकूल वर्ताव कर (कृतम्) परमेश्वर ने स्थापित किया है, वे (गावः) गौगों की तरह (धृतस्य)

English

Thou yieldest to my wish, that thou mayst be submissive to my will. May they whose kisses are a bond, a love-charm laid within the heart, Mothers of butter, may the cows incline that maid to love of me.

अध्याय 6

श्लोक 8.2

यथा॑ सुप॒र्णः प्र॒पत॑न् प॒क्षौ नि॒हन्ति॒ भूम्या॑म्।ए॒वा नि ह॑न्मि ते॒ मनो॒ यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑

yathā suparṇaḥ prapatan pakṣau nihanti bhūmyām| evā ni hanmi te mano yathā māṃ kāminyaso yathā mannāpagā asaḥ

हिन्दी अर्थ

को गृह की अन्य देवियां (मे) मेरी (संवानयन्तु) भक्तिमे या वशी- १६ अथवेवेद-भाष्य का०६। अनु०.१। सूु° १० हि है । मन्त्र मे गावः पद मे उपमावाचक पद विलुप्त है । अभिप्राय है “गावः. ५८ मन्त्रो में गोधमों का प्रवेश वधु मे वणित कर वधू को गोरूपता दी रहै, अर्थात् गृहस्थ जीवन मेँ वधू को गोषूप में वणित किया है। अतः धमः १।११) + अतः “गावः संवानयन्तु मे” का अर्भिप्राय है “वेदवाणियां भेरे

English

A thanksgiving for life, hearing, and sight All hail for hearing to the Earth, to Trees, to Agni, sovran Lord!

अध्याय 6

श्लोक 8.3

यथे॒मे द्यावा॑पृथि॒वी स॒द्यः प॒र्येति॒ सूर्यः॑ ।ए॒वा पर्ये॑मि ते॒ मनो॒ यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑

yatheme dyāvāpṛthivī sadyaḥ paryeti sūryaḥ | evā paryemi te mano yathā māṃ kāminyaso yathā mannāpagā asaḥ

हिन्दी अर्थ

उपदेशो को स्मरण कर पतिके प्रति स्नेहभावना परायणा हदौ,-यह विचार भी मन्प्रमें प्रकट कियाहै। : “पुधिवी के लिये, श्रोत्र, के लिये, वनस्पतियों के लिये, अधिपति अभिनि के लिये स्वाहा हो हविः की भआहृतियां हौं" । पक्षियों के लिये, अधिपति वायु केलिये स्वाहाहौ हविःको आहुति्यां लिये स्वाहा हये हविः की आहुतियां ह “ । द्धक लिये यज्चोका वणेन हृभा है । षष्ठ काण्ड, प्रय सानुवाक सम्पूणं

English

All hail for breath to Air, for power to life to Vāyu, sovran Lord! All hail for vision to the Stars, to Heaven, to Sūrya, sovran

अध्याय 6

श्लोक 9.1

कामात्मा १-३ जमदग्निः।कामात्मा, ३ गावः।अनुष्टुप्।वाञ्छ॑ मे त॒न्वं॑१ पादौ॒ वाञ्छा॒क्ष्यौ॒३वाञ्छ॑ स॒क्थ्यौऽ।अ॒क्ष्यौऽ वृष॒ण्यन्त्याः॒ केशा॒ मां ते॑ कामे॑न शुष्यन्तु

kāmātmā 1-3 jamadagniḥ| kāmātmā, 3 gāvaḥ| anuṣṭup| vāñcha me tanvaṃ1 pādau vāñchākṣyau3vāñcha sakthyau'| akṣyau' vṛṣaṇyantyāḥ keśā māṃ te kāmena śuṣyantu

हिन्दी अर्थ

१८ अथवेवेद-भाष्य का०,६। अनु०° २।सू० १९१ सम्पादित करते हँ रेतस् को स्थापित करते है, म्र २ बहुवचन है । इस द्वारा भिन्न-भिन्न परिवार फी नाना पत्तियों भौर नाना पतियों को सूचित किया है । (पुंसि) पुमान् मे (वै) निश्चय से (रेतस्) वीर्यं (भवति) होता है, दवारा पति की एकता को सूचित किया है ।

English

Lord! An epithalamian charm to ensure the birth of a boy Asvattha on the Sami-tree. There a male birth is certified.

अध्याय 6

श्लोक 9.2

मम॑ त्वा दोषणि॒श्रिषं॑ कृ॒णोमि॑ हृदय॒श्रिष॑म्।यथा॒ मम॒ क्रता॒वसो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि

mama tvā doṣaṇiśriṣaṃ kṛṇomi hṛdayaśriṣam| yathā mama kratāvaso mama cittamupāyasi

हिन्दी अर्थ

(प्रजापतिः) प्रजाभों के पति परमेश्वर ने, (अनुमतिः)पति के अनुकूल् हि मति वाली पत्नी ने, (सिनीवाली). अस्नवालो तथा सुन्दर केशौ वालो प्रत्नीकै गृहमे यदि खाद्य ओर पेय की यथोचितमात्रानहौतौ माता ओर सन्तानो का यथेष्ट पालन-पोषण न हो सकने से भो सन्ताने निर्बल अनुमति ओौर सिनीवाली चन्द्रकला-विशेष नहीं, अपितु देवपत्नियां जौर पति के शमी आकृतिक अर्थात् निर्बल होने पर ।

English

There is the finding of a son: this bring we to the women-folk. 73 The father sows the genial seed, the woman tends and fosters it.

अध्याय 6

श्लोक 9.3

यासां॒ नाभि॑रा॒रेह॑णं हृ॒दि सं॒वन॑नं कृ॒तम् ।गावो॑ घृ॒तस्य॑ मा॒तरो॒ ऽमूं सं वा॑नयन्तु मे

yāsāṃ nābhirārehaṇaṃ hṛdi saṃvananaṃ kṛtam | gāvo ghṛtasya mātaro 'mūṃ saṃ vānayantu me

हिन्दी अर्थ

जनिम्) सापो की जाति के समौप (आगमम्) मै विषवैद्य आ गया व्यापलेती है वसे मैने उसे घेर लिया है (तेन) उस विष को (वारये) र निवारित करता हं । जातियों को पेया हुमा दहै, तो भी इनके विष से रहित हूः मुञ्च पर् विप्वास कारको दुर करता है, वैसे तेरे निराशान्धकार कोम दूर कर दुगा । जसे तुञ्ने व्याप्त नहीं करेगा । उस हंस

English

This is the finding of a son: thus hath Prajāpati declared. Prajāpati, Anumati, Sinivāli have ordered it. Elsewhere may he effect the birth of maids, but here prepare a boy.

अध्याय 6

श्लोक 10.1

संप्रोक्षणम्।१-३ शन्तातिः।१ पृथिवि, श्रोत्रं, वनस्पतिः, अग्निः, २ प्राणः, अन्तरिक्षं, वयः, वायुः, ३ द्यौः, चक्षुः, नक्षत्राणि, सूर्यः।द्वैपदम्, १ साम्नी त्रिष्टुप्, २ प्राजापत्या बृहती, ३ साम्नी बृहती।पृ॒थि॒व्यै श्रोत्रा॑य॒ वन॒स्पति॑भ्यो॒ऽग्नयेऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑

saṃprokṣaṇam| 1-3 śantātiḥ| 1 pṛthivi, śrotraṃ, vanaspatiḥ, agniḥ, 2 prāṇaḥ, antarikṣaṃ, vayaḥ, vāyuḥ, 3 dyauḥ, cakṣuḥ, nakṣatrāṇi, sūryaḥ| dvaipadam, 1 sāmnī triṣṭup, 2 prājāpatyā bṛhatī, 3 sāmnī bṛhatī| pṛthivyai śrotrāya vanaspatibhyo'gnaye'dhipataye svāhā

हिन्दी अर्थ

(तनादिः) । सूरय की प्रातःकाल भौर सायंकाल की लाल-रश्मियों मे रोग- रपिमरयां प्रकट होती है । एकःअश्वः एक गुक्ल रङ्मिः। वहु ही है केद्धारार्म तेरेविष को निवारित । ॥ क्षा० ६। अनु०२। सू० १२ अथवेवेद-भाष्य विषम् विषको (वारये) भँ निवारित करता हूं ।

English

A charm against venomous serpents I, As the Sun goes round the heaven, have travelled round the Serpents’ race. I ward thy poison off, as Night parts all else living from the Sun.

