Atharva Veda
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 1/6 · श्लोक 1.1–2.28

पूर्ण अध्याय पाठ49 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 1.1

दीर्घायुःप्राप्तिः।१-२१ ब्रह्मा।आयुः।त्रिष्टुप्, १ पुरोबृहती त्रिष्टुप्, २-३, १७-२१ अनुष्टुप्, ४,९,१५-१६ प्रस्तारपङ्क्तिः, ७ त्रिपदा विराड् गायत्री, ८ विराट् पथ्याबृहती, १२ त्र्यवसाना पञ्चपदा जगती, १३ त्रिपदा भुरिङ्महाबृहती, १४ एकावसाना द्विपदा साम्नी भुरिग्बृहती।अन्त॑काय मृ॒त्यवे॒ नमः॑ प्रा॒णा अ॑पा॒ना इ॒ह ते॑ रमन्ताम्।इ॒हायम॑स्तु॒ पुरु॑षः स॒हासु॑ना॒ सूर्य॑स्य भा॒गे अ॒मृत॑स्य लो॒के

dīrghāyuḥprāptiḥ| 1-21 brahmā| āyuḥ| triṣṭup, 1 purobṛhatī triṣṭup, 2-3, 17-21 anuṣṭup, 4,9,15-16 prastārapaṅktiḥ, 7 tripadā virāḍ gāyatrī, 8 virāṭ pathyābṛhatī, 12 tryavasānā pañcapadā jagatī, 13 tripadā bhuriṅmahābṛhatī, 14 ekāvasānā dvipadā sāmnī bhurigbṛhatī| antakāya mṛtyave namaḥ prāṇā apānā iha te ramantām| ihāyamastu puruṣaḥ sahāsunā sūryasya bhāge amṛtasya loke

हिन्दी अर्थ

पूरुष का । कौशिक सूत्रों मेँ माणवक के उपनयनकर्मं मे मन्त्र का विनियोग किया है ) अथवं० १३।४ (२) मे परमेश्वर को “मृत्य” कहा है । यथा “स मेष्वर को नमस्कार किया है । साय ही पुरुष पद द्वारा माणवक को सम्बो- पित कर उसेकहाहैकितु एसे स्थानम वासकरजो क्रि सूयं के प्रकाश वाला हो, प्रकाशरहित गृहों में निवास न कर । यथा “तावां वारतून्युष्मसि ¦ अमृत कालोक है पृथिवी । योगाङ्खों के. अनुष्ठान से योगी पृथिवीम मुक्तात्मा हो सकता है । भागे भज सेवायाम् । ष्देनं म॒रुतो देवा उदिं्राग्नी स्वस्तये ॥२॥ (भगः) भजनीय परमेश्वर ने (उद्) इसकी उन्नति के लिये (एनम्) इस

English

A charm to recover a dying man Homage to Death the Ender! May thy breathings, inward and outward, still remain within

अध्याय 8

श्लोक 1.2

उदे॑नं॒ भगो॑ अग्रभी॒दुदे॑नं॒ सोमो॑ अंशु॒मान्।उदे॑नं म॒रुतो॑ दे॒वा उदि॑न्द्रा॒ग्नी स्व॒स्तये॑

udenaṃ bhago agrabhīdudenaṃ somo aṃśumān| udenaṃ maruto devā udindrāgnī svastaye

हिन्दी अर्थ

तदनुरूप (्वयामसि) हम आचार्यं आह्वान करते ह । समुदे = संमोदाय (सायण); समुदे =मोदसहित होने के लिये । दधातु = धारण करे; वायु श्रादि प्रत्येक, अथवा इन सबका समुदाय । रचः मज्ञानाम (निषं° ३।६) । उपनीत-ब्रहमचारी के लिये कहा है कितु . प्राणियों के मोद अर्थात् हषं को इन की सेवा करके बढ़ाया कर । इन्दं (जम्भः) दाढ़ (संहनुः) परस्पर मिलकर (त्वा) तेरा हनन (मा) न (सायण) । जरहमचारी के लिये कहाहैकि “दिवा मा स्वाप्सीः" । कितु णतु; श्रातो युक् चिणृकरतोः (म्रष्टा० ७।३।३३) ।

English

Rise up from darkness into light: come, both thy hands we clasp in ours. Let not the black dog and the brindled seize thee, two warders of the way sent forth by Yama.

अध्याय 8

श्लोक 1.3

इ॒ह तेऽसु॑रि॒ह प्रा॒ण इ॒हायु॑रि॒ह ते॒ मनः॑ ।उत् त्वा॒ निरृ॑त्याः॒ पाशे॑भ्यो॒ दैव्या॑ वा॒चा भ॑रामसि

iha te'suriha prāṇa ihāyuriha te manaḥ | ut tvā nirṛtyāḥ pāśebhyo daivyā vācā bharāmasi

हिन्दी अर्थ

माणवक (इह एव अस्तु) यहां ही रहे, (्रयम्) यह (इतः) इस स्थान से त्मिकं तथा लौकिक सामथ्यं हैँ । यथा (अथर्वं० ४।१३।५-७) । धसः) आयु को धारण कराने वाली घमनियां (स धमन्तु) सब घड़कने लगे रुदन् ) न रोएुं, (अघरुदः) व्यसन अर्थात् दुःख आने पर रोदन करने वाले अर्थात् घमनियों का धड़कना श्रभिप्रेत है ।

English

Thy guardian be Vaisvānara Jātavedas; let not celestial Fire with lightning burn thee. Let not the Flesh-Consumer plot against thee: depart thou far away from the Destroyer.

अध्याय 8

श्लोक 1.4

उत् क्रा॒मातः॑ पुरुष॒ माव॑ पत्था मृ॒त्योः पड्वी॑षमवमु॒ञ्चमा॑नः ।मा च्छि॑त्था अ॒स्माल्लो॒काद॒ग्नेः सूर्य॑स्य सं॒दृशः॑

ut krāmātaḥ puruṣa māva patthā mṛtyoḥ paḍvīṣamavamuñcamānaḥ | mā cchitthā asmāllokādagneḥ sūryasya saṃdṛśaḥ

हिन्दी अर्थ

तुभे प्राप्त कर लिया दहै, (पुनः) फिरतू (आ अगः) आ गया है, (पूनणवः) श्रायु (अविदम्) मैने प्राप्त करादी दहै। विगत हो गया है, नष्ट हो गया है । (३) ब्रह्मरूपी वमं कवच का धारण (मन्व १०; २५) । । ५) केश एमश्र का वपन (मन्त १७ ) 1 ६) ्ह्यचारी के लिये भोजन, ( मे

English

Be Heaven and Earth and Sun and Moon thy keepers, and from the dart of Gods may Air protect thee.

अध्याय 8

श्लोक 1.5

तुभ्यं॒ वातः॑ पवतां मात॒रिश्वा॒ तुभ्यं॑ वर्षन्त्व॒मृता॒न्यापः॑ ।सूर्य॑स्ते त॒न्वे॒३शं त॑पाति॒ त्वां मृ॒त्युर्द॑यतां॒ मा प्र मे॑ष्ठाः

tubhyaṃ vātaḥ pavatāṃ mātariśvā tubhyaṃ varṣantvamṛtānyāpaḥ | sūryaste tanve3śaṃ tapāti tvāṃ mṛtyurdayatāṃ mā pra meṣṭhāḥ

हिन्दी अर्थ

(७) ब्रह्मचारी को युगो ओर ीं युगकालो के। परिज्ञान देना (मन्त्र (८) जीवन की परिषि ब्रह्म (मन्त्र २५) 1 न ( १०) “भूतु” भेषज है, रोगनाशक (मन्त्र २८ ) । कर यह ध्वनित फियाहैकरिं व + धदवत है कि वेदिक नामपद योगिकार्थक ह का० ८ । सूु०र२ भ्रथर्ववेद-भाष्य १८९१ यह उक्ति उपनीत माणवक के आचायं की है “रलयोरभेदः'' द्वारा

English

May Vigilance and Watchfulness protect thee, Sleepless and Slumberless keep guard above thee!

अध्याय 8

श्लोक 1.6

उ॒द्यानं॑ ते पुरुष॒ नाव॒यानं॑ जी॒वातुं॑ ते॒ दक्ष॑तातिं कृणोमि ।आ हि रोहे॒मम॒मृतं॑ सु॒खं रथ॒मथ॒ जिर्वि॑र्वि॒दथ॒मा व॑दासि

udyānaṃ te puruṣa nāvayānaṃ jīvātuṃ te dakṣatātiṃ kṛṇomi | ā hi rohemamamṛtaṃ sukhaṃ rathamatha jirvirvidathamā vadāsi

हिन्दी अर्थ

आहरामि, “दु्रहोभश्च्छन्दसि" द्वारा हकार को भकार हुआ है । सदियों श्र्थात् शरदुतुभों तक जोवित होने के लिये (त्वा) तुभे (भा हरामि) कतव्य है कि वह ब्रह्मचारी का रोगोपचार करे २. यह भ्राचायं का कथन है । ब्रह्मचारी यदिरूण हो गयादौ तो प्राचायं का १८२ अथववेद-भाष्य का०८। सू० बच्चो के ग्राचायं कंसे होने चादि, इसका वणेन सूक्त १ बौर

English

Let Guardian and let Wakeful be thy warders. Let these be thy preservers, these thy keepers. All hail to these, to these be lowly worship!

