Atharva Veda
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 3/6 · श्लोक 5.1–6.26

पूर्ण अध्याय पाठ48 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 5.1

प्रतिसरो मणिः।१-२२ शुक्रः।कृत्यादूषणं, मन्त्रोक्तदेवताः।अनुष्टुप्, १,६ उपरिष्टाद्बृहती, २ त्रिपदा विराड् गायत्री, ३ चतुष्पदा भुरिग्जगती, ५ भुरिक्संस्तारपङ्क्तिः, ७-८ ककुम्मती, ९ पुरस्कृतिर्जगती, १० त्रिष्टुप्, ११ पथ्यापङ्क्तिः, १४ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, १५ पुरस्ताद्बृहती, १९ जगतीगर्भा त्रिष्टुप्, २० विराड्गर्भा प्रस्तारपङ्क्तिः, २१ विराड् त्रिष्टुप्, २२ त्र्यवसाना सप्तपदा विराड्गर्भा भुरिक्शक्वरी।अ॒यं प्र॑तिस॒रो म॒णिर्वी॒रो वी॒राय॑ बध्यते ।वी॒र्यऽवान्त्सपत्न॒हा शूर॑वीरः परि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः॑

pratisaro maṇiḥ| 1-22 śukraḥ| kṛtyādūṣaṇaṃ, mantroktadevatāḥ| anuṣṭup, 1,6 upariṣṭādbṛhatī, 2 tripadā virāḍ gāyatrī, 3 catuṣpadā bhurigjagatī, 5 bhuriksaṃstārapaṅktiḥ, 7-8 kakummatī, 9 puraskṛtirjagatī, 10 triṣṭup, 11 pathyāpaṅktiḥ, 14 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 15 purastādbṛhatī, 19 jagatīgarbhā triṣṭup, 20 virāḍgarbhā prastārapaṅktiḥ, 21 virāḍ triṣṭup, 22 tryavasānā saptapadā virāḍgarbhā bhurikśakvarī| ayaṃ pratisaro maṇirvīro vīrāya badhyate | vīrya'vāntsapatnahā śūravīraḥ paripāṇaḥ sumaṅgalaḥ

हिन्दी अर्थ

सके । सेनिकों को यथोचित संख्या के अभाव में प्रजाजन भी मारे जतेर्है, स त्वां रक्षतु सेतो दिवा नक्त च विश्वत॑ः ॥२२॥ । वाला कोई शं नहीं रहा, (वशी) सब को वश में किये हुमा, (जिगीवान्) / जयशील, (अपराजितः) जो कभी पराजित नहीं हुमा, (सोमपाः) वी्य- शक्ति की रक्षा करने वाला, (ग्रमयडःकरः) प्रजा को भयरहित करने . ौ ४ (१५) व्यभिचारियों को दण्ड निज पत्नी के संमोग से वल्चित करना (१६) कुकभियों को दण्ड “हूदयवेधन” (मन्त्र १ ८) ।

English

flame, Eternal, scorching darts. Plunge the voracious fiends within the depth, and let them pass

अध्याय 8

श्लोक 5.2

अ॒यं म॒णिः स॑पत्न॒हा सु॒वीरः॒ सह॑स्वान् वा॒जी सह॑मान उ॒ग्रः ।प्र॒त्यक् कृ॒त्या दू॒षय॑न्नेति वी॒रः

ayaṃ maṇiḥ sapatnahā suvīraḥ sahasvān vājī sahamāna ugraḥ | pratyak kṛtyā dūṣayanneti vīraḥ

हिन्दी अर्थ

कुसा ये च॑ कु्चिाः ककमा: करुमाः सिमाः । (ये) जो कीट (गदेभनादिनः) गदहों कौ तरह नादं करते हए (सायम्) सायंकाल (शालाः) शालाभों के (परि) सब ओर (नृत्यन्ति) नाच करते १, रात मे मच्छरनाद करते हुए इधर-उधर उड्तेरहै। मानोवे गते हृए का०८। सु० ६ अथवेवेद-भाष्य २५१ है । तथा (ये च) ओर जो (कुसूल आदि) कुसूल, कुक्षिल, ककुभ, कंप, सिम नामक कीट हँ (तान्) उन (विषूचीनान्) सब भ्रोर गति करने वालों को (ओषधे) है ओषधि ? (त्वम्) तू (गन्धेन) निज गन्ध दास (विना- सायंकाल शालाभों में नाद करने वाले विशेषतया मच्छर होते रह। इनके नाद कानोंको कटु श्रनुभूत होतेह, ग्रतः घृणा कौ दृष्टस इन्द “वदभनादिनः'' कहा है । गर्दभ कानाद कर्णकटु होता है। कुसूल प्रादि

English

Of these two that which is the true and honest Soma protects, and brings the false to nothing. Never doth Soma aid and guide the wicked or him who falsely claims the Warrior’s title.

अध्याय 8

श्लोक 5.3

अ॒नेनेन्द्रो॑ म॒णिना॑ वृ॒त्रम॑हन्न॒नेनासु॑रा॒न् परा॑भावयन्मनी॒षी।अ॒नेना॑जय॒द् द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे अ॒नेना॑जयत् प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

anenendro maṇinā vṛtramahannanenāsurān parābhāvayanmanīṣī| anenājayad dyāvāpṛthivī ubhe ime anenājayat pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

अथवं ० (२।३१।२,३) ! “अल्गण्ड"” में “अल्” का अर्थं है “भुषण” ओौरं शङ्गाणि ज्वलतो नाम (निषं० १।१७ ) । वधू के विवाह मे माता- ॥ करते है । वधू, पितुगृह से जब पतिगृहं जाने बालौ होती हतो लुटेरे-प्रात- 4 । पटास द्वारा उसे प्रकूपितकरप ग्राभरुषणा को लूटने का यत्न करते ह, एेसों के नाश करने का विधान मन््रमें हृमादहै। मनुनेमो

English

The fiend who says that he is pure, who calls me a demon though devoid of demon nature. She too who wanders like an owl at night-time, hiding her body in her guile and malice,

अध्याय 8

श्लोक 5.4

अ॒यं स्रा॒क्त्यो म॒णिः प्र॑तीव॒र्तः प्र॑तिस॒रः ।ओज॑स्वान् विमृ॒धो व॒शी सो अ॒स्मान् पा॑तु स॒र्वतः॑

ayaṃ srāktyo maṇiḥ pratīvartaḥ pratisaraḥ | ojasvān vimṛdho vaśī so asmān pātu sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

२, यह फफोला ही इस का भूषण टै, शिरोभूषण है । गण्ड एए ध कोभ्राते देख कर सोच-विचारके विना दही उस का हनन कर दे। आत तायिग्रों ममनु ने “अन्निदः गरदः काभी परिगणन क्रियादहै। मन्वरमेँ जिक-मानुष कीटो'' के हनन की विधि मन्वमें कही है । गृहो मे पदा हए हैँ" (उरुण्डाः) ओर उरु अण्डो वाले ह, (ये च) प्रौर जो (मट्मटाः)मटक-मटक कर चलते याशृद्धारसे विभूषित मडि भूषायाम् ॑ हुए चलते हैँ (कुम्भमुष्काः) जो कुम्भ सदृश अण्डकोशों वाले हँ (अय.

English

May she fall downward into endless caverns. May press-stones with loud ring destroy the demons.

अध्याय 8

श्लोक 5.5

तद॒ग्निरा॑ह॒ तदु॒ सोम॑ आह॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता तदिन्द्रः॑ ।ते मे॑ दे॒वाः पु॒रोहि॑ताः प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्याः प्र॑तिस॒रैर॑जन्तु

tadagnirāha tadu soma āha bṛhaspatiḥ savitā tadindraḥ | te me devāḥ purohitāḥ pratīcīḥ kṛtyāḥ pratisarairajantu

हिन्दी अर्थ

इस मन््रमे भी लुटेरों भ्रादिका वर्णन हँजो कि “सामाजिक मानुष. कीट" हैँ । “प्रपद पीछे की ओर, ओर एडियां भागे की गोर दवारा" इनकी . उल्टी चालो का कथन हृभा है । तथा “धुरोमूखाः” हारा यह दर्शाया है कि। प्रोर कर्के चलते हैँ । खलजाः; खलः" = 4 (०६६ 7ऽलील ऽअ) सूचित की है । कुम्भमृष्काः द्वारा शारीरिक बल सूचित किया है। "“अया

English

Spread out, ye Maruts, search among the people: seize ye and grind the Rākshasas to pieces, Who fly abroad, transformed to birds, at night-time, and sully and pollute our holy worship.