अध्याय 6

श्लोक 10.2

प्रा॒णाया॒न्तरि॑क्षाय॒ वयो॑भ्यो वा॒यवेऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑

prāṇāyāntarikṣāya vayobhyo vāyave'dhipataye svāhā

हिन्दी अर्थ

आसन्वत् विषम् -सपं के मुख वाला विष, सपं के मूख में रहने वाला (मध्वा) उदक द्वारा (पुञ्चे) मै तेरा सम्पकं करतां हूं, (नयः ) नदियां रूप हँ । (परुष्णी ) बहतो को स्नान कराने वाली नदी (मधु) उदकरूवा है, (शीपाला) ओर शएयनावस्था से पालने वालो अर्थात् सुरक्षा करने वालो है। जल समूह तेरे (आस्न) मूख के लिये (शम्) सुखरूप ओर (हृदे) हृदय के लिये (शम्) सुखरूप (अस्तु) हो । मन्त्र मे सपं विषाक्त रोगी को सम्बोधित कर कटा है किं तेरे विष कौ चिकित्सा के लिये रमँ विषवैद्य तेरे साथ उदक का सम्पकं करता हू दर्शया है। सिक्न-भिस्न प्रकार के उदको सें विष के निवारण को

English

With this, discovered in the days of old by Brāhmans, Rishis, Gods, With this I ward thy poison off, thou Biter! formed and form- ing now. With mead I mingle flowing streams: the hills and mountains shall be mead.

अध्याय 6

श्लोक 10.3

दि॒वे चक्षु॑षे॒ नक्ष॑त्रेभ्यः॒ सूर्या॒याधि॑पतये॒ स्वाहा॑

dive cakṣuṣe nakṣatrebhyaḥ sūryāyādhipataye svāhā

हिन्दी अर्थ

चिकित्सा करने से शरीरगत विष प्रवाह के साथ प्रवाहित हो जाता है । भिन्न-भिन्न होती है । अतः इन द्विविध प्रकार के मेघोंका कथन फिया है । पर्णी है “पुरुष्णी"” वहतो को युगपत् स्नान करा सकने वालो, दरावती बहूदका नदी ( निरुक्त ९ ३।२५) । यह परुष्णी शीपाला है, विषका निवारण करफे विषाक्तकौो शयन करनेसे वचा देती है। स्वै विषाक्त रोगी मे शयन करते को प्रवृत्तिहो जातीदहै, जोकि २२ अथववेद-भाष्य का० ६। अनु०२। सू° १३ उस के लिये घातक होती है । जसे किं कहा टै कि “सपकटा सोए ओर जलचिकित्सा करनी चाहिए । जलचिकित्सासे मूख के तथा हदय के रोग शान्त होकर सुखप्रदान करते हैँ । पवतः मेवनाम (निषं० ११०) ।

English

Parushni and Sipālā mead. May it be well with mouth and heart. Homage to death Worship to weapons of the Gods! worship to weapons of the

अध्याय 6

श्लोक 11.1

पुंसवनम्।१-३ प्रजापतिः।रेतः, ३ प्रजापतिः, अनुमतिः, सिनीवाली।अनुष्टुप्।श॒मीम॑श्व॒त्थ आरू॑ढ॒स्तत्र॑ पुं॒सु॑व॑नं कृ॒तम्।तद् वै पु॒त्रस्य॒ वेद॑नं॒ तत् स्त्री॒ष्वा भ॑रामसि

puṃsavanam| 1-3 prajāpatiḥ| retaḥ, 3 prajāpatiḥ, anumatiḥ, sinīvālī| anuṣṭup| śamīmaśvattha ārūḍhastatra puṃsuvanaṃ kṛtam| tad vai putrasya vedanaṃ tat strīṣvā bharāmasi

हिन्दी अर्थ

(देववधेभ्यः) शत्रु के सेनिकरोके वधोंके लिये (नमः) वज्रायुध हो, (राजवधेभ्यः) उनके राजाओंके वधोंके लिये (नमः) वच्रायुध हो । (अथो) तथा (विश्यानाम्) वेष्यो के (ये वधाः) जौ वध दँ (तेभ्यः) उनः के लिये (मृत्यो) है मूलय! (ते) वेनो कि तेरे, (नमः) वचगुध तथा (सायण) । अतः जय-युद्ध मे परकीय सेनाओं उनके राजाओं तथा वैश्यो के वघ के लिये वच््रागरुध आवश्यक हँ नमः वेखनाम' (निधं० है । "देव" हँ विजिगीषा की भावना वले परराष्ट् संनिकं, यथा “दिवु क्रीडाविजिगीषा'” आदि (दिवादिः) युद्धम संनिको, राजव्े, तथा वैप्यवर्भ आदि का वधहोता ही है, अतः इनका कथन हुभा है । नम॑स्ते अधिवाकायं परावाकायं ते नम॑ः ।

English

Kings! Then worship to the people’s arms! worship, O Death, be paid to thee! Let worship be to thy defence and to thine accusation paid.

अध्याय 6

श्लोक 11.2

पुं॒सि वै रेतो॑ भवति॒ तत् स्त्रि॒यामनु॑ षिच्यते ।तद् वै पु॒त्रस्य॒ वेद॑नं॒ तत् प्र॒जाप॑तिरब्रवीत्

puṃsi vai reto bhavati tat striyāmanu ṣicyate | tad vai putrasya vedanaṃ tat prajāpatirabravīt

हिन्दी अर्थ

(मृत्यो) है गृद्ध होने वाली मुतु ! (ते) तेरे स्वरूप के (अधिवाकाय) अधिकृत वक्ता के लिये (नमः) नमस्कार हौ, (ते) ते का० ६। अनु० २। सू० १३ अथवेवेद-भाष्य २३ (परावाकाय) पराविद्या के वक्ता के लिये (नमः) नमस्कार दौ । (ते) तेरे (सुमत्यै) सुमति वाने दूत के लिये (नमः) नमस्कार हो, (ते) तेरे सायण के अनुसार मन्त्र में “दूतो” का वणेन है (१३।२) । अधि-

English

Death! be this worship paid to thy good-will and thy malevo- lence! Worship to thy physicians, to thy sorcerers be worship paid! Death! let this reverence be done unto thy Brāhmans and thy roots.

अध्याय 6

श्लोक 11.3

प्र॒जाप॑ति॒रनु॑मतिः सिनीवा॒ल्यऽचीक्लृपत्।स्त्रषू॑यम॒न्यत्र॒ दध॒त् पुंमां॑समु दधदि॒ह

prajāpatiranumatiḥ sinīvālya'cīklṛpat| straṣūyamanyatra dadhat puṃmāṃsamu dadhadiha

हिन्दी अर्थ

“ निज दूतावास का अधिकृताधिकारी है, मौर “परावाक'' है युद्धच्छुं पर निज दूतावास का अधिङृताधिकारी है । युद्धकाल मेँ भी इन दूतो पर आ्टे कोश में अधिवचनम् का अथं है ‰0५०५६९४ । एतदनुसार अधिवाक का अर्थं होगा ५५४००81८ कौ योग्यता वाजा अधिवक्ता । दूतावासों में दूत ५0५०८४७७ की योग्यता वाले होने चाहिए, यहं (मृत्यो) है मृत्यु ! (ते) तेरे (यातुधानेभ्यः) यातुधानो के लिये (नमः) नमस्कार हो, (ते) तेरे (भेषजेभ्यः) भेषज) के लिये (नमः) नमस्कारं हो । (ते) तेरे (मूलेभ्यः) मूलो के लिये (नमः) नमस्कार हो, तथा मे “यातनामों के निधान” अथं नहीं, अपितु युद्धमे सेवा के लिये, जाने- आने वाले सेवको का वर्णन है । यातु =जाने-आने वाले, धान = धारण- पोषण करने वाले । इस अर्थ में यातु पद -यातवःके लिये, अथववेद में

English

A charm against consumption Remove thou all Decline that lurks within the members and the joints, The firmly-settled heart-disease that racks the bones and rends the limbs.