अध्याय 8

श्लोक 1.7

मा ते॒ मन॒स्तत्र॑ गा॒न्मा ति॒रो भू॒न्मा जी॒वेभ्यः॒ प्र म॑दो॒ मानु॑ गाः पि॒तॄन्।विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु त्वे॒ह

mā te manastatra gānmā tiro bhūnmā jīvebhyaḥ pra mado mānu gāḥ pitṝn| viśve devā abhi rakṣantu tveha

हिन्दी अर्थ

(अहम्) मने पाया है । (यत्) जो (ते) तेरा (मनः) मन है (तत्) त , माणवक कौ खुल श्रन्तरिक्षीय वायु मे रखना चाहिए, तथा न्धे श्रध्यापन होना चाहिए । उसके मन मे स्थिरता पैदा करनी चाहिए, मन की व्यथं को बातचीत से उसे रोकना चाहिए । उसे ठीक प्रकार बोलना सिखाना चहिये । अथवा मूर्छा तथा रोग के क(रण माणवक के प्राण तथा चक्षुः आदि उद्यो मेजोक्षति भ्रा गई है, ओौर मनोविकार हो गया है, तथा प्रं विष्ेत हो गया है, म्रौर बोलने मे जिह्वा का पक्षाघात हो गया है; इन सब नमस्ते मृत्यो चष नम॑ः भराणाय तेऽकरम् ॥४॥

English

May saving Savitar, Vāyu, Indra, Dhātar restore thee to com- munion with the living. Let not thy vigour or thy breath forsake thee: we recall thy life.

अध्याय 8

श्लोक 1.8

मा ग॒ताना॒मा दी॑धीथा॒ ये नय॑न्ति परा॒वत॑म्।आ रो॑ह॒ तम॑सो॒ ज्योति॒रेह्या ते॒ हस्तौ॑ रभामहे

mā gatānāmā dīdhīthā ye nayanti parāvatam| ā roha tamaso jyotirehyā te hastau rabhāmahe

हिन्दी अर्थ

(त्वा अरि) है माणवक तुक पर (संघमामिः) मँ ्राचायं प्रण फूकता हू, १. ““संघमामि द्वारा ्धौकनी नूचित होती है । श्रनः सम्भवतः बौकनी द्वारा ¶वे आदि द्वारा फका जाता है । (मृत्यो) ह । इस निमित्त श्राचायं मुत्युनामक परमेश्वर की गै करता हूं, य। मैने किया है।

English

Let not the fiend with snapping jaws, nor darkness find thee: tongue, holy grass: how shouldst thou perish?

अध्याय 8

श्लोक 1.9

श्या॒मश्च॑ त्वा॒ मा श॒बल॑श्च॒ प्रेषि॑तौ य॒मस्य॒ यौ प॑थि॒रक्षी॒ श्वानौ॑ ।अ॒र्वाङेहि॒ मा वि दी॑ध्यो॒ मात्र॑ तिष्ठः॒ परा॑ङ्मनाः

śyāmaśca tvā mā śabalaśca preṣitau yamasya yau pathirakṣī śvānau | arvāṅehi mā vi dīdhyo mātra tiṣṭhaḥ parāṅmanāḥ

हिन्दी अर्थ

माणवकं के स्वास्थ्य के लिये, उसे निज मुख प्रादि दवारा हारा मैँ प्राचा ह माणवक ! तुमे, फक करप्र (अयम्) यह (जीवतु) जीए, (म। मृत) न मरे (इमम्) इसे (समीरः लिये (भेषजम्) ओषध (कृणोमि) मै आचाय या वद्य करता हूं, (मृत्यो )हे समीरयामसि = अन्तरिक्षस्थ वायु को "समीरण कहते है, जोकि “ सम्" सम्यकृतया “ईरण गति करती रहती है । सम्+ ईर् (गतौ) । इस लिथे वायु का नाम “सदागति” भी है । सदा गति करने के कारण इसको णुद्धता को सूचित किया हे, अतः यह प्राणप्रद है । “मा मृत" द्वारा सूचित

English

May the Ādityas and the Vasus, Indra and Agni raise thee and to health restore thee. The Sky hath raised thee, and the Earth, Prajāpati hath raised thee up.

अध्याय 8

श्लोक 1.10

मैतं पन्था॒मनु॑ गा भी॒म ए॒ष येन॒ पूर्वं॒ नेयथ॒ तं ब्र॑वीमि ।तम॑ ए॒तत् पु॑रुष॒ मा प्र प॑त्था भ॒यं प॒रस्ता॒दभ॑यं ते अ॒र्वाक्

maitaṃ panthāmanu gā bhīma eṣa yena pūrvaṃ neyatha taṃ bravīmi | tama etat puruṣa mā pra patthā bhayaṃ parastādabhayaṃ te arvāk

हिन्दी अर्थ

व्यवह्।रयु तस्तुतिमोद आदि (दिवादिः) का० ८। सू° १ अथवेवेद-माष्य १७१ (इह) इस पृथिवी भें (ते) तेरी (असुः) प्रज्ञा हो, (इह) इसमे (भाणः) प्राणापान क्रिया हो, (इह) इसमे (आयुः) पूणे श्रायु हो, (इह) इसमें (ते) से मुक्त रह सकता है । असुः प्रज्ञानाम (निषं० ३।६) । (पुरुष) है पुरुष ! (मृत्योः) मृत्यु के (पडवीशम्) पादबन्धन को

English

thee. Here stay this man united with his spirit in the Sun’s realm, the world of life eternal!

अध्याय 8

श्लोक 1.11

रक्ष॑न्तु त्वा॒ग्नयो॒ ये अ॒प्स्व॑१न्ता रक्ष॑तु त्वा मनु॒ष्या॒३ यमि॒न्धते॑ ।वै॒श्वा॒न॒रो र॑क्षतु जा॒तवे॑दा दि॒व्यस्त्वा॒ मा प्र धा॑ग् वि॒द्युता॑ स॒ह

rakṣantu tvāgnayo ye apsva1ntā rakṣatu tvā manuṣyā3 yamindhate | vaiśvānaro rakṣatu jātavedā divyastvā mā pra dhāg vidyutā saha

हिन्दी अर्थ

को ओर तु पग बढा, (मा श्रवपत्थाः) नीचे की भोर अपना पतन न कर। बन्धन बेडियां । मन्त्रम निराश हुए पुरुष को निराशा से मुक्त करने के लिये प्रोत््ाहित किया है । रक्षा करेया तुक पर दया करे, (मा प्रमेष्ठाः) ताकि तु हिसितन दहो) अमृतानि जल, ननाविघ अन्न, फल, सन्नी आदि अमूत वस्तुं ह, जिनको दानगतिरक्षणहिसादानेषु (भ्वादिः) में “दय” क अर्थं

English

Bhaga hath lifted up this man, and Soma with his filaments, Indra and Agni, and the Gods the Maruts, raised him up to health.

अध्याय 8

श्लोक 1.12

मा त्वा॑ क्र॒व्याद॒भि मं॑स्ता॒रात् संक॑सुकाच्चर।रक्ष॑तु त्वा॒ द्यौ रक्ष॑तु पृथि॒वी सूर्य॑श्च त्वा॒ रक्ष॑तां च॒न्द्रमा॑श्च ।अ॒न्तरि॑क्षं रक्षतु देवहे॒त्याः

mā tvā kravyādabhi maṃstārāt saṃkasukāccara| rakṣatu tvā dyau rakṣatu pṛthivī sūryaśca tvā rakṣatāṃ candramāśca | antarikṣaṃ rakṣatu devahetyāḥ

हिन्दी अर्थ

(पुरुष) है पुरुष ! (ते) तेरा (उद्यानम्) मागं ऊपर की ओर है, (न , अवयानम्) नीचली ग्रोर मागं नहीं (ते) तेरे (जीवातुम्) जीवन को (दक्ष- , तातिम्) वृद्धि का विस्तार करने वाला (कृणोमि) मँ करत। हं । (दमम्) . शरीर-रथ पर ( हि) नि्चयपूवेक (श्रा रोह) आरोहण कर, (अथ) गनौर (जिविः ) जीण होकर, बढा हो कर (विदथम्) ज्ञानोपदेश (अ वदसि) विधवे देवा अभि रक्षन्तु देह ।॥७॥ (ते) तेरा (मनः) मन (तत्र) परलोक की भोर (मा गात्) न जाय, , प्राणियों को सेवा मेँ तू प्रमाद कर, (पितृन्) मृत पितरों का (मा अ्रनुगाः)

English

Here is thy spirit, here thy breath, here is thy life, here is thy soul: By a celestial utterance we raise thee from Destruction’s bonds.

