Atharva Veda
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

286 श्लोकभाग 1/5 · श्लोक 1.1–29.2

पूर्ण अध्याय पाठ66 श्लोक

अध्याय 7

श्लोक 1.1

आत्मा।१-२ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, २ विराड् जगती।धी॒ती वा॒ ये अन॑यन् वा॒चो अग्रं॒ मन॑सा वा॒ येऽव॑दन्नृ॒ तानि॑ ।तृ॒तीये॑न॒ ब्रह्म॑णा वावृ॒धा॒नास्तु॒रीये॑णामन्वत॒ नाम॑ धे॒नोः

ātmā| 1-2 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, 2 virāḍ jagatī| dhītī vā ye anayan vāco agraṃ manasā vā ye'vadannṛ tāni | tṛtīyena brahmaṇā vāvṛdhānāsturīyeṇāmanvata nāma dhenoḥ

हिन्दी अर्थ

नमुक्त नहीं हुए उन मूमृक्षुशों को स्थिति तुतीयधाममें होती दहै । यथा संसारी होता है, वे अभी जीवन्मुक्तावस्था मे नहीं होते, अतः वे प्रनापति- ओर पालन के साथ सम्बद्ध रहतारहै, इस संसार के साथ सम्बद्ध वह पृथिवी माता को (वेद) जानता है, (सः सूनुः) वह् जगत् का प्रेरक .

English

Glorification of the power of prayer and to Agni They who by thought have guided all that Speech hath best, or they who with their heart have uttered words of truth,

अध्याय 7

श्लोक 1.2

स वे॑द पु॒त्रः पि॒तरं॒ स मा॒तरं॒ स सू॒नुर्भु॑व॒त् स भु॑व॒त् पुन॑र्मघः ।स द्यामौ॑र्णोद॒न्तरि॑क्षं॒ स्वः॑१ स इ॒दं विश्व॑मभवत् स आभ॑वत्

sa veda putraḥ pitaraṃ sa mātaraṃ sa sūnurbhuvat sa bhuvat punarmaghaḥ | sa dyāmaurṇodantarikṣaṃ svaḥ1 sa idaṃ viśvamabhavat sa ābhavat

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर, यौः पिता ओर पृथिवी माताका पुत्रहै, इन दोनोंकी विविध घटनाओं द्वारा परमेश्वर की सत्ता का परिज्ञान होता है, भतः परमेश्वर को यौः ओर पृथिवी का पत्र कहा है । सूनुः का अर्थं. पुत्र नहीं, क्योंकि पू्र का कथन पूवं हो चुका है, अतः सूनुः का अथं है प्रेरक, षू प्रेरणे का०७। भ्रनु० १। सु०२ अथवेवेद-माष्य ३ जगत् को पेदा कर वह पुनः मघवान् हो जाता है । यह् अवस्था वार-वार के प्रलय भौर सृष्टि मे होती रहती है 1 परमेश्वर को “मघवा” भी कहते है, मघवा = मघवाला, धन वाला । ¦ अथर्वाणं पितरं देवबन्धुं मातुगभ पितुरसु युवानम् । य दषं यद्ग मन॑सा चिकेत मर णो वोचस्तमिहेह जवः ॥१॥

English

Made stronger by the strength which the third prayer bestows, have by the fourth prayer learned the nature of the Cow. Well knows this son his sire, he knows his mother well: he hath been son, and he hath been

अध्याय 7

श्लोक 2.1

आत्मा।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, अथ॑र्वाणं पि॒तरं॑ दे॒वब॑न्धुं मा॒तुर्गर्भं॑ पि॒तुरसुं॒ युवा॑नम्।य इ॒मं य॒ज्ञं मन॑सा चि॒केत॒ प्र णो॑ वोच॒स्तमि॒हेह ब्र॑वः

ātmā| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, atharvāṇaṃ pitaraṃ devabandhuṃ māturgarbhaṃ piturasuṃ yuvānam| ya imaṃ yajñaṃ manasā ciketa pra ṇo vocastamiheha bravaḥ

हिन्दी अर्थ

वन्धने वाले, (मातुगेभेम्) पृथिवी माता के गर्भरूप, (पितुः असुम्) पितु- अर्थात् हैवरूप में पूजनीय परमेश्वर को (यः) जो (मनसा) मनन पूवक (चिकेत) सम्यक्तया जानता है, वह॒ (नः) हमे (भ्रवोचः) उसं का क करे, (तम्) उसे (इट्, इहं ) इन-इन विविध स्थानों में (ब्रवः) मान होता है । मौर समय पर प्रकट होकर वह श्नातस्परूप हो जाता में रहता है, ओर समय पर किसी ऋषि, मुनि, सन्त, महात्मा मे प्रकट हो कर ज्ञातस्वरूप हो जाता है।

English

illiberal. He hath encompassed heaven, and air’s mid-realm, and sky; he hath become this All; he hath come nigh to us.

अध्याय 7

श्लोक 3.1

आत्मा।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, अ॒या वि॒ष्ठा ज॒नय॒न् कर्व॑राणि॒ स हि घृणि॑रु॒रुर्वरा॑य गा॒तुः ।स प्र॒त्युदै॑द् ध॒रुणं॒ मध्वो॒ अग्रं॒ स्वया॑ त॒न्वाऽत॒न्वऽमैरयत

ātmā| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, ayā viṣṭhā janayan karvarāṇi sa hi ghṛṇirururvarāya gātuḥ | sa pratyudaid dharuṇaṃ madhvo agraṃ svayā tanvā'tanva'mairayata

हिन्दी अर्थ

८1 पितु श्रसुम्' ५ पिता है दयौः 1 दलोक का वह् भसु है, प्राण- 1 अथ्ैवेद-भाष्य का०७ भ्रनु० १। सु ॥ (ग्रया= अनया ) रम (विष्ठा = विष्ठया ) विविघ स्थिति के कारण अरथर्वा-परमेश्वर टी (घुणिः ) दिन के समान चमकता है, (उरः ) ओर वह् सर्वाच्छादक है । (वराय) वह् वरण किये गए. उपासक के लिये (गातुः)

English

Praise of Atharvan Invoke for us, proclaim in sundry places, the kinsman of the Gods, our sire Atharvan,

अध्याय 7

श्लोक 4.1

आत्मा।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।वायुः।त्रिष्टुप्, एक॑या च द॒शभि॑श्चा सुहुते॒ द्वाभ्या॑मि॒ष्टये॑ विंश॒त्या च॑ ।ति॒सृभि॑श्च॒ वह॑से त्रिं॒शता॑ च वि॒युग्भि॑र्वाय इ॒ह ता वि मु॑ञ्च

ātmā| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | vāyuḥ| triṣṭup, ekayā ca daśabhiścā suhute dvābhyāmiṣṭaye viṃśatyā ca | tisṛbhiśca vahase triṃśatā ca viyugbhirvāya iha tā vi muñca

हिन्दी अर्थ

अया तृतीयाया याजादेशः (सायण ) 1 कवराणि-=करववैरम् कमेनाम धारण करता है, मौर परमेश्वर सूयं का धारण करता है, एतद्थं॑वह् सूर्यं मे मानो सदा उदित रहताहै.। जसे कि कटा है “योऽसावादित्ये पुरुषः विस्तारे (तनादिः) परमेश्वर विविष पदार्थो मे स्थित होकर उनके कमो को नियन्त्रित करता है 1 एकया च दुका्िश्चा सुहुते दराभ्यापिष्टये विशत्या च॑ ।

English

His mother’s germ, his father’s breath, the youthful, who with his mind hath noticed this oblation. To Vāyu God of the Wind

अध्याय 7

श्लोक 5.1

आत्मा।१-५ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, ३ पङ्क्तिः ४ अनष्टुप्।य॒ज्ञेन॑ य॒ज्ञम॑यजन्त दे॒वास्तानि॒ धर्मा॑णि प्रथ॒मान्या॑सन्।ते ह॒ नाकं॑ महि॒मानः॑ सचन्त॒ यत्र॒ पूर्वे॑ सा॒ध्याः सन्ति॑ दे॒वाः

ātmā| 1-5 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, 3 paṅktiḥ 4 anaṣṭup| yajñena yajñamayajanta devāstāni dharmāṇi prathamānyāsan| te ha nākaṃ mahimānaḥ sacanta yatra pūrve sādhyāḥ santi devāḥ

हिन्दी अर्थ

(वियुग्मिः) शरीर-रथ के साथ विशेषरूप मे चुती हृद (एकया च का० ७1 अनु० १। सू०४ भ्रथर्ववेद-भाष्य्ः -५ णक्तियों समेत; (च) ग्रौर (वहसे) शरीर-रथ के वहन के लिये ( तिसृभिः च त्रिशता च) तीन तथा तीस अर्थात् ३३ एवितयों समेत (वायो) । न परमेश्वर (मै तेरे प्रति आत्मृाहुति, ्रात्मसमपेण करता ताः उन समग्र शक्तियों को (इह) इस जीवन में ( १) यृहते, इष्टये, वहसे, तीनों पद चतु्यं यैकवचनान्त है । सुहृत = सुः

English

With thine eleven teams, to aid our wishes, yea, with thy two- and-twenty teams, O Vāyu, With all thy three-and-thirty teams for drawing, here loose these teams, thou who art prompt to listen!

अध्याय 7

श्लोक 5.2

य॒ज्ञो ब॑भूव॒ स आ ब॑भूव॒ स प्र ज॑ज्ञे॒ स उ॑ वावृधे॒ पुनः॑ ।स दे॒वाना॒मधि॑पतिर्बभूव॒ सो अ॒स्मासु॒ द्रवि॑ण॒मा द॑धातु

yajño babhūva sa ā babhūva sa pra jajñe sa u vāvṛdhe punaḥ | sa devānāmadhipatirbabhūva so asmāsu draviṇamā dadhātu

हिन्दी अर्थ

चतुर्थी विभक्ति का एकवचनान्त रूप है । इन तीनों पदों की चतुर्थी "पूति कं लिये” किये हैँ । यथा “फलाय गच्छति ग्रामम्” का अभिप्राय है क्रिया, जिस कं साथ शक्तियों को परमेश्वर ने जोता है, ओर जिससे उन्हें जिसे किं "विमुञ्च" पद द्वारां विमूक्ति या मुक्ति सूचितकीदहै।

English

A glorification of sacrifice The Gods adored the Sacrifice with worship: these were the statutes of primeval ages. Those mighty ones attained the cope of heaven, there where the

अध्याय 7

श्लोक 5.3

यद् दे॒वा दे॒वान् ह॒विषाय॑ज॒न्ताम॑र्त्या॒न् मन॒साम॑र्त्येन ।मदे॑म॒ तत्र॑ पर॒मे व्योऽम॒न् पश्ये॑म॒ तदुदि॑तौ॒ सूर्य॑स्य

yad devā devān haviṣāyajantāmartyān manasāmartyena | madema tatra parame vyo'man paśyema taduditau sūryasya

हिन्दी अर्थ

रथ के साथ जुती हुई ह। इन ११ शक्तियो को उपनिषद् में “हय कटा है 1 यथा “इन्द्रियाणि हयानाहुः" (कठ० १।३।४) । इसलिये शरीर है रथ, जिस कौ साथ कि इन्दिय-हय श्रथति भ्रश्व जुते हए हँ दसलिये शरीर को रथ कहा है । यथा “आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु (कठ० १।३।३)। (४) एकादश शक्तियां हँ कारण शरीरकी। २२ शक्तियां है, ११ कारगशरीर की- ११ सूक्ष्म शरीर की1 ३३ शक्तियां ह, ११ कारण शरीर की + ११ सूक्ष्मशरीर को + ११ स्थूल शरीर की । ये शक्तियां कारण मे पू्णैरूप से अभिन्यक्तावस्या में रहती है । शक्तियां तो केवल १ १ ही है, 8, ११-११-- ११३३ । ये ३३८प्राध्यात्मिक देव ह, जिन के वेदिक साहित्य मे ३३ देवता कहा है । :

English

Sādhyas, Gods of old, are dwelling. Sacrifice was, was manifest among us: it sprang to life and then in time grew stronger. Then it became thedeities’ lord and ruler: may it bestow on us abundant riches.