अध्याय 6

श्लोक 12.1

सर्प-विष-निवारणम्।१-३ गरुत्मान्।तक्षकः।अनुष्टुप्।परि॒ द्यामि॑व॒ सूर्योऽही॑नां॒ जनि॑मागमम्।रात्री॒ जग॑दिवा॒न्यद्धं॒सात् तेना॑ ते वारये वि॒षम्

sarpa-viṣa-nivāraṇam| 1-3 garutmān| takṣakaḥ| anuṣṭup| pari dyāmiva sūryo'hīnāṃ janimāgamam| rātrī jagadivānyaddhaṃsāt tenā te vāraye viṣam

हिन्दी अर्थ

दारा करने वाले, अर्थात् १०१००७७ ०५९४१ वालो के लिये, मूलेभ्यः वेदवेत्ताओं के लिये । इन चार प्रकारके पुरूषो पर वच्प्रहार यु मेन होना चाहिए, ये चारों रक्नाके योग्य ई। इस नमस्कार द्वारा कथित किया है । यही तभी सम्भव है जब कि इन चार वेत्ता मनुष्य युद्धकाल मँ भौ नमस्कार के (परख सम्) जडो कौ टीला कर बलास रोग को, तथा (आस्थितम्) स्थिर हर (हदयामयम्) (नाशय) नष्ट कर, तथा (यः) जो (अङ्खं ष्ठाः) शरीर के किसी स्थित (च) ओर (पवस) जोड़ोमें रोग है उसे नष्ट कर रोग जो कि शारीरिक वल को नष्ट कर देता है, “बल+ निव लासं बलासिन॑ः क्षिणोमि मुष्करं यंथ। (बलासिनः) बलासरोग वालि रोगौ के (बलासम्) बलास रोग को ध । १. मूलबलभतेभ्पः पुरुषेभ्यः । सायण) ।

English

From the consumptive man I pluck Decline as ‘twere a severed part. I cut the bond that fetters him, even as a root of cucumber. Begone, Consumption, hence away, like a young foal that runs. at speed.

अध्याय 6

श्लोक 12.2

यद् ब्र॒ह्मभि॒र्यदृषि॑भि॒र्यद् दे॒वैर्वि॑दि॒तं पु॒रा।यद् भू॒तं भव्य॑मास॒न्वत् तेना॑ ते वारये वि॒षम्

yad brahmabhiryadṛṣibhiryad devairviditaṃ purā| yad bhūtaṃ bhavyamāsanvat tenā te vāraye viṣam

हिन्दी अर्थ

अथरवैवेद-भाष्य का०६। अनु०२। सु° १४ हृद्रो को स्वस्थान से च्यत कर देने वले, (( निः क्षिणोमि) निःशेषतय। ओ क्षीण करता हूं, (यथा) जसे कि (मृष्करम्) शरीरी करने वाले चोर का निःशेषतया बर्थात् पूर्णतया क्षय कर दिया जाता का ६। अनु० २। सू० १५ अथववेद-भाष्य मामृतात्" (ऋ० ७।५६।१२); इसो प्रकार बलास के बन्धन को मँ (वेद्य) । भासानीसे काटदेताहूं। चोरको चोरीके लिये उग्र दण्डका विधान हमा है । उप्रदण्डके विना सामाजिक जीवन का परिश्ोधत वहींह

English

Then, not pernicious to our men, flee, yearly visitant like grass! A charm for power and preeminence Most excellent of all the plants art thou: thy vassals are the trees.

अध्याय 6

श्लोक 12.3

मध्वा॑ पृञ्चे न॒द्यः॑१ पर्व॑ता गि॒रयो॒ मधु॑ ।मधु॒ परु॑ष्णी॒ शीपा॑ला॒ शमा॒स्ने अ॑स्तु॒ शं हृ॒दे

madhvā pṛñce nadyaḥ1 parvatā girayo madhu | madhu paruṣṇī śīpālā śamāsne astu śaṃ hṛde

हिन्दी अर्थ

निर्वलासेतः प पंताञुंगः रिश्ुको य॑या । (वलास) है बलास रोग ! (इतः) इस शरीर से (निःपत) निकल चलाजा, (यथा) जसे कि (आशुंगः+) शीघ्रगामी (शिशुकः) मृग ! । (अथो ) तथा (इटः) चला गया (हायनः) वषेकाल (इव) जसे फिर नही लोरता वैसे (उप द्राहि) त्रु शरीरसे अलग होकर चला जा गौर (अवीरहा) इस वीर का हननेन कर । “टः = इट गतौ (भ्वादिः) । (ओषधीनाम्) गषधियों मे (उत्तमः असि) तु उत्तम भोषधि है, , (यः) जो (अस्मान्) हमे (अभिदासति) उपलक्ष्य करके हमारी

English

Let him be subject to our power, the man who seeks to injure us. Whoever seeks to injure us, with kinsmen or no kin to aid, May I be uppermost of all, even as this Plant is queen of trees.

अध्याय 6

श्लोक 13.1

मृत्युजयः।१-३ अथर्वा।(स्वस्त्ययनकामः)।मृत्युः।अनुष्टुप्।नमो॑ देवव॒धेभ्यो॒ नमो॑ राजव॒धेभ्यः॑ ।अथो॒ ये विश्या॑नां व॒धास्तेभ्यो॑ मृत्यो॒ नमो॑ऽस्तु ते

mṛtyujayaḥ| 1-3 atharvā| (svastyayanakāmaḥ)| mṛtyuḥ| anuṣṭup| namo devavadhebhyo namo rājavadhebhyaḥ | atho ye viśyānāṃ vadhāstebhyo mṛtyo namo'stu te

हिन्दी अर्थ

्ऽपुवयस्को मृगः, अन्यो वा प्राणी । दारा करने वाले, अर्थात् २९५५7038 5००९» वालों ==पुरुषजाति के मूलभूत बच्चों ' के लिप “ब्राहयणेभ्यः वेदवेत्ताओं के लिये । इन चार प्रकार । होना चाहिए, ये चारों रक्षा के योग्य ईह । इस सिद्धान्त को नमः (४. नमस्कार द्वारा कथित किया है । यही तभी सम्भव है जब कि र चा वेत्ता मनुष्य युद्धकाल मे भो नमस्कार मेभीरहते हों, उन पर प्रहारन होना चाहिए । ( 0 ) जौडों कौ ढोला कर दः वाले, (सवेम्) सव (वलासम्,) (नाशय) चष्ट कर, तथा (यः ) जो (अङ्गष्ठाः) शरीर के किसी अंग स्थित (च) ओर (पेसु) जोड़ मे रोग दहै उसे नष्ट कर

English

As Soma hath been made the best of all oblations ‘mid the plants, So, as Talāsā is the queen of trees, may I be chief of all. A medical charm

अध्याय 6

श्लोक 13.2

नम॑स्ते अधिवा॒काय॑ परावा॒काय॑ ते॒ नमः॑ ।सु॒म॒त्यै मृ॑त्यो ते॒ नमो॑ दुर्म॒त्यै त॑ इ॒दं नमः॑

namaste adhivākāya parāvākāya te namaḥ | sumatyai mṛtyo te namo durmatyai ta idaṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

बलास रोग जो कि शारीरिक वल को नष्ट कर देता है, “बल + पीड़ा); (५) पवसु जोड़ों का ददं, ाधा॥18 (2० ग्या) । निरासं बलासिनः कषिणोगि सुष्करं यंथ। (बलासिनः) बलासरोग वालि रोगी के (बलासम्) बलास रोगको १. सूलबलमूतेम्पः पुरुषेभ्यः । सायण) ।

English

O Ābayu, non-Ābayu, dire is thy juice, O Ābayu; we eat the gruel made of thee. Vihalha is thy father’s name, thy mother’s is Madāvati. Yea, verily thou art not he, thou who hast well protected life.