अध्याय 8

श्लोक 1.13

बो॒धश्च॑ त्वा प्रतिबो॒धश्च॑ रक्षतामस्व॒प्नश्च॑ त्वानवद्रा॒णश्च॑ रक्षताम्।गो॒पा॒यंश्च॑ त्वा॒ जागृ॑विश्च रक्षताम्

bodhaśca tvā pratibodhaśca rakṣatāmasvapnaśca tvānavadrāṇaśca rakṣatām| gopāyaṃśca tvā jāgṛviśca rakṣatām

हिन्दी अर्थ

अनुगामी न बन । (विष्व देवाः) सव देवकोटि के आचार्यं (त्वा) उपनयन का श्रथ है 'श्रपने समीप लाना", (उप = ्षमीप + नयन = लाना) । आचार्यं माणवकं को, उपनयन विधि हारा, अपने भ्राश्रम मेले आताहै। "विश्वे देवाः” का अथं इसलिये प्राचां करिया है । आश्रम के सभी आचायं देवकोटि के होने चाहिए 1 प इस श्राश्रम मे रहकर तेरा मन निज माता-पिताकेघरकौ ओरन

English

Up from this place, O man, rise! sink not downward, casting away the bonds of Death that hold thee.

अध्याय 8

श्लोक 1.14

ते त्वा॑ रक्षन्तु॒ ते त्वा॑ गोपायन्तु॒ तेभ्यो॒ नम॒स्तेभ्यः॒ स्वाहा॑

te tvā rakṣantu te tvā gopāyantu tebhyo namastebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

। जाता रहै, न आश्रम मे रहकर तेरा मन टद चालं वाला हो, न माता-पिता आदिकीही त्रु निरन्तर चिन्ता कस्ता रहै। । (गतानाम्) गुजरे हुओं का (मा) न (आ दीधीयाः) सदा ध्यान अर्थात् चिन्तन किया कर, (ये) जो कि (परावतम्) कतंग्यपथ से परे (नयन्ति) लेजाते है, पराड मुख कर देते । (आ रोह्) तु श्रारोहण कर (तमसः) हाथों को (आ रभामहे) हम पृणंतया सहारा देते ह ।

English

Be not thou parted from this world, from sight of Agni and the Sun.

अध्याय 8

श्लोक 1.15

जी॒वेभ्य॑स्त्वा स॒मुद्रे॑ वा॒युरिन्द्रो॑ धा॒ता द॑धातु सवि॒ता त्राय॑माणः ।मा त्वा॑ प्रा॒णो बलं॑ हासी॒दसुं॒ तेऽनु॑ ह्वयामसि

jīvebhyastvā samudre vāyurindro dhātā dadhātu savitā trāyamāṇaḥ | mā tvā prāṇo balaṃ hāsīdasuṃ te'nu hvayāmasi

हिन्दी अर्थ

गुजरो का सदा ध्यान करते रहना, यह तमोगुण का परिणाम है, मारोहण कर । तु इस आश्रममें प्रा एहि, हम प्राश्रमवासी सदा तेरे (शबलः च) चितकवरा (प्रेषितौ) येयम के भेजे हुए है, (यौ) जौ दोनों करि (पथिरक्षी) यम द्वारा दर्शाए् मागे में रक्षक है, चौकीदार है । यम का अभिप्राय है “नियन्ता परमेश्वर. । इसे “महायमः' भी कहा है (मथवं० १३।४(१)।५), यह नियन्ता है ओर सवंतो महान् है 1 दो कत्ते का० ठ सू० १ अथर्ववेद-माष्य १७५

English

Purely for thee breathe Wind and Mātarisvan, and let the Waters rain on thee their nectar.

अध्याय 8

श्लोक 1.16

मा त्वा॑ ज॒म्भः संह॑नु॒र्मा तमो॑ विद॒न्मा जि॒ह्वा ब॒र्हिः प्र॑म॒युः क॒था स्याः॑ ।उत् त्वा॑दि॒त्या वस॑वो भर॒न्तूदि॑न्द्रा॒ग्नी स्व॒स्तये॑

mā tvā jambhaḥ saṃhanurmā tamo vidanmā jihvā barhiḥ pramayuḥ kathā syāḥ | ut tvādityā vasavo bharantūdindrāgnī svastaye

हिन्दी अर्थ

भ्रेयमागे के पथिक को प्रेयमागं मे बान्धे रखते हँ । इन से वचने का उपाय न श्रवीमि ॥ १।६।२) मे जलों मे सव ग्रौषधों की, श्रौर सब रोगों को शान्त करने वाली वि 0 9 व त श एवम्) मेघीय-वियुत् । अर्थात् निवासगृहं एसे होने चाहिए जिन में सूयं का ताप, संतापकारी न हो, भौर जिन्हं मेघीय-विधयुतपात नष्ट न कर सके । नर-नारियों का हितकारी (जातवेदाः) प्रज्ञानी परमेश्वर (रक्षतु) तेरी

English

The Sun shall shine with healing on thy body; Death shall have mercy on thee: do not leave us!

अध्याय 8

श्लोक 1.17

उत् त्वा॒ द्यौरुत् पृ॑थि॒व्युत् प्र॒जाप॑तिरग्रभीत्।उत् त्वा॑ मृ॒त्योरोष॑धयः॒ सोम॑राज्ञीरपीपरन्

ut tvā dyaurut pṛthivyut prajāpatiragrabhīt| ut tvā mṛtyoroṣadhayaḥ somarājñīrapīparan

हिन्दी अर्थ

(त्वा) तुमे (माप्रधाक्) दग्धन करे। आचायं कहता हूं । (पुरुष ) है पुरुष ! (एतत् तमः) इस प्रेयरूपी तमोमय (ते, श्रभयम्) तेरे लिये भयरहित है । मे कि “श्वानौ” श्रथति ए्याम ओर शबल दो कृत्ते रक्षक ह" भयानकं है। नहीं । यह मागं सत्तवगुणियो के लिये परे" का मागं है, ओर अर्वाक् मां

English

Upward must be thy way, O man, not downward: with life and mental vigour I endow thee. Ascend this car eternal, lightly rolling; then full of years shalt thou address the meeting.

अध्याय 8

श्लोक 1.18

अ॒यं दे॑वा इ॒हैवास्त्व॒यं मामुत्र॑ गादि॒तः ।इ॒मं स॒हस्र॑वीर्येण मृ॒त्योरुत् पा॑रयामसि

ayaṃ devā ihaivāstvayaṃ māmutra gāditaḥ | imaṃ sahasravīryeṇa mṛtyorut pārayāmasi

हिन्दी अर्थ

हे बरह्मचयं का मागे । यह “अर्वाक्” मागे तेरे लिये अभयकरूप है, श्रेयरूप पूराकाल में (न इयथ) तुम श्रभी नहीं गए ( तम्) उसे (ब्रवीमि) मै. अन्तरिक्षं रक्षतु देवहैत्याः ॥१२॥ न अपनाए, (संकसुकात्) दुजेन से (आरात्) दूर (चर) विचर, उसका करे (देवहेत्याः) इन्द्रियों की मार से।

English

Let not thy soul go thither, nor be lost to us: slight not the living, go not where the Fathers are.

अध्याय 8

श्लोक 1.19

उत् त्वा॑ मृ॒त्योर॑पीपरं॒ सं ध॑मन्तु वयो॒धसः॑ ।मा त्वा॑ व्यस्तके॒श्यो॒३मा त्वा॑घ॒रुदो॑ रुदन्

ut tvā mṛtyorapīparaṃ saṃ dhamantu vayodhasaḥ | mā tvā vyastakeśyo3mā tvāgharudo rudan

हिन्दी अर्थ

मे मृतदेह के कच्चे मांस का भक्षण करतो है। जीवनचर्यां इस प्रकार की कै प्रासपसि देह जीणं हो जाता है, मानो पक जाता है, कच्चा नहीं रहता । संकसुकं का अथं है, दजन (उणा० २।३० पर दयानन्द तथा भदटरोजी दीक्षित) ॥ दजन का संग त्याज्य है । चूलोक “स्वः ओर नाक" आदि लोकों १७६ प्रथवेवेद-भाष्य का०८। सू० । । ॥ मेपीय-विद्युत् (धाता) धारण भौर पोषण करने वाला मेष, (त्रायमाणः सथिता) पराणकरता हुजा प्रातःकालीन सूयं (त्वा) तेरी (दधातु) रक्षा

English

Let all the Gods retain thee here in safety. Yearn not for the departed ones, for those who lead men far away.

