Atharva Veda
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 2/6 · श्लोक 3.1–4.25

पूर्ण अध्याय पाठ51 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 3.1

शत्रुनाशनम्।१-२६ चातनः।अग्निः।त्रिष्टुप्, ७,१२,१४-१५,१७,२१ भुरिक्, २५ पञ्चपदा बृहतीगर्भा जगती २२-२३ अनुष्टुप्, २६ गायत्री।र॒क्षो॒हणं॑ वा॒जिन॒मा जि॑घर्मि मि॒त्रं प्रथि॑ष्ठ॒मुप॑ यामि॒ शर्म॑ ।शिशा॑नो अ॒ग्निः क्रतु॑भिः॒ समि॑द्धः॒ स नो॒ दिवा॒ स रि॒षः पा॑तु॒ नक्त॑म्

śatrunāśanam| 1-26 cātanaḥ| agniḥ| triṣṭup, 7,12,14-15,17,21 bhurik, 25 pañcapadā bṛhatīgarbhā jagatī 22-23 anuṣṭup, 26 gāyatrī| rakṣohaṇaṃ vājinamā jigharmi mitraṃ prathiṣṭhamupa yāmi śarma | śiśāno agniḥ kratubhiḥ samiddhaḥ sa no divā sa riṣaḥ pātu naktam

हिन्दी अर्थ

यातुधान को पकड़ कर उसे राजा के सामने उपस्थित करे । मन्त्र में शिष्ट के लिये उपस्थित की जाने योग्य समिधा वस्तु । समिधा है यज्ञिय समिधा, के यातुघान को पकडता है 1 पकड़ा गया यातुधान राजा के लिये नजराना' है । राजा ही इसे यथोचित दण्ड देता है । (प्रचेतः) पणेतया सचेत अर्थात् सावधान रहने वाले, (नृचक्षः) तथा वसुरूप भ्रधिकारियों के प्रति (प्रणय) सौप । (यातुघाना) यातना देने वाले (रक्नांसि) राक्षस (हिखम्) परसेना कौ हिसा करने वाले ओर (भ्रमि

English

deliver from calamity. Thy food, thy drink, whate’er they be corn grown by cultivation, milk,

अध्याय 8

श्लोक 3.2

अयो॑दंष्ट्रो अ॒र्चिषा॑ यातु॒धाना॒नुप॑ स्पृश जातवेदः॒ समि॑द्धः ।आ जि॒ह्वया॒ मूर॑देवान् रभस्व क्र॒व्यादो॑ वृ॒ष्ट्वापि॑ धत्स्वा॒सन्

ayodaṃṣṭro arciṣā yātudhānānupa spṛśa jātavedaḥ samiddhaḥ | ā jihvayā mūradevān rabhasva kravyādo vṛṣṭvāpi dhatsvāsan

हिन्दी अर्थ

। “रका 0 ' 1५ वः न ०: ता है (दुरेवाः) ॥ वाला है, व (ईड्य.) स्तु अ 1 (न ) 4 लिए, य्य है, बह (रंसि) राकषसस्वभाव वालो का (षति) । ॥ र जले हए भस््ौ सौर शतो को (शिशीते) तीक क्ता है, ॥ करन्ना) ॥ि शक्ति, तथा धनसम्पत् परादिऽि आविष करता दे ल : ॥ न रक्षाथं दो सींग रती है, र्त् निज दीषटू कये र्ना कैं विथ रस रौर अस्तरूपीः द्विष : शृङ्गो को रखता ओर “अनहं तसाः करता टे।

English

I balm with oil the mighty demon-slayer, to the most famous friend I come for shelter. Enkindled, sharpened by our rites, may Agni protect us in the day and night from evil.

अध्याय 8

श्लोक 3.3

उ॒भोभ॑यावि॒न्नुप॑ धेहि॒ दंष्ट्रौ॑ हिं॒स्रः शिशा॒नोऽव॑रं॒ परं॑ च ।उ॒तान्तरि॑क्षे॒ परि॑ याह्यग्ने॒ जम्भैः॒ सं धे॑ह्य॒भि या॑तु॒धाना॑न्

ubhobhayāvinnupa dhehi daṃṣṭrau hiṃsraḥ śiśāno'varaṃ paraṃ ca | utāntarikṣe pari yāhyagne jambhaiḥ saṃ dhehyabhi yātudhānān

हिन्दी अर्थ

कहता है कि “शासन के लिये मैने जो मेधापूरवेक राजणासन विषयक वेद (तजय द्धिः) हिसाकारक (एवैः) गतियो मर्थात् व्यवहारो दवारा हिसा- करो, भौर (दुहः) प्रोहका री. (मड गुरावतः) भङ गुर हो जाने वाने(रक्षसः) का०८। सू०४ शरथवेवेद-भाष्य । २१६ परः (= परदेश निकाला, स्वदेश से निकाल देना । इस प्रकार वह् स्व- शरीर कौ दुष्टिसेस्वदेशसे परेहो जाता है, श्रौर सन्तानोंसे भोपरेहो जाता है । सन्तानं तो स्वदेशमें ही रहती हैँ । तिखः पृथिवी = (१) परव॑तीय अधित्यका, उच्चभूमि। (२) पवेतीय उपत्यका, पादभुमि । (३) तथा समतल भूमि । इन से श्रधोभूमि =कबर,

English

With keen glance guard the sacrifice, O Agni: thou Sage, con- duct it onward to the Vasus. Let not the fiends, O Man-Beholder, harm thee burning against the Rākshasas to slay them.

अध्याय 8

श्लोक 3.4

अग्ने॒ त्वचं॑ यातु॒धान॑स्य भिन्धि हिं॒स्राशनि॒र्हर॑सा हन्त्वेनम्।प्र पर्वा॑णि जातवेदः शृणीहि क्र॒व्यात् क्र॑वि॒ष्णुर्वि चि॑नोत्वेनम्

agne tvacaṃ yātudhānasya bhindhi hiṃsrāśanirharasā hantvenam| pra parvāṇi jātavedaḥ śṛṇīhi kravyāt kraviṣṇurvi cinotvenam

हिन्दी अर्थ

¦ ॥ । (चिकितुषे, जनाय) ज्ञानी जन के लिये (सविज्ञानम्) सुगमता से ज्ञेय ॥ (अहये) साप के लिये (प्रददातु) प्रदान करे, (वा) अथवा (निक्छतेः) कृच्छापत्ति की (उपस्थे) गोद में (आदधातु) स्थापित करे) २१८ “ अथववेद-भाष्य का०८। सू०४ सन्तानो से (निहीयताम्) विहीन हो जाय । होने का श्रभिप्रायहै कि वह सन्तानोंसेमिलन सके! तथा वहरसग्रौर

English

Look on the fiend, ‘mid men, as Man-Beholder: rend thou his three extremities in pieces. Demolish with thy flame his ribs, O Agni: the Yātudhāna’s root destroy thou triply.

अध्याय 8

श्लोक 3.5

यत्रे॒दानीं॒ पश्य॑सि जातवेद॒स्तिष्ठ॑न्तमग्न उ॒त वा॒ चर॑न्तम्।उ॒तान्तरि॑क्षे॒ पत॑न्तं यातु॒धानं॒ तमस्ता॑ विध्य॒ शर्वा॒ शिशा॑नः

yatredānīṃ paśyasi jātavedastiṣṭhantamagna uta vā carantam| utāntarikṣe patantaṃ yātudhānaṃ tamastā vidhya śarvā śiśānaḥ

हिन्दी अर्थ

(सः) वह (तन्वा) निज शरीर से (च) भौर (तना) सन्तानो से पुथिवियों से (अधः) नीचे (भस्तु) हो जाय तथा (शरस्य) इसका (यशः) द्मधिकारियो ! (यः) जो (मा) मे (दिवा) दिनमे (यःच) भौरजो (नकतम्) रात में (दिप्सति) धोखा देना चाहता है, या मार देना चाहता अधिक ऋजु है, (तत् इत्) उस अधिक ऋजु की (सोमः) सोम (अवति)

English

Thrice, Agni, let thy noose surround the demon who with his falsehood injures holy Order.

अध्याय 8

श्लोक 3.6

य॒ज्ञरिषूः॑ सं॒नम॑मानो अग्ने वा॒चा श॒ल्याँ अ॒शनि॑भिर्दिहा॒नः ।ताभि॑र्विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न् प्रती॒चो बा॒हून् प्रति॑ भङ्ग्ध्येषाम्

yajñariṣūḥ saṃnamamāno agne vācā śalyā~ aśanibhirdihānaḥ | tābhirvidhya hṛdaye yātudhānān pratīco bāhūn prati bhaṅgdhyeṣām

हिन्दी अर्थ

मन्त्र (८) मे अनृत वचनो का कथन हुभा है 1 श्रनृत वचनो कौ पहचान के लिये मन्व (१२) मे अनृत ग्रौर सत्य कौ पहचान का वणेन हुभ्रा है। ज्ञानी जन सुगमता से जान लेता है । “सत् वह वस्तु प्रधिक "ऋजु" होतारहै, सीधे मागं वाला होता है, ग्रौर “अनृत कुटिल अर्थात् टे मागेकाहोताहै। सत्यके कथन के लिये कल्पित बातें नहीं बनानी होती, परन्तु प्रसव्य के कथन के लिये कई कतित बातों का मिश्रण करना पडता है । इसलिये सत्य कामागं ऋजु है, ग्रौरभसत्यका मागे जन जब भात्मनिरीक्षण करताहैतो वहु अनुभव करलेता हैकिर्मैजो साधारण अनुभूतियों का विषय है । करना । नवाडउ सोमं जिनं हिनोति न त्रियं मिथुया धारय॑न्तम् । ल १५8 चतुथं सूक्त 1 त वणेन है । ५ है ध तथा (सोमः) सेनाध्यक्ष (वै उ) निश्चय से (वृजिनम्) पाप ओौर पापी को यदि मैने कोई अनृतव्यवहार किया हैया सैनिकों तथा भन्य शासकरूपी