अध्याय 6

श्लोक 13.3

नम॑स्ते यातु॒धाने॑भ्यो॒ नम॑स्ते भेष॒जेभ्यः॑ ।नम॑स्ते मृत्यो॒ मूले॑भ्यो ब्राह्म॒णेभ्य॑ इ॒दं नमः॑

namaste yātudhānebhyo namaste bheṣajebhyaḥ | namaste mṛtyo mūlebhyo brāhmaṇebhya idaṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

के योग्य रहै, चाहेवेशतु के राज्य ही को स्वस्थान से च्युत कर देने वाले, . अयववेद-भाष्य का०६। अनु०२। सू० १४ का० ६। अनु° २। सू० १५ अयवेवेद-भाष्य २५ ओर हि (निः क्षिणोमि) निःशेषतय। मै क्षीण करता ः, (यथा) असे ि ब्रहावेत्तामों ओौर ( ) रता हूं, (यथा) जसे किं (मृष्करम्)

English

Go thou to rest, Tauvilikā! This noisy cry hath sunk to rest. Go hence, depart, Nirāla, thou! the tawny and the tawny- eared. 74

अध्याय 6

श्लोक 14.1

बलासनाशनम्।१-३ बभ्रुपिङ्गलः।बलासः।अनुष्टुप्।अ॒स्थि॒स्रं॒सं प॑रुस्रं॒समास्थि॑तं हृदयाम॒यम्।ब॒लासं॒ सर्वं॑ नाशयाङ्गे॒ष्ठा यश्च॒ पर्व॑सु

balāsanāśanam| 1-3 babhrupiṅgalaḥ| balāsaḥ| anuṣṭup| asthisraṃsaṃ parusraṃsamāsthitaṃ hṛdayāmayam| balāsaṃ sarvaṃ nāśayāṅgeṣṭhā yaśca parvasu

हिन्दी अर्थ

के पुरुषो पर वज्रप्रहार पु मेन चोरी करने वाले चोर का निःशेषतया अर्थात् पूर्णतया क्षय कर दिया जाता मूलकारण को (छिन) मँ उच्छिन्न कर देत। हू, (इव) जसे कि (उर्वावाः) फकड़ी का बन्धन कट जाता है । भासानीसेकाटदेताहूं।चोरको चोरी के लिये उग्र दण्डका विधान ¦ हमा है । उग्रदण्डके विना सामाजिक जीवन का परिक्षोधन नहींदहो

English

A charm to ensure conception Even as this mighty Earth conceived the germ of all the things that be, So may the germ of life be laid in thee that thou mayst bear a son.

अध्याय 6

श्लोक 14.2

निर्ब॒लासं॑ बला॒सिनः॑ क्षि॒णोमि॑ मुष्क॒रं य॑था ।छि॒नद्म्य॑स्य॒ बन्ध॑नं॒ मूल॑मुर्वा॒र्वा इ॑व

nirbalāsaṃ balāsinaḥ kṣiṇomi muṣkaraṃ yathā | chinadmyasya bandhanaṃ mūlamurvārvā iva

हिन्दी अर्थ

निर्वैखासेतः भ पंतासुंगः रिशो यया । (वलास) है बलास रोग ! (इतः) इस शरीर से (निःपत) निकल चलाजा, (यथा) जसे कि (आशुगः) शीघ्रगामी (किद्युकः) मृग! (अथो ) तथा (इटः) चला गया (हायनः) वषंकाल (इव) जेसे फिर नहीं ह तौटता वैसे (उप द्राहि) तु शरीरसे अलग होकर चला जा ओौर (अवीरहा) इस वीर का हनन न कर । “ट: = इट गतौ (भ्वादिः) ” ।

English

Even as this mighty Earth hath borne and bears the stately forest trees, So may the germ of life be borne in thee that thou mayst bear a son. Even as this mighty Earth hath borne and bears the mountains and the hills,

अध्याय 6

श्लोक 14.3

निर्ब॑लासे॒तः प्र प॑ताशु॒ङ्गः शि॑शु॒को य॑था ।अथो॒ इट॑ इव हाय॒नोप॑ द्रा॒ह्यवी॑रहा

nirbalāsetaḥ pra patāśuṅgaḥ śiśuko yathā | atho iṭa iva hāyanopa drāhyavīrahā

हिन्दी अर्थ

(ओषधीनाम्) मोषधियों मे (उत्तमः असि) तु उत्तम भोषधि है, (वृक्षाः) वृक्ष (तव) तैर (उपस्तयः) आश्य रूप हैँ तुउन पर आरूढ ह, (यः) जो (अस्मान्) हभ (भभिदासति) उपलक्ष्य करके हमारी २६ सथववेद-भाष्य का० ६ अनु० २ सू° १ हिसा करता है, या हरम दास बनाता है (सः) वह ( जस्माकम्) हमारे । प्रतिरूपकं नाम पद 1 अस्तिः के अकार कालोप । दासति+-दसु उपक्षये (दिवादिः) । उत्तमपद पृलिङ्ख है, अतः ओषधि पद का प्रयोग भी पुंलिङ्ख (सबन्धुः) समान नाभिवग्धन वाला, (च) ओर (असवन्धुः) परकीय

English

So may the germ of life be borne in thee that thou mayst bear a son. p. a207 Even as this mighty Earth supports the moving world that dwells thereon, So may the germ of life be borne in thee that thou mayst bear a son.

अध्याय 6

श्लोक 15.1

शत्रुनिवारणम्।१-३ उद्दालकः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।उ॒त्त॒मो अ॒स्योष॑धीनां॒ तव॑ वृ॒क्षा उ॑प॒स्तयः॑ ।उ॒प॒स्तिर॑स्तु सो॒३स्माकं॒ यो अ॒स्मां अ॑भि॒दास॑ति

śatrunivāraṇam| 1-3 uddālakaḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup| uttamo asyoṣadhīnāṃ tava vṛkṣā upastayaḥ | upastirastu so3smākaṃ yo asmāṃ abhidāsati

हिन्दी अर्थ

(यथा) जेसे (गोषधीनाम् हविषाम्) हविष्य ओषधयो मेँ (सोमः) सोम (उत्तमः) उत्तम (कृतः) विधाता ने किया है, तथा (वृक्षाणाम्) वृक्षो मे (तलाशा) तलाश भोषधि उत्तम को गई है, (इव) इसौ प्रकारं "पलाश" वृक्ष किया है । “तलाशा स्त्रीलिङ्गं ओषधि है (मनर १ मराघधाररूप करके ओर उन्हे भ्याप्त करके, शयन करने वाली मोषधि । वृक्ष की ओर बदृते हैँ भौर स्वप्नावस्था में होते है, शयन करते ह ४५ का०. ६१ अनु०२। ° १६ अयवेवेद-भाष्य

English

A charm to banish jealousy The first approach of Jealousy, and that which followeth the first, The pain, the fire that burns within thy heart we quench and drive away.