अध्याय 7

श्लोक 5.4

यत् पुरु॑षेण ह॒विषा॑ य॒ज्ञं दे॒वा अत॑न्वत ।अस्ति॒ नु तस्मा॒दोजी॑यो॒ यद् विहव्ये॑नेजि॒रे

yat puruṣeṇa haviṣā yajñaṃ devā atanvata | asti nu tasmādojīyo yad vihavyenejire

हिन्दी अर्थ

६ प्रथवंवेद-भाष्य का० ७ । प्रनु° १। सू०५ एकया, द्वाभ्याम्, तिसृभिः- द्वारा मन को सुचित कियाहै। 8 ५५ णवितसम्पन्न मन कारण शरोर में, सात्विक ओर राजसिक शक्तियों सम्पन्न मन स्थूलशरीर में ेरणाएुं देता है । रहस्य को यथामति मने प्रकट किया है। ह र सम्भव है ।

English

Where the Gods worshipped Gods with their oblation, worship- ped immortals with immortal spirit, p. a272 There in the loftiest heaven may we be happy, and look upon that light when Sūrya rises.

अध्याय 7

श्लोक 5.5

मु॒ग्धा दे॒वा उ॒त शुनाय॑जन्तो॒त गोरङ्गैः॑ पुरु॒धाय॑जन्त ।य इ॒मं य॒ज्ञं मन॑सा चि॒केत॒ प्र णो॑ वोच॑स्तमि॑हेह ब्र॑वः

mugdhā devā uta śunāyajantota goraṅgaiḥ purudhāyajanta | ya imaṃ yajñaṃ manasā ciketa pra ṇo vocastamiheha bravaḥ

हिन्दी अर्थ

३३ देवों के स्वरूप रहस्यमय ही ह । तथा ३३ देवों 4 क विभाग, ४ व्यामेकादश स्थ” (श्रथवं ° १६।२७।११,१२,१३) 1 इसी प्रकार यजुवद में भी ग्यारह-ग्यारह के समूटरूप मे ३३ देवों की स्थिति दि वि एथिन्यानू ३३ अ.धिहैविक देवों के । प्राघ्यात्मिक दृष्टि से “कारणणरीर'' धौः है, रहती है, तथा पेट है पृथिवी, जो कि अन्न का स्थान ह । वायु =सर्वंगति

English

With their oblation, Purusha, the Gods performed a sacrifice. A sacrifice more potent still they paid with the invoking hymn. With dog the Gods, perplexed, have paid oblation, and with cow’s limbs in sundry sacrifices.

अध्याय 7

श्लोक 6.1

अदितिः १-४ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।अदितिः।त्रिष्टुप्, २ भुरिक्, ३-४ विराड् जगती।अदि॑ति॒र्द्यौरदि॑तिर॒न्तरि॑क्ष॒मदि॑तिर्मा॒ता स पि॒ता स पु॒त्रः ।विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः॒ पञ्च॒ जना॒ अदि॑तिर्जा॒तमदि॑ति॒र्जनि॑त्वम्

aditiḥ 1-4 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | aditiḥ| triṣṭup, 2 bhurik, 3-4 virāḍ jagatī| aditirdyauraditirantarikṣamaditirmātā sa pitā sa putraḥ | viśve devā aditiḥ pañca janā aditirjātamaditirjanitvam

हिन्दी अर्थ

( यजु° २२।१) मे परमेष्वर को “वायु” भी कहा है । कौ (श्रयजन्त) पूजा करते द, (तानि) वे ईश्वर की पूजा आदि (धर्माणि) मानः) महत्त्व से युक्त हए (यत्र) जिस सुख मेँ ( पूवं) इस समय से पूवं होते हैँ । (यजु° ३१।१६) के दयानन्द के भाष्य के अनुसार अभे दिया है

English

Invoke for us, in many a place declare him who with his mind. hath noticed this our worship. A prayer to Aditi for help and protection Aditi is sky, and air’s mid-region, Aditi is the father, son, and mother,

अध्याय 7

श्लोक 6.2

म॒हीमू॒ षु मा॒तरं॑ सुव्र॒ताना॑मृ॒तस्य॒ पत्नी॒मव॑से हवामहे ।तु॒वि॒क्ष॒त्राम॒जर॑न्तीमुरू॒चीं सु॒शर्मा॑ण॒मदि॑तिं सु॒प्रणी॑तिम्

mahīmū ṣu mātaraṃ suvratānāmṛtasya patnīmavase havāmahe | tuvikṣatrāmajarantīmurūcīṃ suśarmāṇamaditiṃ supraṇītim

हिन्दी अर्थ

(देवाः) दिव्यगुणी उपासक (यज्ञेन) देवत्वेन पृजन, संगतिकरण, है,(यत्र) जिस स्थान में (पूवे) पू्व॑सृष्टिकाल के (साध्याः) साधनीय योग- यज्ञेन = यज देवपूजासंगतिकरंणदानेषु ( भ्वादिः ), परमेष्वर को मुख्य देव जान कर उसी देव की पूजा करनी, उस के साय ध्यानाभ्यास- “नाकम् पद दुःख रहित स्थान विशेष का सूचक है । यथा धेन दयौरुग्रा

English

Aditi all the Gods and the Five Nations, Aditi what is now and what is future. We call for help the Queen of Law and Order, great mother of all those whose ways are 102

अध्याय 7

श्लोक 6.3

सु॒त्रामा॑णं पृथि॒वीं द्याम॑ने॒हसं॑ सु॒शर्मा॑ण॒मदि॑तिं सु॒प्रणी॑तिम्।दैवीं॒ नावं॑ स्वरि॒त्रामना॑गसो॒ अस्र॑वन्ती॒मा रु॑हेमा स्व॒स्तये॑

sutrāmāṇaṃ pṛthivīṃ dyāmanehasaṃ suśarmāṇamaditiṃ supraṇītim| daivīṃ nāvaṃ svaritrāmanāgaso asravantīmā ruhemā svastaye

हिन्दी अर्थ

कस्मे देवाय हविषा विधेम'' (यजु° ३२।६) में यौः, पृथिवी, अन्तरिक्षरूप आषिदेविक लोकों के साथ “नाकः पद पठित हह, ग्रतः “नाकः” भी आधि- पूजा रादि, पूवे पूरणे (भ्वादिः) । महिमानः उपासना व्रारा महमा को स हैवानामधिपति्वेभूव सो भस्मासु द्रविणमा द॑धातु ॥२॥ (यज्ञः) यजनीय परमेश्वर (बभुव) सत्तावान् है, (सः) वह॒ (आ

English

righteous, Far-spread, unwasting strong in her dominion, Aditi wisely lead- ing, well protecting. Sinless may we ascend, for weal, the vessel, rowed with good oars, divine, that never leaketh,

अध्याय 7

श्लोक 6.4

वाज॑स्य॒ नु प्र॑स॒वे मा॒तरं॑ म॒हीमदि॑तिं॒ नाम॒ वच॑सा करामहे ।यस्या॑ उ॒पस्थ॑ उ॒र्व॑१न्तरि॑क्षं॒ सा नः॒ शर्म॑ त्रि॒वरू॑थं॒ नि य॑च्छात्

vājasya nu prasave mātaraṃ mahīmaditiṃ nāma vacasā karāmahe | yasyā upastha urva1ntarikṣaṃ sā naḥ śarma trivarūthaṃ ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

५ अथर्वधेद-माष्य का० ७1 अनु० १।सूु० ५ वह ही (पुनः) बार-बार सृष्टि म (वावृधे ) गुण-कमो की दृष्टि चे युद्धि देवों का (ज्रचिपतिः बभूव) स्वामी हुमा है! (सः) वह (ग्रस्मासु) हममे (देवाः) दिव्यगणी उपासक, (हविषा) आत्मसमपेण रूपी हवि द्वारा दिव्य गुणों को (अयजन्त) अपने साथ सुसंगत करते है सम्बद्ध करते है,

English

Earth, our strong guard, incomparable Heaven, Aditi wisely lead- ing, well protecting. Let us bring hither, in pursuit of riches, Aditi with our word, the mighty mother, Her in whose lap the spacious air is lying: may she afford us triply-guarding shelter!

अध्याय 7

श्लोक 7.1

आदित्याः।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।अदितिः।आर्षी जगती।दितेः॑ पु॒त्राणा॒मदि॑तेरकारिष॒मव॑ दे॒वानां॑ बृह॒ताम॑न॒र्मणा॑म्।तेषां॒ हि धाम॑ गभि॒षक् स॑मु॒द्रियं॒ नैना॒न् नम॑सा प॒रो अ॑स्ति॒ कश्च॒न

ādityāḥ| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | aditiḥ|ārṣī jagatī| diteḥ putrāṇāmaditerakāriṣamava devānāṃ bṛhatāmanarmaṇām| teṣāṃ hi dhāma gabhiṣak samudriyaṃ nainān namasā paro asti kaścana

हिन्दी अर्थ

हुए (मदेम) हम उपासक हषं को प्राप्त हो, रौर (सूयस्य उदितौ) सूये के उदित होने पर प्रातः कालके ध्यान मे (पश्येम) परमेश्वर को मनसा=“मन” मानो अमत्य है, जब तक मोक्ष नहीं होता आत्मा के साथ मन रहता है । श्रथवा मोक्ष हो जाने पर भी उन मुक्तात्माओं के सथ मन बना ही रहता है जो कि परोपकाराथं पुनजंन्म के अभिलाषी होते है। पुरुषमाविशन्”; (अथवं ° १४११० १२.१८ ) ; तथा “आशिषश्च प्रशिषश्च मनु प्राविशन् (म्रथवं० ११।१०।२० ) इत्यादि) येदेवरहैँ जिनकोकि उपासक श्रपने मे सुसंगत करते है ।

English

Praise of the Ādityas I have sung praise to Diti’s sons and Aditi’s, those very lofty and invulnerable Gods. For far within the depths of ocean is their home and in the wor- ship paid them none excelleth

अध्याय 7

श्लोक 8.1

शत्रुनाशनम्।१ उपरिबभ्रवः।बृहस्पतिः।त्रिष्टुप्।भ॒द्रादधि॒ श्रेयः॒ प्रेहि॒ बृह॒स्पतिः॑ पुरए॒ता ते॑ अस्तु ।अथे॒मम॒स्या वर॒ आ पृ॑थि॒व्या आ॒रेश॑त्रुं कृणुहि॒ सर्व॑वीरम्

śatrunāśanam| 1 uparibabhravaḥ| bṛhaspatiḥ| triṣṭup| bhadrādadhi śreyaḥ prehi bṛhaspatiḥ puraetā te astu | athemamasyā vara ā pṛthivyā āreśatruṃ kṛṇuhi sarvavīram

हिन्दी अर्थ

यत् पुरषेण हविषा यद्ग देवा अत॑न्वत । करते वालि या उस में निवास करने वाले परमेश्वररूपी (हविषा) हवि का० ७। अनु १। सू०५ अथर्ववेद-माष्य € 1 वतमानाथक है, यथा “छन्दसि लड लङ लिटः" (अष्टा० ३।४।६॥ दारा लुङ आदि का प्रयोग वतेमानमे भी होता है ।

English

these. Godspeed to a departing traveller Go forward on thy way from good to better: Brihaspati pre- cede thy steps and guide thee!