अध्याय 8

श्लोक 1.20

आहा॑र्ष॒मवि॑दं त्वा॒ पुन॒रागाः॒ पुन॑र्णवः ।सर्वा॑ङ्ग॒ सर्वं॑ ते॒ चक्षुः॒ सर्व॒मायु॑श्च ते ऽविदम्

āhārṣamavidaṃ tvā punarāgāḥ punarṇavaḥ | sarvāṅga sarvaṃ te cakṣuḥ sarvamāyuśca te 'vidam

हिन्दी अर्थ

किसी कौ हिसा (मा) न करे, ( प्रमयुः) हिसा करने वाला (कथा) किस ¦ करं, (ते) वे (त्वा) तेरी (गोपायन्तु) रक्षा करं, (तेभ्यः) उन कै लिये की आहूुतियां, यज्ञिय प्रकारसे, निज जंठराम्नि में दिया करे। इस द्वारा होता है जबकि हिखरप्राणी के मुख के उपर श्रौर नीचेकेदो जबड़् मिल जायि । इसके द्वारा यह कहा गया है कि सांप आदि हिखप्राणी तुभे नकारे ओौर तेरा हनन न करं । हनुः = हृन्यतेऽनेनेति हनुः कपोलावयवः (उणा० हि १।१०, दयानन्द ) । विषेले प्राणो दवाय काटने पर मृत्यु भी सम्भव है ओौर उपनीत माणवक को नि्दंश दिये गए हैँ 1 भअनवद्राणः =निद्रारदहितः,

English

Come hither; do not hesitate: with mind averted stay not there. Forbear to tread this path, for it is awful: that path I speak of which thou hast not travelled.

अध्याय 8

श्लोक 1.21

व्यऽवात् ते॒ ज्योति॑रभू॒दप॒ त्वत्तमो॑ अक्रमीत्।अप॒ त्वन्मृ॒त्युं निरृ॑ति॒मप॒ यक्ष्मं॒ नि द॑ध्मसि

vya'vāt te jyotirabhūdapa tvattamo akramīt| apa tvanmṛtyuṃ nirṛtimapa yakṣmaṃ ni dadhmasi

हिन्दी अर्थ

दवारा सूचित किया है । जिह्वा का अथं है वाणी, वाक् “जिह्वा वाड नाम" । (नि्ष० १।११) ओौर बः का श्रथ है काटने वाली । बहु हिसायाम् (चुरादिः, जब उपनीत ब्रहाचारी वाणी द्वारा भी किसी की हिसा न करेगा, तो उसने किया है, अपनाया है, (उत् पृथिवी) पृथिवी ने उन्नति के लिये अपनाया है, सोम -प्रोषधिप्रधान (ओषधयः) ्रोषधियों ने (अपीपरन्) पालित कियादहै। । आसन्नमृत्यु से, या मूर्च्छा से । अयं देवा इदेवास्वयं मामत्र गादितः।

English

Enter it not, O man; this way is darkness: forward is danger, hitherward is safety. Thy guardians be the Fires within the Waters, thy guardian be the Fire which men enkindle.

अध्याय 8

श्लोक 2.1

दीर्घायुःप्राप्तिः।१-२८ ब्रह्मा।आयुः।त्रिष्टुप्, १-२,७ भुरिक्, ३,२६ आस्तारपङ्क्तिः, ४ प्रस्तारपङ्क्तिः, ६,१५ पथ्यापङ्क्तिः, ८ पुरस्ताज्ज्योतिष्मती जगती, ९ पञ्चपदा जगती, ११ विष्टारपङ्क्तिः, १२,२२,२८ पुरस्ताद्बृहती, १४ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, १९ उपरिष्टाद्बृहती, २१ सतः पङ्कतिः ५,१०,१६-१८,२०,२३-२५,२७ अनुष्टुप् (१७ त्रिपाद्)।आ र॑भस्वे॒माम॒मृत॑स्य॒ श्नुष्टि॒मच्छि॑द्यमाना ज॒रद॑ष्टिरस्तु ते ।असुं॑ त॒ आयुः॒ पुन॒रा भ॑रामि॒ रज॒स्तमो॒ मोप॑ गा॒ मा प्र मे॑ष्ठाः

dīrghāyuḥprāptiḥ| 1-28 brahmā| āyuḥ| triṣṭup, 1-2,7 bhurik, 3,26 āstārapaṅktiḥ, 4 prastārapaṅktiḥ, 6,15 pathyāpaṅktiḥ, 8 purastājjyotiṣmatī jagatī, 9 pañcapadā jagatī, 11 viṣṭārapaṅktiḥ, 12,22,28 purastādbṛhatī, 14 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 19 upariṣṭādbṛhatī, 21 sataḥ paṅkatiḥ 5,10,16-18,20,23-25,27 anuṣṭup (17 tripād)| ā rabhasvemāmamṛtasya śnuṣṭimacchidyamānā jaradaṣṭirastu te | asuṃ ta āyuḥ punarā bharāmi rajastamo mopa gā mā pra meṣṭhāḥ

हिन्दी अर्थ

१८४ प्रथवेवेद-माष्य का०८। सू9 रिषाम्) अहत्या ओरं भहिसा करने वाली, (जौवन्तीम्) जीवित, हरी-भरर १०५ 0 (सहस्वतीम्) बलवती ( ओषधीम्) ओषधि का ( अहम् । यहां (हवे) श्राह्वान करता हुं । (अस्मे 1 हं । (अस्मे) इस माणवक की (अरिष्द करने वाली, न हिसा करने वाली । सहमानाम् = रोगस्याभिम वितरीम् भोषधि के ह, अथवा ये नाना ्रोषधियां ह “अौषघीम्” पद का! तथा ॥ अनि ब्रूहि मा रभयाः सूेमे ततैव सन्तसवहाया इहास्तु ।

English

The Plants and Herbs with Soma as their King have rescued thee from Death. Here let this man, O Gods, remain: let him not go to yonder world.

अध्याय 8

श्लोक 2.2

जीव॑तां॒ ज्योति॑र॒भ्येह्य॒र्वाङा त्वा॑ हरामि श॒तशा॑रदाय ।अ॒व॒मु॒ञ्चन् मृ॑त्युपा॒शानश॑स्तिं॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं ते॑ दधामि

jīvatāṃ jyotirabhyehyarvāṅā tvā harāmi śataśāradāya | avamuñcan mṛtyupāśānaśastiṃ drāghīya āyuḥ prataraṃ te dadhāmi

हिन्दी अर्थ

भरवलासौ = श्र + बल +-अस् (क्षेपणे), बल का न क्षेपण करने वाले। मदो तुप्तिकरो (मद तृप्तियोगे; चुरादिः, वणेविकारः) । अंहसः त्रीहि भौर यव सात्विक भोजन है, तामसिक ओर राजसिक भोजन नहीं, अतः ब्रह्मचारी का वणेन हुमा है, उसे सात्विक भोजन करने का निदंश दिया छेदने च (स्वादिः) । मन्त्र में वप्ता पद छेदना्थेक है, नापित है । (अश्नासि) तु साता है, (यत्) जो (पयः) दूघ (पिबसि) तू पीता है, अर्थात्

English

I make for him a healing balm. O Death, forbear to slay this man. Here for sound health I invocate a living animating plant,

अध्याय 8

श्लोक 2.3

वाता॑त् ते प्रा॒णम॑विदं॒ सूर्या॒च्चक्षु॑र॒हं तव॑ ।यत् ते॒ मन॒स्त्वयि॒ तद् धा॑रयामि॒ सं वि॒त्स्वाङ्गै॒र्वद॑ जि॒ह्वयाल॑पन्

vātāt te prāṇamavidaṃ sūryāccakṣurahaṃ tava | yat te manastvayi tad dhārayāmi saṃ vitsvāṅgairvada jihvayālapan

हिन्दी अर्थ

यह दुगैन्ध है, रोगजन्य । पूतुदू वृक्षविशेष है जो कि रग्नि का शरीर है। ज्वलनशील है, इसलिये इसे अग्नि का शरीर कहा हो । भ्रमीव अम रोगे. (१) सूक्त मे २६ मन्त्र रह। आयिभौतिका्थं दर्शया है । आधि- (३) यातना देने वालों के हूदयवेधन भौर उनकी बाहूभ्रों को तोड़ (४) यातुधान है जो अनृत द्वारा ऋत अर्थात् सत्य का हनन करता है

English

This I procure for thee, that thou, undying, mayst not suffer harm, that thou mayst be content, that all be well with thee.

