Atharva Veda
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

286 श्लोकभाग 5/5 · श्लोक 108.1–118.1

पूर्ण अध्याय पाठ27 श्लोक

अध्याय 7

श्लोक 108.1

शत्रुनाशनम्।१-२ भृगुः।अग्निः।१ बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्, २ त्रिष्टुप्।यो न॑स्ता॒यद् दिप्स॑ति॒ यो न॑ आ॒विः स्वो वि॒द्वानर॑णो वा नो अग्ने ।प्र॒तीच्ये॒त्वर॑णी द॒त्वती॒ तान् मैषा॑मग्ने॒ वास्तु॑ भू॒न्मो अप॑त्यम्

śatrunāśanam| 1-2 bhṛguḥ| agniḥ| 1 bṛhatīgarbhā triṣṭup, 2 triṣṭup| yo nastāyad dipsati yo na āviḥ svo vidvānaraṇo vā no agne | pratīcyetvaraṇī datvatī tān maiṣāmagne vāstu bhūnmo apatyam

हिन्दी अर्थ

रोगजन्य पीड़ाको दुर करता है । समुद्रः अन्तरिक्षन।म (निधं० ६1३) तथा का०७। अनु० १०। सू० ११२ भरथर्वेवेद-माष्य ३. (स्तायत्) छप कर (नः) हमारी (दिप्सति) दम्भपूरवंक हिसा करना चाहता है, (यः) भौर जो (नः) हमारी (आ्राविः) प्रकटरूप मे दम्भपूवंक हिसा करना चाहता है , वह (स्वः नः) हमारा भ्रपनाहो (विद्रान्) जौ कि हमारे भेद को जानता हो, (वा) या अरणः) प्राति हो, पराया हो, काष्ठनिमित सांपाकृतिक-सांपनी भ्रस्वरविशेषदहै, जो शत्रु कोकाट कर, उनमें विष कासंचारकर देताहै। एसे अन्य भरस्त्रोंके लिये देखो (अथर्वं० ०।८ १-२०) । अरणः =अ-+-रण (शब्दे), जिसके साथ हमारा शाल्दिक व्यवहार नहीं ।

English

Bear butter to the Apsarases, O Agni, and to the Dice bear dust and sand and water. The Gods delight in both oblations, joying in sacrificial gifts apportioned duly. The Apsarases take pleasure in the banquet between the Sun and. the libation-holder.

अध्याय 7

श्लोक 108.2

यो नः॑ सु॒प्ता॑न् जाग्र॑तो वाभि॒दासा॒त् तिष्ठ॑तो वा॒ चर॑तो जातवेदः ।वै॒श्वा॒न॒रेण॑ स॒युजा॑ स॒जोषा॒स्तान् प्र॒तीचो॒ निर्द॑ह जातवेदः

yo naḥ suptān jāgrato vābhidāsāt tiṣṭhato vā carato jātavedaḥ | vaiśvānareṇa sayujā sajoṣāstān pratīco nirdaha jātavedaḥ

हिन्दी अर्थ

(वा) या (चरतः) चलते हुप्रों को (मभिदासाद्. उपक्षीण करे, विनष्ट १. पदवाठ मे तायत्” पाठ ह । प्रथवं० (४।१६।१) में भी ““तायत् पाठ है; तथा “तायव: (अथवे० १३।२।१७; २०।४७।१४ में भी सकार रहित पाठ है) प्रपि तु रज्जुनिमित होती है, भ्रौर इसका मुखभाग दन्तवाले सांप के सदृश होता १५४ प्रथवेवेद-भाष्य का० ७। भ्रनु° १०। सू० १.१३ करे, (तान्) उन (प्रतीचः) वापिस लौटते हओं को (जातवेदः) है प्रज्ञानी

English

With butter let them fill my hands, and give me, to be my prey, the man who plays against me.

अध्याय 7

श्लोक 109.1

राष्ट्रभृतः।१-७ बादरायणिः।अग्निः।अनुष्टुप्, १ विराट् पुरस्ताद् बृहती, २,३,५-७ त्रिष्टुप्।इ॒दमु॒ग्राय॑ ब॒भ्रवे॒ नमो॒ यो अ॒क्षेषु॑ तनूव॒शी।घृ॒तेन॒ कलिं॑ शिक्षामि॒ स नो॑ मृडाती॒दृशे॑

rāṣṭrabhṛtaḥ| 1-7 bādarāyaṇiḥ| agniḥ| anuṣṭup, 1 virāṭ purastād bṛhatī, 2,3,5-7 triṣṭup| idamugrāya babhrave namo yo akṣeṣu tanūvaśī| ghṛtena kaliṃ śikṣāmi sa no mṛḍātīdṛśe

हिन्दी अर्थ

(सजोषाः) के साथ प्रीति रखने वाला तू (निदह्) निःशेषेण दग्ध कर । इदमुग्रायं ब्रव नमो थो इष्ेषं तनुवही । (उग्राय) न्याय करने म कठोर, (बभ्रवे) भरण-पोषण करने वाले पर- सत्सु ) इच्वियोंके होते हए (तनूवशी) शरीरोंको वशमें करनेकी शक्ति प्रदान) करता है। (कलिम्) कलिकाल मे, कलियुग मे (घृतेन)