अध्याय 7

श्लोक 9.1

स्वस्तिदा पूषा।१-४ उपरिबभ्रवः।पूषा।त्रिष्टुप्, ३ त्रिपदा आर्षी गायत्री, ४ अनुष्टुप्।प्रप॑थे प॒थाम॑जनिष्ट पू॒षा प्रप॑थे दि॒वः प्रप॑थे पृथि॒व्याः ।उ॒भे अ॒भि प्रि॒यत॑मे स॒धस्थे॒ आ च॒ परा॑ च चरति प्रजा॒नन्

svastidā pūṣā| 1-4 uparibabhravaḥ| pūṣā| triṣṭup, 3 tripadā ārṣī gāyatrī, 4 anuṣṭup| prapathe pathāmajaniṣṭa pūṣā prapathe divaḥ prapathe pṛthivyāḥ | ubhe abhi priyatame sadhasthe ā ca parā ca carati prajānan

हिन्दी अर्थ

गधा देवा उत शुनाऽय॑जन्तोत गोरक्षः पुरुधायंजन्त ! जो कि (शुना उत) शवादरा भी 9 ) ४ करते हँ (४ हमारे प्रति ५, ) तरु कह, (तम्) उस के नाम को (इह इह) ं नाना स्थानों मे (ब्रवः) तू घोषित कर। स पा कार्याकायं विवेकरदिताः, देव(: यजमानाः (सायण व सम्यक् ज्ञान से रहित । देव: = मदान्विताः । दिवु सदा्थक ( र,

English

Place this man here, within this earth’s enclosure, afar from foes with all his men about him. A prayer to Pūshan for protection and the recovery of lost property Pūshan was born to move on distant pathways, on roads remote from earth, remote from

अध्याय 7

श्लोक 9.2

पू॒षेमा आशा॒ अनु॑ वेद॒ सर्वाः॑ सो अ॒स्माँ अभ॑यतमेन नेषत्।स्व॒स्ति॒दा आघृ॑णिः॒ सर्व॑वी॒रोऽप्र॑युच्छन् पु॒र ए॑तु प्रजा॒नन्

pūṣemā āśā anu veda sarvāḥ so asmā~ abhayatamena neṣat| svastidā āghṛṇiḥ sarvavīro'prayucchan pura etu prajānan

हिन्दी अर्थ

प्रतीयमान अरथा मे अरुचि प्रकट की गई है । “शुना का वास्तविक ) हे, “वायु हारा यथा “शुनासीरौ” मे “शुन"' का अथं वायु है (निरक्त त ६४४० ) । शशुनेन” कौ तृतीया-सुप्-विभक्ति को “डा” श्रादेश होकर "टि" का लोपहू्रा है (अष्टा० ७।१।३६) । अतः शुनेन - शुना, वायुना वायु कोपशु कहा भी है जिसके दवारा कि यज्ञ किया जाता. है, सम्पन्न होत १० ; अथवैवेद-माष्य का० ७.) अनु° १) सू°९ वायु, ओौर सूरं द्वारा यज्ञ करना । गोभिः ' पद द्वारा गौ के दुग्ध का कथन अन्तरिक्ष (ग्रदितिः) अदिति दहै, (माता अदितिः) माता अदितिहै, (सः पिता) वह पिता श्रदितिः है, (सः पुत्रः) वह् पतर अदितिः है। (विषर्वे देवाः) सबं सूर्यादि द्योतमान पदाथ (अदितिः) अदिति

English

heaven. To both most lovely places of assembly he travels and returns with perfect knowledge. Pūshan knows all these realms: may he conduct us by ways that are most free from fear and

अध्याय 7

श्लोक 9.3

पूष॒न्तव॑ व्र॒ते व॒यं न रि॑ष्येम क॒दा च॒न।स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि

pūṣantava vrate vayaṃ na riṣyema kadā cana| stotārasta iha smasi

हिन्दी अर्थ

(जनित्वम्) जो उत्पन्न होगा (अदितिः) वे सव अदिति दहै "“अदितिरदीना देवमाता" (निरुवंत ४।४।२३) , ्रदिति पर (४६ ) । पुथिवी अपू, तेजः, वायु, आकाश । चेतन ओौर जड़ पदाथ जो उत्पन्न हए है, ञौर जो उत्पन्न होगे उन प्रदितिरूप कहा है। अदिति इन सब देवों की माता है, निर्मा करती है) ग्रतः ये सव आदिति माता की सन्तनेंदहं। जीव णरदः णतम् (णत० ब्राह्मण २४।६।८।२६ ) इसलिये यौः आदि को. म॒हीम् षु मतरं हू वतानामृतस्य पतनीपव॑से हवामहे ।

English

danger. Giver of blessings, glowing, all heroic, may he the wise and watchful go before us. We are thy praisers here, O Pūshan: never let us be injured under thy protection.

अध्याय 7

श्लोक 9.4

परि॑ पू॒षा प॒रस्ता॒द्धस्तं॑ दधातु॒ दक्षि॑णम्।पुन॑र्नो न॒ष्टमाज॑तु॒ सं न॒ष्टेन॑ गमेमहि

pari pūṣā parastāddhastaṃ dadhātu dakṣiṇam| punarno naṣṭamājatu saṃ naṣṭena gamemahi

हिन्दी अर्थ

का० ७। ग्रनु° १. सू० ७ अथर्ववेद-नाष्य ११ ०. ) अदीना या अक्षीणा देवमाता का अवसे) निजर्नार्भं ( सुह्- वामहे) हम उत्तम प्रकार भवित पूवक ्राह्वान करते है । र एवि वहुनाम (निषं० ३।१) क्षेत्रम् धननाम (निघं० २।१०) । उषरूचीम् ४ छ मन्त्र मे अदिति द्वारा अक्षीणा देवमाता पार-

English

From out the distance, far and wide, may Pūshan stretch his right hand forth. Let him drive back our lost to us, let us return with what is lost. A prayer for the favour of Sarasvati

अध्याय 7

श्लोक 10.1

सरस्वती।१ शौनकः।सरस्वती।त्रिष्टुप्।यस्ते॒ स्तनः॑ शश॒युर्यो म॑यो॒भूर्यः सु॑म्न॒युः सु॒हवो॒ यः सु॒दत्रः॑ ।येन॒ विश्वा॒ पुष्य॑सि॒ वार्या॑णि॒ सर॑स्वति॒ तमि॒ह धात॑वे कः

sarasvatī| 1 śaunakaḥ| sarasvatī| triṣṭup| yaste stanaḥ śaśayuryo mayobhūryaḥ sumnayuḥ suhavo yaḥ sudatraḥ | yena viśvā puṣyasi vāryāṇi sarasvati tamiha dhātave kaḥ

हिन्दी अर्थ

पापरहित हम (स्वस्तये) कल्याण के तिये (अरुहेम) आरोहण करें १ का मिश्रित वर्णेन हुञा है 1 “जनेहसम्'' का अथं पापरहित ४ के साथ इस का सम्बन्ध नहं प्रतीत होता । इसी प्रकार “अनायसः” ह सम्बन्ध भी पारमेश्वरी-नौका के साथ दहै उपास्तक पापरहित खा पारमेश्वरी-नौका पर आरोहण कर सवते है, जलीय नौका परतो ष निष्पापी सभी आरोहण कर सकते है। परमेश्वर नौकारूप ए्वेता० उप०अ० २) खण्ड ८) में परपेश्वर को “ब्रह्मोडप" कहू ह ॥ १२ अयर्ववेद-भाष्य का०७॥ श्नु० १। सू०७

English

That breast of thine, exhaustless and delightful, good to invoke, beneficent, free giver. Wherewith thou feedest all things that are choicest, bring that, Sarasvati, that we may drain it.

अध्याय 7

श्लोक 11.1

सरस्वती।१ शौनकः।सरस्वती।त्रिष्टुप्।यस्ते॒ स्तनः॑ शश॒युर्यो म॑यो॒भूर्यः सु॑म्न॒युः सु॒हवो॒ यः सु॒दत्रः॑ ।येन॒ विश्वा॒ पुष्य॑सि॒ वार्या॑णि॒ सर॑स्वति॒ तमि॒ह धात॑वे कः

sarasvatī| 1 śaunakaḥ| sarasvatī| triṣṭup| yaste stanaḥ śaśayuryo mayobhūryaḥ sumnayuḥ suhavo yaḥ sudatraḥ | yena viśvā puṣyasi vāryāṇi sarasvati tamiha dhātave kaḥ

हिन्दी अर्थ

भयावः् स्रोत रै, इन्द्रिय स्रोत । उडुप का अथं है नौका 1 परमेश्वर-माता भी चायमाणा है, रक्षिका है, पुथिवी के सदृश विस्तीर्णा है, यौः की तरह् योतमाना दहै, भौर सूप्रणीति अथ।त् विशेषतया प्रणय से राण करती है । वह नौका है इसलिये इस पर आरोहण भी सम्भव है अलीय-नौका भी विस्तीणं पृथिवीम् होनी चादिये, तथा उसमे प्रकाश ङ प्रबन्ध होना चाहिए चाम् , तथा उस में उत्तम गृह भी होने चाहिए शभ गृहनाम निघं० ३।४ ताकि यात्री उनमें विश्राम कर सक तथा वह् वाजस्य तु पर॑सवे मातरं महीमदिति नाम् वच॑सा कराभहे।

English

A prayer to protect corn from lightning and drought That far-spread thunder, sent from thee, which cometh on all this world, a high celestial signal

अध्याय 7

श्लोक 12.1

राष्ट्रसभा।१-४ शौनकः।सभा, १-२ सभा, पितरः, ३ इन्द्रः, ४ मनः।अनुष्टुप्, १ भुरिक् त्रिष्टुप्।स॒भा च॑ मा॒ समि॑तिश्चावतां प्र॒जाप॑तेर्दुहि॒तरौ॑ संविदा॒ने।येना॑ सं॒गच्छा॒ उप॑ मा॒ स शि॑क्षा॒च्चारु॑ वदानि पितरः॒ संग॑तेषु

rāṣṭrasabhā| 1-4 śaunakaḥ| sabhā, 1-2 sabhā, pitaraḥ, 3 indraḥ, 4 manaḥ| anuṣṭup, 1 bhurik triṣṭup| sabhā ca mā samitiścāvatāṃ prajāpaterduhitarau saṃvidāne| yenā saṃgacchā upa mā sa śikṣāccāru vadāni pitaraḥ saṃgateṣu

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर-माता को (वचसा) स्तुति-प्राथना-वचनों द्वारा (करामहे) हम स्वकीया करते है, अपनाते ह । (यस्याः) जिसकी (उपस्थे) गोद मे (उरू) निवास के लिये गृहरूप हैँ । शमं सुखनाम ( निघं० ३।६ ) (४)। (भ्रदितिम्, मातरम्, पृथिवी माता को (वचसा) वेदोक्त विधि दारा (करामहे) अन्नोत्पादनयोग्या हम करते हँ 1 (यस्याः ) जिस पृथिवी माता जिलों वाला (शमम) गृह (नः) हमे ( नियच्छात्) प्रदान करे ।

English

Strike not, O God, our growing corn with lightning, not kill it with the burning rays of Sūrya. A prayer for influence at deliberative and religious meetings In concord may Prajapati’s two daughters, Gathering and As- sembly, both protect me.