English

Loud roaring with thy flame, Jātavedas, fetter him in the pre- sense of the singer. Agni, what curse the pair this day may utter, what rude rough word the worshippers have

अध्याय 8

श्लोक 3.7

उ॒तार॑ब्धान्त्स्पृनुहि जातवेद उ॒तारे॑भा॒णाँ ऋ॒ष्टिभि॑र्यातु॒धाना॑न्।अग्ने॒ पूर्वो॒ नि ज॑हि॒ शोशु॑चान आ॒मादः॒ क्ष्विङ्का॒स्तम॑द॒न्त्वेनीः॑

utārabdhāntspṛnuhi jātaveda utārebhāṇā~ ṛṣṭibhiryātudhānān| agne pūrvo ni jahi śośucāna āmādaḥ kṣviṅkāstamadantvenīḥ

हिन्दी अर्थ

(न) नहीं (हिनाति) बढ़ता या बढने देता, तथा (मियुया) मिथ्या अर्थात् देवों के साथ कोह अनुचित व्यवहार कियादहैतोतु मुभे लज्जित खा अपः मानित कर, ओर सुभः पर क्रोध प्रकट कर, परन्तु जिस किसी अधिकारीने मुम पर "यातुधान" होने का आरोप किया है, यदि वह् भ्रारोप न्यायालय = यातना का निधान, यतना देने वाला 1 "न्यायालय" इसलिये कि वेदा- नुसार दण्डविधान न्यायालय द्वारा होता है । इसलिये कहा है कि “धर्माय समाचरम्” श्रालभते (यजु° ३०।६) ; धमय == राजधूमं की व्यवस्था यदि वाहमच॑तदेवो अस्मि मोधं वा देवाँ अप्युहे अग्ने । प्रनृत को देव मानने वाला मँ हं, (वा) अथवा (मोघम्) व्यथं मे (देवान्)

English

spoken, Each arrowy taunt sped from the angry spirit,—pierce to the heart therewith the Yātudhānas.

अध्याय 8

श्लोक 3.8

इ॒ह प्र ब्रू॑हि यत॒मः सो अ॑ग्ने यातु॒धानो॒ य इ॒दं कृ॒णोति॑ ।तमा र॑भस्व स॒मिधा॑ यविष्ठ नृ॒चक्ष॑स॒श्चक्षु॑षे रन्धयैनम्

iha pra brūhi yatamaḥ so agne yātudhāno ya idaṃ kṛṇoti | tamā rabhasva samidhā yaviṣṭha nṛcakṣasaścakṣuṣe randhayainam

हिन्दी अर्थ

ने श्रदित कियाद, हिसित किया है तो (हृणीषे) मभ लज्जित या जप- देने वाला (श्रस्मि) हूं, (यदिवा) अथवा यदि (पुरुषस्य) भिसी पुरुष के (ब्रायुः) जीवन को (ततप) मैने संतप्त किया है) (अधा) तथा (सः) मानित कर, या मुभ पर क्रोध कर, परन्तु इन के न होते (किम्) क्यो वह् (दशभिः वरेः) १० प्रों से (वियूयाः) वियुक्त हो जाय (यः) जौक्रि (मा) मभ (मोघम्) व्यथं मे (ग्राह) कहताहै (यातुधान इति) किह “यातुघान'' । प्र्थात् जो मु पर यातुधान हने का दोषारोपण करता द) यातुधान यातनाओं का निधान । हृणीडः रोषणे लज्जायाज्च (कण्ड्वादिः) ; तथा हृणिः करधनाम (निषं० । २।१३) ; हृणीयते करध्यतिक्ममं (निषं ० २।१२) । देवान् = दिवु क्रोडा,

English

With fervent heat exterminate the demons: destroy the fiends with glow and flame, O Agni. Destroy with fire the foolish gods’ adorers: destroy the insatiate fiercely-burning creatures.

अध्याय 8

श्लोक 3.9

ती॒क्ष्णेना॑ग्ने॒ चक्षु॑षा रक्ष य॒ज्ञं प्राञ्चं॒ वसु॑भ्यः॒ प्र ण॑य प्रचेतः ।हिं॒स्रं रक्षां॑स्य॒भि शोशु॑चानं॒ मा त्वा॑ दभन् यातु॒धाना॑ नृचक्षः

tīkṣṇenāgne cakṣuṣā rakṣa yajñaṃ prāñcaṃ vasubhyaḥ pra ṇaya pracetaḥ | hiṃsraṃ rakṣāṃsyabhi śośucānaṃ mā tvā dabhan yātudhānā nṛcakṣaḥ

हिन्दी अर्थ

जोकरिसाघ्राज्य के न्यायाधीश के सामने मपर यातुधान होने का मृत्युदण्ड दिया जाय या पूत्रो से अलग कर दिया जाय । १० पत्र इसलिये कठा है, इससे श्रधिक की नहीं । यथा “दशास्यां पुत्रानाधेहि पतिमेकादशं कृधि” (यः) जो (अयातुम्, मा) यातना न देने वाले मुभ को (यातुधान इति . + जह्) है यातुधान ! इस प्रकार कहता है, सम्बोधित करता है, (वा) तया (यः रक्षाः) जो राक्षस स्वभाव वाला अपने आप को (आह) कहता है कि

English

May Gods destroy to-day the evil-doer: may uttered curses turn again and strike him. Let arrows pierce the liar in his vitals, and Visva’s net enclose the Yātudhāna.

अध्याय 8

श्लोक 3.10

नृ॒चक्षा॒ रक्षः॒ परि॑ पश्य वि॒क्षु तस्य॒ त्रीणि॒ प्रति॑ शृणी॒ह्यग्रा॑ ।तस्या॑ग्ने पृ॒ष्टीर्हर॑सा शृणीहि त्रे॒धा मूलं॑ यातु॒धान॑स्य वृश्च

nṛcakṣā rakṣaḥ pari paśya vikṣu tasya trīṇi prati śṛṇīhyagrā | tasyāgne pṛṣṭīrharasā śṛṇīhi tredhā mūlaṃ yātudhānasya vṛśca

हिन्दी अर्थ

छल कपट न करे, या तेरी हिसान करदं। काट डाल ! (तस्य)उसकी (पृष्टीः) छाती ओर पीठ के अङ्गं को (हरसा) संहारी शस्त्र हारा (शुणीहि) काट डाल, (यातुधानस्य ) यातना देने वाले भागकेतीन अग्रह, सिर तथादो बाहुं । मूल काथं ठीता है जड । वृक्ष का मूल अर्थात् जड़ नीच को ओर होती है । ्रतः यातुधान कं मूलका ग्रभिप्राय है शरीर के निचले अद्ध ।येततीनरहँ। घुटनों से उपरके अखं ये नीचे के विविध अंग हैं । सिर, पृष्टीः भौर बाहुओं से नीचे है) कृा० ८० का० ठ सू०३ अयववंद-माघ्य २०५

English

Food eatable, uneatable, I make all poisonless for thee. We give thee over as a charge to Day and Night, in trust to both.

अध्याय 8

श्लोक 3.11

त्रिर्या॑तु॒धानः॒ प्रसि॑तिं त एत्वृ॒तं यो अ॑ग्ने॒ अनृ॑तेन॒ हन्ति॑ ।तम॒र्चिषा॑ स्फू॒र्जय॑न् जातवेदः सम॒क्षमे॑नं गृण॒ते नि यु॑ङ्ग्धि

triryātudhānaḥ prasitiṃ ta etvṛtaṃ yo agne anṛtena hanti | tamarciṣā sphūrjayan jātavedaḥ samakṣamenaṃ gṛṇate ni yuṅgdhi

हिन्दी अर्थ

यातुधान को प्रधानमन्त्री तीन बार कारागार मे बन्द करे । यातुधान को लेकर तृप्त होने वालों को, जो किं (शौशुचतः) प्रत्यन्त हनन कम म प्रदीप्त होते हैँ, उन्हँ (परा) पराडः मुख करके (शृणीहि) नष्ट कर । के अस्त्र-शस्तरं का वर्णन हुभा है । पराच देवा जिनं शणन्त॒ परत्यगेनं शुपथां यःतु सृष्टाः । सेनाधिपति (वृजिनम्) पापी तथा कुटिल को (पराशुणन्तु) नष्ट करे, : पापी तथा कुटिल, शपथदाता, तथा वाणी द्वारा धोखा देकर चोरी करने वाला, ये सब यातुधान दहै । कोईभी प्रजाजन इन्हे रस्सियों स्रादि । ¢ द्वारा बान्घ सकता है। शरवः शर ओौर शरुमे भेद प्रतीतहोताहै। ।

English

Keep him for me from stingy fiends, from those who fain would feed on him. A hundred, yea, ten thousand years we give thee, ages two, three, four.