अध्याय 8

श्लोक 5.6

अ॒न्तर्द॑धे॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒ताह॑रु॒त सूर्य॑म्।ते मे॑ दे॒वाः पु॒रोहि॑ताः प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्याः प्र॑तिस॒रैर॑जन्तु

antardadhe dyāvāpṛthivī utāharuta sūryam| te me devāḥ purohitāḥ pratīcīḥ kṛtyāḥ pratisarairajantu

हिन्दी अर्थ

“"ृह्च्छेपः” कहा है (म्रयवं० ११।७।११) । ग्रौर (पार्ष्णी) एडियां (पुरः) श्रगे की भोर ह, (पुरः मुखाः) ओर मुख का० ८। सू० ६ प्रथववेद-भ(५्य २५५ (पर्यस्ताक्षाः) इधर-उधर क विषयों में आंखे भटकाने वाले, (अप्र च ङ्कशाः) अप्रशस्त गति वाले दूराचारी,या शसनविरोधौ विप्लवकारी, विरहित कर दिये जाय । (यः) जो (ब्रपतिः) पतिन होता हुश्रा (स्वपति

English

Hurl down from heaven thy bolt of stone, O Indra: sharpen it, Maghavan, made keen by Soma.

अध्याय 8

श्लोक 5.7

ये स्रा॒क्त्यं म॒णिं जना॒ वर्मा॑णि कृ॒ण्वते॑ ।सूर्य॑ इव॒ दिव॑मा॒रुह्य॒ वि कृ॒त्या बा॑धते व॒शी

ye srāktyaṃ maṇiṃ janā varmāṇi kṛṇvate | sūrya iva divamāruhya vi kṛtyā bādhate vaśī

हिन्दी अर्थ

(अवपादय) अवा मुख करके पटक दे । रोगपक्ष मे स््ौकोटों को नरकीटों से पृथक् कर देना चाहिए । ताकि नए कीट उत्पतच्नन हों। प्रकषरूप मे शासन विरोधी, विप्लवकारी । षण्डगाः = क्लीब सदृश गति- केणघारी (जम्भयन्तम्) हिसाशील, (मरीमृशम्) पुनः पुनः संभोगा्थं स्त्रियों से परामशं करने वाले (उपेषन्तम्) उन की समीपता चाहने वाले, करके निज संवरण करने वाले, च्पिजाने वाले को (पदा) पैरों द्वारा (प्रविध्य) ठुकरा कर फंक दे (इव ) जसे कि (स्पन्दना) उछलने-कूदने वाली (गौः) गौ (पाष्या) अपने पिछले पैर द्वारा (स्थालीम्) दूध दोहने के पातर कोठकरा कर फक देती है। २५६ अथवेवेद-माष्य का०८। सू० ६।

English

Forward, behind, and from above and under, smite down the demons with thy rocky weapon. They fly, the demon dogs, and, bent on mischief, fain would they harm indomitable Indra.

अध्याय 8

श्लोक 5.8

स्रा॒क्त्येन॑ म॒णिन॒ ऋषि॑णेव मनी॒षिणा॑ ।अजै॑षं॒ सर्वाः॒ पृत॑ना॒ वि मृ॒धो॑ हन्मि र॒क्षसः॑

srāktyena maṇina ṛṣiṇeva manīṣiṇā | ajaiṣaṃ sarvāḥ pṛtanā vi mṛdho hanmi rakṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राता ८००78 (बाष्टे) । अथवा शलम् संवरणं वहतीति । शल् + । (यः) जो (ते) तेरे (गभम्) गभेस्थ शिशु को (प्रतिमृशात्) पीडितं करे, (जातम्, वा) अथवा पैदा हुए (ते) तेरे बच्चे को (मारयाति)मारदे, (हूदयाव्रिधम्, कृणोतु) हृदय मे विद्ध कर दे। कामूक-पुरुष का वर्णेन है, जो कि गभिणी कै साथ बलात्कार कर कै गर्भस्थ बच्चे को पीडित करता दहै, भौर संभोग के कारण कोई बच्चा पेदां होता है तो उसे मारदेताहै, ताकि भोगी का अपयशन हो। एसे पुरुषं को बाण द्वारा हृदयाविध करा देना चाहिए । सायणाचाययं ने ““पिङ्ख'' का प्रथं किया है ““पीतसषेप" । इस प्रथं मे मन्व के पूर्धि मं रोगकीटाणु ये म्नो जातान मारथन्ति सूतिका अनुशेश्ते ।

English

Sakra makes sharp his weapon for the wicked: now let him cast his bolt at fiendish wizards.

अध्याय 8

श्लोक 5.9

याः कृ॒त्या आ॑ङ्गिर॒सीर्याः कृ॒त्या आ॑सु॒रीर्याः ।कृ॒त्याः स्व॒यंकृ॑ता॒ या उ॑ चा॒न्येभि॒राभृ॑ताः ।उ॒भयी॒स्ताः परा॑ यन्तु परा॒वतो॑ नव॒तिं ना॒व्या॒३अति॑

yāḥ kṛtyā āṅgirasīryāḥ kṛtyā āsurīryāḥ | kṛtyāḥ svayaṃkṛtā yā u cānyebhirābhṛtāḥ | ubhayīstāḥ parā yantu parāvato navatiṃ nāvyā3ati

हिन्दी अर्थ

मार देते है, तथा (सूतिका) अभिनव प्रसवा स्त्रियों के (अनु शेरते) संग मेघ को अन्तरिक्ष से पृथक् कर देती है । का०तः। सू०६ अथववेवेद-माष्य २५७ धारण-पोषण करे, (यत्) जो (दितम्) गभ मे निहित हुआ है (तत्) वहं (मा) न (अवपादि) नीचे गिरे, अर्थात् उस का गर्भपातन हो। (उग्रौ भेषजी) दो उग्र भेषज, (नीविभार्यौँ) जो करि अधोवस्त्रमे धारण करने माता को शिशु की सुरक्नाथं परामश दिया है । नीविःत=स्त्री के कटि

English

Indra hath ever been the fiends’ destroyer who spoil oblations of the Gods’ invokers. Yea, Sakra, like an axe that splits the timber, assails and sma- shes them like earthen vessels.

अध्याय 8

श्लोक 5.10

अ॒स्मै म॒णिं वर्म॑ बध्नन्तु दे॒वा इन्द्रो॒ विष्णुः॑ सवि॒ता रु॒द्रो अ॒ग्निः ।प्र॒जाप॑तिः परमे॒ष्ठी वि॒राड् वै॑श्वान॒र ऋष॑यश्च॒ सर्वे॑

asmai maṇiṃ varma badhnantu devā indro viṣṇuḥ savitā rudro agniḥ | prajāpatiḥ parameṣṭhī virāḍ vaiśvānara ṛṣayaśca sarve

हिन्दी अर्थ

(१) सूक्त ६ में रोग कीटाणुग्रोंका रयः वर्णन हूप्रा है रोग कोटाणु ( 4 ) स्त्रियों केभी दो अण्ड ओर अण्डकोष हेते (६) रोग कीट।णुजों के विनाशक “वज” भौर “पिङ्ग” = दो प्रकार के सषप (सायणः; मन्त्र ६) । (६) केशवः जल, वायु भौर शरीर मे शयन करने वाले कीटाणु (१०) रोग कीटाणु सूयं के ताप द्वारा नष्ट हो जाते हँ (मन्त्र २४) ।

English

without a sound. Indra and Soma, let this hymn control you both, even as the girth encompasses two vigorous

अध्याय 8

श्लोक 5.11

उ॒त्त॒मो अ॒स्योष॑धीनामन॒ड्वान् जग॑तामिव व्या॒घ्रः श्वप॑दामिव ।यमैच्छामावि॑दाम॒ तं प्र॑ति॒स्पाश॑न॒मन्ति॑तम्

uttamo asyoṣadhīnāmanaḍvān jagatāmiva vyāghraḥ śvapadāmiva | yamaicchāmāvidāma taṃ pratispāśanamantitam

हिन्दी अर्थ

करने वाले कीटाणु (मन्त्र २५ ) । । प्रवतन यौ तं मातोन्ममा जातायाः पतिवेदनो । (जातायाः) उत्पन्न हई के (यो) जो दो स्तन, (ते) तेरी (माता) माता ने (उन्ममाजं!). परिमाजित क्रिये ये, (पतिवेदनौ) जो दो (१३) सामाजिक कीटाणुरूप लुटेरों, आततायिओं, गौर कुकभिथों के १, “जाता” के स्तनो का परिमाजंन जातकमं संस्कार का एक भर है ।

English

steeds The song of praise which I with wisdom offer you. Do ye, as

अध्याय 8

श्लोक 5.12

स इद् व्या॒घ्रो भ॑व॒त्यथो॑ सिं॒हो अथो॒ वृषा॑ ।अथो॑ सपत्न॒कर्श॑नो॒ यो बिभ॑र्ती॒मं म॒णिम्

sa id vyāghro bhavatyatho siṃho atho vṛṣā | atho sapatnakarśano yo bibhartīmaṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

२४६ ध्रयववेद-भाष्य का० ८।सू० ९ + क ९५७ के लिये ह । स्तन्यपान के लिये, शिशु कौ सत्ता चाहिए, भौर शिबु को, “पलाल”? श्रादि रोगकीटाणुजों के नाम हैँ । पदों के धात्वथं निम्न लिखित क्ये है । पलाल का श्रं है तिनके, ग्रौर अनुपलाल है भूसा। इनकी आकृति वाले या इन की तरह अतितुच्छ रोगकीटाणु । भ्रथवा इनके सडने (सायण) कोक चक्रवाक की श्राति वाला या बलादि का संहार करने केकड़े-जन्तु के सद्ण होती है, जिसे सायणाचायं ने भ्रमरकृतिक कहाहै। मासं तो मोष खप ऊरू माव॑ खपोऽन्तरा । ॥