अध्याय 7

श्लोक 12.2

वि॒द्म ते॑ सभे॒ नाम॑ न॒रिष्टा॒ नाम॒ वा अ॑सि ।ये ते॒ के च॑ सभा॒सद॒स्ते मे॑ सन्तु॒ सवा॑चसः

vidma te sabhe nāma nariṣṭā nāma vā asi | ye te ke ca sabhāsadaste me santu savācasaḥ

हिन्दी अर्थ

का०७॥। अनु० १।सू०८ ग्रथवंवेद-माष्य १३ वृञ् आवरणे, आवृत, धिरा हुभ्रा, इष्टकाचयन द्वारा दीवारों से धिरा है । वेद मे वर-वधू या पति-पत्नीकं भाव कोश्यौः पृथिवी" द्वाराभी सूचित किया है । यथा “द्यौरहं पृथिवी त्वम्, ताविह सं भवाव, प्रजामा जनयावहे'” (श्रथवं० १४।७।७१) । (अकारिषम्) मने कर दिया है । (देवानाम्) देवोंके पुत्रौ केलिये, जो

English

May every man I meet respect and aid me. Fair be my words, O Fathers, at the meetings. We know thy name, O Conference: thy name is interchange of talk.

अध्याय 7

श्लोक 12.3

ए॒षाम॒हं स॒मासी॑नानां॒ वर्चो॑ वि॒ज्ञान॒मा द॑दे ।अ॒स्याः सर्व॑स्याः सं॒सदो॒ मामि॑न्द्र भ॒गिनं॑ कृणु

eṣāmahaṃ samāsīnānāṃ varco vijñānamā dade | asyāḥ sarvasyāḥ saṃsado māmindra bhaginaṃ kṛṇu

हिन्दी अर्थ

है अदिति-माता (रव) अतः मेरी रक्षाकर। (तेषाम्) उन दिति ओर गम्भीर या गहरा था, रतः (एनान्) इन देवों या देवपुत्रो को मैने अव" पद को, “श्रव” घातु, लोट्, मध्यमपुरुष, एकवचन मान कर प्रथं १. हदय में रक्तरूपी जल भरा रहता है, रतः इसे समुद्र कहा है । २. हदय के म्रन्तःस्थलमे था।

English

Let all the company who join the Conference agree with me. Of these men seated here I make the splendour and the lore mine own.

अध्याय 7

श्लोक 12.4

यद् वो॒ मनः॒ परा॑गतं॒ यद् ब॒द्धमि॒ह वे॒ह वा॑ ।तद् व॒ आ व॑र्तयामसि॒ मयि॑ वो रमतां॒ मनः॑

yad vo manaḥ parāgataṃ yad baddhamiha veha vā | tad va ā vartayāmasi mayi vo ramatāṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

१४ ग्रथववेवेद-भाष्य का० ७ ।.अनु० १; सु° € किया है । दितिके पुत्र है, प्रकृति मे रममाण संसारी मनुष्या कं, काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद आदि माव। इन का स्थान हृदय-समुद्र ", था ओर देवपुरं के लिये अपितकरदियादहै। देव वा देवपुत्र है--सत्य, घद्धाः पवित्रत।, दे्रवुजन परोपकार भादि। देव मेरे हदय-समुद्र मं वसे रह्, ऋग्वेद १०।३६।११ के “वणोमहे'" के अनुकूल है, जिसका अथं है “हम वरण करते ह" । धाम =घामानि त्रयाणि भवन्ति, नामानि, स्थानानि ण वितियों समेत (णत्रम्) इसके एत्र को (अरे) दूर (कृण, कर।

English

Indra, make me conspicuous in all this gathered company. Whether your thoughts are turned away, or bound and fastened here or there, We draw them hitherward again: let your mind firmly rest on me.

अध्याय 7

श्लोक 13.1

शत्रुनाशनम्।१-२ अथर्वा (द्विषो वर्चो हर्तुकामः)।सूर्यः।अनुष्टुप्।यथा॒ सूर्यो॒ नक्ष॑त्राणामु॒द्यंस्तेजां॑स्याद॒दे।ए॒वा स्त्री॒णां च॑ पुं॒सां च॑ द्विष॒तां वर्च॒ आ द॑दे

śatrunāśanam| 1-2 atharvā (dviṣo varco hartukāmaḥ)| sūryaḥ| anuṣṭup| yathā sūryo nakṣatrāṇāmudyaṃstejāṃsyādade| evā strīṇāṃ ca puṃsāṃ ca dviṣatāṃ varca ā dade

हिन्दी अर्थ

कीश्रोर जाने का कथन इस मन्त्रम हुञाहै। श्रेयमागं कौ ओर जानै में परमेएवर को अग्रा कर उसका पदानुगामी बनना चाहिए, ताकि श्रेयमार्मी पथश्रष्टन हौ जाय । इस श्रेय मागं पर चलते हुए कामादि शत, निज का० ७। अनु० १। सू० १० ग्रथर्ववेद-भाष्य १५ प्रवल शक्तियों सहित, इसे श्रेयमागं से विचलित करने की चेष्टा करते दह उन्टं परमेश्वर की प्राधना, उपासना पूवक दूर करते रहना चाहिए । जीवनकेदो मांह दिव् कामजं अर्थात् देवीं का माम, श्रेपमागे ग्रौर पार्थिव जीदन का मामं, प्रेयमागं ; इन दोनो मार्गौ पर साथ-साथ

English

A charm to win superiority over foes and rivals As the Sun, rising, taketh to himself the brightness of the stars,. So I assume the glory of women and men mine enemies.

अध्याय 7

श्लोक 13.2

याव॑न्तो मा स॒पत्ना॑नामा॒यन्तं॑ प्रति॒पश्य॑थ ।उ॒द्यन्त्सूर्य॑ इव सु॒प्तानां॑ द्विष॒तां वर्च॒ आ द॑दे

yāvanto mā sapatnānāmāyantaṃ pratipaśyatha | udyantsūrya iva suptānāṃ dviṣatāṃ varca ā dade

हिन्दी अर्थ

धति दोनों मार्गो के लिये निदिष्ट समन्वित निज कतव्यों का पालन सकती है 1 परमेश्वर पूषा है, वह दोनों मार्गो पर युगपत् चलने वाले को पुष्टि प्रदान करता रहता है । र पूषेमा आशा असु वेद सवाः सो अस्मान् अभ॑यतमेन ेपत् । लाए । वहु (स्वस्तिदाः) कल्याप-प्रदाता है, १६ श्रथववंवेद-भाष्य का० ७ अनु० १। सू० १९

English

All ye amang my rivals who behold me as I come to you, I seize the glory of my foes as the Sun, rising, theirs who sleep. A prayer to Savitar for prosperity

अध्याय 7

श्लोक 14.1

सविता १-४ अथर्वा।सविता।अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ४ जगती।अ॒भि त्यं दे॒वं स॑वि॒तार॑मो॒ण्योः क॒विक्र॑तुम्।अर्चा॑मि स॒त्यस॑वं रत्न॒धाम॒भि प्रि॒यं म॒तिम्

savitā 1-4 atharvā| savitā| anuṣṭup, 3 triṣṭup, 4 jagatī| abhi tyaṃ devaṃ savitāramoṇyoḥ kavikratum| arcāmi satyasavaṃ ratnadhāmabhi priyaṃ matim

हिन्दी अर्थ

(इह) इस जीवन मे (ते) तेरा (स्तोतारः) स्तवन करने वाले (स्मसि) निष्ट कियाहै। इस व्रतको धारण करते हृएु हम उपासक्र मो हसित पालन करते है भौर परमेश्वर का स्तवन करते है । हस्तम्) वृद्धिकारक हमारे दाहिने हाथ को (परिदधातु) परिपुष्ट करे ।

English

I praise this God, parent of heaven and earth, exceeding wiser possessed of real energy, giver of treasure, thinker dear to all,. Whose splendour is sublime, whose light shone brilliant in crea- tion, who, wise, and golden handed, in his beauty made the sky.

अध्याय 7

श्लोक 14.2

उ॒र्ध्वा यस्या॒मति॒र्भा अदि॑द्युत॒त् सवी॑मनि ।हिर॑ण्यपाणिरमिमीत सु॒क्रतुः॑ कृ॒पात् स्वः

urdhvā yasyāmatirbhā adidyutat savīmani | hiraṇyapāṇiramimīta sukratuḥ kṛpāt svaḥ

हिन्दी अर्थ

हो, ओर (नष्टेन) नष्ट हुए घन के.साथ (संगमेमहि) हम संग करं। नष्ट हुए धन की पुनः प्रप्ति के लिये दाहिने हाथमे शक्ति चाहिए, ताकि परिपृष्ट हाथदहारो परिश्रम करके हुम पुनः धन प्राप्त कर सकं । धन से ८वुरुषान्त परं किञ्चित् सा काष्ठा सा परागतिः" (कठ० उप० १।३।११) । का० ७1 अनु° १। सू० १२ अथवंवेद-भाष्य १७

English

As thou, God! quickening, for our ancient father, sentest him height above and room about him, So unto us, O Savitar, send treasures, abundant, day by day, in shape of cattle.

अध्याय 7

श्लोक 14.3

सावी॒र्हि दे॑व प्रथ॒माय॑ पि॒त्रे व॒र्ष्माण॑मस्मै वरि॒माण॑मस्मै ।अथा॒स्मभ्यं॑ सवित॒र्वार्या॑णि दि॒वोदि॑व॒ आ सु॑वा॒ भूरि॑ प॒श्वः

sāvīrhi deva prathamāya pitre varṣmāṇamasmai varimāṇamasmai | athāsmabhyaṃ savitarvāryāṇi divodiva ā suvā bhūri paśvaḥ

हिन्दी अर्थ

(गशयुः) शिशु को शयन कराने वालादहै, (यः मयोभूः) जो उसे सुख- दायक है, (यः सुम्नयुः) जो उस्तके मन को प्रसन्न करने वाला है, (चुहवः) स्तन को (इह) इस गृहस्थ जीवन मे (धातवे) शिशुपानाथे (कः) परिपुष्ट यस्तं पथ स्तनयितयुये चष्वो देवः कतुविदवभाभूषतीदम् । मानो वधीषिुतं देव॒ सस्यं मोत वैधी रुदिः सूर्यस्य ॥१॥ भूमण्डल को भूषित करता हं अन्न प्रदान द्वारा . (हैव) है पषा देवः

English

Savitar, God, our household friend, most precious, hath sent our fathers life and power and riches. Let him drink Soma and rejoice when worshipped. Under his law even the Wanderer travels.

अध्याय 7

श्लोक 14.4

दमू॑ना दे॒वः स॑वि॒ता वरे॑ण्यो॒ दध॒द् रत्नं॒ दक्षं पि॒तृभ्य॒ आयूं॑षि ।पिबा॒त् सोमं॑ म॒मद॑देनमि॒ष्टे परि॑ज्मा चित् क्रमते अस्य॒ धर्म॑णि

damūnā devaḥ savitā vareṇyo dadhad ratnaṃ dakṣaṃ pitṛbhya āyūṃṣi | pibāt somaṃ mamadadenamiṣṭe parijmā cit kramate asya dharmaṇi

हिन्दी अर्थ

१८ अथवेवेद-भाष्य का० ७1 अनु० १) सु० १३ न (वधीः) नष्ट कर, (उत) तथा (सूर्यस्य रर्मिभिः) सूरयं॑की ररिमियों दारा (मावधीः) न नष्ट कर। हे । देवः देवः = ““दानाद्वा, दीपनाद्ा, चयोतनाद्रा, दयुस्थानौ भवतीति वा (प्रजापतेः) प्रजा-के-पति सम्राट् की (दृहितरौ) दो दुहिताओं के सदुश उस कौ प्रभिलाषाओं को पूणे करने वाली, (संविदाने) ओर एकमत हूरई,

English

A charm to win divine favour and felicity I choose, O Savitar, that glorious favour, with fruitful energy and every blessing, Even this one’s teeming cow, erst milked by Kanva, thousand- streamed, milked for

अध्याय 7

श्लोक 15.1

सविता १ भृगुः।सविता।त्रिष्टुप्।तां स॑वितः स॒त्यस॑वां सुचि॒त्रामाहं वृ॑णे सुम॒तिं वि॒श्ववा॑राम्।याम॑स्य॒ कण्वो॒ अदु॑ह॒न् प्रपी॑नां स॒हस्र॑धारां महि॒षो भगा॑य

savitā 1 bhṛguḥ| savitā| triṣṭup| tāṃ savitaḥ satyasavāṃ sucitrāmāhaṃ vṛṇe sumatiṃ viśvavārām| yāmasya kaṇvo aduhan prapīnāṃ sahasradhārāṃ mahiṣo bhagāya

हिन्दी अर्थ

करे । (येन) जिस सम्य ग्रौर सामित्य का (संगच्छ) संग करं (सः) सम्मति प्रदान करे, (पितरः) है पितरो (संगतेषु) तुभ लोगो कं संगमों सम्राट् ने नियुक्त पि्था टै, जो ससा-समिति का संज्रालन करता है । सभा है लोकसभा, प्रजा द्वीरा वनी गई; ओौर समिति है राजसभा, वारुणसभा

English

happiness by the mighty. A prayer for prosperity Increase this man Brihaspati! Illume him, O Savitar, for high and happy fortune.