English

Evil be mine opponent’s luck! Sprinkle thou butter over us. Strike, as a tree with lightning flash, mine adversary in the game. The God who found for us this wealth for gambling, to cast the dice and count the winning

अध्याय 7

श्लोक 109.2

घृ॒तम॑प्स॒राभ्यो॑ वह॒ त्वम॑ग्ने पां॒सून॒क्षेभ्यः॒ सिक॑ता अ॒पश्च॑ ।य॒था॒भ॒गं ह॒व्यदा॑तिं जुषा॒णा मद॑न्ति दे॒वा उ॒भया॑नि ह॒व्या

ghṛtamapsarābhyo vaha tvamagne pāṃsūnakṣebhyaḥ sikatā apaśca | yathābhagaṃ havyadātiṃ juṣāṇā madanti devā ubhayāni havyā

हिन्दी अर्थ

हु, (सः) वह् परमेश्वर (ईदृशे) एेसे कमं मे (नः) हमे (मृडाति) सुखी मं इन्द्रियां तो अण्व हँजो कि गरीर-रथको विषयों कीओर नेजातीरहै, तव भी.परमेश्वरार।धना हारा परमेश्वर शदित प्रदान करता है जिससे हेम तनुओं को वण मे करते, इन्हं विषयों में नहीं जाने देते । शिक्षामि = कलिकाल में शिक्षा की अत्यावश्यकता है, ताकि कलिकाल मे प्रजाजन कलि के प्रभाव से वचे रहँ । कलिकाल में प्रजा स्वा्थप्रधान हो जाती है, का० ७1 अनु० १०। सु° ११३१ अथववेद-भाष्य १५१ यथाभागं हव्यदातिं जुषाणा मदं न्ति देवा उमयानि ह्या ॥२॥

English

number, May he accept the sacrifice we offer, and with Gandharvas revel in the banquet.

अध्याय 7

श्लोक 109.3

अ॒प्स॒रसः॑ सध॒मादं॑ मदन्ति हवि॒र्धान॑मन्त॒रा सूर्यं॑ च ।ता मे॒ हस्तौ॒ सं सृ॑जन्तु घृ॒तेन॑ स॒पत्नं॑ मे कित॒वं र॑न्धयन्तु

apsarasaḥ sadhamādaṃ madanti havirdhānamantarā sūryaṃ ca | tā me hastau saṃ sṛjantu ghṛtena sapatnaṃ me kitavaṃ randhayantu

हिन्दी अर्थ

रिक्ष मे सरण करने वाली प्राकृतिक शक्तियों के लिये (घृतम्) घृताहुतियों हवि का (जुषाणाः) प्रीतिःू्वेकसेः क्रते हुए (उभयानि हव्या - हव्यानि ) कहा है कि अक्षमा दीव्यः" (ऋ० १०।३४।१३)' तु बक्षी दारा चूतक्रीडान है रेता, वजरी तय्यार करना रूपी कर्म सायणाचायै ने यह् भावना प्रकट कीट कि जिसे बिरोभ्री क्रितवोंका पराजय हौ सके उनके मुषौ मे

English

Fellow-inhabitants, such is your title, for Dice with looks of power support dominion. As such with offerings may we serve you, Indus! May we have riches in our own possession. As I invoke the Gods at need, as I have lived in chastity,

अध्याय 7

श्लोक 109.4

आ॒दि॒न॒वं प्र॑ति॒दीव्ने॑ घृ॒तेना॒स्माँ अ॒भि क्ष॑र ।वृ॒क्षमि॑वा॒शन्या॑ जहि॒ यो अ॒स्मान् प्र॑ति॒दीव्य॑ति

ādinavaṃ pratidīvne ghṛtenāsmā~ abhi kṣara | vṛkṣamivāśanyā jahi yo asmān pratidīvyati

हिन्दी अर्थ

के लिये देने चाहिए ! यथा ब्रीहि-यव, तथा ॥ जदि । (हविर्धानम्) हविियों के निधान भूलोक (च) ओर (सूर्यम्) सू्यंकं (मन्त्र २) अग्रणी कं (हस्ती) दोनों हाथों को (घुतेन) घृत आदि दारा । है । का (सपतनम्) शतु है उते (रन्धन्तु) हसित करे या मेरे वश मे करं। १५६ अथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० १० । सु ११२.

