Atharva Veda
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

286 श्लोकभाग 3/5 · श्लोक 57.1–78.2

पूर्ण अध्याय पाठ64 श्लोक

अध्याय 7

श्लोक 57.1

सरस्वती।१-२ वामदेवः।सरस्वती।जगती।यदा॒शसा॒ वद॑तो मे विचुक्षु॒भे यद् याच॑मानस्य॒ चर॑तो॒ जनाँ॒ अनु॑ ।यदा॒त्मनि॑ त॒न्वोऽमे॒ विरि॑ष्टं॒ सर॑स्वती॒ तदा पृ॑णद् घृ॒तेन॑

sarasvatī| 1-2 vāmadevaḥ| sarasvatī| jagatī| yadāśasā vadato me vicukṣubhe yad yācamānasya carato janā~ anu | yadātmani tanvo'me viriṣṭaṃ sarasvatī tadā pṛṇad ghṛtena

हिन्दी अर्थ

तुभे शरीर में निवास कराने वाली हो । है। “आयुयंजेन कल्पताम्” (यजु० €।२१; १८।२९; १२।३३) । तथा (पराचैः) पराडः मूख हो कर चली गई शारीरिक शक्तियों के कारण गई है, (तौ अपानः प्राणः) वे अपान-प्राण (पुनः) फिर (आ इताम्)

English

True to laws, Indra Varuna, drinkers of the juice, quaff this pressed Soma which shall give you rapturous joy! Let sacrifice, your car, to entertain the Gods, approach its rest- ing-place that they may drink

अध्याय 7

श्लोक 57.2

स॒प्त क्ष॑रन्ति॒ शिश॑वे म॒रुत्व॑ते पि॒त्रे पु॒त्रासो॒ अप्य॑वीवृतन्नृ॒तानि॑ ।उ॒भे इद॑स्यो॒भे अ॑स्य राजत उ॒भे य॑तेते उ॒भे अस्य पुष्यतः

sapta kṣaranti śiśave marutvate pitre putrāso apyavīvṛtannṛtāni | ubhe idasyobhe asya rājata ubhe yatete ubhe asya puṣyataḥ

हिन्दी अर्थ

आयु को (ते आत्मनि) तेरे शरीरम (पुनः) फिर (अवेशयामि) मै मेमं भाणो हांसीन्मो अपानो वहाय परा गात् । (अवहाय) इसे त्याग कर (माउ) न (परा गात्) परे चला जाय । (समप्त- षिभ्यः) सप्तषियों के लिये (एनम्) इसे (परि ददामि) म सौपता हूं (ते) का० ७॥ मनु० ५1 सू० ५५ अथर्ववेद-माष्य ७५ जाते रह जबतक येशरीरमें रहते तब वक इनकी सत्ताके कारण

English

thereof. O Indra Varuna, drink your fill, ye heroes, of this effectual and sweetest Soma. This juice was shed by us that ye might quaff it. On this trimmed grass be seated and rejoice

अध्याय 7

श्लोक 58.1

अन्नम्।१-२ कौरुपथिः।इन्द्रावरुणौ।जगती, २ त्रिष्टुप्।इन्द्रा॑वरुणा सुतपावि॒मं सु॒तं सोमं॑ पिबतं॒ मद्यं॑ धृतव्रतौ ।यु॒वो रथो॑ अध्व॒रो दे॒ववी॑तये॒ प्रति॒ स्वस॑र॒मुप॑ यातु पी॒तये॑

annam| 1-2 kaurupathiḥ| indrāvaruṇau| jagatī, 2 triṣṭup| indrāvaruṇā sutapāvimaṃ sutaṃ somaṃ pibataṃ madyaṃ dhṛtavratau | yuvo ratho adhvaro devavītaye prati svasaramupa yātu pītaye

हिन्दी अर्थ

यं जंरिम्गः हैवधिररिष्ट इह व॑भेतामर ॥५॥ करो, (इवे) जैसे कि (अनड्वाहौ ) शकटवहन-समथं दो बेल (व्रजम्) बेल- शालामे करते हँ । (श्रयम्) यह (जरिम्गः) जराका (शेवधिः) निषि अर्थात् खजाना (अरिष्टः) अह्िसित हभ (इह) इस शरीर यालोकमें (ते) तेरे (प्राणम्) प्राणको (आ सुवामसि) हम तेरी ओर प्रेरित यज्ञाग्नि (नः) हमारे रोगी कौ (आयुः) भायु को (विश्वतः) सब प्रकार से (दधत्) पूनः स्थापित कर दे)

English

you. An imprecation Like a tree struck by lightning may the man be withered from the root.

अध्याय 7

श्लोक 58.2

इन्द्रा॑वरुणा॒ मधु॑मत्तमस्य॒ वृष्णः॒ सोम॑स्य वृष॒णा वृ॑षेथाम्।इ॒दं वा॒मन्धः॒ परि॑षिक्तमा॒सद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयेथाम्

indrāvaruṇā madhumattamasya vṛṣṇaḥ somasya vṛṣaṇā vṛṣethām| idaṃ vāmandhaḥ pariṣiktamāsadyāsmin barhiṣi mādayethām

हिन्दी अर्थ

९६ प्रथवेवेद-भाष्य का०.७। भ्रनु° ५। सू० ५६ सूयं को (ग्रगन्म) हम पहुचे है । के कारण उस के सम्बन्धी शोक-तमस् से धिरे हुए थे । नाक भौर सूयको फते सद॑सि राजतो य्न देवेष यच्छतः ॥१॥ मनुष्य करते हँ । (एते) ये दोनों (सदसि) संसद् मे (राजतः) प्रदीप्त होते है, चमकते है, ओर (यज्ञम्) यज्ञ॒ को (देवेषु) वायु, जल, ्रोषधि

English

Who curseth us who curse not him, or, when we curse him. curseth us. A parting traveller’s address to the houses of his village I, prudent, bringing power, a treasure-winner, with amicable eye that strikes no terror,

अध्याय 7

श्लोक 59.1

शाप-मोचनम्।१ बादरायणिः।अरिनाशनम्।अनुष्टुप्।यो नः॒ शपा॒दश॑पतः॒ शप॑तो॒ यश्च॑ नः॒ शपा॑त्।वृ॒क्ष इ॑व वि॒द्युता॑ ह॒त आ मूला॒दनु॑ शुष्यतु

śāpa-mocanam| 1 bādarāyaṇiḥ| arināśanam| anuṣṭup| yo naḥ śapādaśapataḥ śapato yaśca naḥ śapāt| vṛkṣa iva vidyutā hata ā mūlādanu śuṣyatu

हिन्दी अर्थ

आदिमे (यच्छतः) (यच्छतः) प्रदान करते है, स्थापित करते ह का० ७॥ अनु० ५। सु० ५७ मथवेवेर्द-मा्् ५७७ मौर सामगान की णोभा संसदों में होती है, संसद् के सदस्य सामगान की प्रशंसा करते है, यह् सामगान कौ शोमा है । “(साम'' स्वरूप है, जिसे ऋचां पर गाया जाता है । यथा “ऋछच्यधिरुढं साम गीयते" इस लिये ऋक् ओर साम दोनों का कथन हुश्राहै क एष मा तस्मान्मा हिंसीद् वेदः पृष्टः स॑चीपते ॥१॥

English

Come, praising and kind-thoughted, to these houses: be not afraid of me, be glad and joyful. Let these delightful Houses that are rich in power and store of milk, Replete with wealth and standing firm, become aware of our approach.

अध्याय 7

श्लोक 60.1

रम्यं गृहम्।१-७ ब्रह्मा।गृहाः, वास्तोष्पतिः।अनुष्टुप्, १ परानुष्टुप् त्रिष्टुप्।ऊर्जं॒ बिभ्र॑द् वसु॒वनिः॑ सुमे॒धा अघो॑रेण॒ चक्षु॑षा मि॒त्रिये॑ण ।गृ॒हानैमि॑ सु॒मना॒ वन्द॑मानो॒ रम॑ध्वं॒ मा बि॑भीत॒ मत्

ramyaṃ gṛham| 1-7 brahmā| gṛhāḥ, vāstoṣpatiḥ| anuṣṭup, 1 parānuṣṭup triṣṭup| ūrjaṃ bibhrad vasuvaniḥ sumedhā aghoreṇa cakṣuṣā mitriyeṇa | gṛhānaimi sumanā vandamāno ramadhvaṃ mā bibhīta mat

हिन्दी अर्थ

(ऋचम्, साम) ऋग्वेद ओर सामवेदसे (यत्) जो (हविः, श्रोजः) हवि ओर ओज के सम्बन्ध में, ओर (यजुः) यजुवंद से (बलम्) बल के (पृष्टः) पूछा गय। (एषः वेदः) यह् वेद (मा) मुभे (मा) न (हिसीत्) हसित करे (शचीपते) है वेदवाक् के स्वामी परमेश्वर । शची वाडनाम दारा अयथार्थ ज्ञान होने पर स्वाध्यायी की मानो हिसा होती है। यथा १. ऋगवेद के याज्यामन्यों हारा हविः की श्राहुति दी जाती ह, सामगान कै परिमाणानुसार वेदि की रचना, श्राज्य के लिये गोदोहन तथा पुरोडार भ्रौर हवि के

English

These Houses we invoke, whereon the distant exile sets his thought, Wherein dwells many a friendly heart: let them beware of our approach. Thus greeted, ye of ample wealth, friends who enjoy delightful sweets.

अध्याय 7

श्लोक 60.2

इ॒मे गृ॒हा म॑यो॒भुव॒ ऊर्ज॑स्वन्तः॒ पय॑स्वन्तः ।पू॒र्णा वा॒मेन॒ तिष्ठ॑न्त॒स्ते नो॑ जानन्त्वाय॒तः

ime gṛhā mayobhuva ūrjasvantaḥ payasvantaḥ | pūrṇā vāmena tiṣṭhantaste no jānantvāyataḥ

हिन्दी अर्थ

७८ -मथवेवेद-भाष्य का० ७1 श्रनु० ५। सु० ५८ वेदतोकव्यहै, प्रतःकव्यकी रीतिसे वेद में वस्तुवणेन होता दहै। (वसो) है वस्ने वाले (ये ते पन्थानः) जो तेरे मां (दिवः) चुलोक सब सौर परिवारको (एेरयः) तुभ्रेरणा देरहा हे, (तेभिः) उन मार्गौ दारा (नः) हमें (सुम्नया) सुख में (धेहि) स्थापित कर 1

English

Be ever free from hunger, free from thirst! Ye Houses, fear us not. Kind greeting to the cattle here, kind greeting to the goats and sheep! Then, of the food within our homes, kind greeting to the plea- sant drink!