अध्याय 8

श्लोक 3.12

यद॑ग्ने अ॒द्य मि॑थु॒ना शपा॑तो॒ यद् वा॒चस्तृ॒ष्टं ज॒नय॑न्त रे॒भाः ।म॒न्योर्मन॑सः शर॒व्या॒३जाय॑ते॒ या तया॑ विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न्

yadagne adya mithunā śapāto yad vācastṛṣṭaṃ janayanta rebhāḥ | manyormanasaḥ śaravyā3jāyate yā tayā vidhya hṛdaye yātudhānān

हिन्दी अर्थ

उन्हे तथा (रेभाः) परमेश्वर के स्तोता ( यत्) जो (वाचः) वाणी की (तृष्ट) कटुता (जनयन्त) पेदा करते हँ उन्हे तथा (यातुधानान्) जो यातनादेने वाले है, उन्हें (या) जो कि (मनसः मन्योः) मानसिक मन्यु से (णरब्या) दषु (जायते) पैदा होती है (तया) उस दरा (हृदये) उनके हृदयो को । प्रयोग, इनके करने वाले भी यातुधान है, यातना देने वाले है, इन्हे मानसिक करोधरूपी वाण द्वारा हृदयो मे बीधना चाहिए, ताक्रि ये हाद्िक कष्ट

English

May Indra, Agni, all the Gods, with willing favour look on thee. To Autumn we deliver thee, to Winter, Spring and Summer’s care.

अध्याय 8

श्लोक 3.13

परा॑ शृणीहि॒ तप॑सा यातु॒धाना॒न् परा॑ग्ने॒ रक्षो॒ हर॑सा शृणीहि ।परा॒र्चिषा॒ मूर॑देवान्छृणीहि॒ परा॑सु॒तृपः॒ शोशु॑चतः शृणीहि

parā śṛṇīhi tapasā yātudhānān parāgne rakṣo harasā śṛṇīhi | parārciṣā mūradevānchṛṇīhi parāsutṛpaḥ śośucataḥ śṛṇīhi

हिन्दी अर्थ

अनुभव करं । रेभ स्तोतृनाम (निघं० ३।१६) । मन्युः मननपूवेक क्रोध, पराचिषा मूरदेवान् छणीदि परासुठपः शोशुचतः दणीदहि ॥१३॥ ( ताला (पौरपेयेण) पुरुष करे (यः) जो (अष्व्येन) अण्व के (विषा) मांस दारा (पुना) या अन्य किसी पशु के मांस द्वारा( समङकते) अपने- को (तपसा) तापक-शस्तर-मस्तर दवारा (परा शृणीहि) पराडः मुखे कर, नष्ट कर, (रक्षः) राक्षस स्वभाव वाले को (परा) पराः मूख करके (हरसा) अहृन्तव्या गौ का हुनन कर उसके (क्षीरम्) दूध को (भरति-=हूरति)

English

We trust thee with auspicious years wherein the plants and herbs grow up. Death is the lord of bipeds, Death is sovran lord of quadrupeds.

अध्याय 8

श्लोक 3.14

परा॒द्य दे॒वा वृ॑जि॒नं शृ॑णन्तु प्र॒त्यगे॑नं श॒पथा॑ यन्तु सृ॒ष्टाः ।वा॒चास्ते॑नं॒ शर॑व ऋच्छन्तु॒ मर्म॒न् विश्व॑स्यैतु॒ प्रसि॑तिं यातु॒धानः॑

parādya devā vṛjinaṃ śṛṇantu pratyagenaṃ śapathā yantu sṛṣṭāḥ | vācāstenaṃ śarava ṛcchantu marman viśvasyaitu prasitiṃ yātudhānaḥ

हिन्दी अर्थ

फटकारे। प्रजा के भले के लिए यहु कार्यं वह् अपने सामने कराए याकरे। । मांसभक्षकों, तथा गौओों को मार कर उनके दूध का क्षय करने £ ¦ नहीं काटना, अपितु उसके निर्णीत नियमों क द्वारा जल्लाद प्रादि ने सिर परेणान् देवः सविता ददातु परां भागमोषधीनां जयन्ताम् ॥१ (यातुधानाः) यातना देने वाले (गवाम्) मौभों के (विषम्) विष ब्रथात्

English

Away I bear thee from that: Death the ruler: be not thou afraid. Thou, still uninjured, shalt not die: be not afraid; thou shalt not die.

अध्याय 8

श्लोक 3.15

यः पौरु॑षेयेण क्र॒विषा॑ सम॒ङ्क्ते यो अश्व्ये॑न प॒शुना॑ यातु॒धानः॑ ।यो अ॒घ्न्याया॒ भर॑ति क्षी॒रम॑ग्ने॒ तेषां॑ शी॒र्षाणि॒ हर॒सापि॑ वृश्च

yaḥ pauruṣeyeṇa kraviṣā samaṅkte yo aśvyena paśunā yātudhānaḥ | yo aghnyāyā bharati kṣīramagne teṣāṃ śīrṣāṇi harasāpi vṛśca

हिन्दी अर्थ

निरस्त कर दे, देशनिकाला दे दे, (ओषघीनाम्) व्रीहि-यव शादि ओषधिर्यौ विषम् उदकनाम (निधं १।१२) । यातुधानो को गोके दूध के स्थानं ; मे गोमूत्ररूपी जल पिलाना चाहिए । तथा पृथिवीवासियों के भने के लिये इन दृष्टो को मृत्युदण्ड देना चाहिए, तथा देशनिकाले का दण्ड देना का दूध है, (तस्य ) उसका (मा आशीत्) न भक्षण करे (यातुधानः) गौ १. तथा सग्णावस्था में भरौषधोपचार से वञ्चित कर दिये जांय । । को यातना देने वाला । (यतमः) जो यातुधान (पीयूषम्) पेय दुग्ामृत को

English

Here where I am men do not die or go to lowest depths of gloom. Here verily all creatures live, the cow, the horse, the man, the beast,

अध्याय 8

श्लोक 3.16

वि॒षं गवां॑ यातु॒धाना॑ भरन्ता॒मा वृ॑श्चन्ता॒मदि॑तये दु॒रेवाः॑ ।परै॑णान् दे॒वः स॑वि॒ता द॑दातु॒ परा॑ भा॒गमोष॑धीनां जयन्ताम्

viṣaṃ gavāṃ yātudhānā bharantāmā vṛścantāmaditaye durevāḥ | paraiṇān devaḥ savitā dadātu parā bhāgamoṣadhīnāṃ jayantām

हिन्दी अर्थ

। को यातना देता है उसे गोषुगध से वञ्चित कर देना चाहिए (मन्त्र १६) । सहमूराननुं दह करव्यादो मा ते हेत्या सं्षत देव्यांयाः ॥१८॥ यातना दने वालों को (मृणसि) तु मारता रहा है, (रक्षांसि) राक्षस-स्वभाव वाले यातुधान (त्वा) तुमं (पृतनासु) युद्धो मे न जिग्युः) नहीं जीत पाए। (ऋन्यादः) इन मांसभक्षियों को (सहमूरान्) जो कि मूढता के साथ विद्यमान पाहि) सब ओरसे हमारी रक्ना कर । (सखा) जंसे सखा (सखायम्) सखा की पाति रक्षा करताहै, तथा (ग्रजरः) जरारहित यूवा पुत्र ५); “शफारुजः आरुजासि'' (अथव ° २०।६४।६) ; शफन इव ओहसे"' ¦

English

Here where this holy prayer is used, a rampart that protecteth life. Let it preserve thee from thy peers, from incantation, from thy friends.

अध्याय 8

श्लोक 3.17

सं॒व॒त्स॒रीणं॒ पय॑ उ॒स्रिया॑या॒स्तस्य॒ माशी॑द् यातु॒धानो॑ नृचक्षः ।पी॒यूष॑मग्ने यत॒मस्तितृ॑प्सा॒त् तं प्र॒त्यञ्च॑म॒र्चिषा॑ विध्य॒ मर्म॑णि

saṃvatsarīṇaṃ paya usriyāyāstasya māśīd yātudhāno nṛcakṣaḥ | pīyūṣamagne yatamastitṛpsāt taṃ pratyañcamarciṣā vidhya marmaṇi

हिन्दी अर्थ

गौ के खुर के स्पशं द्वारा मग्न कर दिये जाते हँ । रेभे=रेभ है परमेश्वर का नाम (निषं० ३।१६) । अथवंवत्; अथर्वा = “यवेतिः चरतिकर्मा, अकारः जाती है । उस द्वारा योगी के राजस-तामस कमं विनष्ट हो जतिहैँ । केहन्ताकोजलादेने का दण्ड देताहै। न्योष=नि (नितराम्) +उष धृषदर्णं दिवेदिंषे हन्तारं भङ्गुराव॑तः ॥२२॥

English

Live very long, be healthy, be immortal: let not the vital breath forsake thy body. One and a hundred modes of death, dangers that may be over- come,

अध्याय 8

श्लोक 3.18

स॒नाद॑ग्ने मृणसि यातु॒धाना॒न् न त्वा॒ रक्षां॑सि॒ पृत॑नासु जिग्युः ।स॒हमू॑रा॒ननु॑ दह क्र॒व्यादो॒ मा ते॑ हे॒त्या मु॑क्षत॒ दैव्या॑याः

sanādagne mṛṇasi yātudhānān na tvā rakṣāṃsi pṛtanāsu jigyuḥ | sahamūrānanu daha kravyādo mā te hetyā mukṣata daivyāyāḥ

हिन्दी अर्थ

सदश (परिधीमहि) परिधिरूपमें स्थापित करते हँ।जोतु कि (घुष- हणम्) धषेकरूप वाला है, ओर (दिवेदिवे) श्राए-दिन (भङगुरावतः) भग्न हो जाने वाले यातुधानो का (हन्तारम्) हनन करने वाला है । पुरम् = जसे किले यानगर की परिधि प्रजाकौ रक्नाकरतीहै वसे तू बलवान् हमारी रक्षा करता है । तेरा स्वरूप यातुधानौ का धषेक है। तेरे स्वल्प को देखते ही यातुधानो के धेयं भग्न हो जाते ह । २. श्रयवा म्मासानी से भग्न हौ जाने वाले । का०्य सू०.३ ये ते श्रद्ध जरं जातवेदसितममरैती ब्र्मसंशरि म कि मः शोचिषा) ताभ्यां दरहहैमथिदास॑न्तं किमीदिन पत्यश्मचिषां जातवेद वि निंव