English

Lords of men, animate these my prayers. In your impetuous manner think ye both thereon: destroy those evil spirits, kill the

अध्याय 8

श्लोक 5.13

नैनं॑ घ्नन्त्यप्स॒रसो॒ न ग॑न्ध॒र्वा न मर्त्याः॑ ।सर्वा॒ दिशो॒ वि रा॑जति॒ यो बिभ॑र्ती॒मं म॒णिम्

nainaṃ ghnantyapsaraso na gandharvā na martyāḥ | sarvā diśo vi rājati yo bibhartīmaṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

मे “श शयन करने वाला । श्रलिश-कीटाणु रक्त में कुच काल तक शयन + त कठ हि उरप्रो के मध्य (मासंवृतः) संकोचनन कर, (म उपसृप.) अर्थात् न योनि के समीप आस-पास सर्पण कर, (मा अव सूपः)न उर्ग्रोसे नीचे । दोह । एककानामटहै “अलिश"' ओर दूसरे कानाम है “वत्सप"। ये दोनों दुनमि है, दुष्परिणाम के उत्पादक हैँ “्रलिश का श्रमिप्राय ।

English

treacherous fiends. Indra and Soma, let the wicked have no bliss whoso at any time- attacks and injures us.

अध्याय 8

श्लोक 5.14

क॒श्यप॒स्त्वाम॑सृजत क॒श्यप॑स्त्वा॒ समै॑रयत्।अबि॑भ॒स्त्वेन्द्रो॒ मानु॑षे॒ बिभ्र॑त् संश्रेषि॒णेऽजयत्।म॒णिं स॒हस्र॑वीर्यं॒ वर्म॑ दे॒वा अ॑कृण्वत

kaśyapastvāmasṛjata kaśyapastvā samairayat| abibhastvendro mānuṣe bibhrat saṃśreṣiṇe'jayat| maṇiṃ sahasravīryaṃ varma devā akṛṇvata

हिन्दी अर्थ

सायणाचाये के ब्रनुसार ह “श्रलयो भ्रमरकारेण वतमाना केचन रोगाः, तदभिमानिदेवः वा”! अर्थात् अलि रहँ चरमराकृति वलि रोग,या रोगोंके , वत्स द्वारा पेय दुर कोपी जाने वाला । “वत्सप” कीटाण्, माता के नानाविघ कीटाणुओं का वणन दहै, जिन कै स्वल्पो ओर रोगोत्पादन की शक्तियों का अनुसन्धान श्रपेक्षित है! अथववेद मे रोगकीटाणुभों को “क्रिमि” कहा है (२।३११-५; २।३२।१-६) । अलिशअलिश रोगनाशक (वजम्, भेषजम् ) वजनाम वाली ओपधध (कृणोमि) मेँ करता हं । ॥ स्त्रीकीयोनिके समीपओौरटागों में सपण करने वाले रोग तया

English

Whoso accuses me with words of falsehood when I pursue my way with guileless spirit, May he, the speaker of untruth, be, Indra! like water which the hollowed hand compresses.

अध्याय 8

श्लोक 5.15

यस्त्वा॑ कृ॒त्याभि॒र्यस्त्वा॑ दी॒क्षाभि॑र्य॒ज्ञैर्यस्त्वा॒ जिघां॑सति ।प्र॒त्यक् त्वमि॑न्द्र॒ तं ज॑हि॒ वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा

yastvā kṛtyābhiryastvā dīkṣābhiryajñairyastvā jighāṃsati | pratyak tvamindra taṃ jahi vajreṇa śataparvaṇā

हिन्दी अर्थ

पछाखानुपलालो शक कोकं मलिम्लुच पलीजंकम् । (पलालानुपलालौ ) पलाल ओर भ्रनुपलाल को, (शकुं म्, कोकम् ) शकु ऋष्षश्रीव, प्रमीली को हम नष्ट करते ह (अ (संवतम्) अद्ध का संकोचन करना (इच्छतः) चाहते ह । (अरायान्) शत्ररूप, अरातिरूप रोगकीटाणुप्रो का (श्रप हन्मः) हम हनन करते

English

Those who destroy, as is their wont, the simple, and with their evil natures harm the righteous,

अध्याय 8

श्लोक 5.16

अ॒यमिद् वै प्र॑तीव॒र्त ओज॑स्वान् संज॒यो म॒णिः ।प्र॒जां धनं॑ च रक्षतु परि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः

ayamid vai pratīvarta ojasvān saṃjayo maṇiḥ | prajāṃ dhanaṃ ca rakṣatu paripāṇaḥ sumaṅgalaḥ

हिन्दी अर्थ

यः कृष्णः केसर स्तम्बन उत तुण्डिकः । श॒रायनस्या मुष्काभ्यां मंससोपं हन्मसि ॥५॥ (यः) जो (कृष्णः) काला (केशौ) रमो वाला, (असुरः) प्राणवान् तथा (तुण्डिकः) अल्पमुख वाला रोगकोटाणु है; (अरायान्) उन अण्डकोशों से, (भंससः) तथा कटिग्रदेश योनि से (भप हन्मसि) हम कभी-कभी प्रकट हो जते है । अनुजिध भमृकषन्तं करव्यादमुत ररिहम् । हिसक को, (क्रव्यादम्) शरीरके मांसकोख। जाने वाले को, (उत) तथौ

English

May Soma give them over to the serpent, or to the lap of Nirriti consign them.

अध्याय 8

श्लोक 5.17

अ॒स॒प॒त्नं नो॑ अध॒राद॑सप॒त्नं न॑ उत्त॒रात्।इन्द्रा॑सप॒त्नं नः॑ प॒श्चाज्ज्योतिः॑ शूर पु॒रस्कृ॑धि

asapatnaṃ no adharādasapatnaṃ na uttarāt| indrāsapatnaṃ naḥ paścājjyotiḥ śūra puraskṛdhi

हिन्दी अर्थ

(अरायान्) इन सब शत्रुओं को, या दुभेग रोगकीटाणुभों को (पिङ्गः) पीला १. इच्छा होने से दुर्णामा श्रौर सुनामा रोगकोटाणु है, चेतन सदृश दँ । २. दुर्णामा स्वस्थ शरीर को सुखा कर मासिको संकुचित करतादहै, ्रीर सुनामा, प्रसूतिकाल कै हए योनिविस्ार को संकुचित करतार, यह प्रभिप्राय का ८। सू० ६ प्रथवंवेद-माष्य २४६ मांसकोखा जाताहै, शरीर को सुखा देता है । रूपान्) नपुंसकलूपी, (तिरीटिनः) टे ध्र्थात् कपट चालनी वालों को, (इतः) इस तेरे मस्तिष्क से, (बजः) वज सषंप (सहताम्) पराभूत

English

O Agni, whosoever seeks to injure the essence of our food, kine, steeds, or bodies, May he, the adversary, thief, and robber, sink to destruction,. both himself and offspring.

अध्याय 8

श्लोक 5.18

वर्म॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी वर्माह॒र्वर्म॒ सूर्यः॑ ।वर्म॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ वर्म॑ धा॒ता द॑धातु मे

varma me dyāvāpṛthivī varmāharvarma sūryaḥ | varma ma indraścāgniśca varma dhātā dadhātu me

हिन्दी अर्थ

मे जैसे पुरुषों मे कामवासना उदृबुद्ध हो जाती है वैसे स्तयो मे भी उद्बुद्ध आए हैँ परन्तु स्वप्नावस्था मे वे कामी-कपटी पुरुषो के रूप मे बदल गए । कलीब कटा है, जोकि वस्तुतः भोग करने म श्रशक्त होते ह, शक्तिविहीन होते है । इस प्रकार कौ अवस्था को आपन्न हुए अर्जुनको भी गौतामें २५० अयवेवेद-भाष्य का० ए । सूक्त ६ हई तुभ को (दिप्सति) दम्भपूर्वेक दबाना चाहता है (तान्) एेसे उन सब को

English

May he be swept away, himself and children; may all the three earths press him down beneath them.