अध्याय 7

श्लोक 60.3

येषा॑म॒ध्येति॑ प्र॒वस॒न् येषु॑ सौमन॒सो ब॒हुः ।गृ॒हानुप॑ ह्वयामहे॒ ते नो॑ जानन्त्वाय॒तः

yeṣāmadhyeti pravasan yeṣu saumanaso bahuḥ | gṛhānupa hvayāmahe te no jānantvāyataḥ

हिन्दी अर्थ

ऽभऽला) की प्रेरणा वसुनामक परमेश्वर करता है, जिसे कि मन्त्र (१) में ‹ शचीपति” भी कहा है । शवो का अथं क्म” भी है, यथा “शची क्म- नाम” (निषं० २।१) । मन्व मे देरयः“ द्वारा प्रेरणा का कथन हुभा है, अतः प्रेरक को कर्माधिपति होना चाहिए । पांच चितियों का वणन मकत्करृत चितिः प° ६२४; पञ्चमी चितिः पृ० १५०। चतुर्थी चित्ति को जव- तिर॑रिविराजेरसितात् पृदांकोः परि सत् । (तिरश्चचिराजेः) टेढी रेखाओं वाले सपं से, (असितात्) काले सपं से, का० ७। अनु° ५। सु० ५८ भ्रथवेवेद-माष्य ७६

English

Full of refreshment, full of charms, of laughter and felicity, Be ever free from hunger, free from thirst! Ye Houses, fear us not. 112

अध्याय 7

श्लोक 60.4

उप॑हूता॒ भूरि॑धनाः॒ सखा॑यः स्वा॒दुसं॑मुदः ।अ॒क्षु॒ध्या अ॑तृ॒ष्या स्त॒ गृहा॒ मास्मद् बि॑भीतन

upahūtā bhūridhanāḥ sakhāyaḥ svādusaṃmudaḥ | akṣudhyā atṛṣyā sta gṛhā māsmad bibhītana

हिन्दी अर्थ

ग्रोषधि ने श्रनीनशत्) नष्ट करदियाहै।! -; तिरषश्चिराजि भादि ४ सपविशेष है1 इनके विष कौ नाशिका “विरद्” कही है । सायण के ब्रनुसार ओषधि “मधुक या मधुका” हे) के लिये “परवल” कौ जड़ के चूर्णं की नस्म देने का विधान “चक्रदत्त'" मं ह्यं वीरुन्मघुजाता मधुश्चुन्मधुला मधूः ।

English

Stay here, and come not after me: prosper in every form and shape. With happy fortune will I come! Grow more abundant still through me! A prayer for sacred knowledge and its fruits

अध्याय 7

श्लोक 60.5

उप॑हूता इ॒ह गाव॒ उप॑हूता अजा॒वयः॑ ।अथो॒ अन्न॑स्य की॒लाल॒ उप॑हूतो गृ॒हेषु॑ नः

upahūtā iha gāva upahūtā ajāvayaḥ | atho annasya kīlāla upahūto gṛheṣu naḥ

हिन्दी अर्थ

(इयम्) यह् (वीरुत्) श्रोषधि (मधजाता) मध को जड़ से या मधु- रूप पैदा हुई है, (मधृणष्चत्) मधृलाविणी है, (मघृला) मधुमती है, (मधूः) मधू नामवाली है । (सा) वह् (विहतस्य) अंगको कुटिल कर देने वाले विष की (भेषजी ) चिकित्सिका है, (ग्रथो) तथा (मशकजम्भनी) मच्छर अन्य कई ओषधियों कं योग के साथ “महागर” नामक प्रयोग मेँ हुभा है । से (धीतम्) उसने रक्त पिया है, (ते) तेरे (ततः) उस स्थान से (निः 1, अथवेवेद-भाष्य .का० ७। अनु० ५।स्० ५८ (यः अयम्) जो यह त्रु है सपेदष्ट पुरुष (वक्रः) कुटिलावयव,

English

Since, Agni, with our fervent zeal we undergo austerity, May we be dear to Sacred Lore, may we be wise and live long lives. Agni, we practise acts austere, we undergo austerity.

अध्याय 7

श्लोक 60.6

सू॒नृता॑वन्तः सु॒भगा॒ इरा॑वन्तो हसामु॒दाः ।अ॒तृ॒ष्या अ॑क्षु॒ध्या स्त॒ गृहा॒ मास्मद् बि॑भीतन

sūnṛtāvantaḥ subhagā irāvanto hasāmudāḥ | atṛṣyā akṣudhyā sta gṛhā māsmad bibhītana

हिन्दी अर्थ

वयवों को (वक्रा) विकृत तथा (वृजिना) वर्जनीयरूपी (कृणोषि) कर टेढ सरकण्डे को नम्र अर्थात् ऋजु किया जाता है। अरसस्यं शर्कारस्य नीचीन॑स्योपसपैतः विष को (आ अदिषि) मैने खण्डित कर दियाहै (ग्रथो) तथा ( एनम्) हसे (ग्रजीजभम्) मारदियादहै।

English

So listening to Holy Lore may we grow wise and full of days. A prayer for the overthrow of enemies Like a car-warrior, Agni here, grown mighty, Lord of the brave,

अध्याय 7

श्लोक 60.7

इ॒हैव स्त॒ मानु॑ गात॒ विश्वा॑ रू॒पाणि॑ पुष्यत ।ऐष्या॑मि भ॒द्रेणा॑ स॒ह भूयां॑सो भवता॒ मया॑

ihaiva sta mānu gāta viśvā rūpāṇi puṣyata | aiṣyāmi bhadreṇā saha bhūyāṃso bhavatā mayā

हिन्दी अर्थ

वाला है) प्रदिषि= लु, लकार, दौ अवखण्डने (दिवादिः) प्रजीजभम्. (न ते बाह्लोः बलम्) न तेरी बहुशो मे बल (ग्रस्त) है, (न शीषं) न सिर मे, (उत न) ओर न (मध्यतः) मध्यावयव में है। (अय किम्) १. “शकटः” शर् शु (हितायाम् ) -+-कः (करोति) अद् (श्रटति), हा करता . का० ७1 श्रनु० द भरु ५९ अथर्ववेदमाष्य ८१

English

Chief Priest, hath conquered footmen. Laid on earth’s centre he hath flashed and glittered. Low may he lay our enemies beneath us. A prayer for deliverance from affliction

अध्याय 7

श्लोक 61.1

तपः।१-२ अथर्वा।अग्निः।अनुष्टुप्।यद॑ग्ने॒ तप॑सा॒ तप॑ उपत॒प्याम॑हे॒ तपः॑ ।प्रि॒याः श्रु॒तस्य॑ भूया॒स्मायु॑ष्मन्तः सुमे॒धसः॑

tapaḥ| 1-2 atharvā| agniḥ| anuṣṭup| yadagne tapasā tapa upatapyāmahe tapaḥ | priyāḥ śrutasya bhūyāsmāyuṣmantaḥ sumedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अदन्ति तवा प्ििपीशिका वि दस्चन्ति पयु । (त्वा) तुभे (पिपीलिकाः) चूियां (ग्रदन्ति) खाती है, (मयूर्यः) मूख मे (न विषम्) विष नहीं है (किमु) क्याही (ते) तेरे (पृच्छघौ) पुच्छनिष्ठ काटि मे (असत्) हो । भोज्य पर, ओर पुच्छधि द्वारा प्राणी पर! सपंके मुखमें विष होतादहै, बिच्छुके मुख में विष नहीं होता । इसकी पृ मे विष होता है, वहमभी

English

We call with lauds from his most lofty dwelling victorious Agni, conqueror in battles. May he conveyus over all distresses, may the God Agni bear us past our troubles. A charm to avert an evil omen

अध्याय 7

श्लोक 61.2

अग्ने॒ तप॑स्तप्यामह॒ उप॑ तप्यामहे॒ तपः॑ ।श्रु॒तानि॑ शृ॒ण्वन्तो॑ व॒यमायु॑ष्मन्तः सुमे॒धसः॑

agne tapastapyāmaha upa tapyāmahe tapaḥ | śrutāni śṛṇvanto vayamāyuṣmantaḥ sumedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्मिन्, पुच्छ मे निहित काष्टे मे । (१-२) वामदेवः । सरस्वती । जगती । (ग्राशसा) आशापू्वंक (वदतः) भिक्षा के लियै बोलते हुए (यत्) जो (मे) मेरा मन (विचुक्षुभे) विकषुन्ध हृभा है, सं चलित हभ है, (यद् याचमानस्य) तथा याचना करते हुए (जनान् अनु) जन-जन के पीषछठ-पीछे (चरतः) चलते हुए मेरा मन (यत्) जो विक्षुन्ध हुमा है । (मे) मेरी "८२ ;्रथेवेवेद-भाष्य का०छ॥ श्नु० ५। सू० ६० लगी है, (सरस्वती) ५.4. पारमेश्वरीश.म्तै (तद्) उस सब को (ग्रा पणत्) आपूरित कड्.दे, (घृतेन) जंसे कि चाटमकको घृत द्वारा आपूरित कियाजाता.है,भरा जातारहै

English

From all that woe and trouble may the Waters save and rescue me, Whate’er the Raven, black of hue, flying out hither ward, hath dropped. May Agni Gārhapatya save and set me free from all this guilt.

अध्याय 7

श्लोक 62.1

शत्रुनाशनम्।१ मरीचिःकाश्यपः।अग्निः।जगती।अ॒यम॒ग्निः सत्प॑तिर्वृ॒द्धवृ॑ष्णो र॒थीव॑ प॒त्तीन॑जयत् पु॒रोहि॑तः ।नाभा॑ पृथि॒व्यां निहि॑तो॒ दवि॑द्युतदधस्प॒दं कृ॑णुतां॒ ये पृ॑त॒न्यवः॑

śatrunāśanam| 1 marīciḥkāśyapaḥ| agniḥ| jagatī| ayamagniḥ satpatirvṛddhavṛṣṇo rathīva pattīnajayat purohitaḥ | nābhā pṛthivyāṃ nihito davidyutadadhaspadaṃ kṛṇutāṃ ye pṛtanyavaḥ

हिन्दी अर्थ

किसी ने कुछ दिया नही, अतः उस की आत्मामें चोट लगीदहै, भौर वह् पारमेश्वरी माता से तदथं शान्ति चाहतादहै। (शिशवे) शरीरम शयन किये हुए, (मरुत्वते) प्राणों के स्वामी, तब (उभे इत्) दोनों ही, परथिवी ग्रौर यौः (अस्य) इसके हौ जाते है, (उभे) दोनों (यतेते) यत्न करते दहै, (उभे) दोनों (अस्य) इस के लिये (पुष्यत्तः) पोषण करने लगते हैँ । ि

English

Which the black Raven with thy mouth, O Nirriti, hath wiped away. A charm against imprecation and threatened evils With retroverted fruit hast thou, O Apāmārga, sprung and grown.

अध्याय 7

श्लोक 63.1

दुरितनाशनम्।१ मरीचिः काश्यपः।जातवेदाः।जगती।पृ॒त॒ना॒जितं॒ सह॑मानम॒ग्निमु॒क्थ्यैर्ह॑वामहे पर॒मात् स॒धस्था॑त्।स नः॑ पर्ष॒दति॑ दु॒र्गाणि॒ विश्वा॒ क्षाम॑द् दे॒वोऽति॑ दुरि॒तान्य॒ग्निः

duritanāśanam| 1 marīciḥ kāśyapaḥ| jātavedāḥ| jagatī| pṛtanājitaṃ sahamānamagnimukthyairhavāmahe paramāt sadhasthāt| sa naḥ parṣadati durgāṇi viśvā kṣāmad devo'ti duritānyagniḥ

हिन्दी अर्थ

म्बन करलेतेरहै, तव समग्र जगत् इस देही का अपना हौ जातादहै, ओर रस के सुख तथा परिपोषण में तत्पर हो जाता हैः। इस द्वारा भिक्षार्थी को यह् सुफाया है कि तेरे “सात'' असन्मार्गी है जिस से तुभ भिक्षामेभी चोट हो जायेगा, ओर तेरा पोषण करने लग जायेगा । राजति: रेश्वयकर्मा (निषं० २।२१) । .शिशवे -=अनृतमागियों के जीत्रात्मा मनो सोए हृए होते युवो रथो अध्वरो देववीतये भ्रति स्वस॑रमुपं यातु पीतये ॥१॥ का० ७ 1 श्रनु° ५।.स्० ६१ अथवेवेद-भाष्य १.

English

Hence into distance most remote drive every curse away from, me. Whatever evil we have done, whatever vile or sinful act, With thee, O Apāmārga, who lookest all ways, we wipe it off.