अध्याय 7

श्लोक 16.1

सविता १ भृगुः।सविता।त्रिष्टुप्।बृह॑स्पते॒ सवि॑तर्व॒र्धयै॑नं ज्यो॒तयै॑नं मह॒ते सौभ॑गाय ।संशि॑तं चित् संत॒रं सं शि॑शाधि॒ विश्व॑ एन॒मनु॑ मदन्तु दे॒वाः

savitā 1 bhṛguḥ| savitā| triṣṭup| bṛhaspate savitarvardhayainaṃ jyotayainaṃ mahate saubhagāya | saṃśitaṃ cit saṃtaraṃ saṃ śiśādhi viśva enamanu madantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

१. सभा, समिति; श्रामन्त्रण--ये तीन नागरिक संस्थाए हैँ, जिनका कि संचालिक-संस्था “"समिति" कही जा सकती है। इस दृष्टिसेभी समिति नागरिक हीह । बेदकीदुष्टिमें युद्ध के लिये निश्चय करना, सेनिक-संस्था का काम नहीं । का० ७। अनु १। सुऽ १३ भ्रधर्ववेद-भाष्य १९ प्रादेशिक राजाओं की सभा ।यथा “राजानः समिताविव (यजु° १२।८०)। संगतेषु =सभा समिति के संयुक्त अधिवेशन । दुहितरौ =दुह् प्रपूरणे (अदादिः) । दुहिताएं जैसे पिता की इच्छानुसार चलकर पिता कौीअमि- लाषाश्रो को पूणे करती दहै वेमे सभा-समिति सम्राट् कौ अभिलाषाओं को सभापति केपास जाकर श्रपनी सम्मति प्रदान करे। सभा-समितिके सदस्यो को सभापति, उनके संमानार्थं “पितर” कहताहै, वे सा्राज्यके रक्षक है, रतः पितरः हँ । णाखान्तर मे वदानि" के स्थानमें “वदामि

English

Sharpen him thoroughly though already sharpened: with glad acclaim let all the Gods receive him. A prayer for wealth and children

अध्याय 7

श्लोक 17.1

द्रविणार्थ प्रार्थना।१-४ भृगुः।धाता, सविता, ४ अग्निः, त्वष्टा, विष्णुः।१ त्रिपदा आर्षी गायत्री, २ अनुष्टुप्, ३-४ त्रिष्टुप्।धा॒ता द॑धातु नो र॒यिमीशा॑नो॒ जग॑त॒स्पतिः॑ ।स नः॑ पू॒र्णेन॑ यच्छतु

draviṇārtha prārthanā| 1-4 bhṛguḥ| dhātā, savitā, 4 agniḥ, tvaṣṭā, viṣṇuḥ| 1 tripadā ārṣī gāyatrī, 2 anuṣṭup, 3-4 triṣṭup| dhātā dadhātu no rayimīśāno jagataspatiḥ | sa naḥ pūrṇena yacchatu

हिन्दी अर्थ

येतेकेच मभासदस्ते मे सन्त सवाचसः।!॥ (सभे) है लोकसभा! (ते) तेरे (नाम) नामको (विदल) हम जानते (ग्रसि)हैष्चाही हुई है । (वैगृकति (ये के च) जो कोई भी (सभासदः) सभासद् है (ते)वे (मे) सुभ सभापति के लिये (सवाचसः) एक वाणी वाले (सन्तु) हों । मन्त्र में लोकसभा का वणेन है) वहु “नरिष्टा है, नु+-इष्टा नर-नारियों को ग्रभीष्ट है, उन द्वारा चाही हई है । संवाचसः -संविदानाः (सन्त्र १) । एकवाणी = सर की एक सम्मति

English

May the Ordainer give us wealth, Lord, ruler of the world of life: with full hand may he give to us. May Dhātar grant the worshipper henceforth imperishable life.

अध्याय 7

श्लोक 17.2

धा॒ता द॑धातु दा॒शुषे॒ प्राचीं॑ जी॒वातु॒क्षि॑ताम्।व॒यं दे॒वस्य॑ धीमहि सुम॒तिं वि॒श्वरा॑धसः

dhātā dadhātu dāśuṣe prācīṃ jīvātukṣitām| vayaṃ devasya dhīmahi sumatiṃ viśvarādhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(एषाम्) इन (समासीनानाम् ) निज स्यानों में इक .बेठे हुए सभासदों (वचः) तेज को, (विन्ञानस्) ओर निए्वय को (हन) मे सभापति सवेस्याः) इस सब (संसदः) संसद का (भगिनम्) भागी (कृणु) कर । टचः = तेज, म्रौर विज्ञान है इन ज्ञानियों का निश्चय । सभावति

English

May we obtain the favour of the God who giveth every boon. To him may Dhātar grant all kinds of blessings who, craving children, serves him in his dwelling.

अध्याय 7

श्लोक 17.3

धा॒ता विश्वा॒ वार्या॑ दधातु प्र॒जाका॑माय दा॒शुषे॑ दुरो॒णे।तस्मै॑ दे॒वाअ॒मृतं॒ सं व्य॑यन्तु॒ विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः स॒जोषाः॑

dhātā viśvā vāryā dadhātu prajākāmāya dāśuṣe duroṇe| tasmai devāamṛtaṃ saṃ vyayantu viśve devā aditiḥ sajoṣāḥ

हिन्दी अर्थ

सम्मत-परामशे कोर स्वीकार करूगा। प्रतः इस संसदका मुभे भागी २० प्रथवेवेद-माष्य का० ७ । प्रनु° १। सू १४ प्रस्तुत विषय से परे गया हआ है, पराडमूख हश्रा-हुजा हैः या (यद् इह वाइहवा) जो इधर-उधर कै विषय के साथ (बद्धम्) तंयामसि) मै सभापति तथा मन्त्रीगण लौटाते है, ताकि (वः) तुम्हारा समूदित (मनः) मन (मयि) मु सभापति द्वारा प्रस्तावित विषय में

English

Him may the Gods invest with life eternal, yea, all the Gods and Aditi accordant. May this our gift please Savitar, Rāti, Dhātar, Prajāpati, and

अध्याय 7

श्लोक 17.4

धा॒ता रा॒तिः स॑वि॒तेदं जु॑षन्तां प्र॒जाप॑तिर्नि॒धिप॑तिर्नो अ॒ग्निः ।त्वष्टा॒ विष्णुः॑ प्र॒जया॑ संररा॒णो यज॑मानाय॒ द्रवि॑णं दधातु

dhātā rātiḥ savitedaṃ juṣantāṃ prajāpatirnidhipatirno agniḥ | tvaṣṭā viṣṇuḥ prajayā saṃrarāṇo yajamānāya draviṇaṃ dadhātu

हिन्दी अर्थ

ताराग्नों के (तेजांसि) तेजो दीप्तियो का (म्राददे) अपहरण करतार, पसाम्, च) द्वेष करते हुए पुरुषों के (वच॑ः) प्रभावविशेष का (्राददे) मै सभापति भमिप्रेत हो, ग्रौर सभा-समिति के संसदं मे के शासकदल के का० ७। अनु० २) सू० १५ अथवेवेद-भाष्य २१

English

Agni Lord of Treasures. May Tvashtar, Vishnu, blessing him with children, give store ot riches to the sacrificer.

अध्याय 7

श्लोक 18.1

दवृष्टिः।१-२ अथर्वा।पृथिवि, पर्जन्यः।१ चतुष्पदा भुरिगुष्णिक्, २ त्रिष्टुप्।प्र न॑भस्व पृथिवि भि॒न्द्धी॒३दं दि॒व्यं नभः॑ ।उ॒द्नो दि॒व्यस्य॑ नो धात॒रीशा॑नो॒ वि ष्या॒ दृति॑म्

davṛṣṭiḥ| 1-2 atharvā| pṛthivi, parjanyaḥ| 1 catuṣpadā bhuriguṣṇik, 2 triṣṭup| pra nabhasva pṛthivi bhinddhī3daṃ divyaṃ nabhaḥ | udno divyasya no dhātarīśāno vi ṣyā dṛtim

हिन्दी अर्थ

दष करने वालों के (वर्चः) प्रभावविशेष का (भ दद्म म्रपहूरण करता हूः सोए हृं के वर्च॑स् का ग्रपहरण करता है) के अधिवेशन मे जति हृए सभापति का निर्देश हृभा है । श्रथवा इन दोनों (सूक्त १३।३) । मन्त्र मे यह भी दर्शाया है कि सूय के उदय-काल मे सोए

English

A prayer for rain Burst open, Prithvi, and cleave asunder this celestial cloud. Untie, O Dhātar—for thou canst—the bottle of the breast of heaven.

अध्याय 7

श्लोक 18.2

न घ्रंस्त॑ताप॒ न हि॒मो ज॑घान॒ प्र न॑भतां पृथि॒वी जी॒रदा॑नुः ।आप॑श्चिदस्मै घृ॒तमित् क्ष॑रन्ति॒ यत्र॒ सोमः॒ सद॒मित् तत्र॑ भ॒द्रम्

na ghraṃstatāpa na himo jaghāna pra nabhatāṃ pṛthivī jīradānuḥ | āpaścidasmai ghṛtamit kṣaranti yatra somaḥ sadamit tatra bhadram

हिन्दी अर्थ

सप्तम काण्ड का प्रथम अनुवाक समाप्त अभि त्यं देवं संठितारमोण्यो: कविक्रतुम् । (ओण्योः) लोक ग्रौर पृथिवीलोकं के (सवितारम्) उत्पादक, (कवि- २२ अयर्ववेद-भाष्य का० ७1 अनु० २) सू० १५

English

Let not the Sun’s heat burn, nor cold destroy her. Let Earth with all her quickening drops burst open. Even for her the waters flow, and fatness: where Soma is even there is bliss for ever.