अध्याय 8

श्लोक 5.19

ऐ॒न्द्रा॒ग्नं वर्म॑ बहु॒लं यदु॒ग्रं विश्वे॑ दे॒वा नाति॒ विध्य॑न्ति॒ सर्वे॑ ।तन्मे॑ त॒न्वं त्रायतां स॒र्वतो॑ बृ॒हदायु॑ष्मां ज॒रद॑ष्टि॒र्यथासा॑नि

aindrāgnaṃ varma bahulaṃ yadugraṃ viśve devā nāti vidhyanti sarve | tanme tanvaṃ trāyatāṃ sarvato bṛhadāyuṣmāṃ jaradaṣṭiryathāsāni

हिन्दी अर्थ

(श्रनीनशत्) वज-ग्रौषध ने विनष्टकर दिया है, (इव) जैतेकि (परि- ¦ हो कर व्यक्ति को दूषित करती रहती हवे भी छाया क सदुश श्रवास्त- विक होती हैँ । उन का भी विनाश वज-ओौषध कर देता है । यः कृणोतिं मृतवत्सामवतोकामिमां स्त्रिय॑म् । मरे बच्चे वाली श्रथवा (अवतोकाम्) गभंपात वाली (कृणोति) कर देता (ओषधे) है ओषधि ! (त्वम्) तु (नाशय)नष्ट कर जैसे कि (अच्जि- ¦ ओषधि का नाम नहीं दिया । सम्भवतः “वज'' भमिप्रेत हो । अज्जिवम् = ,

English

May his fair glory, O ye Gods, be blighted, who in the day or night would fain destroy us. The prudent finds it easy to distinguish the true and false: their words oppose each other.

अध्याय 8

श्लोक 5.20

आ मा॑रुक्षद् देवम॒णिर्म॒ह्या अ॑रि॒ष्टता॑तये ।इ॒मं मे॒थिम॑भि॒संवि॑शध्वं तनू॒पानं॑ त्रि॒वरू॑थ॒मोज॑से

ā mārukṣad devamaṇirmahyā ariṣṭatātaye | imaṃ methimabhisaṃviśadhvaṃ tanūpānaṃ trivarūthamojase

हिन्दी अर्थ

कीटो या क्रिमियों के लिये देखो अथव ° (२।३१।१-५; २।३२।१-६) । प्रग्नि मे जला कर उस के धूम' द्वारा इन मच्छरों के विनाश का विधान किया है। इस से प्रतीत होता है किये सब कौट रोगकोटाणु थ7705 ही ओौर-पिङ्क पीत वज ही है। वजसरसों के दाने । अथव ° (४।३७।२) मे “अजशृद्धी"" ओषधि का नाम पठित है जिसके गन्ध द्वारा रल्ञः आदि ये कुङु्धाः कुकूरंमाः कृत्तीदूकानि विश्र॑ति । (ये) जो (कुकुन्धाः, कुकूरभा) कुत्सित गतियो को धारण करने वाले

English

He slays the fiend and him who speaks untruly: both lie entan- gled in the noose of Indra. As if I worshipped deities of falsehood, or thought vain thoughts about the Gods, O Agni!

अध्याय 8

श्लोक 5.21

अ॒स्मिन्निन्द्रो॒ नि द॑धातु नृ॒म्णमि॒मं दे॑वासो अभि॒संवि॑शध्वम्।दी॒र्घा॒यु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदा॒यायु॑ष्मान् ज॒रद॑ष्टि॒र्यथास॑त्

asminnindro ni dadhātu nṛmṇamimaṃ devāso abhisaṃviśadhvam| dīrghāyutvāya śataśāradāyāyuṣmān jaradaṣṭiryathāsat

हिन्दी अर्थ

(दूर्णानि = दूषणीयानि, सायण) दूषणीय (कृत्तीः) चमड़ं को (बिभ्रति) धारण करते ह, रौर (ये) जो (क्लीबाः इव) मानो उन्मत्तो के सदुश करते ह, (तान्) उन्दँ (इतः) इस वन से (नाशयामसि) हम नष्ट २५२ प्रथरवेवेद-माष्य का० ८ सू० ६ का०८।सू०६ अयववेद-भाष्य २५३ । ों दरगन्पीरलोरि हि होती रै, “अंस तक फली होती है) यह् कौट देखने मे अति धु1गः ॥ सूयं के प्रक्राण को नदीं सह॒ सकते, अतः ये दिन के समय छिपे रहते रहै। , १७) ।

English

Why art thou angry with us, Jātavedas? Destruction fall on those who lie against thee! So may I die this day if I have harassed any man’s life, or if I be a demon.

अध्याय 8

श्लोक 5.22

स्व॒स्ति॒दा वि॒शां पति॑र्वृत्र॒हा वि॑मृ॒धो व॒शी।इन्द्रो॑ बध्नातु ते म॒णिं जि॑गी॒वाँ अप॑राजितः सोम॒पा अ॑भयङ्क॒रो वृषा॑ ।स त्वा॑ रक्षतु स॒र्वतो॒ दिवा॒ नक्तं॑ च वि॒श्वतः॑

svastidā viśāṃ patirvṛtrahā vimṛdho vaśī| indro badhnātu te maṇiṃ jigīvā~ aparājitaḥ somapā abhayaṅkaro vṛṣā | sa tvā rakṣatu sarvato divā naktaṃ ca viśvataḥ

हिन्दी अर्थ

श्वापदो के शरीरो से दुगेन्ध आती है । शिकार कोखानेसे इनके मुख ' रक्त से लिपे रहते हैँ । इन श्वापदो को मन्व मँ मकक कहा है । रङ्गं को, (असे) निज कन्ध पर (श्राधाय) रख कर (विश्नति) निज को (बिश्रतः) धारण करते हए वध् के मागे पर (वध्वः पूवं) वधू से पहले (यन्ति) पहुंच जाते है, तथा (प्रहासिनः) उपहास रथात् वधू पर ठठा- मखौल करते हृए (श्रपकेष्ठाः) पाकशाला में श्रा खड़ होते द, भौर (ये ) जो दस प्रथिवी से (नाशयामसि) हम नष्ट कर देते हैं । स्वभाव वाले कीटो तथा कीटाणुओंकातु (नाशय) नाश कर ।

English

Yea, may he lose all his ten sons together who with false tongue hath called me Yātudhāna. May Indra slay him with a mighty weapon, and let the vilest of all creatures perish,

अध्याय 8

श्लोक 6.1

गर्भदोषनिवारणम्।१-२६ मातृनामा।मन्त्रोक्ताः, मातृनामा, १५ ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्, २ पुरस्ताद्बृहती, १० त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ११,१२,१४,१६ पथ्यापङ्क्तिः, १५ त्र्यवसाना सप्तपदा शक्वरी, १७ त्र्यवसाना सप्तपदा जगती।यौ ते॑ मा॒तोन्म॒मार्ज॑ जा॒तायाः॑ पति॒वेद॑नौ ।दु॒र्णामा॒ तत्र॒ मा गृ॑धद॒लिंश॑ उ॒त व॒त्सपः॑

garbhadoṣanivāraṇam| 1-26 mātṛnāmā| mantroktāḥ, mātṛnāmā, 15 brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup, 2 purastādbṛhatī, 10 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 11,12,14,16 pathyāpaṅktiḥ, 15 tryavasānā saptapadā śakvarī, 17 tryavasānā saptapadā jagatī| yau te mātonmamārja jātāyāḥ pativedanau | durṇāmā tatra mā gṛdhadaliṃśa uta vatsapaḥ

हिन्दी अर्थ

गति से छेदन करने वाले वाण से, (उत) तथा (नग्नकात्) भूषे-नङ्घे से, कियाहै। सूक्तमें सर्षप द्वारा शारोरिक रोगों कामो उपचार विहित है का अथं “बलादनि" भी दहै (च्रादिः) । अतः “पिङ्कः का अभिप्राय है २५८ ्रथवेवेद-भाष्य का०८। सू० ६ का० ८ स० ६ अयर्ववेद-माष्य २५९ (तान्) उन कौटाणुओं को (इतः) इस उत्यत्ति स्थान से (नाशयामसि)

English

Destroy the fiend shaped like an owl or owlet, destroy him in. the form of dog or cuckoo. Destroy him shaped as eagle or as vulture: as with a stone, O

अध्याय 8

श्लोक 6.2

प॒ला॒ला॒नु॒प॒ला॒लौ शर्कुं॒ कोकं॑ मलिम्लु॒चं प॒लीज॑कम्।आ॒श्रेषं॑ व॒व्रिवा॑सस॒मृक्ष॑ग्रीवं प्रमी॒लिन॑म्

palālānupalālau śarkuṃ kokaṃ malimlucaṃ palījakam| āśreṣaṃ vavrivāsasamṛkṣagrīvaṃ pramīlinam

हिन्दी अर्थ

ओषधियों भौर श्रोषधियों के गुणों के जानने वाला वेच, इन दोनों के सहचार से, ओौषधधोपचार होना चाहिए । (जीवलाम्) प्राणप्रदा, (नघारिषाम्) न हनन ओरन हसन करने भभिमतफल का अवरोध न करने वाली, या घावों को भरने वानी (उच्य. मतीम्) मधुर ओषधि को (इह) इस चिकित्सा कमं में (महम्) मँ . (हृकेः) भाहूत करता हूं, (अस्म अरिष्टतातये) इस र्ण के लिये, श्रहिसा्थं । करने वाली, सफलता प्रदान करने वाली या अरुस् -धावं+-घेट् (वीमि) धाव को पीजाने वाली । पष्पाम् पुष्प विकासे (दिवादिः ) । श्रथवा

English

I have obscured the heaven and earth, yea, and the daylight and the sun. So may these Gods whom I have set before me oppose with saving charms and banish witchcraft.