अध्याय 8

श्लोक 2.4

प्रा॒णेन॑ त्वा द्वि॒पदां॒ चतु॑ष्पदाम॒ग्निमि॑व जा॒तम॒भि सं ध॑मामि ।नम॑स्ते मृत्यो॒ चक्षु॑षे॒ नमः॑ प्रा॒णाय॑ तेऽकरम्

prāṇena tvā dvipadāṃ catuṣpadāmagnimiva jātamabhi saṃ dhamāmi | namaste mṛtyo cakṣuṣe namaḥ prāṇāya te'karam

हिन्दी अर्थ

(५) परस्पर शाप देने वाले पति-पत्नी को, तथा कटु-वक्ता को मान- (६) पापी भौर कुटिल को, तथा “वाचा स्तेन""को बन्धनागार का. दण्ड (७) अश्वादि पश्चु की हत्या करके उनके मांस के भक्षक पुरुष को, तथा हैँ । अतः सूक्त ३ेका आधिभौतिक अथं सूक्त मे अभिप्रेत है (मन्व १ ८) । (रक्षोहणम्) राक्षसो का हनन करने वाले, (वाजिनम्) बलशालो तथा

English

Gracious to thee be Heaven and Earth, bringing no grief, and drawing nigh! Pleasantly shine the Sun for thee, the Wind blow sweetly to thy heart!

अध्याय 8

श्लोक 2.5

अ॒यं जी॑वतु॒ मा मृ॑ते॒मं समी॑रयामसि ।कृ॒णोम्य॑स्मै भेष॒जं मृत्यो॒ मा पुरु॑षं वधीः

ayaṃ jīvatu mā mṛtemaṃ samīrayāmasi | kṛṇomyasmai bheṣajaṃ mṛtyo mā puruṣaṃ vadhīḥ

हिन्दी अर्थ

नक्तम्) दिन-रात (नः) हमें (रिषः) हिसाग्रों तथा हिसकों से (पातु) वेदो मेँ करई मन्ते द्येक तथा व्यथेक होते हँ । इसलिये उनमें रेस पदहोतेर्हैजोकिदो या तीन अर्थो को सूचित करे। वर्तमान सूक्त भी एेसा है । मने केवल आधिभौतिक अथं की व्याख्या की है। एतदनुसार मन्त णक्तिको बढाता हं । ओर तेरी सहायता के लिये, विस्तत राष्ट्र वाले तथा मिलनेके लिये मेँ जाताहूं। तु अपने राष्ट में अस्त-णस््ो भादिद्रारा दीदिहि प्रदीप्त हो तथा इह इस अपने राट म इत्यादि शब्द राजनीतिक

English

Let the celestial Waters full of milk flow happily for thee. Auspicious be the Plants to thee! I have upraised thee, borne thee from the lower to the upper

अध्याय 8

श्लोक 2.6

जी॒व॒लां न॑घारि॒षां जी॑व॒न्तीमोष॑धीम॒हम्।त्रा॒य॒मा॒णां सह॑मानां॒ सह॑स्वतीमि॒ह हु॑वे॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

jīvalāṃ naghāriṣāṃ jīvantīmoṣadhīmaham| trāyamāṇāṃ sahamānāṃ sahasvatīmiha huve'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

प्रतीत होता है। “शमं गृहनाम" (निघं० ३।४ । गृह् प्राश्रय होता है। अतः मन्त्र मे शमं का अथं आश्रय किया है अयोदंष्ट्रो अचिषां यातुधानालुपं स्पृश जातवेदः समिंदढः । परकीय सेनिकों को (उपस्पृश) समीपता से स्प कर । (जिह्वया) आग्नेय मूर (मूढ ) +-देवान्, दिवु विजिगोषा० (दिवादिः)। कन्यादः निज संनिको दारा, णस्तरास्त्रों से परकौय जीवित संनिकों कौ मारना, उनके कच्ने मांसीं कोखा जाना है। क्रव्य (कच्चा मांस) +अदः (भक्षणे) खा जाने वाले । (उमयाविन्) है दोनो कौ रक्षा करने वाले ! (दिख) शत्रु कौ हिसा

English

earth: Let the two Sons of Aditi, the Sun and Moon, protect thee there.

अध्याय 8

श्लोक 2.7

अधि॑ ब्रूहि॒ मा र॑भथाः सृ॒जेमं तवै॒व सन्त्सर्व॑हाया इ॒हास्तु॑ ।भवा॑शर्वौ मृ॒डतं॒ शर्म॑ यच्छतमप॒सिध्य॑ दुरि॒तं ध॑त्त॒मायुः॑

adhi brūhi mā rabhathāḥ sṛjemaṃ tavaiva santsarvahāyā ihāstu | bhavāśarvau mṛḍataṃ śarma yacchatamapasidhya duritaṃ dhattamāyuḥ

हिन्दी अर्थ

च) अवरश्रौर पर के (उभौ) दोनों (दष्टरौ) दाढ़ों को (उपधेहि) शत्रु के रूपी दादर या दातो द्वारा (यातुधानान्) यातना देने वालों कौ (अभि) वणेन हुम। है, जो कि सीसे की गोली प्रतीत हौती है । दय ओौर निश्चेयः इन को रक्षा करने. विध्य = ध 1 (हि (रम्) रानृओंके वाणो को (संनममानः) नमाता हमरा उनके वाणो को (उत वा) या (चरन्तम्) इधर-उधर घूमते हुए (उत) या (अन्तरिक्षे) '

English

Whatever robe to cover thee or zone thou makest for thyself, 125

अध्याय 8

श्लोक 2.8

अ॒स्मै मृ॑त्यो॒ अधि॑ ब्रूही॒मं द॑य॒स्वोदि॒तो॒३यमे॑तु ।अरि॑ष्टः॒ सर्वा॑ङ्गः सु॒श्रुज्ज॒रसा॑ श॒तहा॑यन आ॒त्मना॒ भुज॑मश्नुताम्

asmai mṛtyo adhi brūhīmaṃ dayasvodito3yametu | ariṣṭaḥ sarvāṅgaḥ suśrujjarasā śatahāyana ātmanā bhujamaśnutām

हिन्दी अर्थ

(शिशानः) उग्र हुआ-हुभा (शर्वा) घातकायुध द्वारा (विध्य) वींध। द्वारा (यातुधानान्) यातना देने वालों को (हृदये) हृदय मेँ (विध्य ) बीघ राष्ट पर विजय की भावना से किये युद्ध, यज्ञरूप नहीं । भङ गधि = बाहुं को तोडना ताकि बाहों द्वारा ये अस्त्र न चला सकं । उतार॑ग्धान्तसपृणुहि जातवेद उतारेभाणँ ऋर्िभयांतुधानान । आरम्भ कर दिया है उन पर (स्पृणहि) तू वाणौंकी बौषछार कर, (उत)

English

We make it pleasant to thy frame: may it be soft and smooth to touch. When, with a very keen and cleasing razor, our hair and beards thou shavest as a barber,

अध्याय 8

श्लोक 2.9

दे॒वानां॑ हे॒तिः परि॑ त्वा वृणक्तु पा॒रया॑मि त्वा॒ रज॑स॒ उ॑त् त्वा॑ मृ॒त्योर॑पीपरम्।आ॒राद॒ग्निं क्र॒व्यादं॑ नि॒रूहं॑ जी॒वात॑वे ते परि॒धिं द॑धामि

devānāṃ hetiḥ pari tvā vṛṇaktu pārayāmi tvā rajasa ut tvā mṛtyorapīparam| ārādagniṃ kravyādaṃ nirūhaṃ jīvātave te paridhiṃ dadhāmi

हिन्दी अर्थ

२०२ अथवंवेद-भाष्य का०८। सूक्त ३ ञआङ्खल भाषा का “9 शब्द “स्पृ का विकृतरूप हो, जिसका श्रथ है बौछार करना । इससे मन्त्रां संगत हो जाता है। सायणाचा्यं॑ने अथं णहि" भथवा उनकी तु वाणो द्वारा सेवा कर । यह वक्रोक्ति है । ्रमिप्राय पववत् है कि वाणों कौ बौदछछार कर (स्प सेवने) । (प्रब्रूहि) कटहिये कि (यतमः) जो कि (सः) वह (यातुधानः) यातना देने वाला है (यः) जोकि इदम् ) यह् यातना-कमं (कृणोति) करता है । (तम्) वाले राजां की (चक्षुषे) दष्टिके लिये (रन्धय) वशंगत कर, उपस्थित

English

Smoothing our face steal not our vital forces. Auspicious unto thee be rice and barley, causing no painful sick- ness or consumption, these

अध्याय 8

श्लोक 2.10

यत् ते॑ नि॒यानं॑ रज॒सं मृत्यो॑ अनवध॒र्ष्यऽम्।प॒थ इ॒मं तस्मा॒द् रक्ष॑न्तो॒ ब्रह्मा॑स्मै॒ वर्म॑ कृण्मसि

yat te niyānaṃ rajasaṃ mṛtyo anavadharṣya'm| patha imaṃ tasmād rakṣanto brahmāsmai varma kṛṇmasi

हिन्दी अर्थ

(अधिनव्रूहि) है परमेश्वर ! अधिकार पूवेक इसे तू “श्रपना आरभयःः लभस्व) इसे रोग में पकड न रख, या सजन कर, नवजीवन सजन कर, (तव एव सन्) तेरा ही हभ (सवेहायाः) सव प्रकार कौ गतियों वाला होकर (इह) इस पृथिवी या आश्रमं (श्रस्तु) रहे । (भवाशवौँ) है नवोत्पत्ति करने वाले! तथा रोगों का करता है । गुणभेद से परमेष्वरके दो नाम है मव भौर शवं । सर्व॑हायाः= जरावस्था के साथ (शतहायनः) सौ वर्षो वाला हो, (इतः उद् एतु) इस दयस्व = दया कर, या रक्षाकर ¡1 दय दानगतिरक्षणहिसादानेषु देवानो हेतिः परं खा णन्तु पारयामि स्वा रजस उत् तवां मृत्यो-

English

We rescue him from Mrityu with a charm that hath a thousand powers.