English

May these, when I have grasped the Dice, the brown, be kind to one like me. A prayer for success in battle

अध्याय 7

श्लोक 109.5

यो नो॑ द्यु॒वे धन॑मि॒दं च॒कार॒ यो अ॒क्षाणां॒ ग्लह॑नं॒ शेष॑णं च ।स नो॑ दे॒वो ह॒विरि॒दं जु॑षा॒णो ग॑न्ध॒र्वेभिः॑ सध॒मादं॑ मदेम

yo no dyuve dhanamidaṃ cakāra yo akṣāṇāṃ glahanaṃ śeṣaṇaṃ ca | sa no devo haviridaṃ juṣāṇo gandharvebhiḥ sadhamādaṃ madema

हिन्दी अर्थ

मानो राष्टरको भर देतीं हैँ । इससे कितवो को म अपने वशम कर लेता, यह वशीकरण उनके कितवपन की हिसा भी कर देता है 1 राष्ट्र में प्रभूत सामग्रीके कारण चूत हारा अन्य धन की प्राप्ति की अभिलाषा नहीं रहती, यूतम तो लाभ ओर हानि दोनों की सम्भावना रहती है । रन्बयन्तु--रघ लोपो व्योवंलि (अष्टा० ६।१।९६) इति वकरारलोपः। अमादेशो गणश्च यो नो धवे धन॑मिदं चकार यो अक्षाणां ग्टैनं शेषंणं च । सनोँदेवो हृषिरिदं ज॑षाणो ग॑न्र्वोभिः सधमादं मदेम ॥५।

English

Resistless, Agni, Indra, smite his foemen for the worshipper, For best foe-slayers are ye both. Agni I call, and Indra, foe-destroyers, swift moving, heroes,

अध्याय 7

श्लोक 109.6

संव॑सव॒ इति॑ वो नाम॒धेय॑मुग्रंप॒श्या रा॑ष्ट्रभृतो॒ ह्य॑१क्षाः ।तेभ्यो॑ व इन्दवो ह॒विषा॑ विधेम व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो॒ रयी॒णाम्

saṃvasava iti vo nāmadheyamugraṃpaśyā rāṣṭrabhṛto hya1kṣāḥ | tebhyo va indavo haviṣā vidhema vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

लिये (इदम्) इस (घलम्) मूद्रा-धन को (चकार) निश्चित या निमित किया, (यः) तथा जिसने (अक्षाणाम्) यूतकमं के पाशो का, याउन द्वारा दयूतकमं करने वालों को (ग्लहनम्) पकड़ा (च) भौर (शेषणम्) उनका विनाश चकार किया, (सः) वह् (नः देव.) हमारा देव भ्रमति अग्रणी ¶° ७ श्रनु० १०। सू० ११३ अथवेवेद-माष्य १५७ प्रोर हम प्रजाएं (गन्धरवेभिः) पृथिवी के घारण करने वाले भूषतियों के साय मिलकर (सधमादम्, मदेम) पारस्परिक आनन्द मे आनन्दित हों । युवे = दिव् घातु, व्यवहाराथंक का चतुरण्येकवचन मँ रूप । दिवु “डा वि जिगीषाव्यवहार'' आदि (दिवादिः); दिव्, वकार को ऊट् च्छवोः शूडनुनासिके च; श्रष्टा० ६।४।१६ यण् (सायण ) +उवडः + भतुध्यकेवचन “ङ ” । अक्षाणां ग्लहनम् = चूत ने वालेके पाशोंकोले फा भरण-पोषण करते है, (वः) है अध्यक्षो ! तुम्हारा (नामधेयम्) नामहै सम्पत्तियं के (पतयः) स्वामी (स्याम) हों ।

English

Gods who wield the thunder, Through whom they won the light in the beginning, these who have made all worlds their

अध्याय 7

श्लोक 109.7

दे॒वान् यन्ना॑थि॒तो हु॒वे ब्र॑ह्म॒चर्यं॒ यदू॑षि॒म।अ॒क्षान् यद् ब॒भ्रूना॒लभे॒ ते नो॑ मृडन्त्वी॒दृशे॑

devān yannāthito huve brahmacaryaṃ yadūṣima| akṣān yad babhrūnālabhe te no mṛḍantvīdṛśe

हिन्दी अर्थ

£ । एसे अध्यक्षो का सत्कार करना चाहिए । १. भ्रथवा तुम॒ मिलकर राष्टरके वसुखूप हो, रत्नरूप हौ । संवसवः = संभूय १५८ अथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० १० सूक्त ११४ (नाधितः) उपतप्त-संतप्त. हुम (यत्) जो । देवान् हुवे) मै देवों का;

English

habitation. The God Brihaspati hath won thy friendly favour with the cup. With hymns, O Indra, enter us for the juice-pouring worshipper.

अध्याय 7

श्लोक 110.1

शत्रुनाशनम्।१-३ भृगुः।इन्द्राग्नी।१ गायत्री, २ त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्।अग्न॒ इन्द्र॑श्च दा॒शुषे॑ ह॒तो वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति।उ॒भा हि वृ॑त्र॒हन्त॑मा

śatrunāśanam| 1-3 bhṛguḥ| indrāgnī| 1 gāyatrī, 2 triṣṭup, 3 anuṣṭup| agna indraśca dāśuṣe hato vṛtrāṇyaprati| ubhā hi vṛtrahantamā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार के कमे-कलापमे, (ते) वे सब, (नः) हमे ( मृडन्तु) सुखी करे । , नहीं हो सकत। । प्रतः यह् समग्र सूक्त चूतवामं का विधायक नही, अपितु मार्गो पर चलना, प्रतिक्ल नहीं । कर देने वाले प्रजाजन के लिये, (अप्रति) किसी प्रतिपक्ष कै विना, (वृत्राणि) राष्ट का आवरण करने वालों, घेरा डालने वालों का (हतः) हनन करते हौ । (उभात=उभौ) दोनों (हि) ही (वृ्हन्तम। -वृव्रहुन्तमौ ) । मिलकर वृत्रं का अतिशय हनन करते है । (याभ्याम्) जिन दो की सहायता द्वारा (एव) ही प्रजाजनों ने

English

A prayer for offspring Belly of Indra art thou, Soma-holder! the very soul of Gods and human beings.