अध्याय 6

श्लोक 15.2

सब॑न्धु॒श्चास॑बन्धुश्च॒ यो अ॒स्मां अ॑भि॒दास॑ति ।तेषां॒ सा वृ॒क्षाणा॑मिवा॒हं भू॑यासमुत्त॒मः

sabandhuścāsabandhuśca yo asmāṃ abhidāsati | teṣāṃ sā vṛkṣāṇāmivāhaṃ bhūyāsamuttamaḥ

हिन्दी अर्थ

तलाशा स्त्रीलिङ्गं एक वचन। सायणने तलाशा का अर्थं (आवयः) ह परमेश्वर ! तू प्रलयकाल मेँ सुष्टिका भक्षण" करं । लेता है (अशनावयः) भौर सुष्टिकाल मेतु सृष्टि का भक्षणं नहीं करता" (आचयः) है भक्षण करने. वाले ! प्रलय कालभ (ते) तेरा दीप्त हुए उस रसः का (आ अद्मसि) हम पूणेतया भोग करते ह ।

English

Even as the earth is dead to sense, yea, more unconscious than the dead, Even as a corpse’s spirit is the spirit of the jealous man. The thought that harbours in thy heart, the fluttering doubt that dwells therein.

अध्याय 6

श्लोक 15.3

यथा॒ सोम॒ ओष॑धीनामुत्त॒मो ह॒विषां॑ कृ॒तः ।त॒लाशा॑ वृ॒क्षाणा॑मिवा॒हं भू॑यासमुत्त॒मः

yathā soma oṣadhīnāmuttamo haviṣāṃ kṛtaḥ | talāśā vṛkṣāṇāmivāhaṃ bhūyāsamuttamaḥ

हिन्दी अर्थ

। कौशिक सूत्रों मौर तदनुसार सायणभाष्य मे सूक्तं का विनियोग अक्षिरोग, की वर्णन शैली कवितामय प्रायः होती है अतः उसके “कर” अर्थात् हीथ का वर्णन भी हृ है । वस्तुतः वह् “अपाणिपादो जवनौ ग्रहीता है । (ते) तेरा (पिता) पिता है, (मदावतौ) मदमस्त कर देने वालो प्रकृति (ते माता) तेरी माता द (सः) वह तु (हिन) स्वयम् अपनी वृद्धि कर, १. इसलिये पर्मेएवर “अक्नाद"” है । देती है, तब वह सुखदायक पिता से विमुख हो जाता है । इसलिये उसे हो। तुतो प्रकृति से पृथक् है, चाहे तेरा शरीर प्रकृतिजन्य है । तूने निज आत्म-स्वरूप को भुला दिया है । आवयः = आवयतिः अतिकर्मा (सायण), या+ वी (गतिव्याप्तिप्रननका्त्यसन'खादनेषु" (अदादिः) “नाम! पद

English

Yea, all thy jealousy, like heat born of the dance, I banish thence. A prayer for purification Let the Gods purify me, let men purify me with a prayer.

अध्याय 6

श्लोक 16.1

अक्षिरोगभैषजम्।१-४ शौनकः।चन्द्रमाः, मन्त्रोक्तदेवताः, अनुष्टुप्, १ निचृत्त्रिपदा गायत्री, ३ बृहतीगर्भा ककुम्मत्यनुष्टुप्, ४ त्रिपदा प्रतिष्ठा।आब॑यो॒ अना॑बयो॒ रस॑स्त उ॒ग्र आ॑बयो ।आ ते॑ कर॒म्भम॑द्मसि

akṣirogabhaiṣajam| 1-4 śaunakaḥ| candramāḥ, mantroktadevatāḥ, anuṣṭup, 1 nicṛttripadā gāyatrī, 3 bṛhatīgarbhā kakummatyanuṣṭup, 4 tripadā pratiṣṭhā| ābayo anābayo rasasta ugra ābayo | ā te karambhamadmasi

हिन्दी अर्थ

तौविंलिकेभवेरयावायरमैलव रेयीत् । (तौविलिके) है हिसाकारिणी प्रकृति ! (अवेलय अव, इलय) तु हुआ जीवात्मा (अव, एेलयीत्) तेरे स्वरूप को अवगत करके तुञ् से विमुख प्रेरित हो चुका) (च) तथा (वब्न्:) शरीर का भरण-पोषण करने वाना जीवात्मा (च) भौर (बभ्र.कणः) शरीर का भरण-पोषण करने. वालां कणे आदि इन््रियसमूह दोनों ही तुक्च से विमुख हौ चुके, ओौर “ठ” को इक् आदेश); “र् को “ल्” रलयोरभेदः, रकार भौर वकार वणो का ग्यत्यास । अवेलय अव +-इल (क्षेपणे, तुदादिः) । जान लिया कि प्रकृति हिसाकारिणी है, तब वह प्रकृति से विमृषहो

English

Cleanse me all creatures that exist! may Pavamāna make me pure. May Pavamāna make me pure for wisdom and for power and life, and unassailed security. God Savitar, byboth of these, filter and pressing out this juice, purify us that we may see.

अध्याय 6

श्लोक 16.2

वि॒हह्लो॒ नाम॑ ते पि॒ता म॒दाव॑ती॒ नाम॑ ते मा॒ता।स हि॑न॒ त्वम॑सि॒ यस्त्वमा॒त्मान॒माव॑यः

vihahlo nāma te pitā madāvatī nāma te mātā| sa hina tvamasi yastvamātmānamāvayaḥ

हिन्दी अर्थ

१. यथा ““सुरिरसि वर्चोधा असि तनुपानो असि जीवात्मा के लिये (अथर्व अथवंवेद-भाष्य काऽ ६। अनु०२। सू० १६ (अलसाला, असि, पूर्वा) है प्रकृति ! क्रम मे पहली तूहै, भूषण के सदृश शोभायमाना, चमकीलो है; (सिलाञ्जाला, असि, उत्तरा) तदुत्तर तु बन्धनकारिणी, गतिशीला भौर जालखूपा है; तदुत्तर त् (नीलागल- साला) नीलवणेवाली, गत्यभाववाली हूर शोभायमाना होती है । शालते इति, जो किं भूषण के रूप मेँ चमकती है वह प्रकृति । अल भूषण- बन्धनकारिणी, गतिशोला, भौर जालखूपा है 1 यह् रूप प्रकृति का,

English

A charm against fever He goes away as ‘twere from this fierce burning fire, inebriated and lamenting he departs. Let him, the lawless, seek another and not us. Worship be paid to Fever armed with fiery

अध्याय 6

श्लोक 16.3

तौवि॑लि॒केऽवे॑ल॒यावा॒यमै॑ल॒ब ऐ॑लयीत्।ब॒भ्रुश्च॑ ब॒भ्रुक॑र्ण॒श्चापे॑हि॒ निरा॑ल

tauvilike'velayāvāyamailaba ailayīt| babhruśca babhrukarṇaścāpehi nirāla

हिन्दी अर्थ

(अथव ८।२।१) । यह् “रजस्” रूपा प्रकृति दहै, जो कि शरीर के जाल में (गतिरहित वाला) + साला (शालते इति); एतद् रूपा प्रकृति, तमोरूपा भाव रूप वाली हुई “साला” शालते । यह् तमोरूपा है । इस प्रकार मन्त का० ६। अनु° २। सु° १७ अथवेवेद-भाष्य ( अथववेद-भाष्य का० ६।अनु० २ । भु° १७ (यथा, इयम्, मही पृथिवी) जसे यह महती या महिमा वालो .पृथिवौ (भूतानाम्) शरुतो की उत्पत्ति के लिये (गभं आदधे) शर्माघान करती है,

English

heat. To Rudra and to Fever be our worship paid: worship be paid to Varuna the splendid King! Worship to Dyaus, to Earth, worship be paid to Plants!