अध्याय 7

श्लोक 64.1

पापमोचनम्।१-२ यमः।आपः, अग्निः, निर्ऋतिः।१ भुरिगनुष्टुप्, २ न्यङ्कुसारिणी बृहती।इ॒दं यत् कृ॒ष्णः श॒कुनि॑रभिनि॒ष्पत॒न्नपी॑पतत्।आपो॑ मा॒ तस्मा॒त् सर्व॑स्माद् दुरि॒तात् पा॒न्त्वंह॑सः

pāpamocanam| 1-2 yamaḥ| āpaḥ, agniḥ, nirṛtiḥ| 1 bhuriganuṣṭup, 2 nyaṅkusāriṇī bṛhatī| idaṃ yat kṛṣṇaḥ śakunirabhiniṣpatannapīpatat| āpo mā tasmāt sarvasmād duritāt pāntvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अभिषृत सोम के पीने वाले (दमम्, सुतम्, सोमम्) .इस अभिषुत सोम को जिन्टोने प्रजापालन का. व्रत धारण कियारहै। (युवोः) तुम दोनोंका गृहो के प्रति (उपयातु) आए, (देववीतये) तुम्हरे दिभ्य भोज कं लिये, दवारा करना चाहिए । मद्यम् = मदी हषं ।

English

If with the cripple we have lived, whose teeth are black and nails deformed, With thee, O Apāmārga, we wipe all that ill away from us. A prayer to Vāk

अध्याय 7

श्लोक 64.2

इ॒दं यत् कृ॒ष्णः श॒कुनि॑र॒वामृ॑क्षन्निरृते ते॒ मुखे॑न ।अ॒ग्निर्मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ गार्ह॑पत्यः॒ प्र मु॑ञ्चतु

idaṃ yat kṛṣṇaḥ śakuniravāmṛkṣannirṛte te mukhena | agnirmā tasmādenaso gārhapatyaḥ pra muñcatu

हिन्दी अर्थ

दिया है, (स्मिन्) इस (व्िषि) महाशाला मे (ग्रासय) बेठकर (मादः णाला चाहिए । अथवे० ९।३।२९१ मे महाशालाका वणन भी दे ।म्नन्धः (अणपतः नः) शप न देते हुए हमे (यः) जो (षात्) शाप देवे, (च). 1. अथवेवेद-माष्य का० ७ । भ्रनु° ६1 सू° ६२ जीर प्रतयत्तर में (यः) जो (शपतः नः) शाप देते हृए हम (शपात्) पुनः शाप देवे, वह (विदयता हतः) विचत् द्वारा मारे गये (वृक्षःइव) वृक्ष कं सदृश (ग्रा मूलात्) मूल से (अनु) अनुक्रमपूवेक (शुष्य तु) सूख जाय ।

English

If it was in the wind or air’s mid-region, if it was in the trees or in the bushes, To meet whose utterance forth streamed the cattle, may that. Celestial Power again approach us.

अध्याय 7

श्लोक 65.1

दुरितनाशनम्।१-३ शुक्रः।अपामार्गवीरुत।अनुष्टुप्।प्र॒ती॒चीन॑फलो॒ हि त्वमपा॑मार्ग रु॒रोहि॑थ ।सर्वा॒न् मच्छ॒पथाँ अधि॒ वरी॑यो यावया इ॒तः

duritanāśanam| 1-3 śukraḥ| apāmārgavīruta| anuṣṭup| pratīcīnaphalo hi tvamapāmārga rurohitha | sarvān macchapathā~ adhi varīyo yāvayā itaḥ

हिन्दी अर्थ

(सायण) । वृक्ष पर जब विदयुत्पात होता है तो वह् जड़ समेत सूख जाता है, इसी प्रकार शाप देने वाला भी सूख जाय, एेसी भावना प्रकट कौ गर्द है। शाप देने वालेकामूलयातो सिर ्रभिप्रेतहै, यापाद। तात्पयंेसे व्यक्तियों के विनाश से है । सामाजिक जीवन प्रेममयदहो जाताहै। तथा “यः भौर "नः” मे व्यक्ति ओर समाज का भी ध्यान रखना होता है । सप्तम काण्ड का पञ्चम अवाक समाप्त का विभाग करने वाला, (सुमेधाः) उत्तम मेधा वाला, तथा (ग्रघोरेण) वासियों के पास (एेमि') मे भ्राता हूं। (समनाः) सुप्रसन्न मन वाला,

English

A priest’s prayer to the Agnayo Dhishnyāh May sense return to me again, and spirit, return my Sacred Power and my possessions!

अध्याय 7

श्लोक 65.2

यद् दु॑ष्कृ॒तं यच्छम॑लं॒ यद् वा चेरि॒म पा॒पया॑ ।त्वया॒ तद् वि॑श्वतोमु॒खापा॑मा॒र्गाप॑ मृज्महे

yad duṣkṛtaṃ yacchamalaṃ yad vā cerima pāpayā | tvayā tad viśvatomukhāpāmārgāpa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

(मत्) मुक से (मा बिभीत) भयन करो। वणेन से प्रतीत होता है कि ृहपति, घनाजेन ऊ लिये, बहुकाल तक घर् से बाहर रहा है, गौर उसकी मुखाकृति आदि में पर्यप्त श्रन्तर आ गया है । इसलिये वह् निज परिवार को गृहपति होने का विश्वास दिला रहा है । १. एेमि, रायतः नः == एक वचन तथा बहुवचन एक हौ भ्यक्ति के निदेशक है, फा० ७ । अनु० ६। सु° ६२ अथवंवेद-भाष्य प भुवः) सुखदायी होते है, (ते) वे गृह भर्थात् गृहवासौ (आयतः नः ) आते हर हमें (जानन्तु) जान ले, पहचान लं 1

English

Again let fires, aflame on lesser altars, each duly stationed, here succeed and prosper. 113 A prayer for children and prosperity

अध्याय 7

श्लोक 65.3

श्या॒वद॑ता कुन॒खिना॑ ब॒ण्डेन॒ यत् स॒हासि॒म।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे

śyāvadatā kunakhinā baṇḍena yat sahāsima| apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

गहाः पद द्चर्थक है,णालारूप, तथा गृहवासी" 1 गृहवासियो के सम्बन्ध सुख है एेन्दरियिक, ओर मयः है मानसिक सन्तोष रूपी । सुखम् =सु सेभ्यः, इन्द्रियेभ्यः । गृहाुपं ह्यामहै ते नो जानन्त्वायतः ॥२॥ है, (येषु) जिन में (बहुः) बहुत (सौमनसः) सौमनस्य है, (गृहान्) उन गृहो भ्र्थात् गृहवासियों को (उप ह्वयामहे) हम आदरपू्वक बुलाते ह (ते) वे (ग्रयतः नः+) हम श्राते हुओं को (जानन्तु) जान लं, परिचान लं ।

English

Sarasvati, in thy decrees, Goddess, in thy celestial laws, Accept the offered sacrifice, and, Goddess, grant us progeny. Here is, Sarasvati, thy fat libation, this sacrifice passing to the mouth of Fathers.

अध्याय 7

श्लोक 66.1

ब्रह्म।१ ब्रह्म।ब्रह्म।त्रिष्टुप्।यद्य॒न्तरि॑क्षे॒ यदि॒ वात॒ आस॒ यदि॑ वृ॒क्षेषु॒ यदि॒ वोल॑पेषु ।यदश्र॑वन् प॒शव॑ उ॒द्यमा॑नं॒ तद् ब्राह्म॑णं॒ पुन॑र॒स्मानु॒पैतु॑

brahma| 1 brahma| brahma| triṣṭup| yadyantarikṣe yadi vāta āsa yadi vṛkṣeṣu yadi volapeṣu | yadaśravan paśava udyamānaṃ tad brāhmaṇaṃ punarasmānupaitu

हिन्दी अर्थ

सौमनसः--मन की प्रसन्नता, प्रीत्यतिशय । (भूरिधनाः) बहुधनी, (स्वादुसंमुदः) स्वादु भोजनों में हषं का भ्रनुभव करने वाले (सखायः) सखा (उपहूताः) सत्कारपूवेक निमन्वित किये रहः (गृहाः) है गृहवासियों ! (मा अस्मत् विभौतन ) हमारे इस काम गृहपति प्रवास से बहुत घनोपाजन कर (मन्त्र १) घर श्राया है। ६ थरवंवेद-भाष्य को० ७. भनु ६ । मू० ६२ है । इस निमन्त्रण में वहत घनं का व्यय होगा, यह् जानकर गृहवासी पय- भीत हौ गये । गहपति उन्दः विश्वास दिलाता है कि तुम किसी प्रकार भी क्षुधा तृष्णा से पीडित न होभोगे, मँ पर्याप्त धनोपाजैन कर लाया हूं 1

English

These most auspicious offerings have ascended to thee: through, these may we be full of sweetness. Be kind and most auspicious, be gracious to us, Sarasvati, May we be ever in thy sight.

अध्याय 7

श्लोक 67.1

आत्मा।१ ब्रह्म।आत्मा।पुरःपरोष्णिग्बृहती।पुन॒र्मैत्वि॑न्द्रि॒यं पुन॑रा॒त्मा द्रवि॑णं॒ ब्राह्म॑णं च ।पुन॑र॒ग्नयो॒ धिष्ण्या॑ यथास्था॒म क॑ल्पयन्तामि॒हैव

ātmā| 1 brahma| ātmā| puraḥparoṣṇigbṛhatī| punarmaitvindriyaṃ punarātmā draviṇaṃ brāhmaṇaṃ ca | punaragnayo dhiṣṇyā yathāsthāma kalpayantāmihaiva

हिन्दी अर्थ

बकरियां ग्रौर भेड़ं (उपहूताः) लाई गई ह, (ग्रथ) तथा (अन्तस्य कौलालः) अन्न श्रौर अन्नो के विविध रस (नः गृहेषु) हमारे गृहों मेँ (उप- हताः) लाएगषुर्है। न गृहपति गृहवासियों को कहता है कि तुमह किसी भी' प्रकारं ' से भयं-' भीतन होना चाद्धिये । देखो, दूध के लिये गौर्, कृषि के लिये बेल, दूध के (गृहाः) है गृहवसियों ! (सूनृतावन्तः) परस्पर प्रिय तया सत्य वाणी गृह से बाहिर जाना चाहता है । इस प्रवास से होने वाले, गृहवाधियों के भय का परिहार गृहपति करता ह । इरा अश्ननाम (निषं० २।७) करो, भर्थात् मेरे साय प्रवास मे गमनन करो, (विश्वा रूपाणि) सव रूपा-

English

A prayer for prosperity May the wind kindly breathe on us, may the Sun warm us. pleasantly. May days pass happily for us, may night draw near delightfully, may dawn break joyfully for

अध्याय 7

श्लोक 68.1

सरस्वती।१-३ शन्तातिः।सरस्वती।१ अनुष्टुप्, २ त्रिष्टुप्, ३ गायत्री।सर॑स्वति व्र॒तेषु॑ ते दि॒व्येषु॑ देवि॒ धाम॑सु ।जु॒षस्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि ररास्व नः

sarasvatī| 1-3 śantātiḥ| sarasvatī| 1 anuṣṭup, 2 triṣṭup, 3 gāyatrī| sarasvati vrateṣu te divyeṣu devi dhāmasu | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi rarāsva naḥ

हिन्दी अर्थ

कृतियो वालों का (पष्य) परिपोषण करते. रहो । (एष्यामि) मै लौट का० ७॥ श्ननु९.द । प्रु०-६३ भथववेर-भष्य २७ पोषण मेरे प्रीछठे करते रहना । भद्रेण मदि कट्धाणे यख च (्वादिः) । (यत् तपः) जो तप उपतप्यामहे ) तेरे समीप.रहुकर हम करते है उस दास सूक्त ६३ का विनियोग उपनयन कमं में हृश्रा है । योगदशेन (२।३२)

English

May, in accord with Death, Destruction ruin his offering before it gain fulfilment. For him may sorcerers, Destruction, demons strike and prevent fulfilment through their falsehood.