अध्याय 8

श्लोक 6.3

मा सं वृ॑तो॒ मोप॑ सृप ऊ॒रू माव॑ सृपोऽन्त॒रा।कृ॒णोम्य॑स्यै भेष॒जं ब॒जं दु॑र्णाम॒चात॑नम्

mā saṃ vṛto mopa sṛpa ūrū māva sṛpo'ntarā| kṛṇomyasyai bheṣajaṃ bajaṃ durṇāmacātanam

हिन्दी अर्थ

(याः च) जिन (वीरुषः) भ्रोषधियों को (अहम् वेद) मँ वैय ! मै देखता हूं, (अज्ञाताः) जो अभी नहीं जानी, (याः जानीमः, च) ओर जिन्हँ हम जानते है, (यासु च) गौर जिन म (संभृतम्) रस.मृत भरा मेरे (वचसः) कथन को । बोधन्तु) जानं (यथा) जिस प्रकार कि (इमम्) जल (हविः) यज्ञिय हवियां (दिवः पुत्रौ) तथा चुलोककेदो पुत्र (ब्रीहिः यवः च) ब्रीहि अर्थात् धान म्रौर जौ (भेषजौ) जो कि भौषधरूपरहै विशिष्ट रोगकेन होते हुए भीक्षुधारोग मे इन का सेवन सदा करना होता

English

Kasyapa formed and fashioned thee, Kasyapa raised and sent thee forth. Indra wore thee, and, wearing thee, won in the wrestling-match with man.

अध्याय 8

श्लोक 6.4

दु॒र्णामा॑ च सु॒नामा॑ चो॒भा सं॒वृत॑मिच्छतः ।अ॒राया॒नप॑ हन्मः सु॒नामा॒ स्त्रैण॑मिच्छताम्

durṇāmā ca sunāmā cobhā saṃvṛtamicchataḥ | arāyānapa hanmaḥ sunāmā straiṇamicchatām

हिन्दी अर्थ

१।१२) । ब्रीहि भौर यव, यौःके पुत्र कहे ह । युलोक या दयुतिमान् सूयं दारा बरसे जल से पैदा होते है । यद्यपि सभी ओषधियां द्यौः के जल से पैदा होती है, परन्तु ब्रीहि ्रौर यव हैनिक मोजनरूप हँ भतः इनका विशेष कथन हु है । ये दोनों विशिष्ट भौषध हैँ मौर मत्युं से बचाते है, ्रत्ना- भाव से मृत्यु हो जाती है, श्रतः ये दोनों प्राणापानखूम दँ यथा “व्रीहियवौ २७२ स्रथवंवेद-भाष्य का० ६ । सू०.७ (भोषधीः) है ग्रोषयियो ! (स्तनयति) मेघ के गरजने प्रौर (अभि. (वः) तुमह (पजेन्यः) मेष (रेतसा) जल द्वारा (अवति) तृप्त करता भोपधियों क। सम्बोधन कविता में क्रिया है ।

English

The Amulet of boundless might the Gods have made a coat of mail. Whoever would destroy thee with Dikshā-rites, sacrifices, spells,

अध्याय 8

श्लोक 6.5

यः कृ॒ष्णः के॒श्यसु॑र स्तम्ब॒ज उ॒त तुण्डि॑कः ।अ॒राया॑नस्या मु॒ष्काभ्यां॒ भंस॒सोप॑ हन्मसि

yaḥ kṛṣṇaḥ keśyasura stambaja uta tuṇḍikaḥ | arāyānasyā muṣkābhyāṃ bhaṃsasopa hanmasi

हिन्दी अर्थ

तस्यामृतस्य बं पुरुषं पाययामसि । इस पुरुष को (पाययामसि) हम पिलाते ह । (सरथो) अब (भेषजम् कृणोमि) इस की चिक्रित्सार्ग करता हं, (यया) जिससे कि (शतहायनः) सौ वर्षो कानिर्देश हआ है । रसामृतकोबल का कारण न कहकर बललूप कहा मोषधियोमेजाकरजोप्रमृतरूपहो गया है । वराहो वेद वीरुधं नकुखो वेद भेषजीम् ।

English

Meet him and smite him, Indra! with thy hundred-knotted thunderbolt. Verily let this Amulet, circular, potent, conquering, Happy and fortunate defence, preserve thy children and thy wealth.

अध्याय 8

श्लोक 6.6

अ॒नु॒जि॒घ्रं प्र॑मृ॒शन्तं॑ क्र॒व्याद॑मु॒त रे॑रि॒हम्।अ॒रायां॑छ्वकि॒ष्किणो॑ ब॒जः पि॒ङ्गो अ॑नीनशत्

anujighraṃ pramṛśantaṃ kravyādamuta reriham| arāyāṃchvakiṣkiṇo bajaḥ piṅgo anīnaśat

हिन्दी अर्थ

(वराहः) सूप्रर (वीरुषम्) ओषधि को (वद) जानता है, (नकुलः) हिसा कर देते हैँ; गन्ध-+अर्वाः (अवं हिसायाम् भ्वादिः) । वराह आदि प्राणी निज रोग कौ भषधि स्वयं जानते हैँ । ये जिन ओषधियों को जानते है, उन्हे जान कर चिकित्सक रोगी के रोगानुसार उन का संग्रह् करे । ये विषली श्रोषधियों को जानते है । विषप्रयोग द्वारा भी नानाविध रोगं मृगा या वि दुरोषंधीस्ता भस्मा अव॑से हुवे ॥२४॥ ओषधियों को (सुपणः) गरुड तथा (याः) जिन (दिव्याः) दिव्य ओषधियों को (रधटः) लधुकायरूप अन्तरिक्ष में उडने वाली चिडियां-तोते आदि ( विदुः) जानते हँ, (वयांसि) महाकायरूप पक्षी या कौए, (हंसाः) ओर हंस (याः) जिन ओषधियों को (च) तथा (सवं पतत्रिणः) श्रन्य सब पक्षी (याः) जिन्दे (विदुः) जानतेर्हैँ (मृगाः) मृग (याः) जिन (ओषधीः)

English

Brave Indra, set before us light, peace and security from below, Peace and security from above, peace and security from behind.

अध्याय 8

श्लोक 6.7

यस्त्वा॒ स्वप्ने॑ नि॒पद्य॑ते॒ भ्राता॑ भू॒त्वा पि॒तेव॑ च ।ब॒जस्तान्त्स॑हतामि॒तः क्ली॒बरू॑पांस्तिरी॒टिनः॑

yastvā svapne nipadyate bhrātā bhūtvā piteva ca | bajastāntsahatāmitaḥ klībarūpāṃstirīṭinaḥ

हिन्दी अर्थ

अहन्तव्या गौए, (यावतीनाम्) जितनियों को (अजावयः) बकरियां ओौर (श्रामृताः) लाई हई, (तुभ्यम्) है रोगिन् ! तेरे लिये (शमं) सुख (यच्छन्तु) देवे । वि २७४ अयरवेवेद-भाष्य का० ८ । सूक्त ७, यावतीषु मनुष्या मेषजं भिषनों विदुः । ॥ (यावतीषु) जितनी वीरुधो मे (मनुष्याः भिषजः) चिकित्सकं मनुष्य (भेषजम्) ओौषध (विदुः) जानते है; (विश्वभेषजीः) सब रोगों हवे (मन्त्र २३, २४) ओर श्राभरामि का समान अभिप्रायः है ।

English

My coat of mail is Heaven and Earth, my coat of mail is Day and Sun: A coat of mail may Indra and Agni and Dhātar grant to me. Not all the Gods may pierce, all leagued together, the vast strong shield which Indra gives,

अध्याय 8

श्लोक 6.8

यस्त्वा॑ स्व॒पन्तीं॒ त्सर॑ति॒ यस्त्वा॒ दिप्स॑ति॒ जाग्र॑तीम्।छा॒यामि॑व॒ प्र तान्त्सूर्यः॑ परि॒क्राम॑न्ननीनशत्

yastvā svapantīṃ tsarati yastvā dipsati jāgratīm| chāyāmiva pra tāntsūryaḥ parikrāmannanīnaśat

हिन्दी अर्थ

(पुष्पवतीः) फूलों वाली, (प्रसूमतीः) नवीन कोपलों वाली, (फलिनी) फलो वाली, (उत) तथा (अफलाः) फलों से रहित ओषधियां , (संमातरः) मिल कर, माताश्रों के (इव) सदृश, (अस्मे) इस कं लिये दुग के सदश रसो का दोहन करे, प्रदान करं । अरिष्टतातये --अथवा “श्रिष्टकरणायः' उद्धत कियादहै, तेरा उद्धार क्रियाहै। १. पञ्चविध ज्ञानवाण, पञ्चविध कमवाणों मं परिणत होकर, १० वाण हौ जति) (१) पुतिरज्जुः= धड़ाके का शब्द करती हई, एत्रुदल में दुगन्ध फलाने

English

and Agni. May that great shield on all sides guard my body, that to full old my life may be extended.