अध्याय 8

श्लोक 2.11

कृ॒णोमि॑ ते प्राणापा॒नौ ज॒रां मृ॒त्युं दी॒र्घमायुः॑ स्व॒स्ति।वै॒व॒स्व॒तेन॒ प्रहि॑तान् यमदू॒तांश्चर॒तोऽप॑ सेधामि॒ सर्वा॑न्

kṛṇomi te prāṇāpānau jarāṃ mṛtyuṃ dīrghamāyuḥ svasti| vaivasvatena prahitān yamadūtāṃścarato'pa sedhāmi sarvān

हिन्दी अर्थ

छोड दे, (त्वा) तुभ (रजसः) रजोगुण से (पारयामि) मँ पार करता हू, दुर (निरूहम्) मैने निकाल दिया है, (ते) तेरे (जीवातवे) जीवन के लिये (परिधिम्) परिषि को (दधामि) म स्थापितकरताहूं। , 0 इन्द्रियों का आयुध है, विषयों म विचरना । रजोगुण, इन्द्रियों को विषयों की ओर प्रेरित करता है । रजोगुण मृत्यु का कारण है। करव्यद् = कच्चे" मांस का भञअजण करने वालो एवाग्नि । निरूहम् निर् + रह. । शरीर शवाग्नि के मेंट न होने पाए 1 वृद्धावस्या रे शरीर परिपक्व हौ जाता है। इस पकाया मास, जिसे दत्त प्राणी खाते है। ह । का०८।सू०र अथववेद-माष्य -र८७ , १८६ जथववेद-भाष्य का०-८ सूक्त र

English

I have delivered thee from Death. Strength-givers smelt and fashion thee! Let not she-fiends with wild loose locks, or fearful howlers yell at thee.

अध्याय 8

श्लोक 2.12

आ॒रादरा॑तिं॒ निरृ॑तिं प॒रो ग्राहिं॑ क्र॒व्यादः॑ पिशा॒चान्।रक्षो॒ यत् सर्वं॑ दुर्भू॒तं तत् तम॑ इ॒वाप॑ हन्मसि

ārādarātiṃ nirṛtiṃ paro grāhiṃ kravyādaḥ piśācān| rakṣo yat sarvaṃ durbhūtaṃ tat tama ivāpa hanmasi

हिन्दी अर्थ

हि (हि ओरादरांति निकरति परो ग्राहिं कव्याद॑ः पिशाचान् । परिधि का अयं है षेरा । जीवन को जिस घेरे के भीतर रहना चाहिए वह॒ वि रः) यत् स दुभूतं तत् तमश्वापं हन्मसि ॥ १२॥ जीवन की परिषि "श्रहम ( ८।२।२५) । न . श , न तत् सवम् परः) उस सब को दूर् करके, न हम उसका हनन ¦ उरावा टननकरदियाजाताटै। को (वमं कृण्मसि) कवच हम करते है । ।

English

I have attained and captured thee: thou hast returned restored to youth. Perfect in body: so have I found all thy sight and all thy life.

अध्याय 8

श्लोक 2.13

अ॒ग्नेष्टे॑ प्रा॒णम॒मृता॒दायु॑ष्मतो वन्वे जा॒तवे॑दसः ।यथा॒ न रिष्या॑ अ॒मृतः॑ स॒जूरस॒स्तत् ते॑ कृणोमि॒ तदु॑ ते॒ समृ॑ध्यताम्

agneṣṭe prāṇamamṛtādāyuṣmato vanve jātavedasaḥ | yathā na riṣyā amṛtaḥ sajūrasastat te kṛṇomi tadu te samṛdhyatām

हिन्दी अर्थ

रजोमागे मृत्युकारक है। माणवकं की रजोगुण से रक्षा करनी ॥ , 4 ६ ४ अथं है मासभक्षक रोग-कीटाणु“ । ये रोगकीटाणु रोग द्वारा मांस को सुख चाहिए । रजोगुण नीचे कौ भोर ले जाता, अर्थात् पतून करता है । नियान तथा रजोगुण के प्रहारो से बचने के लिये ब्रह्मरूपी कवच को धारण करना देते है, गव्ठाणऽ पेदा कर देतेह। मांसको सुखा ष्देना ही मांसं कव्यम् =कृवि हसाकरणयोएच (भ्वादिः) । पिशितम्=पिश भवयवे प्रौर परमेश्वर के साय प्रीति करने वाला (असः) हो.जाय । (ते ) तेरे लिये (तत्) उस कमं को (कृणोमि) मँ आचायं करता हु" (ते) तेरे लिये (तत्

English

Life hath breathed on thee; light hath come: darkness hath past away from thee. Far from thee we have buried Death, buried Destruction and:

अध्याय 8

श्लोक 2.14

शि॒वे ते॑ स्तां॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑संता॒पे अ॑भि॒श्रियौ॑ ।शं ते॒ सूर्य॒ आ त॑पतु॒ शं वातो॑ वातु ते हृ॒दे।शि॒वा अ॒भि क्ष॑रन्तु॒ त्वापो॑ दि॒व्याः पय॑स्वतीः

śive te stāṃ dyāvāpṛthivī asaṃtāpe abhiśriyau | śaṃ te sūrya ā tapatu śaṃ vāto vātu te hṛde| śivā abhi kṣarantu tvāpo divyāḥ payasvatīḥ

हिन्दी अर्थ

उ) वह् कमं (समृध्यताम्) समृद्धिदायक हो । ५ वन्वे = वनु याचने(तनादिः)। सजूः = स +-जुषी प्री तिसेवनयोः(तनादिः) है माणवक ! (ते) तेरे लिथे (प्राणापानौ) प्राण ओर भ्रपान को (जराम्, तथा (स्वस्ति) भ्रविनाश या कल्याण को (कृणोमि). मँ आचायं करता हं । स्वत है सूय, सयं की जायाहै रात्रि । रात्रि माताहैयम की। यमद्रारा ,, भेजे गये दूत हँ मच्छर, साप श्रादि दिलप्राणी, जो कि मृत्युकारक है, मौर रात्रि मे संचरण करते है, विचरते हैँ । इनके निराकरण का वर्णन मन्वरमे

English

Decline. The same

अध्याय 8

श्लोक 2.15

शि॒वास्ते॑ स॒न्त्वोष॑धय॒ उत् त्वा॑हार्ष॒मध॑रस्या॒ उत्त॑रां पृथि॒वीम॒भि।तत्र॑ त्वादि॒त्यौ र॑क्षतां सूर्याचन्द्र॒मसा॑वु॒भा

śivāste santvoṣadhaya ut tvāhārṣamadharasyā uttarāṃ pṛthivīmabhi| tatra tvādityau rakṣatāṃ sūryācandramasāvubhā

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर से तेरे लिये प्राण की याचना करता हू । द्युलोक ओर पृथिवी (ते) तेरे लिये (शिवे) कल्याणकारी (स्ताम्) होः; चिन्ता को हटाने वाले हों । (ते) तेरे लिये (सूयः) सूयं (शम्) सुख-शान्ति , पूवेक (ग्रातपतु) सदा तपे, (ते) तेरे (हृदे) हदय के लिये (वातः) वायु भूत तथा शोभायुक्त । असंतापे--सम्पत्ति के अभाव मे मानसिक संताप

English

Seize to thyself this trust of life for ever: thine be longevity which nothing shortens. Thy spirit and thy life again I bring thee: die not, nor vanish into mist and darkness.