अध्याय 6

श्लोक 16.4

अ॒ल॒साला॑सि॒ पूर्व॑ सि॒लाञ्जा॑ला॒स्युत्त॑रा ।नी॒ला॒ग॒ल॒साला॑

alasālāsi pūrva silāñjālāsyuttarā | nīlāgalasālā

हिन्दी अर्थ

हो, स्थित हो, (अनुमूतुम् ) उत्पत्ति विधि के अनुसार (सवितवे) पदा होने मे “भूतयज्ञः ' तथा पञ्च महाभूतो मे “भूत शब्द । ¦ पृथिवी ६ सूये से फट कर अलग हई तव इस पर कोई प्राणी तथा कालान्तर प्राणी मूत भी पृथिवी के गभं से पैदा हृएु । पाथिव पदार्थ जप जल. तेज पाथिवाग्ति, तथा वायुमण्डल भो पृथिवोसे ही पेदा हुए । (यथा) जेते (इयम्, मह, पृथिवी ) इस 9 महती पृथिबी ने (दमान्, वनस्पतीन्) इन वनस्पतियां को गर्भरूप में ( दाधार) धारण किया पृथिवी बीजरूप में गभं धारण करती है, ओर उसे नियत समय

English

Thou who, aglow with heat, makest all bodies green, to thee, red, brown, I bow, the Fever of the wood. A charm to strengthen hair and promote its growth

अध्याय 6

श्लोक 17.1

गर्भदृंहणम्।१-४ अथर्वा।गर्भदृंहणम्, पृथिवि।अनुष्टुप्।यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑माद॒धे।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

garbhadṛṃhaṇam| 1-4 atharvā| garbhadṛṃhaṇam, pṛthivi| anuṣṭup| yatheyaṃ pṛthivī mahī bhūtānāṃ garbhamādadhe| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

यथा) जैसे (दयम्, मही, पृथिवो) इस महती । पृथिवी ने (पर्वतान्, त तो ौर पवंतीय प्रान्तों को गर्भरूप म (दाधार) धारण पर्वतो गौर गिरयो का पवरूप पृथिवी के गभं भे पिघला हृभा तरल गिरिों का पूर्वरूप है, जो कि पर्वतो ओौर भिरियोंकेषखूपमें पृथिवी को फाड़ कर बाहर आता है 1 । "नैगमा" कीचड़, धुआं, उष्णवाष्प, गस, लावा, तथा चटनी पदा्थो का समूह् होता है । . कां० ६.। अनु०.२। स० १८ अथवेवेद-भाष्य ३१

English

Of all the three terrestrial realms the ground is verily the best. I from the skin that covers these gather a healing medicine. Thou art the best of medicines, most excellent of Plants art thou,

अध्याय 6

श्लोक 17.2

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धारे॒मान् वन॒स्पती॑न्।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī dādhāremān vanaspatīn| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

(यथा) जिस प्रकार (इयम्, मही, पृथिवी) इस महती पृथिवी ने तथा स्थावर वस्तुओं को (दाधार) धारण किया हुमा है, (एवा = ८: हो, (अनु सूतुम्) उत्पत्तिविधि के अनुसार (सवितवे) पदा होने कर उसके हदय को सन्तप्त न करते रहे । (यथा) जसे (भूमिः) भूमि (मृतमनाः) मरे मन वाली है, (मृतात्) मृत की अपेक्षा भी (मृतमनस्तरा) अतिशयदूप मेँ मरे मन वाली है, (यथा उत) भौर जसे (मन्न.षः) मर गये पुरुष का (मनः) मन होता

English

As Soma ‘mid the wandering stars, as Varuna among the Gods. Endowed with wealth, denying not, give freely fain to give your gifts! Ye stay the hair from falling off: ye strengthen and increase its growth.

अध्याय 6

श्लोक 17.3

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ पर्व॑तान् गि॒रीन्।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī dādhāra parvatān girīn| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

जाता है, उसकी मनन शक्ति मर जात्ती है । .. चलते-फिरते भूमि पर पादप्रहार होते, कृषि आदि द्वारा इस के शरीर को चीरा-फाड़ा जाता, हस पर मलमूत्र का व्याग किया जाता, परन्तु भूमि प्रतिक्रिया नहीं करती, क्योंकि यहं मानो मतमना है, मृत के शरीरकी अपेक्षा भी अनुभूति तथा विचार से अधिक शून्या है। मृतका शरोर तो भूति आदि से रहित रही है । ई््यालु को एेसौ अवस्था उस के जीवित (ते) तेरे (हृदि) हदय में (श्रितम्) आश्वय पाया हमा (यत्) जो ् निःरेषरूप में पृथक् कर देता ह (दतः) लुहार की धौकनी से (इव)

English

To the Maruts or Storm-Gods 75 Dark the descent; the strong-winged birds are golden: they fly aloft to heaven, enrobed in

अध्याय 6

श्लोक 17.4

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ विष्ठि॑तं॒ जग॑त्।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī dādhāra viṣṭhitaṃ jagat| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

निकाल दिया जाता है । दृति == चमड़ कौ थेली । (१-३) । शन्ताति: । नाना देवलाः, तथा चन्द्रमाः । गायत्री; १ अनु- पनन्त मा देवजनाः पुनन्तु मन॑वो धिया । दारा (पुजन्तु) पवित्र कर । (विश्वा भूतानि) सब भूत (पुनन्तु) मुस पवित्र करर, (पवमानः) पवित्र करने वाला परमेश्वर (मा) मुके (पुनातु) देवजनाः = “देवाऽअयजन्त साश्याऽऋषयरच ये" (यजू० ३१।६) ।

English

waters. They have come hither from the seat of Order, and inundated earth with streams of fatness. Ye make floods rich in milk, make plants propitious, what time ye stir, O golden-breasted

अध्याय 6

श्लोक 18.1

ईर्ष्याविनाशनम्।१-३ अथर्वा।ईर्ष्याविनाशनम्।अनुष्टुप्।ई॒र्ष्याया॒ ध्राजिं॑ प्रथ॒मां प्र॑थ॒मस्या॑ उ॒ताप॑राम्।अ॒ग्निं हृ॑द॒य्यं॑१ शोकं॒ तं ते॒ निर्वा॑पयामसि

īrṣyāvināśanam| 1-3 atharvā| īrṣyāvināśanam| anuṣṭup| īrṣyāyā dhrājiṃ prathamāṃ prathamasyā utāparām| agniṃ hṛdayyaṃ1 śokaṃ taṃ te nirvāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

कही है 1 मनवः द्वारा मानसिक पवित्रता कहो ह । भूतानि द्वारा शारीरिक पवित्रता, ओर पवमान द्वारा सवेतोमुखी पवित्रता कही है । भूतानि दास का० ६ । अनु० २। सु° १९ अथवेवेद-भाष्य ३२ प्थिवी, आपः, तेज, वायु, आकाश का कथन इजा है । ये पांचों भूत शोधघक हँ । पव्रमान द्वारा वायु का ग्रहण नहीं, वायु । “भूत'' है, अतः वह “विश्वा भूतानि" के अन्तरगत है। धिया धीः कर्मनामः ्रज्ञानाम (निषं०

English

Maruts! Pour down your showers of vigorous strength and favour there where ye sprinkle mead, O Maruts, heroes!