अध्याय 7

श्लोक 110.2

याभ्या॒मज॑य॒न्त्स्व॑१रग्र॑ ए॒व यावा॑त॒स्थतु॒र्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।प्रच॑र्षणी॒ वृष॑णा॒ वज्र॑बाहू अ॒ग्निमिन्द्रं॑ वृत्र॒हणा॑ हुवे॒ऽहम्

yābhyāmajayantsva1ragra eva yāvātasthaturbhuvanāni viśvā | pracarṣaṇī vṛṣaṇā vajrabāhū agnimindraṃ vṛtrahaṇā huve'ham

हिन्दी अर्थ

(वृषणा) सुखो की वर्षा करते है (वबाहू) हाथां मे वचर अर्थात् आयुघ उपं त्वा दवो अंग्रभीच्चमसेन बृहस्पतिः । कियाहै,स्तारकियादहै,तू ( सृन्वते) सोमयाग आदि करने वाले (यज- भानाय) यज्ञणील प्रजाजन की रक्षा के लिये, (नः) हमारी (गीभिः ) स्तुति- वाणियों द्वारा स्तूयमान हुश्रा, (आविश) सहासन में प्रवेश कर। वृहस्पति है साम्राज्य की ब्रड़ी सेना काअधिपति। इसका सेना साथ

English

Here be the sire of offspring, thine here present! Here be they glad in thee who now are elsewhere. A prayer for protection and freedom from sin

अध्याय 7

श्लोक 110.3

उप॑ त्वा दे॒वो अ॑ग्रमीच्चम॒सेन॒ बृह॒स्पतिः॑ ।इन्द्र॑ गी॒र्भिर्न॒ आ वि॑श॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते

upa tvā devo agramīccamasena bṛhaspatiḥ | indra gīrbhirna ā viśa yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

१६० श्रथवेवेद-भाष्य का० ७। भ्रनु° १० । सु° ११६ है, (सोमधानः) चन्द्रमा का तु निधान है) ( देवानाम्) देवकोटि के (उत) । (जनय) पेदा कर, भ्र्थात् (आसु) इन स्ति्थो में (याः) जो कि (ते) तेरो, है, तेरी उपासिका है, (ते) तेरी प्रजाए' (याः) जो (अन्यत्र) अन्य लोका- दारा परमेश्वर को सूये का आश्रय माना, जहां से कि सूर्यं उदित होता आपः सप्त सुसुबुदीस्ता नो सुञ्चन्तवहंसः ॥१॥

English

Radiant with light are Heaven and Earth, whose grace is nigh, whose sway is vast. Seven Goddesses have flowed to us: may they deliver us from woe;

अध्याय 7

श्लोक 111.1

आत्मा।१ ब्रह्मा।वृषभः।पराबृहती त्रिष्टुप्।इन्द्र॑स्य कु॒क्षिर॑सि सोम॒धान॑ आ॒त्मा दे॒वाना॑मु॒त मानु॑षाणाम्।इ॒ह प्र॒जा ज॑नय॒ यास्त॑ आ॒सु या अ॒न्यत्रे॒ह तास्ते॑ रमन्ताम्

ātmā| 1 brahmā| vṛṣabhaḥ| parābṛhatī triṣṭup| indrasya kukṣirasi somadhāna ātmā devānāmuta mānuṣāṇām| iha prajā janaya yāsta āsu yā anyatreha tāste ramantām

हिन्दी अर्थ

(चावापुथिवी) चुलोक ओर पुथिवी (शुम्भनी) शोभा युक्त है, (श्रन्ति वे सृखदायी होते है, (महिव्रते) वे महाव्रती हैँ । (सप्त) तथा ७ प्राण, (दवीः आपः) दिव्य जलों की तरह्, (सुसुवुः) खवित हृए हँ । (ताः) उन जलो के सदृश ७ स्राव (नः) हमे (अंहसः) पाप से ( मुञ्चन्तु) मुक्त कर । में उषाके प्रकाश में द्यौ ओर पृथिवी शोभायमान होतेह । ये दोनों पने अपने महाव्रतं मेँ सदा रहते ह, त्रतमंग नहीं करते । ७ प्राण रै प्राण, अपान, व्यान, समान, उदान, तथा पायु का नियमपूर्वंक सखराव, मौर उपस्थ । का० ७। प्रनु० १० । सु० ११७ अथर्ववेद-भाष्य । १६१