English

May Gods deliver thee from this when Agni, dear to all men, bids. Body of Agni prompt to save, slayer of fiends and foes art thou,

अध्याय 8

श्लोक 3.19

त्वं नो॑ अग्ने अध॒रादु॑द॒क्तस्त्वं प॒श्चादु॒त र॑क्षा पु॒रस्ता॑त्।प्रति॒ त्ये ते॑ अ॒जरा॑स॒स्तपि॑ष्ठा अ॒घशं॑सं॒ शोशु॑चतो दहन्तु

tvaṃ no agne adharādudaktastvaṃ paścāduta rakṣā purastāt| prati tye te ajarāsastapiṣṭhā aghaśaṃsaṃ śośucato dahantu

हिन्दी अर्थ

मागो वाले (अरतिभिः) सनि.दामक् अस्तौ दा जह, न १ संधिते) जो कि वेदोवत विधि दवारा सम्यक्-तीण किये गष ह, ) है ( १) विषप्रयोग दवरो । (र) श्रांखो प॑र तीक्ष्ण परकश 'ाल कर ॥ । लेने-वाले “पर गुप्तचर” को (अविषा) अवि नामक ॥ अस्त्रो के द न चौँधिथा कर ।' (३) "अस्त्रौ कै अग्रभागे तपाने वाले ह क लगाकर † ऋवेदं ( ०।८७२३) "मे '.श्रजिभिः' के स्थान. य ॥ "क प्रयोग हंथा है! ऋष्टिः आयुध . अ्थवण र त ।७.) . न कलिय । । = ध युमिरार्िंवि ः । 21 द करं श्नु त्य ॥

English

Yea, banisher of malady, the healing balm called Pūtudru. A prayer for the destruction of demons

अध्याय 8

श्लोक 3.20

प॒श्चात् पु॒रस्ता॑दध॒रादु॒तोत्त॒रात् क॒विः काव्ये॑न॒ परि॑ पाह्यग्ने ।सखा॒ सखा॑यम॒जरो॑ जरि॒म्णे अग्ने॒ मर्ताँ॒ अम॑र्त्य॒स्त्वं नः॑

paścāt purastādadharādutottarāt kaviḥ kāvyena pari pāhyagne | sakhā sakhāyamajaro jarimṇe agne martā~ amartyastvaṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

परिणाम था किं निज जनपदन्यापी सदाचार तथा सात्विक वृत्ति के सूक्त ४ अघार पर केकय जनपद का महा राज यह् उद्धोषित करसकाथाक्रि = ¦ ( ध दष्कमियौं को गह्रे अन्धेरे गढ़ या कूप मे डाल कर बीन्धना न । (५) मांसभक्षकों की पसलियो, छाती को बीन्धना (मन्व ५) (७) मूठ दोषारोपणं द्वारा पवित्रमन वाले शासक के निन्दक को प) ९०६३ शु! ५ क भद

English

O Jātavedas, armed with teeth of iron, enkindled with thy flame, attack the demons. Seize with thy tongue the foolish gods’ adorers: rend, put with- in thy mouth the raw-flesh eaters.

अध्याय 8

श्लोक 3.21

तद॑ग्ने॒ चक्षुः॒ प्रति॑ धेहि रे॒भे श॑फा॒रुजो॒ येन॒ पश्य॑सि यातु॒धाना॑न्।अ॒थ॒र्व॒वज्ज्योति॑षा॒ दैव्ये॑न स॒त्यं धूर्व॑न्तम॒चितं॒ न्योऽष

tadagne cakṣuḥ prati dhehi rebhe śaphārujo yena paśyasi yātudhānān| atharvavajjyotiṣā daivyena satyaṃ dhūrvantamacitaṃ nyo'ṣa

हिन्दी अर्थ

(१०) भूठा दोषारोप करने वाले को निज परिवार से पृथक् कर देना कर्मो वाला करो । (वृषणा) है वाणो की वर्षा करने वालो ! (तमोवृधः) विरोष मे सोम है सेनाध्यक्त या सेनानायक, जो कि सेना के अग्रभाग में स्थित हआ । वैदिक दण्ड-विधान उग्र है। इसके होते राजकर्मचारी तथा प्रजाये त (५३, प्रथरवंवेर-भष्यि का०प८। सू. काप सू० ४ अथवेवेद-भाष्य करने वाले प्रति (हणम्) उसके हिंसक (वधम्) आयुरध कै (दिवः)

English

Apply thy teeth, the upper and the lower, thou who hast both, enkindled and destroying. Roam also in the air, O King, around us, and with thy jaws assail the wicked spirits.

अध्याय 8

श्लोक 3.22

परि॑ त्वाग्ने॒ पुरं॑ व॒यं विप्रं॑ सहस्य धीमहि ।धृ॒षद्व॑र्णं दि॒वेदि॑वे ह॒न्तारं॑ भङ्गु॒राव॑तः

pari tvāgne puraṃ vayaṃ vipraṃ sahasya dhīmahi | dhṛṣadvarṇaṃ divedive hantāraṃ bhaṅgurāvataḥ

हिन्दी अर्थ

। मायु को (तक्षतम्) घडो, निमित करो, (येन) जिस द्वारा (वावृधानम्) वे हृषु (रक्षः) राक्षस-वरग को (निजूर्वथः) तुर हिंसित करते ह । ८ । एतु सोमः” (यजु° १७।४०) मेँ सोम को “पुरः एतु कहा है । मन्त्र म , ह्यव कत्यादे घारवक्षसे देषो धत्तसनवायं कमादिनै ॥२॥ , सदा (द्वेषः धत्तम्) देष धारण करो। के प्रति सदा द्वेष रसने-का विधान हृग्रा'हे

English

Pierce through the Yātudhāna’s skin, O Agni; let the destroying dart with fire consume him. Rend his joints, Jātavedas! let the eater of raw flesh, seeking flesh, tear and destroy him.

अध्याय 8

श्लोक 3.23

वि॒षेण॑ भङ्गु॒राव॑तः॒ प्रति॑ स्म र॒क्षसो॑ जहि ।अग्ने॑ ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॒ तपु॑रग्राभिर॒र्चिभिः॑

viṣeṇa bhaṅgurāvataḥ prati sma rakṣaso jahi | agne tigmena śociṣā tapuragrābhirarcibhiḥ

हिन्दी अर्थ

मास-मक्षकों को (परणनि) उन की पसलियो-प्रर (दिष्परतम्) उह बंधो ओौर (प्र विध्यतम्) बींधो । (यतः) जहां से (एषाम), इन में से (एकः चन) एक (पुनः) फिर (न उदयत्) न ऊपर आए, तथा (वाम्) तुमः दोनो का (तद्) वह (मन्युमत् शवः) क्रोधसंवलित बल: (सहसे) उन के. पराभव के लिये (्रस्तु) हो । प्रयःसारः । अयः सारमयेहैननसाधनेरायुधेः (सायण) ॥ 1 + “वत्र कृप॑नाम” (निघं० ३।२३) । कूप अन्यकारमय हौ 1 कूप मे इन्दं ।

English

Where now thou seest, Agni Jātavedas! a Yātudhāna, standing still or roaming. Or one that flieth through the air’s mid-region, kindled to fury as an archer pierce him.

अध्याय 8

श्लोक 3.24

वि ज्योति॑षा बृह॒ता भा॑त्य॒ग्निरा॒विर्विश्वा॑नि कृणुते महि॒त्वा।प्रादे॑वीर्मा॒याः स॑हते दु॒रेवाः॒ शिशी॑ते॒ शृङ्गे॒ रक्षो॑भ्यो वि॒निक्ष्वे॑

vi jyotiṣā bṛhatā bhātyagnirāvirviśvāni kṛṇute mahitvā| prādevīrmāyāḥ sahate durevāḥ śiśīte śṛṅge rakṣobhyo vinikṣve

हिन्दी अर्थ

ृद्रंसोभा पर वां भूतु विश्वतं ईयं मति; ककष्यादेवव 'वजिनां फक कर, या डाल कर, वाण आदि द्वारा इन्हें -बींध डालने का विधान हुं ॑ । है । यह राजनैतिक दण्ड है,जो कि राजपुरुषो द्वारा दिया ऊषा है । प्रत्येक । के० ८ सू० ४ अथवेवेद-भाष्य ् २१७ (न °" " राक्षस स्वभाव वाले शत्रु राजा का (हतम्) तुम दोनों हनन करो। राजा को (सुगम्) सुगम जीवन का सुख (मा भूत्) न हो, धः ) ज

English

Bending thy shafts through sacrifices, Agni! dipping thine arrows in the hymn to point them, Pierce to the heart therewith the Yātudhānas, and break their arms uplifted to attack thee.

अध्याय 8

श्लोक 3.25

ये ते॒ शृङ्गे॑ अ॒जरे॑ जातवेदस्ति॒ग्महे॑ती॒ ब्रह्म॑संशिते ।ताभ्यां॑ दु॒र्हार्द॑मभि॒दास॑न्तं किमी॒दिनं॑ प्र॒त्यञ्च॑म॒र्चिषा॑ जातवेदो॒ वि नि॑क्ष्व

ye te śṛṅge ajare jātavedastigmahetī brahmasaṃśite | tābhyāṃ durhārdamabhidāsantaṃ kimīdinaṃ pratyañcamarciṣā jātavedo vi nikṣva

हिन्दी अर्थ

उपक्षय करता है ¦! एवैः अयनैः व्यवहारः (निरुक्त २।७।२५; क सव प्रोर निपटी होती है । (वाम्) तुम दोनों के लिये (याम्) जिस ¦ (होत्राम्) वेदवाणी को, (मेधया) विचार पुवेक, (परिहिनोमि) तुम्हारी ¦ करते ह । ॥ राष्ट्र के दुष्करम को न भले, अपितु उसका स्मरण कर हिसिक के , विनाश । ग्रोरसोमको दियाहै। होत्रा=वेदवाणी “होत्रा वाड नाम" (निघं० पाकेन मनसा) परिपक्व या पवित्र मन से (चरन्तम्) शासन कायं मे क हए (मा) मुभे प्रधानमन्त्री को (यः) जो (ग्रनुतेभिः वचोभिः)

English

Rescue the captives also, Jātavedas! yea, those whom Yātudhā- nas’ spears have captured. Strike down that fiend, blazing before him, Agni! Let spotted carrion-eating kites devour him.

