अध्याय 6
श्लोक 142.1
अन्नसमृद्धिः।१-३ विश्वामित्रः।वायुः।अनुष्टुप्।उच्छ्र॑यस्व ब॒हुर्भ॑व॒ स्वेन॒ मह॑सा यव ।मृ॒णी॒हि विश्वा॒ पात्रा॑णि॒ मा त्वा॑ दि॒व्याशनि॑र्वधीत्
annasamṛddhiḥ| 1-3 viśvāmitraḥ| vāyuḥ| anuṣṭup| ucchrayasva bahurbhava svena mahasā yava | mṛṇīhi viśvā pātrāṇi mā tvā divyāśanirvadhīt
हिन्दी अर्थ
हन महानु मावों फा हम कृतक्ञतापू्वेक धन्यवाद करते ह ओरभ्राशा करते ह कि वेदभक्त आयेजन इस महक्त्वपूणं कायं को पूर्णं॑करने में हरे यथोचित सहयोग प्रदान करेगे । हस भाग पर केवल कागज ओर छपाई पर ही १२ सहल रपरया व्वय पुस्तक लागत १८ रुपये पडती है । रभो काण्ड ५-४ छप रहे ह गौर ३-२-१३ काण्ड छापने है) प्रथम
English
A blessing on cattle Spring high, O Barley, and become much through thine own magnificence: p. a269 Burst all the vessels; let the bolt from heaven forbear to strike thee down.