English

Release me from the curse’s bond and plague that comes from Varuna; 122

अध्याय 7

श्लोक 112.1

पापनाशनम्।१-२ वरुणः।आपः, वरुणश्च।अनुष्टुप्, १ भुरिक्।शुम्भ॑नी॒ द्यावा॑पृथि॒वी अन्ति॑सुम्ने॒ महि॑व्रते ।आपः॑ स॒प्त सु॑स्रुवुर्दे॒वीस्ता नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pāpanāśanam| 1-2 varuṇaḥ| āpaḥ, varuṇaśca| anuṣṭup, 1 bhurik| śumbhanī dyāvāpṛthivī antisumne mahivrate | āpaḥ sapta susruvurdevīstā no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अपः (मन्त्र १), जल (शपथ्यात्) णपय लेने के दोष से, (उत) मन्त्र मे जलचिकित्सा का वणेन है । शपथं सदा भूटी होती है, जो कि मानसिक विकृतिके कारण होतीर्है, जलविकित्सा से यह मानसिक विकृति ठीक हौ जाती है। वरुण है अपामधिपति ! यथा “वरुणोऽपामयि- पतिः” (अथवं० ५।२४।४) । जलोदर रोग जलसम्बन्धी है, श्रतः यह् से रहित हो जाता है । पड्वीशः = “पदि विशतोति"" लिये विषलूष ह) । उणादिकोष मे किल्विष को “किल्विष मान कर “किल् + १६२ वेद-भाष्य का० ७। अनु० १० सू ११७.

English

Free me from Yama’s fetter and from every sin against the Gods.

अध्याय 7

श्लोक 112.2

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्या॒३दथो॑ वरु॒ण्याऽदु॒त।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शा॒द् विश्व॑स्माद् देवकिल्बि॒षात्

muñcantu mā śapathyā3datho varuṇyā'duta| atho yamasya paḍvīśād viśvasmād devakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

( भसः) हौ जा, भौर (अमूम्) उस शेष बची तृष्णा का भी (उत् छिन्धि). । योगमागे की जोर जाना च हृता है वह् अल्प विषयतृष्णा को भी योगमार्गं मे बाधिका मानता है, ओर वीर्यं की र्ना करता । वीये, योग मेँ साधक तृष्टासि ठृष्टिका विषा विंषातक्य सि । तथापि विषरूप। है, (विषातकी ) विषरूपा हर्द जीवन को कष्टमय करने वाली (असि) तुदहै। (यथा) जिस किसी प्रकार सेभी (परिवृक्ता)

English

A woman’s incantation against a rival Rough Plant, thou rough rude parasite, cut thou that man, O Rough and Rude,

अध्याय 7

श्लोक 113.1

शत्रुनाशनम्।१-२ भार्गवः।तृष्टिका।१ विराडनुष्टुप्, २ शंकुमती चतुष्पदा भुरिगुष्णिक्।तृष्टि॑के॒ तृष्ट॑वन्दन॒ उद॒मूं छि॑न्धि तृष्टिके ।यथा॑ कृ॒तद्वि॒ष्टासो॒ऽमुष्मै॑ शे॒प्याव॑ते

śatrunāśanam| 1-2 bhārgavaḥ| tṛṣṭikā| 1 virāḍanuṣṭup, 2 śaṃkumatī catuṣpadā bhuriguṣṇik| tṛṣṭike tṛṣṭavandana udamūṃ chindhi tṛṣṭike | yathā kṛtadviṣṭāso'muṣmai śepyāvate

हिन्दी अर्थ

(वशा) कामना! परित्यक्त कर दी जाती है । ' १. तृष्णा है विषय-भोग की पिपासा । तुष्णा के उर्भूत होने परर संयम दया उसके विषय के उपभोग से विरत रहते हुए, शनैः शनैः, तृष्णा.के वेग का क्षय ५ का० ७ अनु० १० । सू° ११८ श्रथरवेवेद-माष्य १६३ विषातकी = विषरूपा तृष्णा + तकि कृच्छ्रजीवने (भ्वादिः) । वशा ==

English

That thou mayst hinder from his act that man in all his manly strength. Thou, rugged Plant, art rude and rough, Vishā, Vishātaki art thou.

अध्याय 7

श्लोक 113.2

तृ॒ष्टासि॑ तृष्टि॒का वि॒षा वि॑षात॒क्यऽसि ।परि॑वृक्ता॒ यथास॑स्यृष॒भस्य॑ व॒शेव॑

tṛṣṭāsi tṛṣṭikā viṣā viṣātakya'si | parivṛktā yathāsasyṛṣabhasya vaśeva

हिन्दी अर्थ

दीप्तिका (भ्रा ददे) मै अपहरण करता हु, (ते) तेरे (हृदयात्) हृदयसे मुख की (संकाशात्) दीप्ति से तेज का (भ्रा) म श्रपहरण करता ह, (ते) तेरी (सवम् ) सब (वचः) दीप्ति का (आददे) भ पहरण करता ह । शत्रु जब परास्त हो गया तब मानो उसकी छाती का बल, हृदय की प्रावनाएं, तथा मूख का तेज प्रादि सब हर तिये गए । संकाशात् = सम् 1 स्वभाव वाली परकीय सेनागों का (हन्तु) हनन करे, (सोमः) सेनाध्यक्ष (दुरस्यतीः) दुरिच्छा्ओं वाली सेना करा (हन्तु) नाश करे ।