अध्याय 8

श्लोक 3.26

अ॒ग्नी रक्षां॑सि सेधति शु॒क्रशो॑चि॒रम॑र्त्यः ।शुचिः॑ पाव॒क ईड्यः॑

agnī rakṣāṃsi sedhati śukraśociramartyaḥ | śuciḥ pāvaka īḍyaḥ

हिन्दी अर्थ

विद्यमान न रहे नष्टदहो जाय, (इव) जंसे कि ४ ) मूद्री द्वारा । अरैये वा तान् परददातु सोम् आ वां दधातु निकरतेरूपस्थं ॥९॥ ॑ इसलिये कहते हँ कि ये राष्ट्रपति मिलकर सम्राट् का वरण करते हैः चुनाव है । राजा श्रौर उसके मन्व को “नृपती कहा है सेनाध्यक्ष । परन्तु वेदिक राजनीति के अनुसार शासन के लिये “अग्नि

English

Here tell this forth, O Agni: whosoever is, he himself, or acteth as, a demon, Grasp him, O thou most youthful, with thy fuel: to the Man Seer’s eye give him as booty.

अध्याय 8

श्लोक 4.1

शत्रुदमनम्।१-२५ चातनः।इन्द्रसोमौ।जगती, ८-१४, १६-१७, १९, २२, २४ त्रिष्टुप्, २०,२३ भुरिक्, २५ अनुष्टुप्।इन्द्रा॑सोमा॒ तप॑तं॒ रक्ष॑ उ॒ब्जतं॒ न्यऽर्पयतं वृषणा तमो॒वृधः॑ ।परा॑ शृणीतम॒चितो॒ न्योऽषतं ह॒तं नु॒देथां॒ नि शि॑शीतम॒त्त्रिणः॑

śatrudamanam| 1-25 cātanaḥ| indrasomau| jagatī, 8-14, 16-17, 19, 22, 24 triṣṭup, 20,23 bhurik, 25 anuṣṭup| indrāsomā tapataṃ rakṣa ubjataṃ nya'rpayataṃ vṛṣaṇā tamovṛdhaḥ | parā śṛṇītamacito nyo'ṣataṃ hataṃ nudethāṃ ni śiśītamattriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(महता वधेन वधकारो महास्त्र द्वारा (हन्तु) मार डले, जन्तोः) स जन्मधारियों से (अधमः) निकृष्ट वहु (पदीष्ट) पतन करे, वतमान मन्त्र मे भी मन्त्र (१५) की भावना है (अप गूहमाना) छिपाती हई (नक्तम्) रात में (खगेला इव) उलृकिनौ की तरह (प्र जिगाति) गति करती है हमारे नगर में (सा) वह् (अनन्तम्)

English

The fiend who smears himself with flesh of cattle, with flesh of horses and of human bodies, Who steals the milch-cow’s milk away, O Agni,—tear off the heads of such with fiery fury.

अध्याय 8

श्लोक 4.2

इन्द्रा॑सोमा॒ सम॒घशं॑सम॒भ्य॑१घं तपु॑र्ययस्तु च॒रुर॑ग्नि॒माँ इ॑व ।ब्र॒ह्म॒द्विषे॑ क्र॒व्यादे॑ घो॒रच॑क्षसे॒ द्वेषो॑ धत्तमनवा॒यं कि॑मी॒दिने॑

indrāsomā samaghaśaṃsamabhya1ghaṃ tapuryayastu caruragnimā~ iva | brahmadviṣe kravyāde ghoracakṣase dveṣo dhattamanavāyaṃ kimīdine

हिन्दी अर्थ

निमित मणि मे, सूक्त. में कृथित वणेन उपपन्न हो सकते है, यह् असम्भव सायणाचाये' ने अथवं० २।११।२ मे भी इसे तिलक वृक्ष द्वारा निमित कहौ “छछ्क्त्य'” को सूरि कहा ' है 1 सूरिः का अथं सायणाचायं ने “अभिज्ञः किया ते म देवाः पुरोष्िता प्रतीचीः कृत्याः परंतिसरर॑नम्तु ॥५॥ : £; नै (मे) मुभ (आह) कहा है (तद) उसे ही (सोमः) सेनाध्यक्षं ने (ग्राह) कहा है, (बृहस्पतिः). वहती सेनां के प्रधिषति ने, (सविता) सविर्तान (इनदरः) सञ्राट् ने (तत्) उसे कहा है । (ते) वे (देवाः) -दिव्यगुणों बाले अधिकारी (मे) भेरे तिये (पुरोहिताः) पुरोहितरूपःमेहः या मेरे परो गामं ह्पं मे हितकारी हु, वे (प्रतीचीः) मेरे प्रति आने वाली (कृत्याः)

English

Rākshasas, O Agni, with thy sharpened glow, with rays that flash with points of flame.

अध्याय 8

श्लोक 4.3

इन्द्रा॑सोमा दु॒ष्कृतो॑ व॒व्रे अ॒न्तर॑नारम्भ॒णे तम॑सि॒ प्र वि॑ध्यतम्।यतो॒ नैषां॒ पुन॒रेक॑श्च॒नोदय॒त् तद् वा॑मस्तु॒ सह॑से मन्यु॒मच्छवः॑

indrāsomā duṣkṛto vavre antaranārambhaṇe tamasi pra vidhyatam| yato naiṣāṃ punarekaścanodayat tad vāmastu sahase manyumacchavaḥ

हिन्दी अर्थ

६० स्वरूप । ये स्लोतांसि तथा नदियां है २३६ मथवेवेद-भाष्य का०८। सुभ. का०८। सु० ५ अथववेद-भाष्य २३७ ओषधियों के दो प्रयोजन होते है, रोगी के दोषों प्र्थाति रोगो को दुर करना ओर उसके शरीर कासंवधेन करना रषष्टरपतिराजा के भीदो प्रयोजन है, राष्टू-शरीरके रोगों कोदूर करना, ओर राष्टर-शरीर का संवधन ों धियौ करना । राष्टू-शरीरके रोगर्हु, चोरी, उकती, लूटमार, व्यभिचार विप्लव + हि प) सटायतासे व्यापार उ्योग, कृषि आदिद्रवारा राष्ट्र कासंवधन करत।

English

voracious fiends. Let sin, Indra and Soma! round the wicked boil, like as a cald- ron set amid the flames of fire.

अध्याय 8

श्लोक 4.4

इन्द्रा॑सोमा व॒र्तय॑तं दि॒वो व॒धं सं पृ॑थि॒व्या अ॒घशं॑साय॒ तर्ह॑णम्।उत् त॑क्षतं स्व॒र्यं१ पर्व॑तेभ्यो॒ येन॒ रक्षो॑ वावृधा॒नं नि॒जूर्व॑थः

indrāsomā vartayataṃ divo vadhaṃ saṃ pṛthivyā aghaśaṃsāya tarhaṇam| ut takṣataṃ svaryaṃ1 parvatebhyo yena rakṣo vāvṛdhānaṃ nijūrvathaḥ

हिन्दी अर्थ

अथो सपरनकरीनो यो निभर्तीमं परिम् ॥१२॥ व्याघ्र के सदुश (भवति) दोता है, (अथो) ओर (सिह) सिह के सदुश होता है, (अथो) ओर (वृषा) अनड्वान् के सदृश सुखवर्षी होता है । (अथो) श्रौर पतिः पशूनाम्" (ग्रथवं० २।३४।१)। इसकी व्याख्या मे सायणाचायं निवत हँ कि “यः पशुपतिः पशूनां पालयिता, शः । साम्राज्य के पशुं का । संवधेन, उत्तम बेलों तथा गौओं का उत्पादन आदिकमं रद्रकेहैं। अग्नि रत्न का (विभति) धारण भौर पोषण करताहै, (एनम्) इसका (न ; विजय भौर पराजय राजा की ही कटी जाती है । दरो साम्रज्याभिपति भी धारण करसंग्राममे विजय पाता) विजि-

English

Against the foe of prayer, eater of gory flesh, the fearful-eyed 127

अध्याय 8

श्लोक 4.5

इन्द्रा॑सोमा व॒र्तय॑तं दि॒वस्पर्य॑ग्नित॒प्तेभि॑र्यु॒वमश्म॑हन्मभिः ।तपु॑र्वधेभिर॒जरे॑भिर॒त्त्रिणो॒ नि पर्शा॑ने विध्यतं॒ यन्तु॑ निस्व॒रम्

indrāsomā vartayataṃ divasparyagnitaptebhiryuvamaśmahanmabhiḥ | tapurvadhebhirajarebhirattriṇo ni parśāne vidhyataṃ yantu nisvaram

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (त्वा) तुभे (कृत्याभिः) घातक सेनाओं द्वारा, (यः त्वा) जो परजाजन (घ्नत) हनन करते ह । वह (सर्वाः दिशः) सब दिशाओंपर(वि राजति) राज्य करता है, पृथिवी नाम (निघं० १।१), उसका धारण करने वाले राजा ॥ मणि सदस्तवी्य बमं देवा अद्रण्वत ॥१५॥ (संजयः) सम्यक् जेता है । (परिपाणः) सव जोरसे रक्षा करने वाला,