अध्याय 8

श्लोक 2.16

यत् ते॒ वासः॑ परि॒धानं॒ यां नी॒विं कृ॑णु॒षे त्वम्।शि॒वं ते॑ त॒न्वे॒३तत् कृ॑ण्मः संस्प॒र्शेऽद्रू॑क्ष्णमस्तु ते

yat te vāsaḥ paridhānaṃ yāṃ nīviṃ kṛṇuṣe tvam| śivaṃ te tanve3tat kṛṇmaḥ saṃsparśe'drūkṣṇamastu te

हिन्दी अर्थ

-(ते) तेरे लिये (भोषधयः) :ओषधियां (शिवाः सन्तु) कल्याणकारिणी ¦ का० ८ सूु०२ प्रथवेवेद-भाष्य १८६ षहां वायु र्क्रच्छ होती है, ओर सूयं को गर्मी कम होती है, चन क भी पथिवी की अशुद्ध वायु से ्रमिधित हा प्रकाश देता है । तथा ताजी भर विविघ प्रकार की ओषधियां भी सुगमता से प्राप्त हौ सकती ह 1 आदित्यौ 1 (तत्) उसे (ते तन्वे) तेरी तनू के लिये (शिवम्) कल्याणकारी ४ सुखः कारी (कृण्मः) हम करते ह, वह (संस्पर्शे ) शरीर के साध स्पशे मेँ (ते) तेरे यत् पुरेण म॒चय॑ता सुतेजसा वप्ता वपसि केदाश्मभर

English

Come to the light of living men, come hither: I draw thee to a life of hundred autumns. Loosing the bonds of Death, the curse that holds thee, I give thee age of very long duration.

अध्याय 8

श्लोक 2.17

यत् क्षु॒रेण॑ म॒र्चय॑ता सुते॒जसा॒ वप्ता॒ वप॑सि केशश्म॒श्रु।शुभं॒ मुखं॒ मा न॒ आयुः॒ प्र मो॑षीः

yat kṣureṇa marcayatā sutejasā vaptā vapasi keśaśmaśru| śubhaṃ mukhaṃ mā na āyuḥ pra moṣīḥ

हिन्दी अर्थ

तथा मू छ-दादी को (वपसि) काटता है, तो (नः) हमारे (शुभम्, मखम्) ऊपर कौ पृथिवी की ओर (उत् श्रहाषेम्) ्मेउठालाया हूं। (तव) वहां मचैयता = ““मचं'" घातु शन्दार्थेक है । यथा “गज माजं शब्दाथौ, मचं च (चुरादिः) परन्तु उणा० ३।४३ मे “मचे'' को सौत्रधातु कहा है (दया- स्वती) 1 अ्रतः इनके मत मँ मचं धातु चुरादिगणी नहीं । मच = 10

English

Thy breath have I recovered from the Wind, thy vision from the Sun.

अध्याय 8

श्लोक 2.18

शि॒वौ ते॑ स्तां व्रीहिय॒वाव॑बला॒साव॑दोम॒धौ।ए॒तौ यक्ष्मं॒ वि बा॑धेते ए॒तौ मु॑ञ्चतो॒ अंहसः

śivau te stāṃ vrīhiyavāvabalāsāvadomadhau| etau yakṣmaṃ vi bādhete etau muñcato aṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रधर की पृथिवी है, समतलभूमिः; श्रौर उत्तरा पथिवी है पवतभुमि क भवना है, यह् इन मन्न द्वारा प्रकट हो रहा है। ॥ १९० श्रयवेवेद-माष्य का० ८1 सु०र जाता है । हमारे मख की शोभा भौर आयु को वपन दारा तु अपहूतन कर मे जाता है । वैदिक विधि मे उस समय उसका क्षौरकमं होना चाहिए । विद्या के ग्रहण मे आयु का विचार नहीं है । अल्पायु तथा युवा मी उपनधरन

English

Thy mind I stablish and secure within thee: feel in thy members,. use thy tongue, conversing. I blow upon thee with the breath of bipeds and quadrupeds, as on a fire new-kindled.

अध्याय 8

श्लोक 2.19

यद॒श्नासि॒ यत् पिब॑सि धा॒न्यंऽ कृ॒ष्याः पयः॑ ।यदा॒द्यं॒१ यद॑ना॒द्यं सर्वं॑ ते॒ अन्न॑मवि॒षं कृ॑णोमि

yadaśnāsi yat pibasi dhānyaṃ' kṛṣyāḥ payaḥ | yadādyaṃ1 yadanādyaṃ sarvaṃ te annamaviṣaṃ kṛṇomi

हिन्दी अर्थ

पूवेक विद्या ग्रहृण कर सकता है। युवा की दष्टि से “शमश्रु पद (ते) तेरे लिये (्रीहियवौ) घान ओौर जौ (शिवौ) कल्याणकारी, (श्रबलासौ) बलास रोग से रहित, (मदोमधौ =ग्रदोमधू) खाने में मधुर तया बाधित करते है, उसके आनेमें बाधा उपस्थित करते है, (एतौ) ये दोनो (अंहसः) पाप से (मुञ्चतः) मुक्त करते है ।

English

To thee, O Death, and to thy sight and breath have I paid reverence. Let this man live, let him not die: we raise him, we recover him.

अध्याय 8

श्लोक 2.20

अह्ने॑ च त्वा॒ रात्र॑ये चो॒भाभ्यां॒ परि॑ दद्मसि ।अ॒राये॑भ्यो जिघ॒त्सुभ्य॑ इ॒मं मे॒ परि॑ रक्षत

ahne ca tvā rātraye cobhābhyāṃ pari dadmasi | arāyebhyo jighatsubhya imaṃ me pari rakṣata

हिन्दी अर्थ

भक्षणीय नही, अपितु पेय दुग्ध है, (ते) तेरे लिये, (अविषम्) विष रहित अर्थात् मांसभक्षण तथा मदिरापान विषरूप अन्न है । लेने वाले रोगों से, (मे) मेरे (इमम्) इस ब्रह्मचारी को (परिरक्षत) सब ह प्रतारसेसूरक्षित करो। दिन में सूर्यं के प्रकाश में रोगी को रखना भौर रातति मे पूरणं विश्राम, रोग सभी शत्र होते ह, कोई तो जीवन कान भक्षण-करने वाले मौर करट

English

Preserving, queller of disease, victorious, full of power and might. Seize him not, but encourage and release him: here let him stay, though thine, in all his

अध्याय 8

श्लोक 2.21

श॒तं ते॒ऽयुतं॑ हाय॒नान् द्वे यु॒गे त्रीणि॑ च॒त्वारि॑ कृण्मः ।इ॒न्द्रा॒ग्नी विश्वे॑ दे॒वास्तेऽनु॑ मन्यन्ता॒महृ॑णीयमानाः

śataṃ te'yutaṃ hāyanān dve yuge trīṇi catvāri kṛṇmaḥ | indrāgnī viśve devāste'nu manyantāmahṛṇīyamānāḥ

हिन्दी अर्थ

जीवन का भक्षण करने वाले ! इन दोनों प्रकारके रोगों की निवृत्ति के लिये वे्ोसे प्राथनाकी गई है) (मे) भेरे' दारा रोगी के प्रति को घस्लृ अदेश हृग्रा है (म्रष्टा० २।४३७) 1 हुम निश्चित करते हँ । श्रौर (अयुतम्) १ हजार १०,००० । वषो की संख्या (१) के स्थानम पूर्वपूवे के करम म ४३२ रखकर ४३- २००० कलियुग की संख्य 1 का निर्माण करते है । (दरे युगे) कलियुग की संख्या । 1 । का०८। सू १ । : १६२ प्रथवेवेद-भाष्य का०८।सूु०६। १ ४ १) ,

English

vigour. Bhava and Sarva, pity and protect him: give him full life and drive away misfortunes.