अध्याय 7

श्लोक 19.1

प्रजाः।१ ब्रह्मा।प्रजापतिः।जगती।प्र॒जाप॑तिर्जनयति प्र॒जा इ॒मा धा॒ता द॑धातु सुमन॒स्यमा॑नः ।सं॒जा॒ना॒नाः संम॑नसः॒ सयो॑नयो॒ मयि॑ पु॒ष्टं पु॑ष्ट॒पति॑र्दधातु

prajāḥ| 1 brahmā| prajāpatiḥ| jagatī| prajāpatirjanayati prajā imā dhātā dadhātu sumanasyamānaḥ | saṃjānānāḥ saṃmanasaḥ sayonayo mayi puṣṭaṃ puṣṭapatirdadhātu

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर कवि है । यथा “कविर्मनीषी (यजु० ४०।८); तथा परमेश्वरं (यस्य) जिस कौ (सवीमनि) प्रेरणा में (अमतिः) व्यापन शीला पाणिः ) सूवणमय हाथों वाले सूयं के सदृश जो मानो निज हाथोंद्रारा है, वह ही सुवण प्रादि धनं प्रदान कर हमे सुषवी कररहादहै। “करपात्'५;

English

A prayer for prosperity Prajapati engenders earthly creatures: may the benevolent Ordainer form them,

अध्याय 7

श्लोक 20.1

अनुमतिः।१-६ अथर्वा।अनुमतिः।१-२ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ४ भुरिक्, ५ जगती ६ अतिशाक्वरीगर्भा जगती।अन्व॒द्य नोऽनु॑मतिर्य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ मन्यताम्।अ॒ग्निश्च॑ हव्य॒वाह॑नो॒ भव॑तां दा॒शुषे॒ मम॑

anumatiḥ| 1-6 atharvā| anumatiḥ| 1-2 anuṣṭup, 3 triṣṭup, 4 bhurik, 5 jagatī 6 atiśākvarīgarbhā jagatī| anvadya no'numatiryajñaṃ deveṣu manyatām| agniśca havyavāhano bhavatāṃ dāśuṣe mama

हिन्दी अर्थ

का० ७। अनु० र् । सु० १६ अ्रथवेवेद-भाष्य २३ को श्रेष्ठ म्रतिफल मिल सकते हँ । उन पत्रों के पालन-पोषण कं लिये गा आदि प्रभूत पशुओं की प्राप्ति भी प्राति की गई दहै। वरिमा ६८ तां सवितः सत्यसंवां ख चित्रामाहं शरणे मति विददवांराम् । स्वीकरणीया (तां सुमतिम्) उस उत्तम-मति की (अहम्) से (अववृणे)

English

Having one common womb, and mind, and spirit. He who is. Lord of Plenty give me plenty! A prayer for prosperity and happiness

अध्याय 7

श्लोक 20.2

अन्विद॑नुमते॒ त्वं मंस॑से॒ शं च॑ नस्कृधि ।जुष॒स्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि ररास्व नः

anvidanumate tvaṃ maṃsase śaṃ ca naskṛdhi | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi rarāsva naḥ

हिन्दी अर्थ

(सहखधाराभ्) हजारों को धारण करमे वाली या हजारों धाराभो ने (भगाय) निज सौभाग्य कं लिये (अदहत्) दोहा है । अदहत् = वतमाने २४ मथर्ववेद-माष्यं का० ७ । भ्रनु० २ । सू० १७ के स्थान में पयसा महीं गाम्" पाठहै। इससे भीन्ञात होताहं कि

English

Anumati approve to-day our sacrifice among the Gods! May Agni bear mine offerings away for me the worshipper. Do thou, Anumati! approve, and grant us health and happiness.

अध्याय 7

श्लोक 20.3

अनु॑ मन्यतामनु॒मन्य॑मानः प्र॒जाव॑न्तं र॒यिमक्षी॑यमाणम्।तस्य॑ व॒यं हेड॑सि॒ मापि॑ भूम सुमृडी॒के अ॑स्य सुम॒तौ स्या॑म

anu manyatāmanumanyamānaḥ prajāvantaṃ rayimakṣīyamāṇam| tasya vayaṃ heḍasi māpi bhūma sumṛḍīke asya sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

वह्गौह वेदवाक्, वेदवाणी । गौः वाडनाम (निषं० १११) । वेदवाक् है, सुमति दुग प्रदान द्वारा हजारों का धारण-पोषण करती हं । “दृह धातु सितं चित् सतरं त रिंशापि विशं एनमनु पदन्तु देवाः ॥१॥ उत्पादक परमेश्वर ! (एनम) इ कण्व कौ (वधय) वृद्धि कर, (एनम्) इसे (महते सौमगाय) महा-सौभाग्य के लिये (ज्योतय) ज्ञान-

English

Accept the offered sacrifice, and, Goddess, give us progeny. May he approving in return accord us wealth inexhaustible with store of children. Never may we be subject to his anger, but rest in his benevo- lence and mercy.

अध्याय 7

श्लोक 20.4

यत् ते॒ नाम॑ सु॒हवं॑ सुप्रणी॒तेऽनु॑मते॒ अनु॑मतं सु॒दानु॑ ।तेना॑ नो य॒ज्ञं पि॑पृहि विश्ववारे र॒यिं नो॑ धेहि सुभगे सु॒वीर॑म्

yat te nāma suhavaṃ supraṇīte'numate anumataṃ sudānu | tenā no yajñaṃ pipṛhi viśvavāre rayiṃ no dhehi subhage suvīram

हिन्दी अर्थ

अनुक्लरूप में प्राप्त कर, मर्दतु) इषित हों । से कण्व (१६१) वेदस्वाध्यायी लवि होता है । “संशिशाधि"' पदशो तन्- करणे” (दिवादिः) का लोट्लैकार मेसरूपहं। तनूकरण का अभिप्राय बरह्मचारी को देने के लिये देव लोग उसकी गोर मिलकर जाते है । का० ७.1 श्रनुर २1 सु०..१८ अथवर द-भाष्य १५

English

Thy name is easy to invoke, good leader! approved, Anumati and rich in bounty. Source of all bonds! fill up therewith our worship, and, Blest One! grant us wealth with goodly heroes.

अध्याय 7

श्लोक 20.5

एमं य॒ज्ञमनु॑मतिर्जगाम सुक्षे॒त्रता॑यै सुवी॒रता॑यै सुजा॑तम्।भ॒द्रा ह्यऽस्याः॒ प्रम॑तिर्ब॒भूव॒ सेमं य॒ज्ञम॑वतु दे॒वगो॑पा

emaṃ yajñamanumatirjagāma sukṣetratāyai suvīratāyai sujātam| bhadrā hya'syāḥ pramatirbabhūva semaṃ yajñamavatu devagopā

हिन्दी अर्थ

(१-४) भृगुः । सविता, भरादि बहुदेवता । भ्रवृष्टुभ्; ९ त्रिपवा भाषो (धाता) धारण पोषण करने वाला (ईशानः) ईश्वर (नः) हमारे स्वामी है (सः) वह् (पूर्णेन) भरपूर धन के प्रदान के साथ-साथ (नः) हमे (यच्छतु) उपरामवृत्ति भी प्रदान करे। . उपराम वृत्ति भी दे, ताकि उस धन के होते हम उसमें लिप्तन हौ जाय

English

Anumati hath come to this our worship well-formed to give good lands and valiant heroes: For her kind care hath blessed us. God-protected, may she assist the sacrifice we offer. Anumati became this All, whatever standeth or walketh, every- thing that moveth.

अध्याय 7

श्लोक 20.6

अनु॑मतिः॒ सर्व॑मि॒दं ब॑भूव॒ यत् तिष्ठ॑ति॒ चर॑ति॒ यदु॑ च॒ विश्व॒मेज॑ति ।तस्या॑स्ते देवि सुम॒तौ स्या॒मानु॑मते॒ अनु॒ हि मंस॑से नः

anumatiḥ sarvamidaṃ babhūva yat tiṣṭhati carati yadu ca viśvamejati | tasyāste devi sumatau syāmānumate anu hi maṃsase naḥ

हिन्दी अर्थ

वय देवस्थ धीमहि सुमति विषश्वराधसः ॥२॥ (घाता) धारण-पोषण करने वला परमेश्वर, (दाशुषे) दन करने (जीवातुम्) जीवनकारिणी. सम्पत्ति (दधातु) दे, या उसे परिपुष्ट करता रहे । (वयम्) हम (विश्वराधसः) सब को धन देने वाले (देवस्य) प्रर मेश्वर की (सुमतिम्) इस सुमति का (धीमहि) ध्यान करं ।

English

May we enjoy thy gracious love, O Goddess. Regard us, O Anu- mati, with favour. A funeral stanza With prayer come all together to the Lord of Heaven: he is the peerless one, far-reaching,

अध्याय 7

श्लोक 21.1

एको विभुः।१ ब्रह्म।आत्मा।शक्वरी विराड्-गर्भा जगती।स॒मेत॒ विश्वे॒ वच॑सा॒ पतिं॑ दि॒व एको॑ वि॒भूरति॑थि॒र्जना॑नाम्।स पू॒र्व्यो नूत॑नमा॒विवा॑सत् तं व॑र्त॒निरनु॑ वावृत॒ एक॒मित् पु॒रु

eko vibhuḥ| 1 brahma| ātmā| śakvarī virāḍ-garbhā jagatī| sameta viśve vacasā patiṃ diva eko vibhūratithirjanānām| sa pūrvyo nūtanamāvivāsat taṃ vartaniranu vāvṛta ekamit puru

हिन्दी अर्थ

-है। दाशुषे" द्वारा भी'घन प्राप्त करने वाले कौ दोन भवना द्वारा उपराम- वृत्ति को सूचित किया है यह उपराम वृत्ति सुमति है, जिसे किं “विश्व राधस्” ने प्रदानः किया है,--इसे हमे सदा ध्यान म रखना चाहिए । राघः . धाता विश्वा वायीं दधातु प्रजाकामाय दाशुष दुरोणे व तस्मै देवा अमृतं सं, व्य॑यन्तु विद्व देवा अदितिः स॒नोषाः ॥३॥ २६ रथववेद-भाष्य का० ७। श्रनु० २। सू० १८ (भ्रजाकामाय) प्रजा की कामना वाले, ( दाशुषे) दानवृत्तिवाले के लिये (दुरोणे) उस के गृह मे (धाता) धारण-पोषण करने वाला परमेश्वर

English

guest of men. He, God of ancient time, hath gained a recent thrall; to him alone is turned the path which all must tread.

अध्याय 7

श्लोक 22.1

ज्योतिः।१-२ ब्रह्मा।ब्रध्नः।१ द्विपदा एकावसाना विराड्-गायत्री. २ त्रिपदा अनुष्टुप्।अ॒यं स॒हस्र॒मा नो॑ दृ॒शे क॑वी॒नां म॒तिर्ज्योति॒र्विध॑र्मणि

jyotiḥ| 1-2 brahmā| bradhnaḥ| 1 dvipadā ekāvasānā virāḍ-gāyatrī. 2 tripadā anuṣṭup| ayaṃ sahasramā no dṛśe kavīnāṃ matirjyotirvidharmaṇi

हिन्दी अर्थ

देव, तथा (सजोषाः) प्रेममयी (श्रदितिः ) अदीना पारमेदवरी देवमाता ४ प्रजा की कामना वाते गृहुस्थी को भी दान देना चाहिए । इस दान , मोक्षसुख की प्राप्ति मे सब देव भौर परमेष्वर उसके सहायक हो जाते है । पना । अयत् एसे गृहस्थी को मोक्षसुख के आवरण द्वारा सब देव ओर अदिति मिलकर दढापदेते है, ढांप कर सुरक्षित कर देते हँ जिससे लोभादि वृत्तियों की मार से वह बचा रहता है ।

English

To Savitar, or Yama invested with Savitar’s attributes Unto a thousand sages he hath given sight: thought, light is he in ranging all. The Bright One hath sent forth the Dawns, a closely gathered band,

अध्याय 7

श्लोक 22.2

ब्र॒ध्नः स॒मीची॑रु॒षसः॒ समै॑रयन्।अ॒रे॒पसः॒ सचे॑तसः॒ स्वस॑रे मन्यु॒मत्त॑माश्चि॒ते गोः

bradhnaḥ samīcīruṣasaḥ samairayan| arepasaḥ sacetasaḥ svasare manyumattamāścite goḥ