English

That thou mayest be cast off by him, as by a bull a barren cow. A woman’s incantation against a rival I have extracted from thy sides, I have extracted from thy heart,

अध्याय 7

श्लोक 114.1

शत्रुनाशनम्।१-२ भार्गवः।अग्नीषोमौ।अनुष्टुप्।आ ते॑ ददे व॒क्षणा॑भ्य॒ आ ते॒ऽहं हृद॑याद् ददे ।आ ते॒ मुख॑स्य॒ सङ्का॑शा॒त् सर्वं॑ ते॒ वर्च॒ आ द॑दे

śatrunāśanam| 1-2 bhārgavaḥ| agnīṣomau| anuṣṭup| ā te dade vakṣaṇābhya ā te'haṃ hṛdayād dade | ā te mukhasya saṅkāśāt sarvaṃ te varca ā dade

हिन्दी अर्थ

शत्रु के सव प्रकार के तेजो का जब अपहरण हो गया (मन्त्र १), तब अपने राष्ट की व्याधियो, आधियों, निन्दाम्रों भौर अपकीतियों ने जा । जसे किमनुनेकहादहै किन जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति । म १६४ भ्रथवेवेद“भाष्य का० ७। भ्रनु° १०। सु° ११९ (पापि लक्षिम)है पापरूपिणी लक्ष्मी ! (इतः) यहां से (पपत)तु उड़जा ।

English

I have extracted from thy face the strength and splendour that were thine. Let pain and suffering pass away, let cares and curses vanish. hence.

अध्याय 7

श्लोक 114.2

प्रेतो य॑न्तु॒ व्याऽध्यः॒ प्रानु॒ध्याः प्रो अश॑स्तयः ।अ॒ग्नी र॑क्ष॒स्विनी॑र्हन्तु॒ सोमो॑ हन्तु दुरस्य॒तीः

preto yantu vyā'dhyaḥ prānudhyāḥ pro aśastayaḥ | agnī rakṣasvinīrhantu somo hantu durasyatīḥ

हिन्दी अर्थ

(इतः) यहां से (नश्य) अदृष्ट हो जा, (अमुतः) उ दुर देण से भी (प्रपत) । अंकित कर देने वाले लोह निमित शल्य द्वारा उसके शरीर को अंकित करदियाजातारहै, वैसे है पापरूपिणी लक्ष्मी (त्वा) तुभे (सनामसि) ह्म शल्य हारा सम्बद्ध कर दते हैँ । ताकि तेरा विनाश हो जाय। दारा दृष्पथ दारा उपाजित लक्ष्मी पपरूपिणी है । इसका परित्याग करना (या) जो (पत्तयालूः) पतन कराने वाली, ( अचजुष्टा) इस लिये अप्रिया

English

Let Agni slay the fiendish hags, Soma kill bags who trouble us. A charm against Misfortune Hence. Evil Fortune! fly away, vanish from this place and from that.

अध्याय 7

श्लोक 115.1

पापलक्षणनाशनम्।१-४ अथर्वाङ्गिराः।सविता, जातवेदाः।अनुष्टुप्, २-३ त्रिष्टुप्।प्र प॑ते॒तः पा॑पि लक्ष्मि॒ नश्ये॒तः प्रामुतः॑ पत ।अ॒य॒स्मये॑ना॒ङ्केन॑ द्विष॒ते त्वा स॑जामसि

pāpalakṣaṇanāśanam| 1-4 atharvāṅgirāḥ| savitā, jātavedāḥ| anuṣṭup, 2-3 triṣṭup| pra patetaḥ pāpi lakṣmi naśyetaḥ prāmutaḥ pata | ayasmayenāṅkena dviṣate tvā sajāmasi

हिन्दी अर्थ

मं हिरण्य लेकर (नः) हमें (वभुरराणः) धन देने वाला हौ । प्रजुष्टा = भ + चुष्टां ¦ जुष प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) । सवितः जाताहैकिव्यविति जो अपने लिये चाहता है वहु अपने लिये चाहता हृजा यह् उसको प्रबल सामाजिक भावना का का० ७। अनु० १० । सू० ११६ भ्रथवेवेद-भाष्य तासां पापिष्ठा निरितः भ हिण्मः शिवा अस्मभ्य॑ जातवेदो नि

English

We fix thee with an iron hook unto the man who hateth us. Granting us riches, Savitar! golden-banded, send thou away from us to other regions

अध्याय 7

श्लोक 115.2

या मा॑ ल॒क्ष्मीः प॑तया॒लूरजु॑ष्टाभिच॒स्कन्द॒ वन्द॑नेव वृ॒क्षम्।अ॒न्यत्रा॒स्मत् स॑वित॒स्तामि॒तो धा॒ हिर॑ण्यहस्तो॒ वसु॑ नो॒ ररा॑णः

yā mā lakṣmīḥ patayālūrajuṣṭābhicaskanda vandaneva vṛkṣam| anyatrāsmat savitastāmito dhā hiraṇyahasto vasu no rarāṇaḥ