अध्याय 7

श्लोक 68.1-2

शि॒वा नः॒ शंत॑मा भव सुमृडी॒का स॑रस्वति ।मा ते॑ युयोम सं॒दृशः॑

śivā naḥ śaṃtamā bhava sumṛḍīkā sarasvati | mā te yuyoma saṃdṛśaḥ

हिन्दी अर्थ

वपः का फल कहा है “कायसिद्धिः' अणिमा प्रादि तथा ““इद्दियपिद्धिः'' अर्थात् “तप उतना ही करना चाहिए जिस सै शारीरिक धातुजं मे वेषम्य त्सापिपासे आदि (योग राद) । . . तप करते है, (उप) तेरे समीप गह कर "(तपः तप्यामहे) तप करते

English

May, in accord with Death, Destruction ruin his offering before it gain fulfilment. For him may sorcerers, Destruction, demons strike and prevent fulfilment through their falsehood.

अध्याय 7

श्लोक 68.2

इ॒दं ते॑ ह॒व्यं घृ॒तव॑त् सरस्वती॒दं पि॑तॄ॒णां ह॒विरा॒स्यं॑१ यत्।इ॒मानि॑ त उदि॒ता शंत॑मानि॒ तेभि॑र्व॒यं मधु॑मन्तः स्याम

idaṃ te havyaṃ ghṛtavat sarasvatīdaṃ pitṝṇāṃ havirāsyaṃ1 yat| imāni ta uditā śaṃtamāni tebhirvayaṃ madhumantaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

द अथर्ववेद-माष्य का० ७। मनु ६। सू० ६५ कर हितकारी है, (रथी इव) रथयोद्धा के सदुश ( पत्तीन् ) पदाति-सैनिकों (अधस्पदम्) हमारे पादो तले (कृणुताम्) करे । पृतनाजितं सहमानमग्निमुक्येहैवामहे परमाव सधस्थात् । (पृतनाजितम्) सेनाविजयी, (सहमानम्) पराभवकारी अथवा सहन-

English

Let Gods, by Indra sent, destroy his butter, and let his sacrifice be ineffective. Let the two Sovrans, swift to come, like falcons swooping on their prey, Destroy the butter of the foe whoever plots to injure us.

अध्याय 7

श्लोक 69.1

सुखम्।१ शन्तातिः।सुखम्।पथ्यापङ्क्तिः।शं नो॒ वातो॑ वातु॒ शं न॑स्तपतु॒ सूर्यः॑ ।अहा॑नि॒ शं भ॑वन्तु नः॒ शं रात्री॒ प्रति॑ धीयतां॒ शमु॒षा नो॒ व्युऽच्छतु

sukham| 1 śantātiḥ| sukham| pathyāpaṅktiḥ| śaṃ no vāto vātu śaṃ nastapatu sūryaḥ | ahāni śaṃ bhavantu naḥ śaṃ rātrī prati dhīyatāṃ śamuṣā no vyu'cchatu

हिन्दी अर्थ

स्तुतिवचनं हारा (हवामहे) हम बुला लाते हैँ । (सः) वह (नः) हमे (विश्वा ' मः” (अष्टा० ८।२।५३) दसा क्त के (त को “म । “तत् करोति” का० ७1 अनु० ६।. सु०,६६ भ्रथर्ववेद-भाष्य ८६ (शकुनिः) शक्तिशाली (कृष्णः) काले तमोगुण ने (निष्पतन्) मन के गहरे स्तर से निकल कर, मानो उड़ कर (भ्रमि) मेरी ओर अते हुए,

English

I seize thine arms and draw them back, I bind a bandage on thy mouth. I with the anger of the God Agni have killed thy sacrifice. Behind thy back I tie thine arms, I bind a bandage on thy mouth:

अध्याय 7

श्लोक 70.1

शत्रुदमनम्।१-५ अथर्वा।श्येनः, देवाः।१ त्रिष्टुप्, २ अतिजगतीगर्भा जगती, ३-५ अनुष्टुप् (३ पुरःककुम्मती)।यत् किं चा॒सौ मन॑सा॒ यच्च॑ वा॒चा य॒ज्ञैर्जु॒होति॑ ह॒विषा॒ यजु॑षा ।तन्मृ॒त्युना॒ निरृ॑तिः संविदा॒ना पु॒रा स॒त्यादाहु॑तिं हन्त्वस्य

śatrudamanam| 1-5 atharvā| śyenaḥ, devāḥ| 1 triṣṭup, 2 atijagatīgarbhā jagatī, 3-5 anuṣṭup (3 puraḥkakummatī)| yat kiṃ cāsau manasā yacca vācā yajñairjuhoti haviṣā yajuṣā | tanmṛtyunā nirṛtiḥ saṃvidānā purā satyādāhutiṃ hantvasya

हिन्दी अर्थ

स्मात्) उस सब (दुरितात्) दृष्परिणामी (अंहसः) षाप से, (मापः) सवै- व्यापक परमेश्वर (मा) मुभ (पान्तु) सुरक्षित करे । अंहसः == अंहः” का अथं पाप होता है 1 काला पक्षी कौ, व्यक्ति को घायल तो कर सकता है, पाप में प्रवृत्त नहीं कर सकता । अतः “कृष्णः शकुनिः' का अभिप्राय “शक्तिशाली तमोगुण "प्रतीत होता है । तमोगुण को मतः तमोगुण शक्तिशाली है । मन सत्वगुणी मी होता है, रजोगुणी भी, जो (कृष्णः शकुनिः) शक्तिशाली काला तमोगुण (अवामृक्षत् ) मेरे निचले ६० प्रयरववेद-भाष्य का० ७। भ्रनु० ६। सू० ६७

English

With the terrific Agni’s wrath have I destroyed thy sacrifice. In praise of Agni We set thee round us as a fort, victorious Agni! thee a sage,

अध्याय 7

श्लोक 70.2

या॒तु॒धाना॒ निरृ॑ति॒रादु॒ रक्ष॒स्ते अ॑स्य घ्न॒न्त्वनृ॑तेन स॒त्यम्।इन्द्रे॑षिता दे॒वा आज्य॑मस्य मथ्नन्तु॒ मा तत् सं पा॑दि॒ यद॒सौ जु॒होति॑

yātudhānā nirṛtirādu rakṣaste asya ghnantvanṛtena satyam| indreṣitā devā ājyamasya mathnantu mā tat saṃ pādi yadasau juhoti

हिन्दी अर्थ

पत्ति नेहे तमोगुण ! तुभे प्रेरित किया है । अव = नीचे के अङ्ख = मूत्रा तथा जद्खा-पाद प्रादि ! पापकमं के लिये पापुस्थान पर चलकर जाना होतः है । अग्नि परमेष्वर (यजु ३२1१) । आपः द्वारा पाप मल धोया जाता लकार) + मृश आमशेने (छना) + क्सः (प्रष्टा ० ३।१।४५) । (अपामा ) है दोषशोधक ओषध ! (हि) यतः (त्वम्) तु (प्रतीचीन- फलः) प्रतीचीनफल हूरई (रुरोहिथ) प्रादुर्भूत हई है, (मत् अधि) मुस ।

English

Bold in thy colour day by day, destroyer of the treacherous foe. An invitation to Indra Rise up and look upon the share of Indra fixt by ritual use.

अध्याय 7

श्लोक 70.3

अ॒जि॒रा॒धि॒रा॒जौ श्ये॒नौ सं॑पा॒तिना॑विव ।आज्यं॑ पृतन्य॒तो ह॑तां॒ यो नः॒ कश्चा॑भ्यघा॒यति॑

ajirādhirājau śyenau saṃpātināviva | ājyaṃ pṛtanyato hatāṃ yo naḥ kaścābhyaghāyati

हिन्दी अर्थ

(सर्वान् शपथान्) सब शपथो को (इतः) इस फल द्वारा (वरीय यावय) मनोविकार है । सम्भवतः अपामा इस मनोविकार काशोधन कर देता हो । अपामागं अप+ मृजष् शुद्धौ (श्रदादिः) दोष कौ अपगत करके माजेन करने वाली, शुद्ध करने वली 1 अपामागे = 4कौधणलः 280८ । यह जौषध होम्योषेथिक ८0716 के समान गुणौ वाली है जिसका प्रयोग का० ७1 अनु० ६। सु० ६८ अथ्वेवेद-माष्य ९१ मलिन पाप, (यत् वा) याजो (पापया) पापिनस्तीके संग (चेरिम) हम विचरे है, (विश्वतोमुखः) है सव भ्रोर मुखवासी (जपामागं) श्रपामामे मौषध ! (त्वया) तुभ वारा (तत्) उस सब दोष को (अपमृज्महे) हम

English

Whether ye poured libation dressed or took delight in it un- cooked. Libation is prepared. Come to us, Indra: the Sun hath travelled over half his journey. Friends with their treasures sit around thee, waiting like heads of houses for their wandering

अध्याय 7

श्लोक 70.4

अपा॑ञ्चौ त उ॒भौ बा॒हू अपि॑ नह्याम्या॒स्यऽम्।अ॒ग्नेर्दे॒वस्य॑ म॒न्युना॒ तेन॑ तेऽवधिषं ह॒विः

apāñcau ta ubhau bāhū api nahyāmyāsya'm| agnerdevasya manyunā tena te'vadhiṣaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

गलिताङ्ग वाले पुरूष के (सह्) साथ (यत्) जौ (आसिम या आशिम) हम उठट-बेठे या खाए-पिए है, (अपाम गं) है शोधन करने वाली श्रपामगं ग्रौषध मृज्महे) पृथक् कर शुद्ध कर देतेरहै। श्यावदता = श्याव ओर कृष्ण वणं मे भेद है 1“ श्याव नकु कालिमा का अभिप्राय है विभक्त हो जना, टटकर श्रलगहौ जाना, अङ्क काकट

English

chieftain. Dressed in the udder and on fire, I fancy; well dressed, I fancy, is this new oblation. Quaff thickened milk of noon’s libation, Indra, well pleased, O

अध्याय 7

श्लोक 70.5

अपि॑ नह्यामि ते बा॒हू अपि॑ नह्याम्या॒स्यऽम्।अ॒ग्नेर्घो॒रस्य॑ म॒न्युना॒ तेन॑ तेऽवधिषं ह॒विः

api nahyāmi te bāhū api nahyāmyāsya'm| agnerghorasya manyunā tena te'vadhiṣaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

का होता है (आप्टे) । विगलत्कुष्ठ मे अंगुलियों तथा परो के अद्ध गलकर ट्ट जाते हँ । कुष्ठ रोग संक्रामक (0112860) भी होता है । अतः कुष्ठरोगी के साथ बैठना याखाना हानिकारक है। आशिम (सायण) । दांतों मे वणंविकृति तथा नखों की विकृति--यह भी एक प्रकार का कुष्ठ (यदि अन्तरिक्षे) यदि अन्तरिक्ष मे, (यदि वाते) यदि चलतीःवायुमें २ प्रथवेवेद-भाष्य . कौ० ७.1 अनु° ६1 सु० ६६ (यदि वृक्षेषु) यदि वृक्षों के समीप, (यदिवा) अथवा (उलपेषु) पासन तथा वेदपाठ भी कहते हैँ । सन्ध्योपासन एकान्त देणमे होना चाहिए । मनुस्मृति (२।१०४) मे कहा है कि “सावित्रीमप्यधीयीत गत्वा दरस मे कालातिपात नहीं होना चाहिए! उपासक कहीं भी हो उसे नियत