अध्याय 6

श्लोक 18.2

यथा॒ भूमि॑र्मृ॒तम॑ना मृ॒तान्मृ॒तम॑नस्तरा ।यथो॒त म॒म्रुषो॒ मन॑ ए॒वेर्ष्योर्मृ॒तं मनः॑

yathā bhūmirmṛtamanā mṛtānmṛtamanastarā | yathota mamruṣo mana everṣyormṛtaṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

पवंपानः पुनातु मा करत्वे दक्षाय जीवसं । (पवमानः) पवित्र करने वाला परमेश्वर (मा ) मृस्ल (पुनातु ) पवित्र (दक्षाय ) बुद्धि के लिये, (जीवसे) पवित्र जीवनके लिये, अथो) ओर (अरिष्टतातये) हिसा के विस्तार के लिये । (“शिवशमरिष्टस्य करे", अष्टा० ४।४।१४३) अधिक पवित्रता के लिये । पुनः परमेश्वर से प्रार्थना की गई है ।

English

O Maruts, send ye down, streaming with water rain which, may, filling all the sloping valleys, Leap like a bold girl in a man’s embraces, or like a matron tumbled by her husband.

अध्याय 6

श्लोक 18.3

अ॒दो यत् ते हृ॒दि श्रि॒तं म॑न॒स्कं प॑तयिष्णु॒कम्।तत॑स्त ई॒र्ष्यां मु॑ञ्चामि॒ निरू॒ष्माणं॒ दृते॑रिव

ado yat te hṛdi śritaṃ manaskaṃ patayiṣṇukam| tatasta īrṣyāṃ muñcāmi nirūṣmāṇaṃ dṛteriva

हिन्दी अर्थ

उभाभ्यां देव सवितः पवित्रैण सेनं च । अस्मान् पुनीहि चक्ष॑से ॥३॥ वेदों के स्वाध्याय दवारा निज जोवन को पवित्र कर, तथा 1, बयववेद-भाष्य का० ६॥ अनु० २) सू°० २० (दहतः) दहन करने वाली (अग्नेः इव) अग्नि के दाह के सदृश, (मस्य शुष्मिणः) सुखा देने वाले इस ज्वर का दाह (एति) भाताहै शरीर इधर-उधर जाता-आाता है । (अव्रतः) ज्वर कर्मरहित कर देने वाला दहै, यह्

English

To the Waters Here flow the restless ones, they flow unceasing through the day and night, Most excellently wise I call the Goddess Waters hitherward.

अध्याय 6

श्लोक 19.1

पावमानम्।१-३ शन्तातिः।चन्द्रमाः, १ देवजनाः, मनवः विश्वा भूतानि, पवमानः, २ पवमानः, ३ सविता।गायत्री, १ अनुष्टुप्।पु॒नन्तु॑ मा देवज॒नाः पु॒नन्तु॒ मन॑वो धि॒या।पु॒नन्तु॒ विश्वा॑ भू॒तानि॒ पव॑मानः पुनातु मा

pāvamānam| 1-3 śantātiḥ| candramāḥ, 1 devajanāḥ, manavaḥ viśvā bhūtāni, pavamānaḥ, 2 pavamānaḥ, 3 savitā| gāyatrī, 1 anuṣṭup| punantu mā devajanāḥ punantu manavo dhiyā| punantu viśvā bhūtāni pavamānaḥ punātu mā

हिन्दी अर्थ

(तपुवधाय ) शरीर को तपा देना जिस का घातुक भायुघ है उस (तक्मने) पित्तज्वर के लिये (नमः अस्तु) नमः हो । शुष्मिणः = शुष्म बलनाम (निधं ० २।६) । पित्तज्वर शोषक है, ओर प्रबल वेग के साथ आक्रमण करता है । यह रक्त को सुखा हैता है । तक्मने == तकि छृच्छृजीवने (भ्वादिः), यह् जीवन को कष्टमय कर देता है। बुद्धि मौर करमो मे पवित्र जीवन वाले (जथवं० ६।१६।१-३) । अन्यम् = अपवित्र जीवन वाले को। 'नमः' के दो अथं मर्भिप्रेत है अन्न भौर वज नष्ट हो जाता है । विनियोगकारों ने सूक्त का देवता “यक्षमनाशन'' कहा - रक्तं के सुख जाने से कमजोरी के कारण यक्ष्म आक्रमण करता हो ।

English

Let the deft Waters, summoned, give permission that we bear them off, And quickly set us on our way. Let all the people celebrate the rite of Savitar the God.

अध्याय 6

श्लोक 19.2

पव॑मानः पुनातु मा॒ क्रत्वे॒ दक्षा॑य जी॒वसे॑ ।अथो॑ अरि॒ष्टता॑तये

pavamānaḥ punātu mā kratve dakṣāya jīvase | atho ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

(खद्राय) पाप के फलरूप में रलाने वाले परमेश्वर के लिये (नमः) नमस्कार हो, (तक्मने) जीवन को कष्टमय करने वाले ज्वर के लिये की दीप्तिवाले, (राज्ञे) राजा (वरुणाय)मेष के लिये (नमः) अघ्राहुतियं । हो, (दिवे) चुलोक के लिये नमः) अघ्नाहूतियां हों, (पृथिव्य) पृथिवी कौ शुद्धि के लिये (नमः) अक्षाहूवियां हो, (ओषधीभ्यः) अओषधियों ख (तमः) अन्न की प्राप्ति हो, खाच अन्न ही नही भपितु यज्ञाणिवि दास खाद्य अन्न भी है, अतः स का वारण करता है, अतः यह सब प्राणियों का राजा है । इस में दीप्ति ह मेघीय विद्युत् । वरुण है मेष, एतदथं देखो निरक्त (१०।१।५) .मे वरुण

English

Sweet unto us be Waters, Plants propitious! To the Rivers Forth from the Hills of Snow they stream, and meet in Sindhu here or there.

अध्याय 6

श्लोक 19.3

उ॒भाभ्यां॑ देव सवितः प॒वित्रे॑ण स॒वेन॑ च ।अ॒स्मान् पु॑नीहि॒ चक्ष॑से

ubhābhyāṃ deva savitaḥ pavitreṇa savena ca | asmān punīhi cakṣase

हिन्दी अर्थ

(अयम्, यः) यह जोत (अभिशोचयिष्णुः) शरीरके सब मोर उप- । ताप पेदा करने वाला, (विश्वा रूपाणि) शरीर के सब सूपो को (हरिता । हरितानि) हरे-पीले (कृणोषि)कर देता है, (तस्मै) उस (अरुणाय) लाल (नमः) पञ्यान्न तथा मौषध-वच प्रहार (कृणोमि) म करता हूं । पित्तज्वर में पित्त के विगड़ जानेके कारण शरीर हरा-पीला, मख- १. व्याख्या के लिये निरुक्तकार ने “नीचीनवारं वरुणः" मन्त (ऋ० ५।८५।३) पपस्थित किया है जिसमेंवृष्टिकाभी वर्णनदहै, ओौर वरुणको राजा भी षहा

English

To me the sacred Waters gave the balm that heals the heart’s disease. Whatever rupture I have had that injured eyes or heels or toes. All this the Waters, skilfullest physicians, shall make well again,

अध्याय 6

श्लोक 20.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।यक्ष्मनाशनम्।१ अतिजगती, २ ककुम्मतीप्रस्तारपङ्क्तिः, ३ सतः पङ्क्तिः।अ॒ग्नेरि॑वास्य॒ दह॑त एति शु॒ष्मिण॑ उ॒तेव॑ म॒त्तो वि॒लप॒न्नपा॑यति ।अ॒न्यम॒स्मदि॑च्छतु॒ कं चि॑दव्र॒तस्तपु॑र्वधाय॒ नमो॑ अस्तु त॒क्मने॑

yakṣmanāśanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| yakṣmanāśanam| 1 atijagatī, 2 kakummatīprastārapaṅktiḥ, 3 sataḥ paṅktiḥ| agnerivāsya dahata eti śuṣmiṇa uteva matto vilapannapāyati | anyamasmadicchatu kaṃ cidavratastapurvadhāya namo astu takmane

हिन्दी अर्थ

रै । साथ ही वरुण अन्तरिक्षस्थानी देवता मीदटहै। ( ६ अथर्ववेद-भाष्य का०६। अनु० २। सू० ९० कहा है । जैसे पिण्ड गौर पिण्डके अवयवो का शासन, जीवात्मा दासय के फलरूप मे सलाने वाले परम-आत्मा वारा होता है जैसे जीवित देह- आत्मा का वर्णन इसलिये पुरुष-रूप मे भी होता है । इस पुरुष के शरीरा-

English

All Rivers who have Sindhu for your Lady, Sindhu for your Queen, Give us the balm that heals this ill: this boon let us enjoy from you.