अध्याय 8

श्लोक 6.9

यः कृ॒णोति॑ मृ॒तव॑त्सा॒मव॑तोकामि॒मां स्त्रिय॑म्।तमो॑षधे॒ त्वं ना॑शया॒स्याः क॒मल॑मञ्जि॒वम्

yaḥ kṛṇoti mṛtavatsāmavatokāmimāṃ striyam| tamoṣadhe tvaṃ nāśayāsyāḥ kamalamañjivam

हिन्दी अर्थ

(२) बृहत्-जाल द्वारा शत्रुदल को बांधना (४-७) । (४) नागरिकशासक “भव” ओौर सेनाशासक “शवे” (११, १७) । (७) युद्ध मे पकड़ गये शतूसैनिकों का सुगमता से हनन (१४, १५) । (८) मृत्यु के फंदे, तथा कूट-प्रयोग (१६) ) (६) बृहस्पतिः = राष्ट की बृहती सेना का-अधिपति (१६)

English

Let the Gods’ Charm be bound on me to keep me safe from every ill. Come ye and enter all within this pillar, the safe-guard of the body, thrice-defended. In this let Indra lay a store of valour: approach ye Gods, and enter it together,

अध्याय 8

श्लोक 6.10

ये शालाः॑ परि॒नृत्य॑न्ति सा॒यं ग॑र्दभना॒दिनः॑ ।कु॒सूला॒ ये च॑ कुक्षि॒लाः क॑कु॒भाः क॒रुमाः॒ स्रिमाः॑ ।तानो॑षधे॒ त्वं ग॒न्धेन॑ विषू॒चीना॒न् वि ना॑शय

ye śālāḥ parinṛtyanti sāyaṃ gardabhanādinaḥ | kusūlā ye ca kukṣilāḥ kakubhāḥ karumāḥ srimāḥ | tānoṣadhe tvaṃ gandhena viṣūcīnān vi nāśaya

हिन्दी अर्थ

“बली'" । नागरिक रक्षको को बलवान् होना ही चाहिए) ये शारीरिक “किमीदिने” काः अथं निसक्त मे “पिशुनाय” किया है। पिणुन मनुष्य होते हँ रोगकीयाण नहीं । इस से भी यह प्रतीत होता है कि मन््र(२९१) में प्रजादुःखदायक “मनुष्यो” का ही वर्णन है जिन से गभिणी की रक्षा करनी है (निरुक्त ६।३।१२; पद ४४) 1 'पवीनसात् = पवीनशात् । शकार को सकार “वणं विकार" द्वारा । इसे “वणेव्यापत्ति” भी कहते हैँ । पविः वच पादात्) पांच पैरों वाले से, (अनड गरेः) श्रङगुलिरहित से, (वृन्तात्) लता से (अभिप्रसपंतः) ऊपर-नीचे सपंण करने वाले से (वरीवृतात् ) वृत्ता कार वाले अर्थात् गोलावृत्ति वाले से (परि पाहि) रक्षाकर।'

English

Indra, crush the demon. Let not the fiend of witchcraft-workers reach us: may Dawn. drive off the couples of

अध्याय 8

श्लोक 6.11

ये कु॒कुन्धाः॑ कु॒कूर॑भाः॒ कृत्ती॑र्दू॒र्शानि॒ बिभ्र॑ति ।क्ली॒बा इ॑व प्र॒नृत्य॑न्तो॒ वने॒ ये कु॒र्वते॒ घोषं॒ तानि॒तो ना॑शयामसि

ye kukundhāḥ kukūrabhāḥ kṛttīrdūrśāni bibhrati | klībā iva pranṛtyanto vane ye kurvate ghoṣaṃ tānito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

गर्भान खादन्ति केशवास्तानितो नाशयामसि ॥२३॥ मांस को खाते रै, तथा (केणवाः) जल, वायु तथा शरीर मेँ गति करने उसे सुखा देना । ये काम रोगजनक कीटाणुग्रों शल 5 केर्है।ये रोग जनक कीटाणु जल आदि मेँ पैदा होते तथा गति करते रहते रहँ । केशव।: = करते है, (इव ) जसे कि (स्नुषा) पुत्रवधू (श्वशुरात्) षएषशुरसे(भधि) परे-परे विचरती है, (ब्रजः च पिङ्धः च वज भौर पिङ्क (तेषाम्) उनके (हूदये ऽधि) हृदय मे (नि विध्यताम्) नितरां वेघन करे । सूयं कौ रश्मियों मे रोगकीटाणु मर जाते हैँ अतःवे निज जीवनाथं सूरं रदिमयों को वजित कर सपण करते हँ। (श्रथवं० २।३२।१) । वजः, पिङ्कः = भूरे तथा श्वेत सषप सरसों के बीज । मन्त्र मे गोगकीटाणुओं कावर्णनहै। तथाचोरं भ्रादिकाभी जोकि सूर्यं को परिवजित करके रात्रीकालं में चौयं भादि कमं करते हैँ । इस अभिप्राय मे“ वजः वाजः =

English

Kimidins. Earth keep us safe from earthly woe and trouble! From grief that comes from heaven Mid-air

अध्याय 8

श्लोक 6.12

ये सूर्यं॒ न तिति॑क्षन्त आ॒तप॑न्तम॒मुं दि॒वः ।अ॒राया॑न् बस्तवा॒सिनो॑ दु॒र्गन्धीं॒ल्लोहि॑तास्या॒न् मक॑कान् नाशयामसि

ye sūryaṃ na titikṣanta ātapantamamuṃ divaḥ | arāyān bastavāsino durgandhīṃllohitāsyān makakān nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

“पिज्क'' के साहचयं से “वज” का अरभिप्रायहै रश्षकवगे के साथ गति करने वाले अन्य बलशाली सहायक । वज ब्रज गतौ (स्वादिः) । (पिङ्ग) है पिङ्खं सषेप 1 (जायमानम्) पेदा होते हुए शिशु को (रक्ष) २६० श्रथवेवेद-भाष्य का०.८। सू०६ करे, (किमीदिनः) पिशुन मन्त्र २१ शक्तियों को (इतः) इस गर्भिणी से (बाधस्व) है पिद्क। तू पीडति कर। मनुष्य समाज मे कभी-कभी यह घटना हो जाती है कि जौ पहले वह पुमान् घोषित की जाती है। इनमें लिग परिवतेन हौ जाता है । सायण ने निम्नलिखित अर्थंभी दिया है, “जायमानं पूमासं, जायमानां

English

preserve us! Indra destroy the demon, male and female, joying and triumph- ing in arts of magic!

अध्याय 8

श्लोक 6.13

य आ॒त्मान॑मतिमा॒त्रमंस॑ आ॒धाय॒ बिभ्र॑ति ।स्त्री॒णां श्रो॑णिप्रतो॒दिन॒ इन्द्र॒ रक्षां॑सि नाशय

ya ātmānamatimātramaṃsa ādhāya bibhrati | strīṇāṃ śroṇipratodina indra rakṣāṃsi nāśaya

हिन्दी अर्थ

“पिशुन” होने पर मन्त्र का भाव निम्नलिखित होगा। हैपिङ्ग! तू जायमान शिशु की रक्ता कर ताकि कोई माता उत्पत्च होते हृए शिशु कौ उसे निःशक्त अबलारूप न कर दे, श्र्थात् बली निबेल को दबा न सके। होना, (आत्) तदनन्तर (रोदम्) रोना, (अघम्) पाप जिस कारण कृक्ष के पृष्पों से (खजं कृत्वा इव ) रचौ मालारूप' कर के, (तत्) उसे तथा इन की सत्ता का कारण पाप ओर इस पाप-पट का आवयन अर्थात्

English

Let the fools’ gods with bent necks fall and perish, and see no. more the Sun when he arises. Look, each one, hither, look around. Indra and Soma, watch ye well.

अध्याय 8

श्लोक 6.14

ये पूर्वे॑ ब॒ध्वो॒३यन्ति॒ हस्ते॒ शृङ्गा॑णि॒ बिभ्र॑तः ।आ॒पा॒के॒स्थाः प्र॑हा॒सिन॑ स्त॒म्बे ये कु॒र्वते॒ ज्योति॒स्तानि॒तो ना॑शयामसि

ye pūrve badhvo3yanti haste śṛṅgāṇi bibhrataḥ | āpākesthāḥ prahāsina stambe ye kurvate jyotistānito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

१1० ८ ।सू०६ अथवेवेद-भाष्य २६१ भृनते रहना, मानो यह् मालारूप है । इन सब को परस्पर सम्बन्धी जान कर सब का उच्छेद साथ-साथ करना चाहिए, एक-एक का पृथक् पथर्क (१) दुराचारियों के पापमय कमं 1 (२) तथा गृहजोवन मे अतिभोग ओर भमर्यादित भोग, पति प्रर पनीत । यह् भी पापमयदहै। सायणाचाय ने श्वेत-ग्रौर-पीत, तथा श्वेत-ओर-गौर सषपों को वज-ओर पिङ्घ कहा है । “वज'' नामक सषेप को “दुर्णामा, कीटों तथा कीटाणुओं का हुननकारी कहा है,ओौर पत्ति-या-गौर सर्षप को "सुनामा" कह है । दोनों सषेप दो जाति के सरसों-बीज है । यथा “सरसोंके पौधे का बौज कुछ