English

Thunderer, famed for many an exploit! An invitation to the Asvins 114

अध्याय 7

श्लोक 71.1

अग्निः।१ अथर्वा।अग्निः।अनुष्टुप्।परि॑ त्वाग्ने॒ पुरं॑ व॒यं विप्रं॑ सहस्य धीमहि ।धृ॒षद् व॑र्णं दि॒वेदि॑वे ह॒न्तारं॑ भङ्गु॒राव॑तः

agniḥ| 1 atharvā| agniḥ| anuṣṭup| pari tvāgne puraṃ vayaṃ vipraṃ sahasya dhīmahi | dhṛṣad varṇaṃ divedive hantāraṃ bhaṅgurāvataḥ

हिन्दी अर्थ

के समीप, चाहे गोशाला के समीप,--जब भी ब्रह्मयज्ञ का काल उपस्थित हो जाय सन्ध्योपासन, ओौर वेदपाठ के लिये बैठ जाना चाहिए । ओर यदि नहुञआहोतो “पुनः विघ्न-बाधासे रहित स्थानम ब्रहायज्ञ कर लेना २।६) । वाक वक्ता के अभिप्राय को प्रकाशित करती दहै व हाय भी इशारा कर अभिप्राय को प्रकाशित करतादहै 1 दाथ स ल

English

Inflamed is Agni, Heroes! charioteer of heaven. The caldron boils: the meath is drained to be your food. For we, O Asvins, singers sprung from many a house, invite you to be present at our

अध्याय 7

श्लोक 72.1

इन्द्रः।१-३ अथर्वा।इन्द्रः।१ अनुष्टुप्, २-३ त्रिष्टुप्।उत् ति॑ष्ठ॒ताव॑ पश्य॒तेन्द्र॑स्य भा॒गमृ॒त्विय॑म्।यदि॑ श्रा॒तं॑ जु॒होत॑न॒ यद्यश्रा॑तं म॒मत्त॑न

indraḥ| 1-3 atharvā| indraḥ| 1 anuṣṭup, 2-3 triṣṭup| ut tiṣṭhatāva paśyatendrasya bhāgamṛtviyam| yadi śrātaṃ juhotana yadyaśrātaṃ mamattana

हिन्दी अर्थ

सन्न व्यविति कौ अभिलाषा प्रकट कोहै । सर॑स्वति व्रतेषु ते दिव्येषु देवि धाम॑सु । जुपस्थ इव्यमाहूतं प्रजां हैवि ररास्व नः ॥१॥ ५ (सरस्वति देवि) है ज्ञान-विज्ञान १) देवि ! (ते) तेरे ( = कर, (देवि) भौर है देवी ! (नः) हम (अजाम् ) विार्थारूपी (ररास्व) प्रदान कर । शा

English

Pure with the Gods is sacrifice with cry of Hail! That is the Asvins’ cup whence Gods are wont to drink. Yea, the Immortal Ones accept it, one and all, and come to kiss that cup with the Gandharva’s

अध्याय 7

श्लोक 72.1-2

श्रा॒तं म॑न्य॒ ऊध॑नि श्रा॒तम॒ग्नौ सुशृ॑तं मन्ये॒ तदृ॒तं नवी॑यः ।माध्य॑न्दिनस्य॒ सव॑नस्य द॒ध्नः पिबे॑न्द्र वज्रिन् पुरु॒कृज्जु॑षा॒णः

śrātaṃ manya ūdhani śrātamagnau suśṛtaṃ manye tadṛtaṃ navīyaḥ | mādhyandinasya savanasya dadhnaḥ pibendra vajrin purukṛjjuṣāṇaḥ

हिन्दी अर्थ

। यहाँ स्थानार्थं का ग्रहण ह, 2 । निद्यालयों ओर महाविद्यालयों के सत्रारम्भमें 4 चाहिए, जिस मं वि्याधियों को विदयप्राप्ति त॒था गुरुसेवा अ 1 व्रत ग्रहण करने चाहिए 1 गुरुवगं इटं व्रत ८ कराए 1 ध करे । विद्यालयों भौर महाविद्यालयों को दिन्यधाम जान कर इन की पवि- तरता को बनाए रखना चाहिय । -रूपा है! सरो विज्ञानं विद्यते- यह् सरस्वती नदीरूपा नहा, अपितु वाग् त

English

Pure with the Gods is sacrifice with cry of Hail! That is the Asvins’ cup whence Gods are wont to drink. Yea, the Immortal Ones accept it, one and all, and come to kiss that cup with the Gandharva’s

अध्याय 7

श्लोक 72.2

श्रा॒तं ह॒विरो ष्वि॑न्द्र॒ प्र या॑हि ज॒गाम॒ सूरो॒ अध्व॑नो॒ वि मध्य॑म्।परि॑ त्वासते नि॒धिभिः॒ सखा॑यः कुल॒पा न व्रा॑जप॒तिं चर॑न्तम्

śrātaṃ haviro ṣvindra pra yāhi jagāma sūro adhvano vi madhyam| pari tvāsate nidhibhiḥ sakhāyaḥ kulapā na vrājapatiṃ carantam

हिन्दी अर्थ

वागरधिपति-परमेश्वरोदेश्यक ह 1 वह् वेदवाक् का अधिपति है ५ (५ । अथेवेद-भाष्य का० ७1 अन ६1 सूक्त, ७२ यृतमिश्ित (ते) तेरे लिये है, भौर (इदम्) यह् (हविः, घृतवत् ) घृतयरिः उन के मुख सम्बन्धी खनेके लियेहै। है सरस्वती! (ते) तेरे लिये (इमानि) ये (शंतमानि) शान्ति-या-सूखभ्रदायी वेदमन््ररूपी वचनं (उदिता =उदितानि) कहे है । (तेभिः) उन वचनोंद्वारा (वयम्) हम सारस्वत-यज्ञ करने वाले (मधुमन्तः) मधु वाले (स्याम) होँ। उच्चारण पूवक हवि की आहुतियां देनी चाहिए । यज्ञ की समाप्ति पर

English

mouth. Milk, molten butter offered when the mornings break,—this is your portion, Asvins! Come ye hitherward.

अध्याय 7

श्लोक 73.1

घर्मः।१-११ अथर्वा।घर्मः, अश्विनौ।त्रिष्टुप्, १, ४, ६ जगती, २ पथ्याबृहती।समि॑द्धो अ॒ग्निर्वृ॑षणा र॒थी दि॒वस्त॒प्तो घ॒र्मो दु॑ह्यते वामि॒षे मधु॑ ।व॒यं हि वां॑ पुरु॒दमा॑सो अश्विना॒ हवा॑महे सध॒मादे॑षु का॒रवः॑

gharmaḥ| 1-11 atharvā| gharmaḥ, aśvinau| triṣṭup, 1, 4, 6 jagatī, 2 pathyābṛhatī| samiddho agnirvṛṣaṇā rathī divastapto gharmo duhyate vāmiṣe madhu | vayaṃ hi vāṃ purudamāso aśvinā havāmahe sadhamādeṣu kāravaḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए । हविः हु दानादनयोः (जुहोत्यादिः) यज्ञाभ्नि के लिये हवि का दान शिवा न॒ः शंत॑मा भव सूश्रदीका सरस्वति (सरस्वति) है ज्ञान-विज्ञानवाली पारमेण्वरी मातः! (नः) हमारे लिये (शिवा) तू सुखरूपा, (शंतमा) अत्यन्त सुखरूपा; तथा (सुमृडीका) से अथवा तेरे सम्यक्-दशेन से (मा) न (युयोम) पथक् हो, वञ्चित हों ।

English

Lords of the brave, balm-lovers, guards of sacrifice, drink ye the warm libation in the light of heaven. Let the warm drink approach you with its Hotar-priest: let the

अध्याय 7

श्लोक 73.2

समि॑द्धो अ॒ग्निर॑श्विना त॒प्तो वां॑ घ॒र्म आ ग॑तम्।दु॒ह्यन्ते॑ नू॒नं वृ॑षणे॒ह धे॒नवो॒ दस्रा॒ मद॑न्ति वे॒धसः॑

samiddho agniraśvinā tapto vāṃ gharma ā gatam| duhyante nūnaṃ vṛṣaṇeha dhenavo dasrā madanti vedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

९६ अंयवेवेद-भाष्य का० ७ भनु° ६। सू० ७३ का० ७॥ अनु० ६ ॥ सू० घं जयववेद-भाष्यं ६७ वचन । देवाः = दिवु करीडाविजिगीषा प्रादि (दिवादिः), अर्थात् विजिगीषु आज्यं पृतन्यतो तां यो नः करचाभ्यघायति ॥३॥ (अनजिराधिराजौ) अभिर अर्थात् शत्रुसेना का क्षेपण करने वाला सेना- पति, ओर अधिराज, (संपातिनौ) युगपत् शिकार पर पतन करने वाने (श्येनो) दो श्येनं कौ (इव) तरह, (पृतन्यतः) संग्राम-चाहने वाले शव के जो (कश्च) कोई भी शवु (नः)हमरे (जभि) भभिमुख होकर (ग्रषायति)

English

Dawn’s going-forth he sends his light abroad. I invocate this milch-cow good for milking, so that the milker, deft of hand, may milk her. May Savitar give goodliest stimulation. The caldron hath been warmed. Let him proclaim it.

अध्याय 7

श्लोक 73.3

स्वाहा॑कृतः॒ शुचि॑र्दे॒वेषु॑ य॒ज्ञो यो अ॒श्विनो॑श्चम॒सो दे॑व॒पानः॑ ।तमु॒ विश्वे॑ अ॒मृता॑सो जुषा॒णा ग॑न्ध॒र्वस्य॒ प्रत्या॒स्ना रि॑हन्ति

svāhākṛtaḥ śucirdeveṣu yajño yo aśvinoścamaso devapānaḥ | tamu viśve amṛtāso juṣāṇā gandharvasya pratyāsnā rihanti

हिन्दी अर्थ

हमारी हिसारूपी पापकम करना चाहता है, उस का भी हनन करे । (प्रजिरः-=मज गतिक्षेपणयोः (्वादिः) जो षीघ्रगतिक हो कर शत्रू- ह दल केक्षेपणमें समथं हो एेसा सेनापति। अधिराजः राज्ञामधिपति युद्ध में हनन करे, ्रजिर गौर भ्रधिराज मिलकर ।

English

She, sovran of all treasures, is come hither yearning in spirit for her calf, and lowing. May this cow yield her milk for both the Asvins, and may she prosper to our great advantage. As dear house-friend, guest welcome in the dwelling, to this our sacrifice come thou who

अध्याय 7

श्लोक 73.4

यदु॒स्रिया॒स्वाहु॑तं घृ॒तं पयो॒ऽयं स वा॑मश्विना भा॒ग आ ग॑तम्।माध्वी॑ धर्तारा विदथस्य सत्पती त॒प्तं घ॒र्मं पि॑बतं रोच॒ने दि॒वः

yadusriyāsvāhutaṃ ghṛtaṃ payo'yaṃ sa vāmaśvinā bhāga ā gatam| mādhvī dhartārā vidathasya satpatī taptaṃ gharmaṃ pibataṃ rocane divaḥ

हिन्दी अर्थ

है । श्रपाञ्चौ =अप (अपगत) +अञ्चु गतौ, गतिरहित । शत्र राजा की बाहुं ओौर मूख को बाघ देने से वह् स्वयं युद्ध करने मे असमथं हो जाता है, भौर युद्धकममे अज्ञादेने सेभी ररित हो जाता हे शत्र राजन् (ते) तेरी (बाहु) बाहुओं को (श्रपि नह्यामि) शै बांधता हूं" (स्यम्) तथा तेरे मुख को (स्रपि) भी (नह्यामि) मँ बांधता (ग्रवधिषम्) मैने वध कर दियाहै। विप्रम्) तुभ मेधावी को (वयम्) हम (पुरम् परि धीमहि) दुगं के सदृश

English

knowest. And, Agni, having scattered all assailants, bring to us the posses- sions of our foemen. Show thyself strong for mighty bliss, O Agni! Most excellent be thine effulgent splendours!