अध्याय 8

श्लोक 2.22

श॒रदे॑ त्वा हेम॒न्ताय॑ वस॒न्ताय॑ ग्री॒ष्माय॒ परि॑ दद्मसि ।व॒र्षाणि॒ तुभ्यं॑ स्यो॒नानि॒ येषु॒ वर्ध॑न्त॒ ओष॑धीः

śarade tvā hemantāya vasantāya grīṣmāya pari dadmasi | varṣāṇi tubhyaṃ syonāni yeṣu vardhanta oṣadhīḥ

हिन्दी अर्थ

को द्विगुणित करे द्वापर कौ संख्या ८६४००० करते रह, । (वणि युगानि) कलियुग की संख्या को त्रिगुणित करके त्रेता की संख्या १९६६००० करते संख्या १७२८००० करते हैँ । इस प्रकार चतुय गी कौ संख्या ४३२,०००० ऋ (त्वा) तुभ (शरदे) शरदृतु के लिये, (हेमन्ताय) हेमन्त ऋतु के लिये के लिये (ग्रहणीयमानाः) कध किये विना (अनुमन्यताम्) युगशिक्षा को अनुकल मान लें अर्थात् इसे स्वीकृत करलं । ॑ अहृणीयमानाः, "हणीयते क्रध्यतिकर्मा" (निधं २।१२), तथा

English

Comfort him, Death, and pity him: let him arise and pass away, Unharmed, with all his members, hearing well, with old, may he through hundred years win

अध्याय 8

श्लोक 2.23

मृ॒त्युरी॑शे द्वि॒पदां॑ मृ॒त्युरी॑शे॒ चतु॑ष्पदाम्।तस्मा॒त् त्वां मृ॒त्योर्गोप॑ते॒रुद् भ॑रामि॒ स मा बि॑भेः

mṛtyurīśe dvipadāṃ mṛtyurīśe catuṣpadām| tasmāt tvāṃ mṛtyorgopaterud bharāmi sa mā bibheḥ

हिन्दी अर्थ

मन्म एक चतुर्ग के काल का कथन किया है, जिसका कि परिजन मास तथा संवत् या सन् का प्रिज्ञान वतमान मे कराया जता हैवैष वेदिक . विद्यार्थी को, एक चतुमगी के काल के परिज्ञान का कथन मन्त मेहुभाहै। को युगो की संख्यानिर्माण कौ शिक्षा दी गई है (याः) जो (ओषधीः) परोषधि्ां (पूर्वाः जाताः) प्रथम पेदा नञि इस मन्त्र मे, देवों से तीन युग पुराकाल भं उत्यत् योषधियों काकथन

English

profit with his soul. May the Gods’ missile pass thee by. I bring thee safe from the mist: from death have I

अध्याय 8

श्लोक 2.24

सोऽरिष्ट॒ न म॑रिष्यसि॒ न म॑रिष्यसि॒ मा बि॑भेः ।न वै तत्र॑ म्रियन्ते॒ नो य॑न्त्यध॒मं तमः॑

so'riṣṭa na mariṣyasi na mariṣyasi mā bibheḥ | na vai tatra mriyante no yantyadhamaṃ tamaḥ

हिन्दी अर्थ

धियों के पुराकाल, तदनन्तर जलीय जन्तु के तदनन्तर पृथिवी. भ्रूणाम्) भरण-पोषण करने वाली प्रोषधियों के (शत चामानि, सप्त च) सौ ओर सात धामोको (अहम्) भै (नु) निश्वयसे पदों में "देव" पद काएक ही अभिप्राय है । उद्धारर्मै करता हूं, (सः) वहतू (मा) न (बिभेः) मेय कर। गोपतेः; गौः पृथिवीनाम (निघं० १।१) । दो-पायो ग्रौर चौ-पायों का पृथिवी के साथ सम्बन्ध है, इसलिये “गोपतेः का प्रथं “पृथिवोपति'' सु-

English

preserved thee. Far have I banished flesh-consuming Agni: I place a rampart for thy life’s protection.

अध्याय 8

श्लोक 2.25

सर्वो॒ वै तत्र॑ जीवति॒ गौरश्वः॒ पुरु॑षः प॒शुः ।यत्रे॒दं ब्रह्म॑ क्रि॒यते॑ परि॒धिर्जीव॑नाय॒ कम्

sarvo vai tatra jīvati gauraśvaḥ puruṣaḥ paśuḥ | yatredaṃ brahma kriyate paridhirjīvanāya kam

हिन्दी अर्थ

(सः) वह (अरिष्ट) है हिसारदित (न मरिष्यसि) तून मरेगा, (न मरिष्यसि) न मरेगा, (मा बिभेः) तून मयकर। (वै) निश्चय से(तत्र) उस अवस्थां (न भ्रियन्ते) नहीं मरते, (नो) न (अधमम् तमः) मरण- कालीन अघम मूर्छाको (यन्ति) प्राप्त होते हैँ ॥२४।। सर्वो वे तत्रं जीवति गौरश्वः पुरुषः पुः । (तत्र) उस अवस्था मँ (वे) निश्चय से (जीवति ) जीवित रहता है, , (सवं) सभौ (गौः, अर्वः, पुरुषः, पशुः) गौ अश्व तथा पुरुष ओर पशु, (यतर) जीवन के लिये (परिधिः) परिधि (क्रियते)करः लिया जाता है ।२५।। “गौः, अश्वः, पुरुषः, पशुः" के दो अभिप्राय सम्भव हैँ (१) गौ, अश्व, पुरुष, इनमे से प्रत्येक पशु है । यथा “तवेमे पञ्च पणवो विभक्ता गावो

English

Saving him from that misty path of thine which cannot be defined. From that descent of thine, O Death, we make for him a shield of prayer.

अध्याय 8

श्लोक 2.26

परि॑ त्वा पातु समा॒नेभ्यो॑ऽभिचा॒रात् सब॑न्धुभ्यः ।अम॑म्रिर्भवा॒मृतो॑ऽतिजी॒वो मा ते॑ हासिषु॒रस॑वः॒ शरी॑रम्

pari tvā pātu samānebhyo'bhicārāt sabandhubhyaḥ | amamrirbhavāmṛto'tijīvo mā te hāsiṣurasavaḥ śarīram

हिन्दी अर्थ

जीवः) जीवन काल को अतिक्रान्त कर जा, (असवः) प्राण (ते शरीरम्) तेरे शरीर को (मा हासिषुः) न त्यागे जीवन की प्रवधिसेप्वं 1 ग्रतिजीवः--जीवन की सास।न्य प्रवि है १०० वषं । इस अवधि को परश्वः परुषा अजावयः" (ब्रथरव० ११।२।६) मगौ प्रादि पांचोंको पशु कहा है । (२) गौ, अश्व, पुरुष तथा तद्धित पशु । पशु जात्येकवचन हे। ब्रहाके भी दो श्रथ ह । (१) परमेश्वर (२) वेद।ये दोनों परि 1. पमे निज की परिधि मानना। अपने-अपि । ॥ (देवाः) देव आचायं (अधि मुञ्चन्न्) छृडा दं ।

English

I give thee both the acts of breath, health, lengthened life, and death by age. All Yama’s messengers who roam around, sent by Vaivasvata,

अध्याय 8

श्लोक 2.27

ये मृ॒त्यव॒ एक॑शतं॒ या ना॒ष्ट्रा अ॑तिता॒र्याः ।मु॒ञ्चन्तु॒ तस्मा॒त् त्वां दे॒वा अ॒ग्नेर्वै॑श्वान॒रा दधि॑

ye mṛtyava ekaśataṃ yā nāṣṭrā atitāryāḥ | muñcantu tasmāt tvāṃ devā agnervaiśvānarā dadhi

हिन्दी अर्थ

इससे जीवन पवित्र ्रौर सात्विक बन कर जौवनावविसे पूवं नहीं मरता । । रूप् । इनसे सूगमता एूतरैक त॑र जानासम्भव है, जेसे कि नौका द्वारा नदो परिधि के भीतर अपने-आप को रख कर वेदोपदिष्ट मागे पर चलने से जीवित रह सकता दहै । वेदभी "कम् हं, यतः वेद सुखी जीवन का मागे , ¢ । - से पार करने वाला (रक्षोहा) रोगकीटाणुं का हनन करने वाला, (सपत्नहा) रोगणशत्रु का हनन करने वाला (असि) तुद (अथो) तथा (अमीवचातनः) अमीवा नामक रोगकीटाणु का विन शक तू है'(वूतुदरुः नाम) पूतुद्र नामक (भेषजम्) म्रौषधतु है ।

English

I chase away. Far off we drive Malignity, Destruction, Pisāchas banqueters on flesh, and Grāhi.

अध्याय 8

श्लोक 2.28

अ॒ग्नेः शरी॑रमसि पारयि॒ष्णु र॑क्षो॒हासि॑ सपत्न॒हा।अथो॑ अमीव॒चात॑नः पू॒तुद्रु॒र्नाम॑ भेष॒जम्

agneḥ śarīramasi pārayiṣṇu rakṣohāsi sapatnahā| atho amīvacātanaḥ pūtudrurnāma bheṣajam

हिन्दी अर्थ

(ये) जो (एकणतम्) एक सौ या एकाधिक सौ (मृत्यवः) मृद्युएुर्हः आचारय , (समानेभ्यः) समन भ्राचायं वाले सतीर्थ्यो से होने वाली, तथां . व्यवितत जीवनावधि से पहले नहीं मरता, अपितु “शतात्''सेभी “भूयः. १६६ भ्रथवेवेद-साष्य का०८। सूु०र२। हुमा है । “धुतुदर” नामक भेषज द्वारा इनका हनन या विनाश क्रियाजा

English

And all the demon kind, the brood of sin, like darkness, we dispel. I win thy life from Agni, from the living everlasting Jātavedas.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।