अध्याय 6

श्लोक 20.2

नमो॑ रु॒द्राय॒ नमो॑ अस्तु त॒क्मने॒ नमो॒ राज्ञे॒ वरु॑णाय॒ त्विषी॑मते ।नमो॑ दि॒वे नमः॑ पृथि॒व्यै नम॒ ओष॑धीभ्यः

namo rudrāya namo astu takmane namo rājñe varuṇāya tviṣīmate | namo dive namaḥ pṛthivyai nama oṣadhībhyaḥ

हिन्दी अर्थ

वयव का भी वणैन यजुवद के पुरुष सूक्त ३१ मे हमा है (३१।१०,१३) (३१।१०,१३) 1 तथापि यह् सप्रयोजन ओर सार्थक रै, यह् दशनि के लिये कि जैसे जीवित मनुष्य का देह सात्मक हैः निरात्मक नही, वेसे परम- उनमेस्ने (ह) निश्चय से (भूमिः) समतल भूमि (उत्तमा) उक्तम है, किया जाता है । समतल भूमिसे ञओषधि का संग्रह प्रभूतमात्रा में होता है (वीरुधानाम्) विरोहण करने वाली लता-वनस्पतियों मेतु ( वसिष्ठम्)

English

A charm to remove pustules or scrofulous swellings (apachitas) May all the five-and-fifty which meet round the tendons of the neck. Depart and vanish hence away like plaguing insects buzz and hum!

अध्याय 6

श्लोक 20.3

अ॒यं यो अ॑भिशोचयि॒ष्णुर्विश्वा॑ रू॒पाणि॒ हरि॑ता कृ॒णोषि॑ ।तस्मै॑ तेऽरु॒णाय॑ ब॒भ्रवे॒ नमः॑ कृणोमि॒ वन्या॑य त॒क्मने॑

ayaṃ yo abhiśocayiṣṇurviśvā rūpāṇi haritā kṛṇoṣi | tasmai te'ruṇāya babhrave namaḥ kṛṇomi vanyāya takmane

हिन्दी अर्थ

म तू (सोमः) चन्द्रमा मौर (भगः द्व) सूयं के सदृश है, (देवेषु) देवो मे (यथा) जसे (वरुणः) वरणीय परमेश्वर सर्वोत्तम है, वेसे भेषजो मेत् उत स्थ कैशददणीरथा ह केशवधैनीः ॥३॥ (सिषासथ) तुम लाभ प्रदान करो । (उत) तथा (स्थ) तुम हो (केशद् - हणीः) केशो को दृढ करने वाली (अथो ह) मौर (केशवधेनीः) केशो को (सुपर्णाः) उत्तम वर्णो वाले पक्षियों के सदृश उड़ने वाली, (हरयः) जल का हरण करने वाली, मादित्य र्मया (अपः वसानाः) जल को की उड़ान आदित्य कौ ओर कटी दहै । आदित्य उदक भरी रर्मियोका सदन है । ऋतम् उदकनाम (निषं० ११२); धृतम् उदकनाम (निषं०

English

Those seventy-and-seven which meet round the upper vertebrae, Let them all vanish hence away like plaguing insects’ buzz and hum! Those nine-and-ninety which, combined, attack the shoulder round about,

अध्याय 6

श्लोक 21.1

केशवर्धनी औषधिः।१-३ शन्तातिः।चन्द्रमाः।अनुष्टुप्।इ॒मा यास्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीस्तासां॑ ह॒ भूमि॑रुत्त॒मा।तासा॒मधि॑ त्व॒चो अ॒हं भे॑ष॒जं समु॑ जग्रभम्

keśavardhanī auṣadhiḥ| 1-3 śantātiḥ| candramāḥ| anuṣṭup| imā yāstisraḥ pṛthivīstāsāṃ ha bhūmiruttamā| tāsāmadhi tvaco ahaṃ bheṣajaṃ samu jagrabham

हिन्दी अर्थ

इसलिये वर्षाजल को घृत कहा है । अथरववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ३। ू० २२ शर्ईहो, तो विवाहंकौ विधिसे.वह “पुनः” विवाहसंस्कार के योग्य कां० ६। अनु० ३ । सु० २२ अथवेवेद-भाष्य ३६ (मर्तः) है मानसून वायुओ ! (रुक्मवक्षसः) सुवणं सदृश चमकीली

English

Let them all vanish hence away like plaguing insects’ buzz and hum! To Affliction Let me go free, O Misery: do thou, the mighty, pity us.

अध्याय 6

श्लोक 21.2

श्रेष्ठ॑मसि भेष॒जानां॒ वसि॑ष्ठं॒ वीरु॑धानाम्।सोमो॒ भग॑ इव॒ यामे॑षु॒ दे॒वेषु॒ वरु॑णो॒ यथा॑

śreṣṭhamasi bheṣajānāṃ vasiṣṭhaṃ vīrudhānām| somo bhaga iva yāmeṣu deveṣu varuṇo yathā

हिन्दी अर्थ

' विद्युत् को छाती में धारण करती हई तुम (यद्) जो (एजथ) चलती हो, ।, तो (अपः) क्षीण हए जलो को (पयस्वतीः) प्रभूत जल समेत, ओर (ओषधीः) ओषधियों को (शिवाः) सुखमयी तथा कल्याण करने वाली को, (च) भौर (सुमतिम्) सुमति को (पिन्वत) परिपृष्ट कर देती हो (यत्र) जहां कि (मरुतः) है मानसुन वायु ! तुम॒ (मधु) मधुर जल (सिञ्त्रथ) सीचती हो, (नरः) जैसे कि किंसान-पुरुष निज क्षेत्रों को (उदभ्रतः) उदक से आप्लुत अर्थात् भरी हुई (मरूतः) है मानसून वायुमो ! (ता ताम्) उसे (दयतं) प्रेरित करो (या वृष्टिः) जौ वृष्टि । कि (विश्वाः निवतः) सब निम्नगामिनी नदियों को (पृणाति) पूरित कर

English

Set me uninjured in the world of happiness, O Misery. From thee, from thee who fliest not from us, O Misery, we fly. Then at the turning of the paths let Misery fall on someone else.

अध्याय 6

श्लोक 21.3

रेव॑ती॒रना॑धृषः सिषा॒सवः॑ सिषासथ ।उ॒त स्थ के॑श॒दृंह॑णी॒रथो॑ ह केश॒वर्ध॑नीः

revatīranādhṛṣaḥ siṣāsavaḥ siṣāsatha | uta stha keśadṛṃhaṇīratho ha keśavardhanīḥ

हिन्दी अर्थ

वृष्टि (एजाति) किसानों को केम्पा देती है तथा (इव) जैसे (तुन्ना) चुरादिः) + उ (मौणादिक १।७।२१), णिजथं अन्तर्भावित = गमन कराने ¦ वाला, निजकन्या को वैवाहिक विधिपूवेक, पतिगृह मे भेजनेवाला पिता वैवाहिकेन विधिना पुनः संस्कारमर्ति ॥ सा पृद्री-कन्या यदि अक्षतयोनि हो, या पतिगृह जाकर वापिस आ

English

May the immortal, thousand eyed, dwell otherwhere apart from us. Let him afflict the man we hate: smite only him who is our foe. A charm to avert misfortune foreshown by the coming of a dove

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।