English

Kimidin, keep perpetual hate. Indra and Soma, plunge the wicked in the depth, yea, cast them into darkness that hath no

अध्याय 8

श्लोक 4.6

इन्द्रा॑सोमा॒ परि॑ वां भूतु वि॒श्वत॑ इ॒यं म॒तिः क॒क्ष्याश्वे॑व वा॒जिना॑ ।यां वां॒ होत्रां॑ परिहि॒नोमि॑ मे॒धये॒मा ब्रह्मा॑णि नृ॒पती॑ इव जिन्वतम्

indrāsomā pari vāṃ bhūtu viśvata iyaṃ matiḥ kakṣyāśveva vājinā | yāṃ vāṃ hotrāṃ parihinomi medhayemā brahmāṇi nṛpatī iva jinvatam

हिन्दी अर्थ

१. जहां सेनाश्रों का परस्पर श्लेष होता है, मेल तथा दहन होता है; ट्लिष १. व्याघ्र-=बाघ, चीता चीता के समान च्िकर शत्रुं को पकड़ (स्याधंप्रकाश, समुल्लास ६) । २४० परथवेवेद-भाष्य का०८। मू०५ प्रजाजनों को (असपत्नम्) शवरुरहित (कृधि) कर । (नः) हम प्रजाजनों को सेनाध्यक्षतो शूरहोताहीदहै। सम्राट्को भौ शूर होना चाहिए, ताकि साश्राज्य के चहुंदिशि सपत्नो का अभाव हो ओर प्रजाजनों के संमुख आशा श्रौर उत्साह की ज्योति जगमगती रहै

English

support, So that not one of them may ever thence return: so may your wrathful might prevail and

अध्याय 8

श्लोक 4.7

प्रति॑ स्मरेथां तु॒जय॑द्भि॒रेवै॑र्ह॒तं द्रु॒हो र॒क्षसो॑ भङ्गु॒राव॑तः ।इन्द्रा॑सोमा दु॒ष्कृते॒ मा सु॒गं भू॒द् यो मा॑ क॒दा चि॑दभि॒दास॑ति द्रु॒हुः

prati smarethāṃ tujayadbhirevairhataṃ druho rakṣaso bhaṅgurāvataḥ | indrāsomā duṣkṛte mā sugaṃ bhūd yo mā kadā cidabhidāsati druhuḥ

हिन्दी अर्थ

(द्यावापृथिवी ) दयलोक ओर पुथिवीलोक (मे) मेरे के लिये (वर्म) कवच परमेष्वर (मे) मेरे लिये (वर्म ) अपने-आप को कवचलूप मेँ स्थापित करे । ' शक्तियों जओौर विधत ्रपने कवचलरू्प में स्थापितकरने की भ्राथेना खूप (वम) कवच दहै, उसका (विश्वे देवाः) समप्र विजिगीष परकीय संनिक तथा (सवं) परकीय सव श्रधिकारी भी (अति विध्यन्ति न) प्रतिवेधन नहीं वस्था को (असानि) मे प्राप्त हौ जाऊ

English

conquer them. Indra and Soma, hurl your deadly crushing bolt down on the wicked fiend from heaven and

अध्याय 8

श्लोक 4.8

यो मा॒ पाके॑न॒ मन॑सा॒ चर॑न्तमभि॒चष्टे॒ अनृ॑तेभि॒र्वचो॑भिः ।आप॑ इव का॒शिना॒ संगृ॑भीता॒ अस॑न्न॒स्त्वस॑तः इन्द्र व॒क्ता

yo mā pākena manasā carantamabhicaṣṭe anṛtebhirvacobhiḥ | āpa iva kāśinā saṃgṛbhītā asannastvasataḥ indra vaktā

हिन्दी अर्थ

का०ष८।सु०५ भ्रयवेवेद-माष्य २४१ का परस्पर सहयोग ओर सहकारिता कौ भावना अन्तगेभित अथा भन्त- भावित है । इन्द्र ओर अग्नि में से एक-एक कवचरूप नहीं, ग्रपितु इनमें परस्पर मेल ही कवचरूप है । इसी प्रकार की भावना वेदोक्त अन्य “देवता- सहकारिता जाननी चाहिए । बहुलम् = बहु भुखम् लाति आदत्ते इति आ मारक्षद् देवम णिषद्या अरिष्टतातये । इमं मेथिम॑मिसंविशध्वं तनूपानं जिवरूथमोन॑से ।॥२०॥ पालक है, ओर (च्विवरूथम्) तीन साधनों द्वारा शत्रु का निवारक है।

English

from the earth. Yea, fashion from the big clouds your celestial dart wherewith ye burn to death the waxing

अध्याय 8

श्लोक 4.9

ये पा॑कशं॒सं वि॒हर॑न्त॒ एवै॒र्ये वा॑ भ॒द्रं दू॒षय॑न्ति स्व॒धाभिः॑ ।अह॑ये वा॒ तान् प्र॒ददा॑तु॒ सोम॒ आ वा॑ दधातु॒ निरृ॑तेरु॒पस्थे॑

ye pākaśaṃsaṃ viharanta evairye vā bhadraṃ dūṣayanti svadhābhiḥ | ahaye vā tān pradadātu soma ā vā dadhātu nirṛterupasthe

हिन्दी अर्थ

चाहिए कि वह सेनाध्यक्षके निदशानुसार युद्धकायं में सहयोग दे । यह थम् =पदाती सेनिक, अश्वारोही सेनिक, रथारोही सेनिक, ये तीन साधन प्रोर धन (निदधातु) निधिरूप में स्थापित करे, (देवासः) है विजिगीषु (विश्वतः) तथा सब ओर से (दिवा नक्तम्, च) दिन ओर रात (त्वा रक्षतु) तुभे सुरक्षित करे । श्रौर राजकोष के व्यय करने का अधिकार भी इसे दे दे शक्तिप्रदान भौर '

English

demon race. Indra and Soma, cast ye downward from the sky your deadly bolts of stone burning with fiery

अध्याय 8

श्लोक 4.10

यो नो॒ रसं॒ दिप्स॑ति पि॒त्वो अ॑ग्ने॒ अश्वा॑नां॒ गवां॒ यस्त॒नूना॑म्।रि॒पु स्ते॒न स्ते॑य॒कृद् द॒भ्रमे॑तु॒ नि ष ही॑यतां त॒न्वा॒३ तना॑ च

yo no rasaṃ dipsati pitvo agne aśvānāṃ gavāṃ yastanūnām| ripu stena steyakṛd dabhrametu ni ṣa hīyatāṃ tanvā3 tanā ca

हिन्दी अर्थ

१. ग्रथवा "वा = श्त्रसेना २. जिगाति -- गाड गतौ सेनिकों को कपोंमे गिरा कर मारने के लिये । का०प८।सू० ४ अथर्ववेद-भाष्य २२३ जो कि शत्रराष्ट् हारा प्रेषित होता है, गहरे कूप मे अधोमुख करके भिरा कर, पत्थरों पर पत्थर, ध्वनि करते हूए, गिरा कर, मार देने का विधान हुमा है 1 “वव्र: कपनाम" (निघं ० २।२३) । खर्गला = जिसके “गले” कौ आवाज “खर” है, कठोर रूक्ष है । खगेल = उलूक । (इच्छत) मार देने का संकल्प करो, (गृभायत) इन्हें पकड़ो, (सं पिष्टन)

English

Let the fiends steal the poison of the cattle: may Aditi cast off the evil-doers. May the God Savitar give them up to ruin, and be their share of herbs and plants denied them.

अध्याय 8

श्लोक 4.11

प॒रः सो अ॑स्तु त॒न्वा॒३ तना॑ च ति॒स्रः पृ॑थि॒वीर॒धो अ॑स्तु॒ विश्वाः॑ ।प्रति॑ शुष्यतु॒ यशो॑ अस्य देवा॒ यो मा॒ दिवा॒ दिप्स॑ति॒ यश्च॒ नक्त॑म्

paraḥ so astu tanvā3 tanā ca tisraḥ pṛthivīradho astu viśvāḥ | prati śuṣyatu yaśo asya devā yo mā divā dipsati yaśca naktam

हिन्दी अर्थ

(पतयन्ति) उडतेर्है, या उड कर आनजातेर्हँ; (येवा) भ्रथवा जो (देवे सम्बन्ध मे, (रिपः) हिसाभावनाओं को (दधिरे) चित्तम धारण करते है उन्हे पकडो ओर पीस डालो पतयन्ति = अथवा हम पर आक्रमण करते हँ। मरुतः=मरने-मारने मे कुशल तथा निर्भीकि सेनिक । यथा “देवसेनानामभिभजञ्जतीनां जयन्तीनां १७ आर त८्मे एक ही तरिषय है । रिपः =हिसाः रिपुताम्. शत्रृताम् । "या" का भ्रथं ““शन्नुसेता” किया है ।

English

The cow gives milk each year, O Man-Beholder: let not the Yātudhāna ever taste it.