English

Cast forth your weapon at the fiends: against the sorcerers hurl your bolt. A charm accompanying investiture with an amulet Upon the strong is bound the strong, this magic cord, this Amu- let,

अध्याय 8

श्लोक 6.15

येषां॑ प॒श्चात् प्रप॑दानि पु॒रः पार्ष्णीः॑ पु॒रो मुखा॑ ।ख॒ल॒जाः श॑कधूम॒जा उरु॑ण्डा॒ ये च॑ मट्म॒टाः कु॒म्भमु॑ष्का अया॒शवः॑ ।तान॒स्या ब्र॑ह्मणस्पते प्रतीबो॒धेन॑ नाशय

yeṣāṃ paścāt prapadāni puraḥ pārṣṇīḥ puro mukhā | khalajāḥ śakadhūmajā uruṇḍā ye ca maṭmaṭāḥ kumbhamuṣkā ayāśavaḥ | tānasyā brahmaṇaspate pratībodhena nāśaya

हिन्दी अर्थ

ललाई लिये हए पीन्ञे रङ्ग के होते हैँ । एक जाति के सरसां के बीज सफद होते है । लाल भौर सफेद सरसों समान ही गृण वाली होती ह । किन्तुतो भी सफेद सरसों, लाल की श्रपेक्षा उत्तम होती है। इन दोनो के गुणाव- गृण नाना वर्णित हए है । परन्तु यहां वे ही लिखे जाते हँ जिन का सम्बन्ध मुक्त ६ के विषय के साथ सम्बद्ध है। “यथा” ये कृमिनाशक तथा गृह-

English

Potent, foe-slayer, served by valiant heroes, happy and fortu- nate defence. This Charm, foe-slayer, served by many heroes, strong, power- ful, victorious, and mighty,

अध्याय 8

श्लोक 6.16

प॒र्य॒स्ता॒क्षा अप्र॑चङ्कशा अस्त्रै॒णाः स॑न्तु॒ पण्ड॑गाः ।अव॑ भेषज पादय॒ य इ॒मां सं॒विवृ॑त्स॒त्यप॑तिः स्वप॒तिं स्त्रिय॑म्

paryastākṣā apracaṅkaśā astraiṇāḥ santu paṇḍagāḥ | ava bheṣaja pādaya ya imāṃ saṃvivṛtsatyapatiḥ svapatiṃ striyam

हिन्दी अर्थ

करते, तथा विष नाश करते । सरसोका रसग्रोर पाक रक्षस बाघा, कृमि,श्रौर गृह की बाधा को दुर करताहै। “सरसों को पीस कर उसका शाफा वना कर, मासिकघमं के स्नान के पण्चात् तीन दिनि तक यौनिमें रखने से गभ॑धारण होता है" (वनौषधि चन्द्रोदय, चन््रराज भण्डारी, २- पाप का फल, यक्ष्म (मन्त्र ३, २८) । ३-- पुरुषजी वनी भोषधियां (मन्व ४) । ४--भ्रोषधियों की भस्मं (मन्त्र ८) ९--हूदयकल्याणकारी ओौषघ (मन्प्र १७) 1

English

goes bravely forth to meet and ruin witchcraft. With this same Amulet wise Indra routed the Asuras, with this he slaughtered Vritra, With this he won this pair, both Earth and Heaven, and made the sky’s four regions his

अध्याय 8

श्लोक 6.17

उ॒द्ध॒र्षिणं॒ मुनि॑केशं ज॒म्भय॑न्तं मरीमृ॒शम्।उपेष॑न्तमुदु॒म्बलं॑ तु॒ण्डेल॑मु॒त शालु॑डम्।प॒दा प्र वि॑ध्य॒ पार्ष्ण्या॑ स्था॒लीं गौरि॑व स्पन्द॒ना

uddharṣiṇaṃ munikeśaṃ jambhayantaṃ marīmṛśam| upeṣantamudumbalaṃ tuṇḍelamuta śāluḍam| padā pra vidhya pārṣṇyā sthālīṃ gauriva spandanā

हिन्दी अर्थ

(याः) जो (बश्रवः) भूरे रङ्खकीया भरण-पोषण भरने वाती, (याः । च) श्रौर जो (शुक्राः) सफेद या वीर्यवर्धिका, (रोहिणीः) लाल या घाव को न शुक्ल न काली (कृष्णाः) काली (जोषधीः) श्रोषधियां है (सर्वाः) उन पैदा हृद भओषषियां (यासाम्) जिन का क्रि (पिता) उत्पादक (यौः) चुलोक है, (माता) माता (पृथिवी) पृथिवी है, मौर (मूलम्) मूल (समुद्रः बश्रुव) समीपवर्ती प्रदेशों मे उत्पन्न हुई है ।

English

possession. May this encircling magic cord, this Amulet of Srāktya wood,

अध्याय 8

श्लोक 6.18

यस्ते॒ गर्भं॑ प्रतिमृ॒शाज्जा॒तं वा॑ मा॒रया॑ति ते ।पि॒ङ्गस्तमु॒ग्रध॑न्वा कृ॒णोतु॑ हृदया॒विध॑म्

yaste garbhaṃ pratimṛśājjātaṃ vā mārayāti te | piṅgastamugradhanvā kṛṇotu hṛdayāvidham

हिन्दी अर्थ

अंशमतीं; फाण्डिनीर्या विश्षाखा हवयामि ते वीरुधो वेवदेवीरप्राः वाली, (अंणुमत्तीः) छोटी-छोटी णाखांओं वालो, (काण्डिनीः) अनेक गांठों या बड़ तनो वाली (याः विशालाः) ओर जो शाखा विरहित, (वैश्वदेवीः) जीवनीः। पुरुष को जीवन देने वाली (उग्राः) बलशाली (वीरुधः) विरोहण करने वली(ओषधोः ग्रोषधियां है, उन्हे(ते प्रवदामि) म तेरे लिये कहता हः उनका कथन करत। हूं, इसलिये (ह्वयामि) तुभं श्रपने समीप बुलाता हूं ।

English

Mighty, subduing enemies, keep us secure on every side. This Agni hath declared, Soma declared it, Brihaspati, and Savitar, and Indra.

अध्याय 8

श्लोक 6.19

ये अ॒म्नो जा॒तान् मा॒रय॑न्ति॒ सूति॑का अनु॒शेर॑ते ।स्त्रीभा॑गान् पि॒ङ्गो ग॑न्ध॒र्वान् वातो॑ अ॒भ्रमि॑वाजतु

ye amno jātān mārayanti sūtikā anuśerate | strībhāgān piṅgo gandharvān vāto abhramivājatu

हिन्दी अर्थ

श्नोषयियां गुणो ओर आकृतियों मे नानाविध है, मौर इन के उत्पादक तत्तव भी नानाविध ह, परन्तु उपादान कारण की दृष्टि से वे एकविधर्हू एकरूप । इन का उपादान कारण एक है, प्रकृति; श्रौर उत्पादक एक दहै, परमेरवर । “शुद्ध'' क। अभिप्राय है उपादान कारण या मूल कारण (छान्दो- का०८। सु० ७ ग्रथवंवेद-भाष्य २६५ (सहमानाः) रोगो का पराभव करने वाली है श्रोषधिधो ! (प्त) जो (ओषधीः) है ओषधियो ! तुम (मुञ्चत) मुक्त करो, (यथौ) अव (भेषजम् कृणोमि) ्रौषधोपचार ओँ करता हं यक्ष्म निराकरणाथ ।

English

So may these Gods whom I have set before me oppose with saving charms and banish witchcraft.

अध्याय 8

श्लोक 6.20

परि॑सृष्टं धरयतु॒ यद्धि॒तं माव॑ पादि॒ तत्।गर्भं॑ त उ॒ग्रौ र॑क्षतां भेष॒जौ नी॑विभा॒र्यौऽ

parisṛṣṭaṃ dharayatu yaddhitaṃ māva pādi tat| garbhaṃ ta ugrau rakṣatāṃ bheṣajau nīvibhāryau'

हिन्दी अर्थ

त्यते सूखदुःखविवजिताः"' (मनु०) मनु के इस कथनानुसार ओषधियौं को चेतन जान कर “हुवे” पद का प्रयोग हभ है । १, भ्र्थदृष्टघा “वचसा, उ" एेसा पदच्छेद करिया है । पदपाठ “वचसः'" है । मेरे (वचसो वचसा-+- उ) कथनानुसार (इह) यहां अर्थात् मेरे पास (ग्रा यन्तु) आ जाय, (यथा) जिस से कि (इमम्, पुरुषम्) इस पुरुष को कर दें । मेदिनी मेदस्वतीः । ॑ “प्रचेतसः” दारा ओषधिं भौ अभिप्रेत हो सकती ह, भोषधियोँ को

English

Whoever for his armour takes an amulet of the Srāktya tree, Like the Sun risen up to heaven, quells witchcraft with superior might.