अध्याय 7

श्लोक 73.5

त॒प्तो वां॑ घ॒र्मो न॑क्षतु॒ स्वहो॑ता॒ प्र वा॑मध्व॒र्युश्च॑रतु॒ पय॑स्वान्।मधो॑र्दु॒ग्धस्या॑श्विना त॒नाया॑ वी॒तं पा॒तं पय॑स उ॒स्रिया॑याः

tapto vāṃ gharmo nakṣatu svahotā pra vāmadhvaryuścaratu payasvān| madhordugdhasyāśvinā tanāyā vītaṃ pātaṃ payasa usriyāyāḥ

हिन्दी अर्थ

ज. भयर्ववेद-भाष्य कै ७ । ़मु० ६ । सू० ७५ परिधिरूप करते है, (धृष् वणम्) तुभ धष्रकरूप को, (दिवेदिवे) प्रतिदिन (भङगुरावतः) नियम भद्घ करने वालों के. (हन्तारम्) हुननकर्ता को । हे सेवको ! (उत् तिष्ठत) उणो, तय्यारं होभो, ओर (ऋटिवयम्) देखभाल करो । (यदि श्रातम्) यदि भोजन पक गया है तो (जुहोतन) बलि-

English

Make easy to maintain our household lordship, and overcome the might of those who hate us. Fortunate mayst thou be with goodly pasture, and may we also be exceeding wealthy. Feed on the grass, O Cow, at every season, and, coming hither, drink the limpid water.

अध्याय 7

श्लोक 73.6

उप॑ द्रव॒ पय॑सा गोधुगो॒षमा घ॒र्मे सि॑ञ्च॒ पय॑ उ॒स्रिया॑याः ।वि नाक॑मख्यत् सवि॒ता वरे॑ण्योऽनुप्र॒याण॑मुषसो॒ वि रा॑जति

upa drava payasā godhugoṣamā gharme siñca paya usriyāyāḥ | vi nākamakhyat savitā vareṇyo'nuprayāṇamuṣaso vi rājati

हिन्दी अर्थ

गया है, अर्थात् भोजन का मध्याह्वं काल होने वाला है 1 (सखायः) आम- सन के (परि) चारों ग्रोर (रासते) उपविष्टहै, बठे हुए रहै, (न) जसे कि (चरन्तम्) भोजन करते हुए (त्राजपतिम्) गृहपति के चारों ओर का० ७ । अनु० ६ । सु.७४ श्रथवेवेद-माष्य ६६ ८।३७) । सखा हैँ आमस्त्रित वरुण नामक राजा 'लोग, या नागरिक सदस्य अथवा उभयविधः। चरन्तम् = चर गतिभक्षणयोः (भ्वादिः); यहां (चर मिलने जानाहोतो कुछ भेँट लेकर जाना चाहिए !

English

A charm to cure pustules, sores, or scrofulous swellings (apachitas) Black is the mother, we have heard, from whom the red-hued Pustules sprang.

अध्याय 7

श्लोक 73.7

उप॑ ह्वये सु॒दुघां॑ धे॒नुमे॒तां सु॒हस्तो॑ गो॒धुगु॒त दो॑हदेनाम्।श्रेष्ठं॑ स॒वं स॑वि॒ता सा॑विषन्नो॒ऽभीऽद्धो घ॒र्मस्तदु॒ षु प्र वो॑चत्

upa hvaye sudughāṃ dhenumetāṃ suhasto godhuguta dohadenām| śreṣṭhaṃ savaṃ savitā sāviṣanno'bhī'ddho gharmastadu ṣu pra vocat

हिन्दी अर्थ

म मानता हं (मग्नौ) अग्निम (श्रातम्) पके पदाथ को भी पका हुमा नवतर रहता है । (पुरुकृत्)र नानाविध कर्मा के करने वाले (वचन् इनदर) दोहे गए दूध कषम्बन्धी (दध्नः) दधि महं को (पिब) पीया कर । ज्ञान ! तीसरा पक्व सदा नवीन रहता है" यह कभी पुराना नहीं होता । पेय पदार्थो मे माध्यन्दिनि मे दोहे गए दूध की दधि से मथेगएु महु का पन

English

With the divine ascetic’s root I pierce and penetrate them all. I pierce the foremost one of these, I perforate the middlemost, And here I cut the hindermost asunder like a lock of hair.

अध्याय 7

श्लोक 73.8

हि॒ङ्कृ॒ण्व॒ती व॑सु॒पत्नी॒ वसू॑नां व॒त्समि॒च्छन्ती॒ मन॑सा॒ न्याग॑न्।दु॒हाम॒श्विभ्यां॒ पयो॑ अ॒घ्न्येयं सा व॑र्धतां मह॒ते सौभ॑गाय

hiṅkṛṇvatī vasupatnī vasūnāṃ vatsamicchantī manasā nyāgan| duhāmaśvibhyāṃ payo aghnyeyaṃ sā vardhatāṃ mahate saubhagāya

हिन्दी अर्थ

७६ में माध्यन्दिन मे भोजन कं साथ मुं केपानका भी विधानहुजदहै॥ (कुलपाः) कुलरक्षक पारिवारिक जन उपविष्ट होते हँ 1 बलि-वेश्वदेव-यज्ञ में श्राहूतियां दी जाती ह, अथवा "हविः" = हू दानादनयोः वयं हि वाँ पुरुदमांसो अच्िना हव!महे सधमादेषु कारवः ॥१॥ १. ““सत्यज्ञान” तीनों कालो मे एकरूप रहता है, ग्रतः वहै सदा नवीन है, कमी

English

With spell that Tvashtar sent to us I have dispelled thy jealousy. We mitigate and pacify the anger that thou feltest, Lord! Lord of religious rites, by law, anointed, shine thou forth here for ever friendly-minded.

अध्याय 7

श्लोक 73.9

जुष्टो॒ दमू॑ना॒ अति॑थिर्दुरो॒ण इ॒मं नो॑ य॒ज्ञमुप॑ याहि वि॒द्वान्।विश्वा॑ अग्ने अभि॒युजो॑ वि॒हत्य॑ शत्रूय॒तामा भ॑रा॒ भोज॑नानि

juṣṭo damūnā atithirduroṇa imaṃ no yajñamupa yāhi vidvān| viśvā agne abhiyujo vihatya śatrūyatāmā bharā bhojanāni

हिन्दी अर्थ

१०० म्रथववेद-माष्य दया००७ । अनु० ६ । सु° ७७ (अश्विना) अश्वविभाग कं दो श्रषिकारियो ! (वाम्) तुम दोनों के (इषे) मरन्न के लिये (मधु) मधर (तप्तः घमेः) गमं क्षरित दूष (दुह्यते) दोहा जा रह है । (पुरुदमासः) महगृहों वाले अथवा अन्नों से भरपुर गृहो वाले (हवामहे) आमन्त्रित करते है, ( सधमादेषु) हषेप्रद सहभोजों मे । “दमे गृहनाम (निषं० ३।४) । तप्तः = दोहा गया ताजा दूध गमं होता है ।" विभागों के दो ग्रधिकारी, मश्वारोही-सेना, तथा रथारोही-सेना विभाग के

English

So may we all with children, Jātavedas! worship and humbly wait on thee enkindled. A blessing on cows 115

अध्याय 7

श्लोक 73.10

अग्ने॒ शर्ध॑ मह॒ते सौभ॑गाय॒ तव॑ द्यु॒म्नान्यु॑त्त॒मानि॑ सन्तु ।सं जा॑स्प॒त्यं सु॒यम॒मा कृ॑णुष्व शत्रूय॒ताम॒भि ति॑ष्ठा॒ महां॑सि

agne śardha mahate saubhagāya tava dyumnānyuttamāni santu | saṃ jāspatyaṃ suyamamā kṛṇuṣva śatrūyatāmabhi tiṣṭhā mahāṃsi

हिन्दी अर्थ

अथवा कविता में वेदवाणी का वणन हुआ है । का०७॥ अनु० ६1 सू० ७३ अ्रथवेवेद-माष्य ६१ (वातः) वायु (नः) हमारे लिये (णम्) सुखकर (वातु) बरे, (सूं ) सूयं (नः) हमारे लिये (णम्) सुखकर (तपतु) -्पे (श्रहानि) दिन (नः ) (प्रति धीयताम्) प्रदान करे, (नः) हमारे लिथे (उषाः) उषा, (शम्) सुख

English

Adhvaryu come to you with store of milk. Come, O ye Asvins, taste the meath that hath been drained, drink of the milk provided by this radiant cow.

अध्याय 7

श्लोक 73.11

सू॒य॒व॒साद् भग॑वती॒ हि भू॒या अधा॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम ।अ॒द्धि तृण॑मघ्न्ये विश्व॒दानीं॒ पिब॑ शु॒द्धमु॑द॒कमा॒चर॑न्ती

sūyavasād bhagavatī hi bhūyā adhā vayaṃ bhagavantaḥ syāma | addhi tṛṇamaghnye viśvadānīṃ piba śuddhamudakamācarantī

हिन्दी अर्थ

(असौ) वह पररष्टृरूपी शत्रु (यत् कि च) जो कृ ( मनसा) सेना के साथ संग्राम करने वाले, भिडने वाले सेनां के प्रेरको दासं, (हविः पा) सैनिकरूपी हवि द्वारा, ¦ (यजुषा) तथा यजुवंदौक्त , अन्य साघनो या विधियो द्वारा (जुहोति) 'युद्ध-यज्ञ में ् तियां देता है, (अस्य) इस पर- जाने वाली आहूति को (सत्यात् बुरा) इन के'सदरूप होने से पहिले न मनसा=युद्ध के लिये मानसिक विचार । वाचा =युद्ध के लिये वाचिक घोषणा 1 (यज्ञैः) (यजु० १७४०) में "यज्ञःःसोम ' दवारा यन कों सोम अर्थात् यृद्धाधिकारी कहा है, जोकिसेनाके आगे-परागे चलता हुभा सेना का परेरक होता है, सोमः (प प्रेरणे") 1 “यज्नेः'. मे बहुवचन द्वारा युद्ध मे नाना सैनिकदलो को सूचित किया है, ओरं प्रत्येकः दल के भघिकारी को

English

Come hither, quickly come, thou milker of the kine; into the caldron pour milk of the radiant cow. Most precious Savitar hath looked upon the heaven. After

अध्याय 7

श्लोक 74.1

गण्डमालाचिकित्सा।१-४ अथर्वाङ्गिराः।मन्त्रोक्ताः, ४ जातवेदाः।अनुष्टुप्।अ॒प॒चितां॒ लोहि॑नीनां कृ॒ष्णा मा॒तेति॑ शुश्रुम ।मुने॑र्दे॒वस्य॒ मूले॑न॒ सर्वा॑ विध्यामि॒ ता अ॒हम्

gaṇḍamālācikitsā| 1-4 atharvāṅgirāḥ| mantroktāḥ, 4 jātavedāḥ| anuṣṭup| apacitāṃ lohinīnāṃ kṛṣṇā māteti śuśruma | munerdevasya mūlena sarvā vidhyāmi tā aham

हिन्दी अर्थ

हो गया है, (आ गतम्) श्राओ। (वृषणा) है सुखो या वाणों की वर्षा इस आमन्तित शाला मे (धेनवः) दुधार गौएं (दुह्यन्ते) दोही जाती ह (वेधसः) अन्य शतरुवेधक सेनिक भी (मदन्ति) यहां भ्राकर तुप्त होते है । का० ७1 अनु० ६। सू० ७७ अथवंवेद-भाष्य विशेषण साभिप्राय पठित है “दसु उपक्षये” (दिवादिः) । दस्रौ त उपक्षयितारौ अष्विनौ (सायण) । इस से भी प्रतीत होता है कि सूक्त (७७ राजनी तिविषयक है । वेधसः =व्यध् = ताडने, धना, बाणो द्वारा बेधने स्वाहाकृतः शचिहैवेषुं यन्नो यो भ्ध्िनोंमसो देवपानः ।

English

Let not a thief or wicked man possess you: let not the dart of Rudra come anear you, Prolific, shining in the goodly pasture, drinking at pleasant pools the limpid water.