अध्याय 8

श्लोक 4.12

सु॒वि॒ज्ञा॒नं चि॑कि॒तुषे॒ जना॑य॒ सच्चास॑च्च॒ वच॑सी पस्पृधाते ।तयो॒र्यत् स॒त्यं य॑त॒रदृजी॑य॒स्तदित् सोमो॑ऽवति॒ हन्त्यस॑त्

suvijñānaṃ cikituṣe janāya saccāsacca vacasī paspṛdhāte | tayoryat satyaṃ yataradṛjīyastadit somo'vati hantyasat

हिन्दी अर्थ

कुत्तो के साथ वतंमान या कुततो द्वारा यातना देने वाले (पतयन्ति) विचरं ( पिशुनेभ्यः) खल-ष्वयातुमो के लिये (नूनं वधम्) निश्चित मरू (शिशीते) तीक्ष्ण करता दहै, ओर (यतुमदूभ्यः) यातना वालों के नि ग्रभिप्राय समान है यातु = यातना (मन्त्र २०) । (यातूनाम्) यातना देने वालों, (हुविमंयीनाम्) हविष्यान्न को मथने वालों तथा (अभि) हमारी ओर (आ =आगत्य) आ कर (विवासतम्) विविध स्थानों मे निवास करने वालों को, (इन्द्रः) सम्रा् (परा) परा्ख-

English

Agni, if one should glut him with the biestings, pierce with thy flame his vitals as he meets thee.

अध्याय 8

श्लोक 4.13

न वा उ॒ सोमो॑ वृजि॒नं हि॑नोति॒ न क्ष॒त्रियं मिथु॒या धा॒रय॑न्तम्।हन्ति॒ रक्षो॒ हन्त्यास॒द् वद॑न्तमु॒भाविन्द्र॑स्य॒ प्रसि॑तौ शयाते

na vā u somo vṛjinaṃ hinoti na kṣatriyaṃ mithuyā dhārayantam| hanti rakṣo hantyāsad vadantamubhāvindrasya prasitau śayāte

हिन्दी अर्थ

मुख करके (शरः) विनाशकर्ता (अभवत्) हुआ है । (शक्रः) शक्तिशाली तोडता हमा (पात्रा इव ) जसे कि पात्रं को तोडता हमा पत्थर या दण्डा वानानाम् । यथा देवदत्तो, दत्तः । उलंकयतुं शु्हकयात ज॒हि इवयातुमुत कोकयातुम् । सुपर्णय।तमुत एृधर॑यातु दृषदेव प मृण रक्ष इन्द्र ॥२२॥ की चाल वाले, (उत) श्रौर (कोकयातुम्) चक्रवाक की तरह व्यवहार वाले, (सुपणेयातुम्) गरुड की चाल वाले, (उत) भौर (गृध्रयातुम्) गीध

English

Agni, from days of old thou slayest demons: never have Rākshasas in fight o’ercome thee.

अध्याय 8

श्लोक 4.14

यदि॑ वा॒हमनृ॑तदेवो॒ अस्मि॒ मोघं॑ वा दे॒वाँ अ॑प्यू॒हे अ॑ग्ने ।किम॒स्मभ्यं॑ जातवेदो हृणीषे द्रोघ॒वाच॑स्ते निरृ॒थं स॑चन्ताम्

yadi vāhamanṛtadevo asmi moghaṃ vā devā~ apyūhe agne | kimasmabhyaṃ jātavedo hṛṇīṣe droghavācaste nirṛthaṃ sacantām

हिन्दी अर्थ

डाल, (दृषदा इव) जसे कि चक्की केपाटद्वारा चनों कोपीसा जाता के साथ विचरने वाला यथा (मन्त्र २०) । कोकय।तुम् = चक्रवाक को तरह ॑ २९२६ अथवेचेद-भाष्य का०८। सू० ४ का० त । सु०४ अथर्ववेद-माष्य २२७ मे 4 ताकिः-(पृथिवी) "पुथिवी (नः) हमे, (पाथिवात्) पाथिव पदाथ के अभाव से होने वाले (अंहसः) कष्ट से (पातु) रक्षित करे, ओर (अत्तः हनि वाल कष्टसे (पातु) रकषितिकरे।'

English

Burn up the foolish ones, the flesh-devourers: let none of them escape thy heavenly arrow. Guard us, O Agni, from above and under, protect us from be- hind and from before us;

अध्याय 8

श्लोक 4.15

अ॒द्या मु॑रीय॒ यदि॑ यातु॒धानो॒ अस्मि॒ यदि॒ वायु॑स्त॒तप॒ पुरु॑षस्य ।अ॒धा स वी॒रैर्द॒शभि॒र्वि यू॑या॒ यो मा॒ मोघं॒ यातु॑धा॒नेत्याह॑

adyā murīya yadi yātudhāno asmi yadi vāyustatapa puruṣasya | adhā sa vīrairdaśabhirvi yūyā yo mā moghaṃ yātudhānetyāha

हिन्दी अर्थ

भ्रप-उचछछी विवासे (भ्वादिः) । किमीदिनः" (मिख्कैत -६। २११२) 1: अंहसः । उनकी सत्ती कष्टदायकं ओर मृत्यु कारक मौ हो जाती ' है । राक्षसो केन देकरं हमारी रक्ता करते है । यातुमावत् = यातु (यातना) + मां (ज्ञानम्) रन्तम् ) उदित होते हृए (सूर्यम्) सूयं को (मा) तू हनन कर (मुरदेवाः) मूढ-व्यवहारी या -मारण-क्रीडा करने वालेयें

English

And may thy flames, most fierce and never wasting, glowing with fervent heat, consume the sinner.

अध्याय 8

श्लोक 4.16

यो माया॑तुं॒ यातु॑धा॒नेत्याह॒ यो वा॑ र॒क्षाः शुचि॑र॒स्मीत्याह॑ ।इन्द्र॒स्तं ह॑न्तु मह॒ता व॒धेन॒ विश्व॑स्य ज॒न्तोर॑ध॒मस्प॑दीष्ट

yo māyātuṃ yātudhānetyāha yo vā rakṣāḥ śucirasmītyāha | indrastaṃ hantu mahatā vadhena viśvasya jantoradhamaspadīṣṭa

हिन्दी अर्थ

दोनों को समान दण्ड देने का विधान हुआ, है । जिस दिनि ये.उग्र अपराधी घोषित किये जांय उसी दिन इनकी प्रीवाएं काट देनी . चाहिए ताकि अगले दिन के सूयंकाये दशन न कर पाएं । दण्डप्रदान ओर अपराधमे विशेष व्यवधान न होना चाहिए । अपराघका दण्डउसी दिनदहीहो जौना चाहिए जिस दिन कि श्रपराघध किया गया हौ । कारी वेद्यत वज (अस्यतम्) फँको । (इन्दर). हे,सम्राद् . (यातुघानम्) यातनाभों को धारण. करने वाला,

English

From rear, from front, from under, from above us, Agni, pro- tect us as a sage with wisdom. Guard to old age thy friend as friend eternal: O Agni, as im- mortal, guard us mortals.

अध्याय 8

श्लोक 4.17

प्र या जिगा॑ति ख॒र्गले॑व॒ नक्त॒मप॑ द्रु॒हुस्त॒न्वं॑१गूह॑माना ।व॒व्रम॑न॒न्तमव॒ सा प॑दीष्ट॒ ग्रावा॑णो घ्नन्तु र॒क्षस॑ उप॒ब्दैः

pra yā jigāti khargaleva naktamapa druhustanvaṃ1gūhamānā | vavramanantamava sā padīṣṭa grāvāṇo ghnantu rakṣasa upabdaiḥ

हिन्दी अर्थ

। यात्रा के निधिभूत (पुमांसम्) पुरुष का, . (उतः) तथा (मायया) छ्ल- ५ ?९.गरुह सिं पर कपट मास्ताहै। - । + 1 ,, धिपरीवासौ भूरंदेवो ऋदन्तु मां ते दशन्यमुचरन्त¶्॥२४॥ ,. ,, ५६ ५ का० ८ सूु० ५ श्रथवेवेद-भाष्य २९६ त् वजयी होता है ( मन्तः अय प्रति सरां मणिवु वीरायं वध्यते । । करने वाला (मणिः) सेनाध्यक्षरूप पुरुषरत्न (वोराय) वोर राजा के

English

Lend thou the worshipper that eye, O Agni, where with thou lookest on the hoof-armed demons.

अध्याय 8

श्लोक 4.18

वि ति॑ष्ठध्वं मरुतो वि॒क्ष्वि॒३छत॑ गृभा॒यत॑ र॒क्षसः॒ सं पि॑नष्टन।वयो॒ ये भू॒त्वा प॒तय॑न्ति न॒क्तभि॒र्ये वा॒ रिपो॑ दधि॒रे दे॒वे अ॑ध्व॒रे

vi tiṣṭhadhvaṃ maruto vikṣvi3chata gṛbhāyata rakṣasaḥ saṃ pinaṣṭana| vayo ye bhūtvā patayanti naktabhirye vā ripo dadhire deve adhvare

हिन्दी अर्थ

मणिके विशेषण जो मन्त्र मे कथित, वे वीर आदि विशेषणो से हि युवत सेनाध्यक्ष पुरुषरत के लिये साथक होते है । राष्ट का पति राजाभी २३८ रथर्ववेद-भाष्यः का०.८.। सू०५ का०८। सू० ५ प्रथवेवेद-भाष्य २३१ वापिस मोड देता है, (प्रतिसरः) ओर . धत्रुसेना के प्रति सरण करता है। (वशी) उन्हं वश में करने वाला है (सः) वह् (अस्मान्). हमे (सवतः) पराभवकर्ता, (उग्रः) तथा उग्र स्वभाव वालादहै। (वीरः) यहु वीर

English

With light celestial in Atharvan’s manner burn up the fool who ruins truth with falsehood. We set thee round us as a fort, victorious Agni! thee, a sage,