हिन्दी अर्थ

सेवन करं, निदेय पूवक इस धन का उपयोग न करे; (श्रग्निः ) मौर स्वामी राजा (नः) हम प्रनाजनों का (निधिपतिः) निधि रक्षक हो; धामिक कर्मो का अधिकारी (प्रजया संरराणः) प्रजा के साय रममाण हुआ, घाता-जीवनकारिणी अन्न सम्पत्ति प्रदाता (मथवं० ७। १८१) ।

English

Immaculate, unanimous, brightly refulgent in their homes. A charm to banish fiends and troubles 105

अध्याय 7

श्लोक 23.1

दुःस्वप्ननाशनम्।१ यमः।दुःस्वप्ननाशनम्।अनुष्टुप्।दौष्व॑प्न्यं दौर्जी॑वित्यं॒ रक्षो॑ अ॒भ्वऽमरा॒य्यः ।दु॒र्णाम्नीः॒ सर्वा॑ दु॒र्वाच॒स्ता अ॒स्मन्ना॑शयामसि

duḥsvapnanāśanam| 1 yamaḥ| duḥsvapnanāśanam| anuṣṭup| dauṣvapnyaṃ daurjīvityaṃ rakṣo abhva'marāyyaḥ | durṇāmnīḥ sarvā durvācastā asmannāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

का०७। भ्रनु० २1 सू० १९ अथवेवेद-माष्य (घातः) है धारण-पोषभ करने वाले (ईशानः) अधीश्वर ! तू (दिव्थंस्य उन्दः) दिव्य उदक की (दृतिम्) चमद़ेकी थैली के पदृण मेघरूपी थैली को (नः) हमारे लिये (ग्रा विष्य) खोल द् । भेदन करता है । इस से दिन्य उदक प्रवाहित होने लगता है जैसे कि च्मंकी ली के फटने पर उस से उदक प्रवाहित होने लगता है । दृतिः =1.व्वलः पृथिवी को (घ्नन्) ग्रीष्म काल ने (न तताप) नहीं तपाय। (हिमः) हेमन्त ऋतु मेँ (न जघान) न इस का हनन क्रिया है, (जीरदानुः) जीवन॑-

English

The fearful dream, and indigence, the monster, the malignant hags. All female fiends of evil name and wicked tongue we drive afar. A prayer for riches

अध्याय 7

श्लोक 24.1

सविता।१ ब्रह्मा।इन्द्रः, अग्निः, विश्वे देवाः, मरुतः, सविता, प्रजापतिः अनुमतिः।त्रिष्टुप्।यन्न॒ इन्द्रो॒ अख॑न॒द् यद॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा म॒रुतो॒ यत् स्व॒र्काः ।तद॒स्मभ्यं॑ सवि॒ता स॒त्यध॑र्मा प्र॒जाप॑ति॒रनु॑मति॒र्नि य॑च्छात्

savitā| 1 brahmā| indraḥ, agniḥ, viśve devāḥ, marutaḥ, savitā, prajāpatiḥ anumatiḥ| triṣṭup| yanna indro akhanad yadagnirviśve devā maruto yat svarkāḥ | tadasmabhyaṃ savitā satyadharmā prajāpatiranumatirni yacchāt

हिन्दी अर्थ

जल भी (अस्मे) इस पृथिवी कं स्वामी कं लिये (घृतम् इत् धृत ही २८ ्र्थववेद-भाष्य का०-७। श्रनु० २। सू० २०" अर्थात् वर्फीली-कऋतु डस का हनन करती है तव पृथिवी जीवनीय अन्तादि का प्रदान करती है 1 परन्तु वर्षा ऋतु. जब जल प्रदान करती है तब मानो वह जल नहीं प्रदान करती श्रपितु जलरूप मे घृतादि पदार्थं प्रदान कर रही होती है । जहां जल होता है वहां ओषधियां, वनस्पत्तियां प्रभूत मात्रा मे

English

What treasure hath been dug for us by Indra, by Agni, Visve- devas, tuneful Maruts, On us may Savitar whose laws are faithful, Prajāpati, and Heavenly Grace bestow it.

अध्याय 7

श्लोक 25.1

विष्णुः।१-२ मेधातिथिः।विष्णुः, वरुणः।त्रिष्टुप्।ययो॒रोज॑सा स्कभि॒ता रजां॑सि॒ यौ वीर्यौऽर्वी॒रत॑मा॒ शवि॑ष्ठा ।यौ पत्ये॑ते॒ अप्र॑तीतौ॒ सहो॑भि॒र्विष्णु॑मग॒न् वरु॑णं पू॒र्वहू॑तिः

viṣṇuḥ| 1-2 medhātithiḥ| viṣṇuḥ, varuṇaḥ| triṣṭup| yayorojasā skabhitā rajāṃsi yau vīryau'rvīratamā śaviṣṭhā | yau patyete apratītau sahobhirviṣṇumagan varuṇaṃ pūrvahūtiḥ

हिन्दी अर्थ

का अभिप्राय है कि हेमन्त ऋतु मे बफं के कारण श्रतिशीत होने से ओष-' विया, वनस्पतियां मर्म जाती हँ यह पृथिवी का हनन है 1 को (जनयति) उत्पन्न करता है, (घाता) घारण् करने वाला (सुमनस्य- मानः) सुप्रसन्न मन वाला होकर (दधातु) प्रजाजो का धारण-पोषण करे 1 क्षा अधिकारी जो कि प्रजाजनो. के -धारण-प्रोषणः का निरीक्षक है । “सयो- नयः'' द्वारा एक-राष्टृ-गृह.के प्रजाजन अभिप्रेत हँ, ' “योनिग हनाम" (निषं° ३1४ 1 "पुष्टम्" दवारा पृष्ट अन्न के “करांश'' का वणेन हुमा है । “कंश

English

Praise of Vishnu and Varuna The early morning prayer hath come to Vishnu and Varuna, Lords through might, whom none hath equalled,

अध्याय 7

श्लोक 25.2

यस्ये॒दं प्र॒दिशि॒ यद् वि॒रोच॑ते॒ प्र चान॑ति॒ वि च॒ चष्टे॒ शची॑भिः ।पु॒रा दे॒वस्य॒ धर्म॑णा॒ सहो॑भि॒र्विष्णु॑मग॒न् वरु॑णं पू॒र्वहू॑तिः

yasyedaṃ pradiśi yad virocate pra cānati vi ca caṣṭe śacībhiḥ | purā devasya dharmaṇā sahobhirviṣṇumagan varuṇaṃ pūrvahūtiḥ

हिन्दी अर्थ

१७।१९।२॥ मे “जीरदानुः” द्वारा, जीवनीय ग्रन्नादिका वणेन हृश्रादहैः का० ७1 अनुं० २। सुर २१. श्रथवेवेद-माष्यः स (अय) ्राज अर्थात् प्रतिदिन (अनुमतिः ) श्रनुकल मति 0 पटली अग्नि (दाशुषे) भूफ दाता के लिये (हव्यवाहनः ) हव्यो का वहन करनेवाली हो, (भवताम्) इस प्रकार से दोनो मेरे यज्ञ को सफ़ल करने वाले

English

Gods by whose power the realms of air were stablished, strongest and most heroic in their vigour. The early prayer hath ever come to Vishnu and Varuna by that

अध्याय 7

श्लोक 26.1

विष्णुः।१-८ मेधातिथिः।विष्णुः।१,८ त्रिष्टुप्, २ त्रिपदा विराड्-गायत्री, ३ त्र्यवसाना षट्-पदा विराट् शक्वरी, ४-७ गायत्री।विष्णो॒र्नु कं॒ प्रा वो॑चं वी॒र्याऽणि॒ यः पार्थि॑वानि विम॒मे रजां॑सि ।यो अस्क॑भाय॒दुत्त॑रं स॒धस्थं॑ विचक्रमा॒णस्त्रे॒धोरु॑गा॒यः

viṣṇuḥ| 1-8 medhātithiḥ| viṣṇuḥ| 1,8 triṣṭup, 2 tripadā virāḍ-gāyatrī, 3 tryavasānā ṣaṭ-padā virāṭ śakvarī, 4-7 gāyatrī| viṣṇornu kaṃ prā vocaṃ vīryā'ṇi yaḥ pārthivāni vimame rajāṃsi | yo askabhāyaduttaraṃ sadhasthaṃ vicakramāṇastredhorugāyaḥ

हिन्दी अर्थ

नः गृहस्थ के सदस्य । अनुमति है पति-पत्नी ' के नेमे अनुः अन्विद॑तुमते त्वं मंससे शं च॑ नस्कृधि । (श्रनुमते) है अनुकूल मति वाली पली ! (त्वम्) वर (अनुमंसेसे त् अनुक्ल रूपता को ही अनुकूलरूप मानती है (च) ग्रोर् इस प्रकार (नः) हमे तू (शम्) सुख-शान्ति (कृधि) प्रदान कर । (देवि) है देवि ! . पत्नी ।. (आहृतम्) आहुतिरूप मं ्राहुत हई (हव्यम्) वीर्यरूपी हवि की (जुष-

English

God’s high power and statute. In whose control is all this world that shineth, all that hath powers to see and all that breatheth.

अध्याय 7

श्लोक 26.2

प्र तद् विष्णु॑ स्तवते वी॒र्याऽणि मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः ।प॒रा॒वत॒ आ ज॑गम्या॒त् पर॑स्याः

pra tad viṣṇu stavate vīryā'ṇi mṛgo na bhīmaḥ kucaro giriṣṭhāḥ | parāvata ā jagamyāt parasyāḥ

हिन्दी अर्थ

२०५ अथवकेद-माष्य का० ७.1 श्रनु० २। सु० २१ (५ । निरुक्त मे भी “अनुमति प्रादि को देवपत्नीरूप में माना है, न किं चमा कौ कलाविशेषं । यथा “अनुमतिः राकेति देवपल्यौ" इति नरुक्तः । “पौणंमास्यौ” इति याज्ञिकाः (११।३। ३०) । तस्य व॒यं हैड॑सि माऽपिं भूम घुण्दीके अस घमो स्याम ॥२॥ उस पति कं (हेडसि) कोधमे (अपि) भी (वयम्) हम गृहवासी (मा

English

Praise of Vishnu I will declare the mighty deeds of Vishnu, of him who measured out the earthly regions, Who propped the highest place of congregation, thrice setting down his footstep, widely

अध्याय 7

श्लोक 26.3

यस्यो॒रुषु॑ त्रि॒षु वि॒क्रम॑नेष्वधिक्षि॒यन्ति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।उ॒रु वि॑ष्णो॒ वि क्र॑मस्वो॒रु क्षया॑य नस्कृधि ।घृ॒तं घृ॑तयोने पिब॒ प्रप्र॑ य॒ज्ञप॑तिं तिर

yasyoruṣu triṣu vikramaneṣvadhikṣiyanti bhuvanāni viśvā | uru viṣṇo vi kramasvoru kṣayāya naskṛdhi | ghṛtaṃ ghṛtayone piba prapra yajñapatiṃ tira

हिन्दी अर्थ

म, तया इस कौ (सुमतौ) सुमति मे ( स्याम) हम हों । ॥ म बहुत भेद पाया जता है । इस लिये श्रथ अनिर्चित है । अभिमत है, (सुदानु) भौर सुखदाय है, (तेन) उस नाम द्वारा (न यज्ञम्) रयिम्) उत्तम वीर सन्तानरूपी घन (धेहि) प्रदान कर । ˆ ° 4

English

striding. Loud boast doth Vishnu make of this achievement, like some wild beast, dread, prowling, mountain-roaming.