अध्याय 7

श्लोक 74.2

विध्या॑म्यासां प्रथ॒मां विध्या॑म्यु॒त म॑ध्य॒माम्।इ॒दं ज॑घ॒न्याऽमासा॒मा च्छि॑नद्मि॒ स्तुका॑मिव

vidhyāmyāsāṃ prathamāṃ vidhyāmyuta madhyamām| idaṃ jaghanyā'māsāmā cchinadmi stukāmiva

हिन्दी अर्थ

खाने का साघन है ओर इन (देवपानः) दो देवौंकेपान कं लिये है, वह् (णुचिः) पवि यज्ञ (देवेषु) अन्य विजिगीषु श्रधिकारियों के निमित्त भी (अमृतासः) मरण-रहित विजिगीषु ग्नन्य अधिकारी भी (तम् उ ) उस सत्कार यज्ञ का (जुषाणाः) प्री तिपूरवैक सेवन करते हए, उसमे सम्मिलित (प्रतिरिहन्ति) खान-पान का ग्रास्वादन करते हैं । जैसे सेन्यविभाग के श्रश्वों के दो अधिकारियों का सत्कार खान-पान काभी सत्कार करना चाहिए । इस सत्कार के लिये राजा की मौखिक । स्वीकृति चाहिए । “जमृतासः"' दवारा सेनाधिकारियों का युद्धकौणल दर्शाया

English

Ye know the place and rest content, close-gathered, called by many a name. Come to me, Goddesses, with Gods Bedew with streams of fatness us, this cattle-pen, and all this place.

अध्याय 7

श्लोक 74.3

त्वा॒ष्ट्रेणा॒हं वच॑सा॒ वि त॑ ई॒र्ष्याम॑मीमदम्।अथो॒ यो म॒न्युष्टे॑ पते॒ तमु॑ ते शमयामसि

tvāṣṭreṇāhaṃ vacasā vi ta īrṣyāmamīmadam| atho yo manyuṣṭe pate tamu te śamayāmasi

हिन्दी अर्थ

वाम्) हेदो अस्वियो ! तुम दोनों के लिये है, (आ गतम्) आओ । (माध्वी) है धारण करने वालो ! (सत्पती) ह सच्चे रक्षको ! (दिवः रोचने) दिन के १०२ अथरवेवेद-माष्य का० ७। अनु० ६। सू० ७७ , मधोहैग्धस्याखिना तनायां वीतं पातं पय॑स उसियांयाः ॥५॥ तुम दोनों के सत्कार के लिये (प्र चरतु) विचरे । हँ अर्वियो ! (उस्रियायाः) गौ के, (तन।याः) ओर गोसन्तति के (मधो.)

English

A charm to cure scrofulous pustules and scrofula Rapidly dropping, quick to drop, more evil than the evil ones, More sapless than a dried-up bone, swifter than salt to melt away.

अध्याय 7

श्लोक 74.4

व्र॒तेन॒ त्वं व्र॑तपते॒ सम॑क्तो वि॒श्वाहा॑ सु॒मना॑ दीदिही॒ह।तं त्वा॑ व॒यं जा॑तवेदः॒ समि॑द्धं प्र॒जाव॑न्त॒ उप॑ सदेम॒ सर्वे॑

vratena tvaṃ vratapate samakto viśvāhā sumanā dīdihīha| taṃ tvā vayaṃ jātavedaḥ samiddhaṃ prajāvanta upa sadema sarve

हिन्दी अर्थ

का० ७ । भ्रनु० ६। सु° ७७ अथर्ववेद-भाष्य १०३ (सविता+) सविता ने (नाकम्) नक सहित युलोक को (वि अख्यत्) अनु) प्रयाग के अनन्तर (विराजति) विराजमान होतादहै। विधि उषाकाल में सविता के उदय होने से पूवं हो जानी चाहिए । आन्यः

English

Pustules that rise upon the neck, Pustules upon the shoulder- joints, Pustules that, falling of themselves, spring up on every twofold limb: I have expelled and banished all Scrofula harboured in the head,

अध्याय 7

श्लोक 75.1

अघ्न्याः।१-२ उपरिबभ्रबः।अघ्न्याः।१ त्रिष्टुप्, २ त्र्यवसाना पञ्चपदा भुरिक् पथ्यापङ्क्तिः।प्र॒जाव॑तीः सू॒यव॑से रु॒शन्तीः॑ शु॒द्धा अ॒पः सु॑प्रपा॒णे पिब॑न्तीः ।मा व॑ स्ते॒न ई॑शत॒ माघशं॑सः॒ परि॑ वो रु॒द्रस्य॑ हे॒तिर्वृ॑णक्तु

aghnyāḥ| 1-2 uparibabhrabaḥ| aghnyāḥ| 1 triṣṭup, 2 tryavasānā pañcapadā bhurik pathyāpaṅktiḥ| prajāvatīḥ sūyavase ruśantīḥ śuddhā apaḥ suprapāṇe pibantīḥ | mā va stena īśata māghaśaṃsaḥ pari vo rudrasya hetirvṛṇaktu

हिन्दी अर्थ

कालके प्रयाण के बाद का काल, सविताका काल है । उप॑ हये सुदुर्घौ घेतुमेतां सुहस्तो गोधुगुत दोंहैनाम् ! को (उपह्वये) मँ समीप बुलाता हूं । (सुहस्तः उत) ग्रौर दोहने में कुशल गतिकर्मा; व्याप्तिकर्मां (निघं० २।१४; २६८) । तनायाः= “तना” । का षष्ठ्य कवचन । तना तनयेन (अथवं० ८।४।१०; सायण) अभिप्राय यहु को सीच दिया है(६)। वह् सविताके कालमें परिपक्व हो गथा हैः इसकी सूचना प्राप्त हो गर्ईदहै। सविताके कालमे दी श्ररवी इसका पान करेगे

English

And that which bores the breast-bone through, and that which settles in the sole. Scrofula flies borne on by wings: it penerates and holds the man. Here is the cure of either kind, the chronic and the transient.

अध्याय 7

श्लोक 75.2

प॒द॒ज्ञा स्थ॒ रम॑तयः॒ संहि॑ता वि॒श्वना॑म्नीः ।उप॑ मा देवीर्दे॒वेभि॒रेत॑ ।इ॒मं गो॒ष्ठमि॒दं सदो॑ घृ॒तेना॒स्मान्त्समु॑क्षत

padajñā stha ramatayaḥ saṃhitā viśvanāmnīḥ | upa mā devīrdevebhireta | imaṃ goṣṭhamidaṃ sado ghṛtenāsmāntsamukṣata

हिन्दी अर्थ

मानो सविता ने यहु पेय उन्हं प्रदान कियाहै। . मे दुग्ध, दधि रूप ओर श्रामिक्षारूप जाना जा सकता है । । (गोधुक्) है गो दोहने वाले ! (्रोषम्==आ उषसम्) उषा काल तक १. उषा के प्रयाण के समनन्तर उद्वित सूयं सविता है । (पयसा) दोहे दुग्ध के साथ (उपद्रव) हमारे समीप भ्रा जा, भौर (उसि- ¦

English

We know thine origin, Scrofula! know whence thou, Scrofula, art born. How hast thou then struck this man here, him in whose house we sacrifice? Boldly drink Soma from the beaker, Indra! hero in war for treasure! Vritra-slayer.

अध्याय 7

श्लोक 76.1

गण्डमालाचिकित्सा।१-६ अथर्वा।१,२ अपचिद्भैषज्यं, ३-६ जायान्यः, इन्द्रः।अनुष्टुप्, आ सु॒स्रसः॑ सु॒स्रसो॒ अस॑तीभ्यो॒ अस॑त्तराः ।से हो॑रर॒सत॑रा लव॒णाद् विक्ले॑दीयसीः

gaṇḍamālācikitsā| 1-6 atharvā| 1,2 apacidbhaiṣajyaṃ, 3-6 jāyānyaḥ, indraḥ| anuṣṭup, ā susrasaḥ susraso asatībhyo asattarāḥ | se horarasatarā lavaṇād vikledīyasīḥ

हिन्दी अर्थ

१" स्वहोता == स्वयं प्रदाता; ह दाने (जुहोत्यादिः) ॥ , २. श्रथवा “तना धननाम'' (निघं० २।११), उसिया ब्र्थात् गौ घनरूप है । ३. भषम् -=श्रयवा तप्तम्, उष दाहे, ताजा दूष गमं होता है । "१ (सुदुघाम्) सुगमता से दोदटी जाने वाली (एताम्) इस (धेनुम्) गौ कथववेद-भाष्य का० ७ 1 धनु° ६ । सु० ७७ दुग्ध (दुहाम् ) दोहरूप मे, ग्रदान करे, (सा) वह॒ (महते सौभगाय) हमारे

English

Fill thyself full at the mid-day libation: thyself possessing riches grant us riches. An incantation against an enemy Ye Maruts, full of fiery heat, accept this offering brought for you

अध्याय 7

श्लोक 76.2

या ग्रैव्या॑ अप॒चितोऽथो॒ या उ॑पप॒क्ष्याः ।वि॒जाम्नि॒ या अ॑प॒चितः॑ स्वयं॒स्रसः॑

yā graivyā apacito'tho yā upapakṣyāḥ | vijāmni yā apacitaḥ svayaṃsrasaḥ

हिन्दी अर्थ

महसौ भ्य के लिये (वं्ाम्) समृद्ध हो । ८।२।६४) ह्यरा "गम्" धातु के मकार को नकार (सायण) ।. शम-दम सम्पन्न मन वालां (अतिथिः) अतिथि (दुरोणे) जसे गृहस्थी कं (विश्वाः अभियुजः) सब आक्रमणकारी परकीय सेनाओं का (विहत्य) विशेष हनन करके (शत्रूयताम्) हमारे साथ शतरृता चाहने वालों कं (भोज- नानि) भोजनों को (ग्राभरन्=्म्राहुर) छीनले।

English

To help us, ye who slay the foe. Maruts, the man who filled with rage against us beyond our thoughts would harm us, O ye Vasus,

अध्याय 7

श्लोक 76.3

यः कीक॑साः प्रशृ॒णाति॑ तली॒द्यऽमव॒तिष्ठ॑ति ।निर्हा॒स्तं सर्वं॑ जा॒यान्यं॒ यः कश्च॑ क॒कुदि॑ श्रि॒तः

yaḥ kīkasāḥ praśṛṇāti talīdya'mavatiṣṭhati | nirhāstaṃ sarvaṃ jāyānyaṃ yaḥ kaśca kakudi śritaḥ