अध्याय 8

श्लोक 4.19

प्र व॑र्तय दि॒वोऽश्मा॑नमिन्द्र॒ सोम॑शितं मघव॒न्त्सं शि॑शाधि ।प्रा॒क्तो अ॑पा॒क्तो॑अधरा॑दुदक्तो॑ऽभि॑जहि रक्ष॑सः प॑र्वतेन

pra vartaya divo'śmānamindra somaśitaṃ maghavantsaṃ śiśādhi | prākto apāktoadharādudakto'bhijahi rakṣasaḥ parvatena

हिन्दी अर्थ

शच्रु-सेनिको को (पराभावयन्) पराभूत क्रिया 1 (अनेन) इस द्वारा ( इमे उभे) इन दोनों (दावापृथिवी) दयुलोक-पृथिवीलोक को (भजयत्) उसने जीता, (मनेन) इस द्वारा (चतखः प्रदिशः) चार व्याप्त दिशाभों को सम्राट् वरुणणचं राजा (यजु ८।२३७) 1' राष्ट के राजा कोःवरुण कहा करते हैँ, निर्वाचन करते हँ । द्युलोक :कै विजय का अभिप्राय यह है कि सब जोर से, य! सब प्रकार के भयो से (पातु) सुरक्षित करे। सराक्त्यः = विनियोगकारोँं के अनुसार सयणाचायेः लिखते हँ कि

English

In conquering colour day by day, destroyer of the treacherous foe. With deadly poison strike thou back the treacherous brood of

अध्याय 8

श्लोक 4.20

ए॒त उ॒ त्ये प॑तयन्ति॒ श्वया॑तव॒ इन्द्रं॑ दिप्सन्ति दि॒प्सवोऽदा॑भ्यम्।शिशी॑ते श॒क्रः पिशु॑नेभ्यो व॒धं नु॒नं सृ॑जद॒शनिं॑ यातु॒मद्भ्यः॑

eta u tye patayanti śvayātava indraṃ dipsanti dipsavo'dābhyam| śiśīte śakraḥ piśunebhyo vadhaṃ nunaṃ sṛjadaśaniṃ yātumadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

वाले सैनिकों द्वारा '(अजन्तु) षकरेलदें। ˆ /' २३२ प्रथववेद-भाष्य का०८। सू ५ मुभे सहायता देकर आक्रान्ताओं को मेरे राष्टरसे धकेल देग । अजन्तु = कौ शात्रवी (कृत्याः) सेनाओं को यह् मणि (वि बाधते) विशेषतया नष्ट कर देता है, रौर (वशी) उन्हँं अपन वश में कर लेता है, ( जेसे कि (स्यः) सूयं (दिवम् आरुह्य) द॒लोक मे आरोहण कर अन्धकारक

English

Agni shines far and wide with lofty splendour, and by his great- ness makes all things apparent.

अध्याय 8

श्लोक 4.21

इन्द्रो॑ यातू॒नाम॑भवत् पराश॒रो ह॑वि॒र्मथी॑नाम॒भ्या॒३विवा॑सताम्।अ॒भीदु॑ श॒क्रः प॑र॒शुर्यथा॒ वनं॒ पात्रे॑व भि॒न्दन्त्स॒त एतु र॒क्षसः॑

indro yātūnāmabhavat parāśaro havirmathīnāmabhyā3vivāsatām| abhīdu śakraḥ paraśuryathā vanaṃ pātreva bhindantsata etu rakṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

(रजं गतिक्षेपणयोः” (भ्वादिः) । यदहं क्षेपणा्थं मे “अज” घातु है। “अजन्तु'' मे णिजथं अन्तर्भावित है (द्ःवापृथिवी) द्यौ भौर पृथिवी को, (उत) तथा (अहः) दिनि को, (इव ) जसे (मनीषिणा ऋषिणा) मनस्वी ऋषि द्वारा मैने निज प्रासुरी रजा नै सब सेनाओं पर (अजेषम्) विजयपा लियाहै। इस प्रकार्य (मृधः) प्रमाथी (रक्षसः) राक्षसो को (वि हन्मि) विशेषतया मार देता हूं । देता हं । (ते) वे (देवाः) दिव्यगुणों वाले अधिकारी मन्त्र ५ (मे) मेरे॥ लिये (पुरोहिताः) पुरोहितरूपमें है, या मेरे पुरोगामीरूप मे हितकारी

English

He conquers godless and malign enchantments, and sharpens both his horns to gore the ogres. Thy two unwasting horns, O Jātavedas, keen-pointed weapons, sharpened by devotion

अध्याय 8

श्लोक 4.22

उलू॑कयातुं शुशु॒लूक॑यातुं ज॒हि श्वया॑तुमु॒त कोक॑यातुम्।सु॒प॒र्णया॑तुमु॒त गृध्र॑यातुं दृ॒षदे॑व॒ प्र मृ॑ण॒ रक्ष॑ इन्द्र

ulūkayātuṃ śuśulūkayātuṃ jahi śvayātumuta kokayātum| suparṇayātumuta gṛdhrayātuṃ dṛṣadeva pra mṛṇa rakṣa indra

हिन्दी अर्थ

पृतनाः, (प्रतिसर.) उनके प्रति सरण करने वाले सेनिकों हारा (ग्रजन्तु) दो प्रकार से, णतूुसेनाभों द्वारा किये आक्रमण को, विफल कियाजा जाता है, श्रौर शतृसेना को श्रपने पराये का भेद ज्ञान न रहने पर वह निन ¦ संनिकोंसे ही लडती हई परस्पर में विनष्ट हो जांय । यथा -- ॥ (याः उ च) ओर जो(प्रन्येभिः) अन्यो की कुसंगति या पेतुकरूप मे (आमृताः २३४. ्रथववेद-भाष्य श्रयर्ववेद ष्य का०८।सू०५ का० र सू० ५ -माष्य १३५

English

With these transfix the wicked-souled Kimidin, with fierce flame, Jātavedas! when he meets thee.

अध्याय 8

श्लोक 4.23

मा नो॒ रक्षो॑ अ॒भि न॑ड् यातु॒माव॒दपो॑च्छन्तु मिथु॒ना ये कि॑मी॒दिनः॑ ।पृ॒थि॒वी नः॒ पार्थि॑वात् पा॒त्वंह॑सो॒ऽन्तरि॑क्षं दि॒व्यात् पा॑त्व॒स्मान्

mā no rakṣo abhi naḍ yātumāvadapocchantu mithunā ye kimīdinaḥ | pṛthivī naḥ pārthivāt pātvaṃhaso'ntarikṣaṃ divyāt pātvasmān

हिन्दी अर्थ

== आहृताः) प्राप्त हुई है, (ताः) वे (उभयीः) दोनों प्रकार की पतनाएं (परावतः) दुर से दूर (परायन्तु) हमसे पृथक् होकर चली जांय, (नाव्याः ) व हारा पार.करने यौग्य (नवतिम्) €० नदियों का (श्रति) अतिक्रमण का वणन किया गयादहै। एकतो शारीरिक अद्धो के रस सम्बन्धी हई है । प्रकृति के इन तीन गुणों के परस्पर मुख्य, गौण, तथा गौणतररूप

English

Bright, radiant, meet to be adored, immortal with refulgent glow, Agni drives Rākshasas away.

अध्याय 8

श्लोक 4.24

इन्द्र॑ ज॒हि पुमां॑सं यातु॒धान॑मु॒त स्त्रियं॑ मा॒यया॒ शाश॑दानाम्।विग्री॑वासो॒ मूर॑देवा ऋदन्तु॒ मा ते दृ॑श॒न्त्सूर्य॑मु॒च्चर॑न्तम्

indra jahi pumāṃsaṃ yātudhānamuta striyaṃ māyayā śāśadānām| vigrīvāso mūradevā ṛdantu mā te dṛśantsūryamuccarantam

हिन्दी अर्थ

जो रङ्ग है उनके रस । इन रसो मे विकार पैदाकरनै वाली पृतनाणएं है च। श्व रखने वाली कृत्याः अर्थात् पृतनाः, ये उभयीः्है, दो प्रकार की दह । शरीर या गौणतर त्मक “पृतनाः” का वणेन हमा है । ९० नदियां भी आध्यात्मिक हँ अौर गिरत नौकाद्वारापारकी जा सकती है, रतः ये महावेगाः ओर महाविस्ताराः कुल -- स्वरूप! ॥ जिन पर किं राज्न॑तिक विजय का कथन मन्त्रमे हो । भ्राधिभौतिक या अ्राधिदेविक

English

Imprecations on demons Indra and Soma, burn, destroy the demon foe! Send downward,

अध्याय 8

श्लोक 4.25

प्रति॑ चक्ष्व॒ वि च॒क्ष्वेन्द्र॑श्च सोम जागृतम्।रक्षो॑भ्यो व॒धम॑स्यतम॒शनिं॑ यातु॒मद्भ्यः॑

prati cakṣva vi cakṣvendraśca soma jāgṛtam| rakṣobhyo vadhamasyatamaśaniṃ yātumadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

ओर प्रवाहित होता है, भौर कर्मंन्दरियों दवारा कर्मरूपी जल भीतरसे बाहर कीञोर प्रवाहित होताहै।!इन दो प्रकार की नदियों कावेग भौर । कहा है अतः ये नदीरूप हँ । तथा इन “छोतांसि'” को “भयावहानि” भी करने के लिये नौका है ब्रहमोड्प । उडप है पार करने वाली नौका । ब्रह्मो- ौ पासनारूपी नौका द्वारा दशेन्ियों की €० नदियों" कोपार क्रिया जा ददानि के लिये “दन्दरियविजयः' को “इन्द्रियजयः'' कहा है (विभूतिपाद, सूत्र ४७) । यथा “धचित्तनदी नाम उभयतो वाहिनी, वहति कल्याणाय वहति पापाय च"

English

O ye Bulls, those who add gloom to gloom. Annihilate the fools, slay them and burn them up: chase them away from us, pierce the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।