अध्याय 7

श्लोक 26.4

इ॒दं विष्णु॒र्वि च॑क्रमे त्रे॒धा नि द॑धे प॒दा।समू॑ढमस्य पांसु॒रे

idaṃ viṣṇurvi cakrame tredhā ni dadhe padā| samūḍhamasya pāṃsure

हिन्दी अर्थ

पतनी का नाम है अनुमति । वह् पति के श्रनुकूला वेमनस्था नही होती । यह् नाम सुगमता पूवक गाह्वान 0 ) प्रणय वाली है प्रेममयी है यह् नाम सवनुमत है, श्रौर सुखदायक ५ सब गृहस्थियो द्वारा वरणीय है, ग्रहण योग्य है सभौ चाहतेहैंकि धनको । का० ७1 अनु० २। सु २१ अथरवेवेदमाष्य २१ पलियां अनुमतिवाली हों, पतियों के अनुकूल मतिययो बाली हों । एसी

English

May he approach us from the farthest distance. Thou within whose three wide-extended paces all worlds and creatures have their habitation, Drink oil, thou homed in oil! promote the sacrificer more and more.

अध्याय 7

श्लोक 26.5

त्रीणि॑ प॒दा वि च॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॑भ्यः ।इ॒तो धर्मा॑णि धा॒रय॑न्

trīṇi padā vi cakrame viṣṇurgopā adābhyaḥ | ito dharmāṇi dhārayan

हिन्दी अर्थ

मद्रा स्याः पथतिरबेभूव सेम यष्ठम॑वतु देवगोपा ॥५॥ पन के लिये ओौर उत्तम वीरता के लिये (सुजातम्) उत्तम विवाह्-विधि गे पेदाहु्रा है। (अस्याः) इस श्रनुमति की (भद्रा) सुखप्रदा तथा कल्याणकारी (प्रमतिः) शोभना मति (हि) निश्चय (बभूव) प्रकट हुई है । (सा) वह् श्रनुमति पत्नी (देवगोपा) पति के माता, पिता आदि देवों व्रारा तथा उन शरीरो में वीरता प्रदान करने कं लिये । अनुमति-पत्नी केयेदो तीयते'" (गीता १३।१) । शरीरो को सृक्षेत्र बना कर उनमें सद्गुणरूपी बीज नोने चाहिए, भौर वीरत) की भावनाएं भरनी चाहिए । देव है विवाहित भ्रनुमति के ए्वशुर आदि ।

English

Through all this world strode Vishnu: thrice his foot he planted, and the whole Was gathered in his footstep’s dust. Vishnu the guardian, he whom none deceiveth, made three steps, thenceforth.

अध्याय 7

श्लोक 26.6

विष्णोः॒ कर्मा॑णि पश्यत॒ यतो॑ व्र॒तानि॑ पस्प॒शे।इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑

viṣṇoḥ karmāṇi paśyata yato vratāni paspaśe| indrasya yujyaḥ sakhā

हिन्दी अर्थ

तस्यास्ते देवि समतौ स्यामानुंमते अनु हि मंससे नः ॥६॥ (यत् तिष्ठति) जो स्थित है, (चरति) चलता है, (यद्, उ, च) ओर (बभूवह । (देवि) है परमेश्वर-मातुदेव ! › (तैः सेरी (तस्याः) उस (सुमतौ) सुमति में (स्याम) हम हों, या रहें । (श्रनुमते) है अनुमति मातः ! (नः) हमे (अनु मंससे) श्रपनी अनुकूतामेमान। माता । वह किसी के प्रतिकल नहीं है, ग्रपितु स्के प्रति अनुकूलरूप मे

English

Establishing these high decrees. Look ye on Vishnu’s works, whereby the friend of Indra, close- allied, Hath let his holy ways be seen.

अध्याय 7

श्लोक 26.7

तद् विष्णोः॑ पर॒मं प॒दं सदा॑ पश्यन्ति सू॒रयः॑ ।दि॒वीऽव॒ चक्षु॒रात॑तम्

tad viṣṇoḥ paramaṃ padaṃ sadā paśyanti sūrayaḥ | divī'va cakṣurātatam

हिन्दी अर्थ

“देर .श्भरदवेद-भाष्य का०.७ 1 अनु०. २1 सु० २२ म प्रकट होती है, यथा “अत्मा वे पुक्रामासि" (निरुक्त ३।१।४ ), वसे “सुमति में रहने की प्राथेना हुई हे, या इच्छा प्रकट हुई है । साथ ही यह -कहयहैफि हम तेरी अनुकूलतामें वतमान र्ह-यह् तु मान, ॥ हमारी सदा उन्नति कर । एजति = एज दीप्तौ, तया एज् ' कम्पने, दोनों धातुए वादः) । कम्पित दोना = गतिशील होना । मंससे लेट् लकार समेत विश्वे वच॑सा पतिं दिव एको विभूरतिंथिमेनानाम् ।

English

The princes evermore behold that loftiest place where Vishnu is, Like an extended eye in heaven, From heaven, O Vishnu, or from earth, O Vishnu, or from the great far-spreading air’s mid region,

अध्याय 7

श्लोक 26.8

दि॒वो वि॑ष्ण उ॒त वा॑ पृथि॒व्या म॒हो वि॑ष्ण उ॒रोर॒न्तरि॑क्षात्।हस्तौ॑ पृणस्व ब॒हुभि॑र्व॒सव्यै॑रा॒प्रय॑च्छ॒ दक्षि॑णा॒दोत स॒व्यात्

divo viṣṇa uta vā pṛthivyā maho viṣṇa urorantarikṣāt| hastau pṛṇasva bahubhirvasavyairāprayaccha dakṣiṇādota savyāt

हिन्दी अर्थ

९४ ४ ( विश्वे ) है सव लोगो 4. (समेत) परस्पर इकट्रं हो, (वचसा) करो, जो परमेश्वर किः ( एकः ) एक है, (विभूः) सर्वव्यापक है, श्रौर (जनानाम्) उपासक जनों का । आ कर निवास करता रहता है । (तम्, एकम्, इत्, अनु) उस एक परमेश्वरं । के ही अनुकूल हुई (वतेनिः) पृथिवी (पुर) बार-बार (वावृते) वृत्ताकार

English

Fill both thy hands full of abundant treasures, and from the right and left bestow them freely. A prayer to Ida, Goddess of devotion May Idā with her statute dwell beside us, she in whose place the pious purge and cleanse

अध्याय 7

श्लोक 27.1

इडा।१ मेधातिथिः।इडा।त्रिष्टुप्।इडै॒वास्मां अनु॑ वस्तां व्र॒तेन॒ यस्याः॑ प॒दे पु॒नते॑ देव॒यन्तः॑ ।घृ॒तप॑दी॒ शक्व॑री॒ सोम॑पृ॒ष्ठोप॑ य॑ज्ञम॑स्थित वैश्वदे॒वी

iḍā| 1 medhātithiḥ| iḍā| triṣṭup| iḍaivāsmāṃ anu vastāṃ vratena yasyāḥ pade punate devayantaḥ | ghṛtapadī śakvarī somapṛṣṭhopa yajñamasthita vaiśvadevī

हिन्दी अर्थ

अत्िथिः; जैसे गृहस्थो मे अतिथि कभी-कभी आतादहै, व॑से उपासक ,: जनों से भी परमेश्वर कभी-कभी प्रकट होता है । १. माता-के गृण जते सन्तति मेँप्रकृट होते है, वैसे परदमेवर-माता के गुण का० ७। अनुं° २। स्० २३ अथवंवेद-भाष्य ३३

English

them. She, mighty, Soma-decked, whose foot drops fatness, meet for All-Gods, hath come to aid our worship.

अध्याय 7

श्लोक 28.1

स्वस्ति।मेधातिथिः।वेदः।त्रिष्टुप्।वे॒दः स्व॒स्तिर्द्रु॑घ॒णः स्व॒स्तिः प॑र॒शुर्वेदिः॑ पर॒शुर्नः॑ स्व॒स्ति।ह॒वि॒ष्कृतो॑ य॒ज्ञिया॑ य॒ज्ञका॑मा॒स्ते दे॒वासो॑ य॒ज्ञमि॒मं जु॑षन्ताम्

svasti| medhātithiḥ| vedaḥ| triṣṭup| vedaḥ svastirdrughaṇaḥ svastiḥ paraśurvediḥ paraśurnaḥ svasti| haviṣkṛto yajñiyā yajñakāmāste devāso yajñamimaṃ juṣantām

हिन्दी अर्थ

(अयम्) यह परमेश्वर (कवीनाम्, मतिः) कवियों कौ मतिरूप है, ओर परमेश्वर कवि है, वेद उसकेकाव्यरहै, वह् श्रादि कवि है, उससे पूवं कोई कवि नदीं हभ, कविता करने की मति उसी ने दी, अतः वहु कविके चमक्रता है । परन्तु वह है एकज्योतिरूप ही । “तस्य भासा सवंमिदं कहा है, हम कवियों में वह् पूर्णतया दृष्टिगोचर ही गया है ।

English

Praise of the sacrificial utensils Blest be the Broom, may the Mace bring a blessing, and may the

अध्याय 7

श्लोक 29.1

अग्नाविष्णू।१-२ मेधातिथिः।अग्नाविष्णू।त्रिष्टुप्।अग्ना॑विष्णू॒ महि॒ तद् वां॑ महि॒त्व पा॒थो घृ॒तस्य॒ गुह्य॑स्य॒ नाम॑ ।दमे॑दमे स॒प्त रत्ना॒ दधा॑नौ॒ प्रति॑ वां जि॒ह्वा घृ॒तमा च॑रण्यात्

agnāviṣṇū| 1-2 medhātithiḥ| agnāviṣṇū| triṣṭup| agnāviṣṇū mahi tad vāṃ mahitva pātho ghṛtasya guhyasya nāma | damedame sapta ratnā dadhānau prati vāṃ jihvā ghṛtamā caraṇyāt

हिन्दी अर्थ

(सचेतसः) सचेतं करने वाली (मन्युमत्तमाः) अत्यन्त चमकोली (उषसः) करता भवति हो जाता है, (गोः चिते) जबकि स्तुति वाणियों का चयन कान्तिकर्मा (निघं० २।६) । गोः चिते = गौः वाड् नाम (निषं० १।११) । १, चयन की भावना को ““भपिष्ठो ते नम॒ उक्ति विषेम" द्वारा भी मुचित किथाहै (यजु ४०।१६) ।

English

Altar and the Hatchet bless us. Worshipful Gods, may they accept this worship, lovers of sacri- fice, and sacrificers. To Agni and Vishnu

अध्याय 7

श्लोक 29.2

अग्ना॑विष्णू॒ महि॒ धाम॑ प्रि॒यं॑ वां॑ वी॒थो घृ॒तस्य॒ गुह्या॑ जुषा॒णौ।दमे॑दमे सुष्टु॒त्या वा॑वृधा॒नौ प्रति॑ वां जि॒ह्वा घृ॒तमुच्च॑रण्यात्

agnāviṣṇū mahi dhāma priyaṃ vāṃ vītho ghṛtasya guhyā juṣāṇau| damedame suṣṭutyā vāvṛdhānau prati vāṃ jihvā ghṛtamuccaraṇyāt

हिन्दी अर्थ

२४ अथवेवेद-माष्य का० ७ घ्रनु० २1 सू० २४ स्तुति वाणियों का जब चयन हो जाता है, चित्त में संचय हो जाता है, तब परमेश्वर उषाओं को भेजता है । ये उषाएं परमेश्वर प्राप्ति के पूवेरूप है । श्वेता० उप० (२।११)मं पूर्वरूप निम्नलिखित कंहे हैँ । यथा “नीहारधूमारकर पुरस्सर अथात् पूवरूप दशय। है । योगज विभूति का अभाव (श्रराय्यः) अ्रदान अथति् कजूसी की भावनाणएं सब को (अस्मत्) अपने से (नाशयामसि) हम नष्ट करते है, दूर करते है

English

This is your glorious might, Agni and Vishnu! Ye drink the essence of the mystic butter. Placing in every home seven costly treasures. Let your tongue stretch to take the offered fatness.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।