हिन्दी अर्थ

का० ७। श्रनुऽ ९1 सू० ७७ अधरवैवेद-भाष्यं १०५ रथात् सुनियन्वित नहीं कर सकती, ओौर न शत्रुओं के तेजं का परामव ही शत्रुओं के तेजो का पराभव कर सकती है । तथा न वैवाहिक अग्निक साथ दयद्र॑ता का ही सम्बन्ध सम्भव है। (दि) निडचय से (मयाः) तु हो, (अधा) तदनन्तर (वयम्) हम (भगवन्तः). विचरती हुई (शुद्धम्) शुद्ध (उदकम्) जल को (पिब) पी । व्यविततहैजो कि शत्रुओं का हनन कर, उनकं भोजनों को छीनकर उन्हँ

English

May he be tangled in the toils of Mischief: smite ye him down with your most flaming weapon. Each year come, friends to man, the tuneful Maruts, dwelling in spacious mansions, trooped

अध्याय 7

श्लोक 76.4

प॒क्षी जा॒यान्यः॑ पतति॒ स आ वि॑शति॒ पूरु॑षम्।तदक्षि॑तस्य भेष॒जमु॒भयोः॒ सुक्ष॑तस्य च

pakṣī jāyānyaḥ patati sa ā viśati pūruṣam| tadakṣitasya bheṣajamubhayoḥ sukṣatasya ca

हिन्दी अर्थ

युजः = “हमारे संमुख जुटी हई" परसेनाणएु । (अग्ने) है अग्रणी । (महते सौभगय) हमारे महासौभाग्य के लिये तेजो को (ग्रभितिष्ठ) पदाक्रान्त कर, अभिभूत कर। ह सप्तम काण्ड करा षष्ठ अनुवाकं समाप्त

English

together. Exhilarating, gladdening full of fiery heat, may they deliver us from binding bonds of sin. A charm for a prince’s prosperity

अध्याय 7

श्लोक 76.5

वि॒द्म वै ते॑ जायान्य॒ जानं॒ यतो॑ जायान्य॒ जाय॑से ।क॒थं ह॒ तत्र॒ त्वं ह॑नो॒ यस्य॑ कृ॒ण्मो ह॒विर्गृ॒हे

vidma vai te jāyānya jānaṃ yato jāyānya jāyase | kathaṃ ha tatra tvaṃ hano yasya kṛṇmo havirgṛhe

हिन्दी अर्थ

१०६ अयववेद-माष्य का० ७॥ अनु० ७1 सू० ७८. (माता) माता (कृष्णा) काली गण्डमाला है, (इति शुश्रुम) यह हम ने सुना है । (ताः सर्वाः) उन सब को (ग्रहम्) मै (विध्यामि) वींधता हू विदारित करता हूं, (मूनेदेवस्य,) “वेणुदाभ्रं ष” संज्ञक वृक्ष कौ (मूलेन) सायणाचायं ने “वेणुदाभुं ष" वृक्ष की जड़ का कथन किया है । “चक्र रक्त की नाडियां अधिक सक्रिय हों, भौर कृष्ण गण्डमालाएं पहिले उभ- को माता कहा है । गण्डमालाओं के वणेन के लिये देखो अथव ० (६।८३),

English

I free thee from the cord, I loose the bond, I loose the fastening. Even here, perpetual, Agni, wax thou strong. I with celestial prayer appoint thee, Agni, maintainer of this man in princely powers.

अध्याय 7

श्लोक 76.6

धृ॒षत् पि॑ब क॒लशे॒ सोम॑मिन्द्र वृत्र॒हा शू॑र सम॒रे वसू॑नाम्।माध्य॑न्दिने॒ सव॑न॒ आ वृ॑षस्व रयि॒ष्ठानो॑ र॒यिम॒स्मासु॑ धेहि

dhṛṣat piba kalaśe somamindra vṛtrahā śūra samare vasūnām| mādhyandine savana ā vṛṣasva rayiṣṭhāno rayimasmāsu dhehi

हिन्दी अर्थ

(विध्यामि) मै बींधता हूं, विदारित करता हूं" (उत) तथा तदनन्तर (मध्य माला को फलने मे बन्ध लगा देता दहै, उसे फले नदीं देता । मू +-निः, कित् (उणा० ४।१२४), दीर्षोकारस्य हस्वोकारः । काऽ ७। श्रनु° ७। सू०७द८ अथववेवेद-भाष्य १०७ गुच्छे को सुगमता से काट दिया जाता है ।

English

Here brightly shine for us with wealth: declare thou to Gods this favoured giver of oblations. A hymn to the New Moon Night of the New-born Moon, whatever fortune the Gods who dwell with greatness have

अध्याय 7

श्लोक 77.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अङ्गिराः।मरुतः।१ त्रिपदा गायत्री, २ त्रिष्टुप्, ३ जगती।सांत॑पना इ॒दं ह॒विर्मरु॑त॒स्तज्जु॑जुष्टन ।अ॒स्माको॒ती रि॑शादसः

śatrunāśanam| 1-3 aṅgirāḥ|marutaḥ| 1 tripadā gāyatrī, 2 triṣṭup, 3 jagatī| sāṃtapanā idaṃ havirmarutastajjujuṣṭana | asmākotī riśādasaḥ

हिन्दी अर्थ

मदरहित मने कर दिया है । (अथो) तथा (यःते मन्युः) जोतेरा कोध है, (तम्, उ ते) उस तेरे क्रोध को (शमयामसि) हम शान्त कर देते ह । तष्टा अर्थात् बढरई, तरखान, लकड़ी से वस्तुगों को घड निकलता है। (सुमनाः) सुप्रसन्नचित्त इभा (इह) इस घरमे (दीदिहि) चमक । भौर १०८ -अधववेर्द-भाष्य -का० ७३ भ्रनु० ७। सू० ७६ धर में प्रसन्नता से चमकता रह 1 ओर हम सब मिलकर, सन्तानों समेत,

English

assigned thee, Therewith fulfil our sacrifice, all-baunteous! Blessed One, grant us wealth with manly offspring.

अध्याय 7

श्लोक 77.2

यो नो॒ मर्तो॑ मरुतो दुर्हृणा॒युस्ति॒रश्चि॒त्तानि॑ वसवो॒ जिघां॑सति ।द्रु॒हः पाशा॒न् प्रति॑ मुञ्चतां॒ सस्तपि॑ष्ठेन॒ तप॑सा हन्तना॒ तम्

yo no marto maruto durhṛṇāyustiraścittāni vasavo jighāṃsati | druhaḥ pāśān prati muñcatāṃ sastapiṣṭhena tapasā hantanā tam

हिन्दी अर्थ

यज्ञिय जातवेदा-अग्नि के समीप बैठा करं । माला” का वणेन है, मौर शेष दो मन््ोमे परतिकी ईर्ष्या भौर मन्युके शमन का श्रौर तदनन्तर उसके “सुमनाः” होने का वणेन हुमा दहै। इस (प्रजावतीः) बड़ -बचछडियों वाली (सूयवसे) उत्तम घास वाले स्थाम

English

I am the New Moon’s Night, the good and pious are my in- habitants, these dwell within me. In me have Gods of both the spheres, and Sādhyas, with Indra as their chief, all met together. 116

अध्याय 7

श्लोक 77.3

संव॒त्स॒रीणा॑ म॒रुतः॑ स्व॒र्का उ॒रुक्ष॑याः॒ सग॑णा॒ मानु॑षासः ।ते अ॒स्मत् पाशा॒न् प्र मु॑ञ्च॒न्त्वेन॑सः सांतप॒ना म॑त्स॒रा मा॑दयि॒ष्णवः॑

saṃvatsarīṇā marutaḥ svarkā urukṣayāḥ sagaṇā mānuṣāsaḥ | te asmat pāśān pra muñcantvenasaḥ sāṃtapanā matsarā mādayiṣṇavaḥ

हिन्दी अर्थ

पिबन्तीः) शुद्ध जल पीती हुई (वः) तुम पर है गौमो (स्तेनः) चोर (मा ईशत) अधीश्वर न हो, (मा प्रशंस) न वधकारी म्रधीडवर हो, (वः) सुद्रकर्मा पुरुष तुम पर प्रहार न करे । पदज्ञा स्थ रमरतयुः संहिता विश्वनौम्नीः। उप पा देषीरहैवेभिरेतं । फ19.७। भ्रनु9 ७। सू०9 ८० अथवंवेद-भाष्प्र -१०६ हमारे गृहो या गोष्ठो मेँ रमण करने वाली, अथवा हमे प्रत्न करने वानी, । वाली (देवीः) है दिन्यगुणवालियो ! (देवेभिः) दिन्यगुणी सन्तानो के

English

The Night hath come, the gatherer of treasures, bestowing strength, prosperity, and riches. To New Moon’s Night let us present oblation: pouring out strength, with milk hath she come hither.

अध्याय 7

श्लोक 78.1

वन्दमोचनम्।१-२ अथर्वा।अग्निः।१ परोष्णिक्, २ त्रिष्टुप्।वि ते॑ मुञ्चामि रश॒नां वि योक्त्रं॒ वि नि॒योज॑नम्।इ॒हैव त्वमज॑स्र एध्यग्ने

vandamocanam| 1-2 atharvā| agniḥ| 1 paroṣṇik, 2 triṣṭup| vi te muñcāmi raśanāṃ vi yoktraṃ vi niyojanam| ihaiva tvamajasra edhyagne

हिन्दी अर्थ

सेहोररसत॑रा ख्व गाद् विक्छदीयसीः ॥१॥ (सुखसः) पीप का अतिस्राव करने वाली गण्डमाला कौ अपेक्षा (भ्रासु वस्तुओं को अपेक्षा भी (असत्तराः) अधिक रसद रूप गण्डमाला हो जाय । रसरदहित अर्थात् निःसार गण्डमाला हौ जांय, (लवणात्) नमक सेभरी

English

Night of New Moon! ne’er hath been born another than thou embracing all these forms and natures, May we have what we longed for when we brought thee obla- tions: may we be the lords of

अध्याय 7

श्लोक 78.2

अ॒स्मै क्ष॒त्राणि॑ धा॒रय॑न्तमग्ने यु॒नज्मि॑ त्वा॒ ब्रह्म॑णा॒ दैव्ये॑न ।दी॒दि॒ह्य॑१स्मभ्यं॒ द्रवि॑णे॒ह भ॒द्रं प्रेमं वो॑चो हवि॒र्दां दे॒वता॑सु

asmai kṣatrāṇi dhārayantamagne yunajmi tvā brahmaṇā daivyena | dīdihya1smabhyaṃ draviṇeha bhadraṃ premaṃ voco havirdāṃ devatāsu

हिन्दी अर्थ

भी स्वयं विलन्न होकर पीपरहित होकर सूख जाय । अथवा “लवणाद् विकले दीयसीः” का यह् अभिप्राय है करि गण्डमाला के फोड़ पर लवण तथा अन्यं योगो के साथ लवणकालेप करने से फोड़.पीपके स्राव द्वारा सूखकर शीघ्र ठीक हो जाते ह (चक्रदत्त गण्डमालाधिकार, श्लोक ५,१४,३५,५८,६०) । ११० प्रथवंवेद-माष्य का० ७1 अनु० ७1 सू ८०. स्वयंच्तसः = किसी प्रातिक ओौषध के विना, केवल मनोबल तथा यः कीकसाः प्रषूणांति व्यय मव तिष्ठंति ।

English

riches. A hymn to the Full Moon Full in the front, full rearward, from the middle the Full Moon’s

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।