अध्याय 8

श्लोक 6.21

प॒वी॒न॒सात् त॑ङ्ग॒ल्वा॒३च्छाय॑कादु॒त नग्न॑कात्।प्र॒जायै॒ पत्ये॑ त्वा पि॒ङ्गः परि॑ पातु किमी॒दिनः॑

pavīnasāt taṅgalvā3cchāyakāduta nagnakāt| prajāyai patye tvā piṅgaḥ pari pātu kimīdinaḥ

हिन्दी अर्थ

को निदेश देता प्रतीत होता है, कि यक्ष्मरोग की सब भोषधियां, समय पर, पुनः पुनः नवीन पेदा होने वाली, अर्थात् प्रतिवषं नई पदा होने वाली, (ध्रुवाः) स्थिर परिणाम पैदा करने वाली, (सहस्रनाम्नीः विविघ नामों वाली (भेषजीः) म्रोषधियां हैँ वे, (आभृताः सन्तु) आहूताः सन्तु, लाई जाठरागिि को प्रदीप्त करने वाली ओषधियां । (२) अग्नि दारा भस्ममें. का०द८। सू० ७ प्रथवेवेद-माष्य २६७ व्यषन्तु = पि ऋषी गतौ (तुदादिः), विगत करे । दुरितम् दुर् (बुरे कमा द्वारा) +इतम् (प्राप्त) । रोगोंका मुल कारण है, पाप । यथ.

English

With Amulet of Srāktya wood, as with a thoughtful Rishi’s aid, In every fight have I prevailed; I smite the foes and Rākshasas. All witchcraft of Angirases,”all witchcraft wrought by Asuras,

अध्याय 8

श्लोक 6.22

द्व्याऽस्याच्चतुर॒क्षात् पञ्चपदादनङ्गु॒रेः ।वृन्ता॑द॒भि प्र॒सर्प॑तः॒ परि॑ पाहि वरीवृ॒तात्

dvyā'syāccaturakṣāt pañcapadādanaṅgureḥ | vṛntādabhi prasarpataḥ pari pāhi varīvṛtāt

हिन्दी अर्थ

विरहित करने वाली, (उग्राः) उद्गणं बलशाली, (याः) जो ( विषदूषणीः) विषापहारी, (प्रथो) ओौर (बलासनाशनीः) शलेष अर्थात् कफरोग का दूर करने वाली हँ, (ताः) वे (ओषधीः) ओषधियां (इह) यहां अर्थात् मेरे विवरुणाः = वरुण के पाशो का वणेन; देखो रथवं० (४।१६। १-६) ; श्रथवा वरुण है जल, श्रतः जलीय रोगों से रहिन करने वाली ओषधियां । जलोदर रोग जलीय है । जलप्राय प्रदेशों में होने वालि रोग भी जनीय है। “बलास” है कफ तथा कफोत्पन्न रोग । कफ बलास है, बल को क्षीण करता है, बल +-असु क्षेपणे (दिवादिः) (भपक्रीताः) खरीदी गर्द, (सहीयसीः) बलशालिनी या रोगों का पराभव करने वाली, (अभिष्टुताः) मन्त्रो में स्तुत हुई. (याः) जो (वीरुधः) विरोहण करने वाली लताएं आदि ओषधियां है, वे (अस्मिन् ग्रामे) इस की (त्रायन्ताम्) पालना तथा रक्षा करें

English

All witchcraft self-originate, and all that others have prepared, May these depart to both remotest spaces, past ninety ample water-floods.

अध्याय 8

श्लोक 6.23

यआ॒मं मां॒सम॒दन्ति॒ पौरु॑षेयं च॒ ये क्र॒विः ।गर्भा॒न् खाद॑न्ति केश॒वास्तानि॒तो ना॑शयामसि

yaāmaṃ māṃsamadanti pauruṣeyaṃ ca ye kraviḥ | garbhān khādanti keśavāstānito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

९६० ग्रथववेद-भाष्य । । का०ठ। सु० ७ का० ८1 सू०७। अथवेवेद-भाष्य २९६ । (अभिशस्तिपाः) तथा रोगजन्य दसा से रक्षा करता है। (अमीवाः) करे । अमोवाः=ग्रम रोगे (चुरादिः) । । (प्रासाम्, वीरुधाम्) इन विरोहणशील लता आदि का (मूलम्, मधू-

English

May the Gods bind the Charm on him for armour, Indra, and Vishnu, Savitar Rudra, Agni, Prajāpati, sublimest Parameshlhin, Virāj, Vaisvānara, and all the Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 6.24

ये सूर्या॑त् परि॒सर्प॑न्ति स्नु॒षेव॒ श्वशु॑रा॒दधि॑ ।ब॒जश्च॒ तेषां॑ पि॒ङ्गश्च॒ हृद॒येऽधि॒ नि वि॑ध्यताम्

ye sūryāt parisarpanti snuṣeva śvaśurādadhi | bajaśca teṣāṃ piṅgaśca hṛdaye'dhi ni vidhyatām

हिन्दी अर्थ

मन्त्र मे घृत, अन्न, तथा गोदुग्ध को अमृतभोजन कहा है । इन में (ऋ० €।४६।४) इति पयसः'' (निरुक्त २।२।५) । सभी भोषधियो के सेवन, मधुर परिणामी होता है, अतः इनका वणेन मधुमत्-रूप में हुआ है । । हजारो पत्तो वाली, या सहस्रविधि से पालने वाली, (मा) मुभे (मृत्योः) मृत्थु से, (अंहसः) ओर मृत्यु के कारणभूत पप से (मूजञ्चन्तु) छृडा दं । ( पु पालने) हजारो का पालन करने वाली । मन्त्र द्वारा यह योतित होता है किं ओषध-सेवन द्वारा पापकर्मो मे प्रवृत्ति का भी शमन होता है

English

Thou art the chief of all the plants, even as a bull among the beasts. A tiger of the beasts of prey. Him whom we sought for have we found, him lying near in wait

अध्याय 8

श्लोक 6.25

पिङ्ग॒ रक्ष॒ जाय॑मानं॒ मा पुमां॑सं॒ स्त्रियं॑ क्रन्।आ॒ण्डादो॒ गर्भा॒न्मा द॑भ॒न् बाध॑स्वे॒तः कि॑मी॒दिनः॑

piṅga rakṣa jāyamānaṃ mā pumāṃsaṃ striyaṃ kran| āṇḍādo garbhānmā dabhan bādhasvetaḥ kimīdinaḥ

हिन्दी अर्थ

आयल पौधे को मणि इस लिये कहा है कि बद्धकोष्ठता कन्ज के लिये कांप जाते है रोग; (इव) जैसे (सिहस्य स्तनथोः) ।षह् कौ गजना से वन्य भय से (विजन्ते)कांप जाते ह! (गवाम् पृरूषाणाम् ) गौग्रों भौर पूरुषो का ओर तेज नदियों से पार हो जाते है, वैसे यक्ष्म आदि रोग वीरुधो द्वारा शारीरिक नस-नाडियों से पार हो जति हँ (देखो श्रथवे० ८।५।९ ) । चानः) मुक्त हुई (ओषधयः) है प्नोषथियो (भूमिम्) ५ भूमि को(म्रभिलक्ष्य) लक्षित कर (संतन्वतीः) फेलती हई (हत) तुम श्रामो, (यासाम्) जिनका

English

for us. A tiger verily is he, he is a lion, and a bull, Subduer of his foes is he, the man who wears this Amulet.

अध्याय 8

श्लोक 6.26

अ॒प्र॒जा॒स्त्वं मार्त॑वत्स॒माद् रोद॑म॒घमा॑व॒यम्।वृ॒क्षादि॑व॒ स्रजं॑ कृ॒त्वाप्रि॑ये॒ प्रति॑ मुञ्च॒ तत्

aprajāstvaṃ mārtavatsamād rodamaghamāvayam| vṛkṣādiva srajaṃ kṛtvāpriye prati muñca tat

हिन्दी अर्थ

कि (राजा) अध्यक्ष (वनस्पतिः) वनो का पालक है, रक्षक है । किवनोंकी रक्षा करे, ओर पथिव अग्निस इन्हौ बचाए । 1 है विद्युत् ओर सूयं । इन से पाथिव अग्नि पैदा होती है, अतः पाथिव अनि वेषवानर. है । इस सम्बन्ध में देखो निरुक्त (७।६।२१ से ७। ६।२३) 1 वन- व महावृक्ष । 1 अध्यक्ष की दृष्टिसे कहा है कि “वनानां पतये नमः" (याः) जो (आङ्किरसीः) “शरीर श्रौर गङ्घोमें 4 ङ्गम प्राणरूपी रसकी उत्पादिका" ( मोषीः) मोषधियां (पवंतेषु, समेषु, च) पवतो मौर समतलों मे (रोहन्ति) प्रादुर्भूत होती हैँ (ताः) वे ओषधियां जोकि (पयस्वतीः) रसवाली ह (नः) हमारे (हृदे) हृदयो के लिये (शिवा) कल्याणकारिणी १. जात्येकवचन ॥ भ्रमिप्राय है राष्ट के सब वनों का पति।

English

No mortal beings slay him, no Gāndharvas, no Apsarases; O’er all the regions he is king, the man who wears this Amulet.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।