हिन्दी अर्थ

१०१ है, जोकि (तन्वा साकम्) शरीर के साथ (जनुषः प्रधि) जन्मसे (जाताः) पैदा हुई है । (तासाम्) उनम से (प।पिष्ठाः) अत्यन्त पापौ दारा “दा” को “यच्छ” देष । मनुष्य एक वषं लगमे माता के पेटमें वास करता है, ओर “शतायुष'' होने से १०० वषं श्रौर, उसका जीवन वेद कथित है। १०१ वर्षो को दृष्टि से उसकी लक्षिमियां १०१ कही ह । लक्षिमयां एता एना व्याकरं खिले गा विष्ठिताइव । (इव) जैसे कि (खिले?) खलियान में ( विष्ठिताः) विशेषतया स्थित (गाः) गौं को सायंकाल के समय ग्वाला अलग-प्रलग करं देता है । (पण्याः

English

That Fortune who, flying, abominable, hath, as a creeper climbs• a tree, assailed me. One and a hundred Fortunes all together are at his birth born with a mortal’s body. Of these we send away the most unlucky: keep lucky ones for us, O Jātavedas.

अध्याय 7

श्लोक 115.3

एक॑शतं ल॒क्ष्म्यो॒३मर्त्य॑स्य सा॒कं त॒न्वाऽज॒नुषोऽधि॑ जा॒ताः ।तासां॒ पापि॑ष्ठा॒ निरि॒तः प्र हि॑ण्मः शि॒वा अ॒स्मभ्यं॑ जातवेदो॒ नि यच्छ

ekaśataṃ lakṣmyo3martyasya sākaṃ tanvā'januṣo'dhi jātāḥ | tāsāṃ pāpiṣṭhā niritaḥ pra hiṇmaḥ śivā asmabhyaṃ jātavedo ni yaccha

हिन्दी अर्थ

१. खिल =खलिहान, जहां धान्यकोभूरूसे से भ्रलग कियाजाता है। वहां मूसे के विरे रहने से गौर एकत्रित हो जाती है । सायंकाल में ग्वाला उन्ह, षेर कट वापिस लाता है, श्नौर इन की व्याति कर देता है, इदँ श्रलमग-ग्रलग कर देता १६६ अथर्ववेद-माष्य का० ७। अनु० १०॥। सु० १२०¦ पापमागे से उपाजित्त होती हैँ (ताः) उन्हे (अनीनशम्) मैने नष्ट कर दिया, है, उनका उपार्जन परित्यक्त कर दिया है । (रूराय) गर्मी पैदा करने वाले, (च्यवनाय) पसीना बहाने वाले (नोद- नाय) विक्षिप्त करने वाले, (धृष्णवे) पराभव करने वाले ज्वर फे लिये 14 (नमः) मौषध-वजर हो । तथा (शीताय)सर्दी लगकर होने वाले, (पूवेकाम- ' कृत्वने) ज्वर से पूवं कौ गरई कामनाभ्रों को काट देने वालि ज्वरके लिये

English

I have disparted these and those like cows who stray on common land. Here let auspicious Fortunes stay: hence have I banished evil ones.

अध्याय 7

श्लोक 115.4

ए॒ता ए॑ना॒ व्याक॑रं खि॒ले गा विष्ठि॑ता इव ।रम॑न्तां॒ पुण्या॑ ल॒क्ष्मीर्याः पा॒पीस्ता अ॑नीनशम्

etā enā vyākaraṃ khile gā viṣṭhitā iva | ramantāṃ puṇyā lakṣmīryāḥ pāpīstā anīnaśam

हिन्दी अर्थ

ग्रीष्म मीर शीत ज्वर का वर्णन हमा है । (यः) जो (अग्रतः) अनियत काल का ज्वर, (अन्येद्युः) एक दिन के व्यवधान में (उभयद्युः) तथा दो दिनों के व्यवधान मे (अभ्येति ) आता है, जिन का “भकः घर है वे मण्डूक हैँ । "मण्ड का श्रथ है उदकः; यथा करने से, शरीर मे जल की म्रानुपातिक मात्रा बढ जाने पर, मलेरिया का

English

A charm against Fever Homage to him the burning one, shaker, exciter, violent! Homage to him the cold who acts according to his ancient will!

अध्याय 7

श्लोक 116.1

ज्वरनाशनम्।१-२ अथर्वाङ्गिराः।चन्द्रमाः।१ पुरोष्णिक्, २ एकावसाना द्विपदा आर्च्यनुष्टुप्।नमो॑ रू॒राय॒ च्यव॑नाय॒ नोद॑नाय धृ॒ष्णवे॑ ।नमः॑ शी॒ताय॑ पूर्वकाम॒कृत्व॑ने

jvaranāśanam| 1-2 atharvāṅgirāḥ| candramāḥ| 1 puroṣṇik, 2 ekāvasānā dvipadā ārcyanuṣṭup| namo rūrāya cyavanāya nodanāya dhṛṣṇave | namaḥ śītāya pūrvakāmakṛtvane

हिन्दी अर्थ

का० ७ । अननु० १० । सू० १२२ अथवेवेद-भाष्य १६७ माच्वाके चिद् वि थमन वि न पाशिनोऽति धन्वेव तँ इहि ॥१॥ कोई (त्वा) तु अते हुए को (मा) न (वि यमन्) रोके, (न) जैसे कि (पाशिनः) फन्दों वाले शिकारो (विम्) पक्षी को रोक लेते; (तान्) हरिभिः मे बहुवचन सेयातो रथमें जते नना अश्व अमिप्रेतर्हुः या बाल होते हँ जिनं कि अयाल 78९ कहते है, परन्तु वे मयूर के रोमों के सदृश चित्क्वरे नहीं होते। “ममूररोमभिः'' मे बहुव्रीहि समास न मानकर “सह” अथं में “तृतीया" प्रतीत होती है, जिसका भ्रं होगा “मोर के रोमौ से युक्त श्रश्व । यह् देखा भी गय। है कि घुडसवार अपने घोड़ों के सिरो पर णोभाके लिए मोर के पंख लगा लेतेर्है, तामे वाले भी घोड़ों के सिर पर

English

May he, the lawless one, who comes alternate or two following days, pass over and possess the frog.

अध्याय 7

श्लोक 116.2

यो अ॑न्ये॒द्युरु॑भय॒द्युर॒भ्येती॒मं म॒ण्डूकम॒भ्येऽत्वव्र॒तः

yo anyedyurubhayadyurabhyetīmaṃ maṇḍūkamabhye'tvavrataḥ

हिन्दी अर्थ

उरोवैरधो वरुणस्ते कृणोतु जथन्तं तवाऽतुं देवा म॑दन्तु ॥१॥ १६८ भ्यववेद-भाष्य का० ७। बनु० १०। सु° १२९ करे । (ते) तेरे सत्कार के लिये (वरुणः) राष्टकाराजा (उरोः वरीयः) ' । ¶ भौर विजय प्राप्त करते हुए (त्वा) तु (अनु) लक्षित करके (देवाः)

English

A charm to ensure prosperity Come hither, Indra, with bay steeds, joyous, with tails like pea- cock plumes. Let none impede thy way as fowlers stay the bird: pass o’er them as o’er desert lands.

अध्याय 7

श्लोक 117.1

शत्रुनिवारणम्।१ अथर्वाङ्गिराः।इन्द्रः।पथ्याबृहती।आ म॒न्द्रैरि॑न्द्र॒ हरि॑भिर्या॒हि म॒यूर॑रोमभिः ।मा त्वा॒ के चि॒द् वि य॑म॒न् विं न पा॒शिनोऽति॒ धन्वे॑व॒ ताँ इ॑हि

śatrunivāraṇam| 1 atharvāṅgirāḥ| indraḥ| pathyābṛhatī| ā mandrairindra haribhiryāhi mayūraromabhiḥ | mā tvā ke cid vi yaman viṃ na pāśino'ti dhanveva tā~ ihi

हिन्दी अर्थ

राष्ट्रं का अधिपति, जिसके अद्ख हैँ राष्टरायिपति वरुण नामक राजा । ममं ग्रधिपति । सोम है सेनानायक जो कि सेनाके भ्रागे होकर चलता है, (देखो साधन (मन्त्र १-५), ओौर बुढापे में ज्ञनोपदेश करने का परामशं उस शतु के पराजित हो जाने पर उस राष्ट का अधिपति वरुण राजा सम्राट् रचना करता है, जिस व्यूह मे सम्राट् आच्छादित रहता है ।

English

A benediction on a warrior Thy vital parts I cover with thine armour: with immortality

अध्याय 7

श्लोक 118.1

वर्मधारणम्।१ अथर्वाङ्गिराः।चन्द्रमाः, वरुणः, देवः।त्रिष्टुप्।मर्मा॑णि ते॒ वर्म॑णा छादयामि॒ सोम॑स्त्वा॒ राजा॒मृते॒नानु॑ वस्ताम्।उ॒रोर्वरी॑यो॒ वरु॑णस्ते कृणोतु॒ जय॑न्तं॒ त्वानु॑ दे॒वा म॑दन्तु

varmadhāraṇam| 1 atharvāṅgirāḥ| candramāḥ, varuṇaḥ, devaḥ| triṣṭup| marmāṇi te varmaṇā chādayāmi somastvā rājāmṛtenānu vastām| urorvarīyo varuṇaste kṛṇotu jayantaṃ tvānu devā madantu

हिन्दी अर्थ

४) प्रेयमागं भीमपथ है (मन्त्र १०) । भुरिग् महाबृहती; १४ एकावसाना द्विपदा साम्नी भुरिग् बहती । अन्त॑काय मृत्यवे नम॑ः पाणा अपाना शह ते रमन्ताम् । इहायपंस्तु पुरषः सहाघंना सूय॑स्य मागे अमृतस्य दके ॥१॥ (नमः) नमस्कारहो।! हैभयु की कामना वाले! (ते) तेरे (प्राणाः ग्रपानाः) प्राण ओर अपरान (इह) इस तेरे शरीर मे (रमन्ताम्) रमण

English

King Soma clothe thee! Varuna give thee what is more than ample, and in thy triumph let the Gods be joyful. 123

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।